Friday, May 1, 2026
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काकी जी कहिन

काकी आशा पांडेय बता रही हैं काम की बात, देसी तो बेस्ट है

श्रमिकों के लिए आगे आए अयोध्या के आम लोग

अयोध्या : घर वापस जा रहे लाखों मजदूरों को खाना खिलाने की एक से बढ़कर एक मिसाल आम नागरिकों ने पेश की हैं। ऐसी ही एक नज़ीर उत्तर प्रदेश के अयोध्या नगर निगम की है। लॉकडाउन के दौरान सरकारी बजट की आस न रखकर खुद नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों ने सामुदायिक रसोई बनाई। वे अपनी जेब से चंदा देकर घर वापस लौट रहे दो से तीन हजार मजदूरों को रोज खाना बांट रहे हैं।
अयोध्या नगर निगम के कमिश्नर आनंद शुक्ला बताते हैं कि ”रोज अपनी क्षमता के मुताबिक हम लोग चंदा इकट्ठा करते हैं, फिर खाना बंटवाते हैं. हर रोज के खाने का खर्च पांच से छह हजार रुपये आता है। यह कर्मचारियों के आपसी चंदे से जुटता है।”
यही नहीं अयोध्या में घूमने वाले जानवरों को भी चारा मिलता रहे इसके लिए भी निगम के कर्मचारियों ने कोशिश की है। नगर निगम के कम्युनिटी किचन में खाना बनाने वाले भी निगम के कर्मचारी हैं जो पूरी सतर्कता और एहतियात बरतते हुए साफ सुधरा खाना पकाते हैं।
कमिश्नर आनंद शुक्ला बताते हैं कि ”फैजाबाद-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ी तादाद में मजदूरों को आता देखकर हम लोगों ने सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की।”

आरबीआई ने की ब्याज दरों में कटौती, कर्ज वापसी पर रोक बढ़ाई

मुम्बई : भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 संकट के प्रभाव को कम करने के लिए ब्याज दरों में कटौती, कर्ज किस्त भुगतान पर स्थगन को बढ़ाने और कॉरपोरेट को अधिक कर्ज देने के लिए बैंकों को इजाजत देने का फैसला किया। गौरतलब है कि चार दशकों से अधिक समय में पहली बार भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आने की आशंका है। आरबीआई ने प्रमुख उधारी दर रेपो को 0.40 प्रतिशत घटाकर चार प्रतिशत कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अचानक हुई बैठक में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए रेपो दर में कटौती का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया।
इस कटौती के बाद रेपो दर घटकर चार प्रतिशत रह गयी है, जबकि रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत रह गई है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली एमपीसी ने पिछली बार 27 मार्च को रेपो दर (जिस दर पर केंद्रीय बैंक बैंकों को अल्पकालिक उधार देता है) में 0.75 प्रतिशत की कमी करते हुए इसे 4.40 प्रतिशत कर दिया था।
दास ने कहा कि कोरोना वायरस संकट के कारण कर्ज अदायगी पर स्थगन को तीन और महीने यानि अगस्त तक बढ़ा दिया गया है, ताकि कर्जदारों को राहत मिल सके। इससे पहले मार्च में केंद्रीय बैंक ने एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 के बीच सभी सावधि ऋण के किस्त की भुगतान पर तीन महीनों की मोहलत दी थी। इसके साथ ही इस तरह के सभी ऋणों की अदायगी पर रोक को तीन महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।
कर्ज पर किस्त भुगतान के तहत लोगों से कर्ज के लिए उनके खातों से ईएमआई नहीं ली गई। रिजर्व बैंक की ताजा घोषणा के बाद 31 अगस्त को ऋण स्थगन की अवधि खत्म होने के बाद ही ईएमआई भुगतान शुरू होगा।
आरबीआई ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते आर्थिक गतिविधियां बाधित होने से भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वित्त वर्ष 2020-21 में नकारात्मक रह सकती है।
दास ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है और मुद्रास्फीति के अनुमान बेहद अनिश्चित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दो महीनों के लॉकडाउन से घरेलू आर्थिक गतिविधि बुरी तरह प्रभावित हुई है।’’ साथ ही उन्होंने जोड़ा कि शीर्ष छह औद्योगिक राज्य, जिनका भारत के औद्योगिक उत्पादन में 60 प्रतिशत योगदान है, वे मोटेतौर पर लाल या नारंगी क्षेत्र में हैं।
उन्होंने कहा कि मांग में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं और बिजली तथा पेट्रोलियम उत्पादों की मांग घटी है। गवर्नर ने कहा कि सबसे अधिक झटका निजी खपत में लगा है, जिसकी घरेलू मांग में 60 फीसदी हिस्सेदारी है।
दास ने कहा कि मांग में कमी और आपूर्ति में व्यवधान के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि 2020-21 की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों में कुछ सुधार की उम्मीद है।
दास ने कहा कि मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण बेहद अनिश्चित है और दालों की बढ़ी कीमतें चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कीमतों में नरमी लाने के लिए आयात शुल्क की समीक्षा करने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रमुख मुद्रास्फीति की दर स्थिर रह सकती है और दूसरी छमाही में इसमें कमी आ सकती है। उनके मुताबिक चालू वित्त वर्ष की तीसरी या चौथी तिमाही में मु्द्रास्फीति की दर चार प्रतिशत से नीचे आ सकती है।
इसके अलावा दास ने कहा कि महामारी के बीच आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने से सरकार का राजस्व बहुत अधिक प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा बैंकों द्वारा कॉरपोरेट को दी जाने वाली ऋण राशि को उनकी कुल संपत्ति के 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में बैंक कंपनियों को अधिक कर्ज दे सकेंगे।

