Monday, April 27, 2026
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मीनल ने बनाया पहला स्वदेशी कोरोना टेस्टिंग किट

गर्भावस्था के आखिरी दिनों में भी किया काम
नयी दिल्ली : कुछ करने का जज्बा हो तो मुश्किलें हल हो जाती हैं। मीनल दाखवे भोंसले ने जो कर दिखाया है, उसे जानकर तो यह फिर से साबित हो रहा है। उन्होंने कोरोना वायरस की जांच के लिए ऐसा किट तैयार किया जो विदेशी किट के मुकाबले बेहद सस्ता है। खास बात यह है कि मीनल ने अपनी प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में इस किट पर काम किया। देश का यह पहला टेस्टिंग किट कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। वायरॉलजिस्ट मीनल ने पुणे के एक डायग्नोस्टिक फर्म माइलैब डिस्कवरी सॉल्युशंस के प्रॉजेक्ट पर फरवरी में काम शुरू किया था। वह प्रेग्नेंट थीं। पिछले हफ्ते ही उन्हें बच्ची हुई। उन्होंने कहा, ‘यह जरूरी था, इसलिए मैंने इसे चुनौती के रूप में लिया। मुझे अपने देश की सेवा करनी है।’ उन्होंने बताया कि उनकी टीम के सभी 10 सदस्यों ने कठिन परिश्रम किया है। प्रॉजेक्ट पूरा होने पर टेस्टिंग किट नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी (NIV) को 18 मार्च को सौंप दिया गया और अगले दिन ही मीनल को बेटी हुई।
विदेशी किट से सस्ता
देश का पहला कोरोना वायरस टेस्टिंग किट गत गुरुवार को मार्केट में आ गया। टेस्टिंग किट से वायरस के संक्रमण के संदिग्धों की जांच में तेजी आई है। मीनल ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में बताया, ‘हमारा किट ढाई घंटे में टेस्ट रिजल्ट दे देता है जबकि विदेशी टेस्टिंग किट को छह से सात घंटे लगते हैं।’ हर माइलैब किट से 100 सैंपल टेस्ट किए जा सकते हैं और जांच का खर्च 1,200 रुपये आता है। यह रकम विदेशी किट के खर्चे (4,500 रुपये) के मुकाबले करीब एक चौथाई है।
हर दिन बन रहे 15 हजार किट
माइलैब डिस्कवरी सॉल्युशंस के पास हर दिन 15 हजार टेस्टिंग किट तैयार करने की क्षमता है। पुणे के लोनावाला की फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर प्रति दिन 25 हजार किट तैयार किए जा सकते हैं। माइलैब ने पहले बैच में पुणे, मुंबई, दिल्ली, गोवा और बेंगलुरु के डायग्नोस्टिक लैब को 150 टेस्टिंग किट भेजा है।

लक्षण नहीं दिखता फिर भी शरीर में रहता है वायरस: शोध

कोरोना वायरस को पकड़ पाना दुनियाभर के वैज्ञानिकों को मुश्किल हो रहा है। अमेरिका के येल यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के वैज्ञानिक लोकेश शर्मा ने अपने अध्ययन में बताया है कि कोरोना वायरस से पीड़ित आधे मरीजों जिनमें सामान्य लक्षण था उनमें वायरस लक्षण खत्म होने के बाद आठ दिन बाद तक रहता है। हाल ही में अमेरिकल जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि यही कारण है कि वायरस को फैलने से रोकना मुश्किल हो रहा है। वैज्ञानिकों ने ये शोध कोरोना पीड़ित सोलह मरीजों पर किया है जिनका इलाज 28 जनवरी से 9 फरवरी के बीच चला है। सभी मरीजों के स्वैब का सैंपल एक-एक दिन के अंतराल पर गले से स्वैब लिया गया था। इसमें पाया गया कि जो मरीज अस्पताल से निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद डिस्चार्ज हो गया उसमें भी कई दिनों तक वायरस रहा। ऐसे में वायरस से गंभीर लक्षण आने में समय लगता है।
क्वारंटीन दो हफ्ते के लिए और बढ़ाएं
शोध में बताया है कि अगर आपको कोरोना के सामान्य लक्षण हैं और घर पर क्वारंटीन हैं। संक्रमण को फैलने से रोकना चाहते हैं तो पूरी तरह ठीक होने के बाद क्वारंटीन की समय सीमा दो हफ्ते के लिए बढ़ा दें। रोगी के ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक सावधानी बरतने के साथ उसका नियमित सामान्य इलाज जरूरी है।

