Friday, May 1, 2026
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रणवीर सिंह बने कोटाक 811 अभियान के ब्रांड अम्बास्डर

कोलकाता : कोटाक महिन्द्रा 811 ने भारत का पहला जीरो कॉन्टैक्ट कोटाक 811 अभियान जारी कर दिया है। जीरो कॉन्टैक्ट वीडियो केवाईसी सेविंग्स अकाउंट के ब्रांड अम्बास्डर अभिनेता रणवीर सिंह होंगे। यह अभियान लाखों भारतीयों को पूर्ण कोटाक 811 सेविंग्स अकाउंट डिजिटल तरीके से खोलने का मौका देगा। इस क्रम में आप किसी के सम्पर्क में नहीं आते इसलिए इसे जीरो कॉन्टैक्ट कहा गया है। इस सुविधा के लिए जारी वीडियो अभियान की विषय -वस्तु कार्ट्व्हील क्रिएटिल कन्सल्टेंसी की है और घर से ही निर्देशन केरोसिन फिल्म्स ने किया है। वीडियो में रणवीर सिंह ने अपने घर से ही इसकी शूटिंग की है। फिल्म की शूटिंग लॉक़डाउन के नियमों का पालन करते हुई यानी रणवीर सिंह खुद ही अपने स्पॉट बॉय. कैमरामैन, मेकअप मैन और निर्देशक थे। ‘बैंक फ्रॉम होम’ पहल के तहत कोटाक ने पहली डिजिटल सेविंग्स अकाउंट खोलने की सुविधा ग्राहकों को दी है। कोटाक महिन्द्रा बैंक की ज्वाएंट प्रेसिडेंट (कन्ज्यूमर, कमर्शियल व वेल्थ मार्केटिंग) एलिजाबेथ वेंकटरमण ने कहा कि कोटाक बैंक के ग्राहक अब घर से बाहर कदम रखे बगैर अपना बचत खाता खोल सकते हैं और इसके लिए उनको किसी के सम्पर्क में आने की जरूरत नहीं है।

अम्फान और कोरोना काल में आप भी बढ़ाइए मदद का हाथ

कोरोना से पूरा देश परेशान है मगर बंगाल इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। अम्फान के कारण हुई तबाही ने राज्य को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। कई लोग मरे, घर टूटे, पेड़ गिरे और इस भयंकर तूफान के कारण पश्चिम बंगाल में जीवन अस्त – व्यस्त हो गया है। ऐसी स्थिति में राज्य को फिर से खड़ा करने के लिए राज्य व केन्द्र सरकार के साथ आम नागरिक भी आगे आ रहे हैं। कोरोना में मदद का हाथ बढ़ाने के बाद अम्फान से हुई तबाही के समय में भी जनसम्पर्क विशेषज्ञ शगुफ्ता हनाफी आगे आई हैं। अम्फान और कोविड – 19 के सेवाकार्य वे एक साथ चला रही हैं। हुगली के तेलिनीपाड़ा और दक्षिण 24 परगना के सुन्दरवन में सहायता जारी है।


शगुफ्ता के अनुसार उनकी ओर से नये – पुराने कपड़े, केक, बिस्कुट, नकद, चेक, दवाएँ, सत्तू, मूढ़ी, चावल, चिवड़ा, ट्रैम्पोलिन समेत अन्य सामान एकत्र किया जा रहा है। अगर आप भी शगुफ्ता के इस सेवा कार्य में मदद करना चाहते हैं तो आप उनसे यहाँ सम्पर्क कर सकते हैं
– शगुफ्ता हनाफी,
सम्पर्क – 9831362042
जमाल बिल्डिंग, खिदिरपुर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

विवेकान्द केन्द्र का ऑनलाइन योग सत्र सम्पन्न

कोलकाता :  आज जब विश्व कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है और विशेषकर भारत इससे डट कर मुकाबला कर रहा है तो ऐसे में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, पश्चिम बंग प्रान्त, कोलकाता (एकनाथ विभाग) ने लॉकडाउन का पालन करते हुए एक सराहनीय पहल की।

मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, मानसिक तनाव दूर करने तथा तन, मन स्वस्थ रखने हेतु केंद्र के द्वारा दो चरणों में ऑनलाइन योग सत्र (मुफ्त) का आयोजन किया गया। पहला चरण १० से १७ मई एवं द्वितीय चरण १८ से २४ मई २०२० तक प्रतिदिन सुबह ६:३० – ७:३० तक गूगल मीट पर चला।

