नयी दिल्ली : एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) ने 1979 के बाद पहली बार 2022 महिला एशियाई कप की मेजबानी के अधिकार भारत को दिये हैं।
यह फैसला एएफसी महिला फुटबॉल समिति की बैठक में लिया गया। फरवरी में एएफसी महिला फुटबॉल समिति ने भारत को मेजबान बनाने की सिफारिश की थी।
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को लिखे पत्र में एएफसी के महासचिव दाटो विंडसर जॉन ने लिखा, ‘‘समिति ने एएफसी महिला एशिया कप 2022 फाइनल्स की मेजबानी के अधिकार अखिल भारतीय फुटबॉल को सौंपे हैं। ’’एआईएफएफ अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा, ‘‘मुझे एशियाई फुटबॉल परिसंघ का शुक्रिया करना होगा जिसने हमें 2022 में एएफसी महिला एशिया कप की मेजबानी के लिये उचित समझा। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘टूर्नामेंट महत्वकांक्षी महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेगा और जहां तक देश में महिला फुटबॉल का संबंध है तो यह सामाजिक क्रांति लायेगा। ’’टूर्नामेंट में 12 टीमें भाग लेंगी जिन्हें पिछले चरण की आठ टीमों से बढ़ा दिया गया है।
भारत बतौर मेजबान सीधे ही क्वालीफाई कर लेगा। टूर्नामेंट 2023 फीफा महिला विश्व कप के लिये अंतिम क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट के तौर पर भी काम करेगा। एआईएफएफ के लिये यह मेजबानी मनोबल बढ़ाने वाली है क्योंकि उसे फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी भी सौंपी गयी थी जिसका आयोजन अगले साल होगा।
भारत ने 2016 में एएफसी अंडर-16 चैम्पियनशिप और 2017 में फीफा अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी की थी।
एआईएफएफ के महासचिव कुशल दास ने कहा, ‘‘यह टूर्नामेंट भारत में महिला फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभायेगा। महिला एशिया कप 2022 से पहले फीफा अंडर-17 महिला विश्व 2020 की मेजबानी करेंगे जिससे हमें लय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
एएफसी महिला एशिया कप 2022 की मेजबानी करेगा भारत
कन्नड़ अभिनेता चिरंजीवी सर्जा का 39 वर्ष की आयु में निधन
बेंगलुरु : कन्नड़ फिल्म अभिनेता चिरंजीवी सर्जा का रविवार को शहर के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे केवल 39 वर्ष के थे। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि चिरंजीवी को शनिवार को सांस लेने में तकलीफ हुई और उन्हें रविवार दोपहर एक निजी अस्पताल में ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका।
प्रसिद्ध कन्नड़ अभिनेता शक्ति प्रसाद के पोते और बहुभाषी फिल्म अभिनेता अर्जुन सर्जा के भतीजे चिरंजीवी सर्जा ने 22 फिल्मों में अभिनय किया था। चिरंजीवी ने फिल्म वायुपुत्र से अपनी फिल्मी पारी की शुरुआत की थी।
उनकी आखिरी फिल्म ‘शिवार्जुन’ थी जिसमें उन्होंने अमृता अयंगर और अक्षता श्रीनिवास के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्होंने 2 साल पहले अभिनेत्री मेघना राज से शादी की थी।
गर्भावस्था में नक्सली इलाके में गश्त करने वाली सुनैना ने दिया बेटी को जन्म
दंतेवाड़ा : साढ़े छह महीने की गर्भावस्था और हाथ में एके-47 लेकर नक्सलियों से भिड़ने जंगल में निकलने वाली महिला कमांडो सुनैना पटेल ने बेटी को जन्म दिया है। सुनैना अपनी तरह बेटी को भी मजबूत बनाना चाहती हैं। कहती हैं, ‘मेरा बेटा है, चाहती थी इस बार बेटी हो। दंतेश्वरी फाइटर्स में शामिल होने के बाद मैं गर्भवती हुई, मां दंतेश्वरी की कृपा से मुझे बेटी हुई है।’ एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव सहित अन्य अफसरों ने भी सुनैना को बधाई दी है। भास्कर ने 8 मार्च को महिला दिवस पर दंतेश्वरी कमांडो सुनैना की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। करीब डेढ़ महीने पहले सुनैना ने बच्ची को जन्म दिया था। फिलहाल वे अवकाश पर हैं।
