तिरुअनन्तपुरम : केरल में बुनकरों की मदद के लिए बाढ़ में खराब हुई साड़ियों से गुड़िया बनाई गईं हैं। इसे चेकुट्टी नाम दिया गया। इन गुड़ियों को दुनियाभर में बेचने के लिए अमेरिका की सिलिकॉन वैली में एक ऐप भी बनाई गई। 2 अक्टूबर से गुड़ियों की बिक्री शुरू हो जाएगी। जिस साड़ी को बेचकर 1500 तक बुनकर कमाते थे, उसी से बनी करीब साढ़े तीन सौ गुड़ियों की बिक्री पर 9 हजार रुपए मिलेंगे। पिछले महीने केरल में आई बाढ़ में 290 लोगों की मौत हुई थी और राज्य को करीब 20 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा।
एर्नाकुलम जिले के चेंडामंगलम गांव को हैंडलूम गांव कहा जाता है। बाढ़ के चलते इस गांव का साड़ियों समेत काफी हैंडलूम मटेरियल खराब हो गया। चेकुट्टी गुड़िया को बुनकरों को त्रासदी से उबारने की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। हैंडलूम व्यवसाय से जुड़े लोगों की मदद के लिए केरल के दो सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बीड़ा उठाया। इन लोगों ने चेंडामंगलम से बाढ़ में खराब हुई साड़ी इकट्ठी की ताकि उनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।
डॉल बनाने की मुहिम से जुड़ीं लक्ष्मी मेनन के मुताबिक- इन साड़ियों को क्लोरीन से साफ करने के बाद उबाला जाता है ताकि सारे कीटाणु मर जाएं। इसके बाद ही चेकुट्टी बनाने का काम शुरू होता है। लक्ष्मी कहती हैं- जुलाहों के पास खराब साड़ियों को जलाने के अलावा कोई चारा नहीं था, लेकिन अब वे उम्मीद कर सकते हैं। लोग हमें इन डॉल्स के लिए वेबसाइट, फेसबुक और वॉट्सऐप पर बड़े ऑर्डर बुक कर रहे हैं।
चेकुट्टी यानी मिट्टी में खेलने वाला बच्चा
मलयालम में चेरु का मतलब मिट्टी और कुट्टी यानी बच्चा होता है। चेकुट्टी को मिट्टी में खेलने वाला बच्चा भी कह सकते हैं। लक्ष्मी कहती हैं कि चेकुट्टी में दाग-धब्बे जरूर हैं, लेकिन यह बाढ़ से जूझने वाले हर व्यक्ति की कहानी बयां करती है।
प्योर लिविंग नामक संगठन चलाने वाली लक्ष्मी ने बताया- एक हैंडलूम साड़ी की कीमत 1300-1500 रुपए होती है। एक साड़ी से 360 डॉल्स बनाई गईं। एक डॉल 25 रुपए में बेचने की योजना है। लिहाजा एक साड़ी से 9 हजार रुपए कमाए जा सकेंगे।
बाढ़ के वक्त लक्ष्मी ने अपने टूरिज्म आंत्रप्रेन्योर दोस्त गोपीनाथ परयिल के साथ बचाव और राहत अभियान में हिस्सा लिया था। ओणम त्योहार के लिए साड़ियां तैयार की गई थीं, लेकिन सभी बाढ़ में समा गईं।
दुख में डूबे गाँव में खुशी बनकर आई चेकुट्टी
लक्ष्मी के मुताबिक- बाढ़ पूरा गाँव दुख में डूबा था। हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा था। तभी हमें खराब साड़ियों से डॉल बनाने का आइडिया आया। जुलाहे भी इस बात से खुश हुए कि उनकी मेहनत खराब नहीं होगी। लक्ष्मी और गोपीनाथ ने आइडिया को सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने इसके लिए काम करने वाले वॉलंटियर्स को बुलाया। चेकुट्टी के लिए वेबसाइट बनाई। लक्ष्मी ने खुद जुलाहों को पास जाकर साड़ियां जुटाईं और वॉलंटियर्स को प्रशिक्षण दिया। चेकुट्टी के सपोर्ट के लिए मुख्यमंत्री पिनरई विजयन आगे आए। कोच्चि के आईटी हब इन्फोपार्क ने भी चेकुट्टी की बिक्री के लिए समर्थन दिया है। इन डॉल्स को चाबी के छल्ले, घरों में सजावट, हेंडबैग और गिफ्ट के तौर पर भी दिया जा सकता है।
बाढ़ में खराब हुई साड़ियों से बनी गुड़ियों से बुनकरों की मदद, ऐप से बिक्री
प्रसिद्ध फिल्मकार कल्पना लाजमी का निधन
मुम्बई : प्रसिद्ध फिल्मकार कल्पना लाजमी का यहां कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। परिवार के एक सदस्य ने यह जानकारी दी। वह 64 साल की थीं। लाजमी किडनी और लीवर के काम करना बंद करने की बीमारी से पीड़ित थीं। उनके भाई देव लाजमी ने बताया, ‘‘वह किडनी और लीवर के काम करना बंद करने की बीमारी से पीड़ित थीं।’’
