कोलकाता : वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह के निधन पर भारतीय भाषा परिषद में आयोजित शोक सभा में उनके अवदान पर चर्चा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। आलोचक श्रीनिवास शर्मा ने कहा, प्रगतिशील साहित्य के वैचारिक सरोकारों के इतिहास से नामवर सिंह की साहित्यिक यात्रा जुड़ी हैं। प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन से लेकर आधुनिकतम साहित्य को उन्होंने आलोचना का विषय बनाया। ऐसे आलोचक किसी भाषा में जल्दी नहीं पैदा होते।
नामवर जी के शिष्य बृजमोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने एक ओर वैचारिक संकीर्णता पर प्रहार की तो दूसरी तरफ सामाजिक चेतना से दूर साहित्य की भी आलोचना की। प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के प्रो.वेदरमण ने कहा कि नमावर बहुत सहज थे। उन्होंने आलोचना को जो ऊँचाई दी, वह हमेशा बनी रहेगी।
परिषद की अध्यक्ष कुसुम खेमानी ने कहा कि उन्होंने बड़े मन से उन्होंने परिषद को हमेशा अपना सहयोग दिया। अरुण माहेश्वरी ने कहा कि उनके विचार एक वैकल्पिक विश्वदृष्टि के महान अंग हैं। सरला माहेश्वरी ने कहा कि वे हिंदी जगत की ऐसी शख्सियत थी जिनसे हिंदी जगत का कोई व्यक्ति अछूता नहीं रह सका है। मृत्युंजय ने कहा कि नामवर जी की इतनी ख्याति थी कि लेखक प्रतीक्षा में रहते थे कि वे उनका नाम ले लें। सेराज खान बातिश ने कहा कि नामवर सिंह की आलोचना के पाठक हमेश बने रहेंगे।
राकेश श्रीमाल ने कहा कि साहित्य में रुचि रखने वाला हर व्यक्ति नामवर जी को मन से अप्रत्यक्ष तौर पर स्मरण में रखता है। वागर्थ के सम्पादक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि आचार्य शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी और रामविलास शर्मा ने यदि परंपरा के मूल्यांकन को समृद्ध बनाया तो नामवर सिंह ने समकालीन रचनाशीलता की उत्तम व्याख्या की। उनकी नई वैचारिक सूझ और ताजगी हमेशा पे्ररणा देती रहेगी। उन्होंने मौखिक परंपरा को आलोचना के स्तर पर प्रसिद्ध किया। पीयूषकांत, बालेश्वराय, सुशील कान्ति, पंकज सिंह आदि ने नामवर के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। परिषद की सचिव बिमला पोद्दार ने संचालन किया।
प्रस्तुति : सुशील कान्ति
हिन्दी के गौरव पुरुष थे डॉ.नामवर सिंह
नामवर सिंह को याद करते हुए कविता जंक्शन संपन्न
कोलकाता : साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था नीलांबर कोलकाता ने सागर रेलवे ऑफिसर्स क्लब में कविता जंक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस वर्ष की साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों के क्रम में संस्था का यह पहला आयोजन है। इसकी खास बात यह रही कि यह कार्यक्रम हाल ही में गुजरे हिंदी के शिखर आलोचक नामवर सिंह को समर्पित था। कार्यक्रम के शुरू में नामवर सिंह की जीवन यात्रा पर आधारित नीलांबर द्वारा तैयार वीडियो दिखाया गया। दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन पालन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पधारे कवि श्री नवल और श्री आशुतोष सिंह समेत अन्य अतिथि कवियों और श्रोताओं ने नामवर सिंह की तस्वीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। नामवर सिंह की याद में श्रद्धांजलि वक्तव्य आनंद गुप्ता ने दिया।

