Monday, April 6, 2026
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भारत आत्मा : विवेकानंद

शुभांगी उपाध्याय

इंग्लैंड से विदा लेने से पूर्व एक अंग्रेज मित्र ने उनसे पूछा, “स्वामीजी, चार वर्षों तक विलासिता, चकाचौंध तथा शक्ति से परिपूर्ण इस पश्चिमी जगत का अनुभव लेने के बाद अब आपको अपनी मातृभूमि कैसी लगेगी ?”
स्वामीजी ने उत्तर दिया, “यहाँ आने से पूर्व मैं भारत से प्रेम करता था परंतु अब तो भारत की धूलिकण तक मेरे लिए पवित्र हो गयी है। अब मेरे लिए वह एक पुण्यभूमि है – एक तीर्थस्थान है!”

ऐसी थी हमारे परम पूजनीय स्वामी विवेकानंद की भारत भक्ति। १२ जनवरी १८६३ को कलकत्ता में जन्में, ठाकुर श्रीरामकृष्ण परमहंस देव के परमप्रिय शिष्य, गुरुदेव के आशीर्वाद से साधारण नरेन्द्र से असाधारण स्वामी विवेकानंद बन गए। परिव्राजक सन्यासी के रूप में स्वामीजी भारत भ्रमण करते हुए अंत में भारतवर्ष के अंतिम छोर, ध्येयभूमि कन्याकुमारी पहुँचते हैं। १८९२, दिसंबर माह की २५,२६ और २७ तारीख को महासागर के मध्य स्थित शिला पर भारत के भूत, भविष्य, वर्तमान का ध्यान करते हुए उन्हें साक्षात जगतजननी भारत माता के दिव्य स्वरूप के दर्शन होते हैं और साथ ही अपना जीवनोद्देश्य भी प्राप्त होता है।

शिकागो (अमेरिका) में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में पहुंचने से पूर्व स्वामीजी को अनगिनत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। तत्पश्चात ११ सितंबर १८९३ के पावन दिवस पर गुरु रामकृष्ण प्रेरित ऐसी ओजस्वी वाणी गूंजी की आज भी दुनिया याद करती है। यह केवल स्वामीजी की दिग्विजय ही नहीं अपितु भारतवर्ष के पुनरुत्थान का शंखनाद भी था। सम्पूर्ण विश्व भारत के प्रति, यहां की सभ्यता-संस्कृति के प्रति नतमस्तक हो गया। स्वामीजी रातों – रात लोकप्रिय और प्रसिद्ध हो गए। उनके सम्मान में राजोचित सत्कार का आयोजन किया गया। स्वामीजी का कक्ष भौतिक सुख सुविधाओं से परिपूर्ण था, किन्तु उस विलासितापूर्ण बिछौने पर एक सन्यासी को नींद कहां आने वाली थी! उनका हृदय तो भारत के लिए क्रंदन करता रहा और वे फर्श पर लेट गए। द्रवित होकर सारी रात एक शिशु के समान फूटकर रोते रहे और ईश्वर के सम्मुख भारत के पुनरुत्थान की प्रार्थना करते रहे। भारत के प्रति उनका ऐसा ही ज्वलंत प्रेम था।

चार वर्षों के विदेश प्रवास के पश्चात भारत लौटने के लिए अधीर होते स्वामीजी, जब भारत की मिट्टी पर १५ जनवरी १८९७ को अपना पहला कदम रखते हैं। अपने मन के आवेग को वे रोक नहीं पाते और स्वदेश की मिट्टी में लोट-पोट होने लगते हैं तथा भाव-विभोर होकर रोते हुए कहने लगते हैं कि, “विदेशों में प्रवास के कारण मुझमें यदि कोई दोष आ गए हों तो हे धरती माता! मुझे क्षमा कर देना।”

एक बार किसी ने स्वामीजी से कहा की सन्यासी को अपने देश के प्रति विशेष लगाव नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे तो प्रत्येक राष्ट्र को अपना ही मानना चाहिए। इस पर स्वामीजी ने उत्तर दिया – “जो व्यक्ति अपनी ही माँ को प्रेम तथा सेवा नहीं दे सकता, वह भला दूसरे की माँ को सहानुभूति कैसे दे सकेगा ?” अर्थात पहले देशभक्ति और उसके बाद विश्वप्रेम!

