शुभस्वप्ना मुखोपाध्याय सुना रही हैं कवि गुरु की एक रचना
बुद्ध की 10 विभिन्न मुद्राएं एवं हस्त संकेत और उनके अर्थ
आप सभी ने बुद्ध की मूर्तियों को कई मुद्राओं के साथ देखा होगा। इन अलग-अलग मुद्राओं में बुद्ध की मूर्तियों को देखकर आपके मन में इन मुद्राओं का अर्थ जानने की इच्छा तो उत्पन्न होती ही होगी। इस लेख में, हम जानेंगे बुद्ध की 10 विभिन्न मुद्राएं एवं हस्त संकेत और उनके अर्थ।
भारतीय मूर्तिकला देवत्व का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करती है, जिसका मूल और अंत, धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। इसलिए बुद्ध के अनुयायी, बौद्ध ध्यान या अनुष्ठान के दौरान शास्त्र के माध्यम से विशेष विचारों को पैदा करने के लिए बुद्ध की छवि को प्रतीकात्मक संकेत के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

इस मुद्रा का सर्वप्रथम प्रदर्शन ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में बुद्ध ने अपने पहले धर्मोपदेश में किया था। इस मुद्रा में दोनों हाथों को सीने के सामने रखा जाता है तथा बायें हाथ का हिस्सा अंदर की ओर जबकि दायें हाथ का हिस्सा बाहर की ओर रखा जाता है।

इस मुद्रा को “समाधि या योग मुद्रा” भी कहा जाता है और यह अवस्था “बुद्ध शाक्यमुनि”, “ध्यानी बुद्ध अमिताभ” और “चिकित्सक बुद्ध” की विशेषता की ओर इशारा करती है। इस मुद्रा में दोनों हाथों को गोद में रखा जाता है, दायें हाथ को बायें हाथ के ऊपर पूरी तरह से उंगलियां फैला कर रखा जाता है तथा अंगूठे को ऊपर की ओर रखा जाता है और दोनों हाथ की अंगुलियां एक दूसरे के ऊपर टिका कर रखा जाता है।

इस मुद्रा को “पृथ्वी को छूना” (“टचिंग द अर्थ”) भी कहा जाता है, जोकि बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति के समय का प्रतिनिधित्व करती है क्योंकि इस मुद्रा से बुद्ध दावा करते हैं कि पृथ्वी उनके ज्ञान की साक्षी है। इस मुद्रा में सीधे हाथ को दायें घुटने पर रखकर हथेली को अंदर की ओर रखते हुए जमीन की ओर ले जाया जाता है और कमल सिंहासन को छूआ जाता है।

यह मुद्रा अर्पण, स्वागत, दान, देना, दया और ईमानदारी का प्रतिनिधित्व करती है। इस मुद्रा में दायें हाथ को शरीर के साथ स्वाभाविक रूप से लटकाकर रखा जाता है, खुले हाथ की हथेली को बाहर की ओर रखते हैं और उंगलियां खुली रहती है तथा बाये हाथ को बाये घुटने पर रखा जाता है।
5. करण मुद्रा

यह मुद्रा बुराई से बचाने की ओर इशारा करती है। इस मुद्रा को तर्जनी और छोटी उंगली को ऊपर उठा कर और अन्य उंगलियों को मोड़कर किया जाता है। यह कर्ता को सांस छोड़कर बीमारी या नकारात्मक विचारों जैसी बाधाओं को बाहर निकालने में मदद करती है।
6. वज्र मुद्रा

यह मुद्रा उग्र वज्र के पांच तत्वों, अर्थात् वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी, और धातु के प्रतीक को दर्शाती है। इस मुद्रा में बायें हाथ की तर्जनी को दायीं मुट्ठी में मोड़कर, दायें हाथ की तर्जनी के ऊपरी भाग से दायीं तर्जनी को छूते (या चारों ओर घूमाते) हुए किया जाता हैं।
