Sunday, April 5, 2026
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घटाया गया सीबीएसई कक्षा 9 से 12 तक सभी विषयों का पाठ्यक्रम

कटौती केवल 2021 की बोर्ड परीक्षाओं वार्षिक परीक्षाओं के लिए की गयी

नयी दिल्ली : कोरोना के कारण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 2020-21 सत्र के लिए कक्षा 9 से 12 तक का पाठ्यक्रम 30 प्रतिशत घटा दिया है। बोर्ड की ओर से जो संशोधित कोर्स अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया गया है उसके मुताबिक हाईस्कूल राजनीति विज्ञान से पाठ तीन लोकतंत्र एवं विविधता, पाठ चार लिंग, धर्म एवं जाति, पाठ पांच चर्चित संघर्ष एवं आंदोलन और पाठ आठ लोकतंत्र की चुनौतियां इस साल नहीं पढ़ाया जाएगा। वहीं कक्षा 12 समाजशास्त्र से भारतीय लोकतंत्र की कहानी, वैश्वीकरण एवं सामाजिक बदलाव एवं जनसंचार चार पाठ कम हुए हैं। हालांकि सीबीएसई का कहना है कि सिलेबस में कटौती केवल 2021 की बोर्ड परीक्षाओं वार्षिक परीक्षाओं के लिए की गयी है।
10वीं की भूगोल से वन्य एवं वन्य जीवन समेत तीन पाठ और इतिहास से भी दो पाठ हटाए गए हैं। कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान से जनसंख्या, लोकतांत्रिक अधिकार, भारत में खाद्य सुरक्षा आदि चैप्टर को हटाया गया है। 10वीं गणित से त्रिकोण का क्षेत्रफल समेत कई टॉपिक जबकि 9वीं से क्षेत्रफल का पूरा चैप्टर हटाया गया है। 9 व 10 की अंग्रेजी ग्रामर से पैसिव वॉयस के इस्तेमाल, प्रीपोजिशन आदि और लिटरेचर से पांच-पांच पाठ कम किए गए है। कक्षा 9 व 10 कम्प्यूटर एप्लीकेशन विषय से यूनिट चार स्क्रैच को हटा दिया गया है।
कक्षा 11 एवं 12 में क्या नहीं पढ़ना है
कक्षा 11 राजनीति विज्ञान से नागरिकता, राष्ट्रवाद एवं धर्मनिरपेक्षता, भारत में स्थानीय निकाय का विकास आदि जबकि 12वीं से समकालीन विश्व में सुरक्षा, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन, भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार से संबंध समेत अन्य दो पाठक हटा गए हैं। 11 भौतिक विज्ञान से भौतिक संसार, गति का सिद्धांत, गुरुत्वाकर्षण आदि को जबकि 12वीं मैग्नेटिज्म एवं मैटर समेत अन्य कई टॉपिक शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा गणित, अंग्रेजी, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, इतिहास आदि सभी विषयों का कम हुआ है।