स्वामीजी की महान प्रशंसिका तथा उन्हें अपना मित्र माननेवाली अमेरिकी महिला “जोसेफिन मैक्लाउड” ने एक बार उनसे पूछा था, “मैं आपकी सर्वाधिक सहायता कैसे कर सकती हूँ?” तब स्वामीजी ने उत्तर दिया था, “भारत से प्रेम करो।”

स्वयं के विषय में बोलते हुए उन्होंने एकबार कहा था कि वे “घनीभूत भारत” हैं। वस्तुतः उनका भारत-प्रेम इतना गहन था कि आखिरकार वे भारत की साकार प्रतिमूर्ति ही बन गए थे। कविश्रेष्ठ रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उनके विषय में कहा था कि, “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं, तो विवेकानंद का अध्ययन कीजिये।”

स्वामीजी और भारत एकाकार हो गए थे। भगिनी निवेदिता के शब्दों में यही विश्वास प्रतिध्वनित होता है – “भारत ही स्वामीजी का महानतम भाव था। भारत ही उनके हृदय में धड़कता था, भारत ही उनकी धमनियों में प्रवाहित होता था, भारत ही उनका दिवा-स्वप्न था और भारत ही उनकी सनक थी। इतना ही नहीं वे स्वयं ही भारत बन गए थे। वे भारत की सजीव प्रतिमूर्ति थे। वे स्वयं ही – साक्षात भारत, उसकी आध्यात्मिकता, उसकी पवित्रता, उसकी मेधा, उसकी शक्ति, उसकी अन्तर्दृष्टि तथा उसकी नियति के प्रतीक बन गए थे।”

स्वामीजी सभी दृष्टियों से अतुल्य थे। ऐसा कोई भी न था, जो भारत के प्रति उनसे अधिक लगाव रखता हो, जो भारत के प्रति उनसे अधिक गर्व करता रहा हो और जिसने उनसे अधिक उत्साहपूर्वक इस राष्ट्र के हित के लिए कार्य किया हो। उन्होंने कहा था, “अगले ५० वर्षों तक के लिए सभी देवी-देवताओं को ताक पर रख दो, पूजा करो तो केवल अपनी मातृभूमि की, सेवा करो अपने देशवासियों की, वही तुम्हारा जाग्रत देवता है।”

स्वामीजी ने देशभक्ति का ऐसा राग छेड़ा, कि वह आज भी गुंजायमान है। बहुत से क्रांतिकारी, देशभक्तों ने उन्हें अपना आदर्श मानकर, उनके बताए रास्ते पर चलकर अपना सर्वस्व, भारत माँ को समर्पित कर दिया। इनमें वीर सावरकर, महात्मा गांधी, सरदार भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक, महर्षि अरविंद, रवीन्द्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, बिपिन चंद्र पल, जमशेद जी टाटा, विनोबा भावे, ब्रह्मबांधव उपाध्याय और अनेकों अन्य महापुरुषों के नाम उल्लिखित हैं।

उन्होंने भारत ही नहीं अपितु समस्त विश्व को राष्ट्रभक्ति का मर्म समझाया। जॉन हेनरी राइट, मैक्स म्युलर, जे.जे.गुडविन, जॉन हेनरी बैरोज़, मार्क ट्वैन, रोमा रोला, भगिनी क्रिस्टीन, भगिनी निवेदिता आदि इनसे सर्वाधिक प्रेरित हुए।

