Wednesday, April 1, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 749

जलवायु परिवर्तन की कीमत हमने ऋतुओं के असमान्य परिवर्तन के रूप में चुकायी है : यादवेंद्र

0

कोलकाता : साहित्यिकी ने भारतीय भाषा परिषद में गत 11 नवंबर “पर्यावरण चेतना : सृजन और सरोकार ” विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया। साहित्यकार और पर्यावरणविद यादवेन्द्र ने “पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासतें” विषय पर दृश्य चित्रों‌ के माध्यम से अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की कीमत हमने ऋतुओं के असमान्य परिवर्तन के रूप में चुकायी है। गंगोत्री ग्लेशियर लगातार पीछे की ओर खिसकता जा रहा है। पांच छः सालों के बाद केदारनाथ मंदिर में चढ़ाया जानेवाला ब्रह्मकमल खिलना बंद हो जाएगा। जलवायु परिवर्तन के लक्षणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा  कि अगर हमने अपने चाल और व्यवहार में परिवर्तन नहीं किया तो चीजें ऐसी बदल जाएंगी कि दोबारा उस ओर लौटना संभव नहीं हो पाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय धरोहरों पर  निरंतर बढ़ते जा रहे खतरों से भी श्रोताओं को अवगत करवाया।

पर्यावरणविद सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण और स्थानीय भाषा दोनों के साथ असमान व्यवहार होता है। पर्यावरण का अनियमित शोषण हो रहा है। नदियों का लगातार दोहन हुआ है। जागरूकता के अभाव में पानी बर्बाद होता है। आज के समय में हम विश्व स्तर पर जलवायु परिवर्तन देख रहे हैं। केन बेतवा परियोजना के कारण बहुत बड़ी संख्या में पेड़ डूबने वाले हैं। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि आज के समय में पर्यावरण के लिए काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इतु सिंह ने साहित्य और पर्यावरण पर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रकृति प्रेम हमारा स्वभाव और प्रकृति पूजा हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। उन्होंने जयशंकर प्रसाद, अज्ञेय‌ आदि की कविताओं  के हवाले से प्रकृति के प्रति उनके लगाव और चिंता को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बाद में भवानी प्रसाद मिश्र आदि ने प्रकृति प्रेम की ही नहीं प्रकृति रक्षण की भी बात की। हेमंत कुकरेती, केदारनाथ सिंह, लीलाधर जगूड़ी, ज्ञानेन्द्रपति, मंगलेश डबराल, कुंवर नारायण,  उदय प्रकाश, लीलाधर मंडलोई, वीरेंद्र डंगवाल, मनीषा झा, राज्यवर्द्धन, निर्मला पुतुल की कविताओं में पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा बेहतरीन ढंग से उठाया गया है। अध्यक्षीय भाषण में किरण सिपानी ने कहा कि पर्यावरण में आ रहे बदलावों की वजह से हमारा अस्तित्व खतरे में है। अभी भी लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता का अभाव है। हम अदालती आदेशों से डरते हुए भी सरकारी प्रयासों के प्रति उदासीनता बरतते हैं। आवश्यकता है अपनी उपभोग की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की। प्लास्टिक पर रोक लगाने की बजाय उनका उत्पादन बंद होना ‌चाहिए। सचिव गीता दूबे ने संस्था की गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण देते हुए अतिथियों का स्वागत किया। वाणी मुरारका ने ‘पेड़ मैं और हम सब’ ( कवि, मरूधर मृदुल) की कविता का  पाठ किया। परिचर्चा में पूनम पाठक, विजय गौड़, विनय जायसवाल, वाणी मुरारका आदि ने हिस्सा लिया। सभागार में शोध छात्र, प्राध्यापक एवं साहित्यकार बड़ी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम का कुशल  संचालन रेवा जाजोदिया और धन्यवाद ज्ञापन विद्या भंडारी ने किया।

(रिपोर्ट – साभार गीता  दूबे)

