Saturday, June 20, 2026
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अपनी प्रतिभा का जलवा अब रोपोसो पर बिखेरेंगे सनातन

बलियापुर : भारत सरकार ने 59 चाइनीज एप पर प्रतिबंध लगा दिया। इसमें कई एप ऐसे थे जो लोगों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं। इन्हीं में से एक टिक-टॉक। इस प्लेटफॉर्म ने कई युवाओं को रातोंरात स्टार बना दिया। इन्हीं में से एक है कसमाटांड़ बलियापुर के भाई-बहन की जोड़ी। टिक-टॉक बंद होने से पहले तक सनातन और सावित्री की टिक-टॉक आइडी ‘डांसर सनातन’ पर 2.6 मिलियन यानी 26 लाख फॉलोअर्स थे। दो दिन पहले बालीवुड के मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्या ने भी सनातन के वीडियो ‘याद सताए तेरी नींद चुराए दिलबर’ के साथ ड्यूएट भी किया। इससे पहले शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंदरा ने भी सनातन के वीडियो के साथ भी ड्यूएट किया था।

भारतीय एप ‘रोपोसो’ पर आये डांसर सनातन 

टिक-टॉक प्रतिबंध होने पर सनातन ने कहा कि एक गांव के गरीब भाई-बहन को स्टार बनाने में इस एप का बहुत बड़ा योगदान रहा। हमारी प्रतिभा देशभर में पहुंची। सरकार ने इसे बंद का निर्णय कुछ सोच-समझ कर ही लिया होगा। एक भारतीय एप ‘रोपोसो’ है, अब इसी पर मेरी आइडी होगी। भारतीय एप के मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। फिलहाल यूट्यूब पर मेरे दो लाख 18 हजार सब्सक्राइबर्स हैं। इंस्टाग्राम पर भी पांच हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं, इसे निरंतर आगे बढ़ाना है। हम भाई-बहन में प्रतिभा है, मंच मिलेगा तो इसे और आगे भी बढ़ाएंगे।

नौकरी नहीं मिली तो कला के रास्ते बुलंदियों पर पहुंचने का संजोया सपना

किसान परिवार से जुड़े सनातन कुमार महतो व उनकी बहन सावित्री कुमारी गांव में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त की है। सनातन ने एमए की शिक्षा प्राप्त की है तो सावित्री भी ग्रेजुएशन पूरी कर चुकी है। एमए की शिक्षा के बाद भी नौकरी नहीं मिली तो सनातन अपने खेतों में ही हाथ आजमाते हैं। साथ-साथ कला की साधना शुरू की। नृत्य में करियर बनाने की ठानी और शुरू हो गए। नृत्य का वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू किया। शुरू में सफलता नहीं मिली। अपना यू-ट्यूब चैनल बनाया। इंस्टाग्राफ पर खूब वीडियो शेयर किया। टिक-टॉक को भी माध्यम बनाया। अचानक हिट हो गए। सोमवार तक टिक-टॉक पर 2.6 मिलियन फॉलोअर्स थे। इस मंच पर सनातन और उनकी बहन के नृत्य का 3 हजार से ज्यादा वीडियो उपलब्ध है। इनका एक नृत्य का वीडियो ‘प्यार हमारा अमर रहेगा’ गीत पर बना खूब वायरल हुआ।

आर्थिक तंगी के कारण छोडऩी पड़ी नृत्य क्लास

सनातन ने बताया कि वे पहले यू ट्यूब पर वीडियो बनाकर डाला करते थे। इसके बाद उन्होंने टिक-टॉक को बेहतर प्लेटफॉर्म माना। शुरुआत में उन्हेंं संघर्ष करना पड़ा। लेकिन, बाद में उनके वीडियो हिट होने लगे। लोग उन्हेंं खूब पसंद करने लगे। भाइ-बहन ने अबतक तीन हजार से अधिक वीडियो बनाए हैं। जिन्हेंं अबतक 90 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। सनातन और उसकी बहन सावित्री के घर की माली हालत ठीक नहीं है। सनातन ने बताया कि उसे बचपन से ही डांस का शौक है। उसने अपनी इस प्रतिभा को उभारने के लिए डांस क्लास ज्वाइन की थाी लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण क्लास छोडऩा पड़ा। बाद में योगा व मार्शल आर्ट की भी प्रैक्टिस बरमसिया में की। बहन सावित्री बताती है कि गांव के प्राइवेट स्कूल व घर में कोचिंग क्लास चलाती हैं। गांव की लड़कियों की प्रतिभा निखारने का भी संदेश अपने वीडियो के माध्यम से देती हैं।