वर्तमान में भी कुछ प्रसिद्ध हस्तियाँ जैसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, योग गुरु स्वामी रामदेव, श्री अन्ना हजारे, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा आदि अनेकों महान विभूतियाँ स्वामीजी को अपना आदर्श मानती हैं।

स्वामी रामतीर्थ जैसे महानुभाव ने भी स्वामीजी से ही प्रेरित होकर एक श्रेष्ठ रचना की –
“भारत की यह भूमि मेरा अपना शरीर है। कन्याकुमारी है मेरे पद। हिमालय मेरा मस्तक। मेरे ही केशकलापों से बहती है गंगा, मेरे मस्तक से निकलती है सिन्धु और ब्रह्मपुत्र। विंध्याचल है मेरा कौपीन। कोरमंडल है मेरी वाम जंघा और मलबार दक्षिण। मैं ही सम्पूर्ण भारत हूँ, पूर्व और पश्चिम मेरे बाहु और मैंने उन्हें फैलाया है मानवता का आलिंगन करने के लिए। जब मैं चलता हूँ, मानो भारत चलता है, जब मैं बोलता हूँ, भारत बोलता है। मैं श्वास लेता हूँ भारत श्वास लेता है। मैं ही भारत हूँ।”

(कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम. फिल की छात्रा और विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के पश्चिम बंग प्रान्त, विभाग युवा प्रमुख)

अब एनपीएस खाता खोलना हुआ और आसान

नयी दिल्ली :  पेंशन कोष नियामक पीएफआरडीए ने कहा है कि उसने राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) से जुड़ने के लिए वन-टाइम पासवर्ड सुविधा पेश की है। नियामक पहले से ई-हस्ताक्षर के जरिये बिना किसी कागजी दस्तावेज के ऑनलाइन एनपीए खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध करा रहा है। अब नियामक ने एनपीएस खाता खोलने तथा उसे और आसान बनाने के लिए कदम उठाया है।
इसके तहत अंशधारक अब ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) के जरिये अपना एनपीएस खाता खोल सकते हैं। इसमें पीओपी के लिए पंजीकृत बैंक के ग्राहक अगर संबंधित बैंक के इंटरनेट बैंकिंग के जरिये एनपीएस खाता खोलना चाहते हैं, वे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त कर खाता खोल सकते हैं। पीएफआरडीए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत 3.60 करोड़ अंशधारकों के खातों का नियमन कर रहा है। इसके तहत कुल प्रबंधन अधीन परिसपंत्ति 4.55 लाख करोड़ रुपये है।
क्या है एनपीएस
राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली एक पेंशन सह निवेश योजना है जिसे भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को वृ‍द्धावस्‍था सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू किया गया है। भारत का कोई भी नागरिक (आवासीय और प्रवासी दोनों) जिसकी आयु 18 से 65 वर्ष की आयु (एनपीएस आवेदन जमा कराने की तिथि के अनुसार) है, एनपीएस में शामिल हो सकता है।
यह योजना सुरक्षित और विनियमित बाजार आधारित रिर्टन के जरिए प्रभावशाली रूप से आपकी सेवानिवृत्ति की योजना बनाने हेतु एक आकर्षक दीर्घकालिक बचत मार्ग से प्रारंभ होती है। इस योजना का विनियमन पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा किया जाता है। पीएफआरडीए द्वारा स्‍थापित राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली न्‍यास (NPS Trust) एनपीएस के अंतर्गत सभी आस्तियों का पंजीकृत मालिक है।