श्री मनोज दास (प्रान्त संगठक) के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं मुख्य रूप से अरिजीत दास, शुभांकर दे, सनातन महाकूड़, श्यामसुंदर जयसवाल, अनुनिका शर्मा, पूर्वाली सरकार द्वारा व्यायाम, सूर्य नमस्कार, आसन, प्राणायाम, ध्यान, वैदिक मंत्र सिखाया गया। सत्र के संचालन का दायित्व सुब्रत मंडल और शुभांगी उपाध्याय ने निभाया। योग और स्वामी विवेकानंद के विचारों पर मौखिक चर्चा हुई जिसमें श्रीमती मालविका चटर्जी और श्री जनार्दन घोष ने सभी का मार्गदर्शन किया।

इस सत्र के अंतिम दिन अर्थात २४ मई को न्यूनतम १००८ सूर्य नमस्कार का लक्ष्य लिया गया। राज्य के विभिन्न स्थानों से १४८ लोगों ने सहभागिता निभाई और निर्धारित लक्ष्य से कई गुना अधिक ३६४८ सूर्य नमस्कार किया गया।

श्रमिकों के लिए मसीहा बने सोनू सूद और उनकी कोर टीम

नयी दिल्ली : बॉलीवुड के लोकप्रिय ऑनस्क्रीन खलनायक सोनू सूद श्रमिकों के लिए असल जीवन में एक नायक बन गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों से सोनू श्रमिकों की दुर्दशा पर ध्यान दे रहे हैं, जो लॉकडाउन के कारण मुंबई में फंस गए हैं। अभिनेता अपने अच्छे दोस्तों के साथ इन फंसे हुए कामगारों को कर्नाटक, झारखंड, यूपी, बिहार, ओडिशा और भारत के अन्य राज्यों में ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि दबंग फिल्म में नजर आए अभिनेता को फिल्म इंडस्ट्री और दोस्तों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। इस बारे में बताते हुए सोनू सूद कहते है, ‘हमने हाल ही में एक हेल्पलाइन नंबर शुरू किया है, जिस पर हमें संकटग्रस्त प्रवासियों के कई फोन आ रहे हैं। जैसे ही मुझे फोन आता है, मेरी पत्नी सोनाली इसे नोट कर लेती है और मेरे बच्चे ईशान और अयान भी इस बात की एक सूची बना लेते हैं कि कौन किस बस में जाएगाl हम सब एक टीम के रूप में इसमें शामिल हैंl’
सोनू ने आगे यह भी कहा कि दो राज्य सरकारों के बीच कागजी कार्रवाई और प्रवासियों का चिकित्सीय परीक्षण भी किया जाता है। फिल्म इंडस्ट्री से मिलने वाले समर्थन के बारे में पूछने पर सोनू ने बॉम्बे टाइम्स को बताया, ‘रोहित शेट्टी ने मुझे बधाई दी, तब्बू मेरे संपर्क में आई, मेरी अच्छी दोस्त फराह खान मुझे हर रोज फोन करती है और मुझे किसी भी मदद की आवश्यकता होती है, तो वह भी ध्यान रखती है। उन्होंने इन प्रवासियों को पीने का पानी देने की पेशकश करने के लिए स्वेच्छा से मदद की। मैं वास्तव में बहुत खुश हूं कि बहुत सारे लोग धन और भोजन की पेशकश कर इसमें शामिल हुए।’
सोनू सूद बॉलीवुड की कई फिल्मों में नजर आ चुके हैंl इसके अलावा वह अपनी फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं।