7. वितर्क मुद्रा

यह बुद्ध की शिक्षाओं के प्रचार और परिचर्चा का प्रतीक है। इस मुद्रा में अंगूठे के ऊपरी भाग और तर्जनी को मिलाकर किया जाता है, जबकि अन्य उंगलियों को सीधा रखा जाता है। यह लगभग अभय मुद्रा की तरह है लेकिन इस मुद्रा में अंगूठा तर्जनी उंगली को छूता है।
8. अभय मुद्रा

यह मुद्रा निर्भयता या आशीर्वाद को दर्शाता है जोकि सुरक्षा, शांति, परोपकार और भय को दूर करने का प्रतिनिधित्व करता है तथा “बुद्ध शाक्यमुनि” और “ध्यानी बुद्ध अमोघसिद्धी” की विशेषताओं को प्रदर्शित करती है। इस मुद्रा में दायें हाथ को कंधे तक उठा कर, बांह को मोड़कर किया जाता है और अंगुलियों को ऊपर की ओर उठाकर हथेली को बाहर की ओर रखा जाता है।
9. उत्तरबोधी मुद्रा

यह मुद्रा दिव्य सार्वभौमिक ऊर्जा के साथ अपने आप को जोड़कर सर्वोच्च आत्मज्ञान की प्राप्ति को दर्शाती है। इस मुद्रा में दोनों हाथ को जोड़ कर हृदय के पास रखा जाता है और तर्जनी उंगलियां एक दूसरे को छूते हुए ऊपर की ओर होती हैं और अन्य उंगलियां अंदर की ओर मुड़ी होती हैं।
10. अंजलि मुद्रा

इसे “नमस्कार मुद्रा” या “हृदयांजलि मुद्रा” भी कहते हैं जो अभिवादन, प्रार्थना और आराधना के इशारे का प्रतिनिधित्व करती है। इस मुद्रा में, कर्ता के हाथ आमतौर पर पेट और जांघों के ऊपर होते हैं, दायां हाथ बायें के आगे होता है, हथेलियां ऊपर की ओर, उंगलियां जुड़ी हुई और अंगूठे एक-दूसरे के अग्रभाग को छूती हुई अवस्था में होते हैं।
(साभार – दैनिक जागरण)
जरूरतमंदों को भोजन मुहैया करवा रहा है ‘अशर’ समूह
कोलकाता : ‘अशर’ विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों का समूह है। समूह अनाथाश्रमों और वृद्धाश्रमों के साथ वर्ष 2012 से काम करता आ रहा है और जरूरतमंदों की सहायता कर रहा है। समूह लॉकडाउन में फँसे जरूरतमंद लोगों को फूड पैकेट वितरित कर रहा है जिसमें चावल, दाल, तेल, आलू और प्याज शामिल है। बस्तियों और मजदूरों को यह सहायता प्रदान की जा रही है। गत 27 मार्च से बस्तियों के लोगों में औऱ दिहाड़ी श्रमिकों को यह सहायता दी जा रही है। समूह अनाथाश्रमों और वृद्धाश्रमों में भी राशन और अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचा रहा है। गत 4 मई तक 6500 किलो चावल औऱ 1200 किलो से अधिक दाल सत्तू, खाद्य तेल, आलू औऱ प्याज वितरित किये जा चुके हैं। गत 6 अप्रैल से 350 लोगों को रोजाना कंटेनर में पैक किया गया भोजन वितरित किया जा रहा है। 200 लोगों को रोजाना टिफिन वितरित किया जा रहा है।
शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान प्रतिभागी – पार्वती शॉ
प्रतियोगिता – काव्य आवृति, कविता – पुष्प की अभिलाषा कवि- माखन लाल चतुर्वेदी
वेदों में स्त्री का महत्व
- काजल पटेल
