शुभ सृजन नेटवर्क द्वारा आयोजित पहली ऑनलाइन चित्र व कविता पोस्टर प्रदर्शनी। नमिता सिंह व संचिता सिंह के चित्र और दीपा ओझा द्वारा बनाये गये कविता पोस्टर इसमें प्रदर्शित किये गये हैं।
सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्में बनायेंगी डेविड एंड गोलिथ फिल्म्स
कोलकाता : कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समारोहों में अपने पहले और समीक्षकों द्वारा प्रशंसित लघु फिल्म ‘एवरी 68 मिनट्स’ (ऋचा शर्मा, आदिल हुसैन और तोता रॉय चौधरी द्वारा अभिनीत) के सफल प्रदर्शन के साथ सामग्री, गर्वित निर्माता लाल भाटिया और इमरान जकी अपने प्रोडक्शन हाउस, डेविड और गोलियत फिल्म्स को एक और रचनात्मक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
निर्माता लाल भाटिया ने कहा, “हम अपनी फिल्म ‘एवरी 68 मिनट्स’ के लिए दुनिया भर में विभिन्न स्क्रीनिंग पर जिस तरह की प्रोत्साहन पा रहे हैं, उससे हम बहुत खुश और उत्साहित महसूस करते हैं।” दर्शकों तक बड़े पैमाने पर पहुँचने के लिए हम इसे यथासम्भव कई फिल्म समारोहों में ले जाएंगे। हम इस साल के अंत तक प्रदर्शित करने के लिए कुछ प्रमुख ओटीटी खिलाड़ियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके प्रोडक्शन हाउस का ध्यान सोचने पर मजबूर करने वाली समसामायिक सामाजिक मुद्दों पर आधारित वेब सीरिज और अच्छी पटकथा वाली शॉर्ट फिल्में बनाने का है।
सह-निर्माता इमरान जकी, ने कहा, “लॉकडाउन के दौरान हमने लोगों को आशा और प्रोत्साहन देने के लिए एक बहुभाषी वीडियो गीत – ‘उम्मीद’ जारी किया और इन कठिन समय में मजबूत और दृढ़ संकल्प के साथ रहने के लिए। राज्य सरकार, पुलिस विभागों और प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से प्रस्तुत / प्रस्तुत इस गीत को लाखों व्यूज और ढेर सारी सराहना मिली है। लोकप्रिय नामों से अभिनीत हमारी हिंदी वेब श्रृंखला में से एक का निर्माण चल रहा है और तीन प्री-प्रोडक्शन स्टेज में हैं, जिसके बारे में हम बहुत जल्द बात करेंगे। एक बार सफलतापूर्वक महामारी से बाहर आने के बाद हम पटकथा लेखकों, निर्देशकों और अभिनेताओं सहित प्रतिभाशाली तकनीशियनों के साथ अपने अगले लाइनअप की घोषणा करेंगे। हम अधिक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं और काम करने के लिए सही लोगों की तलाश कर रहे हैं, जो लोग हमारे जैसे ही महत्वाकांक्षी और उत्साही हैं। हम अगले पांच वर्षों में इस तरह की लगभग 50 परियोजनाएँ बनाने वाले हैं। ”
कोविड -19 : छोटे व मध्यम उद्यमियों की मदद करेगी वाधवानी फाउंडेशन की ‘सहायता’
200 करोड़ का निवेश, 100000 रोजगार सृजन व वृद्धि का लक्ष्य
वाधवानी फाउंडेशन सहायता के तहत 200 करोड़ रुपये निवेश को प्रतिबद्ध
आशा, आंगनबाड़ी कर्मियों, नर्सों व स्वास्थ्य कर्मियों का होगा कौशल विकास
कोलकाता : वाधवानी फाउंडेशन (डब्ल्यूएफ) ने आज आर्थिक संकट के दौर से गुजरते एसएमई और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मदद देकर कोविड-19 के बारे में उनके ज्ञान और कौशल को बेहतर बनाने के लिए ‘सहायता’ की पहल करने की घोषणा की। वाधवानी फाउंडेशन भारत और अन्य विकासशील देशों का प्रमुख गैर-आर्थिक लाभ फाउंडेशन है। इसका मिशन बड़े स्तर पर उद्यमिता के विकास, एसएमई की प्रगति और लोगों के कौशल विकास के माध्यम से रोजगार बढ़ाना है।