जियो प्लेटफॉर्म्स में केकेआर करेगी 11,367 करोड़ रूपये का निवेश

नयी दिल्ली : रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अमेरिकी कंपनी केकेआर को 11,367 करोड़ रूपये में जियो प्लेटफार्म्स की 2.32 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की शुक्रवार को घोषणा की। बीते एक महीने में मुकेश अंबानी की कंपनी द्वारा किया जाने वाला यह पांचवा बड़ा सौदा है। केकेआर ने इस करार में रिलायंस समूह की डिजिटल कारोबार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स को शेयर के हिसाब से कुल 4.91 लाख करोड़ रूपये मूल्य का आंका है। करीब एक महीने पहले फेसबुक के निवेश के साथ, जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश का सिलसिला शुरू हुआ था। अब तक कुल पांच बड़े निवेशकों द्वारा जियो प्लेटफॉर्म्स में कुल 78,562 करोड़ रूपये का निवेश हो चुका है।
फेसबुक के बाद विश्व के अग्रणी निवेशक सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अंटलांटिक और अब केकेआर ने कंपनी में निवेश किया। यह एशिया में केकेआर का सबसे बड़ा निवेश है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, “दुनिया के सबसे सम्मानित वित्तीय निवेशकों में से एक केकेआर का एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्वागत करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है। केकेआर भारतीय डिजिटल इको सिस्टम में बदलाव की हमारी यात्रा का हमसफर बनेगा। यह सभी भारतीयों के लिए लाभप्रद होगा। केकेआर , भारत में एक प्रमुख डिजिटल सोसाइटी के निर्माण के हमारे महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साझा करता है। एक महत्वपूर्ण भागीदार होने का केकेआर का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार है। हम जियो को आगे बढ़ाने के लिए केकेआर के वैश्विक प्लेटफॉर्म, इंडस्ट्री की जानकारियां और परिचालन विशेषज्ञता का लाभ उठाने की उम्मीद करते हैं। ” केकेआर के सह-संस्थापक हेनरी क्राविस ने कहा, ‘‘ देश के डिजिटल इको सिस्टम को बदलने की ऐसी क्षमता कुछ कंपनियों के पास ही होती है जैसा की जियो प्लेटफॉर्म्स के पास है। यह एक सच्चा स्वदेशी प्लेटफॉर्म है जो भारत में डिजिटल क्रांति कर रहा है और इसके पास देश को प्रौद्योगिकी समाधान और सेवाएं देने की बेजोड़ क्षमता है। हम जियो प्लेटफॉर्म्स की प्रभावशाली गति, विश्व स्तरीय इनोवेशन और मजबूत नेतृत्व टीम के कारण निवेश कर रहे हैं। इस निवेश को हम भारत और एशिया प्रशांत में अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों के समर्थन के लिए केकेआर की प्रतिबद्धता के रूप में देखते हैं।’’

