Tuesday, March 31, 2026
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1993 बम धमाके : दो को मौत की सजा, सलेम को उम्रकैद

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मुंबई : मुंबई की एक अदालत ने 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में आज ताहिर मर्चेंट और फिरोज अब्दुल राशिद खान को मौत की सजा सुनाई तथा प्रत्यर्पित करके भारत लाए गए गैंगस्टर अबू सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई।अदालत ने सलेम के अलावा इस मामले के संबंध में करीमुल्लाह खान को भी उम्रकैद की सजा सुनाई।
विशेष टाडा अदालत ने धमाकों के 24 साल बाद जून में इस मामले में मास्टरमाइंड मुस्तफा दोसा और सलेम समेत छह लोगों को दोषी ठहराया था। देश की वित्तीय राजधानी में हुए धमाकों में 257 लोग मारे गए थे।
बहरहाल, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी अब्दुल कयूम को छोड़ दिया। यह मुकदमे का दूसरा चरण था।
सभी सातों आरोपी कई आरोपों का सामना कर रहे हैं जिनमें आपराधिक षडयंत्र, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना और हत्या के आरोप शामिल हैं।

अदालत ने पहले कहा था कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित किया कि सलेम मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था और उसने अभिनेता संजय दत्त को तीन एके-56 राइफल, गोला बारुद और हथगोले दिए थे। संजय दत्त को बाद में शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था।
अदालत ने पहले कहा था कि दाउद के भाई अनीस इब्राहिम और दोसा का करीबी रहा सलेम दिघी से मुंबई खुद हथियार और गोला बारुद लेकर आया था।
अदालत ने कहा था, ‘‘यह इस साजिश की महत्वपूर्ण बात थी ताकि भारत के निर्दोष नागरिकों को आतंकित करने और उन्हें यातनाएं देने के लिए इन हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकें।’’ अबू सलेम, मुस्तफा दोसा, करीमुल्लाह खान, फिरोज अब्दुल राशिद खान, रियाज सिद्दिकी, ताहिर मर्चेंट और अब्दुल कयूम के मुकदमे मुख्य मामले से अलग चलाए गए।

 

गुरु महिमा

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कबीर

गुरु सो ज्ञान जु लीजिये, सीस दीजये दान।
बहुतक भोंदू बहि गये, सखि जीव अभिमान॥१॥

व्याख्या: अपने सिर की भेंट देकर गुरु से ज्ञान प्राप्त करो | परन्तु यह सीख न मानकर और तन, धनादि का अभिमान धारण कर कितने ही मूर्ख संसार से बह गये, गुरुपद – पोत में न लगे।

गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय।
कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय॥२॥

व्याख्या: व्यवहार में भी साधु को गुरु की आज्ञानुसार ही आना – जाना चाहिए | सद् गुरु कहते हैं कि संत वही है जो जन्म – मरण से पार होने के लिए साधना करता है |

गुरु पारस को अन्तरो, जानत हैं सब सन्त।
वह लोहा कंचन करे, ये करि लये महन्त॥३॥

व्याख्या: गुरु में और पारस – पत्थर में अन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना ही बनाता है, परन्तु गुरु शिष्य को अपने समान महान बना लेता है।

कुमति कीच चेला भरा, गुरु ज्ञान जल होय।
जनम – जनम का मोरचा, पल में डारे धोया॥४॥

व्याख्या: कुबुद्धि रूपी कीचड़ से शिष्य भरा है, उसे धोने के लिए गुरु का ज्ञान जल है। जन्म – जन्मान्तरो की बुराई गुरुदेव क्षण ही में नष्ट कर देते हैं।

गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि – गढ़ि काढ़ै खोट।
अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट॥५॥

व्याख्या: गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है, भीतर से हाथ का सहार देकर, बाहर से चोट मार – मारकर और गढ़ – गढ़ कर शिष्य की बुराई को निकलते हैं।

गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान।
तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान॥६॥

