Friday, March 13, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 6

बाजार में आया अन्नपूर्णा का ऑफसाइड, ब्रांड अम्बैसडर सौरभ गांगुली

कोलकाता । एफएमसीजी ब्रांड बनने वाली अन्नपूर्णा स्वादिष्ट लिमिटेड कंपनी द्वारा आयोजिक समारोह में  कंपनी के ब्रांड एंबेसेडर पूर्व क्रिकेटर सौरभ गांगुली ने कंपनी के नए ब्रांड “ऑफसाइड” को धमाकेदार तरीके से लॉन्च किया। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली गत सितंबर 2025 से कंपनी के साथ ब्रांड एंबेसडर के तौर पर जुड़े हुए हैं। “ऑफसाइड”, कंपनी के शहरी और सेमी-अर्बन मार्केट में स्ट्रेटेजिक विस्तार को दिखाता है, जो इसकी पहले से मौजूद ग्रामीण डिस्ट्रीब्यूशन की ताकत को और भी बेहतर बनाता है। नए ब्रांड का मकसद स्नैक्स और कन्वीनियंस फ़ूड सेगमेंट में कस्टमर की बदलती पसंद को पूरा करना है। लॉन्च इवेंट के मौके पर कंपनी की सीनियर लीडरशिप, डिस्ट्रीब्यूटर और कई दूसरे लोग भी शामिल हुए। 2015 में शुरू हुई अन्नपूर्णा स्वादिष्ट लिमिटेड 100 से ज़्यादा स्नैक और फ़ूड प्रोडक्ट बनाती और बेचती है, जिसमें वेस्टर्न स्नैक्स, पारंपरिक नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, फ्रायम्स, आलू के चिप्स, बेकरी प्रोडक्ट और कन्फेक्शनरी शामिल हैं। कंपनी का डिस्ट्रीब्यूशन पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और उत्तर पूर्वी राज्यों के 80,000 से ज़्यादा गांवों और 250 कसबो में फैला हुआ है। कंपनी के डिस्क्लोज़र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में अन्नपूर्णा स्वादिष्ट लिमिटेड ने ₹407 करोड़ का रेवेन्यू रिपोर्ट किया, जो साल-दर-साल 54 प्रतिशत का ग्रोथ दिखाता है। ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट 12 प्रतिशत के मार्जिन के साथ ₹47 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफ़िट ₹22 करोड़ बताया गया है। मौजूदा समय में कंपनी की बढ़ती अर्निंग्स के कारण इसकी शेयर बढ़कर ₹9.86 हो गई। अन्नपूर्णा स्वादिष्ट लिमिटेड के चेयरमैन और संस्थापक रितेश साव ने कहा, “ऑफसाइड” का लॉन्च अन्नपूर्णा स्वादिष्ट लिमिटेड के एक मज़बूत रीजनल प्लेयर से एक ब्रांड-ड्रिवन “एफएमसीजी” कंपनी बनने के सफ़र में एक अहम कदम है। बदलते कंज्यूमर की उम्मीदों के साथ, खासकर शहरी और सेमी-अर्बन इंडिया में, ऑफसाइड को क्वालिटी, अफोर्डेबिलिटी और भरोसे की हमारी कोर फिलॉसफी पर कायम रहते हुए कंटेंपररी प्रोडक्ट्स देने के लिए बनाया गया है। ब्रांड के साथ सौरव गांगुली का जुड़ना एक्सीलेंस और नेशनल रेलिवेंस के लिए हमारे कमिटमेंट को और मज़बूत करता है। इस मौके पर, अन्नपूर्णा स्वादिष्ट लिमिटेड के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, रोहित सिंघानिया ने कहा, “ऑफसाइड” हमारी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्ट्रैटेजी का सेंटर है, क्योंकि हम शहरी मार्केट और मॉडर्न ट्रेड चैनल्स में अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं।