वेद नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण, गरिमामय, उच्च स्थान प्रदान करते हैं| वेदों में स्त्रियों की शिक्षा- दीक्षा, शील, गुण, कर्तव्य, अधिकार और सामाजिक भूमिका का जो सुन्दर वर्णन पाया जाता है, वैसा संसार के अन्य किसी धर्मग्रंथ में नहीं है| वेद उन्हें घर की सम्राज्ञी कहते हैं और देश की शासक, पृथ्वी की सम्राज्ञी तक बनने का अधिकार देते हैं|
वेदों में स्त्री यज्ञीय है अर्थात् यज्ञ समान पूजनीय| वेदों में नारी को ज्ञान देने वाली, सुख – समृद्धि लाने वाली, विशेष तेज वाली, देवी, विदुषी, सरस्वती, इन्द्राणी, उषा- जो सबको जगाती है इत्यादि अनेक आदर सूचक नाम दिए गए हैं|
वेदों में स्त्रियों पर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं है – उसे सदा विजयिनी कहा गया है और उन के हर काम में सहयोग और प्रोत्साहन की बात कही गई है| वैदिक काल में नारी अध्यन- अध्यापन से लेकर रणक्षेत्र में भी जाती थी| जैसे कैकयी महाराज दशरथ के साथ युद्ध में गई थी| कन्या को अपना पति स्वयं चुनने का अधिकार देकर वेद पुरुष से एक कदम आगे ही रखते हैं|
अनेक ऋषिकाएं वेद मंत्रों की द्रष्टा हैं – अपाला, घोषा, सरस्वती, सर्पराज्ञी, सूर्या, सावित्री, अदिति- दाक्षायनी, लोपामुद्रा, विश्ववारा, आत्रेयी आदि |
तथापि, जिन्होनें वेदों के दर्शन भी नहीं किए, ऐसे कुछ रीढ़ की हड्डी विहीन बुद्धिवादियों ने इस देश की सभ्यता, संस्कृति को नष्ट – भ्रष्ट करने का जो अभियान चला रखा है – उसके तहत वेदों में नारी की अवमानना का ढ़ोल पीटते रहते हैं |
आइए, वेदों में नारी के स्वरुप की झलक इन मंत्रों में देखें –
यजुर्वेद २०.९
स्त्री और पुरुष दोनों को शासक चुने जाने का समान अधिकार है |
यजुर्वेद १७.४५
स्त्रियों की भी सेना हो | स्त्रियों को युद्ध में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें |
यजुर्वेद १०.२६
शासकों की स्त्रियां अन्यों को राजनीति की शिक्षा दें | जैसे राजा, लोगों का न्याय करते हैं वैसे ही रानी भी न्याय करने वाली हों |
अथर्ववेद ११.५.१८
ब्रह्मचर्य सूक्त के इस मंत्र में कन्याओं के लिए भी ब्रह्मचर्य और विद्या ग्रहण करने के बाद ही विवाह करने के लिए कहा गया है | यह सूक्त लड़कों के समान ही कन्याओं की शिक्षा को भी विशेष महत्त्व देता है |
कन्याएं ब्रह्मचर्य के सेवन से पूर्ण विदुषी और युवती होकर ही विवाह करें |
अथर्ववेद १४.१.६
माता- पिता अपनी कन्या को पति के घर जाते समय बुद्धीमत्ता और विद्याबल का उपहार दें | वे उसे ज्ञान का दहेज़ दें |
जब कन्याएं बाहरी उपकरणों को छोड़ कर, भीतरी विद्या बल से चैतन्य स्वभाव और पदार्थों को दिव्य दृष्टि से देखने वाली और आकाश और भूमि से सुवर्ण आदि प्राप्त करने – कराने वाली हो तब सुयोग्य पति से विवाह करे |
अथर्ववेद १४.१.२०
हे पत्नी ! हमें ज्ञान का उपदेश कर |
वधू अपनी विद्वत्ता और शुभ गुणों से पति के घर में सब को प्रसन्न कर दे |
अथर्ववेद ७.४६.३
पति को संपत्ति कमाने के तरीके बता |
संतानों को पालने वाली, निश्चित ज्ञान वाली, सह्त्रों स्तुति वाली और चारों ओर प्रभाव डालने वाली स्त्री, तुम ऐश्वर्य पाती हो | हे सुयोग्य पति की पत्नी, अपने पति को संपत्ति के लिए आगे बढ़ाओ |