वाधवानी फाउंडेशन ने 200 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता की है और साझेदारों का इकोसिस्टम बना रहा है जिसमें सरकार के विभिन्न मंत्रालय और एजेंसियां, बैंक और सलाह प्रतिष्ठान शामिल होंगे जो इस बड़ी और जटिल पहल के संचालन में मदद करेेंगे। इस पहल ‘सहायता’ के तीन प्रोग्राम हैं: सहायता बिजनेस स्टैबलिटी प्रोग्राम, सहायता कोविड-19 स्किलिंग प्रोग्राम और सहायता पब्लिक हेल्थ इनोवेशन प्रोग्राम। फाउंडेशन ने 90 दिनों के अथक प्रयास से तीनों सहायता प्रोग्राम बनाए हैं और अगस्त 2020 में इन्हें तेजी से लागू किया जाएगा।
वाधवानी फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. रोमेश वाधवानी ने कहा, “कोविड-19 से स्वास्थ्य और आर्थिक दोनों संकट पैदा हो गया है। खास कर एसएमई और लोगों के रोजगार को भारी नुकसान पहुंचा है। एसएमई क्षेत्र को वित्तीयन और उचित परामर्श के अभाव में छोटी और लंबी अवधि में भारी क्षति होगी। ‘सहायता’ में फाउंडेशन के बड़े निवेश से 10,000 एसएमई को जो स्टिमेलस पैकेज मिलेगा उससे सरकार के प्रयासों में मजबूती आएगी। उन्हें परामर्श सेवाएं देकर कारोबार बचाने, स्थिरता लाने और अंततः सफल होकर 100,000 रोजगार बचाने या बनाने में मदद मिलेगी। फाउंडेशन के अपने सलाहकार, वर्तमान में उपलब्ध और नई सामग्री, और तकनीक यह सब एसएमई को निःशुल्क प्रदान किया जाएगा।’’
सहायता बिजनेस स्टैबलीटी प्रोग्रामः एसएमई किसी अर्थव्यवस्था की बुनियाद होते हैं लेकिन कोविड-19 से उत्पन्न आर्थिक संकट ने इसे तबाह कर दिया है। सभी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विकास को बढ़ावा देते एसएमआई गहरे संकट में हैं। बड़े उद्यमों की तुलना में यह नुकसान कहीं अधिक है। बड़ी कंपनियों में ऐसे संकट से निपटने का अधिक लचीलापन होता है। बैलेंस शीट आम तौर पर बड़ी और अधिक मजबूत होती है। उन्हें पूंजी और प्रबंधन के संसाधन सुलभ होते हैं। लेकिन एमएसएमई इतने लचीले नहीं होते हैं। आज उन्हें अस्तित्व बचाने के लिए पूंजी और विशेषज्ञता दोनों चाहिए। निकट भविष्य में उनकी स्थिरता का लक्ष्य है और मध्यम और लंबी अवधि में विकास के लिए उन्हें खुद को तैयार करना होगा। हाल में भारत सरकार ने एसएमई के लिए एक व्यापक और आवश्यक क्रेडिट (वित्तीयन) प्रोग्राम शुरू किया है। लेकिन एसएमई को सही रणनीति और कार्य परचिालन का गहन ज्ञान भी चाहिए ताकि ग्राहक, सप्लाई चेन, प्रबंधन और कार्मिक बचाए रखने संबंधी तमाम चुनौतियांे से उबर पाएं।
सहायता बिजनेस स्टैबलिटी प्रोग्राम लगभग 10,000 एसएमई को व्यवसाय में बड़े बदलाव की सलाह के साथ अस्तित्व बचाने, स्थिरता लाने और प्रगति करने की विशेषज्ञता देगा। वाधवानी फाउंडेशन ने सिडबी, क्लिक्स कैपिटल, आईआईएफएल फाइनेंस, पावर 2 एसएमई और मैग्मा फिनकॉर्प से साझेदारी कर इस प्रोग्राम के लिए संयुक्त रूप से एसएमई चयन करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही अपनी आंतरिक टीम का विस्तार कर 100 एसएमई व्यवसाय सलाहकार तैयार कर रहा है। इसके अतिरिक्त फाउंडेशन की योजना केपीएमजी, फ्लेक्सींगट, ग्रोकर्व, स्ट्रैटजी गराज,बड़ा बिजनेस, परामर्श, द कैटलिस्ट, इमबाइब कंसल्टेंसी सर्विसेज़, ब्लैक