रांची । झारखंड विधानसभा में सोमवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश की गयी। रिपोर्ट में यह खुलाशा हुआ कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के विभिन्न विभागों ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान बजट की 23.14 प्रतिशत खर्च ही नहीं किए।
विधानसभा में पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक लाख 41 हजार 498.79 करोड़ रुपये के कुल प्रावधानों में से एक लाख आठ हजार 754.44 करोड़ रुपये विभागों द्वारा खर्च किए गए। वहीं, वर्ष 2022-23 के दौरान 57 मामलों में 13 हजार 499.10 करोड़ रुपये के पूरक प्रावधान (प्रत्येक मामले में 0.50 करोड़ रुपये से अधिक) अनावश्यक साबित हुआ, क्योंकि व्यय मूल प्रावधानों के स्तर तक भी नहीं आया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य का समग्र ऋण-जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) अनुपात जो 2019-20 में 30.42 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में जीएसडीपी का 36.23 प्रतिशत हो गया था। यह 2021-22 से घटता रहा और 2023-24 में पांच साल के निचले स्तर 27.68 प्रतिशत पर पहुंच गया।
वर्ष 2023-24 में एक विनियोग (धन का आवंटन) के तहत 268.02 करोड़ का अतिरिक्त खर्च हुआ था। इसे नियमित करने की जरूरत थी। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2001-02 से 2022-23 से संबंधित 3.778.41 करोड़ रुपये के अलावा अतिरिक्त संवितरण (किसी विशेष धन या निधि से पैसे का भुगतान करना) को अभी नियमित किया जाना है। रिपोर्ट के अनुसार गैर-प्रतिबद्ध व्यय के भीतर 2023-24 में सब्सिडी 4,831 करोड़ रुपये थी। यह कुल राजस्व व्यय का 6.30 प्रतिशत थी। वहीं 2023-24 के दौरान ऊर्जा पर सब्सिडी, कुल सब्सिडी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (48 प्रतिशत) थी। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्धारित समय अवधि के भीतर सहायता अनुदान के विरुद्ध उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने की आवश्यकता के बावजूद, 31 मार्च 2024 तक एक लाख 33 हजार 161.50 करोड़ रुपए के 47,367 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे। इसी प्रकार से संक्षिप्त आकस्मिक (एसी) बिल के माध्यम से निकाले गए अग्रिम धन के विरुद्ध विस्तृत आकस्मिक (डीसी) बिल जमा करने की जरूरत के बावजूद, 31 मार्च 2024 तक चार हजार 891.72 करोड़ रुपए के 18,011 एसी बिल के विरुद्ध डीसी बिल लंबित थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि झारखंड में 32 एसपीएसई (तीन गैर-कार्यशील सरकारी कंपनियां) थीं। 31 अक्टूबर 2024 तक 30 एसपीएसई, जिनके 107 खाते बकाया थे। इन कंपनियों द्वारा वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने के संबंध में निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं किया गया।
झारखंड में खर्च हुआ बजट का 23 प्रतिशत हिस्सा : कैग
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कसी पूजा कमेटियों की नकेल
-यूसी पर राज्य सरकार से मांगा जवाब
कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार से उन दुर्गा पूजा समितियों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है, जिन्होंने पिछले वर्ष अदालत के निर्देश के बावजूद खर्च (यूटिलाइजेशन) प्रमाणपत्र जमा नहीं किया। न्यायमूर्ति सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की खंडपीठ ने सवाल किया कि क्या ऐसी समितियों को इस वर्ष भी नया अनुदान या मानदेय दिया जा रहा है? अदालत ने यह भी पूछा, च्च्कितनी समितियों ने खर्च प्रमाणपत्र जमा नहीं किया है? इसके बावजूद क्या उन्हें अनुदान मिल रहा है? राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि मार्च २०२३ में सरकार ने रिपोर्ट दी थी कि लगभग ५०० समितियों को अनुदान मिला था, जिनमें से ३६ समितियों ने खर्च प्रमाणपत्र दाखिल नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में सरकार विस्तृत जवाब पेश करेगी। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सौरव दत्ता द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ी है। दत्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य और शमीम अहमद ने दलील दी कि करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में उपयोग किए जाने वाले धन को सरकार पूजा समितियों को बांट रही है। हालांकि, राज्य सरकार ने इसका बचाव करते हुए कहा कि यह अनुदान च्जनकल्याणकारीज् है और सेफ ड्राइव, सेव लाइफ अभियान व कोविड-१९ प्रतिबंधों जैसी पहलों में इसका उपयोग किया गया था। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस वर्ष राज्यभर की करीब ४० हजार पूजा समितियों को १.१ लाख रुपये का मानदेय देने की घोषणा की है। इसके लिए ४५० करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। पिछले साल समितियों को ८५ हजार रुपये दिए गए थे और ममता ने २०२५ में इसे एक लाख तक बढ़ाने का वादा किया था। लेकिन इस बार उन्होंने वादा से भी आगे बढ़ते हुए अतिरिक्त १० हजार रुपये जोड़ दिए। मुख्यमंत्री ने नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजकों के साथ बैैठक के दौरान पूजा समितियों के लिए बिजली बिलों पर ८० प्रतिशत छूट देने की भी घोषणा की थी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने २०१८ में पूजा समितियों को १० हजार रुपये के अनुदान और २५ प्रतिशत बिजली बिल छूट के साथ इस पहल की शुरुआत की थी। इसके बाद यह राशि हर साल बढ़ती गई — २०१९ में २५ हजार रुपये, कोविड काल में ५० हजार रुपये, फिर २०२२ में ६० हजार, २०२३ में ७० हजार और २०२४ में ८५ हजार रुपये। अब २०२५ में यह बढ़कर १.१ लाख रुपये तक पहुंच गई है, जो अब तक का सबसे अधिक अनुदान है।
गर्भवती महिला को डॉक्टर के सहायक ने दिया गलत इंजेक्शन!
-स्वास्थ्य आयोग ने दिया इकबालपुर का नर्सिंग होम बंद करने का आदेश
कोलकाता । कोलकाता के इकबालपुर स्थित एक नर्सिंग होम में एक गर्भवती महिला दर्द की शिकायत लेकर गई थी। कथित तौर पर, उस समय एक डॉक्टर के सहायक ने उसे आरएमओ गलत इंजेक्शन लगा दिया। आरोप है कि घर लौटने के बाद महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद महिला के परिवार की ओर से स्वास्थ्य आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई। आयोग ने इस घटना में इकबालपुर नर्सिंग होम को बंद करने का आदेश दिया है। स्वास्थ्य निदेशक को मामले की जांच करने का भी आदेश दिया गया है। आयोग ने महिला को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। हालाँकि, महिला मुआवजा लेने को तैयार नहीं थी। 6 अगस्त को अलका रॉय नाम की एक महिला ने स्वास्थ्य आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि गर्भावस्था के दौरान दर्द होने पर वह इकबालपुर नर्सिंग होम गई थी। तभी अविनाश कुमार नाम के एक व्यक्ति ने खुद को आरएमओ बताया। कथित तौर पर, उसने खुद को आरएमओ बताकर उसे एक पर्चा लिखा। उसने महिला को एक इंजेक्शन भी दिया। दर्द शुरू हो गया। महिला घर चली गई। उसके बाद उसका गर्भपात हो गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि बाद में महिला को पता चला कि उसका इलाज करने वाला व्यक्ति असल में डॉक्टर नहीं था। इसके बाद स्वास्थ्य आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई। नर्सिंग होम के मालिक ने बताया कि उस दिन महिला का इलाज करने वाला व्यक्ति डॉक्टर का सहायक था। डॉक्टर की मेज पर उसका लेटरहेड था। उसने उस पर दवा का पर्चा लिखा था। इसके बाद स्वास्थ्य आयोग ने नर्सिंग होम को बंद करने का आदेश दिया। आयोग ने स्वास्थ्य सेवा निदेशक को जाँच के आदेश दिए हैं। महिला को एक लाख रुपये का मुआवज़ा देने को भी कहा गया है। आयोग के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति असीम कुमार बनर्जी ने कहा, “मुझे यकीन नहीं है कि महिला को दिए गए इंजेक्शन की वजह से उसका गर्भपात हुआ था। स्वास्थ्य निदेशक इस मामले की जाँच करेंगे।” उन्होंने कहा कि महिला को ‘परेशान’ किया गया और उसका इलाज किसी ऐसे व्यक्ति ने किया जो डॉक्टर नहीं था, इसलिए उसे एक लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया। हालाँकि, शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने पैसों के लिए शिकायत नहीं की थी। महिला ने मुआवज़े की रकम नहीं ली। उन्होंने रामकृष्ण मिशन से वह पैसा देने को कहा। मुआवजे के साथ ही नर्सिंग होम को बंद करने का आदेश दिया गया है। आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि आदेश के बाद नर्सिंग होम ने नए मरीजों को लेना बंद कर दिया है। इसके बाद अधिकारियों ने आयोग में समीक्षा याचिका के लिए आवेदन किया। नर्सिंग होम खोलने की अनुमति के लिए आवेदन करते हुए अधिकारियों ने कहा कि इसके बंद होने से कई लोगों की आय प्रभावित हुई है। अधिकारियों को डायलिसिस के मरीजों को वापस भेजने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि जब तक स्वास्थ्य निदेशक की रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक नर्सिंग होम खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आयोग 8 सितंबर को समीक्षा याचिका पर सुनवाई करेगा। तब तक नर्सिंग होम बंद रहेगा।
डीआरडीओ ने किया एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली का पहला परीक्षण
नयी दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण 23 अगस्त की सुबह लगभग 12:30 बजे ओडिशा के समुद्री तट पर किया गया। यह एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिसमें सभी स्वदेशी त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने में सक्षम मिसाइलें, उन्नत अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली मिसाइलें और एक उच्च शक्ति सहित लेजर आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार शामिल हैं।
डीआरडीओ के मुताबिक सभी हथियार प्रणाली घटकों को एकीकृत संचालन रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला के केंद्रीकृत कमान व नियंत्रण केंद्र से नियंत्रित किया जाता है, जो इस परीक्षण से जुड़े विकास कार्यक्रम की नोडल प्रयोगशाला है। वीएसएचओआरएडीएस को रिसर्च सेंटर इमारत और डीईडब्ल्यू को सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज ने विकसित किया है। उड़ान परीक्षणों के दौरान दो उच्च गति वाले फिक्स्ड विंग मानवरहित हवाई लक्ष्यों और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन सहित तीन अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ क्यूआरएसएएम, वीएसएचओआरएडीएस तथा उच्च ऊर्जा लेजर हथियार प्रणाली ने अलग-अलग दूरी एवं ऊंचाई पर निशाना बनाकर पूरी तरह से नष्ट कर दिया।मिसाइल प्रणाली और ड्रोन का पता लगाने तथा विनाश प्रणाली, हथियार प्रणाली कमान एवं नियंत्रण के साथ-साथ संचार व रडार सहित सभी हथियार प्रणाली घटकों ने त्रुटिरहित प्रदर्शन किया, जिसकी पुष्टि उड़ान डेटा को कैप्चर करने के लिए एकीकृत परीक्षण रेंज में तैनात रेंज उपकरणों ने की। इस परीक्षण का अवलोकन डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों ने किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योग जगत को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस अनूठे उड़ान परीक्षण ने देश की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को स्थापित किया है और यह दुश्मन के हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय रक्षा घेरे को सशक्त बनाएगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी सफल उड़ान परीक्षणों में शामिल सभी टीमों को बधाई दी है।
