Friday, April 24, 2026
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ब्रेथवेट एण्ड कम्पनी लिमिटेड में ‘’स्वच्छ भारत अभियान’’ 

कोलकाता : “स्वच्छ भारत अभियान” राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन की शुरुआत गत  2 अक्टूबर 2014 में भारत सरकार द्वारा की गई I इस अभियान के अंतर्गत 2 अक्टूबर 2019, महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती तक उनकी “स्वच्छ भारत” की परिकल्पना को साकार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस संदर्भ में और स्वच्छ भारत आंदोलन के अनुसरण में ब्रेथवेट एण्ड कम्पनी लिमिटेड में स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस वर्ष 16 सितम्बर 2019 से ब्रेथवेट एण्ड कम्पनी लिमिटेड की सभी इकाइयों में ‘स्वच्छता पखवाड़ा ’का आयोजन शुरू हुआ तथा इसका समापन 02 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर हुआ। इस अवसर पर स्वच्छता का विशेष अभियान चलाया गया जिसमें सभी वर्गों और श्रेणियों के 500 से अधिक कर्मचारियों ने लिए भाग लिया। इस अभियान की शुरुआत अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक यतीश कुमार ने कंपनी के विक्टोरिया वर्क्स से सुबह 10 बजे की, इसके बाद बीसीएल के कर्मचारियों ने सड़क पर कचरे को साफ करते हुए विक्टोरिया वर्क्स से क्लाइव वर्क्स तक हाईड रोड पर मार्च किया और लोगों को जागरुक करने के लिए बैनर और पर्चे भी प्रदर्शित किए।

क्लाइव वर्क्स में यतीश कुमार (अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक),  पी.पी.बोस, (निदेशक – वित्त) और सलीम जी पुरुषोथमन, (निदेशक – उत्पादन) द्वारा कंपनी के सामने वृक्षारोपण किया गया। इसके बाद कारखाने में विभिन्न खण्डों के कार्य क्षेत्र की सफाई की गई जिसमें सभी वर्गों के कर्मचारियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।  कारखाना परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। परिसर को प्लास्टिक मुक्त बनाने का प्रयास किया गया। स्वच्छता पर इसी तरह का अभियान एंगस वर्क्स में भी चलाया गया, जहाँ महाप्रबन्धक-एंगस वर्क्स सिद्धार्थ मित्रा ने अभियान का नेतृत्व किया। सभी कर्मचारियों ने वर्क्स और कार्यालय परिसर की सफाई में भाग लिया। कंपनी की सभी इकाइयों में स्वच्छता पर इस तरह का अभियान जारी रहेगा। इस अवसर पर यतीश कुमार ने सलाह दी कि स्वच्छता अभियान कार्य-संस्कृति का हिस्सा होना चाहिए और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लगातार किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी कर्मचारियों को स्वच्छता अभियान में उनकी संपूर्ण भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया।

‘गाँधी को याद करते हुए’ का आयोजन

कोलकाता :  महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता में ‘‘गांधी को याद करते हुए’’ शीर्षक से एक समारोह का आयोजन किया गया। सावित्रीबाई फुले सभा-कक्ष में संपन्न इस कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुई। फिर केंद्र प्रभारी डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ द्वारा अतिथि वक्ताओं का सूत की माला, अंगवस्त्रम एवं चरखा देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ जय कौशल ने कहा कि गांधी सत्य के अन्वेषण और राष्ट्रनिर्माण के एक बड़े उदाहरण हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने गांधी जयंती को ‘विश्व अहिंसा दिवस’ के रूप में घोषित करके गांधी के महत्व को विश्व स्तर पर स्थापित किया है। डॉ कौशल ने शिक्षा के क्षेत्र में ‘नई तालीम’ के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। प्रो. चंद्रकला पाण्डेय ने कहा कि गांधी ने यह साबित किया कि सिर्फ चीखने-चिल्लाने से ही आंदोलन और परिवर्तन नहीं होता। आज के शोषण-उत्पीड़न और असमानता भरे माहौल में गांधी की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। महाराजा श्रीशचंद्र कॉलेज के राजनीतिविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ प्रेमबहादुर मांझी ने गांधी के राजनीतिक-आर्थिक चिंतन पर बात की और कहा कि गांधी के लिए समाज के निचले आदमी को फायदा पहुंचाना सबसे मुख्य बात थी। लेकिन गांधी के बाद यहाँ के राजनेताओं ने गांधी के विचारों को नहीं अपनाया, केवल अपने फायदे के लिए गांधी का उपयोग किया। सीमा सुरक्षा बल में हिंदी अधिकारी बिहारी झा ने कहा कि गांधी का जीवन हमें बहुत कुछ सीखाता है। नेताजी नगर कॉलेज में जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सद्दाम होसैन ने गांधी की पत्रकारिता पर विस्तार से बात की और कहा कि आज की पत्रकारिता को गांधी से सीखने-समझने की जरूरत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ ने गांधी और डॉ अंबेडकर के वैचारिक द्वन्द्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की बढ़ती असहिष्णुता को इससे सीखने की आवश्यकता है। गांधी की निर्भीकता और अपने धुन के प्रति समर्पण से आज की नई पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। इस आयोजन में केंद्र के विद्यार्थी विवेक साव, नैना प्रसाद, साक्षी कुमारी, पूजा साव और काजल शर्मा ने भी अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ ललित कुमार ने किया।

