कोलकाता नगर निगम ने जारी किया निर्देश
कोलकाता । कोलकाता नगर निगम ने शहर में सभी जगहों पर साइनबोर्ड पर बंगाली को अनिवार्य करने का फैसला किया है। अब से, दुकानों, कार्यालयों, बहुमंजिला बाज़ार परिसरों, व्यावसायिक भवनों से लेकर विभिन्न संस्थानों के साइनबोर्ड पर बंगाली मुख्य भाषा होगी। नगर आयुक्त धबल जैन द्वारा हाल ही में जारी एक दिशानिर्देश में कहा गया है कि इस नियम को 30 सितंबर तक लागू करना होगा। दिशानिर्देश में कहा गया है कि साइनबोर्ड के सबसे ऊपर नाम बंगाली में लिखा होना चाहिए। ज़रूरत पड़ने पर नीचे या किनारे पर अन्य भाषाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन बंगाली पहले लिखी जाएगी। नगर निगम ने यह भी कहा कि यह कदम कानून विभाग के परामर्श से उठाया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले, सरकारी कार्यालयों के साइनबोर्ड और नोटिस पर भी बंगाली का प्रयोग अनिवार्य किया गया था। कोलकाता नगर निगम की मासिक बैठक में भी अलिखित रूप से कहा गया था कि प्रश्न या प्रस्ताव बंगाली में प्रस्तुत किए जाने चाहिए। इस बार, नगर निगम ने उस नीति को स्पष्ट करते हुए एक प्रशासनिक परिपत्र जारी किया है। मेयर फिरहाद हकीम ने हाल ही में शहरवासियों से अपील की थी। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ़ भाषा का सवाल नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी मामला है।” इस फ़ैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोलकाता और पूरे बंगाली क्षेत्र के लोग अपनी भाषा की मौजूदगी हर जगह महसूस कर सकें। मेयर ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोलकाता नगर निगम द्वारा प्रकाशित कोई भी दस्तावेज़ बंगाली भाषा के ज़्यादा इस्तेमाल का संदेश दे। इसके अलावा, कोलकाता नगर निगम की अध्यक्ष माला रॉय ने ज़ोर देकर कहा है कि नगर निगम का सारा कामकाज बंगाली में ही होना चाहिए। उन्होंने पार्षदों को बंगाली के अलावा किसी और भाषा में सवाल न पूछने की ख़ास हिदायत भी दी है। नगर निगम ने व्यापारियों और संस्थानों से इस निर्देश का पालन करने में सहयोग करने का अनुरोध किया है। अधिकारियों ने कहा है कि अगर तय समय सीमा के अंदर इस निर्देश का पालन नहीं किया गया, तो ज़रूरत पड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके परिणामस्वरूप, अगले कुछ महीनों में कोलकाता की सड़कों, बाज़ारों, ऑफ़िस ब्लॉक और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के साइनबोर्ड पर बंगाली भाषा की मौजूदगी और भी ज़्यादा साफ़ दिखाई देगी। कई लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है। जानकारों के अनुसार, यह न केवल भाषा की गरिमा की रक्षा के लिए, बल्कि आम लोगों के हित में भी एक ज़रूरी फ़ैसला है। इसी हफ़्ते पश्चिम बंगाल विधानसभा में बंगाली भाषा के इस्तेमाल और भाजपा शासित राज्य में बंगाली भाषियों पर हो रहे अत्याचारों पर चर्चा के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया गया था। हालाँकि, सत्र के आखिरी दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के विधायकों की नारेबाजी और हंगामे की भेंट चढ़ गया।
दुकानों के साइनबोर्ड पर नाम बांग्ला में लिखना अनिवार्य
शिक्षक दिवस विशेष : बंगाल और बिहार के वर्तमान शिक्षक

आज़ादी के 78 वर्ष में हम प्रवेश कर गए हैं । यूँ ही समाचार के ऐप पर ऊँगली फेरते हुए एक समाचार पर नज़र गई । 13 अगस्त 2025 के दिन प्रभात खबर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, नन्दन फिल्म हॉल, कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूरे बंगाल के सभी फिल्म हॉल में बांग्ला फिल्म दिखाना अनिवार्य कर दिया है । यह निर्णय बांग्ला फिल्म के लिए है तो, अच्छी बात है । परंतु यदि बांग्ला भाषा के लिए है तो सोचने वाली बात है । 10 वर्ष से जिस राज्य ने विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती न की हो । जिस राज्य के बच्चे बिना शिक्षक के पढ़ रहे हों । जो शिक्षक थे उन्हें भी बेरोज़गार कर दिया गया हो । उस राज्य की भाषा बचाने का काम फिल्म उद्योग ही करेगी । मुख्यमंत्री को भी पता है कि बिना शिक्षक के बच्चे रास्ते में समोसा, पकौड़ी और मूढ़ी बेचकर फिल्म देखने ही जाएँगे । और भाषा बच जाएगी । रोज़गार तो ऐसे ही बनते हैं ।