सुनैना ने कहा, मेरा बेटा है, चाहती थी इस बार बेटी हो। गर्भवती होने के बाद भी गश्त पर जाना मेरा अपना निर्णय था। लोगों ने सवाल खड़े किए। मुझे इस बात का फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहते हैं। मैं बेटी को भी अपनी तरह बनाना चाहती हूं। गर्भावस्था के बाद भी मैंने गश्त पर जाना नहीं छोड़ा, क्योंकि मैं टीम लीडर थी। साथ ही मेरे अंदर काम करने की इच्छाशक्ति भी थी।’ वहीं सुनैना की साथी कमांडोज ने कहा कि हम बिटिया को दंतेश्वरी फाइटर ही कहेंगे। उसका नाम तो दो महीने पहले ही रख लिया गया था।
गर्भवती होने के बावजूद सुनैना ने नक्सलियों से लड़ने का हौसला नहीं छोड़ा। भारी भरकम बोझ कंधों पर लिए नदी-नाले, जंगल, पहाड़ों को पार कर पैदल कई किमी चलकर नक्सल ऑपरेशन में शामिल होती रहीं। वे कहती हैं, ‘नक्सल ऑपरेशन टीम (डीआरजी टीम) गठित होने के करीब महीनेभर बाद मैं गर्भवती हो गई थी। मैंने इस बात की जानकारी अफसरों को इसलिए नहीं दी, क्योंकि मैं ऑपरेशन पर जाना चाहती थी। गर्भवती होने की जानकारी मिलने पर मुझे रोक दिया जाता।’ सुनैना ने अपने गर्भवती होने की जानकारी अफसरों को साढ़े 6 महीने तक नहीं दी। अफसरों को जब इसका पता चला तो उसे ऑपरेशन पर भेजना बंद कर दिया। इसके बाद ऑफिस कार्य की जिम्मेदारी दे दी गयी। सुनैना ने अपने गर्भवती होने की जानकारी अफसरो को साढ़े 6 महीने तक नहीं दी।
साढ़े 4 माह की गर्भावस्था में 45 दिन जंगल में रही
पोटाली में कैंप खोलना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। धुर नक्सली गांव में जब कैंप खुला तो यहां महिला डीआरजी को रखा गया था। यहां 45 दिनों तक सुनैना भी रहीं। उस समय साढ़े चार महीने की गर्भवती थी। पुलिस की बनाई शॉर्ट फिल्म ‘नयी सुबह का सूरज’ में सुनैना ने लीड रोल किया है। पोटाली में कैंप खोलना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले गांव में जब कैंप खुला तो यहां महिला डीआरजी की तैनाती हुई।
मई 2019 में किया गया था दंतेश्वरी फाइटर का गठन
दंतेवाड़ा एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने मई 2019 में दंतेवाड़ा में महिला डीआरजी की टीम बनाई। इसमें महिला पुलिसकर्मी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शामिल किया गया। इस टीम का ही नाम दंतेश्वरी देवी के नाम पर दंतेश्वरी फाइटर्स रखा गया। दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ का पहला जिला है, जहां डीआरजी में महिला कमांडो को शामिल किया गया है। टीम में अभी 60 महिला कमांडोज हैं, जो नक्सल ऑपरेशन पर जाती हैं। टीम लीडर डीएसपी शिल्पा साहू हैं।
कैफे कॉफी डे में निवेश कर सकते हैं सिंगापुर के दो प्राइवेट इक्विटी फंड
कम्पनी पर करीब 3 हजार करोड़ रुपये का कर्ज
नयी दिल्ली : भारत की सबसे बड़ी कॉफी रिटेल चेन कंपनी कैफे कॉफी डे की सब्सिडियरी कंपनी कॉफी डे ग्लोबल लिमिटेड (सीडीजीएल) में सिंगापुर के दो प्राइवेट इक्विटी (पीई) फंड निवेश कर सकते हैं। इस निवेश को लेकर फंड हाउसों और सीडीजीएल के बीच बातचीत चल रही है। कंपनी अपना कर्ज चुकाने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही है। इसमें हिस्सेदारी बेचना भी शामिल है।