1200 किमी साइकिल चलाकर पिता को घर लाने वाली ज्योति पर बनेगी फिल्म

मुम्बई : लॉकडाउन में बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर हरियाणा के गुरुग्राम से 1200 किलोमीटर साइकिल चलाकर बिहार के दरभंगा पहुंचने वाली ज्योति कुमारी को लेकर बॉलीवुड आगे आया है। बॉलीवुड फिल्मकार विनोद कापड़ी बिहार की बेटी ज्योति पर ‘साइकिल गर्ल’ नाम से फिल्म बनाएंगे।
ज्योति ने साइकिल से 1200 किमी की दूरी तय की थी। विनोद कापड़ी ने कहा, ‘फिलहाल मैं पैदल और साइकिल से घर जाने वाले मजदूरों पर शॉर्ट फिल्म बना रहा हूं लेकिन मैं ज्योति पर एक फिल्म बनाने की तैयारी में हूं। इसके लिए मैंने उनके पिता से अनुबंध भी कर लिया है।’
बता दें कि ज्योति दरभंगा जिले की सिरुहुलिया गांव की रहने वाली है। अपना दर्द बयां करते हुए उसने बताया था कि खाने-पीने के लिए हमारे पास पैसे नहीं बचे थे। रुम मालिक भी किराया न देने पर तीन बार बाहर निकालने की धमकी दे चुका था। गुरुग्राम में मरने से अच्छा था कि हम रास्ते में मरें। इसलिए मैंने बीमार पापा से कहा कि आप साइकिल से चलो। मैं आपको ले चलूंगी। पापा नहीं मान रहे थे, लेकिन फिर मैंने जबरदस्ती की और आखिरकार जैसे-तैसे वे मान गए।
ज्योति अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठा कर हरियाणा के गुरुग्राम से दरभंगा के लिए निकली। इस दौरान रास्ते में कई तरह की परेशानियां आईं लेकिन हर बाधा को ज्योति बिना हिम्मत हारे पार करती गई। कई बार ज्योति को खाना भी नहीं मिला। रास्ते में कहीं किसी ने पानी पिलाया तो कहीं किसी ने खाना खिलाया। उसने 10 मई को गुरुग्राम से चलना शुरू किया और 15 मई की शाम घर पहुंची।
ऑटो चलाने वाले पिता थे चोटिल 
मोहन पासवान गुरुग्राम में किराये पर ऑटोरिक्शा चलाते हैं लेकिन वह चोटिल हो गए थे। उन्होंने ऑटो भी वाहन मालिक को लौटा दिया था। आय का कोई साधन नहीं था तब बेटी के दिए हौसले से पिता ने पुरानी साइकिल ली और बेटी ने पिता को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी ली।

लॉकडाउन में बनारस के किसानों को संजीवनी, दुबई जाएँगे आम

वाराणसी : बनारसी साड़ी अपने आप में एक ब्रांड है। लेकिन अब बनारसी लंगड़ा व बनारसी दशहरी आम संयुक्त अरब अमीरात की पहली पसंद बन रहा है। गुरुवार को यहां से तीन टन आम दुबई के लिए निर्यात किया गया है। इससे लॉकडाउन के बीच आम के कारोबारियों को काफी सहूलियत मिली है। जिले के इतिहास में ये पहला मौका है जब यहां से आम दुबई निर्यात किया गया है। इस काम में एपीडा (एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवेलपमेंट अथॉरिटी) की भूमिका रही है।

गुरुवार को राजा तालाब के भिखारीपुर बाग से तीन टन आम की खेप को कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी ने बताया कि बनारस के खास आम पहली बार विदेशी सरजमी पर भेजा गया है। किसान चौधरी शार्दूल विक्रम ने बताया कि लाकडाउन में विदेश आम जाने से किसानों को संजीवनी मिलेगा। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि आम की खेप सड़क मार्ग द्वारा पहले लखनऊ और फिर वहां पैकेजिंग करने के पश्चात हवाई मार्ग द्वारा रवाना किया जाएगा।
कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर आम की खेप रवाना की।
किसान शार्दूल विक्रम सिंह ने बताया कि 3 टन आम उन्हीं के बगीचे से पहली बार जा रहा है। 30 एकड़ में उनका बागान फैला है। उनके मुताबिक 2018-19 में भारत ने विदेशों में करीब 1100 करोड़ का आम निर्यात किया था। 3000 टन की पैदावार करीब वाराणासी में होती है। 12 हजार हेक्टेयर से घट कर पैदावार अब 1000 हेक्टेयर में ही होती होगी। 200 हेक्टेयर सड़क और हाईवे, फोर लेन निर्माण में चले गए होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने लगायी प्रवासी मजदूरों से बसों-ट्रेनों का किराया लेने पर रोक