अथर्ववेद ७.४७.१
हे स्त्री ! तुम सभी कर्मों को जानती हो |
हे स्त्री ! तुम हमें ऐश्वर्य और समृद्धि दो |
अथर्ववेद ७.४७.२
तुम सब कुछ जानने वाली हमें धन – धान्य से समर्थ कर दो |
हे स्त्री ! तुम हमारे धन और समृद्धि को बढ़ाओ |
अथर्ववेद ७.४८.२
तुम हमें बुद्धि से धन दो |
विदुषी, सम्माननीय, विचारशील, प्रसन्नचित्त पत्नी संपत्ति की रक्षा और वृद्धि करती है और घर में सुख़ लाती है |
अथर्ववेद १४.१.६४
हे स्त्री ! तुम हमारे घर की प्रत्येक दिशा में ब्रह्म अर्थात् वैदिक ज्ञान का प्रयोग करो |
हे वधू ! विद्वानों के घर में पहुंच कर कल्याणकारिणी और सुखदायिनी होकर तुम विराजमान हो |
अथर्ववेद २.३६.५
हे वधू ! तुम ऐश्वर्य की नौका पर चढ़ो और अपने पति को जो कि तुमने स्वयं पसंद किया है, संसार – सागर के पार पहुंचा दो |
हे वधू ! ऐश्वर्य कि अटूट नाव पर चढ़ और अपने पति को सफ़लता के तट पर ले चल |
अथर्ववेद १.१४.३
हे वर ! यह वधू तुम्हारे कुल की रक्षा करने वाली है |
हे वर ! यह कन्या तुम्हारे कुल की रक्षा करने वाली है | यह बहुत काल तक तुम्हारे घर में निवास करे और बुद्धिमत्ता के बीज बोये |
अथर्ववेद २.३६.३
यह वधू पति के घर जा कर रानी बने और वहां प्रकाशित हो |
अथर्ववेद ११.१.१७
ये स्त्रियां शुद्ध, पवित्र और यज्ञीय ( यज्ञ समान पूजनीय ) हैं, ये प्रजा, पशु और अन्न देतीं हैं |
यह स्त्रियां शुद्ध स्वभाव वाली, पवित्र आचरण वाली, पूजनीय, सेवा योग्य, शुभ चरित्र वाली और विद्वत्तापूर्ण हैं | यह समाज को प्रजा, पशु और सुख़ पहुँचाती हैं |
अथर्ववेद १२.१.२५
हे मातृभूमि ! कन्याओं में जो तेज होता है, वह हमें दो |
स्त्रियों में जो सेवनीय ऐश्वर्य और कांति है, हे भूमि ! उस के साथ हमें भी मिला |
अथर्ववेद १२.२.३१
स्त्रियां कभी दुख से रोयें नहीं, इन्हें निरोग रखा जाए और रत्न, आभूषण इत्यादि पहनने को दिए जाएं |
अथर्ववेद १४.१.२०
हे वधू ! तुम पति के घर में जा कर गृहपत्नी और सब को वश में रखने वाली बनों |
अथर्ववेद १४.१.५०
हे पत्नी ! अपने सौभाग्य के लिए मैं तेरा हाथ पकड़ता हूं |
अथर्ववेद १४.२ .२६
हे वधू ! तुम कल्याण करने वाली हो और घरों को उद्देश्य तक पहुंचाने वाली हो |
अथर्ववेद १४.२.७१
हे पत्नी ! मैं ज्ञानवान हूं तू भी ज्ञानवती है, मैं सामवेद हूं तो तू ऋग्वेद है |
अथर्ववेद १४.२.७४
यह वधू विराट अर्थात् चमकने वाली है, इस ने सब को जीत लिया है |
यह वधू बड़े ऐश्वर्य वाली और पुरुषार्थिनी हो |
अथर्ववेद ७.३८.४ और १२.३.५२
सभा और समिति में जा कर स्त्रियां भाग लें और अपने विचार प्रकट करें |
ऋग्वेद १०.८५.७
माता- पिता अपनी कन्या को पति के घर जाते समय बुद्धिमत्ता और विद्याबल उपहार में दें | माता- पिता को चाहिए कि वे अपनी कन्या को दहेज़ भी दें तो वह ज्ञान का दहेज़ हो |
ऋग्वेद ३.३१.१
पुत्रों की ही भांति पुत्री भी अपने पिता की संपत्ति में समान रूप से उत्तराधिकारी है |
ऋग्वेद १० .१ .५९