लाजमी एक निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक थीं। वह यथार्थवादी फिल्में बनाने के लिये जानी जाती थीं। उनकी फिल्में अक्सर महिलाओं पर केंद्रित रहती थीं। उनकी कुछ लोकप्रिय फिल्मों में ‘रूदाली’, ‘दमन’, ‘दरमियान’ शामिल है।
लाजमी की बतौर निर्देशक आखिरी फिल्म 2006 में प्रदर्शित ‘चिंगारी’ थी। यह फिल्म भूपेन हजारिका के उपन्यास ‘द प्रॉस्टीट्यूट एंड द पोस्टमैन’ पर आधारित थी। हजारिका उनके पार्टनर भी थे।
अधिक सम्मान की हकदार थीं कल्पना लाजमी : रवीना
मुम्बई : फिल्म ‘दमन’ के दमदार किरदार के जरिये अभिनेत्री रवीना टंडन को अलग पहचान दिलाने वाली निर्देशक कल्पना लाजमी को याद करते हुए रवीना ने कहा कि बतौर फिल्मकार उन्हें जितना सम्मान मिला, वह उससे अधिक की हकदार थीं।
2001 में रजतपट पर आयी ‘दमन’ का विषय घरेलू हिंसा और जातीय विभाजन था। इस फिल्म के लिए रवीना टंडन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। रवीना ने कहा, ‘मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। वह 25 साल पहले महिला प्रधान फिल्में बना रही थीं जबकि उस समय इस तरह की फिल्मों का निर्माण करना और इसके लिए दर्शक खोजना चुनौतीपूर्ण था।’
उन्होंने कहा कि मगर उन्होंने इस चुनौती को कबूल किया और सशक्त तरीके से महिलाओं के मसलों को लोगों के समक्ष रखा। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य किया। उन्हें जितना सम्मान मिला है, वह उससे अधिक की हकदार थीं।
उन्होंने कहा कि लाजमी मजबूत फिल्मकार थीं लेकिन वह कलाकारों की निजता का सम्मान करती थीं। उन्होंने कहा कि वह कभी हताश नहीं होती थीं और यह उनकी बड़ी अच्छाई थी। ‘दमन’ का क्लाइमेक्स दुर्गा पूजा के दौरान फिल्माया गया।
जासूसी मामले में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नम्बी की गिरफ्तारी गैरजरूरी, 50 लाख मुआवजा दें- सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली : इसरो में 1994 में कथित जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व वैज्ञानिक नम्बी नारायण को राहत दी। अदालत ने कहा कि नम्बी नारायण को गिरफ्तार किया जाना गैरजरूरी था, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने नम्बी नारायण को बरी कर दिया था। कांग्रेस ने इस मामले में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरण को निशाना बनाया था। उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
नम्बी की गिरफ्तारी को सीबीआई ने गैरकानूनी करार दिया था : इस मामले में आरोप लगाए गए थे कि इसरो के दो वैज्ञानिकों समेत 6 लोगों ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के गोपनीय दस्तावेज विदेशों में भेजे थे। पहले पुलिस ने जांच की और फिर बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई जाँच में सामने आया था कि किसी तरह की जासूसी नहीं हुई थी। सीबीआई ने अपनी जाँच में केरल के पूर्व डीजीपी सीबी मैथ्यूज और दो पूर्व पुलिस अधिकारियों को नम्बी की गैरकानूनी गिरफ्तारी का जिम्मेदार ठहराया था। नम्बी ने इन अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर की थी। लेकिन, केरल हाईकोर्ट ने कहा था कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद नम्बी ने सुप्रीम कोर्ट में गए।
केवल मुआवजा काफी नहीं – सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि 76 वर्षीय नम्बी नारायण का मामला मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा है। केरल सरकार 8 हफ्तों के भीतर उन्हें 50 लाख रुपए मुआवजा दे। अदालत ने कहा कि केवल मुआवजा दिया जाना ही पूर्ण न्याय नहीं है। बेंच ने इस मामले में केरल पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। इसकी अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस डीके जैन करेंगे।