जिस राज्य ने नवजागरण की मिसालें दीं हो । वह राज्य ही अपनी संस्कृति और शिक्षा नष्ट कर रहा है । किसी भी शिक्षक की बहाली किसी भी संस्थान, विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में हो उसकी रिपोर्ट और मेरिट सार्वजनिक कर दी जाए तो धांधली की संभावना कम हो जाती है । पर बंगाल की सरकार को अपने ही राज्य की परीक्षा कराने और नौकरी की बहाली निकालने के लिए समय नहीं है । पश्चिम बंगाल का ‘स्कूल सर्विस कमीशन’ हो या ‘कॉलेज सर्विस कमीशन’ न तो बहाली के बाद मेरिट साझा करता है और न ऐसी सूचना देता है कि चयनित अभ्यर्थी का मेरिट और चयन का आधार क्या रहा है या कितने नंबर से अभ्यर्थी पिछड़ा है । बंगाल में अंतिम बार 2016 में विद्यालयों में शिक्षक भर्ती हुई थी । इसमें बंगाल सरकार के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के भ्रष्टाचार और रिश्वत के कारण नौ वर्षों के बाद उच्च न्यायालय एवं उच्चतम् न्यायालय ने रद्द कर दिया । 2020 में ‘कॉलेज सर्विस कमीशन’ द्वारा सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए आवेदन आया था । 2022 में उसका साक्षात्कार हुआ । जितने अभ्यर्थियों का चुनाव हुआ उनके मेरिट और योग्यता साझा नहीं हुई । केवल नाम की सूची आ गई । जो चयनित नहीं हुए उन्हें कभी नहीं पता चलेगा कि उनकी कमियाँ क्या थी ?
मैं तीन वर्षों से बिहार में हूँ । यह राज्य मेरे कार्य-क्षेत्र के अलावा कुछ नहीं लगता । मुझे बिहार की व्यवस्था और समाज की रुढ़िवादी नीति से काफी शिकायत है । यहाँ की शिक्षा व्यवस्था पर कई वर्षों से सरकार ने ध्यान नहीं दिया है । इसके साथ ही बाढ़ इसकी व्यवस्था और रसातल में डाल देती है । परंतु इन तीन वर्षों में चुनाव के ही कारण शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया आरंभ हुई । सरकार को भी लगा कि चुनाव में वोट के लिए यह ज़रूरी है । यहाँ की शिक्षक भर्ती और विश्वविद्यालय की बहाली में जिस तरह से हर अभ्यर्थी का नाम और मेरिट सार्वजनिक किया जाता है, वह उम्मीद देती है कि मेरिट का महत्त्व है । अभी बीते दो-तीन वर्षों से ढाई लाख शिक्षकों की बहाली हुई है, ये शिक्षक जिन छात्रों का निर्माण करेंगे निसंदेह वे उन छात्रों से ज़्यादा शिक्षित और आलोचनात्मक दृष्टि रखेंगे जिन्हें शिक्षक नहीं मिले थे । बिहार ने न केवल राज्य योग्यता परीक्षा कराया इनके साथ खाली पदों पर कई स्तर पर बहाली भी की । जिनका चुनाव नहीं उन्हें पता है कि कितने नंबर से वे रह गए । इसी प्रकार 2023 में बिहार विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में मेरिट जारी की गई । मैं ऐसा नहीं कहती कि इसमें भ्रष्टाचार नहीं हुआ होगा । यह भ्रष्टाचार मेरिट में आए शिक्षकों द्वारा जगह के स्तर पर हो रही है न कि नौकरी के लिए । आजकल पटना गाँधी मैदान के पास कई अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं । यह आंदोलन टी.आर.ई. 04 परीक्षा करवाने के लिए हो रहा है । न कि नियुक्ति में धांधली के लिए ।
धीरे-धीरे बंगाल भी जंगल राज वाला बिहार होता जा रहा है । जिन बातों के लिए बंगाल में ‘बिहारी’ शब्द गाली की तरह प्रयुक्त होता था । बंगाल की राजनीति उन्हीं बातों को अपनाकर बंगाल की बनी बनाई व्यवस्था को बर्बाद कर रहा है । 2016 के बाद से कोई शिक्षक बहाली नहीं ङुई । जिनक नौकरी चली गई उस गलती को सुधारने के लिए सरकार 2025 में पुन: परीक्षा करवा रही है । यह परीक्षा नौ वर्षों से नियुक्त शिक्षकों का अपमान है । इनके साथ ही नौ वर्षों से जिन विद्यार्थियों ने एक भी शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया नहीं देखी, वे दस नंबर का अनुभव प्रमाण कहाँ से लाएँगे? 100 नंबर की परीक्षा में 60 नम्बर लिखित, 20 नम्बर साक्षात्कार, 10 नम्बर मेरिट और 10 नम्बर अनुभव । इसका अर्थ है नए अभ्यर्थियों को ऐसे ही छाँट देना है । यह परीक्षा केवल उन शिक्षकों को भरने क लिए है जिनकी नौकरी गई है । कॉलेज में भी भर्ती की कोई सूचना नहीं आई है । पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग की परीक्षा भी 7-8 वर्षों से नहीं हुई है । एक व्यवस्थित और सुचारु ढंग से बंगाल सरकार नौकरी के लिए परीक्षा नहीं करवाती है ज़्यादातर भाई – भतीजावाद के भेंट या रिक्तता की भेंट चढ़ जाता है । कलकत्ता विश्वविद्यालय की वर्तमान कुलपति प्रो. शांता दत्ता का अट्ठाइस अगस्त के दिन विश्वविद्यालय की परीक्षा रद्द न करना । उम्मीद जताता है कि शिक्षा व्यवस्था में अभी भी क्रांति बची हुई है । स्त्री शिक्षा और सुरक्षा के लिए के लिए बंगाल का नाम रहा है । वह आज की राजनीति और भ्रष्ट व्यवस्था उतना ही बदनाम कर रही है । राजा राममोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद की बनाई नवजागरण की विरासत को धीरे-धीरे बर्बाद करने का काम चल रहा है ।
