Friday, April 3, 2026
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भारत की पहली महिला आईएएस अधिकारी अन्ना राजम मल्होत्रा 

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अधिकांश भारतीयों ने भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी के बारे में जरूर सुन रखा है, लेकिन कुछ ही लोगों को भारत की पहली महिला आईएएस अधिकारी के बारे में पता है। ऐसे वक्त में जब ज्यादातर भारतीय महिलाएं शादी कर लेने को ही अपने युवा जीवन का उद्देश्य समझती थीं, उनमें से किसी ने भी सिविल सेवा में शामिल होने की कोशिश नहीं कीं, तब अन्ना राजम मल्होत्रा भारत कीपहली महिला आईएएस अधिकारी की राह पर बढ़ रही थीं। वह सचिवालय में पद प्राप्त करने वाली भी पहली महिला थीं। इस प्रेरक, दृढ़ और हठीली ईमानदार महिला की एक प्रेरणादायक कहानी है।

अन्ना को खूब परेशान किया गया, वो औरत थीं इसलिए उनकी काबिलियत पर हमेशा शक किया गया। यहां तक कि उनकी महिला सहकर्मी भी उनके निर्णय का मजाक उड़ाती थीं। लेकिन अन्ना ने किसी की एक न सुनी। वो बस अपने राह चलती रहीं। एक दिन उन्होंने इतिहास रच ही दिया। उन्होंने 1950 में सिविल सर्विसेस की परीक्षा पास की थी। उनकी प्रतिभा के बावजूद पैनल ने उन्हें फॉरेन सर्विसेज या फिर सेंट्रल सर्विसेज ज्वॉइन करने की सलाह दे डाली, सिर्फ इसलिए कि उनके हिसाब से ये क्षेत्र महिलाओं के लिए ज्यादा मुफीद थे। लेकिन अन्ना वहां भी नहीं झुकीं। उनके अपॉइंटमेंट पर उस वक्त प्रदेश के मुख्यमंत्री सी राजगोपालाचारी ने उन्हें डिस्ट्रिक्ट सब कलेक्टर बनाने की बजाय सीधे सचिवालय में नियुक्त कर दिया।

अन्ना केवल पढ़ाई में ही स्ट्रॉन्ग नहीं थीं बल्कि उन्होंने रायफल, पिस्टल शूटिंग, घुड़सवारी में भी फुल ट्रेन्ड थीं। वो चाहती थीं कि वो किसी भी तरह अपने पुरुष सहकर्मियों से कमतर न रहें। लैंगिक भेदभाव किस कदर हावी था, ये बताता है अन्ना को दिया गया एक एग्रीमेंट। जिसमें लिखा था कि अन्ना सर्विस के दौरान शादी नहीं कर सकतीं, अगर वो शादी करती हैं तो सर्विस टर्मिनेट हो जाएगी। ऐसा कोई नियम पुरुषों के लिए नहीं था, केवल महिलाओं के लिए ही ये बाधा बना दी गई थी। हालांकि कुछ सालों बाद ये नियम हटा लिया गया।

अन्ना के नेतृत्व में देश का पहला कम्प्यूटराइज्ड कंटेनर पोर्ट बनावाया गया था। ये पोर्ट मुंबई था और जवाहर लाल नेहरू बंदरगाह के नाम से जाना जाता है। 1982 में उन्होंने पंडित नेहरू को एशियाड सम्मेलन में असिस्ट भी किया था। वो इंदिरा गांधी के साथ फूड प्रोडक्शन पैटर्न को समझने के लिए आठ राज्यों की यात्रा पर भी गई थीं। बड़ी बात ये है कि उस वक्त उनका टखना टूटा हुआ था। एक बार क्या हुआ कि एक गांव में हाथियों का बड़ा आतंक फैल गया था। अन्ना पर दबाव था कि वो हाथियों तो मारने का आदेश दे दें। लेकिन अन्ना कैसे निरीह जानवरों की हत्या करवा सकती थीं। उनकी तो गलती केवल इतनी थी कि वो अपने घर में हुई दखलंदाजी से आजिज आकर बाहर बस्तियों में आ गए थे। अन्ना ने बड़ी ही सूझबूझ और अपने जीव व्यवहार के ज्ञान से उनको वापस जंगल भेज दिया था। उनके कारनामे से हर कोई हैरानी में था।