(साभार – दैनिक जागरण)

वृंदावन की विधवाओं और भूखों को खाना खिलाने में जुटे शेफ विकास खन्ना

नयी दिल्ली : भारतीय मिशेलिन स्टार शेफ विकास खन्ना अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से हटकर समाज सेवा पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने बताया है कि आजकल वह एक सोशल मीडिया कैम्पेन के माध्यम से वृहद पैमाने पर एक खाद्य वितरण अभियान को आयोजित करने में लगे हुए हैं। वह इस काम में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें एक निर्देशक के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘द लास्ट कलर’ की रिलीज के बारे में सोचने तक का भी वक्त नहीं है।
विकास के इस अभियान हैशटैगफीडइंडिया का मकसद कोविड-19 महामारी की इस मुश्किल घड़ी में मुंबई में हजारों की तादात में डब्बावालों और वृंदावन की विधवाओं को खाने के साथ-साथ जरूरी सामानों की आपूर्ति कराना है।
उन्होंने कहा, “इसकी शुरुआत एक स्पैम ईमेल से हुई। 1 अप्रैल को मैंने एक ईमेल देखा जिसमें कहा गया था कि भारत में लॉकडाउन के बाद यहां के वृद्धाश्रमों को आपके सहारे की जरूरत है। मैंने उसे मेल को डिलीट कर दिया, लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि आप गलत ट्रेन में चढ़ जाते हैं, जो आपको सही मंजिल पर पहुंचा देती है और इस मामले में मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ।”

पुराना स्मार्टफोन या लैपटॉप बेचने से पहले रहें सावधान

पुराना फोन या लैपटॉप बेचना आसान होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके लिए कितना बड़ा खतरा साबित हो सकता है। दरअसल, पुराने फोन, लैपटॉप या हार्ड डिस्क में जरूरी डाटा होता है और कई लोग उसे डिलीट या क्लीन किए बगैर दूसरों के हाथ में सौंप देते हैं। यह डाटा न सिर्फ आपकी प्राइवेसी पर सेंध लगा सकता है बल्कि कई बार बैंक संबंधित डाटा भी लीक हो सकता है।
डाटा बेचने को लेकर एंटीवायरस सॉफ्टवेयर निर्माता केस्परकी लैब्स ने अपने एक शोध में कहा था कि डार्क वेब में कंप्यूटर/फोन यूजर का डाटा बेचा जाता है। इन खतरों को देखते हुए जरूरी है कि हम यह जानें कि कैसे अपनी जानकारी को सुरक्षित रखा जाए।
फोन को ऐसे करें क्लीन
स्मार्टफोन अब कॉन्टेक्ट और फोटो तक सीमित नहीं है। बल्कि कई एप तो आपके घर का पता और बैंक कार्ड की जानकारी तक सेव कर लेते हैं। यहां तक कि फोन में कई जरूरी दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, पासपोर्ट और लाइसेंस की फोटो होती है, जो गलत हाथ में पहुंचने के बाद काफी नुकसान पहुंचा सकती है।
फोन को करें फैक्टरी री-सेट
इसके लिए फोन की सेटिंग में जाएं, इसके बाद री-सेट वाले विकल्प पर क्लिक करें। इसमें दिए गए फैक्टरी री-सेट के विकल्प पर क्लिक कर दें। ध्यान रखें कि अलग-अलग कंपनियों के फोन में विकल्प में बदलाव हो सकता है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्च फर्म केसपरकी लैब ने अपनी रिसर्च में दावा किया था कि डार्क वेब पर लोगों का डिजिटल डाटा 3,500 रुपए से भी कम में बेचा जा सकता है।
लैपटॉप से डिलीट करें पुराना डाटा
पुराना लैपटॉप बेचने से पहले उसका पूरा डाटा डिलीट करने भर से आप अपने डाटा की सुरक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि उस डाटा को रिकवरी सॉफ्टवेयर से दोबारा प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में ‘फाइल शेयरश्रेडर’ सॉफ्टवेयर मददगार होगा। http://www.fileshredder.org/ पर जाकर मुफ्त डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा भी और सॉफ्टवेयर इंटरनेट पर मौजूद हैं।
– यह सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होने के बाद एक छोटी विंडो खुलेगी।
– इसमें एड फाइल्स, एड फोल्डर और शेर्ड फ्री डिस्क स्पेस जैसे तीन विकल्प मिलेंगे।
– लैपटॉप में मौजूद पूरा डाटा डिलीट करने के लिए तीसरे विकल्प ‘शेर्ड फ्री डिस्क स्पेस’ चुनना होगा।
– इससे हार्ड डिस्क और अन्य लोकेशन पर सेव डाटा हमेशा के लिए डिलीट हो जाएगा।
– ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में थोड़ा सा समय लगता है।

