Monday, April 13, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 664

एसबीआई ने घटाई एटीएम से कैश निकालने की सीमा

नयी दिल्ली : देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एटीएम से कैश निकालने के नियमों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। एसबीआई ने कैश निकालने की दैनिक सीमा में बड़ी कटौती करने का फैसला किया है। एसबीआई के ग्राहक 31 अक्टूबर से एक दिन में अधिकतम 20 हजार रुपये कैश ही एटीएम से निकाल सकेंगे, अभी तक यह सीमा 40 हजार रुपये थी.

एसबीआई ने ब्रान्चों में भेजे आदेश दिया है कि एटीएम लेनदेन में धोखाधड़ी की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए और डिजिटल-कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैश निकासी सीमा को घटाने का फैसला किया गया है। ‘Classic’ और ‘Maestro’ प्लेटफॉर्म पर जारी डेबिट कार्ड से निकासी सीमा को घटाया गया है।
कैश निकासी सीमा में कटौती त्योहारी सीजन से ठीक पहले हुई है। सरकार द्वारा डिजिटल लेनदेन पर जोर दिए जाने के बावजूद कैश की माँग अधिक बनी हुई है। कुछ अनुमानों के मुताबिक बाजार में कैश फ्लो नोटबंदी से पहले के स्तर तक पहुंच गया है। पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में पाया गया है कि कार्ड का क्लोन बनाने वाले धोखेबाज आम बैंक कस्टमर्स के डेबिट कार्ड का पिन चोरी से लगाए गए कैमरों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज से पता कर लेते हैं। कुछ बड़े बैंकों की क्रेडिट कार्ड ग्रोथ को छोटे शहर बढ़ावा दे रहे हैं और टॉप 10 शहरों के बाहर के कार्ड धारक इस तरीके से होने वाले खर्च में 40-45 प्रतिशत योगदान कर रहे हैं।

भारत में 40 फीसदी लड़कियां स्‍कूलों से बाहर हैं: एनसीपीसीआर

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने मंगलवार को कहा कि देश में 40 फीसदी लड़कियां स्‍कूलों से बाहर हैं। बच्चों की तस्करी से निपटने में शिक्षा की भूमिका पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में एनसीपीसीआर के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा, ‘‘भारत में 18 साल से कम उम्र की 40 फीसदी लड़कियां और 35 फीसदी लड़के स्‍कूलों से बाहर हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ जो बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं वे बाल दुर्व्‍यापार के शिकार हो सकते हैं। वे गरीब परिवारों से आते हैं और उनके माता-पिता स्‍कूलों की फीस जमा करने में असमर्थ होते हैं। ऐसे बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, उनमें आत्म-सम्मान पैदा करेगी और उन्‍हें उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करेगी।’ कैलाश सत्यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा आयोजित सम्मेलन में कानूनगो ने कहा, ‘‘ शिक्षा से सशक्तिकरण होगा और उस सशक्तिकरण से बाल दुर्व्‍यापार से निपटने में मदद मिल सकती है। इस दिशा में कारगर प्रयास के तहत 15-18 वर्ष की लड़कियों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की जरूरत को राज्‍य को समझना होगा।”
बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन रिभु ने सामूहिक जिम्‍मेदारी की जरूरत पर बल देते हुए कहा, “जब एक बच्चे की तस्करी की जाती है तो उस बच्चे के हर मौलिक अधिकार को छीन लिया जाता है। यह हमारी सामूहिक जिम्‍मेदारी होनी चाहिए कि हर बच्‍चा मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा पाए और उसका बचपन सुरक्षित और खुशहाल हो।”