संस्था के अध्यक्ष यतीश कुमार ने स्वागत भाषण दिया। इस कविता जंक्शन में नवल, आशुतोष सिंह, अनिल अनलहातु, विमलेश त्रिपाठी, रजनीश त्रिपाठी, संजय जायसवाल, शैलेश गुप्ता, आशा पांडेय, अनिला राखेचा, रमेश यादव, सुषमा कनुप्रिया, राहुल शर्मा, ममता विश्वनाथ, राहुल गौड़ आदि कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। नवल और आशुतोष ने कविता से जुड़ी अपनी आलोचनात्मक टिप्पणियों से कार्यक्रम को समृद्ध किया। कार्यक्रम का संचालन ऋतु तिवारी और रेवा टिबरेवाल ने किया और धन्यवाद ज्ञापन किया संस्था के सचिव ऋतेश पांडेय ने। इस अवसर पर शैलेन्द्र शांत, निर्मला तोदी और कोलकाता के अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।
12 साल के लड़के ने न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर बनाया, 11 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा
12 साल के जैक्सन ओसवॉल्ट ने घर पर ही न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर तैयार किया है। जैक्सन ने ई-कॉमर्स वेबसाइट से करीब 7 लाख रुपए के स्पेयर पार्ट्स खरीदकर इसे बनाया है। वे ऐसा करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के साइंटिस्ट बन गए हैं। न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर (नाभिकीय संलयन) बनाने का रिकॉर्ड अब तक टेलर विल्सन के नाम था। उन्होंने 2008 में 14 साल की उम्र में इसे तैयार किया था। अमेरिका के मेम्फिस के रहने वाले जैक्सन ने न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर बनाने के लिए वैक्यूम पंप और चेंबर का इस्तेमाल किया। इसे ई-कॉमर्स वेबसाइट से खरीदा गया था। इसे भौतिकशास्त्रियों के ऑनलाइन फोरम ने वेरिफाई कर दिया है। जैक्सन के मुताबिक, यह मेरे लिए एक शानदार अनुभव रहा है। उनका कहना है कि बिजली के स्रोत के रूप में परमाणु संलयन का व्यावसायिक प्रयोग किया जाना अभी बाकी है। पिछले सभी प्रयास भी इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
इस डिवाइस की मदद से पर्याप्त दबाव के साथ कई परमाणु मिलकर एक परमाणु बनाया जाता है और रिलीज होने वाली ऊर्जा को परमाणु में एकत्रित कर लिया जाता है। मशीन का प्रयोग जैक्सन ने पिछले साल अपने 11वें जन्मदिन पर भी किया था। जैक्सन के पिता क्रिस कहते हैं कि मैंने उसे प्रोजेक्ट तैयार करने की अनुमति इस आधार पर दी कि वह एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही इसे तैयार करे और सीखे। एक्सपर्ट ने उसे रेडिएशन और हाईवोल्टेज की बिजली से होने वाले खतरों के बारे में आगाह किया था।
2079 तक गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से मुक्त हो सकता है भारत: लैंसेट अध्ययन
मेलबर्न : भारत आगामी 60 वर्षों में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से छुटकारा पाने में सफलता हासिल कर सकता है। लैंसेट के एक अध्ययन में यह बात कही गई। अध्ययन में कहा गया है कि भारत ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण और गर्भाशय ग्रीवा की जांच को अधिक सुगम बनाकर 2079 तक गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की समस्या से निजात पा लेगा। इसमें कहा गया है कि यदि 2020 तक इस बीमारी के उपचार एवं रोकथाम के प्रयासों को तेज किया गया तो 50 वर्ष में इसके एक करोड़ 34 लाख मामलों को रोका जा सकता है। ‘द लैंसेट आंकोलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार भारत, वियतनाम और फिलीपीन जैसे मध्यम स्तर के विकास वाले देशों में 2070 से 2079 तक गर्भाशय ग्रीवा कैंसर पर काबू पाया जा सकता है।ऑस्ट्रेलिया में ‘कैंसर काउंसिल न्यू साउथ वेल्स’ के अनुसंधानकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में पता चला है कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से 181 में से 149 देशों में वर्ष 2100 तक निजात पाई जा सकती है। अमेरिका, फिनलैंड, ब्रिटेन और कनाडा जैसे उच्च आमदनी वाले देशों में इस बीमारी से 25 से 40 साल में निजात पाई जा सकती है।