इसरो ने किया पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने गगनयान मिशन की तैयारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। संगठन ने पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली का पहला एकीकृत वायु ड्रॉप परीक्षण (आईएडीटी-01) सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर सुरक्षित वापस लाने के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रणालियों को प्रमाणित करना था।यह सफल परीक्षण भारतीय वायु सेना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के साथ मिलकर किया गया, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक समन्वित और बहु-एजेंसी प्रयास को दर्शाता है। इसरो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इस उपलब्धि की घोषणा की, जिसमें इस संयुक्त प्रयास पर जोर दिया गया।इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने पुष्टि की है कि भारत का पहला मानवरहित गगनयान मिशन, जिसे जी 1 नाम दिया गया है, इस साल दिसंबर में अपनी परीक्षण उड़ान भरेगा। यह मिशन एक अर्ध-मानव रोबोट ‘व्योममित्र’ को लेकर जाएगा, जो अंतरिक्ष में मानव-जैसी गतिविधियों का अनुकरण करेगा। यह उड़ान भविष्य के मानव मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा इकट्ठा करेगी। नारायणन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गगनयान मिशन की तैयारी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसमें 80% से अधिक, यानी लगभग 7,700 परीक्षण पहले ही पूरे हो चुके हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बाकी बचे 2,300 परीक्षण अगले साल मार्च तक पूरे हो जाएंगे, जिससे मिशन अपनी तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ सकेगा।
प्रिंटिंग और पैकेजिंग उद्योग को 5 फीसदी जीएसटी स्लैब में लाने की अपील
नयी दिल्ली । देशभर में 2.5 लाख से अधिक प्रिंटिंग और पैकेजिंग उद्यमों का प्रतिनिधित्व करने वाले अखिल भारतीय मुद्रक और पैकेजर महासंघ (एआईएफपीपी) ने शनिवार को अहम वर्चुअल बैठक का आयोजन किया। बैठक का केंद्रबिंदु था-सरकार द्वारा प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में सुधार, जिसका उद्देश्य मौजूदा बहु-स्तरीय संरचना को सरल बनाकर दो-स्लैब प्रणाली (5% और 18%) लागू करना है। जीएसटी कानून विशेषज्ञ एन.के. थमन ने बैठक में कहा, “प्रिंटिंग और पैकेजिंग भारत की आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा है। यदि इस क्षेत्र को 18% के स्लैब में रखा गया, तो इससे नवाचार में रुकावट, लागत में वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में गिरावट आ सकती है।” भारत का प्रिंटिंग और पैकेजिंग उद्योग वर्ष 2025 तक 150 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की राह पर है। पैकेजिंग खंड अकेले साल 2025 में 101 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है और साल 2030 तक यह 10.73% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ 170 अरब डॉलर तक पहुँचेगा। यह क्षेत्र देश के 2.5 मिलियन से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है और अप्रत्यक्ष रूप से कागज, स्याही और लॉजिस्टिक्स जैसे सहयोगी क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन देता है।
मौजूदा जीएसटी ढांचा और प्रस्तावित प्रभाव वर्तमान में: कार्डबोर्ड, बॉक्स और कागज जैसे उत्पादों पर 12% जीएसटी लागू है (हाल में 18% से घटाया गया)। स्टेशनरी जैसे उत्पाद (लिफाफे, डायरी, रजिस्टर आदि) 18% स्लैब में आते हैं। आवश्यक मुद्रित सामग्री जैसे किताबें 0% या 5% की रियायती दर पर करयोग्य हैं।प्रस्तावित ढांचे में 12% वाले अधिकांश उत्पादों को 5% में शामिल किया जा सकता है, लेकिन चिंता यह है कि कई सेवाएं 18% स्लैब में स्थानांतरित हो जाएंगी, जिससे उत्पादन लागत में 6% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