ये हैं रावण वध में श्रीराम के 10 महत्वपूर्ण सहायक

कहते हैंकि रावण को युद्ध में हराने से पहले तो उसका लंका में प्रवेश करना ही सबसे कठिन कार्य था। प्रभु श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले शिव की आराधना की फिर उन्होंने लंका की रक्षक देवी की आराधना की, तब कहीं जाकर वे रावण की लंका में प्रवेश कर पाए थे।

रावण ज्योतिष, वास्तुकला, इन्द्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। उसके पास विमान और घातक अस्त्र एवं शस्त्र थे। उसे शिव से वरदान प्राप्त था। उसके किले की रक्षा देवी करती थी। रावण मायावी शक्तियों का स्वामी था। ऐसे में रावण वध में श्रीराम को इन 10 लोगों से जो सहयोग मिला, वह महत्वपूर्ण हैं। यह सामूहिक प्रयास की विजय का प्रतीक भी है और प्रेरक भी। आइए जानते हैं इनके बारे में

 1.हनुमान : हनुमानजी ने ही प्रभु श्रीराम की अंगूठी को लेकर समुद्र को पार करने के बाद उसे माता सीता को दिया, मेघनाद के पुत्र अक्षय कुमार का वध कर लंका दहन किया, विभीषण और सुग्रीव को राम से मिलाया, राम और लक्ष्मण का अपहरण कर जब अहिरावण पाताल लोक ले गया था, तो उन्हें मुक्त कराया और उन्होंने ही हिमालय से संजीवनी बूटी को लाकर लक्ष्मण की जान बचाई थी।
2 .लक्ष्मण : प्रभु श्रीराम के भाई लक्ष्मण शेषनाग के अवतार थे। अपनी पत्नी उर्मिला से 14 वर्ष तक दूर रहे लक्ष्मण के बगैर राम न तो सीता माता को ढूंढ पाते और न ही वे युद्ध की तैयारी कर पाते। लक्ष्मण एक श्रेष्ठ धनुर्धर थे और वे पाशुपतास्त्र का संधान करना जानते थे।

3.संपाती और जटायु : राजा दशरथ के मित्र जटायु ने ही सीता को ले जा रहे रावण को रोकने का प्रयास किया और वे मारे गए। जटायु ने राम को पूरी कहानी सुनाई और यह भी बताया कि रावण किस दिशा में गया है? इसके बाद संपाती ने अंगद को रावण द्वारा सीताहरण की पुष्टि की थी। संपाती ने ही दूरदृष्टि से देखकर बताया था कि सीता माता अशोक वाटिका में सुरक्षित बैठी हैं।

4.सुग्रीव : बाली ने सुग्रीव की पत्नी और संपत्ति हड़पकर उसको राज्य से बाहर धकेल दिया था। यही कारण था कि प्रभु श्रीराम ने सुग्रीव से अपने बड़े भाई बाली से युद्ध करने को कहा और इसी दौरान श्रीराम ने छुपकर बाली पर तीर चला दिया और वह मारा गया। बाली वध के बाद सुग्रीव किष्किंधा के राजा बने और उन्होंने राम के लिए वानर सेना को गठित किया था।

6.जामवंत : श्रीराम ने जामवंतजी को शिवलिंग स्थापना के समय रावण को आचार्यत्व का निमंत्रण देने के लिए लंका भेजा था। जामवंतजी ने ही हनुमानजी को उनकी शक्ति का स्मरण कराया था। वे एक इंजीनियर भी थे। समुद्र के तटों पर वे एक मचान को निर्मित करने की तकनीक जानते थे, जहां यंत्र लगाकर समुद्री मार्गों और पदार्थों का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता था। मान्यता है कि उन्होंने एक ऐसे यंत्र का निर्माण किया था, जो सभी तरह के विषैले परमाणुओं को निगल जाता था। जामवंतजी आज भी जिंदा हैं।

7.नल : नल और नील दो भाई थे। नल ने ही लंका और भारत के बीच पुल बनाया था। यह पुल लगभग 5 दिनों में बन गया जिसकी लंबाई 100 योजन और चौड़ाई 10 योजन थी। रामायण में इस पुल को ‘नल सेतु’ की संज्ञा दी गई है। नल के निरीक्षण में वानरों ने बहुत प्रयत्नपूर्वक इस सेतु का निर्माण किया था। यह सेतु कालांतर में समुद्री तूफानों आदि की चोटें खाकर टूट गया था।