एमएसएमई इकोसिस्टम के लिए गेम-चेंजर साबित होगा बजट : ममता बिन्नानी

कोलकाता । सीएस (डॉ.) एडवोकेट ममता बिनानी, (प्रेसिडेंट, एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम, पश्चिम बंगाल) ने कहा, बजट 2026 में 10,000 करोड़ रुपये के डेडिकेटेड एमएसएमई ग्रोथ फंड की घोषणा, अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर भारत के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। यह दूरदर्शी पहल न केवल एमएसएमई को इनोवेशन, मॉडर्नाइजेशन और स्केल करने के लिए जरूरी पूंजी प्रदान करेगी, बल्कि रणनीतिक रूप से इस सेक्टर को ग्लोबल ट्रेड में होने वाली रुकावटों से भी बचाएगी।
ऐसे समय में जब एमएसएमई क्षेत्र, लिक्विडिटी की चुनौतियों, देरी से पेमेंट और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं, यह फंड बेहतर प्रतिस्पर्धा, ग्लोबल बाजारों तक बेहतर पहुंच और वैल्यू चेन में गहरे इंटीग्रेशन के लिए एक उत्प्रेरक का काम करेगा। बजट में बेहतर क्रेडिट एक्सेस और स्ट्रक्चरल सपोर्ट उपायों के साथ, यह कदम भारत के औद्योगिक विकास, रोज़गार सृजन और निर्यात क्षमता की रीढ़ एमएसएमई की पूरी क्षमता को सामने लाने के लिए सरकार की स्थायी प्रतिबद्धता को दिखाता है। हम केंद्र सरकार की इस इस दूरदर्शी कदम का स्वागत करते हैं, जो समावेशी विकास को बढ़ावा देगा, इस सेक्टर को और भी ज्यादा मजबूत करेगा और वास्तव में यह बजट आत्मनिर्भर एमएसएमई इकोसिस्टम को बनाने में कारगर पहल साबित होगा। ममता बिनानी पश्चिम बंगाल एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम की अध्यक्ष हैं। सुश्री बिन्नानी ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और सीएसआर 2016 में उत्कृष्टता के लिए आईसीएसआई राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 2016 के लिए निदेशक संस्थान के गोल्डन पीकॉक पुरस्कार, वर्ष 2016 के लिए सराहनीय सीएसआर गतिविधि के लिए एसोचैम पुरस्कार के जूरी सदस्य के रूप में कार्य किया है। कोलकाता नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन की उपाध्यक्ष, मर्चेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स-लीगल अफेयर्स काउंसिल के अध्यक्ष और इंसोल इंडिया के कार्यकारी समिति की सदस्य भी हैं। वह इंटरनेशनल वूमेंस इंसोलवेंसी एंड रिस्ट्रक्टरिंग कॉन्फेडरेशन (आईएआईआरसी) बोर्ड की सदस्य भी हैं और वर्तमान में इंडिया नेटवर्क की सह-अध्यक्ष हैं।

कंटेंपरेरी लाइफस्टाइल ब्रांड “सेनेस” की लॉन्चिंग

कोलकाता । सेनकों हाउस का नया कंटेंपरेरी लाइफस्टाइल बहुप्रतीक्षित ब्रांड “सेनेस” कोलकाता के बाजार में उतर चुका है। ब्रांड की लांचिंग पर अभिनेत्री तारा सुतारिया की मौजूदगी उपस्थित रहीं। सेनेस के एलजीडी (लैब-ग्रोन डायमंड) प्रोडक्ट्स सस्टेनेबल लग्जरी, इको-फ्रेंडली इनोवेशन और एक नए जमाने के नज़रिए को दर्शाते हैं, जबकि इसकी लेदर रेंज जिम्मेदार सोर्सिंग और पर्यावरण के प्रति जागरूक प्रथाओं पर आधारित है। इसके अलावा, परफ्यूम कलेक्शन को रिफाइंड सेंसरी अनुभवों को जगाने के लिए तैयार किया गया है, जो इस ब्रांड के अत्याधुनिक, जागरूक दृष्टिकोण को दर्शाता है – यह ब्रांड नैतिकता और सुंदरता को सहजता से एक साथ लाता है। इस मौके पर अभिनेत्री तारा सुतारिया ने ब्रांड के साथ अपने जुड़ाव के बारे में बताते हुए कहा कि, जिस चीज़ ने मुझे सच में सेनेस की ओर आकर्षित किया, वह है सस्टेनेबिलिटी के प्रति इसकी प्रतिबद्धता, साथ ही सहजता से स्टाइलिश बने रहना। यह नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे बेहद विचारशील, जिम्मेदार और खूबसूरती से तैयार की गई है। मुझे ऐसे ब्रांड का हिस्सा बनकर खुशी हो रही है जो डिज़ाइन और उद्देश्य दोनों को महत्व देता है। इधर, कोलकाता में लॉन्चिंग मौके पर, जोइता सेन (डायरेक्टर, हेड ऑफ मार्केटिंग एंड डिज़ाइन्स, हाउस ऑफ सेनको) ने कहा कि “सेनेस” आधुनिक लग्जरी की एक अभिव्यक्ति है, जो जिम्मेदारी और क्राफ्ट्समैनशिप में गहराई से निहित है। कोलकाता में इस लॉन्च के साथ, हम एक ऐसा अनुभव बनाना चाहते थे जो ब्रांड की आत्मा को दर्शाता हो – जहाँ सस्टेनेबल इनोवेशन, कंटेंपरेरी डिज़ाइन और विचारशील कहानी एक साथ आते हैं।