सफर से पहले राज्य को खाना उन्हें खाना मुहैया कराएं 
नयी दिल्ली : प्रवासी मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रेनों और बसों से सफर कर रहे प्रवासी मजदूरों से किसी तरह का किराया ना लिया जाए। यह खर्च राज्य सरकारें ही उठाएं। कोर्ट ने आदेश दिया कि फंसे हुए मजदूरों को खाना मुहैया कराने की व्यवस्था भी राज्य सरकारें ही करें। इस मसले पर अगली सुनवाई अब 5 जून को होगी।
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने गुरुवार को मामले पर सुनवाई की। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलीलें रखीं। इस दौरान बेंच ने 4 आदेश दिए और 4 टिप्पणियां कीं।
अदालत के 4 आदेश
1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रेन और बस से सफर कर रहे प्रवासी मजदूरों से कोई किराया ना लिया जाए। यह खर्च राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें उठाएं।
2. स्टेशनों पर खाना और पानी राज्य सरकारें मुहैया करवाएं और ट्रेनों के भीतर मजदूरों के लिए यह व्यवस्था रेलवे करे। बसों में भी उन्हें खाना और पानी दिया जाए।
3. देशभर में फंसे मजदूर जो अपने घर जाने के लिए बसों और ट्रेनों के इंतजार में हैं, उनके लिए भी खाना राज्य सरकारें ही मुहैया करवाएं। मजदूरों को खाना कहां मिलेगा और रजिस्ट्रेशन कहां होगा। इसकी जानकारी प्रसारित की जाए।
4. राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को देखें और यह भी निश्चित करें कि उन्हें घर के सफर के लिए जल्द से जल्द ट्रेन या बस मिले। सारी जानकारियां इस मामले से संबंधित लोगों को दी जाएं।

अदालत की टिप्पणियाँ
1. प्रवासियों को खाना-पानी देने में खामियां देखी गयीं
कोर्ट ने कहा कि घर जाने की कोशिश कर रहे प्रवासी मजदूर जिन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, उन्हें लेकर हम परेशान हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य सरकारें उनके लिए कदम उठा रही हैं। लेकिन, रजिस्ट्रेशन, ट्रांसपोर्टेशन और खाना-पानी देने के मामलों में कुछ खामियां भी देखने को मिली हैं।
2. सफर में यात्रियों को भरपेट खाना मिला?
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकारों से को-ऑर्डिनेट कर प्रवासी मजदूरों को स्पेशल ट्रेनों और बसों से उनके राज्यों में पहुंचाया जा रहा है। 1 मई से 27 मई तक 91 लाख मजदूरों को घर पहुंचा दिया गया। इस जवाब पर कोर्ट ने टिप्पणी की- क्या यात्रा में उन्हें भरपेट खाना खिलाया गया?
3. प्रवासियों को खाना मिलना ही चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या प्रवासियों से किसी भी मौके पर टिकट के पैसे मांगे गए? सवाल ये है कि राज्य सरकारें टिकटों के पैसे कैसे चुका रही हैं। अगर प्रवासियों से पैसे ले रहे हैं तो क्या उन्हें यह रकम वापस की जा रही है? ट्रेन के इंतजार के दौरान उन्हें खाना मिल रहा या नहीं? कोर्ट ने कहा- प्रवासियों को खाना मिलना ही चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि खाना दिया जा रहा है।
4. कई जरूरतमंदों को फायदा नहीं मिला
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हर रोज करीब 3.36 लाख प्रवासियों को उनके राज्यों में पहुंचाया जा रहा है। सरकार ऐसे सभी प्रवासियों को उनके घर पहुंचाएगी। अदालत ने इस पर कहा- बहुत से जरूरतमंद लोगों को फायदा नहीं मिल पाया।
अदालत ने इस मामले में मंगलवार को स्वत: संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मजदूरों की हालत खराब है। उनके लिए सरकार ने जो इंतजाम किए हैं वे नाकाफी हैं। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर 28 मई तक जवाब मांगा था।