एआईएफपीपी इस संदर्भ में जीएसटी परिषद् और वित्त मंत्रालय को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा। महासंघ का मानना है कि सरकार से सहयोगात्मक नीति मिलने पर यह क्षेत्र न केवल स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देगा, बल्कि निर्यात में भी बड़ा योगदान देगा। अखिल भारतीय मुद्रक और पैकिजर महासंघ (एआईएफपीपी) देशभर में फैले प्रिंटिंग और पैकेजिंग व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करता है। यह संगठन उद्योग की नीतिगत बाधाओं को दूर करने, नवाचार को बढ़ावा देने और आर्थिक सुधारों के माध्यम से सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत है। इस वर्चुअल बैठक का संचालन प्रिंट उद्योग की प्रमुख शख्सियत प्रो. कमल चोपड़ा ने किया और उन्होंने क्षेत्र से जुड़ी बुनियादी हकीकतों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
अनीश दयाल सिंह बने डिप्टी एनएसए
नयी दिल्ली । सीआरपीएफ और आईटीबीपी के पूर्व महानिदेशक अनीश दयाल सिंह को नया उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) नियुक्त करते हुए आंतरिक मामलों को संभालने का दायित्व सौंपा गया है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। मणिपुर कैडर के 1988 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सिंह दिसंबर 2024 में सेवानिवृत्त हुए थे। इस भूमिका के लिए उनके पास व्यापक अनुभव है। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और हाल ही में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का नेतृत्व करने से पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में लगभग 30 वर्षों तक सेवाएं दी हैं। अधिकारियों के अनुसार, सिंह उप एनएसए के रूप में जम्मू-कश्मीर, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर उग्रवाद समेत देश के आंतरिक मामलों के प्रभारी होंगे। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख राजिंदर खन्ना अतिरिक्त एनएसए हैं, जबकि सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी टीवी रविचंद्रन और पूर्व आईएफएस अधिकारी पवन कपूर दो सेवारत उप एनएसए हैं।
सीआरपीएफ प्रमुख के रूप में सिंह के कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद का मुकाबला करने में प्रगति, 30 से अधिक अग्रिम परिचालन ठिकानों की स्थापना और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में चार नयी बटालियनों की शुरुआत जैसी पहल हुईं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पहले विधानसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने में सीआरपीएफ की भूमिका की भी देखरेख की।
भारत सरकार बनाएगी नया एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन
-25,000 करोड़ का गेम चेंजर प्लान कर रही तैयार
नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने भारत से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। बजट 2025 में घोषित एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत सरकार 2025 से लेकर 2031 तक देश के निर्यातकों को करीब 25,000 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद देने की योजना पर काम कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के निर्यातकों को सस्ता और आसान कर्ज उपलब्ध कराना है, ताकि वे वैश्विक बाजार में मजबूती से टिक सकें, खासकर अमेरिका जैसे देशों द्वारा लगाए गए टैक्स से उत्पन्न चुनौतियों का सामना कर सकें। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने इस योजना का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (ईएफसी) को भेजा है। ईएफसी की मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। योजना को वित्त वर्ष 2025 से लागू करने की तैयारी है। इस मिशन का मकसद अगले छह वर्षों (2025-31) में भारत के निर्यात क्षेत्र में समावेशी, व्यापक और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है। खासतौर पर एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को ग्लोबल बाजार में सक्षम बनाने के लिए यह योजना अहम मानी जा रही है।
११७ दिन बाद जारी हुए ज्वाइंट एंट्रेंस के नतीजे
– मेरिट लिस्ट में कोलकाता के छात्र आगे