एक गृहपत्नी प्रात : काल उठते ही अपने उद् गार कहती है –
” यह सूर्य उदय हुआ है, इस के साथ ही मेरा सौभाग्य भी ऊँचा चढ़ निकला है | मैं अपने घर और समाज की ध्वजा हूं , उस की मस्तक हूं | मैं भारी व्यख्यात्री हूं | मेरे पुत्र शत्रु -विजयी हैं | मेरी पुत्री संसार में चमकती है | मैं स्वयं दुश्मनों को जीतने वाली हूं | मेरे पति का असीम यश है | मैंने वह त्याग किया है जिससे इन्द्र (सम्राट ) विजय पता है | मुझेभी विजय मिली है | मैंने अपने शत्रु नि:शेष कर दिए हैं | ”
वह सूर्य ऊपर आ गया है और मेरा सौभाग्य भी ऊँचा हो गया है | मैं जानती हूं , अपने प्रतिस्पर्धियों को जीतकर मैंने पति के प्रेम को फ़िर से पा लिया है |
मैं प्रतीक हूं , मैं शिर हूं , मैं सबसे प्रमुख हूं और अब मैं कहती हूं कि मेरी इच्छा के अनुसार ही मेरा पति आचरण करे | प्रतिस्पर्धी मेरा कोई नहीं है |
मेरे पुत्र मेरे शत्रुओं को नष्ट करने वाले हैं , मेरी पुत्री रानी है , मैं विजयशील हूं | मेरे और मेरे पति के प्रेम की व्यापक प्रसिद्धि है |
ओ प्रबुद्ध ! मैंने उस अर्ध्य को अर्पण किया है , जो सबसे अधिक उदाहरणीय है और इस तरह मैं सबसे अधिक प्रसिद्ध और सामर्थ्यवान हो गई हूं | मैंने स्वयं को अपने प्रतिस्पर्धियों से मुक्त कर लिया है |
मैं प्रतिस्पर्धियों से मुक्त हो कर, अब प्रतिस्पर्धियों की विध्वंसक हूं और विजेता हूं | मैंने दूसरों का वैभव ऐसे हर लिया है जैसे की वह न टिक पाने वाले कमजोर बांध हों | मैंने मेरे प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त कर ली है | जिससे मैं इस नायक और उस की प्रजा पर यथेष्ट शासन चला सकती हूं |
इस मंत्र की ऋषिका और देवता दोनों हो शची हैं | शची इन्द्राणी है, शची स्वयं में राज्य की सम्राज्ञी है ( जैसे कि कोई महिला प्रधानमंत्री या राष्ट्राध्यक्ष हो ) | उस के पुत्र – पुत्री भी राज्य के लिए समर्पित हैं |
ऋग्वेद १.१६४.४१
ऐसे निर्मल मन वाली स्त्री जिसका मन एक पारदर्शी स्फटिक जैसे परिशुद्ध जल की तरह हो वह एक वेद, दो वेद या चार वेद , आयुर्वेद, धनुर्वेद, गांधर्ववेद , अर्थवेद इत्यादि के साथ ही छ : वेदांगों – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष और छंद : को प्राप्त करे और इस वैविध्यपूर्ण ज्ञान को अन्यों को भी दे |
हे स्त्री पुरुषों ! जो एक वेद का अभ्यास करने वाली वा दो वेद जिसने अभ्यास किए वा चार वेदों की पढ़ने वाली वा चार वेद और चार उपवेदों की शिक्षा से युक्त वा चार वेद, चार उपवेद और व्याकरण आदि शिक्षा युक्त, अतिशय कर के विद्याओं में प्रसिद्ध होती और असंख्यात अक्षरों वाली होती हुई सब से उत्तम, आकाश के समान व्याप्त निश्चल परमात्मा के निमित्त प्रयत्न करती है और गौ स्वर्ण युक्त विदुषी स्त्रियों को शब्द कराती अर्थात् जल के समान निर्मल वचनों को छांटती अर्थात् अविद्यादी दोषों को अलग करती हुई वह संसार के लिए अत्यंत सुख करने वाली होती है |
ऋग्वेद १०.८५.४६