महिला हॉकी : भारत ने चीन को हराकर जीता एशिया कप

0

भारतीय महिलाओं ने शक्तिशाली चीन को हराकर हॉकी का एशिया कप जीत लिया है। इस जीत के साथ टीम को 2018 के विश्व कप में सीधे प्रवेश मिल गया है। रविवार को जापान के काकामिगहारा कावासाकी स्टेडियम में खिताबी मुकाबले में भारत ने पेनाल्टी शूट आउट के जरिए चीन को 5-4 से परास्त किया। मैच में अंतिम समय तक भारत 1-0 की बढ़त पर रहा लेकिन चीन ने अंतिम दौर में गोल कर मुकाबला बराबरी पर ला दिया।

इसके बाद पेनाल्टी शूट आउट के जरिए भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 5-4 से चीन को हराकर यह खिताब जीत लिया। भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में अपराजित रही। भारतीय ‌महिलाओं ने चीन को लीग मैच में भी हराया था। जापान को हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।
फाइनल मैच में दोनों टीमें तय समय तक 1-1 की बराबरी पर थी। इसके बाद शूट आउट का सहारा लिया गया। जिसमें भारत ने बाजी मार ली। भारत को ननजोत कौर ने 25 वें मिनट में गोलकर 1-0 से आगे कर दिया था। टीम इंडिया जीत के लिए आगे बढ़ रही थी। लेकिन चौथे क्वार्टर में 47 वें मिनट में टिनाटियान लु ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलते हुए मुकाबले में बराबरी हासिल कर ली। इसके बाद दोनों टीम गोल करने में नाकाम रहीं और मैच पेनल्टी शूटआउट में चला गया। भारतीय टीम चौथी बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची थी। 1999 में उसे दक्षिण कोरिया के हाथों 2-3 से हार मिली। 2004 में टीम इंडिया इस खिताब को जीतने में कामयाब रही। 2009 में चीन ने बैंकॉक में टीम इंडिया को 5-3 से हराकर खिताब जीता था।  खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौर ने ट्वीटर में टीम इंडिया को जीत के लिए बधाई दी है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश- पत्राचार से नहीं हो सकती तकनीकी शिक्षा की पढ़ाई

0

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तकनीकी शिक्षा की पढ़ाई पत्राचार यानि कॉरेस्पॉन्डेंस के जरिए नहीं की जा सकती। यह बात कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन संस्थानों को फटकार भी लगाई जो इंजीनियरिंग जैसे कोर्स को डिस्टेंस लर्निंग से करवा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले पर ध्यान दिया वहीं ओडिशा हाई कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर दिया। दो साल पहले पंजाब और हरियाणा के हाई कोर्ट ने कॉरेस्पॉन्डेंस से की गई कंप्यूटर साइंस की एक डिग्री को रेगुलर पढ़ाई करके हासिल की गई डिग्री के बराबर मानने से इंकार कर दिया था। वहीं ओडिशा हाईकोर्ट ने कॉरेस्पॉन्डेंस से तकनीकी पढ़ाई लेने को सही बताया था।

 

विजय गोयल ने पद्मश्री के लिए किदाम्बी श्रीकांत के नाम की सिफारिश की

0

पूर्व खेल मंत्री विजय गोयल  ने बुधवार को प्रतिष्ठित पद्मश्री अवॉर्ड के लिए भारतीय बैडमिंटन के नए सुपरस्टार किदाम्बी श्रीकांत के नाम की सिफारिश की है।

श्रीकांत ने पिछले सप्ताह फ्रेंच ओपन का खिताब जीता था। यह साल का उनका चौथा सुपरसीरीज खिताब था। श्रीकांत एक कैलेंडर वर्ष में चार सुपरसीरीज खिताब जीतने वाले भारत के पहले जबकि विश्व के चौथे शटलर बने।

संसदीय कार्य मंत्री गोयल ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा और देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए श्रीकांत के नाम की सिफारिश की। हालांकि, पद्म अवॉर्ड के नामांकनों की समयसीमा 15 सितंबर को समाप्त हो चुकी है।