सिंगापुर की प्राइवेट इक्विटी फर्म एसएसजी कैपिटल मैनेजमेंट और अफर्म कैपिटल (पूर्व में स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीई) की सीडीजीएल के प्रबंधन से बातचीत चल रही है। सीडीजीएल लिस्टेड कंपनी कॉफी डे एंटरप्राइजेज की सब्सिडियरी है। सीडीजीएल पूरे देश में कैफे कॉफी डे के 1470 स्टोर्स, 59,500 चाय-कॉफी वेंडिंग मशीन और अन्य रिटेल कारोबार का प्रबंधन करती है। सीडीजीएल में अफर्म, केकेआर और एनएसआर की हिस्सेदारी है। इस संभावित निवेश को लेकर कॉफी डे ग्रुप के उच्च प्रबंधन और एसएसजी-अफर्म के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है। बातचीत में कॉफी डे के संस्थापक स्वर्गीय वीजी सिद्धार्थ की पत्नी मालविका हेगड़े भी शामिल रही हैं।
इक्विटी इंफ्यूजन के जरिए हो सकता है निवेश
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक यह निवेश स्ट्रक्चर्ड क्रेडिट या फिर शुद्ध इक्विटी इंफ्यूजन के जरिए हो सकता है। हालांकि, अभी इस पर फैसला होना बाकी है। इस मामले से वाकिफ सूत्रों के मुताबिक, दोनों फंड हाउस वर्किंग कैपिटल इन्फ्यूजन, ऑपरेशन को फिर से पूरी क्षमता के साथ शुरू करने, कॉफी के रिटेल कारोबार की री-ब्रांडिंग जैसे प्रस्ताव रख सकते हैं। एसएलजी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह निवेश केवल तभी होगा, जब मौजूदा प्राइवेट इक्विटी फंड्स भी इसमें हिस्सा लेंगे। सूत्र के मुताबिक, तीन पीई निवेशक बातचीत कर रहे हैं और कोई भी ताजा इंफ्यूजन चारों के बीच सहमति होने के बाद ही होगा।
कॉफी-डे पर करीब 3 हजार करोड़ रुपये का कर्ज
सीडीजीएल लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबी हुई है। 31 मार्च 2020 तक कंपनी पर करीब 3 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। कर्ज के दबाव में पिछले साल जुलाई में सीडीजीएल के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ ने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले सिद्धार्थ ने कंपनी के कर्मचारियों और निदेशक मंडल को पत्र लिखकर कहा था कि मैं एक उद्यमी के तौर पर विफल रहा। मैं उन सभी लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने के लिए माफी मांगना चाहता हूं, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया।
अनुवादक बनकर करिए कमाई
अगर आज हम ऐसी किताबों को पढ़ सकते हैं, जो मूलतः उन भाषाओं में लिखी गई होती हैं जिन्हें हम नहीं जानते तो इसका श्रेय अनुवादक को जाता है। घर बैठे हैरी पॉटर सीरीज जैसी कई फिल्में हिन्दी, तमिल, जर्मन या जापानी में देख पाना भी यकीनन अनुवादक की वजह से ही संभव है।
हाउस आंत्रप्रेन्योर और सुम्मा लिंगुआ टेक्नोलॉजिस की एमडी मधु सुंदरमूर्ति के टिप्स
1. अनुवादक बहुभाषी विशेषज्ञ होते हैं जो एक भाषा के कंटेंट को दूसरी भाषा में बदलने का जादू जानते हैं। अनुवाद का छिपा हुआ जादुई पहलू यह है कि यह घरेलू महिलाओं के लिए भी वित्तीय आत्मनिर्भरता प्रदान करता है।
2. दुनियाभर के 70 फीसदी अनुवादक फ्रीलांसर होते हैं। इनमें से 60 फीसदी से ज्यादा फ्रीलांसर महिलाएं हैं। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (बीएलएस) के मुताबिक वर्ष 2026 तक इंटरप्रेटर और ट्रांसलेटर का जॉब 18 फीसदी की तेज दर से बढ़ेगा।
3. अगर आप एक से अधिक भाषाओं (भारतीय या विदेशी) में धाराप्रवाह हैं और आपके पास किसी भाषा की डिग्री है तो आपने पहले ही फ्रीलांसर बनने की ओर एक कदम बढ़ा लिया है। आप छोटे प्रोजेक्ट पर काम कर अपनी कुशलता को परख भी सकती हैं।
4. अगर आप किसी विषय विशेष (इंजीनियरिंग, आर्ट आदि) में विशेषज्ञता रखती हैं और दो या ज्यादा भाषाओं में धाराप्रवाह हैं तो एडिटिंग और प्रूफ-रीडिंग सेवाएं देने वाली सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट भी बन सकती हैं।
5. मोबाइल टेक्नोलॉजी और इंटरनेट बूम ने घरेलू महिलाओं के लिए प्रोफेशनल्स के इस समूह में शामिल होने को आसान बना दिया है। आप सिर्फ अपने फोन से अनुवाद का काम शुरू कर सकती हैं।