स्त्री को परिवार और पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका में चित्रित किया गया है | इसी तरह, वेद स्त्री की सामाजिक, प्रशासकीय और राष्ट्र की सम्राज्ञी के रूप का वर्णन भी करते हैं |
ऋग्वेद के कई सूक्त उषा का देवता के रूप में वर्णन करते हैं और इस उषा को एक आदर्श स्त्री के रूप में माना गया है | कृपया पं श्रीपाद दामोदर सातवलेकर द्वारा लिखित ” उषा देवता “, ऋग्वेद का सुबोध भाष्य देखें |
सारांश (पृ १२१ – १४७ ) –
१. स्त्रियां वीर हों | ( पृ १२२, १२८)
२. स्त्रियां सुविज्ञ हों | ( पृ १२२)
३. स्त्रियां यशस्वी हों | (पृ १२३)
४. स्त्रियां रथ पर सवारी करें | ( पृ १२३)
५. स्त्रियां विदुषी हों | ( पृ १२३)
६. स्त्रियां संपदा शाली और धनाढ्य हों | ( पृ १२५)
७.स्त्रियां बुद्धिमती और ज्ञानवती हों | ( पृ १२६)
८. स्त्रियां परिवार ,समाज की रक्षक हों और सेना में जाएं | (पृ १३४, १३६ )
९. स्त्रियां तेजोमयी हों | ( पृ १३७)
१०.स्त्रियां धन-धान्य और वैभव देने वाली हों | ( पृ १४१-१४६)
(साभार – लिंक्ड इन पर प्रकाशित काजल पटेल का आलेख)
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लेखिका तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक हैं
सम्पर्क- फोन: +91 89815-92855 / 9748964480
ई मेल : sandhya@ turiyacommunications.com [email protected]
भारतीय वैज्ञानिकों ने ‘मिल्की-वे’ में खोजे एक अरब वर्ष पुराने दो ‘एलियन’ तारे
नयी दिल्ली : भारतीय वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा यानी ‘मिल्की-वे’ में दो ऐसे तारे खोजे हैं जो वास्तव में ब्रह्मांड के शुरुआती एक अरब वर्ष में बने ‘ग्लोबल क्लस्टर’ का हिस्सा थे और जिनकी प्रकृति आकाशगंगा के अन्य तारों से अलग होने के कारण इन्हें ‘एलियन तारे’ भी कहा जाता है।
अब तक के अनुमानों के अनुसार, ब्रह्मांड की उम्र करीब 14 अरब वर्ष है। शुरुआती एक अरब वर्ष में कई ‘ग्लोबल क्लस्टर’ बने थे। हर आकाशगंगा में इन ‘ग्लोबल क्लस्टर’ के कुछ तारे मिलते हैं हालाँकि अब तक वैज्ञानिक ग्लोबल क्लस्टरों की उत्पत्ति के रहस्य को नहीं समझ पाये हैं।
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान की प्रोफेसर शिवारानी तिरुपति ने अपनी टीम के साथ मिलकर इन दोनों तारों की पहचान की है। ये तारे हमारी आकाशगंगा के वलय में धरती से 3621 प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं। दुनिया भर में इससे पहले ग्लोबल क्लस्टर के सिर्फ पाँच तारों का ही इतना नजदीकी से अध्ययन किया गया है।
प्रो. तिरुपति की टीम ने इन तारों में अल्युमीनियम, सोडियम, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, मैगनेशियम और कई अन्य रसायनों की प्रचूर मात्रा में मौजूदगी के आधार पर इनके ‘एलियन’ तारे होने की पुष्टि की है। ग्लोबल क्लस्टर के तारों में दूसरे तारों के मुकाबले अल्युमीनियम और सोडियम की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है।
अभिनेता ऋषि कपूर का निधन