कैंसर काउंसिल न्यू साउथ वेल्स के कारेन कैनफेल ने कहा, ‘‘समस्या की विकरालता के बावजूद हमारा अध्ययन कहता है कि इसे पहले से ही उपलब्ध साधनों की मदद से वैश्विक स्तर पर काबू किया जा सकता है।’’ उल्लेखनीय है कि गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर महिलाओं को होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है। वर्ष 2018 में इसके करीब 5,70,000 नए मामलों का पता चला था।
कभी भीख माँगते थे, अब गोमती को स्वच्छ बना रहे हैं
लखनऊ : हाल ही में स्वयंसेवकों के एक समूह ने उत्तर-प्रदेश के लखनऊ में गोमती नदी के घाट की साफ़-सफाई की और वहाँ जमा हुए प्लास्टिक के ढेर को हटाया।
हालांकि, इस तरह से सफाई की पहल कोई नई बात नहीं है, क्योंकि लगभग हर शहर में सामाजिक रूप से जागरूक नागरिक समूह यह कर रहा है। पर यह अभियान बाकी सबसे अलग था, क्योंकि ये 17 स्वयंसेवक, जिन्होंने यहाँ घाटों से प्लास्टिक के कचरे को साफ किया, वे कभी भिखारी हुआ करते थे।
तीन घंटे से भी कम समय में, उन्होंने नदी के दो घाटों को साफ कर दिया और फावड़े, झाडू आदि का इस्तेमाल करके एक टन कचरा निकाला, जिसे इस सप्ताह में लखनऊ नगर निगम द्वारा इकट्ठा कर लिया जाएगा।
इस अनूठी पहल का नेतृत्व शरद पटेल ने किया, जो लखनऊ में एक एनजीओ ‘बदलाव’ के संस्थापक हैं। बदलाव का उद्देश्य भीख मांगने की सामाजिक बुराई को समाप्त कर, इन लोगों के लिए पुनर्वास और रोजगार के अवसरों की दिशा में काम करना है।
शरद ने अपना ‘भिक्षावृत्ति मुक्ति अभियान,’ साल 2014 में शुरू किया। उनका उद्देश्य है कि ये सभी लोग भीख मांगना छोड़कर अपने पैरों पर खड़े हों, ताकि ये भी सम्मान के साथ जीवन व्यतीत करें।
हालांकि, शरद के लिए इन लोगों को भीख मांगना छोड़कर, कोई रोज़गार करने के लिए मनाना आसान नहीं रहा। उन्होंने इन लोगों को काम दिलवाने में मदद की और उन्हें बहुत-सी संस्थाओ से जोड़ा। इससे इन लोगों को किसी की दया पर निर्भर होने की ज़रूरत नहीं, बल्कि ये सब स्वाभिमान से जी सकते हैं।
शरद बताते हैं कि कई लोग अब जगह-जगह जाकर ‘लेमन टी’ बेचते हैं, किसी ने स्ट्रीट फ़ूड के स्टॉल लगाना शुरू किया है, तो कई लोग रिक्शा आदि चला रहे हैं। उनकी कोशिश यही है कि इन सबको ऐसे किसी काम से जोड़ा जाए, जिसमें लगभग 10, 000 रूपये प्रति माह ये लोग कमा सकें। क्योंकि आज के जमाने में एक इंसान के लिए अपने महीने भर का खर्च चलाना बहुत मुश्किल है।
“जब मैंने इन लोगों को नौकरी दिलवाने में मदद की, तब ये सभी लोग बेघर थे। इनके पास कोई साधन नहीं था, जहाँ ये अपनी कमाई से बचत कर सकें। कई बार फूटपाथ पर सोते हुए, इनके पैसे चोरी हो जाते थे। ऐसे में, इन सब लोगों को अपने पैरों में खड़ा करने की हमारी सभी कोशिशें व्यर्थ जा रही थीं और इसलिए, मैंने इनके लिए एक आश्रय-घर खोलने का फ़ैसला किया,” शरद ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए बताया।
क्राउडफंडिंग के ज़रिए, उन्होंने इन लोगों के लिए एक अस्थायी आश्रय-घर शुरू किया और यहाँ पर लगभग 20 लोग आराम से रह सकते हैं। फ़िलहाल, यहाँ 18 लोग रहते हैं और इनमें से एक दृष्टिहीन भी है।