ई-कॉमर्स कम्पनियों पर बिकने वाले हर उत्पाद पर लिखा मिलेगा निर्माता देश का नाम

नयी दिल्ली : अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को सरकार ने थोड़ी राहत देते हुए निर्माता देश यानी कंट्री ऑफ ओरिजिन को बताने के लिए समय सीमा 1 अगस्त तय कर दी है। ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने हर उत्पाद पर कंट्री ऑफ ओरिजिन यानी उत्पाद कहाँ बना है, इसका जिक्र करना जरूरी है। हालांकि ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं को समय सीमा सम्भव नहीं लगती है। ई-कॉमर्स कम्पनियां इसके लिए कम से कम 3 महीने का वक्त मांग रही हैं। नए नियमों के तहत पोर्टल पर मौजूद सभी प्रोडक्ट पर कंट्री ऑफ ओरिजिन जरूरी है। नई लिस्टिंग पर कंट्री ऑफ ओरिजिन नियम पहले से लागू है।
दो सप्ताह पहले मामले पर डिपॉर्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) ने बुधवार को दूसरी बैठक की, जिसमें 30 ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। डीपीआईआईटी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार 1 अगस्त तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नई लिस्टिंग के लिए ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ उपलब्ध करा रही है और सितंबर के अंत तक पुरानी लिस्टिंग के लिए यह उपलब्ध हो जाएगा।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मिशन को बढ़ाने के मकसद से सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस के नए फीचर लागू होने से पहले जिन सेलर्स ने अपने उत्पाद अपलोड किए हुए हैं, उनको भी कंट्री ऑफ ओरिजिन अपडेट करना होगा। सरकार उन्हें लगातार रिमाइंडर भेजेगी और इसके बाद भी प्रोडक्ट पर जानकारी अपडेट नहीं करने पर प्रोडक्ट को प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा। दरअसल दिक्कत यहीं से शुरू होती है। बैठक में कंपनियों के प्रतनिधियों ने कहा कि बदलाव पहले नए उत्पाद लिस्टिंग के लिए किए जाएं क्योंकि उनके प्लेटफार्मों पर पहले से ही बेच रहे लाखों उत्पादों के लिए ऐसा करना मुश्किल है।
सूत्रों के मुताबिक अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियों ने प्रस्ताव को निष्पादित करने के लिए तीन महीने की समयसीमा का अनुरोध किया। अमेज़ॅन ने कहा कि उसके लाखों विक्रेता हैं, और हर उत्पाद के लिए ‘मूल देश’ का उल्लेख करने के लिए उन्हें आश्वस्त करना मुश्किल होगा। इसके लिए तीन महीने की समय मिलना चाहिए। फ्लिपकार्ट ने भी कहा कि इसे विक्रेताओं को प्रशिक्षित करने और अपने तकनीकी मंच को फिर से संगठित करने की आवश्यकता है।

साबुन और कंघी बेचते-बेचते फिल्मों में आ गए थे जगदीप

पहली फिल्म के लिए मिले थे सिर्फ 6 रुपये
फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर जगदीप दुनिया को अलविदा कहकर चले गए। उनका बीते 8 जुलाई को निधन हो गया। जगदीप के निधन से पूरा बॉलीवुड गम में डूबा हुआ है। जगदीप ने पांच दशक से अधिक समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया है। वह जब भी स्क्रीन पर आते थे तो दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी। जगदीप को पहली फिल्म के लिए मात्र 6 रुपये मिले थे। इसके पीछे एक दिलचस्प किस्सा है। आइये जानते हैं इसके बारे में…
मध्यप्रदेश के दतिया में जन्मे जगदीप उर्फ सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी ने बचपन के दिनों में गरीबी काफी करीब से देखी थी। जगदीप महज सात-आठ साल के थे तभी पिता का निधन हो गया। भारत-पाक बंटवारे के बाद जगदीप अपनी मां के साथ ग्वालियर से मुंबई आ गए। कहा जाता है कि जगदीप की मां यतीम खाने में खाना बनाने का काम करती थीं, जिससे वह अपने बच्चे को पढ़ा-लिखा सके और उसे पाल सके। एक दिन जगदीप ने निश्चय किया कि घर की परिवार की मदद के लिए उन्हें कुछ काम करना चाहिए। हालांकि, मां ने जगदीप को काम करने से मना किया, लेकिन वह नहीं माने। जगदीप पढ़ाई छोड़कर पतंग बनाने लगे, साबुन और कंघी बेचने का काम करने लगे।
जगदीप जहां सड़क पर काम किया करते थे। वहां एक आदमी आया और वह वैसे बच्चों को ढूंढ रहा था जो फिल्म में काम कर सके। उस शख्स ने जगदीप से फिल्मों में काम के बारे में पूछा कि क्या तुम काम करोगे? जगदीप ने उस शख्स से पूछा कि ये फिल्में क्या होती हैं। जगदीप ने उस समय तक फिल्में नहीं देखी थीं। जगदीप ने उस शख्स से पैसे की बात की उन्हें इस काम के लिए कितने मिलेंगे। जिसपर जवाब आया तीन रुपये।
जगदीप को महसूस हुआ कि जैसे उनकी लॉटरी लग गई है। जगदीप तुरंत तैयार हो गए। अगले दिन जगदीप की मां उन्हें लेकर स्टूडियो पहुंच गईं, जहां बच्चों का ही सीन चल रहा था। हालांकि, उस वक्त जगदीप को केवल चुपचाप बैठने वाला रोल मिला था, लेकिन तभी उदूर् में एक ऐसा डायलॉग आया, जिसे कोई बच्चा बोल नहीं पा रहा था। जगदीप ने किसी बच्चे से पूछा कि यदि यह डायलॉग मैंने बोल दिया तो क्या होगा, जवाब आया, पैसे ज्यादा मिलेंगे 6 रुपये। जगदीप ने सामने जाकर यह डायलॉग बड़ी ही खूबसूरती से बोल दिया और फिर यहीं से शुरू हुआ उनकी चाइल्ड आर्टिस्ट का सफर। यह फिल्म थी साल 1951 में प्रदर्शित बीआर चोपड़ा की ‘अफसाना’। इसके बाद जगदीप ने सफलता की बुलंदियों को छुआ और एक से बढ़कर एक फिल्मों में अपने लाजवाब कॉमिक अभिनय से दर्शकों को दिल जीता।