गोयल ने पत्र में लिखा, ‘इस स्थिति में युवा खिलाड़ी को भारत में बैडमिंटन में उम्दा योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने का अच्छा अवसर होगा। वो देश के युवा खिलाड़ियों के लिए आदर्श हैं और लाखों लोग उनकी उपलब्धि पर खुश हैं व उनसे प्रेरणा ले रहे हैं। कई लोगों ने मुझे पूर्व खेल मंत्री होने के नाते संपर्क किया कि श्रीकांत के नाम की सिफारिश पद्मश्री अवॉर्ड के लिए की जाए।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘देश के लोगों की बात का सम्मान करते हुए मैं पद्मश्री अवॉर्ड के लिए श्री श्रीकांत किदाम्बी के नाम की सिफारिश करता हूं।’ बता दें कि श्रीकांत ने पेरिस में फ्रेंच ओपन सुपर सीरीज के फाइनल में जापान के केंता निशिमोटो को 21-14 और 21-13 से मात दी थी।

24 वर्षीय श्रीकांत ने इस सीजन में पांच टूर्नामेंट्स के फाइनल्स में प्रवेश किया। उन्होंने चार खिताब जीते जबकि सिंगापुर ओपन में हमवतन बी साईं प्रणीत से शिकस्त झेली।

श्रीकांत एकमात्र खिलाड़ी नहीं है, जिसके नाम की सिफारिश पद्म अवॉर्ड्स के लिए की गई हो। भारत की स्टार महिला शटलर पीवी सिंधु और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान एमएस धोनी के नाम की सिफारिश पद्म भूषण अवॉर्ड के लिए की गयी है।

 

वरिष्ठ लेखिका कृष्णा सोबती को ज्ञानपीठ पुरस्कार

0

नयी दिल्ली : साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार वर्ष 2017 के लिए हिन्दी की शीर्षस्थ कथाकार कृष्णा सोबती को प्रदान किया जायेगा।

ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई ने आज ‘भाषा’ को बताया कि प्रो. नामवर सिंह की अध्यक्षता में यहां हुई प्रवर परिषद की बैठक में वर्ष 2017 का 53वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिन्दी साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर कृष्णा सोबती को देने का निर्णय किया गया। यह पुरस्कार साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदान किया जायेगा।

उन्होंने बताया कि पुरस्कार स्वरूप कृष्णा सोबती को 11 लाख रूपये, प्रशस्ति पत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा प्रदान की जायेगी।

कृष्णा सोबती को उनके उपन्यास ‘जिंदगीनामा’ के लिए वर्ष 1980 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। उन्हें 1996 में अकादमी के उच्चतम सम्मान ‘साहित्य अकादमी फैलोशिप’ से नवाजा गया था। इसके अलावा कृष्णा सोबती को पद्मभूषण, व्यास सम्मान, शलाका सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

कृष्णा सोबती के कालजयी उपन्यासों ‘सूरजमुखी अँधेरे के’, ‘दिलोदानिश’, ‘ज़िन्दगीनामा’, ‘ऐ लड़की’, ‘समय सरगम’, ‘मित्रो मरजानी’, ‘जैनी मेहरबान सिंह’, ‘हम हशमत’, ‘बादलों के घेरे’ ने कथा साहित्य को अप्रतिम ताजगी और स्फूर्ति प्रदान की है। हाल में प्रकाशित ‘बुद्ध का कमंडल लद्दाख’ और ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिन्दुस्तान’ भी उनके लेखन के उत्कृष्ट उदाहरण है। 18 फरवरी 1924 को गुजरात (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मी सोबती साहसपूर्ण रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। उनके रचनाकर्म में निर्भिकता, खुलापन और भाषागत प्रयोगशीलता स्पष्ट परिलक्षित होती है। 1950 में कहानी ‘लामा’ से साहित्यिक सफर शुरू करने वाली सोबती स्त्री की आजादी और न्याय की पक्षधर है। उन्होंने समय और समाज को केंद्र में रखकर अपनी रचनाओं में एक युग को जिया है।