आज तक छुआ नहीं मोबाइल, अंशु बनी टॉपर

मजदूरी करते हैं पिता

मेरठ :  यूपी बोर्ड के हाईस्कूल की परीक्षा में अंशु यादव सबसे आगे रही।   मेरठ जिल में टॉप करने वाली अंशु यादव के पिता मजदूरी करते हैं। जिले में टॉप कर पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।  अंशु यादव ने बताया कि उसके पिता अंगद यादव मजदूरी करते हैं और माता गीता देवी गृहणी हैं। दो बड़े भाई हैं। अंशु बताती है कि उसने कोई कोचिंग नहीं ली। उसके भाई ने पढ़ाया और अब आगे की पढ़ाई भी अपने भाई के साथ करेगी। वह उसे सिविल के लिए गाइड करेगा।
अंशु ने बताया कि उसके घर में किसी के पास टच फोन नहीं है। इसलिए ऑनलाइन शिक्षा से वह दूर है। सोशल साइट का अनुभव भी नहीं है। आनलाइन पढ़ाई में क्या हो रहा है। उसकी जानकरी भी नहीं है। कक्षा 11वीं की पढ़ाई भाई कराता है। कुछ पुरानी बुक्स हैं, तो कुछ नई बुक्स का इंतजाम कर लिया और इससे 11वीं की पढ़ाई जारी की हुई है। अंशु ने बताया कि उसने कभी पढ़ाई के घंटे नहीं गिने। जब पढ़ने बैठती थी तो बस पढ़ती रहती थी। कहीं कोई दिक्कत आई तो भाई रवि से पूछकर समस्या का हल कर लेती है।
आईएएस बनने का सपना और समाज में बदलाव का लक्ष्य
अंशु का सपना आईएएस बनने का है। आईएएस बनकर वह समाज में बदलाव करेगी। अंशु कहती है कि समाज में शुरुआत से ही बेटियों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता है। वह खुद आगे बढ़कर समाज को प्रेरित करेगी और अपनी मिसाल कायम करेगी, ताकि बेटियों को पढ़ाया जाए।
टापर अंशु यादव ने बताया कि पिता मजदूरी करते हैं और कोरोना काल में मजदूरी का काम भी बंद हो गया। ऐसे में तमाम परेशानियां आई, लेकिन स्थिति के अनुसार ही खुद को ढाल लिया। अब 10 से 15 दिन हुए हैं पापा का काम शुरू हो गया है। कोरोना काल की परिस्थितियों ने बहुत कुछ सिखाया। मुसीबतों में किस तरह से चलना चाहिए और कैसे काम करना चाहिए। यह सभी कुछ आ गया है।
स्कोर कार्ड
97 हिंदी, 94 इंग्लिश, 96 गणित, 86 साइंस, 91 सोशल साइंस, 92 कम्यूटर

