Saturday, April 4, 2026
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आईआईआईटी-दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शुरू करेगा एम.टेक पाठ्यक्रम

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नयी दिल्ली : इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली इस वर्ष जुलाई में शुरू हो रहे नये सत्र से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ में विशेषज्ञता का एम.टेक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में यह पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने वाला पहला संस्थान होगा।

आईआईआईटी-दिल्ली के ‘इन्फोसिस सेंटर फोर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के प्रमुख मयंक वत्स ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘यह पाठ्यक्रम अनुसंधान-उन्मुख होगा और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘मशीन लर्निंग’ के आाधारभूत चीजों और विकास पर केंद्रित होगा।’’ वत्स ने बताया कि ऐसा दिल्ली में पहली बार होगा।

यह पाठ्यक्रम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) तकनीकों का उपयोग करके नवाचार और समस्या सुलझाने वाले उद्योग कैरियर के लिए स्नातक तैयार करेगा।

इस पाठ्यक्रम चार सेमेस्टर का होगा और इसमें 20 छात्र शामिल होंगे।

वत्स ने बताया, ‘‘इस पाठ्यक्रम के बाद, छात्र, वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों लागू करने वाली मान्य पैटर्न को लागू कर ‘एआई एप्लिकेशंस’ से संबंधित समस्याओं को पहचान और विश्लेषण करने में सक्षम हो सकेंगे।

आईआईआईटी-दिल्ली में इस पाठ्यक्रम को दिल्ली सरकार आईआईआईटी-दिल्ली अधिनियम, 2007 के तहत शुरू करने जा रही है। इस संस्थान का चांसलर दिल्ली के उपराज्यपाल होते हैं।

 

अगले दो साल में सूचीबद्ध लघु,मझोली कंपनियों की संख्या 1,000 होने की संभावना

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नयी दिल्ली : बंबई शेयर बाजार और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध लघु एवं मध्यम उद्योग (एसएमई) कंपनियों की संख्या अगले दो साल में 1,000 होने की संभावना है। वर्तमान में यह संख्या करीब 350 है। यह अनुमान प्रमुख मर्चेंट बैंकर गिनीज कारपोरेट एडवाइजरी सर्विसेस का है।

गिनीज कारपोरेट का मानना है कि कारोबारी विस्तार योजनाओं और कार्यशील पूंजी की जरुरतों को पूरा करने के लिए और अधिक कंपनियां आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के रास्ते को अपनाएंगी।

वर्ष 2017 की पूरी अवधि में 132 एसएमई कंपनियों ने आईपीओ से 1,785 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह 2016 में 66 कंपनियों द्वारा जुटाए गए 66 कंपनियों के 540 करोड़ रुपये से कई गुना अधिक है।

गिनीज ने एक बयान में कहा कि पिछले कुछ सालों में दोनों शेयर बाजारों पर करीब 350 एसएमई कंपनियां पंजीकृत हो चुकी हैं। अगले दो साल में हम निश्चित तौर पर इनकी 1,000 संख्या पर पहुंच जाएंगे।

 

20 जनवरी के बाद भी बैंकिंग सेवाएं नि:शुल्क रहेंगी : आईबीए

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नयी दिल्ली : 20 जनवरी से पैसा जमा करने और निकालने समेत सभी बैंकिंग सेवाओं के लिए शुल्क लगने की खबरों का इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) ने खंडन किया है। बैंकों के संगठन आईबीए ने इस संबंध में चल रही खबरों को पूरी तरह आधारहीन और झूठा बताया।

आईबीए ने बताया कि बैंकों ने ना इस तरह का कोई फैसला किया है, ना ही ऐसा कोई प्रस्ताव है। हालांकि, आईबीए ने कहा कि परिचालन एवं वाणिज्यिक वायबिलिटी को देखते हुए बैंक लेनदेन से जुड़े विभिन्न शुल्कों की समीक्षा करते रहेंगे।

सोशल मीडिया में इसको लेकर चल रही अफवाहों का पूरी तरह से खंडन करते हुए आईबीए ने बताया कि इस तरह से कभी भी नि:शुल्क सेवाओं को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है। साथ ही यह अपेक्षित भी नहीं है। आईबीए ने स्पष्ट किया है कि बैंकों की ओर से लगातार व्यावसायिक एवं परिचालन लागत की समीक्षा की जाती है। इसी के आधार पर शुल्क बी तय किए जाते हैं।