17 जुलाई, 1927 को उनका जन्म केरल के एक गांव में हुआ था। वह कालीकट में बड़ा हुईं और प्रोविडेंस महिला कॉलेज से अपनी मध्यवर्ती शिक्षा पूरी की। कालीकट के मालाबार ईसाई कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद, अन्ना मद्रास चली गईं जहां उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। अपने करियर के दौरान, अन्ना राजाम मल्होत्रा ने साबित कर दिया कि वो इस सफलता के लिए तरह से योग्य थीं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि लैंगिक भेदभाव का एक समाज में कोई स्थान नहीं हैं। उनकी जीवनशैली दिखाती हैं कि महिलाओं को अवसरों की जरूरत नहीं है, संरक्षण नहीं। उन्होंने राजनीतिक शख्सियत बनने से इनकार कर दिया और भारत के कुछ सबसे शक्तिशाली नेताओं के सामने भी कभी नहीं झुकीं। उनका ये व्यवहार देश के तमाम नौकरशाहों के सामने एक उदाहरण रखता है।

(साभार – योर स्टोरी)

सरकार ने तीन तलाक को प्रतिबंधित करने के लिए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी

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नयी दिल्ली : सरकार ने उस प्रस्तावित कानून के मसौदे को मंजूरी प्रदान कर दी जिसके तहत एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैरकानूनी एवं अमान्य ठहराया जाएगा और ऐसे करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा होगी।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक’ पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विचार किया और अपनी मंजूरी दी।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतर-मंत्रालयी समूह ने विधेयक का मसौदा तैयार किया था। इस समूह में वित्त मंत्री अरूण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी शामिल थे।
प्रस्तावित कानून सिर्फ एक बार में तीन तलाक के मामले में लागू होगा और इससे पीड़िता को अधिकार मिलेगा कि वह ‘उचित गुजारा भत्ते’ की मांग करते हुए मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सके।
गौरतलब है कि बीते 22 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था।

नौकरी छोड़ किसान बनीं इंजीनियर, दुबई और इज़राइल में हैं सब्जियों के खरीददार

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खेती-किसानी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। लेकिन हालिया कुछ सालों में किसानों की दुर्दशा, जड़ किसान नीतियों और कम सुविधाओं ने लोगों को किसानी से मोहभंग कर दिया है। उन्नत तकनीकें किसानों तक पहुंच नहीं पा रही हैं और वो परंपरागत तरीके से खेती करके पर्याप्त कमाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में 27 वर्षीय छत्तीसगढ़ लड़की वल्लरी चंद्राकर ने खेती करने के लिए अपनी अच्छी सैलरी वाली इंजीनियरिंग नौकरी छोड़ दी। वल्लरी कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में एमटेक करने के बाद ने दुर्गा कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में नौकरी कर रही थीं। उन्होंने नौकरी छोड़कर 27 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की। अब उनके खेत में उगाई गईं सब्जियां दुबई और इज़राइल जैसे अन्य देशों में निर्यात करने के लिए तैयार हैं।