गौरतलब है कि पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में मलयालम के लेखक जी शंकर कुरूप को प्रदान किया गया था। सुमित्रानंदन पंत ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले हिन्दी के पहले रचनाकार थे। कृष्णा सोबती ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाली हिन्दी की 11वीं रचनाकार हैं। इससे पहले हिन्दी के 10 लेखकों को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिल चुका है। इनमें पंत, दिनकर, अज्ञेय और महादेवी वर्मा शामिल हैं।

 

अब ऑनलाइन दर्ज होगी यौन शोषण की शिकायत

0

सरकारी दफ्तरों में काम करने वाली महिलाएं अब कार्यस्थलों पर यौन शोषण की न केवल ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकती हैं, बल्कि उस पर कार्रवाई की निगरानी भी कर सकती हैं।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने हाल ही में केंद्र सरकार के सभी विभागों को पत्र लिखकर इस बारे में महिला कर्मियों को ‘सेक्सुअल हरासमेंट इलेक्टॉनिक बॉक्स’ और ‘शी बॉक्स’ जैसे कदम के बारे में बताने को कहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 24 जुलाई को इस कदम की शुरुआत की है।

डीओपीटी ने कहा कि जैसे ही शिकायत को ‘शी बॉक्स’ में दर्ज किया जाएगा, वह सीधे संबंधित मंत्रालय या विभागों की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के पास पहुंच जाएगी। जिसके अधिकार क्षेत्र में वह शिकायत होगी, वह उसकी पड़ताल करेगी। शी बॉक्स शिकायतकर्ता और नोडल अधिकारी को जांच की प्रगति की निगरानी का अवसर भी प्रदान करेगा। शी बॉक्स पोर्टल www.shebox.nic.in पर शिकायत की स्थिति को कभी भी देखा जा सकता है।

 

शादियों में दिखावा नहीं, कुछ अनोखा करते ये युवा जोड़े

0

भारतीय समाज में शादियों में फिजूलखर्ची और दिखावा करना काफी आम बात है। दहेज जैसी परंपराएं तो बेहद आम हैं। जब भी आस-पास कहीं शादी-विवाह का जिक्र होता है तो हमारे दिमाग में भारी सजावट, गहने और रिश्तेदारों के लिए महंगे गिफ्ट याद आते हैं। लेकिन आज के युवा पुरानी सोच को किनारे रख नए तरीके से सादगी से न केवल शादी कर रहे हैं बल्कि समाज को एक नया संदेश भी दे रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन इनकी सोच किसी भी मामले में कम नहीं है।

1- दहेज के खिलाफ

महाराष्ट्र के कोल्हापुर के मनोज पाटिल और सरिता लयकर ने बिना दहेज और किसी दिखावे के शादी करने के बजाय सादगी से शादी करके उन तमाम पढ़े-लिखे लोगों को संदेश दिया है जिनके मन में दहेज की हसरतें पल रही होती हैं। मनोज और सरिता दोनों महाराष्ट्र पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर हैं। हालांकि दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग जगह पर है। दोनों ने इसी साल 28 अप्रैल को कोल्हापुर जिले में एक तीर्थस्थल पर नारसोबाची वादी में जाकर एकदम सादे समारोह में जाकर शादी कर ली। खास बात यह है कि इन्होंने अपनी शादी के लिए जो पैसे बचाए थे उसे चैरिटी में दान कर दिया।

एक सामान्य परिवार की तरह मनोज और सरिता के परिवार वाले भी बाकी लोगों की तरह परंपरागत तरीके से शादी करना चाहते थे। लेकिन सरिता और मनोज दोनों की सोच फिजूलखर्ची को रोकने की थी। हालांकि आमतौर पर मराठा समुदाय में बिना भारी भरकम दहेज और बिना शाही अंदाज के शादी संपन्न ही नहीं होती। मनोज ने बताया, ‘मेरी तीन बड़ी बहनें हैं और मैंने अपने माता – पिता को उनकी शादी के लिए पैसे इकट्ठे करते हुए देखा है। इसलिए मैंने सोचा कि मैं अपनी शादी में एक पैसे का दहेज नहीं लूंगा और सादगी से शादी निपटाऊंगा।’