उनका मुख्य ध्यान इन लोगों का हृदय परिवर्तन कर, उनमें व्यवहारिक बदलाव लाना है। जो लोग सालों से भीख मांगकर अपना गुज़ारा कर रहे हैं, उनके लिए आसान नहीं है कि वे अचानक से अपनी आदतें बदल दें। भिक्षावृत्ति के साथ-साथ इन सभी को अन्य सामाजिक बुराइयों से भी निकलना है, जैसे कि नशा करना, स्वच्छता से न रहना और सबसे बड़ी बात, इन्हें ये समझाना कि इनकी समाज के प्रति भी कुछ ज़िम्मेदारियाँ हैं।
“हमने इन लोगों के पूरे दिन की गतिविधियों की एक योजना बनाई हुई है। सुबह उठकर योग, व्यायाम आदि करवाना, फिर अच्छे से नहा-धोकर, अपने-अपने काम के लिए निकल जाना और साथ ही, अन्य कुछ बातें, जैसे कि साफ़-सफ़ाई का महत्व, शिक्षा का महत्व, श्रमदान करना और अपने आस-पास की चीज़ों के प्रति जागरूक रहना आदि, इन सब पर भी चर्चा होती है, शरद ने बताया।
यहाँ तक पहुंचने के लिए शरद ने बहुत-सी मुश्किलों का सामना किया। लेकिन अब उनके प्रयास सफल होने लगे हैं। शरद ने बहुत ही उत्साह के साथ द बेटर इंडिया को बताया,
“हमारे एक साथी हैं नरेन देव यादव, जिन्हें सालों पहले कोढ़ की बीमारी के चलते उनके घर वालों ने ही दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया था। तब से वे भिक्षावृत्ति से अपना गुज़ारा कर रहे थे। जब हमारी उनसे मुलाक़ात हुई, तो उन्होंने हमसे कहा कि हम भले ही उन्हें पुनर्वासित कर दें, लेकिन वे भिक्षा मांगना नहीं छोड़ेंगें, क्योंकि यही उनकी किस्मत में लिखा है।”
नरेन अपने परिवार के रवैये के कारण ज़िंदगी से बिल्कुल हताश थे। पर धीरे-धीरे शरद और उनकी टीम के प्रयासों के चलते उनका आत्म-विश्वास बढ़ा। और आज वे अपने दम पर अपनी ज़िंदगी बीता रहे हैं। इतना ही नहीं, वे शरद के हर अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। साथ ही, सेंटर पर और जहाँ भी उन्हें मौका मिले, वहाँ श्रमदान करते हैं।
इन सभी लोगों में बहुत से लोग अनपढ़ हैं और इन सबके लिए शरद की टीम अलग से कक्षाएँ लगाती हैं। शिक्षा के जैसे ही समाज के अन्य मुद्दों के प्रति भी ये सभी लोग जागरूक हो रहे हैं। हर रविवार को शरद एक चौपाल का आयोजन करते हैं, जहाँ ये लोग बैठकर विचार-विमर्श कर, ऐसे मुद्दों को बताते हैं जिन पर ये लोग काम करना चाहेंगें। इन मुद्दों में नशा-मुक्ति के लिए जागरूकता, स्वच्छता के प्रति जागरूकता आदि शामिल है और साथ ही, अब ये लोग समझने लगे हैं कि भिक्षावृत्ति भी एक सामाजिक मुद्दा है।
गोमती नदी के घाटों को साफ़ करने का कदम, शरद की इस बड़ी पहल का हिस्सा है। इसके माध्यम से, वे न केवल इन पुनर्वासित लोगों के जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं, बल्कि वे पूरे समाज में परिवर्तन चाहते हैं। शरद का कहना है कि इन लोगों को सिर्फ़ आश्रय या रोज़गार देना उनका लक्ष्य नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि देश के नागरिक होने के नाते वे अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियाँ भी समझें। हर रविवार को ये सभी लोग, शहर भर में स्वच्छता अभियान पर काम कर रहे हैं। साल 2019 की बसंत पंचमी से शुरू हुई इस नेक पहल का पहला चरण होलिका दहन के दिन तक चलेगा। हालांकि, बहुत बार फंड्स की कमी के चलते, शरद और उनकी टीम को परेशानियाँ झेलनी पड़ती है। शरद कहते हैं, “हम अपनी तरफ से जितना कर सकते हैं, करने की कोशिश करते हैं। हमारी कोशिश यही है कि पैसे की कमी के कारण हमारी कोई भी पहल रुक न जाए। अभी हमने इन लोगों के लिए जो अस्थायी आसरा बनाया है, उसका पूरा सामान हमें दिल्ली की ‘गूँज संस्था’ ने स्पोंसर किया है। पर हमारा उद्देश्य इन लोगों के लिए एक स्थायी आश्रय घर बनाना है।
(साभार -द बेटर इंडिया)