वल्लरी, जो राज्य की राजधानी रायपुर में नौकरी छोड़कर अपने गांव के बागबाहरा जिले में लौट आई हैं, का मानना है कि खेती से ज्यादा कोई भी नौकरी महत्वपूर्ण नहीं हो सकती है। हालांकि खेती के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है लेकिव जो संतुष्टि किसी को खेती करने से मिलती है वह कहीं और नहीं मिल सकती है। वल्लरी का मानना है कि बाजार में नई तकनीक के साथ अब व्यवसाय पहले जितना मुश्किल नहीं है। वल्लरी की खेती-यात्रा 2016 में शुरू हुई। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और खेती शुरू की तो कई ग्रामीणों ने मुझे एक शिक्षित मूर्ख कहा। मेरे परिवार में तीन पीढ़ियों में कोई भी खेती नहीं कर रहा था। मुझे शुरू में किसानों, बाजारों और विक्रेताओं से निपटने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। हालांकि उनके पिता, जोकि मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर में इंजीनियर हैं, का समर्थन वल्लरी के साथ रहा। उन्होंने एक फार्महाउस बनाने के लिए जमीन खरीदी थी। वल्लरी ने अवसर देखा और खेती के लिए उस भूमि का उपयोग करने का निर्णय लिया। वल्लरी के फार्म पर उगाई जा रही सब्जियां पूरे भारत के कई शहरों जैसे इंदौर, नागपुर, बेंगलुरु और दिल्ली में बेची जाती हैं। वल्लरी अपने खेत पर हरी मिर्च, करेला और खीरा जैसी सब्जियां उगाती हैं। उनकी उगाई सब्जियों की प्रसिद्धि विदेश तक पहुंच गई है। उन्हें इस समय दुबई और इजराइल से टमाटर और लौकी के लिए एक ऑर्डर मिला हुआ है। ये सब्जियां 60-75 दिनों में बेचने के लिए तैयार हो जाएंगी।

वल्लरी ने इंटरनेट से खेती की कई नई तकनीकें सीखीं। वो स्थानीय भाषा का इस्तेमाल करके ग्रामीणों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित करती हैं। वह जमीन पर काम कर रहे किसानों के लिए नई कृषि तकनीकों पर कार्यशालाएं भी आयोजित करवाती हैं। ग्राहक वल्लारी की सब्जियों के गुणों से खासे प्रभावित नजर आते हैं। वल्लरी के खेत से हो रहे उत्पादन के लिए बाजार का विस्तार लगातार हो रहा है। वह 5 बजे अपना काम पूरा करती हैं और फिर गांव में जाती हैं। वहां पर 40 लड़कियों को अंग्रेजी और कम्प्यूटर साइंस पढ़ाती हैं।

नासा ने खोजा आठ ग्रहों वाला सौरमंडल

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने महत्वपूर्ण खोज की है। एजेंसी ने पहली बार हमारे सौरमंडल की तरह ही आठ ग्रहों वाला नया सोलर सिस्टम ढूंढ़ने का दावा किया है। नासा ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि केप्लर टेलीस्कोप की मदद से सुदूर अंतरिक्ष में आठ ग्रहों वाला नया सौरमंडल ढूंढ़ा गया है। अमेरिकी सामाचारपत्र इंडीपेंडेंट ने यह जानकारी दी है। अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में यह महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रारंभिक आकलन में यह मनुष्यों के रहने योग्य नहीं है।

नासा वैज्ञानिकों ने केप्लर टेलीस्कोप से भेजे गए आंकड़ों का विश्लेषण करने में गूगल की आर्टीफिशियल तकनीक की मदद लेने की बात कही है। केप्लर टेलीस्कोप सूर्य सरीखे स्टार और उसके सौरमंडल के बारे में पहले ही पता लगा चुका था। लेकिन, अब नए ग्रहों की मौजूदगी का पता चला है। ऐसे में नए सौरमंडल में कुल आठ ग्रह हो गए हैं। हमारे सौरमंडल को छोड़ कर अंतरिक्ष में आठ ग्रहों वाला यह पहला सोलर सिस्टम है। नासा ने बताया कि एआई की मदद से केप्लर द्वारा मुहैया डाटा का नए तरीके से विश्वलेषण संभव हो सका है। नए सौरमंडल में केप्लर-90आई सबसे छोटा ग्रह है। यह नया ग्रह पृथ्वी की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा बड़ा है। टेक्सास यूनिवर्सिटी (ऑस्टिन) के एस्ट्रोनॉमर एंड्रयू वांडरबर्ग ने बताया कि नया ग्रह पृथ्वी से बड़ा जरूर है, लेकिन वहां कोई जाना नहीं चाहेगा। हालांकि, इसकी मदद से अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में और जानकारी जुटाने की उम्मीद जताई जा रही है।