ब्रिक्स सर्विसेज़, कोनेक्टअप, सीएफओब्रिज, मिडाससीएफओ, धनबढ़ाओडाॅटकाॅम और कई विषय के व्यक्तिगत विशेषज्ञ, विषय के जानकार, सलाहकार और परामर्शदाता से साझेदारी करने की है। इसके तहत वे निःशुल्क या बहुत रियायत पर एसएमई सलाहकार प्रदान करेंगे। सलाहकारों की यह संयुक्त टीम व्यवसाय में बड़े बदलाव के लिए फाउंडेशन के व्यापक और बढ़ते डिजिटल वीडियो लाइब्रेरी और सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रक्रिया की सामग्री और एसएमई के लिए फाउंडेशन के आधुनिक टेक्नोलाॅजी प्लैटफार्म का उपयोग करेगी। वाधवानी फाउंडेशन एसएमई सलाहकारों को ‘सहायता’ की सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रक्रिया, सामग्री और तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए एक अकादमी भी स्थापित कर रहा है।
अगस्त 2020 से शुरू सहायता प्रोग्राम में प्रति माह 50 एसएमई शालिम किए जाएंगे। यह संख्या बढ़ कर प्रति माह 500 एसएमई तक होगी। शुरू में 250 करोड़ रु. रेवेन्यू वाली बड़ीक म्पनी मॉडल को मदद देने के बाद वाधवानी फाउंडेशन मध्यम 2021 में नेक्स्ट-जेन,एआई-पावर्ड सेल्फ-सर्विस जीनी प्लेटफॉर्म लांच करेगा ताकि अधिक एसएमई जुड़ें।
भारत में केपीएमजी के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण एम. कुमार ने कहा, “हम कोविड से तबाह एसएमई की मदद के लिए वाधवानी फाउंडेशन की ‘सहायता’ पहल से जुड़कर प्रसन्न हैं। फाउंडेशन और रोमेश वाधवानी के के दूरदर्शी प्रयास से इस उद्योग की मदद करने का गर्व है जिसमें आनुपातिक रूप से ज्यादा नौकरियां और आजीविका हैं। ”
सिडबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मोहम्मद मुस्तफा ने कहा, ‘‘कोविड-19 के संकट में हमारा मानना है कि बड़े संगठनों को एमएसएमई की मदद के लिए आपसी साझेदारी करनी चाहिए। एसएमई में जान डालने और सफल बनाने के लिए वाधवानी फाउंडेशन के बिजनेस स्टैबलीटीं प्रोग्राम के बारे में जानकर खुशी हुई। एमएसएमई के मार्गदर्शन के लिए उनसे हमारा सहमति करार रहा है। नए प्रयास से वेबिनार, डू-इट-योरसेल्फ टूल्स, सलाहकारों और मेंटर्स की मुफ्त सेवा मिलेगी। इस तरह एमएसएमई मजबूत हो कर उभरेंगे और आत्मनिर्भर भारत का राष्ट्रीय मिशन पूरा होगा।’’
क्लिक्स कैपिटल के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रमोद भसीन ने कहा, ‘‘सरकार ने एमएसएमई को सस्ती दर पर ऋण देने के विभिन्न उपाय किए हैं। पर उद्योग की विशेषज्ञता और प्रतिभा की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। वाधवानी फाउंडेशन के साथ हम एमएसएमई भागीदारों के कौशल का अभाव दूर करेंगे और इस प्रयास के परिणाम मापे जा सकते हैं।’’
सहायता कोविड-19 स्किलिंग प्रोग्राम: शहरों के अस्पतालों और क्लिनिकों के चिकित्सकों और नर्सों के अलावा भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा तंत्र में लगभग 30 लाख आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, घरेलू स्वास्थ्य कार्यकर्ता और नर्स सहयोगी और पुलिस एवं अन्य वाॅलेंटियर भी इस प्रोग्राम में शामिल हैं। कोविड-19 से लड़ाई के मोर्चे पर सभी महत्वपूर्ण हैं; हालांकि निजी सुरक्षा और कोविड-19 मरीजों के निदान और देखभाल को लेकर उनमें अधिकांश का ज्ञान सीमित है। अक्सर विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध जानकारी ढूंढ़ना, समझना या उपयोग करना कठिन होता है। सहायता प्रोग्राम कोविड-19 स्किलिंग प्रोग्राम इन सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को इंटरैक्टिव वीडियो फाॅर्मेट में विभिन्न डिजिटल चैनलों से आवश्यक जानकारी देगा। कोविड-19 की बुनियादी जानकारी का एक खास यूट्यूब चैनल होगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को वाट्सऐप से प्रश्नोत्तर और ज्ञान परीक्षा समेत अतिरिक्त जानकारी दी जाएगी। वाधवानी फाउंडेशन के डिजिटल प्लेटफॉर्म / पोर्टल और अन्य साझेदार एवं सरकारी पोर्टल जैसे कि आईगाॅट पर स्किलिंग कंटेंट और सर्टिफिकेशन की अधिक व्यापक जानकारी उपलब्ध होगी। अगले महीने लांच होने वाले प्रोग्राम में प्रति माह 5,000 मौजूदा और नए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा कार्यकर्ताओं को कौशल प्रदान करने का लक्ष्य होगा और यह संख्या प्रति माह 50,000 तक बढ़ सकती है। आखिर में 500,000 से दस लाख मौजूदा और नए स्वास्थ्य कर्मचारियों को यह सेवा दी जाएगी।
सहायता पब्लिक हेल्थ इनोवेशन प्रोग्राम : कोविड-19 संकट ने महामारी से निपटने की सभी देशों की तैयारी का पर्दाफाश कर दिया है। अधिकांश देश सार्वजनिक स्वास्थ्य की बुनियादी व्यवस्था पर उचित निवेश नहीं करते इसलिए संकट आने पर आनन-फानन रोकथाम के उपाय करते हैं। हालांकि आज खास कर डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर सार्वजनिक स्वास्थ्य में इनोवेशन की असीम संभावना है। टेलीमेडिसिन, रीयल टाइम डायग्नाॅस्टिक और टेस्टिंग और मरीज की निगरानी और देखभाल से बहुत लाभ होगा। इनोवेशन की अधिकांश पहल स्टार्टअप और शुरुआती दौर में पहंुची कम्पनियां कर सकती हैं जिन्हें मिशन पूरे करने के लिए पर्याप्त पूंजी प्राप्त करने का संघर्ष रहता है। सहायता पब्लिक हेल्थ इनोवेशन प्रोग्राम भारत में स्टार्टअप और शुरुआती दौर की ऐसी 50 कम्पनियों को इनोवेशन तेज करने के लिए निवेश या अनुदान देगा। प्रत्येक निवेश 25 लाख से 1 करोड़ तक होगा। वाधवानी फाउंडेशन पहले भी कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अनुदान दिए हैं। अनुदान और निवेश की इच्छुक कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
अन्य देशों के लिए सहायता प्रोग्राम: वाधवानी फाउंडेशन अपने ग्लोबल मिशन में खास कर मैक्सिको और ब्राजील जैसे बुरी तरह कोविड प्रभावित देशों को मदद देता है। दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में फाउंडेशन की टीमें सक्रिय हैं। वाधवानी फाउंडेशन का मैक्सिको वर्जन अगस्त 2020 में शुरू होगा। इसमें मेक्सिको सिटी, जेलिस्को, चिहुआहुआ और युकाटन जैसे राज्य और सलाह प्रतिष्ठान – ईवाई, केपीएमजी, डेलाॅइट, सैंटेंडर, जीसीजी, सीसीएमएक्स, केरिंट्रा, काॅनकैमिन, कोन्फीयो, फोंडियो डायरेक्टो, फिडाएपीच और आईवाईईएम भागीदार होंगे। फाउंडेशन की योजना 2021 के आरंभ में ब्राजील और मध्य-2020 में अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया (इंडोनेशिया, फिलीपींस, बांग्लादेश) में सहायता विस्तार करने की है।
गुरु पूर्णिमा पर मेरी कलम से
निखिता पांडेय