बिहार में नीतिश हो या लालू जनता खुले आम आलोचना कर सकती है । पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार की आलोचना को बंगाल की अस्मिता और भाषा से जोड़ कर देखा जाता है । बंगाल में आम जनता, बच्चों एवं स्त्रियों के साथ राजनीति भयावह रूप ले लेती है । चुनाव के दौरान पटाखों को कूड़े में डालकर आम जनता को शिकार बनाया जाता है । बंगाल सरकार भी शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए मानक कदम नहीं उठा रही है । महिलाओं की दशा तो दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है । जिस राज्य की महिला उदाहरण थी वह आज पीड़ित बन रही हैं ।
अतिथि शिक्षकों की हालत तो एक रोज़ के मज़दूरों से भी बदत्तर है । रोज का मज़दूर भी पाँच सौ रुपए लेता है परनंतु बंगाल के अतिथि शिक्षकों को एक कक्षा के लिए दो सौ-ढाई सौ रुपए दिये जाते हैं । मुफ्त का अनाज भी सभी को नहीं मिलता । जिन्हें मिल रहा है वे और किसी वस्तु की उम्मीद न करें । गाय के समान खूँटे से बँध कर खाए और चुप रहें । केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही न शिक्षा और न चिकित्सा पर ध्यान देती है । मोदी जी ने अयोध्या का मंदिर बनाया तो ममता जी ने पूरी के तर्ज पर दीघा में जगन्नाथ मंदिर । शिक्षा और चिकित्सा प्राथमिक होना चाहिए । दक्षिण के राज्यों में भी राजनीति है परन्तु वे शिक्षा और चिकित्सा को महत्त्व अधिक देते हैं । आज पूरा देश ही बेहतर इलाज के लिए दक्षिण भारत की ओर जा रहा है । हिन्दी की दशा तो थाली में पड़े बैंगन के समान हो गई है । मतलब कि केवल उपयोग में आ रही है परन्तु स्वीकृति नहीं मिल रही है । भाषा थोपने के मैं भी खिलाफ हूँ परन्तु वास्तविकता यह भी है कि हिन्दी से 60% से ज्यादा लोग और लगभग सभी राज्य समझते हैं परन्तु राजनीति की रोटी कभी ठंडी न पड़े इसलिए हिन्दी का प्रयोग कर हिन्दी के विरोध में प्रदर्शन करते हैं । कुछ बेचना है या मनोरंजन करना है तो हिन्दी याद आती है । इसके बाद सभी अपने भाषा के प्रति सजग हो जाते हैं । मुझे हिन्दी को राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं दिलाना है पर हम जिस भाषा से काम चलाते हैं उनके प्रति कृतज्ञता बोध तो होना ही चाहिए । इतने वर्षों के विरोध के बावजूद यह अपने आप जनसंपर्क की भाषा बनी है । परन्तु इसके प्रति दोहरी नीति मुझे नहीं समझ आती ।
दिव्या गुप्ता (DIBYA GUPTA)
शोधार्थी
भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 100 करोड़ के पार
– अप्रैल-जून अवधि में 3.48 प्रतिशत का हुआ इजाफा
नयी दिल्ली। ब्रॉडबैंड ग्रोथ के कारण भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 30 जून, 2025 तक 1 अरब को पार कर 1,002.85 मिलियन हो गई, जो मार्च की तुलना में 3.48 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन 100 करोड़ से अधिक ग्राहकों में से 4.47 करोड़ के पास वायर्ड इंटरनेट कनेक्शन थे, जबकि 95.81 करोड़ के पास वायरलेस कनेक्शन थे। ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 3.77 प्रतिशत बढ़कर 979.71 मिलियन हो गई, जबकि नैरोबैंड यूजर्स की संख्या घटकर 23.14 मिलियन रह गई। जून तिमाही में कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 1,218.36 मिलियन तक पहुंच गई, जो पिछली तिमाही की तुलना में 1.46 प्रतिशत अधिक है। आधिकारिक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि इससे कुल दूरसंचार घनत्व बढ़कर 86.09 प्रतिशत हो गया, जो पिछली तिमाही में 85.04 प्रतिशत था। जनसांख्यिकी के संदर्भ में, शहरी इंटरनेट ग्राहकों की संख्या लगभग 57.94 करोड़ है, जबकि ग्रामीण इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 42.33 करोड़ है। आंकड़ों के अनुसार, वायरलेस सेवाओं के लिए मासिक औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता (एआरपीयू) 186.62 रुपए है, जबकि प्रति वायरलेस ग्राहक औसत उपयोग मिनट (एमओयू) हर महीने 16.76 घंटे है। दूरसंचार क्षेत्र का सकल राजस्व 96,646 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही से 1.63 प्रतिशत कम है, लेकिन सालाना आधार पर 12.34 प्रतिशत अधिक है। समायोजित सकल राजस्व 81,325 करोड़ रुपए रहा, जो पिछली तिमाही से 2.65 प्रतिशत अधिक है। एक्सेस सेवाओं का समायोजित सकल राजस्व में 83.62 प्रतिशत का योगदान रहा है।