स्कूटी से 650 किमी का सफर कर ड्यूटी पर पहुंची महिला आरक्षक

अंबाह :  23 साल की आरक्षक को देशसेवा के जज्बे ने ऐसा प्रेरित किया कि वह 650 किमी का सफर स्कूटी से तय कर अपने पिता के साथ ड्यूटी करने मुरैना से महू थाने आ गयी। सफर के दूसरे ही दिन महिला ने ड्यूटी शुरू कर दी। महू के कोतवाली थाने में पदस्थ आरक्षक सुधा तोमर मुरैना जिले के अंबाह की रहने वाली हैं। तोमर लॉकडाउन के पहले पांच दिन के लिए छुट्टी लेकर घर गई थीं। लॉकडाउन लगने से वहीं फंस गई। इसी दौरान विभाग से आदेश आया कि जो पुलिसकर्मी जहां है, वह वहां संबंधित थाने में आमद देकर ड्यूटी ज्वाइन करें। इसके चलते तोमर ने करीब डेढ़ माह अंबाह थाने में ड्यूटी की। इसके बाद आवाजाही की छूट मिली और वहीं एक आदेश आया कि अब संबंधित पुलिसकर्मी अपने थाने पर आमद दें। तोमर को महू आने के लिए कोई व्यवस्थित साधन नहीं मिला, तो पिता व बेटी दोनों अंबाह से स्कूटी से निकले और करीब 16 घंटे का सतत सफर कर महू आए।
सुधा तोमर ने बताया कि सुबह 4 बजे मैं और पिताजी अंबाह से निकले थे। इस दौरान थोड़ा खाना व पानी साथ रखा था। पूरी गर्मी में सतत सफर के बाद रात आठ बजे करीब हम महू पहुंचे। इस सफर में हमारी आंखें पूरी तरह लाल हो गयी थीं, वहीं पैरों की हालत ऐसी हो गयी थी कि महू में घर पहुंचने के बाद ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। हमने पहली बार दोपहिया वाहन से इतना लंबा सफर तय किया है।

रिलायंस ने बनायी चीन से 3 गुना सस्ती और गुणवत्ता वाली पीपीई किट

नयी दिल्ली : कोरोना वायरस (Corona) काल में विभिन्न मोर्चों पर योगदान दे रही मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अब चीन से तीन गुना सस्ती और बेजोड़ गुणवत्ता वाली पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट बनानी शुरू कर दी है। यह किट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और बेहतर गुणवत्ता की है।
कंपनी के सिल्वासा प्लांट में रोजाना 1 लाख पीपीई किट बनाई जा रही हैं। जहां चीन से आयात की जा रही PPE किट 2000 रुपए प्रति किट से अधिक बैठती है। वहीं रिलायंस की इकाई आलोक इंडस्ट्रीज, पीपीई किट मात्र 650 रुपए में तैयार कर रही है। पीपीई किट डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा पुलिस और सफाई कर्मचारियों जैसे फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर्स को कोरोना संक्रमण से बचाती है।
रोजाना एक लाख से अधिक पीपीई किट बनाने के लिए रिलायंस ने अपने विभिन्न उत्पादन सेंटर्स को इस काम में लगाया है। जामनगर में स्थित देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी ने ऐसे पेट्रोकैमिकल्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया, जिससे पीपीई का कपड़ा बनता है। इसी कपड़े का इस्तेमाल कर आलोक इंडस्ट्रीज में पीपीई बनाए जा रहे हैं। आलोक इंडस्ट्रीज को हाल ही में रिलायंस ने अधिग्रहित किया था। आलोक इंडस्ट्रीज की सारी सुविधाएं पीपीई किट बनाने में लगा दी गई हैं। आज 10 हजार से अधिक लोग आलोक इंड्स्ट्रीज में पीपीई बनाने के काम में जुटे हैं।
पीपीई ही नहीं ‘कोरोना टेस्टिंग किट’ के क्षेत्र में भी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्वदेशी तकनीक विकसित कर ली है। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के साथ मिलकर रिलायंस ने पूरी तरह स्वदेशी आरटी-एलएएमपी (RT-LAMP) आधारित कोविड-19 टेस्ट किट बनाई है। यह टेस्टिंग किट चीनी किट से कई गुना सस्ती है। 45 से 60 मिनट के भीतर टेस्टिंग के सटीक नतीजे मिल जाते हैं।
आरटी-एलएएमपी टेस्टिंग किट में एक ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसे आसानी से सार्वजनिक स्थानों जैसे हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड्‍स पर प्रयोग में लाया जा सकता है। इस टेस्ट किट में बुनियादी लैब और साधारण दक्षता की जरूरत होती है, इसलिए इसका इस्तेमाल टेस्टिंग मोबाइल वैन/ कियोस्क जैसी जगहों पर भी किया जा सकता है।

शुभजिता क्लासरूम – पत्र लेखन

शिक्षिका – नीलम सिंह, वाराणसी

विषय व पाठ – पत्र लेखन