तनाव को कम कर ज्‍यादा सकारात्‍मक बनाता है संगीत

आंतरिक शांति … आंतरिक शांति … आंतरिक शांति! कुंग फू पांडा के मास्टर शिफू की तरह, हम सभी आनंद और आंतरिक शांति पाना चाहते हैं। लेकिन उनकी तरह, मन की इस तरह की स्थिति के बाद, इस उपलब्धि को हासिल करना आसान है। लेकिन शायद, वह जानता था कि संगीत उसकी इस कोशिश में मदद कर सकता है, इसलिए वह ज्यादा सफल रहा होगा।
संगीत आपके शरीर और दिमाग को बेहतर करता है
कॉमप्लीमेंटरी थैरेपीज़ इन मेडिसिन नामक पत्रिका में 2015 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जब रोगियों को अस्पताल की देखभाल के साथ म्यूजिक थेरेपी भी दी गई, तो उन्होंने दर्द, चिंता, हृदय गति और रक्तचाप की परेशानी को बहुत कम महसूस किया। सबसे महत्वपूर्ण बात, संगीत आपके हैप्पी हार्मोन को बढ़ाता है
वैज्ञानिक रूप से कहें, तो यह आपको निर्वाण की स्थिति में पहुंचा सकता है। आप पूछेंगे कैसे? तो इस तरह की अच्छे संगीत से आपकी बॉडी में सेरोटोनिन, डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन जैसे हैप्पी हार्मोन का स्राव होने लगता है। आप जान कर हैरान होंगे कि संगीत आपके लिए और क्या कर सकता है?
यहां हम वे फायदे बता रहे हैं जिनसे संगीत आपको शारीरिक और मानसिक तंदरुस्ती देता है:
1 संगीत आपका मूड अच्छा करता है
संगीत एक बेहतरीन मूड एलीवेटर है। इसलिए जब भी आप खुद को उदास महसूस करें तो अपनी पसंद का संगीत सुनें। यह आपको फि‍र से खुश और ऊर्जावान महसूस करवाने में मदद करेगा।
2 संगीत नींद को आसान बनाता है
पसंदीदा धुन या संगीत सुनने से तंत्रिकाओं को शांत करने में मदद मिलती है, जिससे नींद आसानी से आ जाती है। असल में, शोधकर्ताओं का तो यहां तक मानना है कि संगीत पुराने से पुराने स्ली्प डिसऑर्डर यानी नींद के विकारों को दूर करने में भी मददगार है।
3. यह तनाव को कम करता है
जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के एक न्यूरो सर्जन विशेषज्ञ डॉ. रॉनी एनक द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि संगीत तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने में मदद कर सकता है।
4 संगीत आपको दर्द से राहत दिलाता है
एंडोर्फि‍न आपके शरीर का प्राकृतिक दर्द निवारक है। शांत संगीत इसे आपके आपके शरीर द्वारा उत्पादित प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में एंडोर्फिन उर्फ को आमंत्रित करता है। तो, चाहे वह दिल तोड़ने वाला हो या सिरदर्द, संगीत दोनों के लिए काम करता है।
5. फोकस बढ़ाता है संगीत
आप चाहें तो इस बात की गारंटी ले सकते हैं कि इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक आपका फोकस बढ़ाने में मदद करता है। खासतौर से तब जब डेडलाइन आपके सर पर हो।
6. वर्कआउट में भी मददगार है संगीत
संगीत ऊर्जा का सदाबहार स्रोत है। खासकर तब जब आप जिम में वर्कआउट कर रहे होते हैं। यह एड्रेनिल के स्तऊर को बढ़ा कर टेम्पो सेट करने में मददगार है। यह भी देखने में आया है कि जब आप वर्कआउट के दौरान सही ट्रैक सुनते हैं तो आपको उसका ज्याकदा लाभ होता है। आप इसे खुद आजमाकर देख सकते हैं।
(साभार – हेल्‍थ शॉट्स)