पुरुष भी अपने पास रखें स्पेशल ग्रूमिंग किट

लड़कियों का सामान और उनका पर्स थोड़ा वजनी होता है और उनको परेशानी भी नहीं होती मगर पुरुषों के मामले में ऐसा नहीं है। आप अपने दफ्तर में अपनी सहकर्मी का पिटारा देखते होंगे तो आपको लगता है कि भई, कैसे.,…आखिर कैसे करती हैं…ये सब? अब वो क्या है न अधिकतर लड़कियाँ अपने लुक्स को लेकर काफी सजग रहती हैं। दफ्तर से निकलते समय टचअप देना नहीं भूलतीं जिसमें लिपस्टिक को थोड़ा गहरा करना, बाल सँवार लेना भी शामिल है मगर आप जब अपना पर्स देखते हैं तो उनमें से सबसे ज्यादा कोई चीज मिलती है तो वह है पतली सी कंघी और एक रूमाल, जिसे न जाने आप कितनी बार खो चुके होते हैं।
अच्छा एक बात बताइए क्या आपने कभी सोचा है कि आपको भी सुन्दर और हैंडसम दिखने का हक है। ईश्वर ने तो सुन्दर सबको बनाया है तो आप ये क्यों सोच लेते हैं कि खूबसूरत दिखना सिर्फ लड़कियों का काम है। दरअसल, ये अपनी जरूरत को नजरअन्दाज करना है जो आप बरसों से करते आ रहे हैं। सच तो यह है कि तारीफ सुनना आपको भी अच्छा लगता है। अच्छा, अब सच्ची -सच्ची बताइए कि क्या किसी दिन आप जरा अच्छी तरह शेविंग कर अच्छे से तैयार हुए तो आपको क्या फील गु़ड नहीं होता। उस पर आपकी किसी दोस्त ने आपकी तारीफ कर दी तो बस दिन बन गया आपका…जानते हैं, ये जो कनसेप्ट बना रखा है न इसके लिए सजो, उसके लिए सजो या सुन्दर दिखो, हमको तो यह पूरा कन्सेप्ट ही फ्लॉप लगता है। भई, सुन्दर दिखना, अच्छा लगना हमारी जरूरत है तो हम किसी और के लिए क्यों सजें? वह एक हिस्सा हो सकता है, मतलब आप अपनी साथी की पसन्द का कुछ करें या आपकी साथी आपकी पसन्द का कुछ करें तो अलग बात हैं मगर वह ट्रेंड अपनाना, जो अच्छा न लगे मगर खुश करने के लिए करना…ये थोड़ा विचित्र नहीं है…माने फैशन तो आपके व्यक्तित्व और कार्यक्षेत्र पर निर्भर करता है न…आखिर क्यों किसी मॉडल या हीरो को ही सुन्दर दिखना चाहिए….एक आम आदमी…आम जिन्दगी में अपना जरा सा ख्याल रखकर फील गुड करता है, खुद को खुशी देता है तो इसमें गलत क्या है? हम तो कहते हैं कि अगली बार जब आपके सामने अपना मेकअप बॉक्स खोले, आप भी खोल दीजिए अपने ग्रूमिंग के साजो – सामान और फिर देखिए….अच्छा लगेगा…।
अगर आप सोच रहे हैं कि आप किस तरह के उपकरण इस्तेमाल कर सकते हैं। तो सबसे पहले तो आपको एक अच्छा बैग चाहिए और साइज सही रखिए तभी तो सारा सामान आयेगा इसमें। इसके साथ ही यह आपकी एक एक्सेसरीज भी बन सकता है।
नम और खिली – खिली त्वचा सबको अच्छी लगती है और मॉइश्चराइजर आपकी मदद करता है। त्वचा आपकी ताजी, नर्म, मुलायम रहती है। कोशिश करें एसपीएफ युक्त मॉश्चरराइजर लें जिससे आपकी त्वचा यूवी किरणों से भी बची रहेगी और झुर्रियों की समस्या से भी बचाव होगा।
पुरुषों को अपने किट बैग में शेविंग क्रीम जरूर रखना चाहिए। इसकी मदद से आप कहीं भी खुद को तरोताजा कर सकते हैं। शेविंग क्रीम कई प्रकार के ट्यूब में उपलब्ध होती है। अपनी जरूरत के हिसाब से इसका चुनाव करें और अपने बैग में रखना ना भूलें।
अपने बालों को कहीं भी संवारने के लिए हेयर जेल रखना ना भूलें। हर प्रकार के बालों के लिए अलग जेल आता है। अपने बालों के हिसाब से जेल का चुनाव करें और हमेशा अपने साथ इस रखें।
आजकल बाजार में कई तरह के अच्छे रेजर मौजूद है जिन्हें आसानी से अपने बैग में रख सकते हैं। इसकी मदद से आप खुद को कुछ मिनटों में ही तरोताजा बना सकते हैं तो इसे अपने किट में रखना कभी ना भूलें।
जब कभी आप बिजनेस टूर या फैमिली के साथ कहीं जा रहे हों तो अपने बैग में नेल क्लीपर्स जरूर रख लें। कई बार नाखूनों से जुड़ी समस्याएं काफी दर्द देती हैं। इसकी मदद से आप यात्रा के दौरान भी आसानी से नाखूनों की जुड़ी समस्या को दूर कर सकते हैं।
यह तो हर पुरुष के पास मौजूद होती ही है लेकिन फिर भी जो लोग इसे जरूरी नहीं समझते हैं उन्हें भी इसे अपने पास रखना चाहिए जिसकी मदद से आप अपने बालों को कहीं भी संवार सकते हैं। बालों का आपके लुक पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसलिए कंघी हमेशा साथ में रखें।
कई बार ऐसा होता है कि आप कोई विशेष शैंपू प्रयोग करते हैं जो हर जगह नहीं मिल सकता है। ऐसे में आपको अपने बालों का ध्यान रखते हुए अपना शैंपू रखना नहीं भूलना चाहिए। शैंपू की मदद से आपके बाल साऱ सुथरे, मुलायम और खुशबूदार हो जाएंगे।
टूथ पेस्ट और टूथ ब्रश दो ऐसी चीजें हैं जिन्हें भूलने का मतलब है अपने लुक को खराब करना। इनकी मदद से आप खुद को ताजगी का अहसास करा सकते हैं इसलिए अपेन बैग में इन दोनों चीजों को रखना कभी ना भूलें।
पसीने की बदबू से बचने के लिए हर समय डियोडरेंट को पास में रखें। यह ना सिर्फ पसीने की बदबू से छुटकारा दिलाता है बल्कि इसकी खुशबू आपका मूड फ्रेश कर ताजगी का एहसास कराती है।