व्याख्या: गुरु के समान कोई दाता नहीं, और शिष्य के सदृश याचक नहीं। त्रिलोक की सम्पत्ति से भी बढकर ज्ञान – दान गुरु ने दे दिया।

जो गुरु बसै बनारसी, शीष समुन्दर तीर।
एक पलक बिखरे नहीं, जो गुण होय शारीर॥७॥

व्याख्या: यदि गुरु वाराणसी में निवास करे और शिष्य समुद्र के निकट हो, परन्तु शिष्ये के शारीर में गुरु का गुण होगा, जो गुरु लो एक क्षड भी नहीं भूलेगा।

गुरु को सिर राखिये, चलिये आज्ञा माहिं।
कहैं कबीर ता दास को, तीन लोकों भय नाहिं॥८॥

व्याख्या: गुरु को अपना सिर मुकुट मानकर, उसकी आज्ञा मैं चलो | कबीर साहिब कहते हैं, ऐसे शिष्य – सेवक को तनों लोकों से भय नहीं है |

गुरु सो प्रीतिनिवाहिये, जेहि तत निबहै संत।
प्रेम बिना ढिग दूर है, प्रेम निकट गुरु कंत॥९॥

व्याख्या: जैसे बने वैसे गुरु – सन्तो को प्रेम का निर्वाह करो। निकट होते हुआ भी प्रेम बिना वो दूर हैं, और यदि प्रेम है, तो गुरु – स्वामी पास ही हैं।

गुरु मूरति गति चन्द्रमा, सेवक नैन चकोर।
आठ पहर निरखत रहे, गुरु मूरति की ओर॥१०॥

व्याख्या: गुरु की मूरति चन्द्रमा के समान है और सेवक के नेत्र चकोर के तुल्य हैं। अतः आठो पहर गुरु – मूरति की ओर ही देखते रहो।

गुरु मूरति आगे खड़ी, दुतिया भेद कुछ नाहिं।
उन्हीं कूं परनाम करि, सकल तिमिर मिटि जाहिं॥११॥

व्याख्या: गुरु की मूर्ति आगे खड़ी है, उसमें दूसरा भेद कुछ मत मानो। उन्हीं की सेवा बंदगी करो, फिर सब अंधकार मिट जायेगा।

ज्ञान समागम प्रेम सुख, दया भक्ति विश्वास।
गुरु सेवा ते पाइए, सद् गुरु चरण निवास॥१२॥

व्याख्या: ज्ञान, सन्त – समागम, सबके प्रति प्रेम, निर्वासनिक सुख, दया, भक्ति सत्य – स्वरुप और सद् गुरु की शरण में निवास – ये सब गुरु की सेवा से निलते हैं।

सब धरती कागज करूँ, लिखनी सब बनराय।
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय॥१३॥

व्याख्या: सब पृथ्वी को कागज, सब जंगल को कलम, सातों समुद्रों को स्याही बनाकर लिखने पर भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते।

पंडित यदि पढि गुनि मुये, गुरु बिना मिलै न ज्ञान।
ज्ञान बिना नहिं मुक्ति है, सत्त शब्द परमान॥१४॥

व्याख्या: ‍बड़े – बड़े विद्व।न शास्त्रों को पढ – गुनकर ज्ञानी होने का दम भरते हैं, परन्तु गुरु के बिना उन्हें ज्ञान नही मिलता। ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं मिलती।

कहै कबीर तजि भरत को, नन्हा है कर पीव।
तजि अहं गुरु चरण गहु, जमसों बाचै जीव॥१५॥

व्याख्या: कबीर साहेब कहते हैं कि भ्रम को छोडो, छोटा बच्चा बनकर गुरु – वचनरूपी दूध को पियो। इस प्रकार अहंकार त्याग कर गुरु के चरणों की शरण ग्रहण करो, तभी जीव से बचेगा।