प्रेस रिलीज में आगे कहा गया है कि लाइसेंस शुल्क 2.63 प्रतिशत बढ़कर 6,506 करोड़ रुपए हो गया और पास-थ्रू शुल्क 19.45 प्रतिशत घटकर 10,457 करोड़ रुपए हो गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने लगभग 912 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अपलिंकिंग या डाउनलिंकिंग या दोनों के लिए अनुमति दी है। भारत में डाउनलिंकिंग के लिए उपलब्ध 902 सैटेलाइट टीवी चैनलों में से, 30 जून, 2025 तक 333 सैटेलाइट पे टीवी चैनल हैं।
देश में सड़क दुर्घटनाओं से जीडीपी में 3 फीसदी का नुकसानः गडकरी
नयी दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा को देश की प्राथमिकता बताते हुए गुरुवार को कहा कि देश में हर साल औसतन 4.80 से 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें लगभग 1.80 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इन दुर्घटनाओं से जीडीपी को 3 फीसदी का नुकसान होता है, जो किसी बीमारी या युद्ध से भी अधिक है। गडकरी ने फिक्की के 7वें रोड सेफ्टी अवॉर्ड्स एंड सिम्पोजियम 2025- ‘विजन जीरो: लाइफ फर्स्ट, ऑलवेज’ कार्यक्रम में कहा कि सालाना होने वालाी सभी दुर्घटनाओं में 66.4 फीसदी मौतें 18 से 45 साल के युवाओं की होती हैं, जो देश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में 18 साल से कम उम्र के 10 हजार बच्चों की सालाना मौत होती है, जो चिंता का विषय है। हेलमेट न पहनने से करीब 30,000 और सीट बेल्ट न लगाने से 16,000 मौतें सालाना होती हैं। इन आंकड़ों को कम करने के लिए सरकार ने नई बाइक खरीदने वालों को दो हेलमेट देने की अनिवार्यता लागू की है। साथ ही, जागरूकता फैलाने के लिए अमिताभ बच्चन के साथ सालाना कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए शंकर महादेवन का एक गीत 22 भाषाओं में अनुवादित कर स्कूली बच्चों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल अभियान भी शुरू किया गया है। उन्होंने वाहन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में सुधार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग में इस बदलाव से परफेक्शन आया है, जिससे वाहन दुर्घटनाओं में कमी की उम्मीद है। ट्रक ड्राइवरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जो 16-18 घंटे लगातार गाड़ी चलाते हैं, उनके केबिन में एसी अनिवार्य किया गया है। गर्मी और थकान से होने वाली अस्वस्थता को कम करने के लिए फटीग और स्लीप डिटेक्शन सिस्टम पर भी काम चल रहा है। उन्होंने बसों की सुरक्षा को लेकर कहा कि पहले बस बॉडी कोड में खामियां थीं, जिसे सुधारने में समय लगा। अब विश्वस्तरीय बस बॉडी कोड को अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। नेशनल हाई-वे पर हर दुर्घटना के कारणों का विश्लेषण कर सुधार की कोशिश की जा रही है। दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए 25 हजार रुपये का इनाम और हर दुर्घटना में न्यूनतम 1.5 लाख रुपये या 7 दिन का अस्पताल खर्च बीमा में शामिल करने का फैसला लिया गया है।
हीटवेव को बंगाल में मिला प्राकृतिक आपदा का दर्जा
– मृतक के परिजनों को मिलेगा मुआवजा
कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार ने हीटवेव से होने वाली मौतों को अब प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में शामिल करते हुए पीड़ित परिवारों को २ लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया है। राज्य सचिवालय सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में हुई च्स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटीज् की बैठक में यह फैसला लिया गया। पिछले कुछ वर्षों में पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम मिदनापुर, झाड़ग्राम, पश्चिम बर्दवान और बीरभूम जैसे जिलों से हीटवेव और लू के कारण कई मौतों की खबरें सामने आई थीं। अगस्त में मुख्य सचिव मनोज पंत की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी, जिसमें तय किया गया कि हीटवेव या लू से मौत की स्थिति में भी परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार जल्द ही इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी करेगी। मुआवजा पाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य होगी और केवल यह पुष्टि होने के बाद कि मौत हीटस्ट्रोक से हुई है, राशि जारी की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हीटवेव से मौतों को प्राकृतिक आपदा घोषित करने के बाद मुआवजा राशि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से दी जाएगी। इस कोष के वार्षिक आवंटन का करीब १० प्रतिशत हिस्सा ऐसी परिस्थितियों में खर्च किया जा सकता है। गौरतलब है कि अब तक राज्य सरकार बिजली गिरने, आगजनी, नाव हादसा, पेड़ गिरने और मकान ढहने जैसी घटनाओं में मौत होने पर दो लाख रुपये का मुआवजा देती रही है। इसके साथ ही, बंगाल सरकार ने अब कुल १४ तरह की घटनाओं को प्राकृतिक आपदा घोषित किया है, जिनमें हीटवेव, नदी कटाव, भारी बारिश, जंगली जानवरों का हमला, करंट लगना, जंगल में आग, जहरीले जीव-जंतु के काटने या हमले से मौत जैसी परिस्थितियां शामिल हैं।
बदलीं जीएसटी की दरें, आम आदमी को राहत
नयी दिल्ली । जीएसटी परिषद ने बुधवार को आम सहमति से माल एवं सेवा कर जीएसटी में व्यापक सुधारों को मंजूरी दे दी है। इन सुधारों के तहत साबुन, साइकिल, टीवी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य तथा जीवन बीमा पॉलिसी जैसे आम उपयोग के उत्पादों पर जीएसटी की दरें कम की गई हैं। छेना, पनीर, रोटी और पराठा पर कोई जीएसटी नहीं देना होगा। इसके अलावा जीवन रक्षक दवाओं पर भी जीएसटी शून्य होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में लिए गए निर्णय के बारे में यहां आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी देते हुए कहा कि जीएसटी में पांच फीसदी और 18 फीसदी की दो-स्तरीय कर संरचना को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि गुटखा, तंबाकू और तंबाकू उत्पादों तथा सिगरेट को छोड़कर सभी उत्पादों पर नई दरें 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होंगी। सीतारमण ने बताया कि जीएसटी में व्यापक सुधारों के तहत बाल में लगाने वाले तेल, साबुन, साइकिल आम और मध्यम वर्ग की वस्तुओं पर जीएसटी की दर 12 फीसदी या 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जीएसटी परिषद ने लोगों को राहत देते हुए रोजमर्रा के उपयोग वाले सामानों पर जीएसटी दरों में कटौती की है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम पर जीएसटी से छूट मिलेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके अलावा छोटी कारों और 350 सीसी तक के दोपहिया वाहनों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। तिपहिया वाहन पर भी अब 18 फीसदी कर लगेगा। उन्होंने कहा कि तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट पर जीएसटी 40 फीसदी की विशेष दर से लगेगा। सीतारमण ने कहा, ‘‘यह केवल जीएसटी में सुधार नहीं है, बल्कि संरचनात्मक सुधारों और लोगों की जीवन को सुगम बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।’’वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा, “जहां तक जूतों का सवाल है, पहले दो दरें थीं। 1000 रुपये से कम कीमत वाले जूतों पर 12 फीसदी और 1000 रुपये से ज्यादा कीमत वाले जूतों पर 18 फीसदी कर लगता था। लेकिन, अब 2500 रुपये से कम कीमत वाले जूतों पर 5 फीसदी और 2500 रुपये से ज्यादा कीमत वाले जूतों पर 18 फीसदी टैक्स लगेगा।” उन्होंने बताया कि “छोटी कारों पर 18 फीसदी कर लगेगा और बाकी सभी कारों पर 40 फीसदी टैक्स लगेगा। श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि पेट्रोल इंजन 1200 सीसी और डीजल इंजन 1500 सीसी का होता है और इसके साथ ही लंबाई की भी सीमा हो सकती है। नियमों के मुताबिक छोटी कारों पर 18 फीसदी कर लगेगा। उन्होंने कहा कि हम इसके लिए अलग से कोई नई परिभाषा नहीं बना रहे हैं।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि जीएसटी परिषद द्वारा मंज़ूर किए गए व्यापक सुधार नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाएंगे। इससे कारोबार करना आसान करेंगे, विशेष रूप से छोटे व्यापारियों और उद्यमों के लिए आसानी होगी। प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी बयान में कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने और प्रक्रियागत सुधारों के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका उद्देश्य आम आदमी के जीवन को आसान बनाना और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