आईबीए ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को आधारहीन और गलत करार किया है। साथ ही यह भी कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से मौजूदा समय में शुल्क के संबंध में कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

20 जनवरी से इन सेवाओं के महंगी होने की खबर थी –

कुछ सुविधाओं के लिए शुल्क की समीक्षा होगी। इन सुविधाओं में पैसा निकालने, जमा करने, मोबाइल नंबर बदलवाने, केवाईसी, पता बदलवाने, नेट बैंकिंग और चेक बुक के लिए आवेदन करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। जिस शाखा में आपका खाता है, उससे इतर किसी दूसरी शाखा में जाकर बैंकिंग सेवा लेने पर भी अलग से शुल्क लिया जाएगा। शुल्क पर फीसद का जीएसटी भी लगेगा। यह शुल्क आपके खाते से काट लिया जाएगा।

 

कमला मिल आग हादसे में 150 लोगों को बचाने वाले ये दो बहादुर

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हाल ही में मुंबई के कमला मिल कंपाउंड में आग लगने की वजह से 15 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस हादसे में मरने वालों की संख्या और ज्यादा हो जाती लेकि न वहां पर तैनात दो सुरक्षाकर्मियों की बदौलत सैकड़ों लोगों की जानें बच गईं। महेश साबले और सूरज गिरी पास वाली बिल्डिंग में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात हैं। वे दोनों टाइम्स नाउ के सर्वर रूम में काम करते हैं। उन्होंने अपने ऑफिस से सामने वाली इमारत में रात को लगी आग को देखा।

गंभीर होती आग को देखते ही सूरज ने तुरंत फायर ब्रिगेड को कॉल किया वहीं महेश पाइप के सहारे चौथी मंजिल पर चढ़ गये क्योंकि ऊपर जाने के सारे रास्ते आग की लपटों की वजह से बंद हो गए थे। लेकिन महेश ने किसी तरह वहां पहुंचकर दरवाजे को तोड़ दिया। इतना ही नहीं वे थोड़ा और आगे गए और आग की लपटों से घायल हो चुके 12 लोगों को खींचकर सुरक्षित स्थान पर ले गए। बताया जा रहा है कि जिन रास्तों से लोगों को बाहर निकलना था, वहां सिर्फ धुआं ही धुआं था। कुछ भी साफ तौर पर नहीं नजर आ रहा था, इसकी वजह से लोग फंस गए। लाख कोशिशों के बाद भी वे लोग बाहर नहीं आ पाए।

वहां फंसे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। बचाव कार्य में शामिल एक फायरमैन ने बताया, ‘हमें सभी 15 शव एक बाथरूम में मिले जो कि तकरीबन 100 वर्ग फीट क्षेत्र में बना हुआ है। इसके साथ ही नीचे आने के लिए दो सीढ़ियां थीं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि लोगों ने यहीं से निकलने की कोशिश की होगी। हालांकि, आगे एक सीढ़ी पूरी तरह से आग की चपेट में आ चुकी थी और दूसरी में कुछ भी साफ तौर पर नजर नहीं आ रहा था। पूरे क्षेत्र में धुआं ही धुआं था।’

महेश ने एनडीटीवी से बात करते हुए बताया कि वहां पर इतनी भारी मात्रा में काला धुआं निकल रहा था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। इसलिए महेश ने किसी तरह नाक बंद किया और लोगों को बाहर निकालने लगे। वहीं सूरज ग्राउंड फ्लोर पर ही खड़े होकर लोगों को बाहर निकलने का रास्ता बता रहे थे। दोनों सिक्योरिटी गार्डों ने लगभग 150 लोगों की जिंदगियां बचा लीं। इन दोनों की बहादुरी पर एक सलाम तो बनता है।

 