अपनी प्रतिभा का जलवा अब रोपोसो पर बिखेरेंगे सनातन

बलियापुर : भारत सरकार ने 59 चाइनीज एप पर प्रतिबंध लगा दिया। इसमें कई एप ऐसे थे जो लोगों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं। इन्हीं में से एक टिक-टॉक। इस प्लेटफॉर्म ने कई युवाओं को रातोंरात स्टार बना दिया। इन्हीं में से एक है कसमाटांड़ बलियापुर के भाई-बहन की जोड़ी। टिक-टॉक बंद होने से पहले तक सनातन और सावित्री की टिक-टॉक आइडी ‘डांसर सनातन’ पर 2.6 मिलियन यानी 26 लाख फॉलोअर्स थे। दो दिन पहले बालीवुड के मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्या ने भी सनातन के वीडियो ‘याद सताए तेरी नींद चुराए दिलबर’ के साथ ड्यूएट भी किया। इससे पहले शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंदरा ने भी सनातन के वीडियो के साथ भी ड्यूएट किया था।

भारतीय एप ‘रोपोसो’ पर आये डांसर सनातन 

टिक-टॉक प्रतिबंध होने पर सनातन ने कहा कि एक गांव के गरीब भाई-बहन को स्टार बनाने में इस एप का बहुत बड़ा योगदान रहा। हमारी प्रतिभा देशभर में पहुंची। सरकार ने इसे बंद का निर्णय कुछ सोच-समझ कर ही लिया होगा। एक भारतीय एप ‘रोपोसो’ है, अब इसी पर मेरी आइडी होगी। भारतीय एप के मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। फिलहाल यूट्यूब पर मेरे दो लाख 18 हजार सब्सक्राइबर्स हैं। इंस्टाग्राम पर भी पांच हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं, इसे निरंतर आगे बढ़ाना है। हम भाई-बहन में प्रतिभा है, मंच मिलेगा तो इसे और आगे भी बढ़ाएंगे।

नौकरी नहीं मिली तो कला के रास्ते बुलंदियों पर पहुंचने का संजोया सपना

किसान परिवार से जुड़े सनातन कुमार महतो व उनकी बहन सावित्री कुमारी गांव में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त की है। सनातन ने एमए की शिक्षा प्राप्त की है तो सावित्री भी ग्रेजुएशन पूरी कर चुकी है। एमए की शिक्षा के बाद भी नौकरी नहीं मिली तो सनातन अपने खेतों में ही हाथ आजमाते हैं। साथ-साथ कला की साधना शुरू की। नृत्य में करियर बनाने की ठानी और शुरू हो गए। नृत्य का वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू किया। शुरू में सफलता नहीं मिली। अपना यू-ट्यूब चैनल बनाया। इंस्टाग्राफ पर खूब वीडियो शेयर किया। टिक-टॉक को भी माध्यम बनाया। अचानक हिट हो गए। सोमवार तक टिक-टॉक पर 2.6 मिलियन फॉलोअर्स थे। इस मंच पर सनातन और उनकी बहन के नृत्य का 3 हजार से ज्यादा वीडियो उपलब्ध है। इनका एक नृत्य का वीडियो ‘प्यार हमारा अमर रहेगा’ गीत पर बना खूब वायरल हुआ।

आर्थिक तंगी के कारण छोडऩी पड़ी नृत्य क्लास

सनातन ने बताया कि वे पहले यू ट्यूब पर वीडियो बनाकर डाला करते थे। इसके बाद उन्होंने टिक-टॉक को बेहतर प्लेटफॉर्म माना। शुरुआत में उन्हेंं संघर्ष करना पड़ा। लेकिन, बाद में उनके वीडियो हिट होने लगे। लोग उन्हेंं खूब पसंद करने लगे। भाइ-बहन ने अबतक तीन हजार से अधिक वीडियो बनाए हैं। जिन्हेंं अबतक 90 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। सनातन और उसकी बहन सावित्री के घर की माली हालत ठीक नहीं है। सनातन ने बताया कि उसे बचपन से ही डांस का शौक है। उसने अपनी इस प्रतिभा को उभारने के लिए डांस क्लास ज्वाइन की थाी लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण क्लास छोडऩा पड़ा। बाद में योगा व मार्शल आर्ट की भी प्रैक्टिस बरमसिया में की। बहन सावित्री बताती है कि गांव के प्राइवेट स्कूल व घर में कोचिंग क्लास चलाती हैं। गांव की लड़कियों की प्रतिभा निखारने का भी संदेश अपने वीडियो के माध्यम से देती हैं।