खरीदने जा रहे हैं हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान तो इन गलतियों से बचें
अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सही हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीदना आसान काम नहीं है। आज के समय में आप ऑनलाइन कुछ सेकेंड में हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीद सकते हैं। कई बार लोग प्लान की शर्तो को पढें बिना ही जल्द बाजी में हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीद लेते हैं। बाद में उनको इसका खामियजा उठाना पड़ता है। आज हम आपको कुछ ऐसी कॉमन गलतियों के बारे में बता रहे जिनसे हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीदते समय बचना चाहिए।
पर्याप्त कवरेज न होना
आम तौर पर जब कोई भी हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीदने का फैसला करता है तो प्लान का प्रीमियम इसमें अहम भूमिका निभाता है। कई बार लोग प्रीमियम पर खर्च बचाने के लिए कम कवरेज का प्लान ले लेते हैं। जैसे किसी को 6 लाख रुपए कवरेज की जरूरत है लेकिन प्रीमियम ज्यादा होने की वजह से वह व्यक्ति 4 लाख रुपए कवरेज का प्लान ले लेता है। प्लान का प्रीमियम एक अहम फैक्टर है लेकिन सिर्फ प्रीमियम पर आने वाले खर्च के आधार पर ही प्लान का चुनाव नहीं करना चाहिए।
बीमा कम्पनियों के प्लान से तुलना न करना
आपको हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान के लिए किसी एक बीमा कम्पनी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। मान लिया आपने किसी बीमा कंपनी से हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान ले लिया है तब भी रिन्यूअल के समय आपके पास यह ऑप्शन है कि आप तमाम बीमा कंपनियों के प्लान और उसके बेनेफिट को कंपेयर कर सकते हैं अगर आपको लगता है कि आपको कोई दूसरी बीमा कंपनी ज्यादा बेनेफिट दे रही है तो आपको दूसरी बीमा कंपनी का प्लान लेना चाहिए।
मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी न देना
बीमा कम्पनियां कई कारणों से आपका क्लेम रिजेक्ट कर सकती हैं। इसमे एक बड़ा कारण यह हो सकता है कि आपने अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में कम्पनी को सही जानकारी नहीं दी है। हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीदते समय बीमा कम्पनी को प्री एग्जिस्टिंग डिजीज यानी जो बीमारी आपको पहले से है इसके बारे में सही जानकारी देना जरूरी है। इसके अलावा भी आपको अगर कोई मेडिकल प्राब्लम हो चुकी है तो आपको इसके बारे में बीमा कंपनी को बताना चाहिए।
कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन का फीचर है या नहीं
हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान लेते समय आपको यह जरूर चेक करना चाहिए कि आपके प्लान में कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन की सुविधा है या नहीं। कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन का मतलब है कि जरूरत पड़ने पर आप हॉस्पिटल में भर्ती हो सकते हैं और मेडिकल बिल का भुगतान बीमा कंपनी करेगी। कई बार लोग इस फीचर पर समझौता कर लेते हैं और सोचते हैं कि वे पैसा जुटा कर इलाज करा लेंगे और बाद में बीमा कंपनी इलाज पर आने वाले खर्च को रीइम्बर्स कर देगी।
(साभार – मनी भास्कर)
साढ़े चार लाख रु. में नीलाम हुआ चरखे की अहमियत बताने वाला गाँधीजी का पत्र