सुशांत सिंह राजपूत का घर बनेगा ‘मेमोरियल

पटना : सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को अपने मुंबई वाले घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। सुशांत के धन के 12 दिन बाद अब परिवार ने आधिकारिक बयान जारी किया। सुशांत का परिवार उन्हें गुलशन कहता था। इस बयान में लिखा है, ‘सुशांत बहुत समझदार थे। वह हर बात जानना चाहते थे। उन्होंने बिना रुकावट के सपने देखे और उन्हें पूरा भी किया। वह हमारे परिवार का गर्व थे। उनका टेलिस्कोप उनके लिए सबसे जरूरी था। सुशांत अपने हर फैन को महत्व देते थे। हमारे गुलशन को इतना प्यार करने के लिए आप सभी को बहुत शुक्रिया’। ‘हमें यह यकीन ही नहीं हो रहा कि फिर से उसकी हंसी सुनने को नहीं मिलेगी, हम उसकी चमकती हुई आंखें फिर नहीं देख पाएंगे, हम विज्ञान से जुड़ी उसकी बातें फिर नहीं सुनेंगे। उसके जाने से परिवार में एक कमी आ गई है जो कभी पूरी नहीं होगी’। सुशांत के परिवार ने इस बयान में बताया कि उनका पटना स्थित घर मेमोरियल में तब्दील किया जाएगा। यहां सुशांत से जुड़ी चीजों को रखा जाएगा जिसमें उनकी हजारों किताबें, उनका टेलिस्कोप, फ्लाइट सिम्यूलेटर जैसी तमाम चीजें उनके फैन्स के लिए होंगी। सुशांत के परिवार ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत फाउंडेशन (SSRF) की स्थापना का फैसला लिया है जो सिनेमा, साइंस और स्पोर्ट्स से जुड़ी युवा प्रतिभाओं को सहयोग देगा।

दिल्ली में कोरोना प्लाज्मा बैंक शुरू

 नयी दिल्ली : कोरोना वायरस से जंग लड़ रही दिल्ली में आज से प्लाज्मा बैंक खुल गया है। मुख्यमंत्री अरविंद ने इसकी शुरुआत की। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा कोरोना मरीजों से ठीक होने के बाद प्लाज्मा डोनेट करने की गुजारिश की। केजरीवाल ने बताया कि कौन प्लाज्मा डोनेट कर सकता है और कौन नहीं। दिल्ली के सीएम ने कहा कि जबतक कोरोना की वैक्सीन नहीं आती, तबतक प्लाज्मा मददगार साबित हो सकता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा ‘यह देश भर में पहला प्लाज्मा बैंक है। प्लाज्मा डोनेट करने के इच्छुक व्यक्ति 1031 नंबर पर फोन करके अपनी जानकारी दे सकते हैं। इसके अलावा 8800007722 पर व्हाट्सएप करके प्लाज्मा डोनेट करने के इच्छुक व्यक्ति अपना पंजीकरण करा सकेंगे।’
 कौन दे सकता है प्लाज्मा
 उसे कोरोना हुआ होना चाहिए, जिससे वह ठीक हुआ हो
 ठीक हुए कम से कम 14 दिन हो गए हैं
 डोनर की उम्र 18 से 60 साल के बीच होनी चाहिए
कौन नहीं दे सकता प्लाज्मा
 जिनका वजन 50 किलो से कम हो
जो महिला एक भी बार गर्भवकती हुई  हो वो नहीं दे सकती
शुगर यानी मधुमेह के मरीज नहीं दे सकते
हाइपरटेंशन वाले नहीं दे सकते
बीपी 140 के ऊपर रहता है तो नहीं दे सकते
कैंसर से जो लोग ठीक हुए हैं वो नहीं दे सकते
जिनको किडनी, हार्ट, लीवर की बीमारी वाले नहीं दे सकते