6. लैपटॉप और इंटरनेट हो तो आप अपने इस पैशन को प्रोफेशन भी बना सकती हैं। आमतौर पर घर से ट्रांसलेशन का काम करने वाले रोजाना 5-6 घंटे काम करते हैं। इसकी शुरुआत आप प्रतिदिन 1000 शब्द से कर सकते हैं।
7. अगर आप अनुवादक बनना चाहती हैं तो खुद को प्रोज, ट्रांसलेटर्स कैफे और अपवर्क जैसी वेबसाइट पर जरूर रजिस्टर कराएं। फेसबुक, लिंक्डइन और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म से काम के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
8. ट्रांसलेशन के जरिए शुरुआत में 5 से 10 हजार रु महीने कमाए जा सकते हैं। अनुभवी अनुवादक तो एक दिन में कुछ हजार रुपए और कुछ घंटे में कुछ सौ रुपए कमा लेते हैं।
9. अनुवादक बनने के लिए कैट टूल, सबटाइटिल सॉफ्टवेयर में निवेश अच्छा फैसला हो सकता है। आप अन्य भाषायी सेवाएं मसलन इंटरप्रेटेशन सर्विस, स्पीच डेटा कलेक्शन जैसे काम भी अपना सकती हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)
ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने तैयार किया फफूंदों को रोकने वाला पॉलिमर स्प्रे
आमतौर पर पेस्टिसाइट का प्रयोग फसल में लगने वाली फफूंद रोकने में किया जाता है। इसमें कई तरह के केमिकल होते हैं जो पौधों को जहरीला भी बनाते हैं। इसके विकल्प के तौर पर ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने ऐसा पॉलिमर स्प्रे तैयार किया है जो फसल को बिना नुकसान पहुंचाए हानिकारक फफूंद को कंट्रोल करेगा। इस पॉलिमर में एक्रेलिक प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है जो फफूंद को ब्लॉक करता है और पौधों की सतह पर टिकने से रोकता है।
ऐसे काम करेगा पॉलिमर
शोधकर्ताओं के मुताबिक, पॉलिमर को स्प्रे के रूप में पौधों पर डाला जाएगा, यह पौधों पर पहुंचते ही एक लेयर बनाएगा जिससे फफूंद पौधों को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी और न ही उसकी सतह पर टिक पाएगी। यह पॉलिमर फफूंद को खत्म नहीं करता है सिर्फ पौधों को इससे बचाता है।
फफूंद को कंट्रोल करना जरूरी
रिसर्च करने वाली नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता प्रोफेसर सिमॉन एवरी के मुताबिक, इस समय फफूंद को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। यह आर्थिक तौर पर भी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाती है। पेस्टिसाइट के इस्तेमाल से तैयार फसल इंसानों को शारीरिकतौर पर नुकसान पहुंचा रही हैं।
बिना जहरीला बनाए फसल को बचाने की तैयारी
प्रोफेसर सिमॉन एवरी का कहना है कि हमने एंटी-अटैचमेंट तकनीक विकसित की है जो इस समय की जरूरत है। आमतौर पर पेस्टिसाइड्स में मौजूद रसायन का असर फसल पर दिखता है। रसायन के कारण फसलों में जहरील तत्व आ जाते हैं। इसके अलावा ये पेस्टिसाइड्स काफी महंगे होते हैं जो फसल की कीमत और भी बढ़ाते हैं।
छत्तीसगढ़ के इस गाँव में महिलाएँ चला रही हैं मॉल, लाखों का हो रहा है कारोबार!
क्या आपने कभी ऐसे शॉपिंग मॉल के बारे में सुना है, जो गाँव में हो और जहाँ सारा काम महिलाएं करती हैं? आईए, आज हम आपको छत्तीसगढ़ के एक ऐसे ही मॉल के बारे में बताते हैं जो सिर्फ महिलाओं द्वारा संचालित है और जहाँ आपको जरूरत का सारा सामान मिल जाएगा।
यह अनूठा मॉल है छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ज़िले के ग्रामीण इलाके में, जिसका नाम है ‘सूरजपुर ट्राइबल मार्ट’। ‘एक दुकान-सब्बो सामान’ के उद्देश्य से बनाए गए इस मार्ट में आपको एक छत के नीचे जरूरत और घरेलू उपयोग की तमाम वस्तुएं मिल जाएंगी।
कैसे काम करता है ट्राइबल मार्ट ?