कोविड19 को को लेकर शेयर चैट ने शुरू किया ‘फाइटिंग कोरोना’ अभियान

कोलकाता : भारत के अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म शेयरचैट ने फाइटिंग कोरोना ( #FightingCorona) अभियान शुरू किया है। इसके तहत भारत की 15 भाषाओं में कोविड19 के बारे में जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इस पहल के पीछे इरादा यह है कि शेयरचैट के 6 करोड़ मासिक सक्रिय प्रयोक्ताओं से कोरोना वायरस के बारे में सही जानकारी को साझा किया और बढ़ावा दिया जाए।
कोरोना वायरस के बारे में सही जानकारी रखने वाले पक्ष जैसे न्यूज़ पार्टनर, डॉक्टर और हेल्थ प्रैक्टिशनर एवं संबंधित विभाग शेयरचैट की इस पहल में सहयोग करने आगे आए हैं। 15 भाषाओं में यह जानकारी शेयरचैट प्लैटफॉर्म पर उपलब्ध है। कोविड19 से संबंधित जानकारी निम्न हैशटैग के साथ क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारित की जा रही हैः
कोरोनावायरस हेतु सावधानियां)
नवीनतम समाचार/कोरोनावायरस अपडेट)
कोरोनावायरस हैल्पलाइन/ किस को कॉल करें)
अपने हाथ धोएं/ हैंड वॉश चैलेंज
भीड़ से दूर रहें/ घर में एकांतवास करें)
नमस्ते करें, हाथ न मिलाएं)
उदाहरण के लिए तमिलनाडु से डॉ अश्विन विजय और कोलकाता से डॉ देबतनु बैनर्जी स्वेच्छा से आगे आए तथा तमिल व बांग्ला में कोरोनावायरस के बारे में शंकाएं दूर कीं और आवश्यक मार्गदर्शन दिया। चेन्नई का यालामाल हॉस्पिटल शेयरचैट प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए वायरस के बारे में जागरुकता फैला रहा है और प्लैटफॉर्म पर ही लोगों के सवालों के जवाब दे रहा है। शेयरचैट के 50 से अधिक न्यूज़ पार्टनर (समाचार सहयोगी) हैं जिनमें से कुछ के नाम हैं- आजतक, न्यूज़18, एबीपी, न्यूज़ नेशन, ज़ी न्यूज़, बीबीसी इंडिया, पीटीसी, टीवी 9 मराठी और गुजराती, न्यूज़ जे बांग्ला, साम टीवी आदि। ये सभी न्यूज़ पार्टनर स्थानीय भाषाओं में इस महामारी के बारे में रियल टाइम अपडेट दे रहे हैं।
शेयरचैट अपने उपयोगकर्ताओं को प्रोत्साहित कर रहा है कि वे गलत सूचनाओं और असत्यापित सामग्री को पोस्ट न करें। यह प्लेटफॉर्म स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय एवं अन्य सत्यापित स्त्रोतों से आधिकारिक अपडेट सुनिश्चित करता है। जब यूज़र ऊपर बताए गए हैशटैग इस्तेमाल करके सर्च करता है तो ये जानकारियां दिखाई देती हैं। प्लैटफॉर्म पर हर कॉन्टेंट के ट्रैडिंग फीड पर नज़र रखी जाती है, यदि यूज़र कोई गलत सूचना पोस्ट करता है अथवा कोई यूज़र किसी गलत सूचना के बारे में रिपोर्ट करता है तो उसे हटा दिया जाता है। प्लैटफॉर्म कई थर्ड पार्टी आईएफसीएन मान्यता प्राप्त फैक्ट चैकर के साथ अपने संबंधों का उपयोग भी कर रहा है और 13 भाषाओं में कॉन्टेंट की जांच कर रहा है ताकि साज़िश, फेक न्यूज़ और गलत जानकारियों को मिटाया जा सके। यह प्लेटफॉर्म सीधे स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय से वैबकार्ड के जरिए सूचना प्राप्त कर रहा है जो 15 भाषाओं में उपलब्ध है। इसके अलावा ऑल इन कॉल के सहयोग से एक चैटबॉट भी इंटिग्रेट किया जाएगा ताकि प्रयोक्ताओं को कोरोनावायरस से संबंधित सत्यापित ब्यौरा दिया जा सके। इसमें विभिन्न राज्यों के लिए हैल्पलाइन नंबर, परीक्षण केन्द्रों की लोकेशन व कोरोनावायरस के बारे में जानकारी (जैसे लक्षण, सुरक्षित कैसे रहें) शामिल होंगे। पहले चरण में चैटबॉट हिंदी में उपलब्ध होगा और यूज़र्स के फीडबैक पर निर्भर करते हुए अन्य भाषाओं में भी इसका प्रसार किया जाएगा।