8.गरुड़ : जब रावण के पुत्र मेघनाथ ने श्रीराम से युद्ध करते हुए श्रीराम को नागपाश से बांध दिया था, तब देवर्षि नारद के कहने पर गरुड़ ने नागपाश के समस्त नागों को खाकर श्रीराम को नागपाश के बंधन से मुक्त कर दिया था। भगवान राम के इस तरह नागपाश में बंध जाने पर श्रीराम के भगवान होने पर गरुड़ को संदेह हो गया था। अंत में काकभुशुण्डिजी ने राम के चरित्र की पवित्र कथा सुनाकर गरुड़ के संदेह को दूर किया।
9.सुषेण वैद्य : राम-रावण युद्ध के समय मेघनाद के तीर से लक्ष्मण घायल होकर मूर्छित हो गए थे, ऐसे में सुषेण वैद्य को बुलाया गया। लक्ष्मण की ऐसी दशा देखकर राम विलाप करने लगे। सुषेण ने कहा- ‘लक्ष्मण के मुंह पर मृत्यु-चिह्न नहीं है अत: आप निश्चिंत रहिए, आप संजीवनी बूटी का इंजताम कीजिए।’ हनुमानजी यह बूटी लेकर आए। यदि सुषेण वैद्य नहीं होते तो लक्ष्मण का जिंदा रहना मुश्किल था और यदि लक्ष्मण का देहांत हो जाता तो संभवत: प्रभु श्रीराम यह युद्ध रोककर पुन: लौट जाते। अत: सुषेण वैद्य की रामकथा में महत्वपूर्ण भूमिका रही।
10. विभीषण : रावण के 10 सिर थे। जिस सिर को राम अपने बाण से काट देते थे पुन: उसके स्थान पर दूसरा सिर उभर आता था। राम द्वारा लाख प्रयास करने के बाद भी जब रावण नहीं मारा गया, तो वानर सेना में चिंता होने लगी थी। रावण ने अमरत्व प्राप्ति के उद्देश्य से भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या कर वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा ने उसके इस वरदान को न मानते हुए कहा था कि तुम्हारा जीवन नाभि में स्थित रहेगा। यही कारण था कि वानर सेना पर रावण भारी पड़ने लगा था। ऐसे में विभीषण ने राम को यह राज बताया कि रावण का जीवन उसकी नाभि में है। नाभि में ही अमृत है। तब राम ने रावण की नाभि में तीर मारा और रावण मारा गया।
(साभार – वेब दुनिया)

आश्चर्यचकित करेंगे महाज्ञानी रावण के ये 10 कार्य

रावण बहुत ही ज्ञानी महापंडित होने के साथ ही ज्योतिष, वास्तु और विज्ञान का ज्ञान भी रखता था। वह दिव्य और मायावी शक्तियों का ज्ञाता था। जानते हैं उसके 10 ऐसे कायों के बारे में जिसे जानकर आप आश्चर्य करेंगे।
1.शिव तांडव स्त्रोत : रावण ने अपने आराध्य शिव की स्तुति में ‘शिव तांडव स्तोत्र’ की रचना की थी।
2.रावण संहिता : रावण संहित जहां रावण के संपूर्ण जीवन के बारे में बताती है वहीं इसमें ज्योतिष की बेहतर जानकारियों का भंडार है।
3.चिकित्सा और तंत्र के क्षेत्र में रावण के ये ग्रंथ चर्चित हैं- 1. दस शतकात्मक अर्कप्रकाश, 2. दस पटलात्मक उड्डीशतंत्र, 3. कुमारतंत्र और 4. नाड़ी परीक्षा।
3.अन्य ग्रंथ : कहते हैं कि रावण ने ही अरुण संहिता, अंक प्रकाश, इंद्रजाल, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, रावणीयम आदि पुस्तकों की रचना भी की थी।
4.रक्ष संस्कृति : कहते हैं कि रावण ने सभी की रक्षा करने के लिए ‘रक्ष’ संस्कृति की स्थापना की थी। रावण ने असंगठित राक्षस समाज को एकत्रित कर उनके कल्याण के लिए कई कार्य किए थे।
5.रावण की वेधशाला : रावण की सेना में अस्त्र-शस्त्र या यंत्र बनाने वाले एक से एक वैज्ञानिक थे। जैसे शुक्राचार्य भार्गव, शंबूक और कुंभकर्ण और वज्रज्वला। उन्होंने मिलकर ही दारू पंच अस्‍त्र, सूर्यहास खड्‌ग, मकर मुख, आशी विष मुख, वाराह मुख जैसे विध्‍वंसकारी अस्‍त्रों का निर्माण किया था। खुद रावण ने उसकी वेधशाला में दिव्‍य-रथ का निर्माण किया था।
6.’रावण हत्था’ वाद्य यंत्र : यह एक भारतीय वाद्य यंत्र है। यह प्रमुख रूप से राजस्थान और गुजरात में बजाया जाता है। रावण ने इसका आविष्कार किया था। रावण के ही नाम पर इसे ‘रावण हत्था’ या ‘रावण हस्त वीणा’ कहा जाता है। कुछ जानकार इसे वायलिन का पूर्वज भी बताते हैं। इसे बाद में सारंगी के रूप में विकसित किया गया।
7.रावण के हवाई अड्डे : रावण के पास वायुसेना भी थी। कहते हैं कि उसानगोड़ा, गुरुलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला नामक उसके हवाई अड्डे थे और पुष्पक नामक उसके पास एक विमान था।
8.जलपोत : रामायण के अनुसार रावण के पास वायुयानों के साथ ही कई समुद्र जलपोत भी थे। रामायण में केवट प्रसंग से यह सिद्ध होता है कि साधारण मनुष्य के पास नाव थी जो रावण के पास जलपोत होना स्वाभाविक है। रामायण में कैवर्तों की कथा से तथा लोक साहित्य में रघु की दिग्विजय से स्पष्ट हो जाती है।
9.मधुमक्‍खी यंत्र : लंका में दूरभाष की तरह उस युग में ‘दूर नियंत्रण यंत्र’ था जिसे ‘मधुमक्‍खी’ कहा जाता था। वि‍भीषण को लंका से निष्काषित कर दिया था, तब वह लंका से प्रयाण करते समय मधुमक्‍खी और दर्पण यंत्रों को भी राम की शरण में ले गया था।
10.लंका में लिफ्ट : लंका में यांत्रिक सेतु, यांत्रिक कपाट और ऐसे चबूतरे भी थे, जो बटन दबाने से ऊपर-नीचे होते थे। ये चबूतरे सम्भवत: लिफ्‍ट थे।
रावण की यह इच्छाएं अधूरी ही रह गई : रावण चाहता था कि सोने से सुगंध आए और मदिरा से दुर्गंध समाप्त हो जाए। स्वर्ग तक सीढ़ियां बनाई जाए और समुद्र के खारे पानी को मीठे पानी में बदल दिया जाए। सभी लोग गोरे दिखाई दें कोई भी काला ना हो और खून का रंग सफेद हो।