बोस्टन : महात्मा गांधी का लिखा पत्र अमेरिका में 6 हजार 358 डॉलर (करीब 4 लाख 59 हजार रुपए) में नीलाम हुआ। इस पत्र में गांधीजी ने चरखे की अहमियत बताई है। पत्र में तारीख नहीं लिखी है। अमेरिका के आरआर ऑक्शन ने इस बात की जानकारी दी। चरखा खरीदने वाले की पहचान उजागर नहीं की गई है।
गांधीजी द्वारा यह पत्र गुजराती में यशवंत प्रसाद नामक व्यक्ति को लिखा गया था। इसमें हस्ताक्षर के रूप में बापू का आशीर्वाद लिखा गया है। गांधीजी ने यह भी लिखा कि मिलों में जो हुआ, उससे क्या उम्मीद करनी चाहिए। हालांकि, आप जो कह रहे हैं वह सही है।पत्र में गांधीजी ने लिखा- चरखा मैंने इसलिए अपनाया क्योंकि यह आर्थिक आजादी का प्रतीक है। दौरान गांधीजी लोगों को चरखा चलाने के लिए प्रेरित करते थे ताकि आजादी के आंदोलन को समर्थन मिल सके।
स्वदेशी आंदोलन के दौरान गांधीजी ने लोगों से अंग्रेजी कारखाने में बने कपड़े के बजाय खादी पहनने की अपील की थी। दक्षिण अफ्रीका से गांधीजी के आने के बाद से चरखा भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक बन गया।
प्रदूषण कम हो तो 87 फीसदी गाड़ी मालिक इलेक्ट्रिक वाहन के लिए तैयार : सर्वे
नयी दिल्ली : देश में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है। नए सर्वे में यह बात सामने आई है कि 87% भारतीय ड्राइवर और गाड़ी के मालिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने को तैयार हैं, अगर ये गाड़ियां वायु प्रदूषण को कम करें।
2,000 लोगों पर किया गया सर्वे
जलवायु के लिए काम करने वाली बेंगलुरू स्थित गैर लाभकारी संस्था द्वारा किए गए सर्वे में 2,000 से ज्यादा भारतीय ड्राइवर, मालिक और कार खरीदने की योजना बनाने वाले लोगों ने मतदान किया। इसके मुताबिक केवल 12% ड्राइवर और गाड़ी के मालिक पेट्रोल और डीजल का उपयोग करने के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर स्विच करेंगे। 2017 में भारत ने 900,000 इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेची।
गाड़ियों से हो रहा वायु प्रदूषण
2018 की विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार भारत के लगभग 11% गाड़ियां कार्बन उत्सर्जक हैं। देश भर के कई शहरों में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। दुनिया के शीर्ष 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं। केंद्र सरकार के थिंक टैंक, नीति आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत से एक दिन पहले जलवायु रुझान के सर्वेक्षण के निष्कर्ष 6 सितंबर, 2018 को लॉन्च किए गए थे।
इसके लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए ‘तेजी से स्वीकार करने और हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण'(FAME-2) पर बहु अनुमानित नीति को लांच करने की उम्मीद थी। इससे पहले FAME-1 को 2015 में जारी किया गया था। हालांकि, 7 सितंबर, 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव के ‘संकेत’ के बाद नीति को फिर से शुरू करने के लिए स्थगित कर दिया था।
सरकार का इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार योजना के अंतर्गत सब्सिडी देकर वाहन की कीमत को कम करने के अपने पहले के फोकस से हटकर वाहनों में बैटरी की कीमत को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्माता और विक्रेता एक ऐसी पॉलिसी का इंतजार कर रहे हैं जिसमें चार्जिंग स्टेशनों, विनिर्माण और खरीदने के लिए प्रोत्साहन सहित इलेक्ट्रिक गाड़ी के लिए इको सिस्टम बनाने के लिए एक रोडमैप बनाया जाए। ज्यादातर ड्राइवर और गाड़ी मालिक घटिया वायु की गुणवत्ता से प्रभावित हैं।
वायु प्रदूषण से सभी पीड़ित