‘मंगल की मिट्टी’ से पता चल सकेगा कि ग्रह पर कैसे उगेंगी साग-सब्जियां

वॉशिंगटन : वैज्ञानिकों ने प्रयोग के लिए मंगल ग्रह की मिट्टी से मिलती-जुलती ऐसी मिट्टी विकसित की है जो इस लाल ग्रह पर साग-सब्जियां उगाने के तरीके ढूंढने में मदद कर सकती है। अमेरिका की सेंट्रल फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी (यूसीएफ) के अनुसंधानकर्ताओं ने वैज्ञानिक पद्धति और मानकीकृत तरीके से मंगल एवं क्षुद्रग्रह की मिट्टी तैयार की। इस मिट्टी को प्रतिरूप के तौर पर माना जाता है।
यूसीएफ के डैन ब्रिट ने कहा, “मंगल ग्रह पर दुनिया बसाने की दिशा में यह प्रतिरूप अनुसंधान के लिए बहुत उपयोगी है। अगर हम वहां जाने के बारे में सोच रहे हैं तो हमें भोजन, पानी एवं अन्य जरूरी चीजों की जरूरत होगी। जब हम शोध पदार्थ विकसित कर रहे हैं तो हमारे पास यह जांचने का तरीका भी होना चाहिए कि इन विचारों को अमलीजामा कैसे पहनाया जाए।” मंगल ग्रह पर खाद्य सामग्रियां उगाने के रास्ते तलाश रहे वैज्ञानिकों को इन तकनीकों को उस मिट्टी पर जांचना जरूरी है जो मंगल की मिट्टी से काफी मिलती-जुलती है। अनुसंधानकर्ताओं का यह सूत्र क्यूरोसिटी रोवर द्वारा मंगल से इकट्ठी की गई मिट्टी की रासायनिक प्रकृति पर आधारित है।

प्राकृतिक तरीकों से पाएं पसीने की बदबू से छुटकारा

पसीने की बदबू काफी ज़्यादा बढ़ जाती है और जिनको पसीना अधिक होता है, वे साल भर इससे परेशान रहते हैं। इससे बचने के लिए शरीर की अच्छी तरह सफाई, लाइट फ्रैबिक वाले कपड़े पहनने के अलावा एंटी-बैक्टिरिअल और एंटी-सेप्टिक सोप का इस्तेमाल करना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए लेकिन इन सबके बावजूद पसीने की बदबू कई बार जाती नहीं है. इसके लिए और डियोडरेंट का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन इसका असर भी कुछ देर ही रहता है. इस परेशानी से बचने के लिए आप कुछ प्राकृतिक तरीकों की मदद ले सकती हैं. तो यहां जानिए ऐसे प्राकृतिक तरीके जो आपको पसीने की बदबू से राहत दिलाएंगे –