भारत में चार करोड़ प्रवासी श्रमिक हैं, अब तक 75 लाख घर लौटे हैं :गृह मंत्रालय

नयी दिल्ली : केंद्र ने गत शनिवार को कहा कि देश भर में करीब चार करोड़ प्रवासी श्रमिक विभिन्न कार्यों में लगे हुए हैं और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से अब तक उनमें से 75 लाख लोग ट्रेनों और बसों से अपने घर लौट चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों से प्रवासी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिये एक मई से 2,600 से अधिक श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पिछली जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक देश में चार करोड़ प्रवासी श्रमिक हैं।’’
देश में 25 मार्च (जब राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन शुरू हुआ) से प्रवासी श्रमिकों की सुविधा के लिये केंद्र सरकार द्वारा उठाये गये कदमों के बारे में विस्तार से बताते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि श्रमिक विशेष ट्रेनों से 35 लाख प्रवासी श्रमिक अपने गंतव्य तक पहुंच गये हैं, जबकि 40 लाख प्रवासियों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिये बसों से यात्रा की।
संयुक्त सचिव ने कहा कि 27 मार्च को गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को यह परामर्श भेजा था कि प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे को संवेदनशीलता से लिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वे लॉकडाउन के दौरान अपने मौजूदा स्थान को छोड़ कर नहीं जाएं।
उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रवासी श्रमिकों को भोजन एवं आश्रय उपलब्ध कराने को भी कहा गया।
उन्होंने कहा कि इसके बाद भी प्रवासी श्रमिकों को लेकर कई बार राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श भेजे गये।

किफायत हुसैन : कोरोना पॉजिटिव शिक्षक ने पेश की मिसाल, आइसोलेशन सेंटर को बनाया क्लासरूम