सर्वे के अनुसार, 76% ड्राइवर और मालिक खुद, उनके दोस्त और पड़ोसी घटिया वायु गुणवत्ता से पीड़ित हैं।उत्तर देने वालों में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण से पीड़ित दिल्ली से थे। सर्वेक्षण में लगभग 91% ने कहा कि या तो उनका स्वास्थ्य या परिवार या पड़ोस में किसी के वायु प्रदूषण से प्रभावित है। इसी प्रकार, सर्वेक्षण के मुताबिक हैदराबाद (78%), चेन्नई (75%), मुंबई (74%), बेंगलुरू (71%), और कोलकाता (70%) में उच्च प्रतिशत दर्ज किए गए। सर्वे के अनुसार, खराब हवा की गुणवत्ता से बीमार होने में सबसे आम लक्षण सांस की तकलीफ, सांस लेने में परेशानी (55%), सिरदर्द (51%) और खांसी (51%) थीं। ये लक्षण दिल्ली और शहरी इलाकों में अधिक आम है। 18 से 24 वर्ष के बच्चों और ग्रामीण इलाकों में कम आम है।
चार्जिंग स्टेशनों की कमी सबसे बड़ा रोड़ा
60% उत्तर देने वालों के अनुसार, घरों के पास चार्जिंग स्टेशनों की कमी को इलेक्ट्रिक गाड़ी को खरीदने के लिए सबसे बड़ा रोड़ा के रूप में देखा गया। इसके बाद 46% ने अपर्याप्त ड्राइविंग को इसकी कमी के रूप में पहचाना गया। 31% के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियां रिचार्ज करने में लंबा समय लेती हैं। 26% के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियों में पेट्रोल या डीजल वाहन के समान सुविधाओं और शैलियों के साथ उपलब्ध नहीं हैं। 25% के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियां जो रेंज प्रदान करते हैं, उनके लिए बहुत महंगा हैं, इसमें प्रमुख आपत्तियां थीं।
दोपहिया वाहनों का बढ़ता बाजार
इलेक्ट्रिक गाड़ियों में दोपहिया वाहन भारत में बढ़त हैं। सर्वे के अनुसार भारत ऑटोमोबाइल के लिए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है, जिसमें 2017 में लगभग 25 मिलियन आंतरिक दहन (आईसी) इंजन बेचे गए थे। किसी भी अन्य देश की तुलना में 80% से अधिक या उनमें से लगभग 20 मिलियन दोपहिया वाहन थे।
इलेक्ट्रिक गाड़ी के निर्माता सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हिकल (एसएमईवी) के अनुसार, भारत ने 2017 में बेचे जाने वाले आईसी इंजन वाहनों में से एक लाख से भी कम बिजली से चलने वाले वाहनों को बेचा। इनमें से 93% से अधिक इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन और 6% दोपहिया वाहन थे। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में दोपहिया वाहन ही अग्रणी है, न कि कार या बस।
विदेशियों का भी दोपहिया वाहनों पर जोर
कैलिफोर्निया स्थित वाहन मूल्यांकन और ऑटो रिसर्च फर्म में सीनियर डायरेक्टर और कार्यकारी विश्लेषक रेबेका लिंडलैंड ने बताया कि हम भारत में चार पहिया वाहनों के माध्यम से सामंजस्य स्थापित करने के बजाय इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन मे अपना विकास देखेंगे। हालांकि, दोपहिया निर्माता सरकार के इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर ध्यान से निराश थे। एफएएम-2 पॉलिसी के मसौदे से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पूर्व फैक्ट्री मूल्य पर 20% सब्सिडी दी गई है।
(साभार – दैनिक जागरण)
‘चन्द्रयान-2’ चंद्रमा वहाँ उतरेगा जहाँ अब तक कोई नहीं पहुँचा
हैदराबाद : इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि भारत का चन्द्र अभियान ‘चन्द्रयान-2’ सोच समझकर लिया गया जोखिम है क्योंकि ऐसे 50 फीसद प्रक्षेपण असफल ही हुए हैं। उन्होंने कहा कि ‘चन्द्रयान-2’ चन्द्रमा पर ऐसे स्थान पर उतरेगा जहाँ अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है।