कोलकाता । लंबे इंतज़ार के बाद पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा २०२५ का परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया। यह परीक्षा इस वर्ष २७ अप्रैल को आयोजित हुई थी, लेकिन ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी जटिलताओं के कारण परिणाम की घोषणा लगातार टलती रही। अंततः ११७ दिन बाद, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश आने के कुछ ही घंटों में परीक्षा का परिणाम प्रकाशित किया गया। जेईई के ज़रिए राज्य के सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला होता है। इस बार की मेरिट लिस्ट में एक बार फिर कोलकाता के छात्र आगे हैं। घोषित मेरिट लिस्ट में पहले १० रैंक में से चार स्थान कोलकाता के विद्यार्थियों ने हासिल किए हैं। प्रथम स्थान : अनिरुद्ध चक्रवर्ती (डॉनबॉस्को स्कूल, पार्क सर्कस, कोलकाता), द्वितीय स्थान : साम्यज्योति विश्वास (सेंट्रल मॉडल स्कूल, कल्याणी), तृतीय स्थान : दिषांत बसु (दिल्ली पब्लिक स्कूल, रूबी पार्क, कोलकाता), चतुर्थ स्थान : अरित्र राय (दिल्ली पब्लिक स्कूल, रूबी पार्क, कोलकाता)। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए असफल छात्रों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा। “कानूनी जटिलताओं के चलते इस बार परिणाम जारी होने में देरी हुई। लेकिन मुझे विश्वास है कि सभी विद्यार्थी प्रतिकूलताओं को पार कर आने वाले दिनों में और बड़ी सफलता अर्जित करेंगे और बंगाल का नाम रोशन करेंगे।”
पीएम ने मेट्रो की नयी सेवाओं को दिखाई हरी झंडी
-मेट्रो रूट का ब्लूप्रिंट मैंने तैयार किया था : ममता
कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कोलकाता में विभिन्न मेट्रो रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने तृणमूल पर निशाना साधते हुए कहा कि दागी मंत्रियों को हटाये जाने से संबंधित विधेयक की प्रतिय़ां फा़ड़ने से सरकार चुप नहीं बैठेगी। हर हाल में तृणमूल सरकार की विदाई तय है। उन्होंने जेसोर रोड मेट्रो स्टेशन से नोआपाड़ा -जय हिंद विमानबंदर मेट्रो सेवा, सियालदह-एस्प्लेनेड मेट्रो सेवा और बेलेघाटा-हेमंत मुखोपाध्याय मेट्रो सेवा को हरी झंडी दिखाई और फिर मेट्रो में यात्रा की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मेट्रो परियोजनाओं में शामिल श्रमिकों और स्कूली छात्रों से बातचीत की। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह और शांतनु ठाकुर ने उनका अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज एक बार फिर मुझे पश्चिम बंगाल के विकास को गति देने का अवसर मिला है। अभी मैं नोआपाड़ा से बिमानबंदर तक कोलकाता मेट्रो का आनंद लेकर आया हूं। इस दौरान बहुत सारे साथियों से मुझे बातचीत करने का अवसर भी मिला। हर किसी को खुशी है कि कोलकाता का पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाकई अब आधुनिक हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज यहां 6 लेन के एलिवेटेड कोना एक्सप्रेसवे का भी शिलान्यास किया गया है। हजारों-करोड़ रुपए के इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए कोलकातावासियों को और पूरे पश्चिम बंगाल के लोगों को बहुत-बहुत बधाई। ये कनेक्टिविटी कोलकाता और पश्चिम बंगाल के बेहतर भविष्य की नींव को मजबूत करेगी। कोलकाता जैसे हमारे शहर भारत के इतिहास और हमारे भविष्य, दोनों की समृद्ध पहचान हैं। आज जब भारत, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनोमी बनने की तरफ आगे बढ़ रहा है, तब कोलकाता समेत इन शहरों की भूमिका बहुत बड़ी है। पीएम मोदी ने कहा कि आज के इस कार्यक्रम का संदेश मेट्रो के उद्घाटन और हाइवे के शिलान्यास से भी बड़ा है। ये आयोजन इस बात का भी प्रमाण है कि आज का भारत अपने शहरों का कैसे कायाकल्प कर रहा है। यह गर्व की बात है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है। 