नींबू
इसमें मौजूद एसिडिक प्रोपर्टीज़ बॉडी के pH को बैंलेस कर बैक्टिरिया को पैदा होने से रोकता है और इसे परेशानी को खत्म करता है। नहाने के बाद आधे नींबू का टुकड़ा लें और इसे अंडरआर्म और बाकी पसीने वाले हिस्से में रगड़ें। अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो नींबू का रस निकालकर इसमें पानी मिलाएं और कॉटन की मदद से इसे लगाएं।

एप्पल साइडर विनेगर
एसिडिक होने की वजह से ये पसीना और बदबू पैदा करने वाले बैक्टिरिया को खत्म कर इस परेशानी से राहत दिलाता है। 1 बड़ा चम्मच एप्पल साइड विनेगर और 2 बड़े चम्मच गुलाबजल या पानी मिलाकर इसे कॉटन की मदद से अंडरआर्म और जिस हिस्से में पसीना होता है वहां अच्छी तरह लगाएं। गुलाबजल एक एस्टिंजेन्ट होता है और ये पसीना पैदा करने वाले पोर्स को कम कर इस परेशानी को खत्म करने में मदद करता है।

ग्रीन टी
इसमें मौजूद टैनिक एसिड बदबू पैदा करने वाले बैक्टिरिया को खत्म करने में असरदार होता है। एक ग्रीन टी बैग लें और इसे एक चौथाई कप पानी में उबाल लें। ठंडा होने पर नहाने के बाद इस पानी को पसीने वाले हिस्से में इस कॉटन से अच्छी तरह लगाएं। ऐसा करने के साथ ही हर रोज़ खाली पेट ग्रीन टी भी पिएं। इससे आपकी देह से टॉक्सिन्स निकलेगा और साथ ही बदबू से राहत मिलेगी।

बेकिंग सोडा
अपनी एंटीबैक्टिरिअल प्रोपर्टीज़ और मॉइश्चराइज़र सोखने करने की खूबी की वजह से ये पसीने की बदबू से राहत दिलाता है। 1 बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा लें और इसमें पानी या पर्याप्त मात्रा में नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे अंडरआर्म एरिया और पसीने वाले हिस्से पर लगाएं और सूखने पर हटा लें। इसे हटाते वक्त इसे रगड़ने की गलती ना करें. हां, इसके इस्तेमाल से पहले एक पैच टेस्ट लें।

नारियल तेल
जी हां, आपके बालों को मज़बूत बनाने के साथ ही ये पसीने की बदबू से छुटकारा दिलाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद lauric acid पसीने पैदा करने वाले बैक्टिरिया को खत्म करने में मदद करते हैं। नहाने के बाद अंडरआर्म और देह को अच्छी तरह पोंछकर सुखा लें. अब पसीने वाले हिस्सों पर नारियल तेल अच्छी तरह लगाएं.

जब बच्चा हो जाये जिद्दी

बड़ो को देखकर भी उन्हें नज़रअंदाज़ करते हुए आगे निकल जाना, किसी की मदद न करना, बातचीत में असभ्य भाषा का इस्तेमाल और दूसरों की असुविधा का खयाल न रखना, आजकल कुछ बच्चों या टीनएजर्स में अकसर ऐसी आदतें नज़र आती हैं। यह देखकर आपको भी बहुत बुरा लगता होगा लेकिन खास उम्र के बाद उनके व्यवहार में बदलाव लाना मुश्किल है। अगर आप प्ले स्कूल जाने वाले नन्हे बच्चे की माँ हैं और भविष्य में उसे ऐसी आदतों से बचाना चाहती हैं तो उसकी परवरिश के प्रति सचेत रहें ताकि उसके व्यक्तित्व में अच्छे संस्कारों के बीज विकसित हों।

घर है पहला स्कूल
आमतौर पर दो-ढाई साल की उम्र में बच्चे बड़ों के निर्देशों को समझने लगते हैं और उनमें अच्छी आदतें विकसित करने के लिए इसी उम्र से अभिभावक को सचेत हो जाना चाहिए। भाई-बहनों या दोस्तों के साथ छीना-झपटी और मारपीट जैसी आदतों को ज्य़ादातर पेरेंट्स बाल सुलभ हरकतें समझकर अनदेखा कर देते हैं पर बाद में उन्हें बदलना मुश्किल हो जाता है। इस संबंध में सर गंगाराम हॉस्पिटल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ.आरती आनंद कहती हैं, ‘यही वह उम्र है, जब बच्चों को शेयरिंग सिखाने की ज़रूरत होती है।