इंस्टाग्राम ने लॉन्च किया टिकटॉक जैसा फीचर Reels

नयी दिल्ली : इंस्टाग्राम भारतीय यूजर्स के लिए अपने नए फीचर रील्स (Reels) की टेस्टिंग शुरू कर दी है। टिकटॉक के विकल्प के तौर पर रील्स रोलआउट होने लगा है। बता दें कि इंस्टाग्राम का नया फीचर रील्स शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक की तरह ही काम करता है। रील्स के जरिए यूजर 15 सेकेंड का वीडियो बना सकते हैं। इस वीडियो को ऑडियो, फाइल्स या म्यूजिक ट्रैक के साथ एडिट किया जा सकता है। टिकटाॅक की तरह ही इंस्टाग्राम इसे क्रिएटर्स के लिए एक अवसर के रूप में भी देख रहा है। इंस्टाग्राम पहले से ही क्रिएटर्स के साथ पार्टनरशिप में है और लॉन्च से समय यूज़र्स को सबसे पहले ये एमी विर्क, कोमल पांडेय जैसे इंफ्लुएंसर्स के पेज के ज़रिए दिखेगा, लेकिन इंस्टाग्राम के प्रोडक्ट के वीपी विशाल शाह को रील्स के जरिए से ‘भारत में अगला सुपरस्टार’ मिलने की उम्मीद है।
इंस्टाग्राम रील्स के जरिए 15 सेकेंड की शॉर्ट वीडियो बनाई जा सकती है। वीडियो की बैकग्राउंड को बदला जा सकता है वहीं टिकटॉक की तरह ही स्पीड को भी कंट्रोल किया जा सकता है। इस सर्विस में टिकटॉक का ‘Duet’ फीचर भी यूजर्स को मिलेगा। रील्स इंस्टाग्राम स्टोरीज़ की सेक्शन में भी दिखेगा। पूरी वीडियो बनाने के बाद यूजर इसे अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में शेयर कर सकेंगे। इसके अलावा यूजर अपने फ्रेंड्स को यह वीडियो डायरेक्ट भी भेज सकेंगे।
इंस्टाग्राम ने इस फीचर में म्यूजिक के लिए भारत में सारेगामा के साथ साझेदारी की है। ऐसे में म्यूजिक के साथ कॉपीराइट को लेकर किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होने वाली है।
इंस्टाग्राम का यह फीचर ऐसे समय में आ रहा है जब भारत सरकार ने टिकटॉक समेत 59 चाइनीज ऐप पर बैन लगा दिया है। इस बैन के बाद इन ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर और एपल ऐप स्टोर से भी हटा दिया गया है। टिकटॉक के विकल्प में लोग चिंगारी ऐप को खूब पसंद कर रहे हैं। कुछ ही समय में इसके 2 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं।