हर राज्य में बनेंगे डिटेंशन सेंटर : अमित साह
नयी दिल्ली । भारत सरकार ने हाल ही में लागू इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत विदेशियों के प्रवेश और ठहराव पर कई सख्त प्रावधान किए हैं। यह आदेश सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक व्यवस्था और संवेदनशील सीमाई इलाकों की सुरक्षा से जुड़ा है। यह प्रावधान स्पष्ट करता है कि भारत अब अपनी सुरक्षा नीतियों में किसी तरह का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है। हम आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि विदेशियों पर अगर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, जासूसी, बलात्कार और हत्या, आतंकवादी कृत्यों, बाल तस्करी या किसी प्रतिबंधित संगठन का सदस्य होने का आरोप सिद्ध होता है तो उन्हें भारत में प्रवेश करने या रहने की अनुमति देने से मना किया जा सकता है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि हाल ही में लागू किए गए आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 के तहत प्रत्येक राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन विदेशियों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से समर्पित निरुद्ध केंद्र या हिरासत शिविर स्थापित करेगा, जब तक कि उन्हें निर्वासित नहीं कर दिया जाता। गृह मंत्रालय ने कहा कि जो भी विदेशी किसी भी श्रेणी के वीजा के लिए आवेदन करता है, जिसमें प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) कार्डधारक के रूप में पंजीकरण भी शामिल है, उसे वीजा जारी करने वाली अथवा ओसीआई कार्डधारक के रूप में पंजीकरण प्रदान करने वाले प्राधिकरण को अपनी बायोमेट्रिक जानकारी देने की अनुमति देनी होगी, और यह प्रक्रिया वीजा या पंजीकरण दिए जाने से पहले पूरी की जाएगी। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि यदि भारत में अवैध प्रवासियों को पकड़ा जाता है, तो उन्हें निर्वासन (देश से वापस भेजे जाने) की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी होल्डिंग सेंटर या शिविर में रखा जाएगा और उनकी आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।ह मंत्रालय के आदेश में कहा गया, “मादक पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों की तस्करी, बाल तस्करी सहित मानव तस्करी, नकली यात्रा दस्तावेजों और मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी सहित) में धोखाधड़ी, साइबर अपराध, बाल दुर्व्यवहार या ऐसे अपराधों में संलिप्त पाया जाना।” गृह मंत्रालय ने कहा कि कोई भी विदेशी, जिसके पास भारत में रोजगार के लिए वैध वीजा हो, बिना नागरिक प्राधिकरण की अनुमति के, बिजली या जल आपूर्ति से जुड़े निजी क्षेत्र के उपक्रमों या पेट्रोलियम क्षेत्र में कार्यरत किसी संस्था में रोजगार स्वीकार नहीं कर सकता। आदेश में कहा गया, “कोई भी विदेशी व्यक्ति किसी फीचर फिल्म, वृत्तचित्र, रियलिटी टेलीविजन और वेब शो या सीरीज, व्यावसायिक टेलीविजन धारावाहिक या शो, वेब शो या सीरीज, या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किसी अन्य माध्यम या रूप में सार्वजनिक प्रदर्शन हेतु सामग्री का निर्माण, निर्माण का प्रयास या निर्माण करवाने का कार्य केवल लिखित अनुमति प्राप्त करने के बाद ही कर सकता है और वह भी निर्धारित विशेष शर्तों के अधीन होगा।” पर्वतारोहण अभियानों पर प्रतिबंध लगाते हुए गृह मंत्रालय ने कहा कि कोई भी विदेशी या विदेशी नागरिकों का समूह भारत में किसी भी पर्वत शिखर पर चढ़ाई नहीं कर सकता या चढ़ाई का प्रयास नहीं कर सकता, जब तक कि उन्हें केंद्र सरकार से पूर्व में लिखित अनुमति प्राप्त न हो। इसके साथ ही, उन्हें चढ़ाई के लिए अपनाए जाने वाले मार्ग का विवरण, एक संपर्क अधिकारी की नियुक्ति, और फोटोग्राफिक एवं वायरलेस संचार उपकरणों के उपयोग की जानकारी भी अनिवार्य रूप से देनी होगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इसके अलावा, प्रत्येक विदेशी को किसी संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने या वहां ठहरने के लिए परमिट प्राप्त करना अनिवार्य होगा। हालांकि, अफगानिस्तान, चीन या पाकिस्तान मूल के किसी भी व्यक्ति को ऐसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। भारत के प्रतिबंधित क्षेत्रों में पूरे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड और सिक्किम राज्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्से भी इन क्षेत्रों में आते हैं। इसके साथ ही आप्रवासन ब्यूरो भारत में प्रवेश प्रतिबंधित विदेशी व्यक्तियों की एक अपडेटेड सूची बनाएगा।