नयी दिल्ली : लेह लद्दाख में कोरोना से पीड़ित एक शिक्षक किफायत हुसैन ने पृथक वास के दौरान खुद को तो सारे जमाने से अलग कर लिया, लेकिन वह अपने छात्रों से खुद को दूर नहीं रख पाए और ऑनलाइन क्लासेस के जरिए उनसे लगातार जुड़े हुए हैं, ताकि उनकी पढ़ाई में किसी तरह की रूकावट न आने पाए।
कोविड- 19 को लेकर आज दुनियाभर के लोग खौफजदा हैं। लोग इससे बचने के लिए तरह तरह के उपाय कर रहे हैं और इसके शिकार होने पर उन्हें अपनी और अपने परिवार की जान की फिक्र होने लगती है, लेकिन लेह में रहने वाले किफायत हुसैन को कोरोना से पीड़ित होने पर अपने विद्याथिर्यों की पढ़ाई की चिंता सताने लगी, लिहाजा उन्होंने ऑनलाइन कक्षाएं लेना शुरू कर दिया।
क्वारंटीन में रहकर कोरोना से जंग लड़ रहे हुसैन आइसोलेशन सेंटर से ही कक्षा 9वीं व 10वीं के अपने छात्रों को गणित पढ़ा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने बाकायदा लद्दाख प्रशासन की इजाजत ली है। उन्होंने अपने कमरे में एक बड़ा सा सफेद बोर्ड लगाया है और उसके ठीक सामने अपना मोबाइल फोन एक स्टैंड पर लगाया है। उनके मोबाइल का रूख बोर्ड की तरफ है, जिसपर काले पेन की मदद से हुसैन गणित के प्रश्न हल करके बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
हुसैन ने बताया कि वह जूम ऐप पर लगातार ऑनलाइन क्लासेस लेते हैं और यूट्यूब वीडियों की मदद से अपने सभी स्टूडेंट्स से जुड़े हैं। किसी तरह की कोई परेशानी होने पर उनके छात्र फोन पर उन्हें बता देते हैं और हुसैन उसे तत्काल हल कर देते हैं। वह रोजाना दोपहर बाद दो बजे से तीन बजे तक छात्रों को जूम ऐप के जरिए पढ़ाते हैं ।
किफायत कहते हैं, ‘पढ़ाना सिर्फ मेरी नौकरी नहीं, मेरा जुनून है। कोरोना की वजह से मैं उनकी पढ़ाई में कोई रूकावट नहीं आने देना चाहता । अगर मैं ठीक होने के बाद उन्हें पढ़ाना शुरू करता, तो ज्यादा बोझ आ जाता। बीमार होने के बावजूद मुझे लगा कि मुझमें पढ़ाने की ताकत है, तो मुझे कोशिश जरूर करनी चाहिए।’’
कुछ लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद उनके गांव को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया गया था। किफायत हुसैन में किसी तरह के कोई लक्षण नहीं थे लेकिन उन्होंने लामदोन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के अपने छात्रों को किसी प्रकार के खतरे से बचाने के लिए खुद ही अपनी जांच कराने का फैसला किया। 30 अप्रैल को उन्होंने अपनी जांच करायी और रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्हें आइसोलेशन सेंटर में भेज दिया गया। यहीं उनके दिमाग में अपने छात्रों को आनलाइन पढ़ाने का फैसला किया और लद्दाख प्रशासन से इसकी अनुमति ली।
किफायत हुसैन ने पीटीआई भाषा को बताया, ‘‘ मैं अपने प्रयासों में योगदान के लिए प्रशासन, डा . स्टांजिन दावा और त्स्वांग पालजोर, अध्यक्ष, लामदोन प्रबंधक समिति का बहुत आभारी हूं । साथ ही अस्पताल के कर्मचारियों का भी जो मेरी देखभाल कर रहे हैं ।’’ वह बताते हैं कि उनके छात्रों ने भी उनके इस प्रयास को सराहा है और वे इसमें लगातार सहयोग कर रहे हैं ।
किफायत हुसैन कहते हैं, ‘‘ ये मेरे लिए बहुत मायने रखता है। लद्दाख के आयुक्त सचिव रिग्जिन सामफेल ने मेरे समर्पण और मेरे काम की सराहना की जो कि मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। लामदोन के लोगों, खासतौर से प्रिंसीपल सर, प्रबंधन, टीचरों तथा कर्मचारियों और साथ ही छात्रों के माता पिता ने मुझे फोन कर मेरे इस कदम की सराहना की है।’’
इन सभी ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की है। भारतीय क्रिकेट टीम के बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार वीवीएस लक्ष्मण ने किफायत हुसैन के बारे में जानकारी मिलने पर बाकायदा ट्वीट करके उनके जज्बे की तारीफ की। सोशल मीडिया पर सक्रिय बहुत से लोगों ने लक्ष्मण के ट्वीट को रीट्वीट करके हुसैन के इस प्रयास को प्रेरणादायी और अनुकरणीय बताया है।

ईद मुबारक पर देखिए दुनिया की खूबसूरत मस्जिदें

कोरोना वायरस के चलते इस बार ईद की रौनक फीकी हो गयी।  इस बार सोशल डिस्टेंसिंग की मजबूरी में ज्यादातर लोग घरों में ही ईद मना रहे हैं। दुनिया भर में इबादत के लिए तमाम खूबसूरत मस्जिदें बनाई गई हैं. ईद के मौके पर इनका दीदार करना जरूरी है।

नूर अस्थाना मस्जिद (कजाकिस्तान)-
कजाकिस्तान की नूर अस्थाना मस्जिद का निर्माण साल 2008 में हुआ था। इस मस्जिद को बनाने में कांच का काफी इस्तेमाल किया गया है, जो इसे और भी ज्यादा खूबसूरत बनाता है। मस्जिद का रंग सुनहरा है. यह सेंट्रल एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद है।

शेख जैयद ग्रैंड मस्जिद (आबु धाबी)-
शेख जैयद आबू धाबी (यूएई) की सबसे बड़ी मस्जिद है। मस्जिद का गुंबद इसे ज्यादा आकर्षक बनाता है। मस्जिद में कुल 82 गुंबद है। इस मस्जिद को बनाने में 600 मिलियन डॉलर खर्च किए गए थे। साल 2007 में बनी इस मस्जिद को बनने में 11 साल लगे थे।