शाहरुख़ पर लगा चोरी का आरोप, उठाया ऐसा क़दम कि बन गए ‘ज़ीरो’ से हीरो

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मुंबई : शाहरुख़ ख़ान को बातों का बाज़ीगर यूं ही नहीं कहा जाता। अपनी वाकपटुता से विपरीत परिस्थियों में भी जीतकर बाहर आने का हुनर उनसे सीखना चाहिए। ज़ीरो कैसे हीरो बनता है, ये कहानी भी शाहरुख़ सिखाते हैं। हाल ही में किंग ख़ान पर साहित्यिक चोरी का इल्ज़ाम लगा, जिसको लेकर सोशल मीडिया में उनकी जमकर खिंचाई हुई, मगर सीनाज़ोरी दिखाने की बजाय उन्होंने उभरते हुए लेखक को उसकी पंक्तियों के लिए शुक्रिया अदा करके बाज़ी अपने नाम कर ली।

क़िस्सा पहली जनवरी को शुरू हुआ, जब शाहरुख़ ने अपनी नई फ़िल्म ज़ीरो का फ़र्स्ट लुक और टाइटल ट्विटर पर फ़ैंस के साथ साझा किया। फ़र्स्ट लुक आते ही छा गया और देखते ही देखते इसे 3.2 करोज़ व्यूज़ मिल गए। शाहरुख़ ने फैंस का शुक्रिया अदा करने में कोई देरी नहीं की और ट्विटर पर सबका धन्यवाद किया। मगर, इस शानदार उपलब्धि को आलोचनाओं का ग्रहण तब लगा, जब उन पर साहित्यिक चोरी का सनसनीखेज़ आरोप लगा। ज़ीरो में शाहरुख़ के बौने लुक को जितनी तारीफ़ें मिलीं, उतनी ही आलोचना इस चोरी करने के लिए भी की गयी। किंग ख़ान ने फ़र्स्ट लुक के साथ अपने स्टेटस में कुछ पंक्तियां हिंदी में लिखीं। ये लाइंस थीं- ”टिकटें लिए बैठें हैं लोग मेरी ज़िंदगी की, तमाशा भी पूरा होना चाहिए!”

इन पंक्तियों को पढ़ने वाले वाह-वाह कर उठे, मगर सोशल मीडिया के दौर में चोरी पकड़ने में देर नहीं लगती। इस ट्वीट के जवाब में कुछ फॉलोअर्स ने लिखा कि दरअसल ये पंक्तियां मिथिलेश बारिया नाम के लेखक की हैं, जो ट्विटर पर भी मौजूद हैं। बस फिर क्या था, यूज़र्स शाहरुख़ के पीछे पड़ गए और असली लेखक को क्रेडिट ना देने के लिए उन्हें ट्रोल करने लगे।

शाहरुख़ एक-दो दिन तक ख़ामोश रहे, मगर शनिवार 6 जनवरी को उन्होंने भूल सुधार किया। लेखक की पुस्तक का फोटो शेयर करके उन्होंने संदेश लिखा कि उनकी किताब उन्हें बहुत अच्छी लगी। साथ ही ये भी जता दिया कि वो इतना अच्छा लिखते हैं कि सोशल मीडिया में शेयर हो जाता है। शाह रुख़ ने टिकट वाली पंक्तियों के लिए मिथिलेश का शुक्रिया भी अदा किया। शाहरुख़ के संदेश को पढ़कर ऐसा महसूस होता है, जैसे लेखक ने अपनी किताब भेजकर उन्हें चोरी के बारे में आगाह किया हो, जिसके बाद शाहरुख़ ने लेखक को क्रेडिट दिया।

बहुत बहुत धन्यवाद। आपकी किताब मिली और पढ़कर बहुत अच्छा लगा। सोशल मीडिया पर आपने साबित कर दिया की हर जगह पर अच्छी बातें ही पसंद आती हैं। और “टिक्केटें लिये…” वाली पंक्तियों के लिए भी शुक्रिया ।

बता दें कि आनंद एल राय निर्देशित फ़िल्म इसी साल दिसंबर में रिलीज़ हो रही है। कटरीना कैफ़ और अनुष्का शर्मा फ़ीमेल लीड में हैं। शाह रुख़ मेरठ के बौने के रोल में हैं, जो बड़े-बड़े सपने देखता है। फ़िल्म के टाइटल को लेकर काफ़ी सस्पेंस रहा था, जिसे किंग ख़ान ने 1 जनवरी को खोला।

 