2-सबको शिक्षा

केरल के कला विशेषज्ञ सूर्या कृष्णमूर्ति ने अपनी अफसर बिटिया की शादी बड़े ही सादे समारोह में संपन्न की। बेटी सीता और उनके पार्टनर चंदा कुमार दोनों ही सिविल सर्वेंट हैं और उन दोनों ने साथ में ही सिविल सर्विस अकादमी में ट्रेनिंग भी की थी। सूर्या ने तिरुवनंतपुरम स्थित अपने घर के पूजा स्थल पर ही दोनों की शादी संपन्न कराई। उन्होंने कहा, ‘यह मेरी काफी पुरानी ख्वाहिश थी कि अपने बच्चों की शादी एकदम सादगी से संपन्न करवानी है। बेटी की शादी में न तो कोई ऑडिटोरियम बुक किया गया और न ही कोई साज-सज्जा हुई। मेरी पत्नी ने भी मेरी सोच का समर्थन किया इसलिए मुझे और आत्मविश्वास आ गया।’ सूर्या ने बेटी सीता की शादी के लिए सेव किए 15 लाख रुपये सरकारी स्कूल, कला संस्थान जैसे कई भले कामों के लिए दान कर दिए। वे केरल के 20 बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रहे हैं।

3- कोर्ट मैरिज

आईआरएस ऑफिसर अभय देवरे और आईडीबीआई बैंक में असिस्टेंट मैनेजर प्रीति कुंभरे ने फैसला किया कि वे सादगी से कोर्ट मैरिज करेंगे और जो पैसे शादी के लिए बचा रखा है उसे उन 10 किसानों के परिवारों को दान कर देंगे जिन्होंने तंगी के चलते मौत को गले लगा लिया। अभय कहते हैं कि जिस गरीब देश का सालाना बजट लगभग 16 लाख करोड़ हो, वहां शादी की फुजूलखर्ची में हर साल 1 लाख करोड़ रुपये फूंक दिए जाते हैं। यह स्थिति काफी घातक है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने के बाद अभय प्रभावित हुए थे और उन्होंने समाज में बदलाव लाने के बारे में ठान लिया था। अभय और प्रीति ने अमरावती में एक लाइब्रेरी को भी 52,000 रुपये दान कर दिए ताकि गरीब बच्चों को मुफ्त में किताबें मिल सकें।

4- सगन (शगुन) समाज के लिए

सौम्या गर्ग और साहिल अग्रवाल ने फैसला किया कि शादी में मिलने वाला उपहार या सगन जिसे शगुन भी कहा जाता है, जरूरतमंदों को दान कर देंगे। उन्होंने दिल्ली में ही सगन इनिशिएटिव नाम से एक नई शुरुआत की है। शादी का फैसला लेने के बाद उन्होंने सादगी से शादी संपन्न कराने के बारे में सोचा। उन्होंने यह भी ध्यान में रखा कि शादी में मिलने वाले शगुन को वे गरीबों में बांट देंगे। उनके दोस्तों और करीबियों ने भी उन्हें कई तरह के सुझाव दिए। साहिल और सौम्या ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन माध्यम से भी तकरीबन 48 आइडिया मिले। उन्होंने हर एक आइडिया के लिए 50,000 रुपये दान किए। सगन इनिशिएटिव ने नवगुरुकुल नाम के एक एनजीओ को दान दिया जो कि गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए काम करता है। उन्होंने किसानों के लिए काम करने वाली संस्था को भी पैसे दिए। साहिल ने बताया कि शादी में उन्हें लगभग 10 लाख रुपये का शगुन मिला था इस पूरी राशि को उन्होंने जरूरतमंदों में वितरित कर दिया