‘ट्राइबल मार्ट’ द्वारा वाजिब मूल्य में आम नागरिकों को विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता सामग्री उपलब्ध करायी जा रही हैं। साथ ही सरकारी स्कूलों को भी सामान उपलब्ध करवाया जा रहा है। यहाँ अनाज, घरेलू उपयोग के सामान आदि सब कुछ मिलता है। आप ऐसा समझ लीजिए कि ‘ट्राइबल मार्ट’ किसी ग्रोसरी स्टोर का अपग्रडेड वर्जन है। इस मार्ट में काम करने के लिए महिला समूह के सदस्यों को शुरूआत में प्रशिक्षण दिया जाता है।
दुकान एक-फायदे अनेक
सूरजपुर ‘ट्राइबल मार्ट’ शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को सहूलियत के साथ फायदा भी हुआ है। इस पहल के बाद अब हॉस्टल और आश्रम में गुणवत्तायुक्त सामान पहुंच रहा है। इस मार्ट की वजह से आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार का साधन मिल रहा है। इसकी वजह से 1400 परिवारों में अतिरिक्त आय का साधन बन गया है, जिसका सकारात्मक परिणाम दिख रहा है।
इस मार्ट में 108 से ज़्यादा स्वयं सहायता समूह जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने सामानों की सप्लाई के लिए ग्राम संगठन को ई-रिक्शा मुहैया कराया है। ई-रिक्शे के जरिए छात्रावास/आश्रमों में राशन और दूसरे सामानों की आपूर्ति की जा रही है। महज 3 महीने में ही ‘ट्राइबल मार्ट’ को 1 करोड़ 34 लाख का आर्डर प्राप्त हुआ है और इन सभी आर्डर में से 95 प्रतिशत सामान को ग्राहक तक पहुंचाया भी जा चुका है।
असंभव कुछ भी नहीं -जरूरत सिर्फ इच्छा शक्ति की
इस मार्ट से जुड़ी कुछ महिलाओं से द बेटर इंडिया ने बात की है। आदर्श महिला ग्राम संगठन की सविता रजवाड़े कहती हैं, “ट्राइबल मार्ट में काम करने से पैसे कमाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर होने के नए-नए गुर सीखने को मिल रहे हैं। अक्सर हमारे आसपास के लोग कहते थे कि तुम्हारा काम चूल्हा सँभालने का है, लेकिन आज जब एक ज़िम्मेदारी को अच्छे से निभा रही हूँ तो ऐसा लगता है कि अगर कुछ ठान लिया जाए तो सब कुछ संभव है।”
गुणवत्ता का रखा गया है पूरा ख्याल
ट्राइबल मार्ट में खाद्य पदार्थों के लिए अलग मानक तय किये गये हैं। इस मार्ट में ग्राहकों के लिए रसायन मुक्त अनाज रखा जाता है, जिसे सीधा किसान के खेत से लाया जाता है। ग्राहकों के लिए ताजी हरी सब्जी रहती है। यहां इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि किसानों के उत्पाद को अहमियत मिले। सूरजपुर के कलेक्टर दीपक सोनी ने इस मार्ट के बारे में बताया कि इसकी वजह से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा, “ विकास की बहुत अलग-अलग परिभाषा होती है, लेकिन कोई योजना एक साथ कितनी समस्याओं का समाधान निकालती है यह देखना जरूरी है। ट्राइबल मार्ट के माध्यम से 6000 बच्चों को गुणवत्तायुक्त राशन, 1500 परिवार को रोजगार से लाभ, 108 महिला समूह को अतिरिक्त आय और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता, यह समावेशी विकास का सबसे अच्छा मॉडल है। इतना ही नहीं अब तो यह छत्तीसगढ़ के हर ज़िला में खुलने जा रहा है।”इस योजना को सूरजपुर में खूब पसंद किया जा रहा है। माना जा रहा है कि जब राज्य के हर जिला में इस तरह का मार्ट खुल जाएगा तो ग्रामीण इलाकों में लोगों को काफी लाभ मिलेगा।
(साभार – द बेटर इंडिया)
सेवानिवृत्त फौजी अपने आविष्कारों से निकाल रहा है किसानों की मुश्किलों का समाधान
रिटायरमेंट के बाद हर सरकारी कर्मचारी जहां आराम भरी जिंदगी जीने लगता है वहीं हिमाचल के मंडी जिले के छात्र गांव के एक रिटायर्ड फौजी, परमाराम कृषि क्षेत्र में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती करने वाले 67 वर्षीय परमाराम किसानों के लिए औजार बनाते हैं। किसानों के लिए कृषि उपकरण बनाने की वजह से भारत सरकार की ओर से उन्हें कृषि वैज्ञानिक की उपाधि से भी नवाजा जा चुका है।