(साभार – वेबदुनिया)

घर में अगर बुजुर्ग हैं तो आपकी मदद कर सकते हैं ये उपकरण

जब भी आप घर से बाहर होते हैं तो घर में मौजूद बुज़ुर्गों की चिंता बनी रहती है। कहीं उन्हें किसी चीज की आवश्यकता तो नहीं या बाहर किसी व्यक्ति से उनको खतरा तो नहीं, ये सभी चिंताएं होना लाजमी है। सिर्फ यही नहीं, उन्हें रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में, खास वृद्धों के लिए बनाए गए उपकरण काम के होंगे। सोनाक्षी सक्सेना बता रही हैं बुजुर्गों की मदद करने वाले गैजेट्स के बारे में…


यह सिक्योरिटी अलार्म सिस्टम खिड़की या दरवाजों पर लगा सकते हैं। किसी तरह की आपात स्थिति के लिए ये सावधान करता है। वहीं हर दरवाजे पर लगे मोशन सेंसर हलचल मिलने पर अलर्ट करते हैं। यह सिर्फ अनचाहे आगुंतक ही नहीं बल्कि आग, जहरीली गैस या चिकित्सा जरूरतों के लिए भी अलर्ट देता है।

इसमें पूरे महीने की दवाइयां समय और दिन के अनुसार रख सकते हैं। इसमें दवाइयां लॉक रहती हैं। दिन और समय के मुताबिक सैटिंग करनी होती है। जब दवाइयां लेने का समय होता है तो इसमें अलार्म बजने के साथ-साथ फ्लैश लाइट जलने लगती है और दवाएं लॉक से बाहर आ जाती हैं।


घर के अंदर और बाहर बुज़ुर्ग व्यक्ति को आपकी मदद की आवश्कता पड़ सकती है। उन्हें मेडिकल इमरजेंसी डिवाइस घड़ी या लॉकेट पहना सकते हैं। इसमें पैनिक बटन होता है ताकि एसओएस की मदद के लिए कॉल किया जा सके। ये वॉटरप्रूफ भी होता है, इसलिए बुज़ुर्ग बाथरूम में भी इसे पहने रखकर निश्चिंत हो सकते है।


इस उम्र में बार-बार उठने में समस्या होती है तो ऑल इन वन रिमोट कंट्रोल मददगार हो सकता है। यह रिमोट मोबाइल में होता है। इससे पंखा, लाइट आदि चालू या बंद कर सकते हैं। जिनके जोड़ों में दर्द है, उन्हें बार-बार उठने की जरूरत नहीं रह जाएगी। अगर घर में स्मार्ट लॉक सिस्टम लगा है तो इससे दरवाजा लॉक या अनलॉक कर सकते हैं। वीडियो कैमरा भी एक्सेस कर सकते हैं।


बाथरूम इस्तेमाल करते वक्त खड़े होने में दिक्कत न हो इसके लिए टॉयलेट के दोनों तरफ होल्डर लगा सकते हैं। इन्हें शावर, नल के आसपास और सिंक के दोनों तरफ भी लगाया जा सकता है। बाथरूम के लिए बेंच भी उपयोग कर सकते हैं। इसमें भी होल्डर्स लगे होते हैं ताकि बुज़ुर्ग आसानी से उठ और बैठ सकें।


दिनभर घर में रहकर ऊब महसूस न हो इसलिए मनोरंजन भी बहुत जरूरी है। अगर वृद्ध दिनभर घर में रहते हैं तो उनके लिए स्मार्ट स्पीकर्स लगा सकते हैं। इसे टीवी या टैब से कनेक्ट किया जा सकता है। इस तरह वे आंखों पर बिना ज़ोर डाले स्पीकर को सिर्फ कमांड देकर पसंदीदा चैनल या गाने लगा सकते हैं। इसके लिए उन्हें किसी रिमोट या बटन की भी जरूरत नहीं होगी। उनका समय भी अच्छा गुजरेगा।


यह कैमरा घर और बाहर लगा सकते हैं, जो 360 डिग्री में घूमकर पूरे घर पर नजर रखता है। इसे ऐप की मदद से उपयोग में लिया जाता है। यह घर के आसपास होने वाली गतिविधियों पर भी नजर रखता है। यदि कोई अनजान व्यक्ति नजर आता है तो मोबाइल ऐप की मदद से आप उससे पूछताछ कर सकते हैं।


अगर किसी बुज़ुर्ग को डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी है तो जीपीएस डिवाइस को घड़ी या लॉकेट के रूप में पहना सकते हैं। इसे मोबाइल से ट्रैक कर सकते हैं। घर से दूर रहकर भी उन पर नजर रखी जा सकती है। यदि वे घर से बाहर चले जाते हैं तो उनका पता आसानी से लगाया जा सकता है। इसमें सुरक्षित क्षेत्र की सैटिंग भी कर सकते हैं। उस दायरे से बाहर जाने पर मोबाइल पर अलर्ट एसएमएस भी मिलता है।