(साभार – दैनिक जागरण)

वृंदावन की विधवाओं और भूखों को खाना खिलाने में जुटे शेफ विकास खन्ना

नयी दिल्ली : भारतीय मिशेलिन स्टार शेफ विकास खन्ना अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से हटकर समाज सेवा पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने बताया है कि आजकल वह एक सोशल मीडिया कैम्पेन के माध्यम से वृहद पैमाने पर एक खाद्य वितरण अभियान को आयोजित करने में लगे हुए हैं। वह इस काम में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें एक निर्देशक के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘द लास्ट कलर’ की रिलीज के बारे में सोचने तक का भी वक्त नहीं है।
विकास के इस अभियान हैशटैगफीडइंडिया का मकसद कोविड-19 महामारी की इस मुश्किल घड़ी में मुंबई में हजारों की तादात में डब्बावालों और वृंदावन की विधवाओं को खाने के साथ-साथ जरूरी सामानों की आपूर्ति कराना है।
उन्होंने कहा, “इसकी शुरुआत एक स्पैम ईमेल से हुई। 1 अप्रैल को मैंने एक ईमेल देखा जिसमें कहा गया था कि भारत में लॉकडाउन के बाद यहां के वृद्धाश्रमों को आपके सहारे की जरूरत है। मैंने उसे मेल को डिलीट कर दिया, लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि आप गलत ट्रेन में चढ़ जाते हैं, जो आपको सही मंजिल पर पहुंचा देती है और इस मामले में मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ।”

पुराना स्मार्टफोन या लैपटॉप बेचने से पहले रहें सावधान

पुराना फोन या लैपटॉप बेचना आसान होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके लिए कितना बड़ा खतरा साबित हो सकता है। दरअसल, पुराने फोन, लैपटॉप या हार्ड डिस्क में जरूरी डाटा होता है और कई लोग उसे डिलीट या क्लीन किए बगैर दूसरों के हाथ में सौंप देते हैं। यह डाटा न सिर्फ आपकी प्राइवेसी पर सेंध लगा सकता है बल्कि कई बार बैंक संबंधित डाटा भी लीक हो सकता है।
डाटा बेचने को लेकर एंटीवायरस सॉफ्टवेयर निर्माता केस्परकी लैब्स ने अपने एक शोध में कहा था कि डार्क वेब में कंप्यूटर/फोन यूजर का डाटा बेचा जाता है। इन खतरों को देखते हुए जरूरी है कि हम यह जानें कि कैसे अपनी जानकारी को सुरक्षित रखा जाए।
फोन को ऐसे करें क्लीन
स्मार्टफोन अब कॉन्टेक्ट और फोटो तक सीमित नहीं है। बल्कि कई एप तो आपके घर का पता और बैंक कार्ड की जानकारी तक सेव कर लेते हैं। यहां तक कि फोन में कई जरूरी दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, पासपोर्ट और लाइसेंस की फोटो होती है, जो गलत हाथ में पहुंचने के बाद काफी नुकसान पहुंचा सकती है।
फोन को करें फैक्टरी री-सेट
इसके लिए फोन की सेटिंग में जाएं, इसके बाद री-सेट वाले विकल्प पर क्लिक करें। इसमें दिए गए फैक्टरी री-सेट के विकल्प पर क्लिक कर दें। ध्यान रखें कि अलग-अलग कंपनियों के फोन में विकल्प में बदलाव हो सकता है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्च फर्म केसपरकी लैब ने अपनी रिसर्च में दावा किया था कि डार्क वेब पर लोगों का डिजिटल डाटा 3,500 रुपए से भी कम में बेचा जा सकता है।
लैपटॉप से डिलीट करें पुराना डाटा
पुराना लैपटॉप बेचने से पहले उसका पूरा डाटा डिलीट करने भर से आप अपने डाटा की सुरक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि उस डाटा को रिकवरी सॉफ्टवेयर से दोबारा प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में ‘फाइल शेयरश्रेडर’ सॉफ्टवेयर मददगार होगा। http://www.fileshredder.org/ पर जाकर मुफ्त डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा भी और सॉफ्टवेयर इंटरनेट पर मौजूद हैं।
– यह सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होने के बाद एक छोटी विंडो खुलेगी।
– इसमें एड फाइल्स, एड फोल्डर और शेर्ड फ्री डिस्क स्पेस जैसे तीन विकल्प मिलेंगे।
– लैपटॉप में मौजूद पूरा डाटा डिलीट करने के लिए तीसरे विकल्प ‘शेर्ड फ्री डिस्क स्पेस’ चुनना होगा।
– इससे हार्ड डिस्क और अन्य लोकेशन पर सेव डाटा हमेशा के लिए डिलीट हो जाएगा।
– ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में थोड़ा सा समय लगता है।