सोई सोई नाच नचाइये, जेहि निबहे गुरु प्रेम।
कहै कबीर गुरु प्रेम बिन, कितहुं कुशल नहिं क्षेम॥१६॥

व्याख्या: अपने मन – इन्द्रियों को उसी चाल में चलाओ, जिससे गुरु के प्रति प्रेम बढता जये। कबीर साहिब कहते हैं कि गुरु के प्रेम बिन, कहीं कुशलक्षेम नहीं है।

तबही गुरु प्रिय बैन कहि, शीष बढ़ी चित प्रीत।
ते कहिये गुरु सनमुखां, कबहूँ न दीजै पीठ॥१७॥

व्याख्या: शिष्य के मन में बढ़ी हुई प्रीति देखकर ही गुरु मोक्षोपदेश करते हैं। अतः गुरु के समुख रहो, कभी विमुख मत बनो।

अबुध सुबुध सुत मातु पितु, सबहिं करै प्रतिपाल।
अपनी ओर निबाहिये, सिख सुत गहि निज चाल॥१८॥

व्याख्या: मात – पिता निर्बुधि – बुद्धिमान सभी पुत्रों का प्रतिपाल करते हैं। पुत्र कि भांति ही शिष्य को गुरुदेव अपनी मर्यादा की चाल से मिभाते हैं।

करै दूरी अज्ञानता, अंजन ज्ञान सुदये।
बलिहारी वे गुरु की हँस उबारि जु लेय॥१९॥

व्याख्या: ज्ञान का अंजन लगाकर शिष्य के अज्ञान दोष को दूर कर देते हैं। उन गुरुजनों की प्रशंसा है, जो जीवो को भव से बचा लेते हैं।

साबुन बिचारा क्या करे, गाँठे वाखे मोय।
जल सो अरक्षा परस नहिं, क्यों कर ऊजल होय॥२०॥

व्याख्या: साबुन बेचारा क्या करे,जब उसे गांठ में बांध रखा है। जल से स्पर्श करता ही नहीं फिर कपडा कैसे उज्जवल हो। भाव – ज्ञान की वाणी तो कंठ कर ली, परन्तु विचार नहीं करता, तो मन कैसे शुद्ध हो।

राजा की चोरी करे, रहै रंक की ओट।
कहै कबीर क्यों उबरै, काल कठिन की चोट॥२१॥

व्याख्या: कोई राजा के घर से चोरी करके दरिद्र की शरण लेकर बचना चाहे तो कैसे बचेगा| इसी प्रकार सद् गुरु से मुख छिपाकर, और कल्पित देवी – देवतओं की शरण लेकर कल्पना की कठिन चोट से जीव कैसे बचेगा|

सतगुरु सम कोई नहीं, सात दीप नौ खण्ड।
तीन लोक न पाइये, अरु इकइस ब्रह्मणड॥२२॥

व्याख्या: सात द्वीप, नौ खण्ड, तीन लोक, इक्कीस ब्रह्मणडो में सद् गुरु के समान हितकारी आप किसी को नहीं पायेंगे |

आरबीआई ने जारी किए 200 और 50 रुपये के नए नोट

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रिजर्व बैंक ने देश में पहली बार 200 के नोट जारी किए हैं। इसके साथ ही 50 रुपये के भी नए नोट जारी किए गए हैं। खास बात यह है कि इन नोटों के लिए दिल्ली में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ऑफिस के सामने लंबी लाइनें लग गई हैं। नए नोट लेने के लिए लोगों में जबर्दस्त उत्साह भी है। रिजर्व बैंक का कहना है कि बड़े नोटों के छुट्टे करवाने में परेशानी होती है इसलिए 200 रुपये का नोट काफी मददगारसाबित होगा। बैंक ने कहा कि 100 और 500 के बीच कोई नोट नहीं था इसलिए लोगों को मुश्किलें उठानी पड़ती थीं।