घर में बुज़ुर्ग हैं तो गोरिल्ला ग्रिप मैट बाथरूम में डाल सकते हैं। इसमें ग्रिप बनी होती है जो जमीन से चिपक जाती है ताकि पैर रखने पर ये फिसले नहीं। पैरों में फंसने से न ये अपनी जगह से हटती है और न ही मुड़ती हैं। इन्हें उन जगहों पर भी डाल सकते हैं जहां फिसलने का डर हो।

(साभार – दैनिक भास्कर)

2000 साल पुराने दधिमती माता मंदिर के गुम्बद पर हाथ से उकेरी गई थी रामायण

गुम्बद का निर्माण 1300 साल पहले हुआ था, जबकि माँ का प्राकट्य दो हजार साल पहले का है
नवरात्र में दाधीच समाज के लोग यहां बच्चों का रिश्ता तय करने आते हैं, अष्टमी को मेला लगता है

राजस्थान के नागौर जिले में गोठ और मांगलोद गांव के बीच दाधीच ब्राह्मणों की कुलदेवी दधिमती माता का 2000 साल पुराना मंदिर है। दावा है, उत्तर भारत का यह सबसे प्राचीन मंदिर है। इसका निर्माण गुप्त संवत 289 को हुआ था। इसकी विशेषता यह है कि मंदिर के गुंबद पर हाथ से पूरी रामायण उकेरी गई है। गुम्बद का निर्माण 1300 साल पहले हुआ था, जबकि मान्यता है कि मां का प्राकट्य दो हजार साल पहले हुआ था। यहां दाधीच समाज के लोग बच्चों के रिश्ते की बात पहले तय कर लेते हैं और नवरात्र में बच्चों को आपस में दिखाकर मां के समक्ष ही रिश्ता पक्का करते हैं। अष्टमी को यहां मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से लोग आते हैं।

यहाँ राजा मान्धाता ने यज्ञ किया था

किवदंती है कि यहां अयोध्या के राजा मान्धाता ने यज्ञ किया था। इसके लिए चार हवन कुंड बनाए गए थे। राजा ने आह्वान करके चारों कुंडों में चार नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती और नर्मदा का जल उत्पन्न किया था। इन कुडों के पानी का स्वाद अलग-अलग है।

दधिमती माता ऋषि दधीचि की बहन
पुराणों के अनुसार, दधिमती माता ऋषि दधीचि की बहन हैं। इन्हें लक्ष्मी का अवतार भी माना जाता है। इस मंदिर को लेकर एक और मान्यता है कि कलयुग के बढ़ते प्रभाव से मंदिर का मुख्य स्तंभ सतह से चिपकता जा रहा है। मां दधिमती का जन्म माघ शुक्लपक्ष की सप्तमी यानी रथ सप्तमी को हुआ था। मां दधिमती ने दैत्य विताकासुर का वध भी किया था।

एक हजार से अधिक श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती पाठ करते हैं
पंडित विष्णु शास्त्री बताते हैं कि नवरात्र में रोज एक हजार से अधिक श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। उनके रहने के लिए मंदिर में ही व्यवस्था की जाती है। परिसर में करीब 250 कमरे बनाए गए, जहां बाहर से आए श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की जाती है।

औरंगजेब ने किया था हमला, मधुमक्खियों ने किया नाकाम
मंदिर कमेटी से जुड़े रिटायर्ड जिला जज संपतराज शर्मा ने बताया कि ‘मुगल काल में औरंगजेब ने मंदिर पर हमला किया था। तब यहाँ गुम्बद पर मौजूद मधुमक्खियों ने औरंगजेब की सेना पर हमला बोल दिया था, जिससे सैनिक वापस भाग गए।
(साभार – दैनिक भास्कर)