आज तक छुआ नहीं मोबाइल, अंशु बनी टॉपर

मजदूरी करते हैं पिता

मेरठ :  यूपी बोर्ड के हाईस्कूल की परीक्षा में अंशु यादव सबसे आगे रही।   मेरठ जिल में टॉप करने वाली अंशु यादव के पिता मजदूरी करते हैं। जिले में टॉप कर पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।  अंशु यादव ने बताया कि उसके पिता अंगद यादव मजदूरी करते हैं और माता गीता देवी गृहणी हैं। दो बड़े भाई हैं। अंशु बताती है कि उसने कोई कोचिंग नहीं ली। उसके भाई ने पढ़ाया और अब आगे की पढ़ाई भी अपने भाई के साथ करेगी। वह उसे सिविल के लिए गाइड करेगा।
अंशु ने बताया कि उसके घर में किसी के पास टच फोन नहीं है। इसलिए ऑनलाइन शिक्षा से वह दूर है। सोशल साइट का अनुभव भी नहीं है। आनलाइन पढ़ाई में क्या हो रहा है। उसकी जानकरी भी नहीं है। कक्षा 11वीं की पढ़ाई भाई कराता है। कुछ पुरानी बुक्स हैं, तो कुछ नई बुक्स का इंतजाम कर लिया और इससे 11वीं की पढ़ाई जारी की हुई है। अंशु ने बताया कि उसने कभी पढ़ाई के घंटे नहीं गिने। जब पढ़ने बैठती थी तो बस पढ़ती रहती थी। कहीं कोई दिक्कत आई तो भाई रवि से पूछकर समस्या का हल कर लेती है।
आईएएस बनने का सपना और समाज में बदलाव का लक्ष्य
अंशु का सपना आईएएस बनने का है। आईएएस बनकर वह समाज में बदलाव करेगी। अंशु कहती है कि समाज में शुरुआत से ही बेटियों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता है। वह खुद आगे बढ़कर समाज को प्रेरित करेगी और अपनी मिसाल कायम करेगी, ताकि बेटियों को पढ़ाया जाए।
टापर अंशु यादव ने बताया कि पिता मजदूरी करते हैं और कोरोना काल में मजदूरी का काम भी बंद हो गया। ऐसे में तमाम परेशानियां आई, लेकिन स्थिति के अनुसार ही खुद को ढाल लिया। अब 10 से 15 दिन हुए हैं पापा का काम शुरू हो गया है। कोरोना काल की परिस्थितियों ने बहुत कुछ सिखाया। मुसीबतों में किस तरह से चलना चाहिए और कैसे काम करना चाहिए। यह सभी कुछ आ गया है।
स्कोर कार्ड
97 हिंदी, 94 इंग्लिश, 96 गणित, 86 साइंस, 91 सोशल साइंस, 92 कम्यूटर