केप्लर टेलीस्कोप को वर्ष 2009 में अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। तब से यह पृथ्वी स्थित नियंत्रण कक्ष को डाटा भेज रहा है। इसकी मदद से हमारे सौरमंडल के बाहर कई सोलर सिस्टम का पता लगाया जा चुका है। केप्लर टेलीस्कोप अब तक 4,034 ग्रह या उसके समान आकाशीय पिंडों का पता लगा चुका है। इनमें से 2,335 की बाहरी ग्रह के तौर पर पुष्टि की जा चुकी है। इनमें से 30 पृथ्वी के आकार के हैं।

 

जितेश सिंह देव बने मिस्टर इंडिया

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मुंबई : लखनऊ के जितेश सिंह देव ने आज पीटर इंग्लैंड मिस्टर इंडिया 2017 का खिताब अपने नाम किया। वह अब मिस्टर वर्ल्ड 2020 में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
खिताब जीतने के बाद देव ने ‘कहा, ‘‘मैंने कुछ भी सोचा नहीं था लेकिन हां, मुझे खुद में यकीन था। विश्वास की ताकत आपको हमेशा प्रेरित करती है। जब मेरा नाम पुकारा गया तो मैं निशब्द हो गया…’’ देव ने कहा, ‘‘खिताब जीतने के साथ जिम्मेदारी बढ़ जाती है। (मिस्टर वर्ल्ड) प्रतियोगिता कठिन होने जा रही है। आज मैं इस पल का आनंद ले रहा हूं लेकिन कल से नयी यात्रा शुरू होगी और मुझे कड़ी मेहनत करनी है।’’ अभि खजूरिया पहले और पवन राव दूसरे रनर अप चुने गए।

घरों की हवा में गंदगी की वजह से सर्दियों में होती है एलर्जी, ऐसे बचें

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मौसम में बदलाव अक्सर सर्दी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी बीमारियां लेकर आते हैं। सर्दियों में इनके साथ-साथ लोगों में एलर्जी की भी समस्या देखी गई है। ऐसे में सांस लेने में तकलीफ, शरीर में खुजली और त्वचा पर चकत्ते पड़ जाने की समस्या जन्म लेती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी के मौसम में लोग ज्यादातर घरों में ही रहते हैं और ऐसे में धूल कणों, फफूंदी और सूक्ष्म जीवाणुओं की वजह से एलर्जी के शिकार हो जाते हैं। इससे दमा, खांसी, गले में घरघराहट जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। सर्दियों में एलर्जी से बचने के लिए हमें अपने घरों और आसपास की जगहों पर साफ सफाई रखनी चाहिए। इसके अलावा कुछ और भी उपाय हैं जिन्हें आजमाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

  1. घरों में गंदगी की वजह से रोगाणुओं की संख्या बढ़ जाती है। ये रोगाणु ही एलर्जी का कारण होते हैं। एलर्जी हो जाने पर इसका कारण जानने के बाद ही इसका इलाज किया जा सकता है। इसके लिए एक विशेष प्रकार का टेस्ट होता है जिसे कॉम्प्रीहेन्सिव एलर्जी टेस्ट कहते हैं। इसमें आपके खून की जांच की जाती है।
  2. एलर्जी से बचने के लिए आपको अपने कमरे की हवा को उन्नत करने की जरूरत है। कमरों को साफ-सुथरा रखें और कालीन आदि की नियमित सफाई करें।
  3. त्वचा में एलर्जी से बचने के लिए नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर त्वचा पर लगाएं और रात भर लगा रहने दें। सुबह नीम के पानी से इसे धो लें। यह एंटी-बैक्टीरियल नुस्खा है जिससे एलर्जी की संभावना खत्म हो जाती है।
  4. सर्दियों में घी का सेवन कम से कम करें। एक गिलास गाजर का जूस पीने से भी एलर्जी दूर होती है। इसके अलावा गाजर, चुकंदर और खीरा का मिक्स जूस पीने से भी एलर्जी नहीं होती।
  5. एलर्जी वाले फूड्स से दूर रहने के साथ-साथ गाड़ी चलाते समय रूमाल से मुंह और नाक ढंककर रखें तथा आंखों पर धूप वाला चश्मा लगाएं। हर दूसरे दिन चादर बदलते रहें या फिर उन्हें धूप दिखाते रहें।

