Saturday, June 20, 2026
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किसान ही बनेंगे बीज बैंक के मालिक, आत्मनिर्भर भारत योजना में दिया जाएगा लाइसेंस

नयी दिल्ली : देश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री की घोषणा फलीभूत हो रही है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण विभाग ने बीज बैंक योजना को बड़े पैमाने पर शुरू करने का एलान किया है। इसके तहत अब देशभर में जिलेवार बीज बैंक बनेंगे। इसके लिए किसानों को ही बीज बैंक का लाइसेंस दिया जाएगा। इससे किसान बीज के उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। इस योजना में देश के साढ़े छह सौ जिलों में बीज बैंक खोले जाने हैं। देश में इस समय लगभग तीस फीसदी बीज किसान स्वयं बनाता है बाकी बीजों के लिए उसे बाजार और सरकारी सस्ते बीजों की उपलब्धता पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऐसे में कई बार उसे बीज की गुणवत्ता के चलते बड़ी ही कम पैदावार या बीमार फसल जैसी दुश्वारियां भी झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में किसानों को इस दिशा में सक्रिय करने के लिए मंत्रालय ने पूर्व के लाइसेंस नियमों में भी काफी ढील दी है। इसमें अब  बीज बैंक के लाइसेंस के लिए कक्षा दस पास होना ही काफी होगा।
किसान को स्थानीय कृषि प्रसार केंद्र पर प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित कर दिया जाएगा। लाइसेंस के लिए अन्य योग्यताएं हैं उसके पास अपनी या बटाई अथवा पट्टेदारी में कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए। उसे राज्य स्तर से बीज के स्तर और मानकों के लिए निबंधन और प्रमाणन करना होगा।
सरकार द्वारा उन्हें एक मुश्त रकम प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाएगी। इसके अलावा भंडारण की सुविधा के लिए प्रशिक्षण के साथ उपलब्ध संसाधनों पर सब्सिडी भी दी जाएगी। बीज बैंक का लाइसेंस लेने वाले किसान को उसके बीज का बाजार दिलाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
बीज का मूल्य भी पहले से ही तय किया जाएगा। इसके लिए फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी पर 20 फीसदी राशि को जोड़कर प्रसंस्करण बीज के आधार पर क्रय मूल्य का निर्धारण राज्य बीज निगम करेगा। इसके लिए बीज निगम पहले प्रयास में बीज उत्पादक किसानों के खलिहानों से बीजों का संग्रहण करेगा।
नए बीज उत्पादक किसानों को बीज उत्पादन हेतु क्षेत्रीय प्रबंधन एवं केंद्रीय प्रभारी द्वारा आधार बीज मूल्य का भुगतान लेकर उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिला स्तर पर बीज बैंक हो जाने से किसान को अच्छे और सस्ते बीज मिलने की राह तो आसान होगी ही साथ ही किसान भी उच्च गुणवत्ता की फसल को उपजाने के लिए प्रोत्साहित होंगे, क्योंकि उन्हें इस प्रक्रिया के चलते महंगे बीजों से निजात और उत्पादक की विश्वसनीयता का लाभ मिल सकेगा।