यात्रा सुरक्षित होने पर ही घरेलू क्रिकेट खेला जाएगा: गांगुली

मुम्बई : भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा है कि भारतीय घरेलू सत्र तभी शुरू होगा जब युवा खिलाड़ियों का रणजी ट्रॉफी मैचों के लिए देश के अंदर यात्रा करना सुरक्षित होगा।
भारत के घरेलू टूर्नामेंटों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के कारण इंडियन प्रीमियर लीग अगर अक्टूबर में होती है तो सत्र में मैचों की संख्या कम करनी पड़ेगी। घरेलू सत्र 2020-2021 की शुरुआत अगस्त के अंत में विजय हजारे ट्रॉफी के साथ होनी थी जबकि इसके बाद रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का आयोजन होना था। पिछले सत्र में लॉकडाउन की शुरुआत के कारण ईरानी ट्रॉफी को रद्द किया गया था।
घरेलू और जूनियर क्रिकेट के बारे में पूछने पर गांगुली ने स्पोर्ट्स तक से कहा, ‘‘ये जरूरी हैं लेकिन कोरोना वायरस महामारी के नियंत्रित होने के बाद ही ये होंगे। हालात सुरक्षित होने के बाद ही, विशेषकर जूनियर क्रिकेट।’’
गांगुली ने कहा कि भारत बड़ा देश है और मैचों के लिए टीमों को एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करनी होती है और इसलिए घरेलू क्रिकेट तब तक शुरू नहीं होगा जब तक कि सब कुछ सुरक्षित नहीं होता।
बीसीसीआई प्रमुख ने कहा, ‘‘हम युवा खिलाड़ियों को लेकर जोखिम नहीं लेना चाहते। हमारा देश इतना बड़ा है और हमारा घरेलू क्रिकेट इतना मजबूत है कि सभी को खेलने के लिए यात्रा करनी पड़ती है। इसलिए जब तक यह सुरक्षित नहीं होगा तब तक इसका आयोजन नहीं होगा।’’
इसी तरह आयु वर्ग के टूर्नामेंटों का आयोजन भी फिलहाल नहीं होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में गुरुवार को कोरोना वायरस के एक दिन में सर्वाधिक रिकॉर्ड 24,879 मामले सामने आए जिससे कुल मामलों की संख्या 7,67,296 तक पहुंच गई। इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या 21,129 तक पहुंच गई है जिसमें 487 लोगों ने एक दिन में जान गंवाई है।

खादी इंडिया से ऑनलाइन खरीदिए मास्क

शुरूआती कीमत 30 रुपये
नयी दिल्ली : कोविड-19 महामारी के चलते फेस मास्क हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। मास्क की अहमियत को देखते हुए कई कंपनियां मास्क प्रोडक्शन में उतर गई हैं। अब खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने कोरोना महामारी के कारण मास्क की बढ़ती माँग को देखते हुए इसकी ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी है। आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि खादी मास्क की ऑनलाइन बिक्री शुरू की गयी है। अब लोग वास्तविक खादी मॉस्क खरीद सकेंगे क्योंकि बाजार में खादी मास्क के नाम पर गलत चीजें बेची जा रही हैं।
विनय कुमार ने कहा कि मास्क की ऑनलाइन बिक्री का उद्देश्य खरीदारों को किसी भी धोखाधड़ी से बचाना है। कईं ऑनलाइन पोर्टल खादी के नाम पर ऐसे मास्क बेच रहे हैं जो न तो खादी के कपड़े हैं और न ही हाथ से बने हैं। उन्होंने बताया कि खादी सूती मास्क डबल-लेयर सूती कपड़े से बने हैं। ये मास्क तीन प्लेटों के साथ दोहरी-परत के हैं और तीन आकारों में उपलब्ध हैं। सिल्क मास्क तीन-परत वाले हैं जो कॉटन खादी की दो इंटरनल परतों और खादी सिल्क की सबसे ऊपरी परत के साथ हैं। विनय कुमार ने बताया कि उनके पास 8 लाख खादी मास्क सप्लाई के ऑर्डर आए हैं। इसमें से करीब 6 लाख मास्को की सप्लाई की जा चुकी है।
500 रुपये का ऑर्डर दिया जा सकता है
उन्होंने कहा कि खादी इंडिया कॉटन और सिल्क दोनों मॉस्क बेच रहा है। कॉटन मास्क की कीमत मात्र 30 रुपए और सिल्क मास्क 100 रुपये प्रति उपलब्ध है। मास्क की ऑनलाइन खरीद के लिए न्यूनतम 500 रुपये का ऑर्डर दिया जा सकता है। वर्तमान में ऑनलाइन बिक्री केवल देश के भीतर ही मान्य है। खादी के मास्क के लिए http://www.kviconline.gov.in/khadimask पर ऑर्डर दिया जा सकता है।