सुल्तान अहमद मस्जिद (इस्तानबुल)-

इस्तानबुल की इस मस्जिद को ब्लू मस्जिद भी कहा जाता है। इस मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है। मस्जिद को ऑटोमन एंपायर खिलाफत उस्मानिया के दौर में 1609 में बनाया गया था। मस्जिद के गुंबदों में नीले रंग की टाइल्स लगी हुई हैं, इसी वजह से इसे ब्लू मस्जिद कहा जाता है।
बादशाही मस्जिद (लाहौर)-
बादशाही मस्जिद पाकिस्तान के लाहौर में स्थित है। इस मस्जिद को 1673 में मुगल सम्राट औरंगजेब ने बनवाया था। यह मस्जिद मुगल काल के सौंदर्य और भव्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। पाकिस्तान की इस दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद में एक साथ 55000 हजार लोग नमाज अदा कर सकते हैं।
मस्जिद-ए-नबवी (सऊदी अरब)-
मस्जिद-ए-नबवी यह मस्जिद सऊदी अरब के शहर मदीना में है। इस मस्जिद को दुनिया की सबसे खूबसूरत मस्जिदों में गिना जाता है। इस मस्जिद में 10 लाख लोग एक साथ नमाज पढ़ सकते हैं।
(साभार – आजतक)