पंचमी

पूजा सिंह 
शाम के चार बजे कॉलेज के गेट पर बड़ी हल-चल मची हुई थी जैसे बड़े दिनों बाद कुछ भूला सा मिल गया था कल पंचमी है दोस्तो ने खूब उत्साह से कहा माँ दुर्गा का पंडाल देखने चलेंगे।देखते तो परिवार के साथ भी हैं मगर दोस्तों के साथ देखने का मज़ा तो कुछ और ही है प्रताप ने कहा।बात पंचमी की हुई नही कि लड़कियों ड्रेस और खाने को ही ज्यादा महत्व देना सही समझा।कोई गाउन पहनने की बात कह रहा है और कोई जीन्स की किसी और ने बहुत ही खूबसूरत टॉप की बात की ,अच्छा हमारे चप्पल कैसे जंचेंगे? कॉलेज का गेट इन्ही बातों से गूंज रहा था।राखी अब भी चुप थी सबकी बातों पर मुस्कुरा कर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थी, दिखावा ऐसे जैसे उसके पास भी इन सारी चीजों की कमी नही है, और सोचे जा रही थी कि एक खूबसूरत टॉप और जीन्स जैसे कपड़े पहन कर ही लोग मॉर्डन बनते हैं?मेरे पास जो भी है जैसा भी है वही पहनूँगी और अच्छी भी लगूंगी लेकिन कपड़ो से कोई मॉर्डन नही बनता फिर भी इसे पहनने के अपने शौक भी तो होते हैं कॉलेज के समय में अगर कुरती के अलावा कोई और कपड़े पहन कर शौक न पूरे करू तो कब? अगर कोई मना न करता तो शायद इनकी तरह मैं भीकुछ स्टाइलिश पहन पाती! और ऊपर से आर्थिक तंगी। किसी भी तरह की जिम्मेवार बनने के पहले डर और आर्थिक व्यवस्था पहले सताती है।अचानक पुनिता ने एक झटका दिया राखी अपने असल दुनियां से उनकी दुनिया में फिर से वापस आगई ।हम लोगों ने एस्प्लेनेड जाने का प्लान किया है माही को नई चप्पल चाहिये चलो सब साथ मे चलते हैं पुनिता ने कहा।मगर मैं तो सिर्फ तीस रुपये लेकर आई हूँ अपने पैसे का बैग आज जल्दी में घर पर ही छोड़ दिया राखी ने जैसे बात छुपाने की कोशिश की।तेरे मेट्रो का किराया मैं दे दूंगी तू बाद में मुझे दे देना पुनिता ने उसका हाथ खीचते हुए कहा।
दुर्गा पूजा का बाज़ार धरमतल्ला बाज़ार को काफी गरम किए हुए थी किसी भी चीज पर नज़र जाती तो ठहर ही जाती थी झमाझम भीड़ में एक अलग ही हलचल थी।रंग बिरंगे टॉप और गाउन वह अपने कल्पना में पहन रही थी फिर भी खुद को कठोर और स्वाभिमानी बनाते हुए वह अपने पापा का शुक्रिया करती क्योंकि उनके बदौलत हर रोज़ वह कॉलेज आपाती थी मगर माँ के ताने हर रोज़ घर से निकलने के पहले मुँह मीठा करवाते झूठ भी तो नही कहती थी उस तीस रुपये के घर मे कोई काम हो सकता था कि जैसे मै बहाने से घर से अलग रहना चाहती होऊं।
घर पहुँचने में शाम के सात बज गए थे सीढिया चढ़ने में डर लग रहा था कि क्या बहाना बनाऊ जिससे माँ की डांट से बचा जा सके उनकी हर बार की एक ही बात राखी को याद दिलाती थी कि उसकी जाति स्त्री जाति है ठीक ही तो कहती है एक कलम चलाने से परिवार कैसे संभाला जा सकता है माँ अपने जीवन मे परिवार को संभालते जो कष्ट भोगते आई है शायद उससे मुझे भी रूबरू करवाना चाहती हो ताकि आगे चल कर ससुराल का ताना ना सहना पड़े।
आज पंचमी है दिन में ही घूमने का एक प्रोग्राम बनाया गया है मगर बड़ी मुश्किल से माँ को मनाया है आठ बजे तक आजाने का वायदा कर और और पापा से दो सौ रुपये की माँग कर जाने को तैयार हुई बड़े शौक से दीदी के घर से मिले कुरती को पहना और घर स निकली
माझेरहाट रेलवे स्टेशन पे सारे दोस्त एक साथ मिले एक दूसरे की तारीफों के तो जैसे पुल बंधे हैं, राखी तू अच्छी लग रही है मगर हम लोगों ने तो ड्रेस कोड जीन्स रखा था वो पहनती तो एक अच्छा ग्रुप बनता ।राखी का उस समय बिगड़ा तो कुछ भी नही मगर अंदर से बाहर तक झकझोर सी गई उसे लगा वह भला आई ही क्यों?अब सब अपनी तरह से सेल्फी लेंगे मुझ पर दया करके मुझे भी शामिल करेंगे खैर दोस्त ऐसे तो नही है सोच कर आगे बढ़ी।प्रताप ने कहा मौलाली से शुरू करेंगे औऱ न्यू अलीपुर देखते हुए घर जाएंगे हाँ ठीक है माही ने हामी भरी,
न्यू अलीपुर में 4:30 बजे ही कितनी भीड़ है ना जाने कितनी देर लाइन में खड़े रहना पड़ेगा? पंडाल देख कर निकलने में शाम के सात बज गए थे घर भी जाना है नही अब नही घुमुंगी। सुनो मेरी तबियत ठीक नही लग रही है घर जाना है और बिना किसी के उत्तर पाए सरपट निकल पड़ती है। बस को भी सरपट भगा देना चाहती है सात से साढ़े सात समय तीर की तरह निकलता जा रहा है उफ्फ अब ये दुर्गा पूजा का जाम मेरी ही गलती हुई क्यों नही वो जल्दी निकल गई आई भी तो कौन सा दोस्तो में खुद को को शामिल कर पाई । आठ बजने वाले हैं अब भी बस बीस मिनट की दूरी पर है बात कुछ बड़ी नही है थोड़ी सी अपनी ज़िंदगी जीने ही तो गई थी कोई बड़ा पाप नही किया क्या पुनिता और माही भी ऐसे ही डर रही होंगी नही शायद वे शाशन में नही अनुशाशन में है और यही तो ज़रूरत है बस थोड़ा सा खुलासा मिलने पर वे सांस ले सकती है बिगड़ नही सकती।राखी बिना किसी के सवाल किए खुद को जवाब दिए जा रही थी और मोबाइल की घंटी लगातार उसे घर की याद दिला रही थी।