बाल कलाकारों से 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं करा सकेंगे निर्माता-निर्देशक

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मप्र में अब फिल्म, सीरियल्स, नाटक या रियलिटी शो में बाल कलाकारों से निर्माता-निर्देशक दिन में 5 घंटे और महीने में 27 दिन से ज्यादा काम नहीं करा सकते हैं। इसके लिए निर्माता-निर्देशक और बाल कलाकार के पालकों को कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी। बाल कलाकारों को शोषण से बचाने राज्य बाल संरक्षण आयोग भी मॉनिटरिंग करेगा। दोषी पाए जाने पर 20 से 50 हजार रुपए का जुर्माना और 2 साल तक की सजा का प्रावधान है।

जानकारी के अनुसार अभी कुछ महीने पहले राजधानी का बाल कलाकार सक्षम शर्मा का चयन टीवी चैनल के रियालिटी शो के लिए हुआ था। इसमें मुंबई में रात ढ़ाई बजे सक्षम से ऑडिशन लिया जा रहा था। इस दौरान बच्चे को लगातार नींद आ रही थी, जिसका माता-पिता ने विरोध किया था। इसी तरह के कुछ अन्य मामले भी सामने आए हैं। इसके चलते केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बाल श्रम (प्रतिशेष और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2017 में बाल श्रम और इसमें होने वाले शोषण को रोकने के लिए प्रावधान किए हैं। इसमें बाल कलाकारों को शोषण से बचाने विशेष नियम बनाए गए हैं। राजधानी में बाल कलाकारों की संख्या 2 हजार से ज्यादा है। इस अनिधियम के तहत निगरानी कलेक्टरों द्वारा की जाएगी।

कलेक्टर को देना होगा शपथ पत्र

किसी व्यावसायिक या आडियो-वीडियो कार्यकम जिसमें बाल कलाकार काम कर रहे हैं, उसके लिए निर्माता को जहां आयोजन होगा वहां के कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही बाल कलाकार को शामिल किया जा सकेगा। अनुमति के लिए कलेक्टर को आवेदन के साथ पालक की सहमति, कार्यक्रम की जानकारी और बच्चों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी व्यक्ति की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही बाल शोषण नहीं किए जाने का शपथ पत्र भी देना होगा।

आय का 20 फीसदी करना होगा बैंक में जमा

नए नियम के तहत बाल कलाकार जिस कार्यक्रम में काम कर रहे हैं उसकी अर्जित आय की 20 फीसदी राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में बच्चे के खाते में जमा की जाएगी। यह राशि बच्चे को वयस्क होने पर मिलेगी। इसके अलावा बाल कलाकारों के शिक्षा के लिए भी नियम बनाए गए हैं।

 

महिला सशक्तीकरण को मजबूती, ‘नारी’ और ‘ई-संवाद’ पोर्टल की शुरूआत

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महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने ई-पोर्टल ‘नारी’ की शुरूआत की, पोर्टल महिलाओं को सरकारी योजनाओं के बारे में मुहैया कराएगा सारी जानकारी, ग़ैरसरकारी संगठनों के साथ बेहतर तालमेल के लिए ई-सवांद पोर्टल की भी हुई शुरूआत।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नारी पोर्टल ‘NARI – national Portal of information for women’ का लोकार्पण किया, इस पोर्टल से महिलाएं सामाजिक, आर्थिक और कानूनी अधिकारों के अलावा केंद्र सरकार की लगभग 350 योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त कर इनका फायदा उठा सकती है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा महिलाओं के लिए आर्थिक, सामाजिक, क़ानूनी, मोर्चे पर तमाम योजनाएँ चलाई जा रही हैं लेकिन उन के बारे में जानकारी ना उपलब्ध होने की वजह से बहुत सी महिलाएँ इनका फायदा नहीं उठा पातीं।

सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में एन जी ओ और अन्य संस्थाएँ महत्वपूर्ण रोल अदा करती हैं। इनके साथ केंद्रीय मंत्रालय का समन्वय और बेहतर संपर्क बनाने  के लिए ई-संवाद पोर्टल शुरू किया गया है जहाँ ये संस्थाएं अपने अनुभव, सुझाव, शिकायतें साझा कर सकते हैं।इसके ज़रिए महिलाओं और बच्चों से जुड़ी शिकायतों के लिए संस्थागत तंत्र बना दिया गया है ताकि हर शिकायत का समाधान हो सके।