हालांकि अभी ये नए नोट आपके पास नहीं पहुंचेंगे क्योंकि इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है। इन नोटों का आकार पहले के नोटों से अलग है इस लिहाज से एटीएम की मशीन में नोटों के खांचे को दुरुस्त किया जाएगा। उसके बाद ही ये आम जनमानस तक पहुंच सकेंगे। इस 200 के नोट की कई सारी खासियतें हैं। जैसे दृष्टिबाधित लोगों को नोट पहचानने में आसानी होगी। नोट में अशोक स्तंभ, महात्मा गांधी और H का निशान बाहर की तरफ उभरा हुआ है। नोट के अगले हिस्से में दोनों किनारों पर विशिष्ट निशान भी हैं।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इससे पहले जारी सभी सीरीज के 50 रुपये के पुराने नोट चलते रहेंगे। इसका रंग फ्लोरोसेंट ब्लू है।

पिछले साल 8 नवंबर को सरकार ने नोटबंदी का फैसला कर के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। उस वजह से लोगों को लंबी लाइनों में भी लगना पड़ा था। इसके बाद से अब तक आरबीआई कई नए नोट जारी कर चुका है। इसके साथ ही सरकार ने 1 रुपये के नए नोटों की भी दोबारा छपाई शुरू की है। अभी पिछले सप्ताह ही रिजर्व बैंक ने 50 रुपये के नए नोट जारी करने का ऐलान किया था।

इस 50 रुपये के नोट में महात्मा गांधी (न्यू) सीरीज में आ रहे नए नोट के पिछले हिस्से पर हम्पी रथ की आकृति होगी, जो देश की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेगी। नोट पर आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इससे पहले जारी सभी सीरीज के 50 रुपये के पुराने नोट चलते रहेंगे। इसका रंग फ्लोरोसेंट ब्लू है। इसके इलावा रिजर्व बैंक जल्द ही 20 रुपये के नए नोट जारी करेगा। ये नोट महात्मा गांधी सीरीज 2005 के होंगे। इनकी डिजाइन मौजूदा चलन वाले 20 रुपये के नोटों की तरह ही होगी।

 

सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय के कौस्तुभ जयंती समारोह में दिखे संस्कृति और पर्यावरण के रंग

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सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय ने अपने 75 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर आयोजित विद्यालय के कौस्तुभ जयंती व पुरस्कार वितरण समारोह में रंगारंग कार्यक्रमों में सांस्कृतिक विविधता, सौहार्द तथा पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी नजर आया। कार्यक्रम में प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विभाग की ओर से नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गयी।

प्राथमिक स्तर पर प्रस्तुत की गयी नृत्य नाटिका में प्रकृति के विविध रंगों को बच्चों ने दर्शाया। इस नृत्य नाटिका की पटकथा को सँवारने में विद्यालय की प्राथमिक विभाग की इन्चार्ज रत्ना पाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं माध्यमिक व उच्च माध्यमिक की छात्राओं ने गंगा नदी की कहानी को नृत्य नाटिका में अभिव्यक्त किया जिसमें गंगा के जन्म, इतिहास के साथ सांस्कृतिक व सामाजिक विविधता में उसका योगदान ही नहीं बल्कि प्रदूषण का बढ़ता खतरा और पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी शामिल था।

गंगा नृत्य नाटिका की पटकथा को सँवारने और भावानुवाद करने के साथ ही मंच सज्जा से जुड़ी बारिकियों को बेहतर बनाने का दायित्व विद्यालय की टीचर इंचार्ज इन्द्रपाल कौर ने सम्भाला। कार्यक्रम की रूपरेखा के साथ ही परिधान के चयन ने प्रस्तुति को शानदार बना दिया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय तथा पार्षद स्मिता बक्सी उपस्थित थीं। कार्यक्रम में विद्यालय के अध्यक्ष तोलाराम जालान, उपाध्यक्ष हेमन्त कुमार जालान तथा सचिव नन्दलाल सिंघानिया समेत विद्यालय की शिक्षिकाएँ तथा पूर्व शिक्षिकाएँ भी उपस्थित थीं।