साझा करना सिखायें
अगर आपके घर में एक से ज्य़ादा बच्चे हों तो उनके लिए अलग-अलग चीज़ें लाने के बजाय चॉकलेट या वेफर्स का एक बड़ा पैकेट लेकर आएं। फिर बड़े बच्चे को पैकेट सौंपते हुए उससे कहें कि इसे तुम सबके साथ शेयर करोगे। इससे उसमें साझा करने के साथ जि़म्मेदारी की भी भावना विकसित होगी। अगर घर में एक ही बच्चा हो तो उसे दोस्तों के साथ शेयरिंग सिखाना बहुत ज़रूरी है। छुट्टियों में आप उसे अपने वैसे दोस्तों या रिश्तेदारों के घर लेकर जाएं, जहाँ उसके हमउम्र बच्चे हों। कभी-कभी अभिभावक को जानबूझकर उनसे कुछ चीज़ें माँगनी चाहिए ताकि उनमें साझा करने की आदत बनी रहे।

मैदान में अनुशासन
रोज़ाना शाम को बच्चों को अपने साथ पार्क जैसे किसी सार्वजनिक स्थल पर ज़रूर ले जाएं। उनके समाजीकरण के लिए यह बहुत ज़रूरी है। वहां अगर वह किसी दोस्त को धक्का देकर गिराने या उसके साथ मारपीट जैसी हरकतें करे तो इसे बच्चे की मासूम शरारत समझकर इग्नोर न करें, बल्कि उसे प्यार से समझाएं कि अगर कोई तुम्हारे साथ भी ऐसा करे तो तुम्हें कैसा लगेगा? इससे बच्चों में इम्पैथी यानी दूसरों की तकलीफ समझने की भावना विकसित होगी। पार्क में कई बार बच्चे झूले पर सबसे पहले बैठने के लिए मचलने लगते हैं। ऐसे में आप उन्हें अपनी बारी का इन्तज़ार करना सिखाएं। साथ ही बच्चों को यह बताना भी बहुत ज़रूरी है कि सभी को खेलने का समान अवसर मिलना चाहिए। इस तरह खेल-खेल में बच्चे अनुशासन के नियम भी सीख जाएंगे।

सिखाएं गुस्से को नियंत्रित करना
छोटी-छोटी बातों के लिए बच्चों का रूठना या जि़द करना स्वाभाविक है। उनके ऐसे किसी व्यवहार पर ओवर रिएक्ट करने के बजाय धीरे-धीरे उन्हें यह समझाना बहुत ज़रूरी है कि तुम्हारी हर बात नहीं मानी जाएगी। कई बार बच्चे गुस्से में तोडफ़ोड़ या मारपीट जैसे हिंसक व्यवहार करने लगते हैं। अगर कभी आपका बच्चा रो-चिल्लाकर किसी चीज़ के लिए जि़द करे तो उस वक्त उसकी कोई भी माँग पूरी न करें। इससे उस तक यह गलत संदेश जाएगा कि जि़द करके मम्मी-पापा से अपनी हर बात मनवाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में पहले उससे शांत रहने को कहें। फिर जब वह शालीनतापूर्वक आपके सामने अपनी कोई माँग रखता है तभी उसकी बात मानें।
बड़ों का सम्मान
बच्चों की शरारतें और प्यारी-प्यारी बातें सभी को अच्छी लगती हैं पर कई बार बातचीत के दौरान वे अपशब्दों का भी प्रयोग करते हैं। किसी बात पर नाराज़ होकर बड़ों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। ज्य़ादातर परिवारों में लोग बच्चों को मना करने के बजाय उनकी ऐसी हरकतों पर हंसते हैं। इससे उन्हें ऐसा लगता है कि मेरा यह व्यवहार लोगों को अच्छा लगता है। इसलिए जब भी आपका बच्चा कोई ऐसी हरकत करे तो उसे रोकना बहुत ज़रूरी है। अगर बच्चों के दादा-दादी साथ रहते हैं तो अभिभावकों की यह जि़म्मेदारी बनती है कि वे इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे भी उनके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाएं। बुज़ुर्गों की मदद करना और उनकी बातें ध्यान से सुनना जैसी आदतें बच्चों में छोटी उम्र से ही विकसित होनी चाहिए।