जज भी आत्मनिर्भर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कर रहे सुनवाई, खुद टाइप कर रहे फैसले

नयी दिल्ली : कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर होने की अपील पर देश में कितना अमल होगा, यह तो समय बताएगा लेकिन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश मजबूरी में ही सही, लेकिन आत्मनिर्भर होने लगे हैं।
कोरोना महामारी के दौरान उच्चतम न्यायालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई के कारण न्यायाधीश कोर्ट मास्टर को आदेश लिखवाने के बजाय खुद ही अपना आदेश टाइप करने लगे हैं जिसका फायदा उन्हें खुद नजर आने लगा है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की टिप्पणी से तो कम से कम ऐसा ही लगता है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने मंगलवार को एक मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान अपने अनुभव साझा करते कहा कि वे वर्चुअल सुनवाई करते हुए जो भी आदेश देते हैं, उसे खुद ही लैपटॉप पर टाइप भी करते हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि मैं कोर्ट मास्टर को आदेश देने के बजाय अब खुद लैपटॉप पर आदेश लिखता हूं, क्योंकि यह डिक्टेशन देने के मुकाबले ज्यादा आसान, सरल और सहज होता है। लैपटॉप पर अपना खुद का आदेश टाइप करना बहुत अच्छा है, क्योंकि यह आदेश बहुत सटीक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इसका एक फायदा और है कि आदेश टाइप करने के बाद टाइपिंग के कारण होने वाली अशुद्धि को ठीक करने की जरूरत नहीं पड़ती।
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय में मार्च के मध्य से ही कोरोना को लेकर ऐहतियात बरती जाने लगी थी और कुछ दिनों तक तो केवल दोनों पक्षों और उनके वकीलों को ही अदालत कक्ष में सुनवाई के लिए जाने दिया जाता था। मीडियाकर्मियों का प्रवेश भी वर्जित था। बाद में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई शुरू होने लगी, जो अब भी जारी है। ऐसे में कोर्ट मास्टर मौजूद नहीं रह पाते हैं तो इससे मदद मिलेगी।