विषाद का साम्राज्य और कोरोना

डॉ. वसुन्धरा मिश्र

भारत की संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम् ”  और “सर्वे भवंतु सुखिनम् ” की रही है। पारंपरिक और देशीय पद्धति से जीवन यापन करने वाले भारतीयों में जब आधुनिकीकरण की प्रक्रिया बढ़ी उसके साथ – साथ अर्थ – धर्म- काम- मोक्ष जैसे पुरुषार्थों की चिंतन पद्धतियों में भी परिवर्तन आता गया। प्रकृति से जुड़ा मनुष्य प्रकृति से दूरी बनाने में अपनी शान समझने लगा। मनुष्य की नैसर्गिक प्रकृति में विरोधी प्रदर्शन की होड़ को बढ़ावा मिलने लगा। मनुष्य ने अपनी एक अलग दुनिया बनाई जिसमें आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय जैसे बड़े- बड़े मुद्दे हैं जिनको अपनी मर्जी से बनाने लगा। विज्ञान, प्रौद्योगिकी तकनीक और संचार क्रांति ने उसे अंतरिक्ष पर भी सत्तासीन करा दिया है। प्रकृति के साथ मनुष्य जाति का सामंजस्य नहीं रहा। 130 करोड़ भारतीयों को अचानक कोरोना वायरस के कारण घर बंद कर सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया।पूरा देश एकाएक घर में बंद होने पर मजबूर हो गया। बिना किसी पूर्व व्यवस्था के अचानक से आई हुई लॉकडाउन की स्थिति भी कोरोना की तरह ही भयावह है लेकिन इसके साथ ही जीवन बचने की उम्मीद भी है।