सिखाएं विनम्रता का पाठ
केवल परिवार के साथ ही नहीं बल्कि आसपास के उन सभी लोगों के प्रति विनम्र व्यवहार अपनाना चाहिए, जो किसी न किसी भी रूप में हमारे मददगार होते हैं। मसलन घरेलू सहायक, ड्राइवर, सफाई कर्मचारी और सिक्युरिटी गार्ड आदि। बच्चे को समझाएं कि ये सभी लोग हमारी मदद करते हैं, इसलिए हमें इनके साथ प्यार से पेश आना चाहिए। उसमें ऐसी आदत विकसित करें कि वह ऐसे लोगों के लिए अंकल-आंटी या भैया-दीदी जैसे सम्मान सूचक सम्बोधनों का प्रयोग करे। अगर आप रोज़मर्रा के सामान खरीदने बाज़ार जाती हैं तो अपने बच्चे को भी अपने साथ लेकर जाएं। उसे सिखाएं कि अगर रास्ते में कोई परिचित अंकल-आंटी मिलें तो उन्हें नमस्ते ज़रूर करना चाहिए। इससे उसे सामाजिक व्यवहार सीखने में मदद मिलेगी।

जलवायु परिवर्तन से देश में 280 प्रजातियों के जीव व पौधे विलुप्त

‘मुझे प्रकृति के अतिरिक्त किसी प्रेरणा की आवश्यकता नहीं है। उसने मुझे कभी हारने नहीं दिया। किसी प्रकार की गंदगी फैलाना प्रकृति के साथ की जाने वाली हिंसा का ही एक रूप है।’ करीब 100 साल पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कही यह बातें अब सच साबित हो रही हैं। प्रकृति के प्रति क्रूरता का ही परिणाम है कि आज देश में 148 प्रजाति के जीव व 132 प्रजाति के पौधे विलुप्त हो गए हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। इनमें कुछ इतने महत्वपूर्ण पौधे हैं कि उनका इस्तेमाल औषधि बनाने के लिए हो रहा था। यह जानकारी पर्यावरणविद व नोएडा के सेक्टर 132 में रहने वाले रंजन तोमर की ओर से लगाई गई आरटीआइ के तहत केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले जैव विविधता प्राधिकरण से मिली है।
जैव विविधता प्राधिकरण ने ऐसे सभी पौधों व जीवों को संरक्षित श्रेणी में डालते हुए सूची को वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है। साथ ही केंद्रीय जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से सभी प्रदेश सरकारों को बचे हुए जीवों व पशुओं को संरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दे दिए गए हैं। पर्यावरणविद रंजन तोमर का कहना है कि हरियाली का दायरा घटने से जलवायु परिवर्तन हुआ। 280 प्रजाति में तमाम ऐसे जीव व पौधे थे, जो पर्यावरण को संतुलित रखने में मददगार थे। उन्होंने कहा कि संभवत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे समझा है। इसी कारण वह स्वच्छता पर लगातार जोर दे रहे हैं। हम गांधीजी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं। अगर हम स्वच्छता का संकल्प लेकर विभिन्न जीव व पौधों को विलुप्त होने से बचा सकने में योगदान करें तो यही गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सरकार ने स्थापित किए रिसर्च सेंटर
केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ महेश शर्मा के अनुसार विलुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने के लिए केंद्र सरकार बेहद गंभीर है। हम लोग मिशन बनाकर इसे रोकने में लगे हैं। जैसे सेव टाइगर नाम से अभियान चला रहे हैं। विभिन्न रिसर्च सेंटरों को स्थापित किया जा रहा है। इससे विलुप्त होते पौधों व जीवों को बचाने पर काम हो रहा है। प्रधानमंत्री स्वच्छता पर आंदोलन चला रहे हैं, जिससे वायुमंडल को स्वच्छ किया जा सके व जीव तथा पौधों को विलुप्त होने से बचाया जा सके। पौधे व जीव विलुप्त होने के मामले में तमिलनाडु की स्थिति सबसे खराब है। वहां सबसे अधिक 23 पौधों की प्रजाति विलुप्त हो चुकी है। 6 प्रजाति के पशु भी विलुप्त हो चुके हैं। इसमें पेंथरा टाइगर भी है।

(साभार – दैनिक जागरण)