दिवाली से पहले बंगाल सरकार ने तय किया पटाखे फोड़ने का समय
कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार ने त्योहारों के दौरान पटाखे फोड़ने के लिए निर्धारित समय सीमा तय कर दी है। मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र में वित्त (स्वतंत्र प्रभार) एवं पर्यावरण मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि यह निर्णय केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के आधार पर लिया गया है। मंत्री ने बताया कि काली पूजा और दीवाली पर केवल ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति होगी, इसके लिए रात आठ बजे से दस बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। वहीं, छठ पूजा के अवसर पर सुबह छह बजे से आठ बजे तक पटाखे फोड़ने की इजाजत होगी। क्रिसमस और नववर्ष की पूर्व संध्या पर रात 11:55 बजे से 12:35 बजे तक महज 40 मिनट के लिए पटाखे चलाए जा सकेंगे। भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन दंडनीय अपराध माना जाएगा। साथ ही, शोर प्रदूषण की शिकायतों के लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके माध्यम से लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि जनवरी में उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकारों को दिल्ली की तरह ही एनसीआर क्षेत्र में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने का आदेश दिया था। बीते वर्ष दीवाली के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को यह कहते हुए फटकार लगाई थी कि प्रतिबंध का सही तरह से पालन नहीं हुआ और सुझाव दिया था कि पटाखों के विक्रेताओं के परिसरों को सील करने के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से आयात पर भी रोक लगाई जाए।
टीआरएफ को विदेशों से मिला फंड : एनआईए
-एफएटीएफ ने पाकिस्तान पर कसा शिकंजा
नयी दिल्ली । अमेरिका ने हाल ही में ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन और एक विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी इकाई घोषित किया है। यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था क्योंकि इस कदम से उसकी आतंकी रणनीति का पर्दाफाश हो गया। द रेजिस्टेंस फ्रंट, लश्कर-ए-तैयबा का ही एक अंग है। वास्तव में, इसे जम्मू-कश्मीर के एक स्थानीय संगठन के रूप में गठित और प्रचारित किया गया था। जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा, दोनों को एक तरह से नकारने का मौका देना था। इसका उद्देश्य कश्मीर में चल रही गड़बड़ी को स्थानीय स्तर पर दिखाना था। पाकिस्तान चाहता था कि आतंकवादी हमले जारी रहें और यह भी सुनिश्चित हो कि वह वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की जांच के दायरे में न आए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने रेजिस्टेंस फ्रंट की गतिविधियों की पड़ताल की। उस आधार पर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान एफएटीएफ से बचने के लिए इस छद्म संगठन का इस्तेमाल नहीं कर सकता। रेजिस्टेंस फ्रंट का जम्मू-कश्मीर में एक गहरा नेटवर्क है। इसके स्थानीय लोग, जो पाकिस्तान के इशारे पर, इस आतंकवादी संगठन की गतिविधियों को चलाने के लिए धन मुहैया कराने हेतु खाड़ी और मलेशिया के लोगों के संपर्क में हैं। जांच के दौरान, मलेशिया निवासी सज्जाद अहमद मीर का नाम सामने आया है। एक संदिग्ध, यासिर हयात, के फोन कॉल्स से पता चला है कि वह धन की व्यवस्था के लिए मीर के संपर्क में था। हयात ने धन की व्यवस्था के लिए कई बार मलेशिया की यात्राएं की थीं। अब तक सामने आई जानकारी से पता चलता है कि अपने मलेशियाई संपर्क की मदद से उसने द रेजिस्टेंस फ्रंट के लिए 9 लाख रुपये जुटाए थे। यह पैसा संगठन की गतिविधियों को चलाने के लिए शफात वानी नाम के एक अन्य कार्यकर्ता को दिया गया था। कहा जाता है कि वानी, जो टीआरएफ का एक प्रमुख कार्यकर्ता है, मलेशिया भी गया था। उसने बताया कि वह एक विश्वविद्यालय के सम्मेलन में भाग लेने गया था, और इसी बहाने उस देश में प्रवेश किया था। हालांकि, विश्वविद्यालय ने इस यात्रा को प्रायोजित नहीं किया था। एनआईए को यह भी पता चला है कि मीर के संपर्क में रहने के अलावा, हयात दो पाकिस्तानियों के भी संपर्क में था। उसकी गतिविधियां धन जुटाने के लिए थीं, और जांच से पता चलता है कि उसका काम विदेशी कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहना और आतंकवादी संगठन के लिए धन जुटाना था। एनआईए के पास टीआरएफ के संचालन के बारे में पर्याप्त जानकारी है, लेकिन कितना धन मुहैया कराया गया इसका पता लगाना जांच के लिए महत्वपूर्ण है। 