2014 से पहले देश में केवल 250 किलोमीटर मेट्रो रूट थे। आज यह आंकड़ा 1,000 किलोमीटर से ज्यादा हो गया है। कोलकाता में भी सात नए स्टेशनों के जुड़ने से मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ है। ये विकास कोलकातावासियों के जीवन और आवागमन को और भी आसान बना देंगे। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार पश्चिम बंगाल के विकास के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। आज पश्चिम बंगाल देश के उन राज्यों में शामिल हो चुका है, जहां रेलवे का शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो चुका है। लंबे समय से पुरुलिया से हावड़ा के बीच मेमू ट्रेन की मांग हो रही थी, भारत सरकार ने जनता की ये मांग भी पूरी कर दी है। इसी बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि इन परियोजनाओं की योजना, ब्लूप्रिंट और शुरुआती कार्यों में राज्य सरकार और स्वयं उनकी अहम भूमिका रही है। प्रधानमंत्री के आगमन से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि जब मैं रेल मंत्री थी, तब कोलकाता में कई मेट्रो रेल कॉरिडोर की योजना और मंजूरी का प्रबंध किया था। इन परियोजनाओं का ब्लूप्रिंट मैंने तैयार किया, फंडिंग सुनिश्चित की और काम शुरू करवाया। मैंने यह भी तय किया कि जोका, गड़िया, एयरपोर्ट, सेक्टर-फाइव जैसे हिस्सों को एक इंट्रा-सिटी मेट्रो ग्रिड के तहत जोड़ा जाए। गौरतलब है कि, ममता बनर्जी वर्ष 1999 में एनडीए सरकार में रेल मंत्री थीं। उनके अनुसार, इस दौरान मेट्रो की इन रूटों की नींव रखी गई थी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अगर राज्य सरकार का पूर्ण सहयोग न होता तो इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जमीन उपलब्ध कराई, पक्की सड़कों का इंतजाम किया, विस्थापितों के पुनर्वास की व्यवस्था की और कार्यान्वयन में हरसंभव मदद दी। हमारे सचिव लगातार मेट्रो अधिकारियों के साथ तालमेल बनाए रखे।
स्ट्रीट डॉग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
-टीकाकरण व नसबंदी के बाद छोड़े जा सकते हैं
नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय बेंच ने आवारा कुत्तों के मामले पर दो जजों की बेंच के आदेश में बदलाव करते हुए कहा है कि दिल्ली में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम से तभी छोड़ा जाएगा जब उन्हें टीका (इम्युनाइजेशन) लग जाएगा और बधियाकरण हो जाएगा। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि शेल्टर होम से आवारा कुत्तों को छोड़ने पर लगी रोक को इस बदलाव के साथ हटाया जा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने साफ किया कि जो कुत्ते आक्रामक स्वभाव के हैं और उन्हें रेबीज की बीमारी है उन्हें शेल्टर होम से नहीं छोड़ा जाएगा। न्यायालय ने कहा कि सड़कों पर आवारा कुत्तों को खाना नहीं खिलाया जा सकता है। आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए जगह नगर निगम की ओर से तय किया जाए। न्यायालय ने कहा कि वो इस मसले पर विस्तृत सुनवाई करेगा और पूरे देश के लिए एक नीति तैयार करेगा।
न्यायालय ने १४ अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके पहले ११ अगस्त को जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर की सड़कों और गलियों को आवारा कुत्तों से मुक्त कराने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद समेत एनसीआर में संबंधित प्राधिकार को निर्देश दिया था कि वो शहर को, गलियों को आवारा कुत्तों से मुक्त करें। जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने कहा था कि सभी स्थानों से आवारा कुत्तों को उठाया जाए। इन आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर होम में रखा जाए। जस्टिस पारदीवाला के इस फैसले का पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने काफी विरोध किया था। इसके बाद चीफ जस्टिस के निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय बेंच ने १४ अगस्त को सुनवाई की थी।