इस अवसर पर मेनका गांधी ने मंत्रालय के 2018 के लक्ष्य भी सामने रखे:

-जनवरी 2018 से देश के 315 ज़िलों में शुरू हो रहा है राष्ट्रीय पोषण मिशन
– बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का देश के सभी ज़िलों में होगा विस्तार
-प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का देश भर में होगा क्रियान्वयन
-एंटी-ट्रैफीकिंग बिल बजट सत्र में किया जाएगा पेश
-गोद लेने की व्यवस्था में होगा सुधार
– बाल संरक्षण संस्थाओं को दत्तक-ग्रहण तंत्र से जोड़ा जाएगा
– महिला सुरक्षा के लिए अहम पैनिक बटन की 26 जनवरी से उत्तर प्रदेश में होगी शुरुआत । इसके बाद इसी साल में देश भर में होगा शुरू
-चाइल्ड लाइन 1098 को इस साल 412 शहरों से बढ़ाकर 500 शहरों तक पहुंचाया जाएगा
-रेलवे चाइल्ड लाइन 33 रेलवे स्टेशनों से बढ़ाकर 88 स्टेशनों में होगी शुरू
-इस साल मौजूदा 165 के अलावा 150 नये ‘सखी’ – वन स्टॉप सेंटर्स खोले जाएंगे
-एन आर आई शादियों के मसले पर इस साल विभिन्न क़ानूनों में किया जाएगा ज़रूरी संशोधन

 

डिलिवरी स्टार्टअप शुरू कर रेवती ने हजारों गरीब महिलाओं को दिया रोजगार

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रेवती रॉय सामान की डिलिवरी करने का एक स्टार्टअप चलाती हैं। इस स्टार्टअप से उन महिलाओं को रोजगार मिलता है जिन्हें गुजारे की सख्त जरूरत होती है। वह ऐसी महिलाओं के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं लेकिन उनकी खुद की जिंदगी काफी संघर्षों से भरी रही है। अच्छी खासी जिंदगी से आर्थिक क्षति से गुजरने वाली आज कई गरीब महिलाओं की जिंदगी का सहारा बनी हुई हैं। 57 साल की रेवती के सामाजिक उद्यम का सफर 2007 में शुरू हुआ था। तब उन्होंने टैक्सी चलाने से अपनी शुरुआत की थी। 2016 में उन्होंने मुंबई में ‘दीदी डिलिवरी सर्विस’ की शुरुआत की।

इस दीदी डिलिवरी सर्विस में वे महिलाएं काम करती हैं जिन्हें नौकरी की सख्त जरूरत होती है और उन्हें कहीं रोजगार नहीं मिलता। अभी इस प्राइवेट लिमिटेड फर्म में लगभग 100 महिलाएं काम कर रही हैं, जिन्हें 10,000 प्रतिमाह की तनख्वाह मिलती है। लगभग 2,823 महिलाएं जाफिरो लर्निंग प्राइवेट लिमिटेड के साथ 45 दिनों का ट्रेनिंग प्रोग्राम अटेंड कर रही हैं। दीदी डिलिवरी सिस्टम को जॉइन करने वाली महिलाओं को इस ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। इस ट्रेनिंग के लिए हर महिला को 1,500 रुपये की फीस देनी पड़ती है, लेकिन प्रोग्राम का वास्तविक खर्च लगभग 12,000 रुपये आता है। बाकी के 10,000 रुपये महाराष्ट्र सरकार वहन करती है।

ट्रेनिंग मुंबई के अलावा बेंगलुरु और नागपुर में भी चल रही है। सिर्फ एक साल पहले शुरू हुए इस स्टार्ट अप के साथ एमेजन, पिज्जा हट और सबवे जैसी कंपनियां जुड़ गई हैं। इसके साथ ही मुंबई के कई लोकल रेस्टोरेंट के साथ भी दीदी डिलिवरी सर्विस काम कर रही है। रेवती ने सिर्फ एक साल में ही लगभग 1.5 करोड़ का टर्नओवर हासिल कर लिया है। अब उनकी योजना अगले साल तक 5 करोड़ का टर्नओवर हासिल करने की है। रेवती का ऑफिस वर्ली में है।