5- किसानों के हित में

महाराष्ट्र में लगातार जारी किसान आत्महत्या से दुखी होकर केमिकल इंजिनियर विवेक वाडके ने सादगी से शादी करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने राज्यों के किसानों के हालात के बारे में पता था। इसलिए हमने गैरजरूरी खर्चों पर लगाम लगायी और कोई फिजूलखर्ची नहीं की। हमारे परिवार ने शादी के लिए 6 लाख रुपये बचा कर रखे थे, जिसे हमने दो गांवों को दान कर दिए। गांव वालों ने इन पैसों को नहर की सफाई और मरम्मत में खर्च किया। हो सकता है कि इससे काफी कम लोगों को फायदा हो, लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ी कम से कम इससे कुछ तो सीख लेगी।’

(साभार – योर स्टोरी)

 

दिल्ली के गौरांग अरोड़ा बने मिस्टर इंडिया मैन हंट के विजेता

0

 नई दिल्ली : दिल्ली के रहने वाले गौरांग अरोड़ा इस बार मिस्टर इंडिया मैनहंट के विजेता रहे। बॉलीवुड अभिनेता तुषार कपूर इस प्रतियोगिता को जज करने पहुंचे थे। इसके अलावा भी बॉलीवुड और थियेटर जगत की कई दिग्गज हस्तियां इस खास मौके पर मौजूद थीं। तुषार ने जज की भूमिका को बखूबी निभाते हुए प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया। दिल्ली में स्काईवॉक एंटरटेनमेंट द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग शहरों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। कुल 69 प्रतिभागियों के बीच इस कड़ी टक्कर में दिल्ली के गौरांग अरोड़ा बाजी मार गए। 25 साल के गौरांग ने तीनों राउंड में बेहतरीन प्रदर्शन किया। शामिल हुईं कई बड़ी हस्तियां वहीं सिकंदराबाद के अब्दुल कादिर और जम्मू-कश्मीर के रिजुल चंदेल दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इस मौके पर कई दिग्गज हस्तियां नजर आईं। स्किनकेयर और मेकअप एक्सपर्ट आशमीन मुंजाल और थियेटर आर्टिस्ट मनोज बक्शी ने भी ये देखने पहुंचे। मनोज बक्शी ने सुपरहिट फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ में पाकिस्तानी पुलिस अफसर की भूमिका निभाई थी।

आईआईटी कानपुर ने विकसित  की कंडक्टिव इंक, कागज से चार्ज होगा मोबाइल

0

आईआईटी, कानपुर के नेशनल सेंटर फॉर फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स के इंजीनियर ऐसे प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे हैं जिससे कंडक्टर इंक तकनीक के जरिए किसी भी स्क्रीन प्रिंटर की मदद से कागज या प्लास्टिक के टुकड़े पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट प्रिंट किए जा सकेंगे। इंक में चांदी की जगह तांबे के नैनोपार्टिकल्स होंगे।

अभी आप अपने फोन या टैबलेट जैसी डिवाइस को चार्ज करने के लिए कोई बड़ा चार्जर अपने साथ रखते होंगे। कई बार तो इसे साथ में लाने और ले जाने में भी समस्या आती है। लेकिन आईआईटी कानपुर के कुछ होनहार ऐसी तकनीक पर शोध कर रहे हैं जिससे इको फ्रैंडली चार्जर तैयार किया जा सकता है। इस चार्जर को न केवल मोड़कर अपनी जेब में रखा जा सकेगा बल्कि खराब होने के बाद ये पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचाएंगे। मेक इन इंडिया इनिशिएटिव के तहत ये रिसर्च चल रहा है।

आईआईटी, कानपुर के नैशनल सेंटर फॉर फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स के इंजिनियर ऐसे प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे हैं जिससे कंडक्टर इंक तकनीक के जरिए किसी भी स्क्रीन प्रिंटर की मदद से कागज या प्लास्टिक के टुकड़े पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट प्रिंट किए जा सकेंगे।इंक में चांदी की जगह तांबे के नैनोपार्टिकल्स होंगे। अभी तक ऐसी सर्किट बनाने के लिए हैवी मशीनें और अधिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। हर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें सिलिकॉन की चिप लगी होती है।