तनाव को कम कर ज्‍यादा सकारात्‍मक बनाता है संगीत

आंतरिक शांति … आंतरिक शांति … आंतरिक शांति! कुंग फू पांडा के मास्टर शिफू की तरह, हम सभी आनंद और आंतरिक शांति पाना चाहते हैं। लेकिन उनकी तरह, मन की इस तरह की स्थिति के बाद, इस उपलब्धि को हासिल करना आसान है। लेकिन शायद, वह जानता था कि संगीत उसकी इस कोशिश में मदद कर सकता है, इसलिए वह ज्यादा सफल रहा होगा।
संगीत आपके शरीर और दिमाग को बेहतर करता है
कॉमप्लीमेंटरी थैरेपीज़ इन मेडिसिन नामक पत्रिका में 2015 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जब रोगियों को अस्पताल की देखभाल के साथ म्यूजिक थेरेपी भी दी गई, तो उन्होंने दर्द, चिंता, हृदय गति और रक्तचाप की परेशानी को बहुत कम महसूस किया। सबसे महत्वपूर्ण बात, संगीत आपके हैप्पी हार्मोन को बढ़ाता है
वैज्ञानिक रूप से कहें, तो यह आपको निर्वाण की स्थिति में पहुंचा सकता है। आप पूछेंगे कैसे? तो इस तरह की अच्छे संगीत से आपकी बॉडी में सेरोटोनिन, डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन जैसे हैप्पी हार्मोन का स्राव होने लगता है। आप जान कर हैरान होंगे कि संगीत आपके लिए और क्या कर सकता है?
यहां हम वे फायदे बता रहे हैं जिनसे संगीत आपको शारीरिक और मानसिक तंदरुस्ती देता है:
1 संगीत आपका मूड अच्छा करता है
संगीत एक बेहतरीन मूड एलीवेटर है। इसलिए जब भी आप खुद को उदास महसूस करें तो अपनी पसंद का संगीत सुनें। यह आपको फि‍र से खुश और ऊर्जावान महसूस करवाने में मदद करेगा।
2 संगीत नींद को आसान बनाता है
पसंदीदा धुन या संगीत सुनने से तंत्रिकाओं को शांत करने में मदद मिलती है, जिससे नींद आसानी से आ जाती है। असल में, शोधकर्ताओं का तो यहां तक मानना है कि संगीत पुराने से पुराने स्ली्प डिसऑर्डर यानी नींद के विकारों को दूर करने में भी मददगार है।
3. यह तनाव को कम करता है
जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के एक न्यूरो सर्जन विशेषज्ञ डॉ. रॉनी एनक द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि संगीत तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने में मदद कर सकता है।
4 संगीत आपको दर्द से राहत दिलाता है
एंडोर्फि‍न आपके शरीर का प्राकृतिक दर्द निवारक है। शांत संगीत इसे आपके आपके शरीर द्वारा उत्पादित प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में एंडोर्फिन उर्फ को आमंत्रित करता है। तो, चाहे वह दिल तोड़ने वाला हो या सिरदर्द, संगीत दोनों के लिए काम करता है।
5. फोकस बढ़ाता है संगीत
आप चाहें तो इस बात की गारंटी ले सकते हैं कि इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक आपका फोकस बढ़ाने में मदद करता है। खासतौर से तब जब डेडलाइन आपके सर पर हो।
6. वर्कआउट में भी मददगार है संगीत
संगीत ऊर्जा का सदाबहार स्रोत है। खासकर तब जब आप जिम में वर्कआउट कर रहे होते हैं। यह एड्रेनिल के स्तऊर को बढ़ा कर टेम्पो सेट करने में मददगार है। यह भी देखने में आया है कि जब आप वर्कआउट के दौरान सही ट्रैक सुनते हैं तो आपको उसका ज्याकदा लाभ होता है। आप इसे खुद आजमाकर देख सकते हैं।
(साभार – हेल्‍थ शॉट्स)