(साभार – योर स्टोरी)

 

जब स्वामी विवेकानंद ने भूखे रहकर बच्चों को दे दी रोटियाँ

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स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी घटनाएं प्रेरक प्रसंगों के रूप में भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पढ़ी-सुनी जाती हैं। ऐसा ही एक प्रेरक वाकया है, जिसमें उन्होंने स्वयं भूखे होने के बावजूद अपनी सारी रोटियां बच्चों में बांट दी।

किस्सा कुछ यूं है कि एक बार स्वामी जी अमेरिका गए। वहां वे अक्सर लंबी यात्राएं करते और अलग-अलग शहरों में भारत की महान संस्कृति और सनातन धर्म के बारे में व्याख्यान देते। लोग दूर-दूर से उन्हें सुनने आते और जब

लौटते तो धर्म और अध्यात्म के नजरिए से तृप्त होकर लौटते। ऐसे ही एक बार व्याख्यान के बाद स्वामी जी घर लौटे। तब वे अमेरिका में एक महिला के घर पर ठहरे थे। वे अपना भोजन खुद बनाते थे।

उस दिन सुबह से शाम तक भूखे ही व्याख्यान देकर स्वामी जी ने घर लौटकर बहुत यत्नपूर्वक भोजन बनाया। उस दिन उन्होंने अपनी रोजाना की मात्रा से कुछ ज्यादा ही रोटियां बनाईं। भोजन बनाकर, भगवान को भोग लगाकर, जैसे ही वे भोजन करने बैठे, कुछ बच्चों का झुंड उनके पास आ गया। वैसे भी अक्सर बच्चे उनके पास आ जाया करते थे। भोजन देखकर बच्चों के मुंह

में पानी आ गया और उन्होंने स्वामी जी से रोटियां मांग लीं। स्वामी जी ने भी झट से एक-एक करके रोटी सब बच्चों को दे दी। रोटियां खत्म हो गईं और स्वामी जी भूखे रह गए।

यह सारा दृश्य उस महिला ने देख लिया, जिसके घर में स्वामी जी रहते थे। उसने पूछा कि आप सुबह से भूखे हैं, फिर भी अपनी रोटियां बच्चों को क्यों दे दीं ? तब स्वामी जी ने कहा – ‘मां, ये रोटियां तो मेरे पेट की क्षुधा ही शांत कर सकती हैं, मेरे अंतर्मन की क्षुधा तो मेरे शास्त्रों और धर्म ग्रंथों ने पहले ही शांत कर दी। पेट की क्षुधा उतनी महत्वपूर्ण नहीं, जितनी अंतर्मन की!’

 

अनूठा है गंगा सागर, लोकप्रिय गंगा सागर मेला

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हिमाच्छादित हिमालय के हिमनद से आरम्भ होकर गंगा नदी, पर्वतों से नीचे उतरती है, और हरिद्वार से मैदानी स्थानों पर पहुँचती है| आगे बढ़ते हुए प्राचीन बनारस व प्रयाग से प्रवाहित होती हुई, बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। बंगाल में हुगली नदी के मुहाने पर जहाँ गंगा सहस्रों जलधाराओं में फूट पड़ती है तथा वहाँ पहुँचकर समुद्र में बह जाती है, उस स्थान को ‘सागर द्वीप’ कहा जाता है|

गंगासागर मेला पश्चिम बंगाल में आयोजित होने वाले सबसे बड़े मेलों में से एक है। इस मेले का आयोजन कोलकाता के निकट हुगली नदी के तट पर ठीक उस स्थान पर किया जाता है, जहाँ पर गंगा बंगाल की खाड़ी में मिलती है। इस द्वीप में ही रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतिक आवास है। यहां मैन्ग्रोव की दलदल, जलमार्ग तथा छोटी छोटी नदियां,नहरें है| इस द्वीप पर ही प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ है। प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर लाखों हिन्दू श्रद्धालुओं का तांता लगता है, जो गंगा नदी के सागर से संगम पर नदी में स्नान करने के इच्छुक होते हैं। इसीलिए इस मेले का नाम गंगासागर मेला है। यह मेला विक्रमी संवत के अनुसार प्रतिवर्ष पौष मास के अन्तिम दिन लगता है। यह मकर संक्रान्ति का दिन होता है|