सिवन ने कहा कि चन्द्रमा पर ‘चन्द्रयान-2’ 70 डिग्री अक्षांश से ऊपर लैंड करेगा। उन्होंने बताया कि भारत 2019 के मध्य में स्मॉल सेटेलाइट लांच व्हीकल (एसएसएलवी) का पहला प्रक्षेपण करेगा। यह दुनिया का सबसे सस्ता लांच व्हीकल होगा। इसके डिजायन में काफी नवाचार किया गया है ताकि इसे 70 दिनों की बजाय 72 घंटों में असेंबल किया जा सके। लैपटॉप के साथ सिर्फ छह लोग इसे असेंबल कर सकते हैं।
इसरो अध्यक्ष ने कहा कि सबसे ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले देशों में भारत का स्थान विश्व में दूसरा है, लेकिन ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में भारत का स्थान दुनिया में 76वां है। उन्होंने बताया कि 2019 के अंत तक जीसैट-11, जीसैट-29 और जीसैट-20 को प्रक्षेपित किया जाएगा और उसके बाद देश में इंटरनेट की गति100 जीबीपीएस से अधिक हो जाएगी।
सिवन ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अगले चार साल में 30 पीएसएलवी, 10 जीएसएलवी एमके-3 और 50 स्पेसक्राफ्ट के प्रक्षेपण के लिए 10,900 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक का होगा विलय
नयी दिल्ली : सरकारी बैंकों को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम उठाते सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के विलय घोषणा कर दी है। इन तीनों बैंकों को मिलाकर जो बैंक बनेगा, उसका आकार 14.82 लाख करोड़ रुपये का होगा और वह एसबीआइ तथा पीएनबी के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा।
ब्रांच और एटीएम बढ़ेंगे
बाजार विशेषज्ञ आकाश जिंदल का कहना है कि तीनों बैंकों के विलय से ग्राहकों को अब बैंक संबंधित कार्य या एटीएम से पैसे निकालने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। विलय के बाद बैंकों की नई शाखाओं का निर्माण किया जाएगा और बैकों की संख्या में वृद्धि होगी। इसी के साथ एटीएम की संख्या में वृद्धि होगी। आपको अपने बैंक के एटीएम से पैसे निकालने के लिए भी दूर नहीं जाना पड़ेगा। कई नए एटीएम की स्थापना की जाएगी, जिसका ग्राहकों को लाभ मिलेगा।
नयी तकनीकों से लैस होंगे बैंक
तीनों बैंकों के विलय से बना बैंक देश का तीसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक होगा। इस प्रक्रिया के बाद बैंकों में नयी तकनीक का विकास होगा। तीनों बैंक नई तकनीक की तरफ अग्रसर होंगे, जिससे ग्राहकों का फायदा होगा। लंबी-लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा।
एफडी की दर पर पड़ेगा असर
तीनों बैंकों के ग्राहकों को दिए जाने वाले एफडी (Fixed deposit) पर दिए जाने वाला ब्याज दर अलग है। आपके मन में भी ये सवाल आया होगा कि बैंकों के विलय से एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर क्या कोई असर पड़ेगा। पुराने ग्राहकों को एफडी पर मिलने वाले ब्याज दर पर कोई असर नहीं पड़ेगा, हालांकि नए ग्राहकों के लिए इनमें बदलाव किया जा सकता है।
एटीएम और चेकबुक पर बदल सकता है बैंक का नाम
तीनों बैंकों के विलय के बाद हो सकता है कि आने वाले दिनों में आपके एटीएम और चेकबुक पर उस बैंक का नाम ही बदल जाए, जहां आपका अकाउंट है। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है उस समय एसबीआइ ने अपने 7 बैंकों का विलय किया था।
सुरक्षित रहेगा आपका पैसा
अगर आपको डर है कि इस प्रक्रिया से आपके बैंक डिपॉजिट पर कोई असर होगा, तो बिल्कुल परेशान न हों। इस प्रक्रिया से आपके बैंक डिपॉजिट पर कोई असर नहीं होगा और वह सेफ रहेगा, क्योंकि ऐसे मर्जर पहले भी हुए हैं। कोटक महिंद्रा बैंक में आइएनजी वैश्य बैंक का विलय किया जा चुका है। उस समय भी ग्राहकों का पैसा सेफ रहा था।
एटीएम और पासबुक होंगे अपडेट
बैंकों के मर्ज होने से उस बैंक के ग्राहकों का थोड़ा पेपरवर्क बढ़ जाएगा। इसके लिए केवाईसी का प्रॉसेस फिर से करना होता है। वहीं, आपका एटीएम और पासबुक नए सिरे से अपडेट होता है तो इसके लिए हल्का पेपरवर्क करना पड़ सकता है। हालांकि इसमें कुछ वक्त भी लग सकता है।