सामाजिक स्तर पर सभी समाज कोरोना वायरस से ग्रसित हैं। विदेशों से आने वाले भारतीय मूल या फिर वहाँ से आए पर्यटक, विद्यार्थी या व्यापारिक आदान-प्रदान द्वारा कोरोना वायरस का संक्रमण किसी को भी हो सकता है। चीन के बुहान से इसका आगमन माना गया जहाँ से ईरान, इटली, स्पेन, अमेरिका, भारत आदि देशों में इस महामारी का फैलना हुआ । समाज कोई भी हो सभी वर्गों के लोगों को इस वायरस ने अपनी चपेट में  ले लिया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हों या फिल्म सितारे, बच्चे बूढ़े जवान स्त्री पुरुष सभी। परिवार और देश को बचाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस पहल ने कि “जान है तो जहान है” महामारी की भयंकर आशंकाओं को भापते हुए यह मुश्किल कदम उठाए हैं। हमें सवाल करने की स्वतंत्रता है। हम घरबंद हो गए। जब बहुत संख्या में लोगों की मौत होती तब यदि ऐसा कदम उठाया जाता तो सरकार को अधिक कोसते लेकिन हर व्यक्ति को अपने प्राण प्यारे होते हैं।
भारत सदैव से विभिन्न विपदाओं से कम संसाधनों में भी अपने को बचाने में आगे रहा है। ऋषि – मुनियों और तप – उपवास का देश रहा है। अदृश्य कोरोना वायरस से लड़ना 130 करोड़ लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण है।
सरकारें बदलती रही हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण को ठीक करने में ही वर्षों गुजर गए। हम जैसा सोचेंगे वैसे ही जीवनशैली को अपनाएंगे। धर्म में हमारी अगाध आस्था है। भारत अपनी शक्ति और बुद्धि को आदिकाल से पहचानता है लेकिन अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कोशिश करता रहता है।
धर्म के नाम पर गरीबों और भिखारियों को भोजन करवाना पुण्य का कार्य है। धार्मिक अनुष्ठानों में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन सड़कों पर सोए हुए मजदूरों को बड़ी गाड़ियां आराम से कुचल कर निकल जाती हैं।
आर्थिक असमानता के कारण अचानक आई दैवीय आपदाओं से निपटने के लिए रुपये पैसे के लिए मृत्यु को दांव पर लगाना हमने सीखा है। हम महत्वाकांक्षी देश में जी रहे हैं। सुविधाओं की कमी है और सुविधाभोगी हो गए हैं। आजीविका और नौकरी की तलाश में राजस्थान, गुजरात, बिहार से लोगों का पलायन  बंगाल और महाराष्ट्र में हुआ था। वे अपने ही देश की मिट्टी के हैं। विभिन्न जातियों भाषाओं और संस्कृति का देश है लेकिन हमने अपनी कमियों को दूर करने की कोशिश न के बराबर की। चिकित्सा में हम बहुत आगे हैं लेकिन संसाधन और सुविधाओं की कमी है। डॉक्टर और नर्सों की कमी है। वर्तमान समय में आई आर्थिक मंदी से उबरना हर वर्ग के व्यक्ति के लिए चुनौतियों से भरा हुआ समय है। आज सरकार सजगता और सतर्कता से काम कर रही है जो सराहनीय प्रयास है। श्रमिक वर्ग की भावनाओं को ठेस न लगे नहीं तो देश में काम करने वालों की संख्या और भी घट जाएगी। चोर उचक्कों की संख्या बढ़ जाएगी।
पर्यावरण के अनुकूल हम भारतीयों ने अपनी जीवनी शक्ति को मजबूत बनाया था। दूसरों की नकल करने में हम अपनी संस्कृति भूल गए। अभी भी वक्त है।  घरबंद रह कर बिना रुपया पैसा खर्च करके कोरोना वायरस का समापन किया जा सकता है। “हर्र लगे न फिटकरी रंग चोखा होय” भारतवासियों को आदत है और सरकार भी अच्छी तरह से प्रजा की देखभाल कर रही है तो फिर हमें किस कोरोना से डर है। बाद में फिर वही पटरी और वही सवारी। दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियाँ “बाढ़ की संभावनाएं हैं
नदियों के किनारे घर बसे हैं”। आठ करोड़ किसानों को उनकी रबी की फसल बचानी है।मंदी में भी सबकुछ मिलता है। सुख दुख बंट जाता है। ईश्वर की कृपा है भारत में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता है।

चलिए स्पष्ट विचार रखने और संवाद करने की शपथ लें – संध्या सुतोदिया

आईआईएम कोलकाता ( ईपीडी एस एम एम एस-04) डिजिटल और सोशल मीडिया रणनीति की प्रबंधक प्रोग्राम की पूर्व छात्रा और अब तूरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया से शुभजिता की बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें अपनी सम्पर्क यानी कम्युनिकेशन एजेंसी की शुरुआत की और कैसे उनको सही संचार सहयोगी चयन करने की प्रेरणा मिली। इस बातचीत के कुछ संशोधित अंश:-

प्र. तुरिया कम्युनिकेशंस एलएलपी की कहानी क्या है?
2018 तक मैं एक स्वास्थ्य देखभाल ब्रांड में ही एक कॉरपोरेट संचार व्यवसायी के रूप में काम करती थी। फिर मुझे ऐसा अहसास हुआ कि मुझे जोखिम उठाना चाहिए और मुझे कुछ खुद के लिए कोई ऐसी कम्पनी या व्यावसायिक उपक्रम बनाना चाहिए जो जनसंपर्क, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग से मिलता जुलता हो। हालांकि इस योजना को अंजाम देने के लिए, मुझे वर्तमान व आधुनिक प्रौद्योगिकी का पूरा ज्ञान चाहिए था, व्यवसायिक रणनीति सीखनी थी। मेरी खोज मुझे आई. आई .एम के दरवाजे तक डिजिटल और सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति सीखने ले गयी। अंततः जैसे ही मेरा कोर्स खत्म हुआ, मैं एक बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार थी और मेरे व्यवसायी बनने के सपने को पर लग चुके थे, मैं अब एक डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग और जनसंपर्क के एजेंसी का व्यवसाय करने के लिए तैयार थी, जो ग्राहकों को एक छत के नीचे उनकी समस्याओं का समाधान देगा| जब हम दिल से कोई सपना देखते हैं तो हमें उसे कभी भी बेकार नहीं जाने देना चाहिए क्योंकि सपने छोटे बीज के तरह है जो एक खूबसूरत कल तैयार करते हैं और हमारे लिए यह बेशक तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी ही था।
प्र. हमें अपने बारे में थोड़ा और बताइए?
मैं एक संचार व्यवसायी हूँ और इस क्षेत्र में मुझे 15 साल काम करने का अनुभव है। काम करते हुए मीडिया के और विभिन्न विभागों के साथ मेरे सम्बन्ध रहे हैं। मेरी पहुँच ब्रांड मैनेजमेंट, ग्राहकों की रणनीति संबंधी योजना, मीडिया और हितधारकों, संचार संकट, सीएसआर प्रोजेक्ट और विलयन/ अर्जन कर्ता तक है। पत्रकार के रूप में भी मुझे व्यावहारिक व उपयोगी अनुभव है। मैंने अंग्रेजी में परास्नातक, जनसंचार में स्नातकोत्तर और आईआईएम कोलकाता से डिजिटल और सोशल मीडिया रणनीति के लिए कार्यपालक प्रोग्राम की डिग्री ली है। मैंने चीनी भाषा( मंडारिन) मैं भी एचएसके 1 किया है। हर दिन एक नया दिन है। जैसे सूर्य हर दिन उगता है और अपनी उत्साह सिद्ध करता है, उसी तरह मैं भी महसूस करती हूं कि हर दिन नया है और उल्लेख के लायक है , इसलिए हमें हर दिन कुछ नया करना चाहिए और इस प्रतियोगी दुनिया में अतीत की उपलब्धियां मदद नहीं करेंगी। कुछ नया सोचिए, बदलाव के बारे में और बेहतर करने के बारे में सोचिए और उसे एक तय समय में पूरा कीजिए। वैसे ही जैसे समय, धारा और कार्य किसी का इंतजार नहीं करते।
प्र. तुरिया कम्युनिकेशन किस तरह से काम करती है?
हम एक एजेंसी है जो अपरंपरागत परिवर्तनात्मक लैब में काम करते हैं, जिसे हमारे तेज ब्रांड निर्माणकर्ता और अलग सोच की कहानी कहने वाले चलाते हैं। हमारा उत्साह अपने ग्राहकों को अगली पीढ़ी की सरल संचार की तकनीक और रणनीतियों का पालन करने के लिए आगे बढ़ाना है। हमें अपने ग्राहकों के बारे में जानना और उनके सफलता पर मेहनत करना अच्छा लगता है। हम ना सिर्फ संचार रणनीति बनाते हैं बल्कि हम अपने ग्राहकों को अच्छा संबंध बनाने में मदद करते हैं जिससे उन्हें अच्छा परिणाम मिल सके। हम संबंध बनाने में और अपने ग्राहकों को पारंपरिक और ऑनलाइन सरल संचार के माध्यम से उनके पसंद अनुसार कहानी बताने पर विश्वास रखते हैं। सरल संचार शब्द और वाक्य से कहीं ज्यादा है।
प्र. आप काम करने में किस-किस क्षेत्र की ओर केंद्रित है? क्या आप अपनी सेवाओं का विस्तार कर सकते हैं?
– हमारी एजेन्सी ब्रांडिंग मीडिया रणनीति और योजना, जनसंपर्क, डिजिटल और सोशल मीडिया मार्केटिंग, सोशल मीडिया का आकलन व मापदण्ड, मीडिया और मार्केटिंग ऑपरेशन मैनेजमेंट, मार्केट अनुसंधान, उभरते ट्रेंड्स और मुद्दों का विश्लेषण, इवेंट मैनेजमेंट, डैशबोर्ड क्रिएशन, रिपोर्ट बनाने और उसके प्रेजेंटेशन सबो के बीच करती है। हम डिजिटल और सोशल मीडिया मार्केटिंग की रणनीतिक आवश्यकता समझते हैं। इसलिए मार्केट के गतिशीलता को याद रख कर हम अपने ग्राहकों के लिए डिजिटल और सोशल मीडिया मार्केटिंग रणनीति बनाते हैं। पेड न्यूज़ पर वसीयत रणनीति की योजना के अनुसार बेहतर मीडिया संबंध और विज्ञापन में अपने सक्रियशीलता की मदद से खर्च बचाने में हम अपने ग्राहकों का सहयोग करते हैं। हम विस्तृत और रणनीतिक ब्रांड बिल्डिंग की सेवाएं प्रदान करते हैं और ब्रांड की जरूरतों के लिए विभिन्न संचार के समाधान करते हैं।
प्र. आप अपने पहले प्रोजेक्ट के बारे में हमें बताएं कि वह कितना सफल रहा और कितना सफल|
पेशेवर रवैये, मेहनत और निष्ठा के बल पर हमारी एजेंसी ने कई बड़ी और कठिन योजनाएँ सफलतापूर्वक पूरी कीं। हमारी कम्पनी 20 दिसंबर 2019 को बनी और हमे हमारा पहला शो 21 को गजल कलाकार पंकज उधास के साथ मिल गया क्योंकि हम ‘महफिल 2019’ ऑफिशियल यानी आधिकारिक डिजिटल पार्टनर थे। हमनें, दो आवश्यक उपकरण- डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया का उपयोग, इस कार्यक्रम के प्रचार – प्रसार के लिए किया। असल अनुभव हाथ से बनी चीजे सीखने का  था जब प्रयोग शुरू हुआ, तो वह वक्त बहुत मनोरंजन भरा था। कई बार हाथों से सुसज्जित करके लोगों तक पहुँचाने का प्रयास किया पर हमारे दृष्टिकोण से हमें शब्द को डिजिटल तरीके से फैलाने में सहयोगी रहा। अब बात इतने अलग हित धारकों के साथ काम करने की आती है तो मुझे इस दौरान कई बड़े पाठ सीखने को मिले जिनमें कारगर और पारदर्शी तरीके से कार्य करने का अनुभव मिला। इस पेशेवर दुनिया में, हम कुछ ही लोगों की असंख्य माँगें पूरी नहीं कर सकते पर काम करके उसके लिए सही वेतन पाना ही इस दुनिया का नियम है। इसलिए स्टार्टअप करने वालों को मेरी तरफ से एक ही सुझाव है- स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से काम करें।
प्र. पहले COVID-19 और अब लोग वैश्विक मंदी की बात कर रहे हैं। इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगी?
कोरोना वायरस एक वैश्विक संकट बन चुका है; जिस के प्रकोप में हम सभी  बंदी हैं। इस महामारी का डर पूरे विश्व में फैल चुका है। जिसके परिणाम स्वरूप हमें अभूतपूर्व सामाजिक और व्यापारिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ेगा। इस उपस्थित मंदी के डर से हित धारकों में चिंता, उदासी और उनके प्रदर्शन में कमी ला सकती है। इसलिए ऐसे वक्त में संचार के सभी माध्यम खोलें और सकारात्मक रखें। आपके ग्राहक आप तक और आपके व्यापार तक तभी पहुंचेंगे, जब उन्हें आपके आर्गेनाईजेशन के बारे में जानकारी हो और साथ ही यह भी कि ऐसे वक्त में आप उन्हें किस तरह की सेवा देने का सामर्थ्य आपमें है। हालांकि यह संभव है कि अगर आप उनसे, अपने संचार के रास्ते बंद कर लेते हैं तो अंत में वह भी आपके आर्गेनाईजेशन से रुख मोड़ लेंगे। इसलिए आज के इस संकट के माहौल में, लगातार और अच्छा संचार और सम्पर्क ही व्यापार को जीवित रख सकता है।
प्र. आप विश्व आईएनसी को क्या सलाह देना चाहेंगी?
– मैं अभी बहुत छोटी हूं, इस व्यापार के गहरे समुद्र में एक छोटी मछली हूँ जो किसी को सलाह नहीं दे सकती। हालांकि मेरी व्यावसायिक समझ, मनोभाव और मांग एवं आपूर्ति के अनुभव से मैं कह सकती हूं कि इस समय कम्पनियों के लिए आने वाला समय कठिन होगा, उनको कठिन समय से गुजरना पड़ेगा| मैं कहना चाहूँगी कि लोग अपने कम्पनी के ब्रांड को मजबूत बनाने के लिए ज्यादा समय व्यतीत करें, सभी हित धारकों से स्पष्ट संवाद करते रहें और जनसंपर्क, डिजिटल और सोशल मीडिया की एक मजबूत आधार बनाएं। जैसा कि भारतीय सरकार ने 14 अप्रैल 2020 तक पूर्ण लॉग डाउन कर दिया है जिस कारण हम सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं और इसी वजह से हमारे पास बहुत सारा खाली वक्त है। इस वक्त का उपयोग ऑर्गेनाइजेशंस ( बड़ी, छोटी या मध्यम वर्गीय) अपने ब्रांड को बढ़ाने में कर सकती है।
प्र. अभी तक आपको मिली सबसे अच्छी कौन सलाह क्या ?
– पैसों की बचत करो क्योंकि हो सकता है कल तुम्हारी कोई आमदनी ना हो।
प्र. तुरिया कम्युनिकेशंस को कम शब्दों परिभाषित कीजिए?
– थिंक कम्युनिकेशन, थिंक तुरिया!
तुरिया कम्युनिकेशन संचार की शक्ति पर विश्वास रखती है और हमारी एजेंसी दिन रात मार्केटिंग की दुनिया को बदलने में कड़ी मेहनत कर रही है। हमारी पहुँच पत्रकार, ब्लॉगर्स प्रभावशाली व्यक्तियों तक है और हम अच्छी पश्च पाने के लिए ग्राहकों को ऑनलाइन प्रेस विज्ञप्ति भी भेजते हैं, सोशल मीडिया में उल्लेख और हम उनके सर्च इंजन ऑर्गेनाइजेशन को भी बढ़ा सकते हैं। तुरिया कम्युनिकेशन में हम श्रेष्ठता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए अगर हम नहीं, तो कौन?

तूरिया कम्यूनिकेशन्स के बारे में अधिक जानने के लिए आप इस वेबसाइट पर जा सकते हैं:-  https://www.turiyacommunications.com/

हमार माटी

शुभजिता में मेरी जान हिन्दुस्तान के अंतर्गत मैं बिहार, झारखण्ड और उत्तर प्रदेश के लिये अपने स्तर पर एक यह एक नया स्तम्भ है। हमारा लक्ष्य इन राज्यों में निवेश, लघु कुटीर उद्योग, महिला एवं युवा उद्यमियों और उनके स्टार्ट अप को प्रचार और मंच देना है। भाषा, इतिहास, साहित्य, विज्ञान को सामने लाना है। इससे होगा ये की इन राज्यों के जिन लोगों को आज दूसरे राज्यों से पलायन करना पड़ रहा है, वो अब अपने राज्य में, अपने परिवार के साथ अपने गाँव और राज्य और देश को अपनी अतुलनीय श्रम शक्ति से खड़ा कर सकेंगे। जब ये राज्य उन्नत होंगे तो नजरिया भी बदलेगा और सबको अहसास होगा की उन्होने क्या गलती की है। जरूरत पड़ने पर हम इन राज्यों में कार्यक्रम या सम्मेलन भी कर सकेंगे।
मैने अपने एक वीडियो में कहा था की हम प्रवासियों को अपने राज्यों के लिये कुछ कहना होगा। करना होगा। कह तो चुकी, अब करने का समय है, और वो दिन लाने का समय है जब जिनकी वजह से हमारे श्रमिक भाई -बहन अपमानित हो रहे हैं, पलायन कर रहे हैं, वो एक दिन शर्मिंंदा हों, अपनी हर बात पर, और वो होंगे, यही संकल्प है। यही आरम्भ का समय है। इन तीनों राज्यों के मीडिया कर्मी संगठक  कृषि उद्यमी तथा युवा मित्र इस मुहिम में साथ दे सकते हैं क्योकि इनके बिना यह कठिन है।जिनकी भी रुचि हो वो कृपया सम्पर्क करें। यह भाषा के स्तर पर हिन्दी के साथ अवधी, भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, संथाली की रचनाओं को भी सामने लायेगा।

वीकेवी, बंगलुरू ने बढ़ाया सहायता का हाथ

कोलकाता : विवेकानन्द केन्द्र विद्यालय (वी के वी) की बंगलुरू शाखा ने कर्नाटक में 6 गाँवों को सहायता प्रदान की। यह सहायता कल्लबलु, कोप्पा, कोप्पा गेट, जिगनी, वादेरामंचनाहल्ली, बान्देनेलेसेन्द्र में यह सहायता सौंपी। इन इलाकों में 500 रुपये की लागत वाली 50 किट वितरित की गयी। प्रत्येक किट में चावल, आटा, नमक, तेल, दाल व अन्य आवश्यक सामग्रियाँ थीं। ग्रामीणों ने वीकेवी की इस सहायता के प्रति आभार व्यक्त किया।