फ्लिपकार्ट ने पेश किया नया डिजिटल बाजार ‘होलसेल’

वॉलमार्ट इंडिया का किया अधिग्रहण
नयी दिल्ली/बंगलूरू : फ्लिपकार्ट समूह ने देश के 650 अरब डॉलर के थोक कारोबार बाजार में उतरने के लिए नए डिजिटल बाजार ‘फ्लिपकार्ट होलसेल’ शुरू करने की घोषणा की। साथ ही कंपनी ने वॉलमार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदी है।
वॉलमार्ट इंडिया देश में ‘बेस्ट प्राइस’ नाम से थोक दुकानों का परिचालन करती है। अभी इसके देशभर में 28 स्टोर हैं। फ्लिपकार्ट की ओर से यह घोषणा ऐसे समय की गयी है जब कंपनी ने हाल ही में वॉलमार्ट के नेतृत्व वाले निवेशकों के समूह से 1.2 अरब डॉलर का निवेश जुटाया है। हालांकि फ्लिपकार्ट ने वॉलमार्ट इंडिया के अधिग्रहण सौदे के मूल्य का खुलासा नहीं किया है।
गौरतलब है कि वॉलमार्ट इंडिया, दुनिया की सबसे बड़ी खुदरा कारोबार कंपनियों में से एक वॉलमार्ट के पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी है। वहीं फ्लिपकार्ट में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए वॉलमार्ट ने 2018 में 16 अरब डॉलर का निवेश किया था।
कम्पनी ने एक बयान में कहा कि ‘फ्लिपकार्ट होलसेल’ एक बी2बी (कंपनियों के बीच आपस में कारोबार) डिजिटल बाजार होगा। फ्लिपकार्ट अगस्त में इसका परिचालन शुरू करेगी। कंपनी ने कहा कि यह देश के खुदरा बाजार की जान किराना और लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान देगा। कंपनी छोटे कारोबार क्षेत्र को उचित मूल्य पर उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला में से चुनने का अवसर प्रदान करेगी।
फ्लिपकार्ट होलसेल का नेतृत्व कंपनी के वरिष्ठ कर्मी आदर्श मेनन करेंगे। वहीं वॉलमार्ट इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर अग्रवाल अधिग्रहण पूरा होने तक अपने पद पर बने रहेंगे। उसके बाद उन्हें वॉलमार्ट में ही कोई और जिम्मेदारी दे दी जाएगी। वहीं वॉलमार्ट इंडिया के करीब 3,500 अन्य कर्मचारी फ्लिपकार्ट में शामिल होंगे।