 

विद्यासागर विवि में मनाई गई त्रिलोचन एवं परसाई की जयंती

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मिदनापुर : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से हाल ही में कवि त्रिलोचन शास्त्री और व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयंती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि त्रिलोचन और परसाई ने अपनी लेखनी से भारतीय समाज को नई दिशा दी है। संजय जायसवाल ने हरिशंकर परसाई और त्रिलोचन शास्त्री को प्रगतिशील बताते हुए कहा कि दोनों ने व्यवस्था के विरुद्ध अपनी रचना को प्रतिरोध का माध्यम बना

 

तस्वीरें ऐसी जिनमें रंगों को छुआ नहीं गया, फिर भी तपन साहा की तस्वीरें बोलती हैं

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वो तस्वीर ही क्या जिसमें रंग न हो ! अच्छा कभी आपने कल्पना की है कि बगैर रंगों का इस्तेमाल किए भी तस्वीर बन सकती है और वह रंगों से भी भरी हो। यकीन नहीं होता मगर ये मुमकिन है और इसे मुमकिन किया है कोलाज चित्रकार तपन साहा ने।

हुगली में बंडेल के गान्धीनगर से कोलकाता गए। इस कला की बारीकियों को समझा। समझा कि किस तरह अखबारों, सिनेमा के पोस्टरों और पत्रिकाओं की कतरनों से एक तस्वीर जीवंत हो सकती है। तपन की कला से प्रभावित होकर प्रख्यात चित्रकार रामानन्द बंद्योपाध्याय ने उनका उत्साह बढ़ाया।

तब 90 का दशक था और तपन का कलात्मक सफर टेराकोटा के जेवर बनाने से शुरू हुआ। यह आसान नहीं था, मिट्टी को ढोकर लाना, उसे गूँथना, कलात्मक जेवर तैयार करना और फिर उसे बाजार तक पहुँचाना मगर तपन ने हार नहीं मानी।

मेहनत का फल मिला और तपन की कला मशहूर हो चली। 90 के दशक के अंतिम वर्षों में रंगीन कागज, सड़कों पर पड़े फिल्मों के पोस्टर और इन सारे पोस्टरों से बनने लगी खूबसूरत तस्वीरें, खूबसूरत चेहरे….उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, सत्यजीत राय, लता मंगेशकर, सुचित्रा सेन, रामकिंकर बेज, अमर्त्य सेन, से लेकर मनोरम प्राकृतिक दृश्य।

हर बार तपन ने प्रमाणित किया तस्वीरों में रंग का इस्तेमाल नहीं किया गया मगर इन तस्वीरों में बगैर इस्तेमाल किए ही कला के अनूठे रंग थे। हाल में इन तपन ने अपने सँग्रह की 50 तस्वीरों को लेकर एक तीन दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित की। प्रदर्शनी का उद्घाटन मनसिज मजूमदार ने किया। प्रधान अतिथि के रूप में प्रसिद्ध चित्रकार वसीम कपूर उपस्थित थे।

 

 

 

 

 

भारत के 45वें प्रधान न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा

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नयी दिल्ली : न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने आज भारत के 45वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ग्रहण की। वह उस पीठ का हिस्सा थे जिसने 16 दिसंबर को हुए सामूहिक बलात्कार मामले में चार दोषियों को मौत की सजा की पुष्टि की थी और सिनेमा हॉलों में राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाने का आदेश पारित किया था।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में एक सादे समारोह में न्यायमूर्ति मिश्रा को पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति मिश्रा ने ईश्वर के नाम शपथ अंग्रेजी में ली।

न्यायमूर्ति जे एस खेहर के कल सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति मिश्रा (64) ने यह पद संभाला है।

न्यायमूर्ति मिश्रा दो अक्तूबर 2018 तक इस पद पर अपनी सेवाएं देंगे।

स्थापित परिपाटी के अनुसार न्यायमूर्ति खेहर ने पिछले महीने मिश्रा को देश का आगामी प्रधान न्यायाधीश नामित किया था।