 

भवानीपुर कॉलेज में कार्तिकेय वाजपेयी की पुस्तक दि अनबिकमिंग पर चर्चा

कोलकाता । बहु-प्रतिभाशाली लेखक, वकील और आध्यात्मिक विचारक कार्तिकेय वाजपेई ने गत 5 फरवरी को भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज की लाइब्रेरी में अपनी पहली पुस्तक’ द अनबेकमिंग’ पर अपने विचारों को साझा किया । इस कार्यक्रम में अनुभवी फिल्म हस्ती बरुण चंदा द्वारा संचालित यह सत्र छात्रों और संकाय सदस्यों दोनों के लिए एक आकर्षक और समृद्ध अनुभव साबित हुआ। रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह और प्रातःकालीन कॉमर्स सत्र की वाइस प्रिंसिपल प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने दोनों ही अतिथियों को कॉलेज मोमेंटो और शाॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया ।
कार्यक्रम के आयोजन सहायक कॉलेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री मिराज डी शाह , श्रीमती सोहिला भाटिया और प्रो चंपा श्रीनिवासन रहे । रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने स्वागत भाषण दिया।
बातचीत के दौरान, वाजपेई ने अपनी पुस्तक के केंद्रीय विषय पर विस्तार से बताया, जिसमें आत्म-साक्षात्कार और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग के रूप में अनसीखने के महत्व पर जोर दिया गया। उन्होंने कथा के साथ-साथ काम को आकार देने वाले दार्शनिक विचारों में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की।
सत्र का मुख्य आकर्षण भावातीत ध्यान करने के साथ समाप्त हुआ। लेखक ने सभी विद्यार्थियों शिक्षक शिक्षिकाओं और अतिथियों को ध्यान करवाया। छात्रों ने बहुत ही उत्साह से भाग लिया। विद्यार्थियों ने लेखक और मॉडरेटर दोनों से विचारशील और बौद्धिक रूप से उत्तेजक प्रश्न पूछे गए ।इस कार्यक्रम में साठ से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।डाॅ संपा सिन्हा बासु, डॉ त्रिदिब सेनगुप्ता, डॉ वसुंधरा मिश्र आदि शिक्षकों की उपस्थिति रही।

लिटिल थेस्पियन ने किया तीस दिवसीय नाट्य कार्यशाला का आयोजन

कोलकाता । लिटिल थेस्पियन ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एक्सटेंशन प्रोग्राम विभाग, नई दिल्ली) संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 22 दिसंबर 2025 से 21 जनवरी 2026 तक कोलकाता स्थित ‘अनुचिंतन आर्ट्स सेंटर’ में 30 दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का विचार निर्देशक उमा झुनझुनवाला का था। कार्यशाला का केंद्रबिंदु नए और अनुभवी कलाकारों की छिपी प्रतिभाओं को रचनात्मक गतिविधियों के ज़रिये बाहर लाना था, जिसमें अभिनय की कला, दृश्य संयोजन और मंच के पीछे का ज्ञान शामिल था। कार्यशाला में अभिनय के अलग-अलग तरीकों और विभिन्न शैलियों, सह-कलाकारों के साथ तालमेल, मंच परे का समन्वय और भाषण एवं ध्वनि परिवर्तन पर काम किया गया।