आज गुरु पूर्णिमा के विशेष अवसर पर सभी गुरुजनों को धन्यवाद ज्ञापित करती हूं कि मुझे इस काबिल बनाया कि हर काम को सही ढ़ंग से प्रस्तुत कर पाऊं। ‘गुरु’ शब्द अपने आप में सम्पूर्ण जगत है,इसे किसी विशेष सम्मान या पद की आवश्यकता नहीं,बल्कि इन्हें शिष्यों की चाह होती है। ये अपना सर्वस्व ज्ञान,मेहनत,सीख सब कुछ एकनिष्ठ भाव से अपने शिष्यों को समर्पित कर देते हैं। उनके लिये सदैव तत्पर रहते हैं। जिस प्रकार एक पेड़ को सींचने में पूरा जीवन न्योंछावर हो जाता है,उसी प्रकार हमारे गुरु हमारा पोषण करते हैं।
मेरी पहली गुरु मेरी ‘मां’ है,जब संतान उनकी गर्भ में रहता है,तभी से वह सीखना प्रारंभ कर देता है और पैदा होने के बाद सबसे पहला शब्द ‘मां’ ही निकलता है। एक मां के लिये इससे बड़ा सुखदायी पल और कुछ नहीं हो सकता और एक गुरु की यह सबसे मीठी दक्षिणा होती है। पिता रूपी गुरु के बारे में कहने पर शब्द कम पड़ जायेंगे,वे कष्टों का घूंट पीकर हमें बड़ा करते हैं। मेरे जीवन को बढ़ाने में इनकी सर्वश्रेष्ठ भूमिका है। भावी जीवन की शिक्षा-दीक्षा शिक्षक करते हैं और यही हमारे जीवन की नैया पार लगाते हैं। मेरे जीवन में खिचड़ी,आंगनबाड़ी स्कूल से लेकर काॅलेज समय तक के सभी गुरुजनों का विशेष महत्व है। चाहे वह छोटे में ड्रेस पर पानी गिरा देने से लेकर गणित की फटकार काॅलेज में पानी पूछकर पीने तक की यात्रा में इन्हीं की छाया रही है। यही है जिनके कारण कहीं भी समय से पहले पहुंचना और अनुशासन में रहना सीख पायी हूं। अपने गुरु के कारण ही सबकी दुलारी,बकबकिया और परेशान करने वाली बनी हूं। आज मैं जो भी हूं,जितना भी जानती हूं सब कुछ मेरे माता-पिता और मेरे गुरुजनों के आशीष के कारण संभव है। सिर्फ आज ही इनका गुणगान करूं यह मैं नहीं…किसी भी चीज़ को मनाने का एक दिन नहीं होना चाहिये….बल्कि हर पल खुद को खुशनसीब मानना चाहिये कि जो भी है इनकी बदौलत है,ये न हो तो सब असंभव है। मेरा अनुभव और मेरी धारणा यही है। संत कबीर की भक्त हूं,तो चंद पद उनका यह रहा –
“यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान।।”
गुरू की महिमा बताना तो सूरज को दीपक दिखाने के समान है। गुरु की कृपा हम सब को प्राप्त हो।ये रही गुरु के प्रति मेरे मन की बात।
अब किराये पर लीजिए मारुति सुजुकी की कार
नयी दिल्ली : अगर आप कोरोना काल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर नहीं करना चाहते हैं और अभी आपकी नई कार खरीदने की कोई योजना नहीं है तो मारुति सुजुकी ने एक नयी योजना शुरू की है। कंपनी कार को लीज पर दे रही है। कंपनी ने इसे मारुति सुजुकी सबस्क्राइब ब्रांड नाम से पेश किया है।
लीज की ऑटो योजना में कोई कंपनी थोड़े समय के लिए ग्राहक को उसके निजी इस्तेमाल के लिए सशर्त वाहन देगी। इसके लिए ग्राहक को कार की पूरी कीमत देकर खरीदना नहीं होता और कार पर अंतिम मालिकाना हक भी कंपनी का बना रहता है। ग्राहक जब तक कार अपने पास रखेगा तभी तक किराया चुकाना होता है।
कम्पनी ने गुरुग्राम और बेंगलुरू में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस सेवा को शुरू किया है। इसके तहत वह स्विफ्टस डिजायर, वितारा ब्रिजा औऱ इरिटिगा को मारुति सुजुकी अरिना के जरिए बालेनो, Ciaz और एक्सएल को नेक्सा से किराए पर देगी।