श्रमदान से नहर की खुदाई में जुटे मजदूर

बांदा : बांदा जिले में मनरेगा के तहत काम नहीं मिलने पर करतल क्षेत्र की घरार नदी की श्रमदान से खोदाई करने वाले मजदूर अपनी इस मेहनत पर जिला प्रशासन द्वारा ठप्पा लगाए जाने के बाद अब नरैनी क्षेत्र के नौगवां गांव के मजरा माऊ सिंह के पुरवा में लगभग समतल हो चुकी नहर की खुदाई में जुट गए हैं। मजदूरों के अनुसार, सिंचाई विभाग की लापरवाही से नहर लगभग समतल हो चुकी है, जिससे उसके अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता और उनकी खेती बंजर होती जा रही है।
नरैनी क्षेत्र के नौगवां गांव के मजरा माऊ सिंह के पुरवा में नहर की खोदाई में श्रमदान (मुफ्त मेहनत) कर रहे मजदूर श्यामलाल ने रविवार बताया कि गुढ़ा कलां गांव से दिवली गांव तक जाने वाली इस छोटी नहर की सफाई कई वर्षों से नहीं हुई, जिससे अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता, परिणाम स्वरूप उनके उपजाऊ खेत बंजर भूमि में बदलते जा रहे हैं। इस मजदूर ने बताया कि मनरेगा में काम न मिलने पर खाली हाथ घर में बैठे थे। सोचा, नहर की खुदाई करें, जिससे टेल तक पानी पहुंचेगा और बच्चों की भूख मिटाने के लिए अनाज पैदा होगा।
गौरतलब है कि दो हफ्ते पूर्व करतल क्षेत्र के भंवरपुर गांव के 52 मजदूरों ने मनरेगा में काम न मिलने पर करीब करीब मृत हो चुकी घरार नदी की करीब दो किलोमीटर तक खोदाई कर उसे पानी से लबालब कर दिया था। इसके बाद ग्राम्य विकास विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने वहां जबरन ‘मनरेगा से कार्य’ होने का शिलापट गाड़ दिया है, जिससे मजदूरों और अधिकारियों के बीच सीधा टकराव है।
एक अन्य मजदूर रामस्वरूप ने बताया कि मजदूरों का हौसला बढ़ाने के लिए आस-पास के गांवों के मजदूर यहां भोजन सामग्री खुद दान कर जा रहे हैं, जिससे यहां श्रमदान कर रहीं महिलाएं नहर पटरी में ही सभी मजदूरों के लिए भोजन भी पकाती हैं। इन श्रमदानियों की टोली में दो दर्जन महिला मजदूर भी शामिल हैं।
इनमें से एक सुमित्रा ने कहा कि यदि हर खेत को पानी मिला तो फसल भी पैदा होगी, इससे मेरा मालिक (घर का मुखिया) मजदूरी करने कभी परदेश नहीं जाएगा। इस बारे में बांदा सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता शरद सिंह चौहान ने बताया कि श्रमदान से नहर खोदाई की सूचना मिलने पर शनिवार को विभाग के कर्मचारी कमलेश को कार्यस्थल भेजकर कई मजदूरों से फोन पर बात की गई है, उनका यह कार्य सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि हमने श्रमदान कर रहे मजदूरों को मजदूरी भुगतान करने का ऑफर दिया है, लेकिन वे (मजदूर) इसके लिए राजी नहीं है।