मुम्बई : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर 30 अप्रैल 2020 को निधन हो गया. वे 67 साल के थे. इस बात की जानकारी खुद अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर दी। अमिताभ बच्चन ने अपने ट्वीट में बताया कि ऋषि कपूर इस दुनिया को छोड़ कर चले गए हैं. उन्होंने इसके साथ ही अपने ट्वीट में कहा कि मैं टूट चुका हूँ।ऋषि कपूर को बीते दिन ही हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने बताया था कि अभिनेता को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। ऋषि कपूर को खराब तबीयत के चलते दक्षिण मुम्बई के सर एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी ऋषि कपूर के निधन पर दुख जताया। ऋषि कपूर सितम्बर 2019 में ही न्यूयॉर्क में लगभग एक साल कैंसर का इलाज करवाने के बाद भारत लौटे थे। उन्हें साल 2018 में पता चला था कि वह कैंसर से पीड़ित हैं. इसके बाद वे अपने इलाज़ के लिए न्यूयॉर्क गए थे। 23 अप्रैल 2020 को लॉकडाउन होने के बावजूद उन्हें महाराष्ट्र सरकार से स्पेशल पास जारी करवा कर अस्पताल लाया गया था। हालांकि तब उन्हें चंद घंटों बाद ही छुट्टी दे दी गई थी. इससे पहले फरवरी में भी उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
ऋषि कपूर का जन्म 4 सितम्बर 1952 को हुआ था. ऋषि कपूर एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता, फ़िल्म निर्माता और निर्देशक थे। उन्हें बॉबी के लिए 1974 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार और साथ ही 2008 में फ़िल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार सहित अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका है।
नहीं रहे इरफान खान
मुम्बई : बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता इरफान खान का निधन हो गया है. वो 53 साल के थे और काफी समय से कैंसर से जंग लड़ रहे थे। इरफान खान की तबीयत अचानक खराब हो गयी थी, जिसकी वजह से उन्हें मुम्बई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई घंटों तक मौत से लड़ने के बाद गत बुधवार 29 अप्रैल को उनके निधन की खबरें आई। वो अपनी सेहत को लेकर काफी समय से परेशान थे लेकिन वो एक फाइटर थे. उन्होंने कैंसर से जंग जीतने की इच्छा जाहिर करते हुए एक इंटरव्यू में कहा था कि वो अपनी पत्नी के लिए जिंदा रहना चाहते हैं।
इरफान खान ने इसी साल मार्च महीने में मुंबई मिरर को एक इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरे लिए ये दौर रोलर-कोस्टर राइड जैसा रहा, जिसमें हम थोड़ा रोए और ज्यादा हँसे। उन्होंने कहा कि इस दौरान मैं बहुत ही भयंकर बेचैनी से गुजरा, लेकिन कहीं न कहीं मैंने उसे कंट्रोल किया। ऐसा लग रहा था मानो कि आप लगातार अपने साथ हॉपस्कॉच खेल रहे हों।