इस सेवा के लिए उसने ओरिक्स ऑटो इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। यह जापान की ओरिक्स कॉरपोरेशन की सिस्टर कंपनी है जो भारत में इस सेवा का परिचालन करेगी। गौरतलब है कि हुंडई इंडिया ने भी इस तरह की सेवा की शुरुआत की थी। इसे शुरुआत में 6 शहरों में खुद के इस्तेमाल के लिए किराए पर वाहन उपलब्ध कराने वाली कंपनी रेव के साथ साझेदारी में शुरू किया गया।
साइकिल गर्ल ज्योति कुमारी पर बनेगी ‘आत्मनिर्भर’ फिल्म, खुद निभाएंगी मुख्य किरदार
पटना : लॉकडाउन के चलते कई प्रवासी मजदूरों ने अपने घरों तक पहुंचने के लिए लंबे सफर तय किए हैं। इन्हीं में से एक हैं ज्योति कुमारी जिन्होंने अपने जख्मी पिता को घर पहुंचाने के लिए 1200 किलोमीटर साइकिल चलाई थी। ज्योति के इस कारनामे को अब एक फिल्म के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा जिसमें खुद ज्योति ही लीड रोल निभा रही हैं।
शाइन शर्मा जल्द ही ज्योति की कहानी को दिखाने के लिए आत्मनिर्भर फिल्म डायरेक्टर करने जा रहे हैं। फिल्म की कहानी ज्योति के गुरुग्राम से बिहार तक के सफर में आई दिक्कतों पर बनाई जाएगी। इसे हिंदी, इंग्लिश और मैथिली भाषा में बनाया जाएगा। फिल्म को डायरेक्ट करने के साथ शाइन ने अपने दोस्तों मिराज, फैरोज और सजित नाम्बियर के साथ इसे प्रोड्यूस भी किया है। इसे वीमेकफिल्म के बैनर तले बनाया जाएगा।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक आत्मनिर्भर फिल्म को असल लोकेशन पर ही फिल्माया जाएगा हालांकि ये डॉक्यूमेंट्री नहीं होगी। इस सफर के बारे में ज्योति कुमारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, अगर मैं इस सफर पर नहीं निकलती तो मेरे पिता भूख से मर जाते। लॉकडाउन के बाद परेशानियां बढ़ गई थीं। मकान मालिक हमें घर से भगाना चाहते थे। हमारे किराया ना देने पर उन्होंने दो बार पॉवर भी काट दिया था। मेरे पिता के पास कोई इनकम नहीं थी हमें किसी तरह घर पहुंचना था।
पुरानी साइकिल खरीदकर किया 1200 किमी सफर
इस बारे में आगे ज्योति ने बताया, मैंने अपने पिता से कहा कि मैं उन्हें साइकिल से लेकर जाउंगी मगर वो नहीं माने। वो मुझसे बार-बार कह रहे थे कि मैं नहीं कर सकती। मैंने बैंक से हजार रुपए निकाले और 500 रु और जमा करके पुरानी साइकिल खरीदी। मैं हर दिन 50-60 किमी साइकिल चलाती थी। बड़े ब्रिज में साइकिल चलाना मुश्किल था। हम पेट्रोल पंप में रात गुजारते थे रास्ते में लोगों से खाना पीना मिल जाता था।
इवांका ट्रम्प ने की थी सराहना
बिहार गर्ल ज्योति कुमारी महज 15 साल की हैं। उन्होंने तेज गर्मी में अपने पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरुग्राम से दरभंगा तक का सफर तय किया। इनके इस हौंसले को देश के अलावा विदेश से भी सराहना मिली थी। डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ने भी ज्योति की जमकर तारीफ की थी। आत्मनिर्भर फिल्म को 20 भाषाओं के सबटाइटल के साथ भी दिखाया जाएगा साथ ही विदेशी लोगों के लिए इसका टाइटल ए जर्नी ऑफ माइग्रेंट है। फिलहाल उनके पिता का किरदार निभाने वाले एक्टर की तलाश जारी है।
प्रख्यात नृत्य निर्देशक सरोज खान का निधन