खूब सेल्फी लेना हो सकता है विकार : अध्ययन

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लंदन : भारत में कराये गये एक अध्ययन में कहा गया है कि जिन लोगों पर स्मार्टफोन से सेल्फी लेने का जुनून सवार होता है, वह उनकी एक तरह की बीमारी हो सकती है जिसका इलाज जरुरी है।

ब्रिटेन के नॉटिंघम ट्रेंट विश्वविद्यालय और और तमिलनाडु के त्यागराज स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने वर्ष 2014 में यह खबर छपने के बाद इस परिघटना की जांच शुरु की कि अमेरिकन साइकिएट्रिक एसोसिएशन ने ऐसे लोगों (सेल्फीवादी) को वास्तविक मानसिक विकार की श्रेणी में रखा है।
अब उन्होंने इस रुग्णता की पुष्टि की है और उसकी गंभीरता के आकलन में उपयोग आने वाला ‘सेल्फीवादी आचारण मापक’ तैयार किया। यह मापक 200 लोगों पर विभिन्न प्रकार का वर्ग बनाकर तैयार किया गया । उसे 400 लोगों पर परखा गया।

यह अध्ययन भारत में लोगों पर किया गया क्योंकि भारत में फेसबुक उपयोगकर्ताओं की बहुत बड़ी संख्या है। खतरनाक स्थलों पर सेल्फी लेते हुए सबसे अधिक मौतें यहीं हुईं।
‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड एडिक्शन’ में प्रकाशित इस अध्ययन में इस विकार के ग्रस्त लोगों के तीन स्तर बताये गये हैं।

शाहरुख बने 1982 एशियन गेम्‍स के गोल्‍ड मेडलिस्‍ट के मददगार

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मुम्बई : इस साल की शुरुआत में अभिनेता शाहरुख खान का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह एक भिखारी की मदद करते हुए दिखाई दिए थे। इस घटना के बाद लोगों ने शाहरुख को फिल्मों का ही नहीं असल जिंदगी का भी बादशाह बताया था। इस घटना के बाद एक बार फिर शाहरुख का नाम किसी जरूरतमंद की मदद करने को लेकर सुर्खियों में छाया हुआ है। बता दें कि शाहरुख खान ने पंजाब के मुक्केबाज खिलाड़ी कौर सिंह (69) को पांच लाख रुपये की मदद दी। कौर सिंह अपनी चिकित्सा संबंधी बिलों का भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। 13 दिसंबर को सिंह को लेकर एक अखबार में छपी खबर ने अभिनेता को भावुक कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि 1982 एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता को अपनी हृदय की स्थिति का इलाज करने के लिए दो लाख रुपये का भुगतान करने में मुश्किल हो रही है।

यह राशि शाहरुख के कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) फाउंडेशन के माध्यम से दिए गए। इस पर बात करते हुए  शाहरुख खान ने कहा “खिलाड़ी हमारे देश का अभिमान होते हैं और समाज के रूप में उनकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है। कौर सिंह के बारे में पढ़ने के बाद मुझे लगा कि हमें उनका साथ देने की जरूरत है और हर किसी को अपने तरीके से ऐसा करने के लिए आग्रह करते हैं। हम कौर सिंह को जल्द ठीक होने के लिए और एक स्वस्थ जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हैं।”