इन चिपों का एक नुकसान ये है कि इन्हें बड़े डिस्प्ले स्क्रीन के लिए इस्तेमाल नहीं किया सकता। लेकिन इंडक्टर इंक से ये समस्या आसानी से हल की जा सकेगी। कंडक्टिव इंक का प्रचलन दुनियाभर के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में हो रहा है। एचटीएफ मार्केट रिलीज रिपोर्ट के मुताबिक 2017-2020 के दौरान यह तकनीक 3 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। 2023 तक इसके 4.3 बिलियन डॉलर हो जाने की उम्मीद है।कंडक्टिव इंक का इस्तेमाल ऑटोमेटिव इंडस्ट्री और स्मार्ट पैकेजिंग ऐप्लिकेशन में हो रहा है।

फूड और मेडिसिन प्रॉडक्ट की पैकेजिंग के लिए यह सबसे आसान और सस्ता विकल्प है। इसे एफएमसीजी उत्पाद के अंदर देखा जा रहा है। इस इंक में कॉर्बन या ग्रेफीम बेस के जरिए फ्लेक्सिबल प्रिंटिंग की जा सकती है। ज्यादा बेहतर सुचालकता के लिए कार्बन की जगह कंडक्टिव सिल्वर इंक का प्रयोग किया जाता है। हालांकि सिल्वर के मंहगे और सीमित होने के कारण कार्बन को ही प्राथमिकता देते हैं।इसके जरिए बायोसेंसर, डिस्प्ले, फोटोवोल्टैइक, मेंब्रेन स्विच, रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडिफिकेशन और कई अन्य उत्पादों पर प्रिंटिंग हो सकेगी।

ये सारे प्रॉडक्ट कंडक्टिव इंक की वजह से लचीले हो सकेंगे और फिर लचीले उत्पादों की परिकल्पना पूरी तरह इसी पर आधारित है।  फ्लेक्स-ई सेंटर के सीनियर रिसर्च इंजिनियर डॉ आशीष के मुताबिक, मेक-इन-इंडिया के तहत इस स्याही से गली-गली होने वाली स्क्रीन प्रिंटिंग से भी सर्किट तैयार हो सकेंगे। इनमें सुचालकता होगी। अभी इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की स्याही में चांदी का प्रयोग होता है। इसकी लागत ज्यादा होती है, लेकिन नई प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से भविष्य में सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स तैयार होंगे।

(साभार – योर स्टोरी)

13 साल की उम्र में 12वीं की छात्रा जाह्नवी पढ़ाती हैं ब्रिटिश इंग्लिश

0

जाह्नवी कई सारी यूनिवर्सिटियों में जाकर मोटिवेशनल स्पीच भी देती हैं। अभी फिलहाल वह 12वीं पास करने के बाद IIT-JEE की भी तैयारी करना चाहती हैं।

हरियाणा के पानीपत जिले में एक कस्बा है समालखा। और इस कस्बे को अब यहां की एक होनहार बच्ची जाह्नवी के लिए भी जाना जाता है। 13 साल की जाह्नवी 12वीं क्लास में पढ़ती हैं। चौंक गए होंगे आप ये सुनकर। लेकिन ये तो कुछ भी नहीं है, भारत के ग्रामीण परिवेश में जन्मीं जाह्नवी को हिंदी, हरियाणवी के अलावा ब्रिटिश और अमेरिकन लहजे में अंग्रेजी भी बोलनी आती है। 13 साल की जाह्नवी पवार टीवी चैनल देखकर हूबहू एंकर की तरह न्यूज भी पढ़ लेती हैं। इस बात में कोई शक नहीं कि जाह्नवी का दिमाग शायद कुछ ज्यादा ही विकसित हो गया है, लेकिन इसके पीछे उनके पिता की सोच और उनकी खुद की मेहनत भी शामिल है।