अभिनेता ने कहा था कि इस वक्त को मैंने अपनों के लिए जिया। इसमें सबसे अच्छी बात ये थी कि मैंने बेटों के साथ बहुत वक्त बिताया.।उनको बड़ा होते देखा. टीनएज के लिए ये बहुत ही अहम वक्त होता है, जैसे मेरा छोटा बेटा है। बड़ा वाला अब टीनएज नहीं रहा. पत्नी सुतपा सिकदर के बारे में बाते करते हुए उन्होंने कहा कि उसके बारे में क्या कहूं? वो मेरे लिए सातों दिन 24 घंटे खड़ी रही। मेरी देखभाल की और उनके कारण मुझे बहुत मदद मिली। इरफान ने कहा कि मैं अभी तक हूं, इसकी वो एक बड़ी वजह है और अगर मुझे जीने का मौका मिलेगा, मैं उसके लिए जीना चाहूंगा।
इरफान हाई ग्रेड न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर से जूझ रहे थे. वो इससे रिकवर करने की कोशिश में लगे हुए थे। इसी बीच उनकी माँ के निधन की खबर आई और तुरंत ही इरफान की हालत बिगड़ने की चर्चा शुरू हो गईं. इरफान के रूप में इंडस्ट्री ने एक बेहतरीन इंसान और एक बेहद प्रतिभाशाली कलाकार को खो दिया है। इस खबर ने फिल्म इंडस्ट्री से लेकर उनके प्रशंसकों तक सभी को हिलाकर रख दिया है।
लॉकडाउन के दौरान खाना बनाने में हो आसानी
आमतौर पर आजकल किचन में आपका बहुत समय बीत रहा है, इस समय को कम करने की कोशिश करना भी जरूरी है। किचन में खाना बनाने के अपने समय को आप ग्रेवी की तैयारी पहले से ही करके कम कर सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ आसान टिप्स।
1-जिन घरों में बच्चे या टीनएजर्स हैं, वहां खाने की फरमाइशें भी ज्यादा होती हैं। वीकेंड पर रेड (टमाटर-रेड चिली ग्रेवी), ग्रीन (धनिया-पालक वाली) या व्हाइट (क्रीम-दहीयुक्त) ग्रेवीज बना कर स्टोर की जा सकती हैं। इससे खाना बनाने में कम समय लगेगा और बच्चों को रोज कुछ मजेदार अलग स्वाद भी मिलेंगे।
2-अगर ऑयली खाना कम पसंद करते हों तो आप प्याज-टमाटर-लहसुन-अदरक और हरी मिर्च को कुकर में उबाल कर पीसकर भी स्टोर कर सकती हैं। जब कोई तरीदार सब्जी बनानी हो, थोड़ी सी प्यूरी निकालें। जरा से तेल या घी में उसे छौंक लें और मनपसंद सब्जी बना लें। उबली हुई प्यूरी में बहुत कम तेल लगता है।
3-घर में सब्जियों की कमी हो सकती है, लेकिन दालें जरूर सही मात्रा में रखें, ताकि खासतौर पर दोपहर के वक्त राजमा-छोले, सोयाबीन बड़ी, नगेट्स, दाल मखनी, दाल भरे पराठे या रोटी जैसी जल्दी एक ही डिश बनाएं। इन्हें बच्चे भी शौक से खाते हैं। इनके साथ किसी दूसरी सब्जी की भी जरूरत नहीं पड़ती।
4-रात में सोने से पहले अपनी डाइनिंग टेबल को व्यवस्थित कर लें। सॉस, अचार, टिश्यू पेपर्स, नमकदानी आदि को चेक करें और हर जरूरी चीज वहां रख दें, ताकि अगले दिन यह समय बच सके। लॉकडाउन के दौरान घर में चटनी, अचार, सॉस, बटर, चीज जैसी चीजों का स्टॉक पूरा रखें।
5-लहसुन-अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट भी एक बार में ज्यादा बना कर स्टोर कर लें। इससे बार-बार खाना बनाते समय पेस्ट बनाने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा। एक बार में पेस्ट बनाकर किसी एयरटाइट डिब्बे में रखकर फ्रिज में रख लें, ताकि उसकी गंध फ्रिज में न फैले। जब खाना बनाना हो, उसे उपयोग में ले आएं। ये हफ्ते भर चला सकती हैं।