परमाराम ने केवल दसवीं तक की पढ़ाई की है। वह इन दिनों 7 बीघा भूमि में बिना रसायनों के प्रयोग वाली प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। किसानों को खेती में कम मेहनत करनी पड़े इसके लिए परमाराम ने एक दर्जन से अधिक कृषि यंत्रों की खोज की है।
परमाराम ने द बेटर इंडिया को बताया, “फौज से रिटायरमेंट के बाद मैंने सक्रिय रूप से खेती शुरू की। हालांकि खेती-बाड़ी में मेरे परिवारवालों की रूचि नहीं थी, इसलिए वे मदद भी नहीं करते थे। मुझे अकेले ही खेती-बाड़ी का काम करना पड़ता था। खेती में मेहनत कम लगे इसके लिए मैंने नए-नए कृषि यंत्रों की खोज शुरू की। कृषि से संबंधित यंत्र बनाने में कबाड़ के सामान का अधिक प्रयोग करता हूँ। ”
कई औजारों का किया है अविष्कार
परमाराम बताते हैं कि उनके अधिकतर यंत्र मल्टी फंक्शनल हैं और दैनिक कृषि कार्य में प्रयोग किए जाते हैं। स्कूटर हल, साइकिल हल, खड्डे बनाने वाला यंत्र, मक्के के दानों को अलग करने वाला यंत्र, इसके अलावा परमाराम ने फोल्डिंग हल भी तैयार किया है। जिसे फोल्ड कर कहीं भी बैग में डालकर खेतों में ले जाया जा सकता है। इसके अलावा एक लकड़ी काटने की कुल्हाड़ी और मिट्टी खोदने के लिए भी उन्होंने खास तरह का औजार बनाया है।
साइकिल हल दिखाते परमाराम
परमाराम बताते हैं कि खेती में नए-नए प्रयोग करने से कई बार उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसलिए परिवारवालों की नाराजगी से बचने के लिए वे उन्हें हर साल प्रत्येक बीघा 10 हजार रूपये के हिसाब से खेत का किराया देते हैं।
दशकों पुराने परम्परागत बीजों का बनाया है सीड बैंक
परमाराम बताते हैं कि उनके पास कई दशक पुराने ऐसे बीज हैं जो आजकल बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने पुराने और दुर्लभ बीजों का सीड बैंक तैयार किया है। उनके सीड बैंक में पुराने अनाज कोदा, सौंक, पुरानी मक्की, धान, गेहूं, जौ, राजमाश और कई अन्य बीज हैं। वह इन बीजों को मल्टीप्लाई भी करते हैं और इसके बाद इन्हें अन्य किसानों को भी देते हैं। वह कहते हैं, “पुराने बीजों में बीमारियों से लड़ने और विपरित मौसम में भी टीके रहने की बहुत अच्छी क्षमता होती है, इसलिए इन बीजों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।”परमाराम बताते हैं, “बहुत से वैज्ञानिक कहते हैं कि मशरूम की वेस्ट कंपोस्ट में कुछ नहीं उग सकता और इसे फेंक देना चाहिए, लेकिन मैंने इसी वेस्ट कंपोस्ट में सब्जी उगाई है। वेस्ट कंपोस्ट को पॉली बैग में छत में रखा है और इसमें मटर, मूली, गोभी, भींडी और अन्य सब्जी उगाई जा रही है।”
फसलों को जंगली जानवरों से बचाने का अनूठा प्रयोग
परमाराम ने अपनी फसलों को जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के अनूठा प्रयोग किया है। परमाराम बताते हैं कि वह फसलों के बाहरी क्षेत्र में देसी भिंडी लगाते हैं जिसके पत्तों में काफी मात्रा में कांटे होते हैं। कांटों की वजह से जंगली जानवर उनकी फसलों में नहीं आ पाते हैं। इससे एक तो उन्हें भिंडी से आय हो रही है वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी फसलों की भी रक्षा हो रही है। परमाराम को अपने आविष्कारों के लिए साल 2009 में गुजरात सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया था। इसके अलावा उनके अनगिनत पुरस्कारों की फेहरिस्त में बाबू जगजीवन राम पुरस्कार भी शामिल है। अपने अनुभवों के आधार पर परमाराम किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ने का आग्रह करते हैं। उनका मानना है कि यह एक ऐसा विकल्प है जिससे खेती में खर्च कम होगी, साथ ही स्वास्थ्य पर भी विपरित असर नहीं पड़ेगा।