तीन दक्ष रंगकर्मियों ने नए कलाकारों को रंगमंच के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया। श्री अमित बनर्जी (संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता) ने कलाकारों की आवाज़, ध्वनि परिवर्तन और अभिनय के विभिन्न बारीकियों से परिचित कराया। मनीष मित्रा (निदेशक, कसबा अर्घ्य) ने मंच की साज-सज्जा और निर्देशन पर काम किया, जबकि डॉ. गगनदीप (सहायक प्राध्यापक, नाट्य विभाग, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय) ने कलाकारों को दृश्य संयोजन की दुनिया से परिचित कराया। इस कार्यशाला में कोलकाता के और अन्य राज्यों से कुल मिलाकर 25 कलाकारों ने सहभागिता की । इस कार्यशाला का समापन नाटक ‘दफ्तर’ के मंचन के साथ हुआ, जो उमा झुनझुनवाला द्वारा लिखा गया एक तीखा व्यंग्य है, जो दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार, उदासीनता और अक्षमता पर कटाक्ष करता है। यह नाटक यमराज के दफ्तर में खुलता है, जहाँ परलोक की नौकरशाही हमारे अपने संसार को दर्शाती है। यह नाटक कालातीत मुद्दों से रूबरू करवाता है, जहाँ किसान जो ज़मीन जोतने के बावजूद अपने परिवार को खिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं; हाशिए पर पड़े निचली जातियों और वर्गों के लोग सम्मान के लिए लड़ रहे हैं; एक मोची जिसे अपने परिवार के लिए रोटी मांगने की हिम्मत करने पर ज़िंदा जला दिया गया और एक अकालपीड़ित आम आदमी, जो परिवार और उम्मीद से वंचित है एवं सीता और द्रौपदी के समय से महिलाओं द्वारा सहे गए असहनीय कष्टों को दर्शाया गया है; फिर भी, अंधेरे के बीच इनसान उम्मीद की रोशनी से चिपके रहते हैं, एक बेहतर कल के लिए जीते हैं। उमा झुनझुनवाला की तीखी आलोचना अतीत और वर्तमान के बीच की अंधेरी असमानताओं पर प्रकाश डालती है। इस नाटक का निर्देशन डॉ. गौरव दास ने किया और मो. आसिफ़ अंसारी सहायक निर्देशक थे। शानदार रोशनी की संकल्पना राहुल सरदार ने तैयार की थी, भावपूर्ण गायन अनन्या भास्कर ने प्रस्तुत किया और त्रिदिब साहा ने पर्कशन बजाया। खूबसूरत कोरियोग्राफी नयन साधक और समर मृधा ने की। जिन प्रतिभागियों ने भाग लिया और अभिनय किया उनमें गुंजन अज़हर, संगीता व्यास, एनी दास, नुपूर भौतिका, नव्या शंकर, स्नेहा दास, बबीता शर्मा, श्रीमंती सेन, फ़िरोज़ हुसैन, आदित्य वत्स, अर्पित कुमार, बापन नस्कर, कौशिक चक्रवर्ती, कुशाग्र सक्सेना, सम्राट चक्रवर्ती, लिटन सरकार, मोहित, राम आश्रय साव, सत्यम पांडे, सौरिक बेरा, सुभाशीष बाग, सहबाज़ खान, राहुल सरदार, नयन साधक, बिप्लब नस्कर शामिल थेl