इसके बाद शाहरुख ने कहा कि “मैं केवल क्रिकेट के बारे में दिलचस्पी नही रखता, बल्कि अन्य खेलों में भी रुचि लेता हूं।” भारतीय मुक्केबाजी संघ (बीएफआई) ने भी कौर सिंह को एक लाख रुपये की मदद प्रदान की। खनाल खुर्द में एक छोटे से घर मे रहने वाले कौर सिंह इस प्रतिक्रिया से काफी अभिभूत है। खिलाड़ी ने कहा,”पूरे देश से इतना समर्थन प्राप्त करने के बाद, मुझे लग रहा है कि मैं अतीत की महिमा को एक बार फिर से जी रहा हूं। मेरी मदद करने वाले हर इंसान को मैं धन्यवाद देता हूं।” पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन एकमात्र भारतीय है जिसने प्रदर्शनी मैच में मुक्केबाज दिग्गज मुहम्मद अली के खिलाफ रिंग में प्रवेश किया था।

आईएफएफके में ‘वाजिब’ ने जीता सुवर्णा चाकोरम

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तिरूवनंतपुरम : फलस्तीनी फिल्म ‘वाजिब’ ने केरल के 22वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफके) में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फिल्म का ‘सुवर्णा चाकोरम’ पुरस्कार जीता।
एनेमेरी जाकिर के निर्देशन वाली इस फैमिली ड्रामा को 15 लाख रूपये का पुरस्कार, एक प्रमाण पत्र और एक स्मृति चिन्ह दिया गया।
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का ‘रजत चाकोरम’ पुरस्कार थाई फिल्मकार अनुचा बूनयावाताना को उनकी फिल्म ‘मालीला : द फेयरवेल फ्लावर’ के लिये दिया गया। कोलंबियाई फिल्म ‘कंडेलेरिया’ को जूरी की खास प्रशंसा हासिल हुई।
सर्वश्रेष्ठ नये निर्देशक के लिये ‘रजत चाकोरम’ का पुरस्कार फिल्म ‘अदन’ के निर्देशक संजू सुरेंद्रन को दिया गया।
अमित मासुरकर द्वारा निर्देशित भारतीय कॉमेडी ड्रामा ‘न्यूटन’ ने एनईटीपीएसी और एफआईपीआरईएससीआई पुरस्कार जीता।

अभिनेता-लेखक नीरज वोरा का निधन

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मुंबई : ‘सत्या’, ‘फिर हेरा फेरी’ और ‘दौड़’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाने वाले बॉलीवुड अभिनेता, लेखक और निर्देशक नीरज वोरा का आज निधन हो गया। वोरा एक साल से कोमा में थे। वह 54 वर्ष के थे।

वोरा मस्तिष्क आघात के बाद दिल का दौरा पड़ने के कारण कोमा में चले गए थे। उसके बाद वह अक्तूबर 2016 से निर्माता फिरोज नाडियाडवाला के घर में थे।
नाडियाडवाला उन्हें अपने घर ले गए थे और उन्होंने एक कमरे को अस्थायी आईसीयू में परिवर्तित कर दिया था। वोरा का स्वास्थ्य कल रात बिगड़ गया था जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया।
लेखक के तौर पर वोरा ने 80 के दशक के अंत में टीवी कार्यक्रमों में काम करना शुरू किया था। इन कार्यक्रमों में सुपरस्टार शाहरुख अभिनीत ‘सर्कस’ शामिल है। उन्होंने फिल्मकार केतन मेहता की फिल्म ‘होली’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में आमिर खान ने भी काम किया था।
उन्होंने ‘रंगीला’, ‘राजू बन गया जेंटलमैन’, ‘अकेले हम अकेले तुम’, ‘दौड़’ और ‘विरासत’ में भी काम किया। उन्होंने ‘रंगीला’ के लिए संवाद भी लिखे थे।
अभिनेता के रूप में उनकी आखिरी फिल्म अनिल कपूर अभिनीत ‘वेलकम बैक’ थी। यह फिल्म वर्ष 2015 में रिलीज हुई थी।
कोमा में जाने से पहले वोरा ‘हेरा फेरी’ श्रृंखला की तीसरी फिल्म पर काम कर रहे थे।