वाराणसी में खुलेगा देश का पहला कौशल विकास विश्वविद्यालय

यूपी के साथ बिहार और झारखंड के युवाओं को भी मिलेगा मौका

 वाराणसी : बनारस में कौशल विकास विश्वविद्यालय खुलने जा रहा है। यह पूर्वांचल के युवाओं को सौगात होगी। विश्वविद्यालय में कौशल मिशन के तहत तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा देने के साथ ही शोध भी होंगे। इसके अलावा निजी कम्पनियों की मदद से बाजार में मांग के अनुरूप अनुबंध पर पाठ्यक्रम भी संचालित होंगे। कौशल विकास मंत्रालय ने इस सम्बंध में जिला प्रशासन से प्रस्ताव मांगा है। विश्वविद्यालय के लिए करीब 30 से 50 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। प्रशासन ने पिंडरा में स्थित करीब 100 एकड़ सरकारी जमीन में यह हिस्सा देने की तैयारी शुरू कर दी है। पिंडरा एसडीएम को जमीन के राजस्व के रिकॉर्ड सहित अन्य दस्तावेज का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि मंत्रालय की माँग पर अगले हफ्ते तक जमीन के सम्बंध में प्रस्ताव बनाकर भेज दिया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी गति
जिलाधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय खुलना न केवल पूर्वांचल बल्कि यूपी, बिहार, झारखंड सहित आसपास के प्रदेशों के युवाओं के लिए यह सुनहरा मौका होगा। देशभर में कौशल विकास केंद्रों में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों के कौशल विकास की व्यवस्था अभी तक कहीं नहीं है। लिहाजा सरकार ने बनारस में विश्वविद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान को तेजी से गति देगा।
विवि में प्रस्तवित पाठ्यक्रम – हेल्थ केयर और फिजियोथेरेपी, वेलनेस मैनेजमेंट प्रोग्राम, डाटा कलेक्ट करने का प्रशिक्षण, कृषि की नवीन तकनीक आधारित पाठ्यक्रम, स्किल इन इलेक्ट्रिक व्हीकल
कौशल विकास को बढ़ावा व रोजगारपरक शिक्षा देने के उद्देश्य से सरकार विश्वविद्यालय खोलने जा रही है। जिला प्रशासन जमीन तलाश कर अगले हफ्ते तक मंत्रालय को प्रस्ताव भेज देगा।

प्रख्यात नृत्यांगना अमला शंकर का निधन

कोलकाता :  देश की मशहूर डांसर अमला शंकर का कोलकाता में शुक्रवार को निधन हो गया। वह 101 साल की थीं। अमला शंकर दिग्‍गज कोरियोग्राफर उदय शंकर की पत्‍नी थीं। अमला शंकर ने उस दौर में नृत्य सीखा, जब महिलाओं के नाचने को समाज में हेय दृष्‍ट‍ि से देखा जाता था। अमला शंकर, सितार वादक पंडित रवि शंकर की भाभी हैं। अमला शंकर की पोती और नृत्यांगना श्रीनंदा शंकर ने ट्विटर पर लिखा, ‘आज हमारी ‘थम्मा’ हमें छोड़ गईं। वह 101 वर्ष की थी। हमने पिछले महीने ही उनका जन्मदिन मनाया था। काफी बेचैन हूं, मुम्बई और कोलकाता के लिए कोई उड़ान उपलब्ध नहीं है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।’श्रीनंद शंकर ने अपने पोस्‍ट में आगे लिखा है, ‘एक युग का अंत। ….जो कुछ भी दिया उसके लिए शुक्रिया।’ अमला शंकर 90 साल की उम्र तक नृत्‍य के क्षेत्र में सक्रिय रहीं। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने 2011 में उन्‍हें ‘बंग विभूषण’ से सम्मानित किया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अमला शंकर के निधन पर शोक जताया है। उन्‍होंने कहा, ‘अमला शंकर जी के निधन से नृत्य की दुनिया को अपूरणीय क्षति पहुंची है।’