लॉकडाउन में दसवीं के छात्र ने लिख दी पूरी किताब

कहते हैं कि बच्चों को वातावरण और प्रोत्साहन मिले तो उनकी प्रतिभा और निखर जाती है। कोलकाता के प्रख्यात स्कूल ला मार्टिनियर फॉर ब्वॉयज के वरिष्ठ हिन्दी शिक्षक बलवन्त सिंह और उनके बेटे शंशाक सिंह के सन्दर्भ में यह बात सही उतरती है। शंशाक 10वीं का छात्र है और इसी उम्र में उसने अपनी पहली पुस्तक लिख डाली है तो निश्चित रूप से इसका श्रेय उनके पिता को भी जाता है जो एक अँग्रेजी माध्यम स्कूल में वर्षों से हिन्दी पढ़ाते आ रहे हैं। हिन्दी को लेकर उन्होंने क्लब बनाया है और सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते रहे हैं और स्कूल की क्रिकेट टीम को भी सफलता की ऊँचाइयों तक ले गये हैं। अंग्रेजी स्कूलों में हिन्दी की अलख जगाय़े रखना कितना चुनौतीपूर्ण काम है, ये हम सब जानते हैं।
तो जितने बहुमुखी प्रतिभा के धनी बलवन्त खुद हैं, उतने ही प्रतिभाशाली उनके पुत्र शशांक हैं जो इसी स्कूल में दसवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। शशांक ने इसी उम्र में डाइंग लैम्प नामक पुस्तक लिख डाली है औऱ पुस्तक अमेजन के किंडल पर उपलब्ध भी है। शशांक की कहानी आइए, हम उनसे ही सुनते हैं।
नाम: शशांक सिंह
विद्यालय का नाम: ला मार्टिनियर फ़ॉर बॉयज, कोलकाता
कक्षा : 10
पुस्तक का नाम: दी डाईंग लैंप
रुचियाँ: मुझे लेखन, विशेषतः निबंध-लेखन, से अत्यंत प्रेम हैं। मैं बचपन से ही लघु कहानियाँ लिखता आ रहा हूँ एवं अंग्रेज़ी भाषा के प्रसिद्ध लेखक व साहित्यकारों की कहानियां एवं उपन्यास भी पढ़ता आ रहा हूँ। मुझे रस्किन बांड, रॉल्ड डाल, विलियम शेक्सपियर, चार्ल्स डिकेन्स- इन अंग्रेज़ी साहित्यकारों की रचनाएं बहुत अच्छी लगती है; हिंदी साहित्य में मुझे प्रेमचंद जी की कहानियाँ एवं दिनकर जी व जयशंकर प्रसाद की कविताएं बहुत भाती हैं।
मेरी रुचियों में शामिल हैं भाषाओं एवं उनके लिपियों के बारे में जानना। यद्यपि मेरी मातृभाषा हिंदी है, मुझे अन्य भाषाओं में भी उतनी ही रुचि हैं। मुझे अंग्रेजी एवं हिंदी के अलावा जर्मन एवं जापानी भाषा का ज्ञान है एवं मैं फारसी, तमिल, तेलगू व थाई लिपियाँ पढ़ सकता हूँ।
मुझे भाषाओं का तुलनात्मक अध्ययन बहुत अच्छा लगता है- etymology(शब्दों की उत्पत्ति कैसे हुई) इसमें भी विशेष रुचि है।
महाकवि तुलसीदास से मैं विशिष्ट रूप से प्रभावित हूँ; अवधी मुझे प्रिय है―इसलिए तुलसीकृत रामचरितमानस मुझे प्रायः कंठस्थ है ।
शंशाक ने छन्द लिखें हैं –
मैं-तैं मैं करता फिरा, मैं ही चारिहु ओर।
मैं की आवे काज में, टूटत जीवन डोर।
साथ ही साथ मुझे एकांत में ओल्टरनेट हिस्ट्री लिखने का भी शौक है।
मुझे गणित व भौतिकशास्त्र अत्यंत प्रिय हैं; मेरी अभिलाषा है कि मै बड़ा होकर भौतिकशास्त्री(प्रोफेसर/ शोधकर्ता) बनूँ। मुझे इसरो( ISRO) में जाने की अभिलाषा भी है।
किताब में योगदान: प्रस्तुत किताब, जो मेरी प्रथम रचना है, में अहम योगदान मेरे माता-पिता, दादा-दादी, नाना एवं अन्य परिजनों का है; साथ ही साथ मेरे समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का भी विशेष योगदान है। मैं इन सभी का आभारी हूँ; इनके बिना मेरी यह रचना अपूर्ण है।
किताब के बारे में: प्रस्तुत पुस्तक अंग्रेज़ी भाषा में रचित है। इसे मैने लॉकडाउन के दौरान लिखा है। यह अमेज़न किंडल पर उपलब्ध है।
प्रस्तुत कृति का मूल भाव है मानवता के नैतिक मूल्यों के पतन को उजागर करना। यद्यपि मनुष्य सभ्यता के रूप में प्रगतिशील भले ही हो, सांस्कृतिक एवं नैतिक रूप से वह अवनति की ओर बढ़ता जा रहा है। अपने वासनाओं एवं आकांक्षाओं का शमन व नहीं कर पा रहा है। चहुँ ओर धार्मिक कट्टरता एवं संग्राम का रक्त से सनी तलवार लहरा रही है; कुपोषण एवं गरीबी जैसी कठिनाइयों के प्रति जो अमानवीय उदासीनता है एवं युद्ध कितना जघन्य होता है―इन्हें ही ये पुस्तक दर्शाती है। इसके तीन भाग हैं:WAR(युद्ध), WANT(चाह) एवं ALL ROADS LEAD TO ROME OR TO DEATH
मैंने यह भी दर्शाया है कि कैसे मानवों ने पृथ्वी का हनन किया है एवं बाकी जीव-जंतुओं के साथ जघन्य व्यवहार किया है। वर्तमान समय में मैं अपनी दूसरी पुस्तक लिखने में व्यस्त हूँ, जो कि एक उपन्यास है।