महिला क्रिकेट अलग खेल, अनावश्यक बदलाव ना करें: शिखा

नयी दिल्ली : भारत की वरिष्ठ तेज गेंदबाज शिखा पांडे महिला क्रिकेट को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए छोटी गेंद और छोटी पिच जैसे सुझावों को ‘अनावश्यक’ मानती हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से अपील की कि अधिक दर्शकों को आकर्षित करने के लिए नियमों से ‘छेड़छाड़ नहीं’ करें।
झूलन गोस्वामी के बाद नयी गेंद की भारत की सबसे अच्छी गेंदबाजों में से एक शिखा ने न्यूजीलैंड की कप्तान सोफी डिवाइन और भारत की उभरती हुई खिलाड़ी जेमिमा रोड्रिग्ज की मौजूदगी वाले आईसीसी के हाल के वेबिनार के संदर्भ में कई ट्वीट किए। इसी वेबिनार के दौरान कई तरह के सुझाव सामने आए थे।
भारतीय वायुसेना की अधिकारी 31 साल की शिखा ने लिखा, ‘‘महिला क्रिकेट की प्रगति/इसे अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए विभिन्न कई तरह के सुझावों के बारे में पढ़/सुन रही हूं। मेरा निजी तौर पर मानना है कि अधिकांश सुझाव अनावश्यक हैं।’’
भारत की ओर से 104 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 113 विकेट चटकाने वाली शिखा ने हल्की गेंद और 20 गज की पिच की तुलना 100 मीटर फर्राटा दौड़ से करके चीजों को समझाया। उन्होंने लिखा, ‘‘ओलंपिक 100 मीटर फर्राटा महिला धाविका पहले स्थान का पदक हासिल करने और पुरुष समकक्षों के बराबर समय निकालने के लिए 80 मीटर नहीं दौड़तीं।’’
शिखा ने लिखा, ‘‘इसलिए किसी भी कारण से पिच की लंबाई कम करना संदेहास्पद लगता है। साथ ही इससे एक साथ दो मुकाबलों का आयोजन भी नहीं हो पाएगा। ’’शिखा बाउंड्री छोटी करने के पक्ष में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कृपया सीमा रेखा छोटी मत कीजिए। हाल के समय में अपनी पावर हिटिंग से हमने आपको हैरान किया है, यह सिर्फ शुरुआत है, हम बेहतर होंगे। धैर्य रखिए। हम सभी कुशल खिलाड़ी हैं जो सुधार कर रही हैं।’’
इस भारतीय खिलाड़ी को यह आपत्तिजनक लगता है कि प्रगति हासिल करने के लिए मजबूत मार्केटिंग की जगह नियमों में बदलाव का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘खेल की अच्छी तरह से मार्केटिंग करके प्रगति की जा सकती है। दर्शकों को आकर्षिक करने के लिए नियमों में बदलाव की जरूरत नहीं है। ’’
शिखा ने कहा, ‘‘डीआरएस, स्निको, हॉटस्पॉट, अन्य तकनीकी चीजों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाए और दुनिया भर में कहीं पर भी खेले जाने वाले मैच का सीधा प्रसारण क्यों नहीं हो।’’
शिखा ने साथ ही कहा कि महिला और पुरुष क्रिकेट की तुलना नहीं की जानी चाहिए क्योंकि दोनों अलग हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कृपया करके महिला खेल की तुलना पुरुष खेल से मत कीजिए, इस मामले में महिला क्रिकेट की’’ शिखा ने मेलबर्न क्रिकेट क्लब में आस्ट्रेलिया के खिलाफ महिला विश्व टी20 फाइनल के संदर्भ में कहा, ‘‘हमें इसे बिलकुल अलग खेल की तरह देखने की जरूरत है। एक ऐसा खेल जिसे देखने के लिए आठ मार्च 2020 को 86174 लोग मौजूद थे और करोड़ों ने टीवी पर इसका सीधा प्रसारण देखा।’’

गूगल ने मतदान, चुनाव से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों को हटाया

वाशिंगटन : गूगल ने कहा कि उसने अमेरिका में नवम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर गलत जानकारी देने वाले एवं भ्रामक विज्ञापनों को अपने मंच से हटा दिया है। इन विज्ञापनों में से कुछ ने मतदान के लिए पंजीकरण करने के लिए लोगों से शुल्क लिया। वहीं, कुछ ने विपणन संबंधी लक्ष्य पूरा करने के लिए लोगों की निजी जानकारियां हासिल की। गैर-लाभकारी टेक कम्पनी ‘टेक ट्रांसपरेंसी प्रोजेक्ट’ ने इन विज्ञापनों की पहचान की है।
संगठन ने पाया कि ‘‘मतदान के लिए पंजीकरण’’, ‘‘मेल द्वारा मतदान’’ और ‘‘ मेरा मतदान स्थल कहां हैं’’ जैसे विज्ञापन लिंक उन वेबसाइट द्वारा निर्मित किए गए हैं, जो मतदान पंजीकरण के लिए शुल्क ले रहे हैं, लोगों की निजी जानकारियां हासिल कर रहें हैं या लोगों के ब्राउजर में अवांछित सॉफ्टवेयर डाल रहे हैं।
गूगल ने कहा कि उसके मंच पर ऐसे विज्ञापनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
गूगल की प्रवक्ता शैर्लेोट सिम्थ ने कहा, ‘‘ हम अपने मंच पर ग्राहकों को ऐसे अनुचित व्यवहार से बचाने को प्रतिबद्ध हैं। विशेषकर जब बात चुनाव से जुड़ी जानकारियों की हो।’