शुभजिता : सकारात्मक सृजन के संतोष भरे दस वर्ष

शुभजिता आज दस साल पूरे कर रही है। 13 फरवरी 2016 को यह यात्रा अपराजिता…माने कभी न हार के साथ आरम्भ हुई। कहना न होगा कि यह एक लंबी यात्रा रही जिसमें चुनौतियां रहीं, संघर्ष रहा, निराशा रही मगर एक संतोष रहा क्योंकि हमने प्रयास किया। शुभजिता की शुरुआत अपराजिता के रूप में ही हुई..अपराजिता…जो चुनौतियों से हार नहीं मानती, जूझती है, सपने देखती है। यह वह समय था जब बतौर पत्रकार एक हिन्दी दैनिक में काम करते हुए खबरों को अपडेट करना होता था। जोर समस्याओ को उठाना जरूर था मगर उसकी दिशा सकारात्मकता होनी थी, युवाओं से जोड़ने और उनसे जुड़ने का प्रयास था। यह नहीं पता था कि क्या करना है, कैसे करना था। विज्ञापन कैसे लाने हैं और आज भी नहीं पता है। पत्रकारिता की दुनिया में सफलता का पैमाना विज्ञापनों से तय होता है, हम मानते हैं कि यह एक ऐसा पैमाना था, जिस पर खरा उतरना अभी शेष है मगर लोगों का जो सहयोग और समर्थन मिला…वह कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। हमारी टीम बनी और इन युवाओं ने शानदार काम किया, विशेषकर कोरोना काल में । हम आभारी हैं इन सभी युवा साथियों के जो हर मुश्किल में जो कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। शुभजिता सृजन प्रहरी सम्मान और शुभ सृजन नेटवर्क सृजन सारथी सम्मान…एक कृतज्ञता बोध है। यूट्यूब पर भी शुभजिता देखी जाती है। हमारी वेब पत्रिका शुभजिता को अब तक दस लाख से अधिक लोगों का स्नेह मिला है। सांसारिक झंझावातों के बीच ईश कृपा ने शुभजिता की यात्रा में यह अध्याय जोड़ा है और आप सभी के सहयोग ने हमें बल दिया है।
अगर आप शुभजिता से जुड़े रहे हैं या फिर किसी न किसी रूप में शुभजिता आपके हृदय तक पहुंची है तो कृपया अपने विचार लिखित अथवा डिजिटल रूप में साझा करें। इसे शुभजिता पर प्रकाशित करके हमें असीम संतुष्टि होगी। शुभजिता वाणी प्रवाह में इस बार हम फागुन के रंग भर रहे हैं और नाम है भारत के रंग…भारत के विभिन्न राज्यों के बहुआयामी रंग अपनी लेखनी से बिखेरिए। अच्छा लगेगा और अगर हमारे उत्तर पूर्वी भारत की संस्कृति, साहित्य, इतिहास पर आपकी दृष्टि पड़े। आप अपनी पेटिंग्स भी हमें भेज सकते हैं।
आप सभी का आभार जताते हुए आपके अतिशय स्नेह के आकांक्षी हैं हम।
सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया
सम्पादक
शुभजिता

अमृत भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा लागू

– रेलवे बोर्ड का आदेश जारी

नयी दिल्ली । रेल मंत्रालय ने अमृत भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधकों और क्रिस (सीआरआईएस) के प्रबंध निदेशक को निर्देश जारी किए हैं। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी पत्र के अनुसार, पूर्व में 15 जनवरी के निर्देशों के तहत इन ट्रेनों में केवल महिला कोटा, दिव्यांगजन (पीडब्ल्यूडी) कोटा, वरिष्ठ नागरिक कोटा और ड्यूटी पास कोटा ही लागू था तथा अन्य किसी प्रकार का आरक्षण कोटा, जिसमें आरएसी (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) भी शामिल है, लागू नहीं था।
मामले की समीक्षा के बाद अब इन ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। आदेश के अनुसार, जिन अमृत भारत ट्रेनों में 7 या उससे अधिक स्लीपर (एसएल) कोच हैं, उनमें अधिकतम 24 बर्थ का इमरजेंसी कोटा निर्धारित किया जा सकता है। वहीं, वंदे भारत स्लीपर (वीबीएस) ट्रेनों में अलग-अलग श्रेणियों के लिए इमरजेंसी कोटा तय किया गया है। इसके तहत सप्ताह के दिनों में प्रथम श्रेणी एसी (1ए) में 4, सप्ताहांत में 6; द्वितीय एसी (2ए) में सप्ताह के दिनों में 20, सप्ताहांत में 30 तथा तृतीय एसी (3ए) में सप्ताह के दिनों में 24 और सप्ताहांत में 42 बर्थ इमरजेंसी कोटे के तहत निर्धारित की जा सकती हैं। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह कोटा अग्रिम आरक्षण अवधि (एआरपी) या बुकिंग शुरू होने की तिथि से, जो भी पहले हो, लागू किया जा सकेगा। साथ ही, अन्य मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की तरह जोनल रेलवे मांग और उपलब्धता के आधार पर समय-समय पर इमरजेंसी कोटे की समीक्षा कर आवश्यक समायोजन कर सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है।

 