आज से तकरीबन 3 साल पहले की बात है, लगभग सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चैनलों पर गूगल बॉय और कॉटिल्य का नाम छाया हुआ था। जाह्नवी की कहानी पूरी दुनिया को दिखाई जा रही थी। तब वे 9वीं कक्षा से 10वीं में जा रहीं थीं। आज वे 12वीं में पहुंच चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उन्हें बचपन से ही अंग्रेजी की तालीम देनी शुरू कर दी थी। उन्हें अंग्रेजी के तमाम बुनियादी शब्दों का मतलब पता चल गया था। इसके बाद उन्हें 2 साल की उम्र में ही स्कूल भेज दिया गया। वे पढ़ती रहीं। लेकिन स्कूल के टीचर्स ने देखा कि जाह्नवी अपनी कक्षा के आगे की किताबों को पढ़ ले रही हैं तो उन्हें एक कक्षा छोड़कर अगली कक्षा में भेज दिया गया।

ये सिलसिला चलता रहा और सिर्फ 9 साल की उम्र में वे 9वीं कक्षा में पहुंच गईं। हालांकि उनका पूरा जोर अंग्रेजी सीखने पर रहा। आशादीप पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली जाह्नवी न केवल अंग्रेजी सीख गईं बल्कि अमेरिकन और ब्रिटिश लहजे पर पूरी पकड़ बना ली। जाह्नवी ने यह साबित कर दिया कि किसी भी तरह की अंग्रेजी बोलना कोई मुश्किल काम नहीं है। पानीपत के उस छोटे से कस्बे में अंग्रेजी के लिए कोई अध्यापक पढ़ाने वाला नहीं था। इसके लिए उसने इंटरनेट की खूब मदद ली। यूट्यूब पर विडियो देखकर उसने अंग्रेजी में महारत हासिल कर ली। इतना ही नहीं वह अब यूट्यूब पर अंग्रेजी की कक्षाएं चलाती है।

वैसे तो नियम के मुताबिक 10वीं का बोर्ड परीक्षा देने के लिए कम से कम 15 साल की उम्र होनी जरूरी होती है, लेकिन जाह्नवी को हरियाणा सरकार ने कम उम्र में ही परीक्षा देने की अनुमति प्रदान कर दी। वह बड़ी होकर आईएएस बनना चाहती हैं, लेकिन संघ लोक सेवा आयोग के नियमों के मुताबिक सिविल सेवा की परीक्षा के लिए ग्रैजुएशन होना जरूरी है। इसके अलावा परीक्षा के लिए 21 साल की उम्र आवश्यक होती है, लेकिन जाह्नवी का कहना है कि वह अपने लिए उम्र में रियायत की मांग करेगी।

भाषा के अलावा सामान्य ज्ञान पर भी उसकी अच्छी पकड़ है। वह कई सारे मुद्दों पर सामान्य ज्ञान के प्रश्नों के जवाब दे सकती है। इसके अलाव पचास सेकेंड में विज्ञान की आवर्त सारिणी सुना सकती है। वह जब काफी छोटी थी तभी स्कूल में उसे मंच के संचालन का जिम्मा दे दिया गया था। वह स्कूल के वार्षिकोत्सव में इंग्लिश में मंच संचालन करके दर्शकों को प्रभावित करती थी। उसकी प्रतिभा के चलते ही उसे स्कूल में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। उसके पिता बृजमोहन एक अध्यापक हैं।

जाह्नवी कई विश्वविद्यालयों में प्रेरक व्याख्यान भी देती हैं। अभी फिलहाल वह 12वीं पास करने के बाद र IIT-JEE की भी तैयारी करना चाहती हैं। वह हरियाणा के सीएम मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने 8 राज्यों के आईएएस अफसरों को 12 साल की जाह्नवी ने संबोधित कर चुकी हैं। उसे कई सारे स्कूल और विश्वविद्यालय वक्ता के तौर पर बोलने के लिए आमंत्रित करते रहते हैं। जाह्नवी की प्रतिभा ने सबको हैरत में डाल दिया है।

(साभार – योर स्टोरी)