मुम्बई : बॉलीवुड में ‘मास्टरजी’ के नाम से मशहूर और ‘‘धक धक’’, ‘‘हवा हवाई’’ तथा ‘‘एक दो तीन’’ जैसी कई गानों की नृत्य निर्देशक रहीं मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का दिल का दौरा पड़ने से गत 3 जुलाई को निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं। तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी खान पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं।
सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें पिछले शनिवार को बांद्रा के गुरु नानक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उनकी कोविड-19 की जांच भी की गई, जिसकी रिपोर्ट में उनके संक्रमित नहीं होने की पुष्टि हुई। उनके रिश्तेदार मनीष जगवानी ने से कहा, ‘‘ देर रात करीब ढाई बजे दिल का दौरा पड़ने से उनका अस्पताल में निधन हो गया।’’
उपनगरीय मलाड में एक कब्रिस्तान में शुक्रवार सुबह ही उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया।
खान के साथ कई हिट गीतों में काम कर चुकी अदाकारा माधुरी दीक्षित ने कहा, ‘‘ मैं अपनी दोस्त तथा गुरु सरोज खान के निधन से बेहद दुखी हूं। नृत्य में मुझे मेरी क्षमताओं की पहचान कराने के लिए हमेशा उनकी आभारी रहूंगी। दुनिया ने आज एक बेहतरीन प्रतिभा को खो दिया। आपकी याद आएगी।’’खान ने अपने चार दशक के करियर में उन्होंने 2000 से अधिक गीतों की कोरियोग्राफी की।
खान ने 80 से 90 के दशक में अपना सर्वश्रेष्ठ काम अदाकारा श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित के साथ किया। खान का परिवार बंटवारे के बाद भारत आ गया था। उन्होंने बतौर बाल कलाकार अपने फिल्मी कॅरियर की शुरुआत की थी लेकिन बाद में वह ‘बैकग्राउंड डांसर’ के तौर पर काम करने लगीं।
सरोज खान का नाम पहले निर्मला था लेकिन इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उन्होंने अपना नाम बदल लिया। उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया था। कोरियोग्राफर बी. सोहनलाल से नृत्य सीखते हुए 13 साल की उम्र में ही खान ने उनसे शादी कर ली। उस समय सोहनलाल की उम्र 41 वर्ष थी। बाद में सरोज खान ने दूसरी शादी भी की थी।
खान ने 1974 में फिल्म ‘गीता मेरा नाम’ से अपने कोरियोग्राफी करियर की शुरुआत की लेकिन उन्हें पहचान 1987 में श्रीदेवी के गीत ‘हवा हवाई’ से मिली। इसके बाद खान ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उन्होंने एक से एक हिट गानों पर कोरियोग्राफी की। अदाकारा श्रीदेवी के लिए फिल्म ‘नगीना’ और ‘चांदनी’ के गीतों के लिए की गई उनकी कोरियोग्राफी ने काफी सराहना हासिल की। लेकिन उन्हें सबसे अधिक लोकप्रियता अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के लिए कोरियोग्राफ किए गीतों से मिली।
माधुरी के लिए उन्होंने ‘एक दो तीन’, ‘तम्मा तम्मा लोगे’, ‘धक धक करने लगा’, ‘डोला रे डोला’ जैसे कई हिट गीतों की कोरियोग्राफी की। खान ने आखिरी बार 2019 में आई फिल्म ‘कलंक’ में माधुरी दीक्षित के लिए ही गीत ‘तबाह हो गए’ की कोरियोग्राफी की थी। उन्होंने ‘‘ताल’’, ‘‘हम दिल दे चुके सनम’’ और ‘‘रावण’’ सहित कई फिल्मों में ऐश्वर्या राय के साथ काम किया।
सुशांत की फिल्म ‘दिल बेचारा’ के ट्रेलर ने तोड़ा ‘एवेंजर्स’ इंफिनिटी वॉर का रिकार्ड
24 घंटे में यूट्यूब पर 4.5 मिलियन लाइक्स
मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। इस फिल्म में संजना सांघी मुख्य अभिनेत्री हैं। इस फिल्म के ट्रेलर को यूट्यूब पर रिलीज किया गया। रिलीज के साथ ही फिल्म के ट्रेलर को 3.7 मिलियन लाइक्स मिले। हालांकि 24 घंटे के अंदर इस फिल्म के ट्रेलर को यूट्यूब पर 4.5 मिलियन लाइक्स मिले हैं, जो कि हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म एवेंजर्स: इंफिनिटी वॉर एंडगेम के ट्रेलर से भी ज्यादा है। डीएन रिपोर्ट की मानें तो मेगा बजट फिल्म एवेंजर्स: इंफिनिटी वॉर ने 3.6 मिलियन लाइक्स हासिल किया था। इसी के साथ भारतीय सिनेमा के इतिहास में यह सर्वाधिक पसंद किया गया ट्रेलर बन गया है।
फिल्म ‘दिल बेचारा’ का ट्रेलर जैसे ही सामने आया लोगों ने इसे काफी पसंद किया। बॉलीवुड के भी कई सितारों ने भी इसकी तारीफ की। ट्रेलर के रिकॉर्ड को देखकर लग रहा है कि जिस तरह से दर्शक प्यार दिखा रहे हैं उससे आने वाले समय ये फिल्म आगे और भी कई ऐसे रिकॉर्ड बनाएगी जो सभी को हैरान करने वाला रिकॉर्ड हो सकता है। फैंस इस फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने की मांग कर रहे थे, लेकिन लॉकडाउन को देखते मेकर्स ने ओटीटी पर रिलीज करना सही समझा। फिल्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर 24 जुलाई, 2020 को रिलीज होगी। हालांकि प्रशंसक इस फिल्म को बिना किसी सब्सक्रिप्शन के भी देख सकते हैं।
जयपुर की कम्पनी ने बनाया वीडियो कॉल ऐप , एकसाथ 2,000 लोग हो सकते हैं शामिल
नयी दिल्ली : जयपुर की सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी डेटा इंजेनियस ग्लोबल ने वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग ऐप ‘वीडियोमीट’ विकसित किया है। कम्पनी का दावा है कि इसके जरिए एक साथ 2,000 लोग ऑनलाइन बैठक कर सकते हैं। कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजय दत्ता ने कहा कि इस ऐप के जरिए एक सत्र में लोगों के ऑलाइन भाग लेने को लेकर कोई सीमा नहीं है, क्योंकि यह उपयोगकर्ता के पास ‘बैंडविड्थ’ और ‘होस्टिंग’ की उपलब्ध सुविधा पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया और हमने यह ऐप बनाया। इस ऐप के जरिए राजनीतिक रैली भी की जा सकती है। हालांकि बड़ी क्षमता में लोगों की भागीदारी को लेकर उच्च क्षमता के सर्वर जैसे आईटी संसाधन की जरूरत होगी।
हीरो ने चीन से 900 करोड़ की डील कर दी रद्द
लद्दाख में सीमा पर तनाव के बाद भारत ने चीन की आर्थिक मोर्चे पर नाकेबंदी शुरू कर दी है। चीनी कंपनियों के कई टेंडर रद्द कर दिए। चीन पर डिजिटल स्ट्राइक करते हुए उसके 59 ऐप्स पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। अब भारत की साइकल निर्माता कंपनी हीरो ने भी चीन को बड़ा आर्थिक झटका दिया है। हीरो साइकल ने पहले भारत सरकार को 100 करोड़ की सहायता दी थी और अब चीन के साथ की गई 900 करोड़ की डील को रद्द करके उसे बड़ा झटका दिया है। खबरों के मुताबिक हीरो अब चीन से कलपुर्जों का आयात नहीं करेगी। कंपनी ने लद्दाख में सीमा पर चल रहे तनाव के बाद यह फैसला लिया है।खबरों के अनुसार 70 देशों में हीरो का कारोबार फैला हुआ है। खबरों के अनुसार हीरो कम्पनी के साइकल के कलपुर्जे बनाने वाली छोटी कम्पनियां उसकी मदद के लिए आगे आई हैं, इसके साथ ही इन कंपनियों को हीरो कंपनियों में शामिल होने का ऑफर भी दिया जा रहा है।