वह पटना उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। अक्तूबर 2011 में वह शीर्ष अदालत में आ गए थे।

वर्ष 1977 में वकालत शुरू करने वाले न्यायमूर्ति मिश्रा ने उड़ीसा उच्च न्यायालय में संवैधानिक, दीवानी, फौजदारी, राजस्व, सेवा और बिक्री कर मामलों में प्रैक्टिस शुरू की।

उन्हें 17 जनवरी, 1996 को उड़ीसा उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति मिली। उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में भी सेवाएं दी। वह 19 दिसंबर 1997 में स्थायी न्यायाधीश बने।

न्यायमूर्ति मिश्रा वर्तमान में उस पीठ की अध्यक्षता कर रहे हैं जो कावेरी तथा कृष्णा नदी जल विवाद, बीसीसीआई सुधार और सहारा मामले समेत कई अन्य मामलों की सुनवाई कर रही है। उनकी ही अध्यक्षता में एक पीठ ने देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाने का आदेश दिया था।

वह उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने 16 दिसंबर 2012 सामूहिक बलात्कार मामले में दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी थी।

न्यायमूर्ति मिश्रा और न्यायमूर्ति पीसी पंत ने मई माह में मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अभिव्यक्ति के अधिकार का यह मतलब नहीं है कि कोई भी किसी की भी मानहानि कर सकता है। इस अपराध में दो वर्ष के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

शपथ ग्रहण समारोह में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्री मौजूद थे।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद भी इस समारोह में शामिल हुए।

 

बलात्कार पीड़िताओं की चिकित्सा जांच में दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जाता : अध्ययन

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नयी दिल्ली : एक अध्ययन में दावा किया गया है कि बलात्कार पीड़िताओं की चिकित्सा जांच स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं की जाती है। अध्ययन में इस प्रकार की चिकित्सा जांच करने के लिये स्वास्थ्य कर्मियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करने की मांग की गयी है।

यह अध्ययन कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की सहायता से गैर सरकारी संगठन ‘पार्टनर्स फॉर लॉ इन डेवलपमेंट’ ने किया है।
इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि कुछ बलात्कार पीड़िताओं को प्राथमिकी दर्ज कराने में पुलिस के हाथों उत्पीड़न और अवरोध का अनुभव भी करना पड़ा।
अध्ययन के मुताबिक प्राथिमिकी की प्रति तुरंत उपलब्ध नहीं करायी जाती है और अक्सर पीड़िताओं को इसकी प्रति हासिल करने के लिये पुलिस का चक्कर लगाना पड़ता है। हालांकि बाद में प्राथिमिकी की एक प्रति पीड़ितों को भेज दी जाती है।
अध्ययन में कहा गया है कि ये स्वास्थ्य जांच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों में अनुरूप नहीं की जाती हैं।
इसमें कहा गया है कि औपचारिक तौर पर बलात्कार पीड़िताओं से स्वास्थ्य जांच की सहमति नहीं ली जाती है और अक्सर ही इसके लिये बाद में उनके हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान ले लिए जाते हैं।
अध्ययन रिपोर्ट में बलात्कार पीड़िता के केवल उन्हीं कपड़ों को फोरेंसिक जांच के लिये भेजने की अनुशंसा की गयी है, जोकि उस अपराध से जुड़े हों।
इसके अलावा बलात्कार पीड़िता अथवा उसके गवाह एवं उसके रिश्तेदारों को सुरक्षा प्रदान करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
मुकदमे के दौरान अदालत में लगे कैमरा के माध्यम सेअभियोजन पक्ष को अदालत में आरोपी की धमकी से बचाया जाता है। रिपोर्ट में दिल्ली में चार त्वरित अदालतों में चल रहे 16 मामले को शामिल किया गया था। अध्ययन में जिन मामलों को शामिल किया गया है, वे परिचितों द्वारा बलात्कार से संबंधित हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत और दुनिया भर में होने वाले बलात्कार के अधिकतर मामले इसी श्रेणी में आते हैं।