(साभार – द बेटर इंडिया)
प्रभावशाली चेहरों से करवाएँ मार्केटिंग

रास्ते आसान हो जाते हैं. जब कोई राह बताने वाला हो…और यह तभी होगा जब कोई ऐसा मंच अथवा माध्यम हो…जब परामर्श सही जगह पर और सही समय पर पहुँचे। शुभजिता का प्रयास हमेशा से ही ऐसी सकारात्मकता को आगे ले जाना रहा है तो हमने की है इस स्तम्भ की शुरुआत विशेषज्ञ परामर्श..। इसके तहत अलग – अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श आपके लिए लाने का प्रयास रहेगा। शुभ सृजन सम्पर्क में पंजीकरण करवाने वाले विशेषज्ञों को आप तक पहुँचाया जायेगा और हमारा प्रयास इससे भी आगे होगा। व्यवसाय के प्रसार के लिए एक ठोस रणनीति जरूरी है औऱ जरूरी है सही तरीके से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से व्यवसाय का प्रचार। यह हर तरीके के पेशेवर क्षेत्र में कारगर है, किसी भी स्टार्टअप, व्यवसाय या संस्थान के सिए जरूरी है। तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया बता रही हैं ऐसे ही अवसर के बारे में।अगर आपके पास कोई प्रश्न हों, अपने प्रश्न आप हमारे सोशल मीडिया पेज पर भी भेज सकते हैं या शुभजिता को टैग करके अपनी बात कह सकते हैं –
अगर आप अपने व्यापार के लिए प्रभावशाली चेहरों द्वारा मार्केटिंग का फायदा नहीं उठा रहे हैं, आप अपने ब्रांड के प्रति जागरूकता और लोगों से जुड़ने का एक बड़ा मौका गंवा रहे हैं। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार ब्रांड की लोगों से जुड़ने की संभावना पिंटरेस्ट की तुलना में इंस्टाग्राम पर 10 गुना अधिक है और ट्विटर में 84 गुना अधिक है। व्यापार के लिए इंस्टाग्राम एक आवश्यक मार्केटिंग मंच बन गया है; जहाँ प्रभावशाली व्यक्ति, मौजूदा और सम्भावित खरीदारों को प्रभावित करते हैं। काइली जेनर, जच किंग, हुडा कैटन, कैमरुन डलास और कई अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की मौजूदा लोकप्रियता को देखते हुए, मार्केटर्स का विश्वास कहता है कि भविष्य की मार्केटिंग योजनाओं में लगभग 80% योजनाएं आने वाले साल में कम से कम एक प्रभावशाली व्यक्ति के मार्केटिंग अभियान के जरिए होंगी इसलिए सही मंच पर, प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा किए गए मार्केटिंग से सही दर्शक से जुड़ने में और उन तक पहुँचने के मौकों की बाढ़ आ जाएगी। हालांकि, दिशा निर्देशों पर जाने से पहले, हमें यह नए मिलते जुलते शब्द का अर्थ समझ लेना चाहिए।
प्र. प्रभावशाली व्यक्ति से करायी जाने वाली मार्केटिंग क्या है?
= प्रभावशाली व्यक्तित्व वारा मार्केटिंग का अर्थ है उन व्यक्तियों को ढूंढना जो एक लक्षित समूह को किसी भी सोशल मीडिया माध्यम से प्रभावित करें, ताकि उस समूह से जुड़ कर, उन्हें अभियानों से जोड़ा जा सके और पदोन्नत सामग्री की बिक्री बढ़े। यह पुराने और नए मार्केटिंग यंत्रों का समन्वय है , जो प्रसिद्ध व्यक्तियों का समर्थन लेता है और जो आज के जमाने की विषय वस्तु चालित मार्केटिंग बनाता है| उदाहरण स्वरूप, तुरिया कम्युनिकेशंस ने अपने एक ग्राहक जो कचरा प्रबंधन का कार्य करते हैं, उनकी अपशिष्ट अलगाव से जुड़े अभियान को सोशल मीडिया में पदोन्नत करने के लिए विभिन्न सामाजिक कार्यों में संलिप्त इंस्टाग्राम के प्रभावी व्यक्ति की सहायता ली।
* वैतनिक बनाम अवैतनिक प्रभावशाली व्यक्तित्व द्वारा मार्केटिंग:-