आईसीएसई और आईएससी की शेष परीक्षाएँ जुलाई से

कोलकाता : कोविड -19 के कारण परीक्षाओं पर असर पड़ा था और कई बोर्ड परीक्षाएँ स्थगित कर देनी पड़ी थी। सीआईएससीई ने भी स्थगित परीक्षाओं के संचालन हेतु नयी तारीखों की घोषणा कर दी है। आईसीएसई (10वीं) की शेष परीक्षाएँ 2 जुलाई से आरम्भ होंगी और 12 जुलाई तक चलेंगी। वहीं आईएससी (12वीं) की स्थगित की गयी परीक्षाएँ 1 जुलाई से आरम्भ होंगी और 14 जुलाई तक चलेंगी। काउंसिल ने स्कूलौं को यह जिम्मेदारी दी है कि वे यह सूचना विद्यार्थियों तथा अभिभावकों तक पहुँचाएँ। परीक्षा केन्द्र पर समय से पहले पहुँचने, सामाजिक दूरी बनाये रखने, मास्क पहनने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त काउंसिल के सामान्य निर्देश पहले की तरह ही यथावत रहेंगे। यह जानकारी सीआईएससीई के चीफ एक्जिक्यूटिल एवं सचिव जेरी आराथन द्वारा दी गयी।

निर्देश तथा परीक्षा की तिथि इस लिंक पर जाकर देखी जा सकती है –

https://cisceorg-my.sharepoint.com/personal/sunil_cisce_org/_layouts/15/onedrive.aspx?id=%2Fpersonal%2Fsunil%5Fcisce%5Forg%2FDocuments%2FPRESS%20RELEASE%2Epdf&parent=%2Fpersonal%2Fsunil%5Fcisce%5Forg%2FDocuments&originalPath=aHR0cHM6Ly9jaXNjZW9yZy1teS5zaGFyZXBvaW50LmNvbS86YjovZy9wZXJzb25hbC9zdW5pbF9jaXNjZV9vcmcvRVdhQkhCQl9YMnhOaTFHRlZHOXY1TGNCdnZmVkF0b1JuVTRMY1VCdUZwdjRJZz9ydGltZT1WM1JTaVo4QTJFZw

महान हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर का निधन

चंडीगढ : हॉकी के महानतम खिलाड़ियों में से एक तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बलबीर सिंह सीनियर का सोमवार को निधन हो गया । वह पिछले दो सप्ताह से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे । 96 वर्षीय बलबीर के परिवार में बेटी सुशबीर और तीन बेटे कंवलबीर, करणबीर और गुरबीर हैं । उनके बेटे कनाडा में हैं और वह यहां अपनी बेटी सुशबीर और नाती कबीर सिंह भोमिया के साथ रहते थे ।

मोहाली के फोर्टिस अस्पताल के निदेशक अभिजीत सिंह ने पीटीआई भाषा को बताया ,‘‘ उनका सुबह 6 . 30 पर निधन हुआ ।’’ बाद में उनके नाती कबीर ने एक संदेश में कहा ,‘‘ नानाजी का सुबह निधन हो गया ।’’ बलबीर सीनियर को आठ मई को वहां भर्ती कराया गया था । वह 18 मई से अर्ध चेतन अवस्था में थे और उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया था । उन्हें फेफड़ों में निमोनिया और तेज बुखार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था ।

देश के महानतम एथलीटों में से एक बलबीर सीनियर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा चुने गए आधुनिक ओलंपिक इतिहास के 16 महानतम ओलंपियनों में शामिल थे ।
हेलसिंकी ओलंपिक (1952) फाइनल में नीदरलैंड के खिलाफ पांच गोल का उनका रिकार्ड आज भी कायम है । उन्हें 1957 में पद्मश्री से नवाजा गया था और यह सम्मान पाने वाले वह पहले खिलाड़ी थे ।

बलबीर सीनियर ने लंदन (1948), हेलसिंकी (1952) और मेलबर्न (1956) ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते थे । वह 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के मैनेजर भी थे । पिछले दो साल में चौथी बार उन्हें अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया । पिछले साल जनवरी में वह फेफड़ों में निमोनिया के कारण तीन महीने अस्पताल में रहे थे। कौशल के मामले में मेजर ध्यानचंद के समकक्ष कहे जाने वाले बलबीर सीनियर आजाद भारत के सबसे बड़े खिलाड़ियों में से थे । वह और ध्यानचंद भले ही कभी साथ नहीं खेले लेकिन भारतीय हाकी के ऐसे अनमोल नगीने थे जिन्होंने पूरी पीढी को प्रेरित किया । पंजाब के हरिपुर खालसा गांव में 1924 में जन्मे बलबीर को भारत रत्न देने की मांग लंबे अर्से से की जा रही है । पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने तो इसके लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है ।