अगर आप हैं घूमने के शौकीन

घूमना हर व्यक्ति को पसंद होता है, जरूरत होती है बस पैसों की। आम इंसान का घूमने का इरादा बनने से पहले इसलिए कैंसिल हो जाता है क्योंकि बजट बीच में आ जाता है। अब सवाल ये है कि क्या बजट के बारे में सोचकर घूमना छोड़ देंगे? बिल्कुल नहीं! थोड़ी सूझबूझ से आप अपने बजट में घूम सकते हैं। सिर्फ देश में नहीं बल्कि विदेश घूमने का खर्च भी कुछ तरीके अपनाकर आप आधा या कम कर सकते हैं। आगे की स्लाइड्स में जानें वो कौन से बजट मंत्र हैं जिनको अपनाकर आप पूरे विश्व में अपनी शर्तों पर घूम सकते हैं।
जगह चुनते समय समझदारी
पर्फेक्ट डेस्टिनेशन वही है जो सही वक्त और सही बजट से मिलकर बनती है। इसलिए आप जगह को लेकर जितने विकल्प रखेंगे उतनी ज्यादा बचत कर पाएंगे। आपका सबसे बड़ा खर्च फ्लाइट टिकट होगा, इसलिए उसके अनुसार जगह चुनने में ही समझदारी है। स्काईस्कैनर, हैप्पी इजी गो जैसी वेबसाइट के जरिए आप पता लगा सकते हैं कि किस समय किस जगह की फ्लाइट सस्ती हैं।
बजट ट्रैवल ब्लॉगर्स को करें फॉलो
एक बार जब जगह चुन लेते हैं, तो वहां से जुड़ी जानकारी लेने के लिए सबसे अच्छा जरिया है, उनसे बात करना जो वहां पहले जा चुके हो। अगर आप एक बजट यात्रा की योजना नहीं बना रहे हैं, तो भी ट्रैवल ब्लॉगर आपको जगह से जुड़े ठगों से बचने की तरकीब और वहां की स्थानीय चीजों के बारे में बता सकते हैं।
ऑफ सीजन का फायदा उठाएं
पीक सीजन में यात्रा करना दो कारणों से खराब है। पहला, पर्यटकों की भीड़ और ऊंची कीमतें। ऑफ सीजन में कीमतें अक्सर 70 प्रतिशत सस्ती हो सकती हैं, होटल अपनी कीमतों को कम करते हैं, टूर भी सस्ते और कम भीड़ वाले होते हैं। किस महीने में यात्रा करना सबसे सस्ता होगा, ये आप वेबसाइट्स के चीपेस्ट मंथ फीचर के जरिए पता लगा सकते हैं।
सर्च इंजन का उपयोग करें
ऑनलाइन कीमतों की तुलना करना अहम है। बहुत सारे फ्लाइट सर्च एप्लिकेशन और होटल बुकिंग वेबसाइट असल कीमत में ज्यादा शुल्क और कमीशन जोड़ कर आपको दिखाते हैं। स्काईसस्कैनर और गूगल फ्लाइट्स जैसी वेबसाइट आपको बिना किसी एक्सट्रा चार्ज के फ्लाइट और होटल बुकिंग में मदद करते हैं।
ठहरने के विकल्प
हॉस्टल, गेस्टहाउस और होमस्टे लगभग हमेशा ही एक औसत होटल की कीमत से आधे दाम पर मिल जाते हैं। पहले तो यात्रियों को सस्ते और अच्छी ठहरने की जगहों के लिए काफी महनत करनी पड़ती थी लेकिन एयरबीएनबी जैसी साइटों के साथ, एक बढ़िया होमस्टे बुक करना होटल बुक करने जितना ही आसान है।
वॉलंटियर करें
यात्रा पर वॉलंटीयर करने से ज्यादा अच्छा अनुभव मिल सकता है। खासकर तब जब आप लंबी छुट्टी पर हों, तो एक हफ्ते वॉलंटीयर करके उस जगह को उसके स्थानिय रूप में देखते हुए और समाज के लिए कुछ करते हुए आप अपने रोजाना के सभी खर्चों की बचत कर सकते हैं।
अपनी रसोई
होटल और टूरिस्ट बाजारों में बेची जाने वाली रोजमर्रा की चीजें पर ज्यादा खर्च करने से बचें। इसके बजाय, पता लगाएं कि स्थानीय लोग सामान की कहां खरीदारी करते हैं। अगर आप एयरबीएनबी या हॉस्टल में रह रहे हैं तो सेल्फ-कैटरिंग किचन का फायदा उठाएं और हर रात बाहर खाने के बजाय स्थानीय मसालों के साथ अपना खाना खुद बनाएं। यह आपके खाने के बजट को आधा कर सकता है।
भाषा ऐप इस्तेमाल करें
ये आपकी यात्रा में बेहद काम आएगा। किसी भी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा से पहले अपने फोन पर कम से कम एक भाषा से जुड़ी ऐप डाउनलोड करें। गूगल ट्रांसलेट जैसे एप्लिकेशन ना केवल आपको शहर को बेहतर तरीके घूमने में मदद कर सकते हैं बल्कि वे आपको मोल-भाव करने, सार्वजनिक सुविधाओं के बारे में बात करने और स्थानीय रहस्यों का पता लगाने में भी मदद कर सकते हैं, जो ऑनलाइन खोजना लगभग नामुमकिन है।

सॉफ्ट ड्रिंक्स से सेहत बिगड़ी, पानी से सुधारी, फ्लेवर्ड पानी बेचकर बना दी  700 करोड़ की कम्पनी 