13 अगस्त को, एनआईए ने कहा था कि उसने धन के एक विदेशी स्रोत का पता लगाया है जिसकी गहन जांच की जा रही है। हयात के फोन पर 463 संपर्क हैं जिनकी एनआईए गहन पड़ताल कर रही है। कई मौकों पर पाकिस्तान और मलेशिया को कॉल किए गए हैं। इन सभी नंबरों की जांच की जा रही है, और जांचकर्ताओं का कहना है कि द रेजिस्टेंस फ्रंट के फंडिंग नेटवर्क का पता लगाने के लिए यह बेहद जरूरी है।
ये खुलासा इस नेटवर्क का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण हैं, और ये भारत को एफएटीएफ के समक्ष पाकिस्तान को बेनकाब करने में मदद करेंगे। भारत टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ केस बना रहा है। उसे वापस ग्रे लिस्ट में शामिल करने पर भारत जोर दे रहा है। द रेजिस्टेंस फ्रंट का गठन 2019 में कम होते हिज्बुल मुजाहिदीन को रिप्लेस करने के लिए किया गया था। माना गया था कि इलाके में उसका प्रभाव कम हो रहा है और स्थानीय आतंकी गतिविधियों को एक नई पहचान देने के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है। इसका गठन लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों पर पर्दा डालने के लिए किया गया। हमलों को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के बजाय स्वदेशी प्रतिरोध के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई। यह वास्तव में लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नया रूप था, जिसे वैश्विक समुदाय को गुमराह करने और एफएटीएफ जैसी संस्थाओं के दबाव को कम करने के लिए डिजाइन किया गया था।
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज
– वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में विकास दर 7.8 प्रतिशत रही
नयी दिल्ली । अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून अवधि) में 7.8 प्रतिशत रही है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 6.5 प्रतिशत थी। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के तहत आने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से शुक्रवार को दी गई। एनएसओ के द्वारा जारी किए गए डेटा के मुताबिक, अप्रैल-जून अवधि में देश की रियल जीडीपी 47.89 लाख करोड़ रुपए रही है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 44.42 लाख करोड़ रुपए थी। समीक्षा अवधि में नॉमिनल जीडीपी करंट प्राइस में 86.05 लाख करोड़ रुपए रही है, जो कि वित्त वर्ष 25 की समान अवधि के आंकड़े 79.08 लाख करोड़ रुपए से 8.8 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की मजबूत वृद्धि दर से रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) ग्रोथ 7.6 प्रतिशत पर रही है। वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्रों की रियल जीवीए ग्रोथ 3.7 प्रतिशत रही है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1.5 प्रतिशत थी। द्वितीय क्षेत्र की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 7.5 प्रतिशत रही है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग की विकास दर 7.7 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन की विकास दर 7.6 प्रतिशत रही है। तृतीय क्षेत्र, जिसमें सर्विसेज को शामिल किया जाता है, की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 9.3 प्रतिशत रही है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में नॉमिनल टर्म में 9.7 प्रतिशत बढ़ा है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 4 प्रतिशत था। हालांकि, निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) की विकास दर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 7 प्रतिशत रही है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 8.3 प्रतिशत थी।