अमला शंकर का जन्म 27 जून, 1919 को अविभाजित भारत के जसोर में हुआ था जो अब बांग्लादेश में है। बचपन से ही वह कला और संगीत में रुचि रखती थीं। उनके पिता उस दौर के एक मशहूर बिजनेसमैन थे। उस दौर में जब समृद्ध घराने के लोग अपनी लड़कियों और महिलाओं को डांस से दूर रखते थे, अमला के पिता ने उनकी रुचि को आगे बढ़ाया। साल 1931 में अमला शंकर की मुलाकात उदय शंकर से हुई थे। दोनों इंटरनेशनल कोलोनियल एग्‍जीबिशन में श‍िरकत करने पेरिस पहुंचे थे। खास बात यह है कि तब अमला शंकर सिर्फ 11 साल की थीं। नृत्‍य में रुचि होने के कारण अमला ने उदय शंकर का डांस ग्रुप जॉइन कर लिया और फिर पूरी दुनिया और अपने नृत्य का दीवाना बना दिया। बताया जाता है कि साल 1939 में अमला एक डांस ग्रुप के साथ चेन्नई में परफॉर्मेंस दे रही थीं, तभी उदय शंकर ने उन्हें शादी का प्रस्ताव दिया। इसके तीन साल बाद 1942 में अमला और उदय शादी के बंधन में बंध गए। दोनों के दो बच्चे हैं बेटा आनंद और बेटी ममता। आनंद जहां कंपोजर और डांसर हैं, वहीं ममता अभिनोत्री व नृत्यांगना हैं। अमला शंकर ने साल 1948 में ‘कल्‍पना’ फिल्‍म में मुख्‍य भूमिका निभाई थी। यह फिल्‍म उदय शंकर ने ही बनाई थी। फिल्‍म की कहानी यंग डांसर्स के सपनों और डांस अकादमी पर आधारित थी। अमला शंकर ने कान फिल्‍म फेस्‍ट‍िवल में भी श‍िरकत की थी और रेड कारपेट पर चलकर सुर्ख‍ियां बटोरी थीं। अमला के योगदान को देखते हुए उन्‍हें 2012 में संगीत नाट्य अकादमी टैगोर रत्‍न पुरस्‍कार भी मिला।

 

 

मीरा के पद

 शिक्षिका -नीलम सिंह

मीराबाई के बारे में – कृष्ण की दीवानी मीरा का जन्म 1503 में ‘मेड़ता ‘के समीप ‘चोकड़ी’ गांव में हुआ था। उनका लालन पालन पितामह राव जोधा ने किया। राह दूदा:अच्छे योद्धा और वैष्णव भारत थे। बचपन से ही मीरा बाई को गिरिधर कृष्ण के प्रति प्रेम हो गया था। मीराबाई का विवाह 13 वर्ष की आयु में ही राणा सांगा के बड़े पुत्र भोजराज से‌1556में हुआ। रचनाएं-मीरा के नाम से अनेक कार्य रचनाएं प्रचलित हैं।उनकी समस्त रचनाओं को ‘मीरा पदावली ‘के नाम से प्रकाशित किया गया है। भाषा शैली-मीराबाई की काव्य भाषा सामान्यतः राजस्थानी मिश्रित ब्रज है।उनके काव्य में गुजराती का विशेष पुट है। संगीत और छंद की दृष्टि से उनका कार्य श्रेष्ठ है।

इक दर्द!

पूजा सिंह
मरना अब आसान है
मरने के लिए
पार नही करनी पड़ रही अब
उम्र की दहलीज ।
बस
होनी चाहिए व्यवस्था
बनना चाहिए माहौल
खड़े हैं कतार में लोग
निराश एक रोदन में!
जिस दिन
जिसकी ड्यूटी खत्म होगी
वे भी हो जाएंगे खत्म।
मायूसी बिखड़ी पड़ी है
चारो ओर बन रहा है
तमाशा सन्नाटे में
शहरों में जल रही है लाइट्स
हो गई है चकाचौंध
सिवाए उस घर के
जिसका दीया
अब बुझ गया था।
मैंने सुनी एक ख़बर
जिसमे सौ मजदूर
भूख से तड़प कर
मर चुके थे
जिसमे
डेढ़ साल की बच्ची
मर चुकी माँ के
सीने पर लोट रही थी।
मैंने देखी एक ख़बर
जिसमे
लाखों लावारिस लाशें
निकाली जा रहे थीं!!
और
देख पा रही हूँ उस घर को भी
जिसकी चौखट पर
यमदूत घंटियाँ बजा रहा है
वह जो कराह रहा है दर्द से
फिर भी कह रहा है छोड़ दो…..!
मैं जीना चाहता हूँ
रास्ते अभी खत्म नहीं हुए मेरे
वो भय जो साक्षात है
जो है प्रत्यक्ष  लगातार
वो  महज़ इक दर्द है!!