न्यूयॉर्क : अमेरिका की सिलिकॉन वैली में ऊंची तनख्वाह पाने वाली महत्वाकांक्षी कारा गोल्डिन का वजन लगातार बढ़ रहा था। सुस्ती, थकान ज्यादा और जल्दी होने लगी थी। तब एक डॉक्टर दोस्त ने कारा से कहा कि अगर वह अपनी पीने की डाइट सही कर ले, तो स्वास्थ्य से संबंधित ज्यादातर चीजें अपने आप सही हो सकती हैं। तब कारा ने सॉफ्ट डिंक छोड़ पानी पीना शुरू किया, लेकिन लगातार सादा पानी पीकर बोर हो गईं। इसके बाद वह पानी में कुछ फल के टुकड़े काट के रखने लगी। इससे पानी ज्यादा स्वादिष्ट हो गया। इस अनुभव से कारा को बिजनेस आईडिया आया। साल 2005 में कारा ने नेचुरल फ्रूट के साथ फ्लेवर्ड पानी की बॉटल का काम शुरू किया। बिना कोई प्रिजरवेटिव, शुगर या स्वीटनर इस्तेमाल किए कारा ने फ्लेवर्ड पानी की सप्लाई शुरू की। आज उनकी कम्पनी हिन्ट की सालाना बिक्री 10 करोड़ डॉलर (700 करोड़ रुपये) से ज्यादा है। हिन्ट 26 फ्लेवर में ड्रिंक बना रही है। गूगल, फेसबुक सहित सिलिकॉन वैली की सैकड़ों कंपनियां अपने ऑफिस में इन ड्रिंक्स का इस्तेमाल करती हैं।
पानी पीने से 30 दिनों में 9 किलो वजन कम हुआ
परेशानी के दिनों में कारा ने देखा था, वह हर दिन डाइट कोला की लगभग 10 केन पी रही थीं। यानि हर दिन 3 से 4 लीटर कैफीनयुक्त, कृत्रिम रूप से मीठा किया हुआ लिक्विड। इसी वजह से उन्हें सुस्ती और थकान ज्यादा हो रही थी। वजन और मुंहासे बढ़ रहे थे। इसके बाद कारा ने एओएल टेक ग्रुप की अपनी शीर्ष स्तर की नौकरी छोड़ दी। पूरी लाइफस्टाइल को बदला। तब एक महीने के अंदर उसका वजन 9 किलो कम हो गया, मुंहासे साफ हो गए। वह खुद को फिर से ऊर्जावान महसूस करने लगीं।
सॉफ्ट ड्रिंक्स हमेशा विवादों में रहा
कई विशेषज्ञों और हेल्थ रिपोर्ट का दावा है कि ये ड्रिंक्स हेल्थ के लिए नुकसानदायक हैं। यह दांत से लेकर हमारी हड्डियों तक को नुकसान पहुँचाते हैं। सितंबर 2019 में आई वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार कम उम्र में होने वाली मौतों के लिए भी ये ड्रिंक्स जिम्मेदार हैं। इसमें मौजूद फॉस्फोरिक एसिड हड्डियों को कमजोर बनाता है। इसमें मौजूद आर्टिफिशियल शुगर और प्रिजर्वेटिव भी हानिकारक है। हालांकि कम्पनियां इससे इनकार करती रही हैं।

11 हजार फीट ऊँची खतरनाक सड़क पर 70 साल की महिला ने चलायी 60 किमी साइकिल

सुक्रे : बोलिविया की 70 साल की मिरथा मुनोज ने दुनिया की सबसे खतरनाक सड़क नार्थ यंगास रोड पर 60 किमी साइकिल चलाई है। उन्होंने स्काई रेस स्पर्धा में हिस्सा लिया और रेस पूरी भी की। बोलिविया की यह सड़क 11 हजार फीट की ऊंचाई पर है। पूरा इलाका जंगल से घिरा है। सड़क संकरी और खड़ी ढलान में है। कई जगह सड़क के किनारे रेलिंग भी नहीं है। यहां अक्सर भारी बारिश और बर्फबारी होती है। भूस्खलन भी होता है। ऐसी खतरनाक स्थिति के कारण इस सड़क को रोड ऑफ डेथ भी कहा जाता है। यह सड़क 1930 में बनी थी। तब से यहां हादसों में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। दरअसल, कई साल पहले मिरथा के बेटे की अचानक मौत हो गई थी। इससे उभरने के लिए मुनोज ने इसमें हिस्सा लिया। वह कहती हैं कि साइकिल रेस ने ही उन्हें दर्द सहने और खुद को दोबारा खड़ा करने की हिम्मत दी। यह जूनून आज का नहीं, बहुत साल पुराना है। इतनी लंबी रेस में हिस्सा लेना ही बड़ी उपलब्धि है। जीतना या हारना मकसद नहीं है। 11 हजार फीट की ऊंचाई पर साइकिल चलाना कठिन है, लेकिन असंभव नहीं है। हम ऊपर और ऊपर चले जाते हैं, कहीं कोई आराम नहीं मिलता, लेकिन रेस पूरी होने के बाद खुशी मिलती है। मिरथा स्काई रेस स्पर्धा की संस्थापक सदस्य भी हैं। उन्हें साइकिल चलाने में सबसे ज्यादा खुशी तब मिलती है, जब उनके 6 पोते-पोतियां साथ होते हैं। उनकी एक पोती 18 साल की हो चुकी हैं। मिरथा को इससे बहुत उम्मीदें हैं। वह कहती हैं कि नयी पीढ़ी भी उन्हीं के ट्रैक पर दौड़ना चाहती हैं।

हिन्दी सीखने के लिए बच्चन, जयशंकर प्रसाद और सुमित्रानंदन पन्त को पढ़ चुके हैं आदित्य ठाकरे

मुम्बई  : बाल ठाकरे अक्सर कहा करते थे कि मैं या मेरे परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। लेकिन अब 1966 में बनी पार्टी शिवसेना के मुखिया ठाकरे परिवार की परम्परा टूट रही है। पार्टी की विंग युवा सेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे करीब 11 साल की लंबी तैयारी के बाद वर्ली (मुम्बई) से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। 29 वर्षीय आदित्य, उद्धव ठाकरे के पुत्र हैं। वे महाराष्ट्र में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वे कई बार पार्टी की लाइन से हटकर भी काम करने में नहीं कतराते हैं।
उत्तर भारतीयों के आयोजन के आयोजन में शामिल हुए
हाल ही में आदित्य ने मुंबई में उत्तर भारतीयों के आयोजन कजरी महोत्सव में शिरकत की। वे ऐसे करीब एक दर्जन कार्यक्रमों में गए। यहाँ उन्होंने गमछा ओढ़ा, पगड़ी पहनी और चौपाई भी बोली। जबकि उनकी पार्टी को उत्तर भारतीयों की विरोधी माना जाता है। ऐसे ही मुंबई में जब आरे के जंगल के पेड़ों को बचाने की बात आई, तो उन्होंने सत्तारूढ़ दल होते हुए भी जन भावनाओं के पक्ष में आवाज उठाई। इस बात की जानकारी बहुत ही कम लोगों को है कि उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने से पहले, सबसे पहले हिन्दी सीखी।