अब राष्ट्रगान के पहले और पूरा गाया जाएगा वंदे मातरम्

नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के गायन के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल को लेकर व्यापक दिशानिर्देश जारी किया। इसमें बताया गया है कि सरकारी समारोहों में इसे कैसे और कब प्रस्तुत किया जाना चाहिए। राष्ट्रगीत के समय दर्शकों का आचरण कैसा होना चाहिए इसके बारे में भी बताया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी नए निर्देशों का उद्देश्य देश भर में सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान की स्थिति और औपचारिक भूमिका को स्थापित करना है, जिसमें राजकीय समारोहों और संस्थागत सभाओं के दौरान इसके पालन पर अधिक जोर दिया गया है। दिशानिर्देशों के अनुसार, वंदे मातरम् का संपूर्ण आधिकारिक संस्करण, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है, प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए। इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं। अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ व ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’। दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहेंगे। गृह मंत्रालय ने शिक्षण संस्थानों से दैनिक विद्यालय सभाओं और महत्वपूर्ण संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया है। इस कदम का उद्देश्य छात्रों और आम जनता के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता और सम्मान को प्रोत्साहित करना है। औपचारिक स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए, दिशानिर्देशों में यह अनुशंसा की गई है कि जब वंदे मातरम् का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए।                                                           मंत्रालय ने सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है – फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि मनोरंजन स्थलों में दर्शकों को खड़े होने के लिए मजबूर करने से देखने का अनुभव बाधित हो सकता है और संभावित रूप से दर्शकों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रगान से संबंधित औपचारिक प्रोटोकॉल में लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करना है।

कोलकाता की सड़कों पर उतरेंगी 25 सीएनजी बसें

कोलकाता । प्रदूषण कम करने और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने कोलकाता की सड़कों पर 25 वातानुकूलित(एसी) सीएनजी बस चलाने का निर्णय लिया है। इन बसों को राज्य परिवहन निगम चलाएगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार ये बसें बेलियाघाटा–न्यू टाउन के इको स्पेस, पार्क सर्कस–डानकुनी, कुंदघाट–बारासात, जोका–बारासात, टॉलीगंज–हावड़ा, कोलकाता हवाई अड्डा–बारासात, सेक्टर फाइव–यादवपुर, सियालदह–हावड़ा, हावड़ा–बैरकपुर, हावड़ा–बारुईपुर, सॉल्टलेक–बारुईपुर और हावड़ा–डायमंड हार्बर मार्ग पर चलेंगी।

लगभग एक साल पहले ही इन बसों को खरीदने के आदेश दिए गये थे। उसी के प्रथम चरण के रूप में पिछले दिसम्बर में कस्बा डिपो में 25 नई सीएनजी बसें पहुंची थीं। इन बसों को किन किन रूट्स पर चलाया जाएगा, इसे लेकर परिवहन विभाग ने कोलकाता नगर निगम और परिवहन निगम से रिपोर्ट मांगी थी। वर्तमान में शहर और शहर के आसपास किन रूट्स पर बसों की संख्या आवश्यकतानुसार कम है, किन रूट्स पर यात्रियों को लंबा समय बस के इंतजार में लग जाता है—इस विषय में विस्तृत रिपोर्ट दर्ज होने के बाद ही सीएनजी बसों के रूट तय किए गए। इस बारे में सरकारी अधिसूचना भी जारी की गई है।

परिवहन विभाग के अधिकारी बता रहे हैं कि वर्तमान में जहां बसों की कमी है या यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, उन क्षेत्रों में ही नई सीएनजी बसें उतार दी गई हैं। सीएनजी बसों की संख्या बढ़ने से ईंधन की लागत कम तो होगी ही साथ ही प्रदूषण भी काफी हद तक कम होगा।

यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को जारी की नोटिस

नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इन याचिकाओं को पहले से लंबित पुरानी याचिकाओं के साथ जोड़कर एक साथ सुनने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। खासकर नियमों में ‘जाति-आधारित भेदभाव’ की परिभाषा केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों तक सीमित रखी गई है। इससे सामान्य वर्ग के लोगों को भेदभाव की शिकायत करने का कोई कानूनी संरक्षण नहीं मिलता, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत समानता के अधिकार के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह नियम एकतरफा है और उच्च शिक्षा में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ सकता है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में नए नियमों के अमल पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि नियमों के प्रावधान अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है। अदालत ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और नियमों पर नए सिरे से विचार करने के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित करने का सुझाव दिया था। फिलहाल, 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे, ताकि जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों पर कोई रोक न लगे।
यूजीसी ने 13 जनवरी को ये नए नियम जारी किए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, दिव्यांगता आदि पर आधारित भेदभाव रोकना और समानता को बढ़ावा देना था, लेकिन सामान्य वर्ग से जुड़े कई छात्रों और संगठनों ने इसका विरोध किया और इसे ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ बताया।
विरोध के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी।