Monday, April 27, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 515

लॉकडाउन में 1.70 लाख करोड़ का पैकेज

 नयी दिल्ली :  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बड़े एलान किए। उन्होंने एक लाख 70 हजार करोड़ के आर्थिक पैकेज का एलान किया।  किसानों, मनरेगा मजदूर, महिलाओं, पीएफ खाताधारकों, आदि को राहत दी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि लॉकडाउन के दौरान कोई भी गरीब भूखा ना रहे।

स्वास्थ्य कर्मचारियों को मेडिकल इंश्योरेंस कवर
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि जो लोग इस जंग को लड़ रहे हैं, चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं उन्हें आगामी तीन माह तक 50 लाख का बीमा कवर दिया जाएगा। देश में 22 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी और 12 लाख डॉक्टर्स हैं।

80 करोड़ गरीबों को राहत
वित्त मंत्री ने बताया कि कोई गरीब भूखा न रहे, इसके लिए सरकार ने इंतजाम किए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना यह सुनिश्चित करेगी की हर गरीब को खाना मिले। योजना के तहत पांच किलो अतिरिक्त गेहूं या चावल अगले तीन महीने तक मिलेगा। इसका फायदा 80 करोड़ लाभार्थी को मिलेगा। यह देश की दो तिहाई आबादी है। साथ ही एक किलो दाल का प्रावधान किया गया है। बता दें कि गरीबों को पांच किलो गेहूं या चावल पहले ही मिलता था।

किसानों और बुजुर्गों को भी राहत
अप्रैल के पहले हफ्ते में किसानों के खाते में 2000 रुपये की किस्त डाल दी जाएगी। देश के 8 करोड़ 70 लाख किसानों को इसका लाभ मिलेगा। बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों को 1000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। ये अगले तीन महीने के लिए है। इसे दो किस्त में दिया जाएगा। इस वर्ग के लोगों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर किया जाएगा। इससे लगभग 3 करोड़ लोगों को फायदा होगा।

महिलाओं के लिए खुशखबरी
उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ महिला लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। इन्हें तीन महीने तक मुफ्त सिलिंडर दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त अगले तीन महीने तक महिला जनधन खाताधारकों को प्रति माह 500 रुपये दिए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि इसका लाभ 20 करोड़ महिलाओं को होगा। दीनदयाल योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को 20 लाख तक का लोन दिया जाएगा। पहले इनको 10 लाख तक का लोन दिया जाता था।

मजदूरों के लिए भी बड़ा एलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि मनरेगा के तहत आने वाले मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ा दी गई है। ये दिहाड़ी पहले 182 रुपये थी, जो अब 202 रुपये हो गई है। इससे पांच करोड़ परिवार को फायदा होने की उम्मीद है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 
निर्माण क्षेत्र से जुड़े 3.5 करोड़ रजिस्टर्ड वर्कर, जो लॉकडाउन की वजह से आर्थिक दिक्कतें झेल रहे हैं, उन्हें मदद दी जाएगी। इनके लिए 31000 करोड़ रुपये का फंड रखा गया है।

संगठित क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण एलान
संगठित क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण एलान किए गए हैं। अगले तीन महीने तक ईपीएफ में सरकार योगदान देगी। ईपीएफ का 12 फीसदी जो कर्मचारी देता है और 12 फीसदी जो कंपनी देती है, यह दोनों ही अगले तीन महीने तक सरकार देगी। लेकिन यह सिर्फ उन्हीं कंपनियों के लिए लागू होगा जहां 100 से कम कर्मचारी हैं और 90 फीसदी कर्मचारियों का वेतन 15 हजार रुपये से कम है। इसके अतिरिक्त पीएफ स्कीम रेगुलेशन में बदलाव कर नॉन रिफंडेबल एडवांस 75 फीसदी जमा रकम या तीन महीने के वेतन को निकालने की सुविधा भी दी जाएगी।

राज्य सरकारों से अनुरोध
आगे उन्होंने राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे जिला मिनरल फंड का इस्तेमाल मेडिकल स्क्रीनिंग, टेस्टिंग गतिविधि, कोरोना के बारे में जागरूकता अन्य कार्यों में करें, ताकि कोरोना से ज्यादा लोग प्रभावित ना हों।

कोरोना नहीं होता

निखिता पाण्डेय

जैसे हर चमकती चीज का मतलब सोना नहीं होता
वैसे हर एक छींक का मतलब कोरोना नहीं होता
केवल पानी से हाथ धोना,हाथ धोना नहीं होता
20 सेकेंड साबुन से हाथ धोने पर कोरोना नहीं होता
ऐसे ‘खतरनाक वायरस’ का इलाज,जादू-टोना नहीं होता
सावधानी, साफ-सफाई रखने से कोरोना नहीं होता
जागरूकता,जानकारी रखने रखने वालों को बाद में रोना नहीं होता
भीड़-भाड़ से दूर रहने पर कोरोना नहीं होता
घर से बाहर जाना और लोगों से हाथ मिलाना नहीं होता
क्योंकि ‘नमस्कार’ करने वालों को कोरोना नहीं होता
महामारी के दौर में बस हमें धैर्य खोना नहीं होता
‘सेनेटाइज़र’-‘मास्क’ के प्रयोग से कोरोना नहीं होता
समय रहते सचेत होंगे,तो अपनों को खोना नहीं होता
रोगी स्वंय ‘आइसोलेट’ हो जायें,तो औरो को कोरोना नहीं होता।

आनंद महिंद्रा ने संक्रमितों के लिए अपने रिजॉर्ट्स दिए, मुकेश अंबानी हर रोज 1 लाख मास्क बनवाएंगे

नयी दिल्ली : देश में कोरोनावायरस का संकट गहराता जा रहा है। आपदा की इस घड़ी में उद्योगपतियों से लेकर फिल्मी हस्तियों और खिलाड़ियों से लेकर नेताओं तक ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए। महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्री के मुकेश अंबानी, फिल्म अभिनेता रजनीकांत, पहलवान योगेश्वर दत्त, भारतीय रेसलर बजरंग पुनिया समेत आम लोगों ने भी आर्थिक मदद का ऐलान किया है। रिलायंस इंडस्ट्री ने डॉक्टर्स और हेल्थ वर्कर्स के लिए प्रतिदिन 1 लाख फेस मास्क तैयार करने का ऐलान किया। आनंद महिंद्रा ने कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल के लिए अपने रिजॉर्ट्स टेंपररी तौर पर देने की घोषणा की है। एक माह की सैलरी भी दान की है। उन्होंने कहा- हमारी कंपनी फौरन इन संभावनाओं पर काम शुरू कर रही है कि कैसे उनकी निर्माण इकाइयों में वेंटिलेटर तैयार किए जा सकते हैं।

सत्या नडेला की पत्नी ने दो करोड़ रुपये दान किए
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला की पत्नी अनुपमा वेणुगोपाल ने मंगलवार को 2 करोड़ रुपए तेलंगाना के कोरोना राहत कोष में दान दिए। अनुपमा के पिता आर वेणुगोपाल ने इसका चेक मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को सौंपा। नडेला ने जरूरत पड़ने पर आगे भी मदद की पेशकश की। तेलंगाना सरकार के सभी कर्मचारियों और शिक्षकों  ने एक दिन का वेतन दान किया। यह कुल 48 करोड़ रुपए होते हैं। तेलुगु फिल्म अभिनेता नितिन ने मंगलवार को दस लाख रुपये दान दिए।

रजनीकांत ने 50 लाख का डोनेशन दिया
फिल्म स्टार रजनीकांत ने फेडरेशन ऑफ साउथ इंडियन यूनियन वर्कर्स को 50 लाख डोनेट करने की घोषणा की है। देश में कोरोनावायरस संक्रमण के कारण बॉलीवुड और साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री लॉकडाउन कर चुकी है। सभी फिल्मों और टीवी शो की शूटिंग बंद है। इसके कारण डेली वेजेस पर काम करने वाले वर्कर्स को खासी दिक्कतें हो रही हैं। भारतीय रेसलर और रेलवे में स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर बजरंग पुनिया ने  6 महीने का वेतन दिया। रेसलर योगेश्वर दत्त ने एक माह का वेतन दान कियाा। पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान और उनके भाई यूसुफ ने 4 हजार से ज्यादा मास्क बांटे हैं।

लोकसभा अध्यक्ष, हरियाणा कांग्रेस के सभी विधायकों ने वेतन दान किया
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और हरियाणा कांग्रेस के सभी विधायकों ने अपने एक माह का वेतन दान किया है। सभी ने आगे भी हर संभव मदद की पेशकश की है।

पेटीएम की तरफ से 5 करोड़ की मदद का ऐलान
पेटीएम के सीईओ विजय शेखर ने भी मदद का ऐलान किया है। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि उनकी कंपनी वेंटिलेटर आदि बनाने वालों को 5 करोड़ रुपये की मदद करेगी।

समकालीन अंतर्विरोधों से मुठभेड़ करती कवितायेँ

श्रवण कुमार

प्रत्यंचा युवा कवयित्री पंखुरी सिन्हा का हिंदी में तीसरा कविता संग्रह है। इसमें १४६ कवितायेँ हैं. आकार की दृष्टि से कुछ कवितायेँ छोटी हैं, लेकिन भाव और उद्देश्य दोनों बड़े हैं. इस संग्रह की रचनाएं वर्तमान को जस का तस स्वीकार नहीं करना चाहती हैं बल्कि समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक विसंगतियों, अंधविश्वासों और पाखंडों के विरुद्ध सवाल दर सवाल खड़े करती हैं। भ्रूण हत्या शीर्षक कविता में वे कहती हैं–“औरत की देह को बनाने का नरक/हर ओर है नज़ारा/तुम जाओ न जाओ/डिस्पेंसरी आज/ लेकिन, मेरे दोस्त/तुम जगह के साथ साथ/अपनी देह को भी बना रहे हो नरक/रौंद कर सारी हरीतिमा……………..”
हर तरह के पुरुष वादी मापदंडों के खिलाफ प्रत्यंचा चढ़ाये युद्धरत कवयित्री सवाल करती हैं–“क्यों आकर ठहर जाती है/औरत की देह पर ही/जातिवाद, भाषावाद/क्षेत्रवाद और प्रांतीयता/की सब लड़ाइयां?”
युवा कवयित्री अपनी रचना के माध्यम से दलित उत्पीड़न के खिलाफ भी मज़बूती से आवाज़ उठाती हैं. यह आवाज़ प्रतिरोध की सीमा तक पहुँच जाती है. बतौर कवयित्री–“ये दलितों की बस्ती जलाना/ये उनकी औरतों का अपमान/कैसे है जायज़/इतने थानों के रहते हुए ज़िंदा?/और कहीं नहीं मिली है/उन पुरुषों को सजा देने की खबर/जिन्होंने तस्वीरें खींची/उतार कर औरतों के कपड़े/ये एक बड़ा जुर्म बनता जा रहा है/आये दिन बलात्कार की घटना के साथ/यह कैसा समाज है/जिसके लोग कुत्ते बनने पर उतारू हैं?”
आज की बाज़ारवादी एवं उपभोक्तावादी संस्कृति के दौर में सभी वस्तुएं बिकाऊ हो गयी हैं. समाज में एवं मीडिया की सुर्खिओं में वे ही लोग दिख रहे हैं जो या तो विक्रेता हैं या क्रेता। रिश्तों से लेकर वस्तुओं तक का पुराना ढांचा ध्वस्त हो रहा है. देश साम्राज्यवादी एवं हथियारों के व्यापारी युद्ध लोलुप अमेरिका और उनके सहयोगियों के पीछे भाग रहा है. और हम बाज़ार के पीछे। हम सब कुछ बेचने पर उतारू है–जल, ज़मीन, जंगल, अपना ज़मीर और अपनी कविता भी. ज़्यादातर रचनाकार पद, पुरस्कार और पैसे के पीछे भाग रहे हैं. बतौर कवयित्री—“बाज़ारू कर भाषा को/कविता को भी/कुछ लोग वाक़ई बाज़ार बन जाते हैं/और लगाते हैं कविता का हाट बाज़ार।”

सचमुच रचनाकारों के भी दो वर्ग होते हैं या हमेशा से होते आये हैं—जनता के रचनाकार एवं सत्ताधारी वर्ग के चारण रचनाकार। इस दृष्टि से यह संग्रह समकालीन अंतर्विरोधों से मुठभेड़ करता दिखाई पड़ता है.
सुन्दर मुख्यपृष्ठ और आकर्षक आवरण में बंधी ये कवितायेँ, अधिकांशतः अपने तेवर में राजनैतिक हैं, अपने पर्यावरण सम्बन्धी सरोकारों में विशेषकर, एवं लचर होती व्यवस्था के भ्रष्टाचार की धज्जियाँ उड़ाती हैं.
हमारा समाज एक पुरुष प्रधान मनुवादी समाज है. प्रभु वर्ग ने हमारे चारो तरफ अपने रक्षार्थ बहुत सारा मायाजाल फैला रखा है. और हम हैं कि उसी कुएं में उलझे पड़े हैं. न निकलने का नाम लेते हैं और न कोशिश करते हैं. ये मायाजाल मोहजाल हमारी सभ्यता के विकास के सबसे बड़े रोडे हैं—“ हम कभी तो निकलेंगे/धर्म के जंजाल से/जातियों के मोहजाल से/कर्मकांडों के मायाजाल से/कि प्रगति सचमुच हमारी राह देखती है.”
इस संग्रह की एक कविता है ‘भड़कती अस्मिता’, जिसमें सामप्रदायिक उन्मादों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करती है कवयित्री–“लेकिन किस मुंह से गौरक्षक पीट रहे हैं/गो मांस ले जाती गाड़ियों के चालकों को/जबकि उन्हीं की पार्टी के महानुभाव नेता/बीफ एक्सपोर्ट का कर रहे हैं/करोड़ों का बिज़नेस/आखिर ये क्या अर्थ तंत्र है/जिसमें दाल मंगा रहे हैं/अफ्रीका से/और अरब देशों को बेच रहे हैं जो मांस!”
वैसे तो १४६ कविताओं के इस संग्रह में सभी कवितायेँ पठनीय एवं उद्देश्य पूर्ण हैं लेकिन एक कविता ऐसी भी है जिसमें कवयित्री अपने पंखुरी नाम को विषय बनाकर बड़ी खूबसूरती से कुछ अनमोल बातें कहना चाहती हैं—“खुशबुओं का आलय मैं/दीप मुझमें जलते हैं/दिखा सकती हूँ तुम्हें राह/जब होती हूँ सफ़ेद भी/अँधेरे में चमक हूँ/रौशनी में ठंढक/”. इसी क्रम में वे आगे कहती हैं—“चिड़ियों का जीवन हूँ मैं/पराग मुझमें बसते हैं/मैं पंखुरी हूँ, मुझमें सृष्टि के अष्टयाम बजते हैं /मैं अधूरी नहीं/फूल मुझमें बनते हैं.”
इसके अलावे, झपसी महतो की चाय दुकान में बारिश का दिन, नॉन-ब्रांडेड शहद और नया जी एस टी कानून, बारिश के दिन की गोधूलि और ड्रैगन नृत्य, सब खाली है, मन वीराना, ठीक चुनाव के दिन, ज़िन्दगी का रंग, आलिशान मज़ार, कविता का हो जाना, प्रेम का ध्वंस राग, देह से उगेंगे वृक्ष, कौन सा राम राज्य, घास के घूस खोर, जंजीरों में जकड़े लोग, एक वैलेंटाइन डे सीरिया युद्ध बीच, रॉंग नंबर, प्रेम और समाप्ति आदि कवितायेँ हम जैसे पाठकों को अत्याधिक प्रभावित करती हैं।

यदि चिड़ियां होते हम !

साधना झा

कितना अच्छा होता
यदि चिड़ियां होते हम !
साथ चुगते दाना हरदम
हंसते हंसते हम !
चिहुंक चिहुंक कर बातें करते
उड़ते दूर तलक नील गगन में !
न तुम व्यस्त होते काम में
न होती व्यस्त मैं आपाधापी में !
कितना अच्छा होता
यदि चिड़ियां होते हम !
हम दोनों के दरम्यान न होते ये
टी.वी. कम्प्यूटर और मोबाईल !
न तुम देखते मूवी लैपटॉप पर
न करती मैं चैटिंग व्हाट्सएप पर !
कितना अच्छा होता
यदि चिड़ियां होते हम !
साथ चुनते तिनका और बनाते घोंसला साथ
वांचते अकथ कथा प्रेम की हम साथ साथ!

22/06/18

कोरोना की लड़ाई में कोलकाता के आवासीय कॉम्प्लेक्स की पहल

कोलकाता : कोरोना से लड़ने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन है। स्थित को देखते हुए कई गाँवों में एकान्त यानी क्वारिनटाइन की पहल की गयी है। अब कोलकाता के राजारहाट के अनिमिका अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने भी इस दिशा में जरूरी कदम उठाया है। इस आवासीय परिसर में लोगों को उनके फ्लैट में रहने का आग्रह किया गया है। सेवा प्रदाता से लेकर किसी भी प्रकार की परिसेवा या ओला व उबेर तक को भी इस आवासीय परिसर में आने से रोक दिया गया है। इस दायरे में अतिथि भी आते हैं। आपात परिस्थिति में सम्बन्धित कार्यालय से सम्पर्क किया जा सकता है। किसी भी प्रकार की होम डिलिवरी या कुरियर दरवाजे पर जाकर लेनी होगी। एनकेडीए के निर्देशानुसार सभी सदस्यों को अपनी आवाजाही की पूरी जानकारी देनी होगी औऱ यह भी बताना होगा कि वे कहाँ से होकर आ रहे हैं। विदेश से आने वाले सदस्य को उनके फ्लैट में कम से कम 2 सप्ताह रहना होगा। यह जानकारी अनिमिका अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के सचिव श्यामल कुमार सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति से मिली।

अखबार छूने से नहीं फैलता कोरोना वायरस

कोरोना वायरस (कोविड-19) संकट में अखबार अपने पाठकों के लिए प्रतिबद्ध हैं। अखबारों के जरिए कोरोना वायरस (कोविड-19) नहीं फैलता। WHO गाइडलाइंस के मुताबिक, अखबार जैसी चीजें लेना सुरक्षित है। मॉर्डन प्रिंटिंग तकनीक पूरी तरह ऑटोमेटेड है। व्यावसायिक सामान के दूषित होने की संभावना कम है। इसमें हाथों का इस्तेमाल नहीं होता। अखबार बांटने वाली हॉकर सप्लाई चेन पूरी तरह सैनिटाइज्ड होती है।

वीडियो साभार – टाइम्स ऑफ इंडिया

कोरोना जंग : बुजुर्गों के लिए सीनियेरिटी एंड डॉक्स ऐप ने जारी किया हेल्प लाइन नम्बर

                                                                                                  यह 24*7 काम करेगा

कोलकाता : कोरोना महामारी की आपदा के बीच उससे लड़ने की कोशिशें भी जारी हैं। इसे लेकर होने वाली अफवाहों से लड़ने के लिए सीनियेरिटी और डॉक्स ऐप ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी के जरिए कोरोना को लेकर जागरुकता फैलाई जाएगी और सही तथ्य मुहैया करवाये जायेंगे। इसके अतिरिक्त सीनियेरिटी अपने सदस्यों को डॉक्स ऐप्स के जरिए चिकित्सकीय सुविधा भी दे सकेगा। आपात स्थिति में कुशल मेडिकल पेशेवरों तक पहुँचने एक हेल्पलाइन नम्बर (080 4719 3443) भी जारी किया गया है। लोग ऑनलाइन परामर्श भी किसी भी विभाग के डॉक्टर से अपनी सुविधा के अनुसार प्राप्त कर सकेंगे। सीनिएरिटी के सह संस्थापक आयुष अग्रवाल और तपन मिश्रा ने उम्मीद जाहिर की कि इस साझेदारी से एक बड़े तबके तक पहुँचा जा सकेगा।

5 दिनों में डॉक्टरों के लिए बनाया ‘इंफेक्शन फ्री नल’!

फ़िलहाल, खुद को कोरोना वायरस से बचाने के लिए और यह ज्यादा ना फैले, इसके लिए हम जो उपाय कर सकते हैं वो है – अपने हाथों को अच्छी तरह से धोते रहना। डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को अपने हाथ 20 सेकंड्स तक धोना चाहिए। लेकिन इस प्रक्रिया में भी कई समस्याएं हैं जैसे पानी बर्बाद होना और हाथ धोने के बाद फिर से उसी नल को बंद करना, जिसे आपने गंदे हाथों से छुआ था। इस तरह से डॉक्टरों, नर्स, साफ़-सफाई वाले और एम्बुलेंस ड्राईवरों के लिए Covid-19 के मरीज़ों को संभालना मुश्किल है। इस स्थिति को देखते हुए, लेह में दोमखार गाँव के एक इनोवेटर, तमचोस ग्युरमेत ने एक ‘इंफेक्शन फ्री नल’ बनाया है। इससे लोगों को नल खोलने या फिर बंद करने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। उन्हें बस अपने हाथ धोने हैं बाकी किसी जगह को छूने की ज़रूरत उन्हें नहीं है।तमचोस ने द बेटर इंडिया को बताया कि यह मशीन स्टील की बनी है और इसमें उन्होंने नीचे की तरफ दो बटन लगाए हैं, जिन्हें आप पैरों से दबा सकते हैं। जब आप दाएं तरफ के बटन को दबाते हैं तो आपके हाथ में लिक्विड सोप आएगा और बाएं तरफ के बटन को दबाने पर नल से पानी आता है। “डॉक्टरों ने कहा है कि आपको अपने हाथ 20 सेकंड्स तक धोने हैं। इतने समय में काफी पानी बर्बाद हो सकता है। इसलिए इस सिस्टम को मैंने इस तरह से बनाया है कि पानी का बहाव बहुत ज्यादा न हो और आपके हाथ भी धुल जाएं। पानी तभी आएगा जब आप नीचे के बटन को अच्छे से दबाएंगे। जैसे ही आप इस बटन को छोड़ेंगे, पानी आना बंद हो जाएगा,” उन्होंने आगे कहा।

हाथ धोते समय लोगों को लगता है कि अब साबुन वाले हाथों से कैसे नल बंद करें और इस वजह से पानी बहता ही रहता है। तमचोस का कहना है कि उनका सिस्टम लगभग 80% पानी बचाता है, जो हाथ धोते समय 20 सेकंड्स में बर्बाद हो जाता है। इस डिवाइस को खुद ऑपरेट करना पड़ता है और पानी के लिए इसके अंदर एक इंसुलेटेड टैंक रखा गया है।“इसमें लगा टैंक इंसुलेटेड ठंडे इलाकों के लिए सही है। हमारे यहाँ लोग हर सुबह पानी ठंडा होने की वजह से बहुत जल्दी-जल्दी हाथ धोते हैं। लेकिन, इस मशीन में एक इंसुलेटेड टैंक है जिसमें हम गर्म पानी भी डाल सकते हैं ताकि लोग अपने हाथ अच्छी तरह से धोएं,” उन्होंने बताया। लोग इस डिवाइस का कनेक्शन अपने घर के किसी भी नल से कर सकते हैं या फिर ज़रूरत के हिसाब से इस टैंक को भर सकते हैं। टैंक की क्षमता 20 लीटर पानी की है।

तमचोस आगे कहते हैं कि इस डिवाइस को बनाने के लिए सभी मटेरियल एक लोकल हार्डवेयर की दुकान, मैकेनिकल स्पेयर पार्ट्स की दुकान और स्क्रैपयार्ड से लिया गया है। पैर से दबाने के लिए जो बटन बनाए गए हैं उनमें टाटा ट्रक के पार्ट्स इस्तेमाल हुए हैं। इस टाटा ट्रक गाड़ी को बचपन में वे ‘पागल गाड़ी’ कहते थे। डिवाइस की बॉडी बनाने के लिए वह एक स्टील फैब्रिकेशन दुकान में गये और इसमें उन्हें कई दिन लगे। उन्होंने 5 दिनों में इस डिवाइस को बनाकर तैयार किया है और इसके लिए हर दिन वह सुबह साढ़े सात बजे से रात के साढ़े सात बजे तक काम करते थे।फिलहाल, यह मशीन लेह के सोनम नोरबू मेमोरियल अस्पताल के स्टाफ के लिए रखी गई है। पिछले कई दिनों से उन्हें कई नागरिकों, होटलों, एयरपोर्ट अथॉरिटी, डिफेंस संगठनों, और कारगिल के सरकारी अस्पताल से (जहाँ मरीज़ों को आइसोलेशन में रखा गया है)  इस मशीन के लिए ऑर्डर मिले हैं।

इस मशीन का वजन 70 किलोग्राम है लेकिन भविष्य में वह जो भी मशीन बनाएंगे, उनका वजन इससे कम होगा।

वह बताते हैं कि उनके पास इतना समय नहीं था कि वह इस डिवाइस को और भी एडवांस्ड तरीके से बना पाएं, क्योंकि वह जल्द से जल्द मेडिकल स्टाफ को यह देना चाहते थे। नहीं तो, वह इस डिवाइस में सीधा नल से कनेक्शन और तापमान नियंत्रित करने का सिस्टम लगाते। “निजी तौर पर मुझे इस डिवाइस को बनाने की प्रेरणा इस बात से मिली कि हम वायरस से लड़ रहे हैं और इसे हम देख भी नहीं सकते। इस महामारी के आते ही लेह में सबकुछ लॉकडाउन हो गया था और मैं एक एडवांस्ड लेवल के डिवाइस के लिए सभी मटेरियल इकट्ठा नहीं कर पाया,” उन्होंने कहा।

अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों और उनके सहायकों की चिंता ने तमचोस को बहुत प्रभावित किया और वह उनके लिए कुछ करना चाहते थे। जब वह इस इनोवेशन पर काम कर रहे थे तभी उन्हें खबर मिली कि एक डॉक्टर भी संक्रमित हो गये हैं। वह कहते हैं कि उनका यह इनोवेशन कोई बड़ी बात नहीं है।

“मैं कहता हूँ कि यह कोई असाधारण बात नहीं है। मैंने सिर्फ जान बचाने की कोशिश की है। मैं सिर्फ एक इंसान हूँ और अकेले ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। लेकिन अगर हम सभी साथ आ जाएं तो बहुत कुछ कर सकते हैं। लोग मास्क, सैनिटाइज़र और वेंटिलेटर जैसे अन्य महत्वपूर्ण उपकरण बाँट रहे हैं। आप देख सकते हैं कि ये लोग कितना बड़ा बदलाव ला रहे हैं। इसलिए, हम सभी को एक साथ आना होगा। यहां तक ​​कि एक मास्क भी एक जीवन बचा सकता है। इसी तरह, मेरा डिवाइस कुछ हद तक उनकी मदद कर सकता है जो सबसे आगे खड़े होकर काम कर रहे हैं,” उन्होंने अंत में कहा।

मूल लेख: रिनचेन नोरबू वांगचुक

(साभार – द बेटर इंडिया)

कोरोना वायरस पर मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी कराएगी डिप्लोमा कोर्स

एक तरफ देशभर में कोरोना को लेकर दहशत का माहौल है, तो वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मेरठ की एक यूनिवर्सिटी सार्स-कोव 2 पर एक डिप्लोमा कोर्स शुरू करने क योजना बना रही हैं। मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी अपने डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत सार्स-कोव 2 पर एक साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू कर सकती है। इस बारे में यूनिवर्सिटी के वीसी एन के तनेजा ने जानकारी दी।
इसके अलावा यूनिवर्सिटी पहले से ही चल रहे तीन साइंस कोर्सेस में भी कोरोना वायरस की पढ़ाई को शामिल कर सकती है। वीसी के मुताबिक मौजूदा हालात में यह स्टडी काफी उपयोगी साबित होगी। यह कोर्स अगले दो महीने के अंदर शुरू किया जा सकता है, जिसके लिए इजाजत भी मिल चुकी है। इसके बाद अब इस कोर्स को आगे मंजूरी दिलाने के लिए यूनिवर्सिटी एकेडेमिक काउंसिल के सामने रखा जाएगा। इसे दो सेमेस्टर में बांटा जाएगा। पहले सेमेस्टर को बाढ़, भूस्सखलन आदि के साथ पढ़ाया जाएगा,जबकि दूसरे सेमेस्टर में इसे जूलॉजी और बायोलॉजी के डिपार्टमेंट में शामिल किया जाएगा। फिलहाल कोर्स की कोई फीस तय नहीं की गई है।
संक्रमण की बात करें तो देश में अब तक 19 राज्य को 177 लोग इसकी चपेट में आ चुके है। वहीं, एहतियातन कई राज्यों के सभी स्कूल-कॉलेज भी बंद किए जा चुके है। इससे पहले बुधवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सभी परीक्षा रद्द करने के आदेश के बाद सीबीएसई, आईसीएसई और एनटीए ने 31 मार्च तक अपनी सभी परीक्षा रद्द कर दी है। उत्तर प्रदेश में भी सभी प्रतियोगी परीक्षा 02 अप्रैल तक रद्द कर दी है। देश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ रहे मामलों के देखते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सभी शिक्षा नियामकों और सीबीएसई को सभी परीक्षाओं को रद्द करने और पेपर के मूल्यांकन को रोकने का निर्देश जारी किया था।