जयललिता की बायोपिक का नाम होगा थलाइवी
चेन्नई : तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की बायोपिक बन रही है। इसका निर्माण विष्णु इंदौरी कर रहे हैं। 24 फरवरी को जयललिता की जयन्ती के मौके पर उन्होंने फिल्म के नाम की घोषणा की है। फिल्म का नाम थलाइवी होगा। थलाइवी का मतलब नेता होता है। मूवी क्रिटिक तरण आदर्श ने ट्वीट करके इसकी जानकारी शेयर की। बाहुबली और बजरंगी भाईजान जैसी सुपरहिट फिल्में लिख चुके विजयेंद्र प्रसाद थलाइवी की पटकथा तैयार करेंगे। वहीं इसका निर्देशन विजय कर रहे हैं। थलाइवी को हिन्दी, तमिल और तेलुगु तीनों भाषाओं में बनाया जाएगा।फिल्म में नित्या मेनन जे जयललिता का रोल निभा सकती हैं। थलाइवी की रिलीज डेट अभी तय नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फिल्म 2019 के आखिर में रिलीज की जाएगी। 24 फरवरी 1948 को कर्नाटक के मैसूर में जन्मी जयललिता राजनेता के साथ-साथ एक अच्छी एक्टर और डांसर भी रही हैं। 13 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार कन्नड़ फिल्म श्री शैला महात्म्य में काम किया था। 15 साल की उम्र से ही वे लीड अभिनेत्री का रोल प्ले करने लगीं। अपने करियर में इन्होंने 300 से ज्यादा हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड और तमिल फिल्मों में काम किया था। साल 1982 में इन्होंने एआईडीएमके की सदस्यता ग्रहण कर राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी।
झारखंड के स्पोर्ट्स एनजीओ को मिला खेल की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार
राँची : मोनाको के स्पोर्टिंग क्लब में रात खेल की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड ‘लॉरेस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स’ दिए गए। झारखंड के एनजीओ ‘युवा’ को स्पोर्ट फॉर गुड अवॉर्ड मिला। यह एनजीओ फुटबॉल के जरिए गांवों में लड़कियों को जागरूक और उन्हें सशक्त करने का काम करता है। इस एनजीओ की शुरुआत 2009 में जर्मन मूल के अमेरिकी नागरिक फ्रैंक गास्टलर ने दिल्ली से झारखंड आकर की थी।
यह एनजीओ गांवों में जाकर फुटबॉल के कार्यक्रम आयोजित करता है। इससे 450 लड़कियां जुड़ी हुई हैं। इनमें से चार लड़कियों हिमा, नीता, राधा, कोनिका ने मोनाको जाकर यह अवॉर्ड लिया। इस एनजीओ में 90% महिला कोच हैं। 2015 में युवा स्कूल भी खोला गया। ताकि खेल के साथ-साथ पढ़ाई पर भी ध्यान दिया जा सके। इस स्कूल में 6 से 18 साल तक की लड़कियां हैं।
तेंदुलकर ने किये पुश-अप, पुलवामा शहीदों के परिवारों के लिये मैराथन से जुटे 15 लाख रूपये
नयी दिल्ली : पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने हजारों धावकों के साथ आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस नयी दिल्ली मैराथन में हिस्सा लिया और पुलवामा आंतकी हमलों के शहीदों के परिवारों के लिये 15 लाख रूपये जुटाये।
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में चार रेस में प्रत्येक के शुरू होने से पहले तेंदुलकर ने ‘कीपमूविंग पुश-अप चैलेंज’ के अंतर्गत 10 पुश-अप किये और धावकों से इसमें उनके साथ जुड़ने का आग्रह किया। तेंदुलकर ने कहा, ‘‘यहां से जो भी राशि मिलेगी, उसके किसी अच्छे कार्य के लिये दान में दिया जायेगा। इसे शहीदों के परिवारों को दिया जायेगा। मुझे पूरा भरोसा है कि आप भावनाओं को समझते हैं और उम्मीद करते हैं कि आप सभी हमारे साथ इस अभियान में साथ हैं। ’’ पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले में 40 से ज्यादा सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गयी थी। इन चार रेस -फुल मैराथन, हाफ मैराथन, टाइम्ड 10 किमी और पांच किमी स्वच्छ भारत रन- में हजारों धावकों ने हिस्सा लिया।