सम्पर्क का कमाल – कोलकाता से मिली केरल के सैकड़ों मजदूरों को सहायता

कोलकाता : आम तौर पर सम्पर्क क्षमता का उपयोग व्यावसायिक स्तर पर किया जाता है मगर इसी क्षमता के कारण कोरोना की विभिषका में फँसे श्रमिकों को जीवन दान दिया। दरअसल, कोलकाता की बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी की सदस्य निशा सिंह और सचिव शगुफ्ता हनाफी ने केरल के पेरमवूर स्थित बंगाली मार्केट में फँसे बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित दोमकल गाँव के 400 दिहाड़ी मजदूरों की समस्याओं का समाधान किया। कोलकाता के स्थानीय मीडिया की सहायता से इन दोनों ने केरल की स्थानीय मीडिया से सम्पर्क किया। शगुफ्ता ने बताया कि उनको एक मुशिर्दाबाद के फिजियोथेरेपिस्ट सैमुअल का फोन आया। शगुफ्ता के मुताबिक पी आर प्रोफेशनल होने के नाते उनका उनसे परिचय था। सैमुअल ने इन श्रमिकों के नाम और जानकारी भी दी। बगैर समय नष्ट किये शगुफ्ता ने फेसबुक और व्हाट्सऐप समूहों में सारी जानकारी दी और फिर उनके पास फैशन डिजाइनर तथा इस गैर सरकारी संगठन निशा सिंह का फोन आया और सम्पर्क शुरू हो गया। निशा ने कहा कहा कि एकमात्र उद्देश्य यही था कि ये मजदूरों को भूखा न सोने दिया जाये। पीआर तथा सम्पर्क सलाहकार शगुफ्ता ने बताया कि चार दिन दिन से इन सब मजदूरों ने खाना नहीं खाया था। स्थानीय पंचायत से लेकर शहर के कलेक्टर, मंत्रियों से लेकर एस पी और आई पी एस अधिकारियों और मीडियाकर्मियों से सम्पर्क किया। यह साझा प्रयत्न रंग लाया। बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी जनतार चिठी के शौभिक, एस पी एरनाकुलम, आई पी एस रवीन्द्रन शंकरन, प्रशान्त मेनन, सुमित, उत्तराखंड की पी आर सलाहकार पूजा, पी आर सलाहकार साहिर, तस्वीर, उद्यमी मफदलाल, फिजियोथेरेपिस्ट सैमुअल का आभारी है।
नोट – सभी खबरें फर्जी नहीं होतीं, कुछ भी कहने से पहले तथ्यों की पड़ताल करना सही कदम है।

रक्षक फाउंडेशन कोलकाता पुलिस के सहयोग से यौन कर्मियों को दिया राशन

कोलकाता : कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से असंख्य लोगों के सामने भोजन की समस्या हो गयी है। ऐसी स्थिति में रक्षक फाउंडेशन ने गत 28 मार्च को कोलकाता पुलिस के साथ दुर्वार समिति में पंजीकृत बुजुर्ग यौनकर्मियों के परिवारों को राशन बाँटा। यह राशन ‘दुर्बार’ की सदस्य यौनकर्मियों और कोलकाता पुलिस की योजना ‘नव दिशा’ में पंजीकृत टॉलीगंज इलाके में फुटपाथ और बस्तियों में रह रहे बच्चों को चारु मार्केट पुलिस स्टेशन से बाँटा गया। रक्षक फाउंडेशन ने एक राशन राहत सामग्री किट बनायी थी जिसमें चावल, दाल, आलू, प्याज, खाने का तेल, नमक, हल्दी, मिर्च, शामिल थी और यह किट हर परिवार को दी गयी। रक्षक फाउंडेशन ने अपने शुभचिन्तकों के साथ 500 परिवारों को यह सहायता दी। रक्षक फाउंडेशन की प्रबन्धन ट्रस्टी चैताली दास ने इस कठिन समय में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों, मेडिकल सहायक, पुलिस और सिविक वॉलेन्टियरों के प्रति भी आभार जताया।

शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – सन्तोष कुमार झा

प्रतियोगिता – चित्रांकन

विषय – जल ही जीवन है

कक्षा – द्वादश
शिक्षण संस्था: द स्कॉटिश चर्च कॉ़लेजिएट स्कूल