जेईई/नीट परीक्षा के लिए विद्यामंदिर क्लासेज़ का रैपिड सक्सेस प्रोग्राम शुरू

कोलकाता : विद्यामंदिर क्लासेज़ ने 12 वीं पास विद्यार्थियों के लिए आॅनलाइन क्लास शुरू करने की तैयारी कर ली है। पूरे भारत में यह रैपिड सक्सेस प्रोग्राम। 3 अगस्त 2020 से शुरू होगा यह पूरे देश के जेईई / नीट 2021 उम्मीदवारों के लिए सबसे गहन, सफलता-उन्मुख प्रोग्राम होगा। इस प्रोग्राम के विद्यार्थियों को फ्लैट 50 प्रतिशत कोविड सहायता छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) दी जाएगी। कोविड से उत्पन्न अनिश्चितता के मद्देनजर कोर्स के प्रारूप में लचीलापन रखा गया है ताकि सितंबर 2020 नीट / आईआईटीजेईई परीक्षा में सफल उम्मीदवार आसानी से निकल जाएं और बाकी कोर्स का शुल्क वापस प्राप्त कर लें। अन्य उम्मीदवार 2021 परीक्षा की तैयारी जारी रखेंगे। विद्यार्थियों की तैयारी में धार पैदा करने के लिए वीमसी ने 9 महीनों के इस कोर्स का कांसेप्ट दिया है जिसमें उम्मीदवारों को कम समय के अंदर बेहतर ग्रेड के लिए उत्साहित किया जाएगा। यह प्रोग्राम भी वीएमसी की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा पद्धति पर आधारित होगा ताकि विद्यार्थी सीखने के सर्वश्रेष्ठ परिणाम दें। यह एकमात्र प्रोग्राम है जिसमें उम्मीदवारों को जेईई और नीट 2020 और 2021 दोनों परीक्षाओं की तैयारी के विकल्प खुले रहेंगे।

सशक्त बना रहा है आर्यावर्त हेल्प फाउंडेशन

आर्यावर्त हेल्प फाउंडेशन यह एक अंतरराष्ट्रीय एन. जी. ओ है जिसकी स्थापना दिसंबर 2018 में हुई थी,तथा जनवरी के अंत तक आते आते भारतीय सरकार द्वारा सेक्शन 8 के तहत इसका पंजीकरण करवाया गया।

उद्देश्य – इस फाउंडेशन को खोलने का पहला उद्देश्य भारत मे हर किसी को शिक्षा का अधिकार तथा ज्यादा से ज्यादा इसका प्रसार करना है तथा दूसरा उद्देश्य नारी शशक्तिकरण को आगे लाना है।

मास्क वितरण – कोरोना काल में मास्क एक जरूरी चीज है। फाउंडेशन इस दिशा में काम कर रहा है। पिछले कई महीनों के लॉक डाउन के तहत आर्यावर्त हेल्प फाउंडेशन ने बीस हज़ार मास्क तथा सेनिटाइजर कई घरों को उपलब्ध करवाए हैं इसके अलावा कई घरों में राशन। फाउंडेशन द्वारा कुछ बेरोजगार महिलाओं को सिलाई मशीन भी उपलब्ध करवायी गयी।

मजबूत इरादा – आर्यवर्त हेल्प फाउंडेशन की इच्छा तथा लालसा इस ओर काम करती है कि इसमे ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़े और सहयोगी बने ताकी आगे आने वाले समय मे भारत पूर्ण हो। आर्यावर्त हेल्प फाउंडेशन कुछ अलग तरह से सहयोग देने की इच्छा रखते हैं किसी अनाथ या गरीब बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी बेरोजगार महिलाओं की सहायता की जाती है। यह फाउंडेशन आप से निवेदन करता है कि इससे ज्यादा ज्यादा लोग जुड़ें और अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग दें।

सहयोग करें – अगर आप भी आर्यावत फाउंडेशन की सहायता करना चाहते हैं तो कृपया सम्पर्क करे –
संपर्क नम्बर –  6291301902
[email protected]