प्रभावशाली व्यक्तित्व द्वारा मार्केटिंग वैतनिक एवं अवैतनिक भी हो सकता है| जब बात अवैतनिक सहयोग की आती है तो ब्रांड अपने सामग्री या सेवाएं बाहर भेजते हैं और फिर प्रभावशाली व्यक्ति उसका इस्तेमाल करते हैं और उस सामग्री के लिए अपने विचारों के विषय वस्तु बनाकर अपने सोशल मीडिया चैनल पर पोस्ट करते हैं। जबकि प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला वैतनिक मार्केटिंग में प्रभावशाली व्यक्ति को किसी विशिष्ट तरह के विषय वस्तु को अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए वेतन दिया जाता है। अब हम उन कारणों को देखते हैं जिससे हमें यह पता चलेगा कि प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा मार्केटिंग व्यापार के लिए आवश्यक क्यों है- व्यापार चाहे कितना भी बड़ा या छोटा हो या किसी भी तरह का हो।
1. सब विश्वास की बात है:-
अधिकतर लोग, अन्य लोग जिन्हें वे जानते तक नहीं है, उनकी सिफारिशों पर भरोसा करते है, जबकि उन्हें विभिन्न ब्रांड से सुझाव मिलते हैं। इसलिए किसी प्रसिद्ध व्यक्ति द्वारा समर्थित सामग्री, ग्राहकों में अधिक विश्वास संचित करेगी।
2. विज्ञापन ब्लॉकर्स से निपटने का रास्ता :-
ग्राहकों के पास बड़ी संख्या में रोज कई विज्ञापन आते हैं और इसलिए अधिकतर खरीदार विज्ञापन ब्लॉकिंग एप्लीकेशन इंस्टॉल कर लेते हैं। इस विज्ञापन ब्लॉकर्स से निकलने का रास्ता है प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा मार्केटिंग करवाना क्योंकि ग्राहक इस तरह के मार्केटिंग को खुशी से अपना लेते हैं।
3. कुशल और लागत- प्रभावी:-
अन्य मार्केटिंग तकनीकों की तुलना में, प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा किया जाने वाली मार्केटिंग अधिक कुशल और ग्राहकों तक पहुंचने में अधिक फायदेमंद है और मार्केटिंग लक्ष्यो को पाने मे सहायता मिलती है। अधिकतर, इसे जुड़ाव, क्लिक, लाइक और शेयर से आसानी से नापा जा सकता।
4. सटीक लक्ष्य :-
प्रभावशाली व्यक्तियों से मार्केटिंग कराने पर ब्रांड को विभिन्न और बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंचने में सहायता मिलती है। जैसे की प्रसिद्ध व्यक्तियों या ब्लॉगर्स ने उनके लिए चीजों को आसान कर दिया है, तो ब्रांड को एक ही काम करना पड़ता है, वह है अपने विभिन्न सामग्रियों को प्रभावशाली व्यक्तियों तक भेजना।
5. एस .ई .ओ:-
इस मार्केटिंग रणनीति से पदस्थापित होने में भी सहायता मिलेगी। वह लोग जो किसी जानकारी के प्राप्ति में सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं; वे अपनी कोई भी निर्णय लेने से पहले सर्च इंजन की सहायता लेते हैं।
* अंतिम पंक्ति:-
प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा मार्केटिंग को बढ़ावा मिलता है और व्यापार जगत में लोकप्रियता भी मिलती है; खास तौर पर वैसे व्यापार जो अपने ब्रांड के प्रति जागरूकता और ग्राहक से जुड़ाव जैविक रूप से चाहते हैं। अपने ब्रांड के लिए सही प्रभावशाली व्यक्तित्व चुनने के लिए आज ही तुरिया कम्युनिकेशंस से संपर्क करें। हमारा दल आपके व्यापार के अनुरूप सही रणनीति बताएगा।
सम्पर्क- फोन: +91 89815-92855 / 9748964480
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सोच रहा मेरा मन
– रेखा शर्मा
ये सोच रहा था मेरा था मेरा मन
फिर मिल जाये
मुझको मेरा बचपन।
तब मेरा दिल भी कितना चंचल था।
हरदम होती थी जिस दिल में हलचल
छिप छिप कर बातों पर हठ करना।
पल भर में रोना फिर हंस देना।
चांद सितारों के जो सपने।
वो अब लगते हैं हमको अपने
दिन भर खेलों में रहे मगन
जिन्दगी में जीने की सदा लगन।
बनता मन में सदा यही चित्र।
सबसे जुड़ जाये नाता पवित्र नाता। ।
फिर से मिल जाये वो दिन
ये सोच रहा है मेरा मन
फिर मिल जाए मुझको मेरा बचपन।
ये सोच रहा था मेरा मन