कर्ज के ब्याज दर पर नहीं पड़ेगा असर
बैंकों के विलय से आपके कर्ज पर कोई असर नहीं होगा और आपको पहले की तरह उस पर ब्याज देना होगा। जब कोई बैंक किसी दूसरे बैंक में मिल जाता है तो कर्ज का पैसा उस बैंक में ट्रांसफर हो जाता है और मौजूदा ब्याज दर ही उस पर लागू होता है।
बैंकिंग व्यवस्था में होगा सुधार
देश की बैंकिंग व्यवस्था के सामने एनपीए की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि देश की बैंकिंग व्यवस्था में सुधार की जरूरत है और सरकार बैंकों की पूंजीगत जरूरतों का ख्याल रख रही है। विलय तक तीनों बैंक स्वतंत्र रूप से काम करते रहेंगे।
इन राज्यों को होगा फायदा
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के साथ विजया बैंक और देना बैंक को मिलाने के बाद बनने वाला देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक संभवत: बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम से ही संचालित होगा। हालांकि अंतिम फैसला विलय प्रक्रिया पूरी होने के बाद में ही होगा। अभी तक गुजरात, महाराष्ट्र व उत्तर भारत के कुछ राज्यों में प्रमुखता से काम कर रहे बीओबी को इस विलय से सबसे ज्यादा फायदा होगा। उसे तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे अपेक्षाकृत संपन्न राज्यों में एक विशाल बैकिंग नेटवर्क हासिल होगा।
बीओबी के प्रमुख पीएस जयकुमार के मुताबिक, ‘तीनों बैंकों के लिए यह समान अवसर होगा। हमें एक साथ चार बड़े राज्यों में कारोबारी विस्तार का मौका मिलेगा।’ तीनों बैंकों के विलय से जो नया बैंक बनेगा, उससे बैंकिंग ऑपरेशन बढ़ेगा और स्थिति में सुधार आएगा। विलय के बाद कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
जेटली ने कहा कि सरकार द्वारा विलय की घोषणा के मद्देनजर इन तीनों बैंकों के कर्मचारियों को अपने करियर को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं। किसी भी कर्मचारी को ऐसी सेवा दशाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा, जो उनके लिए प्रतिकूल प्रकृति की हो। सबसे बेहतर सेवा दशाएं उन सभी पर लागू होंगी। आकाश जिंदल का भी कहना है कि सरकार को कर्मचारियों के लिए ऐसी नीति अपनानी चाहिए जो उनके हित में होगी।
(साभार – दैनिक जागरण)
लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में 0.4 प्रतिशत तक की वृद्धि
नयी दिल्ली : केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) समेत लघु बचत योजनाओं के लिए ब्याज दर अक्तूबर-दिसम्बर तिमाही के लिए 0.4 प्रतिशत तक बढ़ा दी है।
लघु बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों को तिमाही के आधार पर संशोधित किया जाता है।
वित्तमंत्री द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही के लिए विभिन्न लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें संशोधित की जाती हैं।
पाँच वर्ष की सावधि जमा, आवर्ती जमा और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की ब्याज दरें बढ़ाकर क्रमश: 7.8 प्रतिशत, 7.3 प्रतिशत और 8.7 प्रतिशत कर दी गयी हैं।
हालांकि बचत जमा के लिए ब्याज दर चार प्रतिशत बरकरार है। पीपीएफ और एनएससी पर मौजूदा 7.6 प्रतिशत की जगह अब आठ प्रतिशत की सालाना दर से ब्याज मिलेगा। किसान विकास पत्र पर अब 7.7 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा और अब यह 112 सप्ताह में परिपक्व हो जाएगा।
सुकन्या समृद्धि खातों के लिए संशोधित ब्याज दर 8.5 प्रतिशत होगी। एक से तीन साल की सावधि जमा पर ब्याज दर में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है।