यहाँ एक मंदिर भी है जो कपिल मुनि के प्राचीन आश्रम स्थल पर बना है।यहाँ लोग कपिल मुनि के मंदिर में पूजा अर्चना भी करते हैं। पुराणों के अनुसार कपिल मुनि के श्राप के कारण ही राजा सगर के ६० हज़ार पुत्रों की इसी स्थान पर तत्काल मृत्यु हो गई थी। उनके मोक्ष के लिए राजा सगर के वंश के राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और गंगा यहीं सागर से मिली थीं। कहा जाता है कि एक बार गंगा सागर में डुबकी लगाने पर 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हज़ार गाय दान करने के समान फल मिलता है। जहां गंगासागर का मेला लगता है, वहां से कुछ दूरी पर उत्तर वामनखल स्थान में एक प्राचीन मंदिर है। उसके पास चंदनपीड़िवन में एक जीर्ण मंदिर है और बुड़बुड़ीर तट पर विशालाक्षी का मंदिर है|

गंगासागर में स्नान का महत्व

मकर संक्रांति के दिन किसी भी पवित्र नदी एवं तालाब में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष तौर पर इस दिन गंगा स्नान का खास महत्व है। इसलिए हर वर्ष गंगा तटों पर खासतौर पर हरिद्वार एवं प्रयाग में मकर संक्रांति के दिन मेला लगता है। लेकिन इससे कोलकाता स्थित गंगासागर का महत्व कमतर नहीं हुआ है। गंगा के सागर में मिलने के स्थान पर स्नान करना अत्यन्त शुभ व पवित्र माना जाता है। स्नान यदि विशेष रूप से मकर संक्रान्ति के दिन किया जाए, तो उसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है।

मकर संक्रान्ति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस अवसर पर यह स्थान बड़े मेले का केन्द्र बन जाता है। यहाँ पर यात्री व सन्न्यासी पूरे देश से आते हैं। गंगा में स्नान कर ये लोग सूर्य देव को अर्ध्य देते हैं। मान्यतानुसार यह स्नान उन्हें पुण्य दान करता है। अच्छी फ़सल प्रदान करने के लिए धन्यवाद स्वरूप सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। इस त्यौहार पर तिल व तेल का विशेष महत्व है, इसलिए लोग इस दिन चावल का ही विशेष भोजन करते हैं| शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में स्नान और दान का जो महत्व है वह कहीं अन्यत्र नहीं है। इसलिए कहा जाता है “सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार”। कहने का तात्पर्य यह है कि सभी तीर्थों में कई बार यात्रा का जो पुण्य होता है वह मात्र एक बार गंगा सागर में स्नान और दान करने से प्राप्त हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार गंगा सागर में एक डुबकी लगाने से 10 अश्वमेघ यज्ञ एवं एक हजार गाय दान करने का पुण्य मिलता है|

गंगासागर के संगम पर श्रद्धालु ‘समुद्र देवता’ को नारियल और यज्ञोपवीत भेंट करते हैं। पूजन एवं पिण्डदान के लिए बहुत से पंडागण गाय–बछिया के साथ खड़े रहते हैं, जो उनकी इच्छित पूजा करा देते हैं। समुद्र में पितरों को जल अवश्य अर्पित करना चाहिए तथा स्नान के बाद कपिल मुनि का दर्शन कपिल मन्दिर में करना चाहिए। गंगासागर में स्नान–दान का महत्व शास्त्रों में विस्तार से बताया गया है| स्थानीय मान्यतानुसार जो युवतियाँ यहाँ पर स्नान करती हैं, उन्हें अपनी इच्छानुसार वर तथा युवकों को स्वेच्छित वधु प्राप्त होती है।अनुष्ठान आदि के पश्चात् सभी लोग कपिल मुनि के आश्रम की ओर प्रस्थान करते हैं तथा श्रद्धा से उनकी मूर्ति की पूजा करते हैं। मन्दिर में गंगा देवी, कपिल मुनि तथा भागीरथी की मूर्तियाँ स्थापित हैं|