सुशांत सिंह राजपूत का घर बनेगा ‘मेमोरियल

पटना : सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को अपने मुंबई वाले घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। सुशांत के धन के 12 दिन बाद अब परिवार ने आधिकारिक बयान जारी किया। सुशांत का परिवार उन्हें गुलशन कहता था। इस बयान में लिखा है, ‘सुशांत बहुत समझदार थे। वह हर बात जानना चाहते थे। उन्होंने बिना रुकावट के सपने देखे और उन्हें पूरा भी किया। वह हमारे परिवार का गर्व थे। उनका टेलिस्कोप उनके लिए सबसे जरूरी था। सुशांत अपने हर फैन को महत्व देते थे। हमारे गुलशन को इतना प्यार करने के लिए आप सभी को बहुत शुक्रिया’। ‘हमें यह यकीन ही नहीं हो रहा कि फिर से उसकी हंसी सुनने को नहीं मिलेगी, हम उसकी चमकती हुई आंखें फिर नहीं देख पाएंगे, हम विज्ञान से जुड़ी उसकी बातें फिर नहीं सुनेंगे। उसके जाने से परिवार में एक कमी आ गई है जो कभी पूरी नहीं होगी’। सुशांत के परिवार ने इस बयान में बताया कि उनका पटना स्थित घर मेमोरियल में तब्दील किया जाएगा। यहां सुशांत से जुड़ी चीजों को रखा जाएगा जिसमें उनकी हजारों किताबें, उनका टेलिस्कोप, फ्लाइट सिम्यूलेटर जैसी तमाम चीजें उनके फैन्स के लिए होंगी। सुशांत के परिवार ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत फाउंडेशन (SSRF) की स्थापना का फैसला लिया है जो सिनेमा, साइंस और स्पोर्ट्स से जुड़ी युवा प्रतिभाओं को सहयोग देगा।

दिल्ली में कोरोना प्लाज्मा बैंक शुरू

 नयी दिल्ली : कोरोना वायरस से जंग लड़ रही दिल्ली में आज से प्लाज्मा बैंक खुल गया है। मुख्यमंत्री अरविंद ने इसकी शुरुआत की। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा कोरोना मरीजों से ठीक होने के बाद प्लाज्मा डोनेट करने की गुजारिश की। केजरीवाल ने बताया कि कौन प्लाज्मा डोनेट कर सकता है और कौन नहीं। दिल्ली के सीएम ने कहा कि जबतक कोरोना की वैक्सीन नहीं आती, तबतक प्लाज्मा मददगार साबित हो सकता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा ‘यह देश भर में पहला प्लाज्मा बैंक है। प्लाज्मा डोनेट करने के इच्छुक व्यक्ति 1031 नंबर पर फोन करके अपनी जानकारी दे सकते हैं। इसके अलावा 8800007722 पर व्हाट्सएप करके प्लाज्मा डोनेट करने के इच्छुक व्यक्ति अपना पंजीकरण करा सकेंगे।’
 कौन दे सकता है प्लाज्मा
 उसे कोरोना हुआ होना चाहिए, जिससे वह ठीक हुआ हो
 ठीक हुए कम से कम 14 दिन हो गए हैं
 डोनर की उम्र 18 से 60 साल के बीच होनी चाहिए
कौन नहीं दे सकता प्लाज्मा
 जिनका वजन 50 किलो से कम हो
जो महिला एक भी बार गर्भवकती हुई  हो वो नहीं दे सकती
शुगर यानी मधुमेह के मरीज नहीं दे सकते
हाइपरटेंशन वाले नहीं दे सकते
बीपी 140 के ऊपर रहता है तो नहीं दे सकते
कैंसर से जो लोग ठीक हुए हैं वो नहीं दे सकते
जिनको किडनी, हार्ट, लीवर की बीमारी वाले नहीं दे सकते