 

बकाया भुगतान करें अन्यथा दूसरों के हवाले करें कारोबार: जेटली

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नयी दिल्ली :  केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकों का कर्ज लेकर उसे नहीं लौटा पाने वाली निजी कंपनियों के मालिकों से कहा है कि वह अपना बकाया चुकायें या फिर कारोबार छोड़कर उसका नियंत्रण किसी दूसरे के हवाले कर दें।

भारतीय रिजर्व बैंक ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून के तहत हाल ही में ऐसी 12 बड़ी कर्जदार कंपनियों के खिलाफ दिवाला कारवाई शुरू करने का बैंकों को निर्देश दिया है। इन कंपनियों में दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। यह राशि बैंकों के कुल फंसे कर्ज का एक चौथाई के करीब है।

बैंकों से कर्ज लेकर उसे नहीं लौटा पा रहे कुछ और कर्जदारों के खिलाफ भी कारवाई को अधिसूचित किया जा रहा है।

जेटली ने कहा कि सरकार बैंकों को और पूंजी उपलब्ध कराने के लिये तैयार है लेकिन फंसे कर्ज का समाधान सरकार के लिये बड़ी प्राथमिकता है।

वित्त मंत्री ने यहां इकोनोमिस्ट सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा, ‘‘दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून के जरिये, मैं समझता हूं कि देश में पहली बार फंसे कर्ज के मामले में सक्रिय कारवाई की जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि फंसे कर्ज का समाधान करने में समय लगेगा। ‘‘आप इस मामले में एक झटके में सर्जिकल कारवाई नहीं कर सकते हैं।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने बैंकों को पहले ही 70,000 करोड़ रुपये तक पूंजी उपलब्ध करा दी है और उन्हें और पूंजी देने के लिये भी तैयार है। कुछ बैंक बाजार से भी पूंजी जुटा सकते हैं। ‘‘हम बैंकिंग क्षेत्र में एकीकरण की कारवाई आगे बढ़ाने के लिये भी सक्रियता से काम कर रहे हैं। हमें ज्यादा बैंक नहीं चाहिये, हमें कम लेकिन मजबूत बैंक चाहिये।’’ केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह ही देश के सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों के बीच विलय प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया ताकि इन बैंकों की कार्यक्षमता और उनमें संचालन को बेहतर बनाया जा सके।

ध्यानचन्द के नाम पर होगा सैफई स्पोर्ट्स कॉलेज का नामकरण

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लखनऊ, 30 अगस्त (भाषा ) उत्तर प्रदेश के सैफई स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज का नामकरण ‘हॉकी के जादूगर’ मेजर ध्यानचन्द के नाम पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी घोषणा की है।

मुख्यमंत्री ने कल ध्यानचन्द की जयन्ती ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ‘हॉकी के जादूगर’ को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मेजर ध्यानचन्द ने उत्कृष्ट खेल से पूरी दुनिया में देश को पहचान दिलायी है । उन्होंने एलान किया कि सैफई स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज का नामकरण मेजर ध्यानचन्द के नाम पर किया जाएगा।

योगी ने कहा कि केन्द्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार भी ओलम्पिक खेलों में प्रदेश के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को छह करोड़, रजत पदक विजेता खिलाड़ी को चार करोड़ तथा कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी को दो करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि देगी।

इसी प्रकार, एशियाई एवं राष्ट्रमण्डल खेलों में भी केन्द्र सरकार की पुरस्कार राशि की तर्ज पर ही प्रदेश के पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 14 खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार एवं रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार तथा आठ अन्य खिलाड़ियों को विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उम्दा प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया।

योगी ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उनको उचित अवसर मुहैया कराये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए वर्तमान राज्य सरकार खेल के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का काम कर रही है।