कभी भी लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ते

आदित्य ठाकरे जब स्कूल में पढ़ते थे, उस वक्त हिंदी के शिक्षक विनय दुबे ने उन्हें घर जाकर हिंदी सिखाई है। वे बताते हैं कि आदित्य की अंग्रेजी पर पकड़ बहुत अच्छी है। लिहाजा उनकी मां रश्मि ठाकरे की इच्छा थी कि वे हिंदी भी धाराप्रवाह बोलें। विनय बताते हैं कि हिंदी सुधारने के लिए उन्होंने हरिवंश राय बच्चन, जयशंकर प्रसाद और सुमित्रानंदन पंत सहित कई कवियों को खूब पढ़ा। मैंने उन्हें हिंदी की बोलचाल में मुहावरों का प्रयोग करना सिखाया। उच्चारण में मुश्किल शब्दों का इस्तेमाल करने से बचने की भी सलाह दी। वे कभी भी लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ते हैं।
कई बॉलीवुड सितारे आदित्य के लिए करना चाहते हैं प्रचार
युवा सेना के सचिव वरुण सरदेसाई आदित्य की कोर टीम के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वे बताते हैं कि जब से आदित्य ठाकरे ने नामांकन दाखिल किया है कई बॉलीवुड सितारों ने प्रचार करने की इच्छा भी व्यक्त की है। गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन की विशेष उपस्थिति में आदित्य ठाकरे के काव्य संग्रह का विमोचन हुआ था। सलमान खान के घर गणपति का दर्शन करने आदित्य जाते रहे हैं। अक्षय कुमार तो शिवसेना द्वारा मुम्बई में कई स्थानों पर शुरू किए गए ओपन जिम और महिलाओं के लिए शुरू किए गए आत्मरक्षा कक्षाओं यानी  सेल्फ डिफेंस क्लासेस के उद्घाटन समारोह में भी उपस्थित होते रहे हैं।
वर्ली में काफी लोकप्रिय हैं
प्रशांत किशोर की 100 लोगों की टीम शिवसेना को ग्राउंड रियलिटी की जानकारी दे रही है। वरली सहित महाराष्ट्र की जिन 124 सीटों पर शिवसेना चुनाव लड़ रही है, उसकी ग्राउंड रिपोर्ट बूथ वाइज तैयार कर प्रशांत की टीम दे रही है। आदित्य वर्ली में काफी लोकप्रिय हैं, इसलिए केवल तीन दिन ही वहां प्रचार करने के लिए जाएंगे।
कविताएं लिखने का शौक, म्यूजिक एल्बम भी आ चुका
आदित्य ने बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली है। इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स से इतिहास में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने केसी लॉ कॉलेज से कानून की भी पढ़ाई की है। वर्ष 2007 में ही उनकी कविताओं की किताब ‘माय थॉट्स इन वाइट एंड ब्लैक’ लॉन्च हो चुकी है। उन्हें जब भी कोई अच्छी लाइन याद आती है वे मोबाइल में ही लिख लेते हैं। उनका उम्मीद नाम से एक म्यूजिक एल्बम भी आया है। आदित्य ने महाराष्ट्र के करीब 40,959 गांवों में से 10 हजार से अधिक गांवों से गुजरते हुए चार हजार किमी की लंबी जन आशीर्वाद यात्रा की है।

राजनीति पर कम खेल, शिक्षा, और रोजगार पर फोकस

युवा सेना के गठन के साथ ही आदित्य ठाकरे के साथ संगठन में सचिव के रूप में पिछले 11 वर्षों से कार्य कर रहे पुर्वेश सरनाईक बताते हैं कि महाराष्ट्र की जनसंख्या करीब 11 करोड़ 24 लाख है। इसमें से करीब 47 फीसदी लोगों की औसत उम्र 29 साल है। आदित्य ठाकरे की उम्र भी इतनी ही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव लड़ने की उनकी टाइमिंग एकदम सही है। युवा सेना सचिव सूरज चव्हाण बताते हैं कि आदित्य दूसरे नेताओं की तरह कुर्ते पायजामे के बदले चाइनीज कॉलर की शर्ट के साथ में चीनोस की पैंट और जूते पहनते हैं। युवाओं के बीच आदित्य पॉलिटिक्स की कम खेल, शिक्षा, कॉलेज और रोजगार जैसे विषयों पर बात करते हैं, जिससे युवा आसानी से उनके साथ जुड़ जाता है।

शिवसैनिकों पर कसी लगाम

आदित्य ठाकरे के मौजूदा कोर ग्रुप में शामिल प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि उन्होंने 18 साल की कम उम्र में ही लोगों से जुड़ने की यात्रा शुरू कर दी थी। वे करीब 9 से 11 वर्षों से सक्रिय राजनीति में रहे हैं। उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई के कॉस्मोपोलिटन कल्चर को समझा। वैलेंटाइन-डे पर शिवसैनिकों द्वारा की जाने वाली तोड़फोड़ की घटना को न सिर्फ लगााम कसी बल्कि अब ऐसी घटनाएं लगभग बंद ही हो गई हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)