मोहम्मद मुश्ताक अहमद बने हाकी इंडिया के नये अध्यक्ष

नयी दिल्ली : मोहम्मद मुश्ताक अहमद को हाकी इंडिया के आठवें सम्मेलन और चुनाव के दौरान हाकी इंडिया का नया अध्यक्ष चुना गया । हाकी इंडिया के पूर्व महासचिव अहमद निवृतमान अध्यक्ष राजिंदर सिंह की जगह लेंगे । उनका चुनाव सर्वसम्मति से हुआ है ।
मणिपुर के ज्ञानेंद्रो निंगोमबाम सीनियर उपाध्यक्ष होंगे जबकि जम्मू कश्मीर हाकी की असिमा अली और हाकी झारखंड के भोलानाथ सिंह उपाध्यक्ष होंगे । हाकी जम्मू कश्मीर के राजिंदर सिंह ने मरियम्मा कोशि के रिटायर होने के बाद पद संभाला था । उन्हें नया महासचिव और हाकी असम के तपन कुमार दास को कोषाध्यक्ष चुना गया है । भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान असुंथा लाकड़ा और छत्तीसगढ हाकी के फिरोज अंसारी संयुक्त सचिव होंगे। हाकी राजस्थान की आरती सिंह, हाकी तमिलनाडु की एम रेणुका लक्ष्मी और एसवीएस सुब्रमण्यम गुप्ता कार्यकारी सदस्य चुने गए । आर पी सिंह और जायदीप कौर खिलाड़ियों के प्रतिनिधि बने रहेंगे ।

आईसीसी महिला विश्व टी20 में भारत की अगुवाई करेंगी हरमनप्रीत

नयी दिल्ली : आक्रामक बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर नौ से 24 नवंबर के बीच वेस्टइंडीज में होने वाले छठे आईसीसी महिला विश्व ट्वेंटी20 में भारत की 15 सदस्यीय टीम की अगुवाई करेगी। अखिल भारतीय महिला चयन समिति ने टीम का चयन किया जिसमें स्मृति मंदाना को उप कप्तान बनाया गया है। स्मृति इस साल शानदार फार्म में हैं। मिताली राज, वेदा कृष्णमूर्ति, दीप्ति शर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, अनुजा पाटिल, एकता बिष्ट और पूनम यादव आदि को भी टीम में जगह मिली है। भारत को दस टीमों की इस प्रतियोगिता में आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान और आयरलैंड के साथ ग्रुप बी में रखा गया है।
भारत अपने अभियान की शुरुआत नौ नवंबर को न्यूजीर्लैड के खिलाफ गुयाना में करेगा। इसके बाद वह चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान (11 नवंबर), आयरलैंड (15 नवंबर) और आस्ट्रेलिया (17 नवंबर) से मैच खेलेगा।
भारतीय महिला टीम इस प्रकार है : हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंदाना (उप-कप्तान), मिताली राज, जेमिमा रॉड्रिग्स, वेदा कृष्णमूर्ति, दीप्ति शर्मा, तान्या भाटिया (विकेटकीपर), पूनम यादव, राधा यादव, अनुजा पाटिल, एकता बिष्ट, डी हेमलता, मानसी जोशी, पूजा वस्त्राकर, अरुंधती रेड्डी।

नहीं रहे कमेंटेटर जसदेव सिंह

नयी दिल्ली : प्रसिद्ध खेल कमेंटेटर जसदेव सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। दूरदर्शन और रेडियो पर जसदेव सिंह की कमेंट्री के लाखों प्रशंसक रहे हैं। जसदेव सिंह ने अपनी जानदार आवाज से करोड़ों लोगों को सालों-साल मैच का हाल सुनाया। 70 और 80 के दशक में जसदेव सिंह खेल प्रेमियों की जानी पहचानी आवाज थी।
जसदेव सिंह के निधन पर खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ समेत कई हस्तियों ने शोक जताया। राठौड़ ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आकाशवाणी और दूरदर्शन के बेहतरीन कमेंटेटर्स में से एक जसदेव सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने ओलंपिक, एशियन गेम्स, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस समेत अनगिनत कार्यक्रमों में आवाज का जादू बिखेरा।
जसदेव सिंह ने करीब 6 एशियन गेम्स और इतने ही हॉकी वर्ल्ड कप में कमेंटरी की। जसदेव सिंह ने साल 1963 से लगातार 48 वर्षों तक गणतंत्र दिवस की कमेंटरी की। भारत सरकार ने साल 1985 में उन्हें पद्म श्री और साल 2008 में पद्म भूषण से नवाजा।