तेंदुलकर ने इतने धावकों की भागीदारी पर कहा, ‘‘मैं इतने सारे बच्चों की भागीदारी देखकर खुश हूं। इतने सारे व्यस्कों को देखकर भयभीत नहीं होना और मैराथन में भाग लेना जिंदगी का बड़ा कदम होता है। आप अगली पीढ़ी हो जो हमारे देश की बागडोर संभालोगे। ’ आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस के ब्रांड दूत तेंदुलकर ने स्टेडियम से मैराथन को हरी झंडी दी।
अब दूरसंचार विभाग से कर सकेंगे अश्लील, धमकी भरे व्हाट्एस मैसेज की शिकायत
नयी दिल्ली : अगर आप व्हाट्सएप पर मिल रहे अभद्र और आपत्तिजनक संदेशों से परेशान हैं तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप इसकी शिकायत दूरसंचार विभाग (डीओटी) के पास दर्ज करा सकते हैं और विभाग इसे आगे की कार्रवाई के लिए दूरंसचार सेवा प्रदाताओं और पुलिस के पास भेजेगी। एक अधिकारी ने गत शुक्रवार को कहा कि व्हाट्सएप पर प्राप्त आपत्तिजनक संदेशों के खिलाफ अब लोग दूरसंचार विभाग के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए पीड़ित को मोबाइल नंबर के साथ संदेश का स्क्रीनशॉट लेकर ‘ सीसीएडीडीएन – डीओटी @ एनआईसी डॉट इन ‘ पर ई – मेल करना होगा।
दूरसंचार विभाग के संचार नियंत्रक (कंट्रोलर कम्युनिकेशंस) आशीष जोशी ने ट्वीट में कहा , ” यदि किसी को भद्दे / आपत्तिनजक / जान से मारने की धमकी / अश्लील व्हाट्सएप संदेश मिलते हैं तो वह मोबाइल नंबर के साथ संदेश के स्क्रीनशॉट को ‘ सीसीएडीडीएन – डीओटी @ एनआईसी डॉट इन ‘ पर भेजे। उन्होंने कहा , ” हम जरूरी कार्रवाई के लिए इसे दूरंसचार सेवा प्रदाताओं और पुलिस अधिकारियों के समक्ष रखेंगे। ”
कई पत्रकारों समेत लोकप्रिय हस्तियों ने अभद्र और धमकी भरे संदेश मिलने की शिकायत की थी। जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। डीओटी ने 19 फरवरी को एक आदेश में कहा था कि लाइसेंस की शर्तें नेटवर्क पर आपत्तिजनक , अश्लील , अनधिकृत या किसी अन्य रूप में गलत संदेश भेजने पर पाबंदी लगाती हैं। आदेश में सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को गलत संदेश भेजने वाले ग्राहकों पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया गया है क्योंकि यह ग्राहक आवेदन फॉर्म में की गई ग्राहक घोषणा का उल्लंघन भी है।
फिल्म निर्माता राजकुमार बड़जात्या का निधन
मुम्बई : हम आपके हैं कौन’, ‘हम साथ साथ हैं’ और ‘विवाह’ जैसी सफल पारिवारिक फिल्मों के निर्माता राजकुमार बड़जात्या का दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। राजकुमार बड़जात्या के परिवार ने राजश्री प्रोडक्शंस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट किया, ‘‘हम सूरज बड़जात्या के पिता राजकुमार बड़जात्या के निधन पर शोक में हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।’’ राजकुमार बड़जात्या के परिवार में उनकी पत्नी सुधा और पुत्र सूरज बड़जात्या हैं। सूरज बड़जात्या एक जाने माने फिल्मकार हैं। राजकुमार बड़जात्या के पिता ताराचंद बड़जात्या ने राजश्री प्रोडक्शन कंपनी की स्थापना की थी। इस बैनर को ‘हम साथ साथ हैं’, ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘मैंने प्यार किया’ जैसी 90 के दशक की सफल फिल्मों के लिए जाना जाता है। इस कंपनी ने ‘विवाह’, ‘प्रेम रतन धन पायो’ और इस महीने रिलीज हुई ‘हम चार’ जैसी फिल्मों का भी निर्माण किया।