कोरोना स्पाइस जेट के यात्री टिकिट के साथ ले सकेंगे 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर

नयी दिल्ली : कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच यात्रियों को इससे सुरक्षा देने के लिए एयरलाइन कम्पनी स्पाइसजेट ने यात्रियों को कोरोना का बीमा कवरेज देने का ऐलान किया है। ये बीमा कवरेज पूरे एक साल के वैलिड होगा। स्पाइसजेट ने इस इंश्योरेंस कवर की पेशकश के लिए अपनी डिजिट इलनेस ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी के जरिए गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस के साथ साझेदारी की है।
कम्पनी के अनुसार यात्रियों के लिए अलग-अलग इंश्योरेंस पैकेज लॉन्च किए हैं। इनकी कीमत 443 से 1,564 रुपए के बीच है। इन पैकेज में यात्रियों को 50 हजार रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक का बीमा कवरेज मिलेगा। यात्री अपनी जरूरत के हिसाब से इंश्योरेंस पैकेज चुन सकेंगे। ये इंश्योरेंस कवर ऑप्शनल रहेगा।
क्या-क्या होगा कवर?
स्पाइसजेट के बीमा पैकेज में अस्पताल के खर्चों के साथ 30 और 60 दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के सभी खर्चों को कवर किया जाएगा। जांच के दौरान पॉजिटिव रिपोर्ट आती है तो इलाज, दवा और प्रिसक्रिप्शन का खर्च भी इसमें कवर होगा। बीमा में अस्पताल के कमरे या आईसीयू का खर्च भी कवर होगा।
वंदे भारत मिशन के तहत उड़ानें संचालित करेगी स्पाइसजेट
कम्पनी के अनुसार जुलाई में वंदे भारत मिशन के तहत 19 और उड़ानें संचालित होंगी। इससे यूएई, सऊदी अरब और ओमान में फंसे करीब 4,500 भारतीयों को निकालने में मदद मिलेगी। स्पाइसजेट ने एक बयान में कहा कि “एयरलाइन इस महीने रास अल-खैमाह, जेद्दा, दम्माम, रियाद और मस्कट से बेंगलुरू, हैदराबाद, लखनऊ, कोझीकोड, कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और मुंबई के लिए 19 और उड़ानें संचालित करेगी। “

भवानीपुर कॉलेज को मिला बेस्ट एजुकेशन ब्रांड अवार्ड 

कोलकाता :  कोलकाता का भवानीपुर कॉलेज गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी ” इकनॉमिक टाइम्स” ने शिक्षा के क्षेत्र में ब्रांड रैंकिंग में शीर्षस्थ स्थान “बेस्ट एजूकेशन ब्रैंड अवार्ड” कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह को गुल पनाग ने विडियो के द्वारा यह अवार्ड प्रदान किया । शिक्षा के स्तर पर तो भवानीपुर कॉलेज ने अपनी एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई ही है साथ ही विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में अपने ज्ञान को बढ़ाने में भी शिक्षक गणों और मैनेजमेंट ने पूर्ण रूप से हाथ रहा है। कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहे विद्यार्थियों को लॉक डाउन से ही उनको कॉलेज से बराबर जोड़ने के लिए सेमिनार, वर्कशॉप प्रोजेक्ट, सामाजिक और सांस्कृतिक आदान प्रदान, साहित्य कला और संगीत आदि का ऑन-लाइन आयोजन करता रहा।

घटना प्रधान विडियो निर्माण प्रतियोगिता फिनोमेनन 2020 पोस्टर विडियो निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें कम्प्यूटर विभाग के प्रो. आकाश निर्णायक रहे।ट्यूटोरियल रूप में रखने के कारण पचास से अधिक विद्यार्थियों ने घटना प्रधान विडियो निर्माण में रजिस्ट्रेशन कराया। तेइस पोस्टर में से प्रथम स्थान पर आशीष लाल, द्वितीय हर्षिताष जायसवाल और तृतीय रमशा टूबा जिन्होंने क्रमशः एंटीमैटर, एस्ट्रॉनमी और मैग्नेटिक मोनोपोली पर अपने विडियो बनाए जो इनकी कल्पना को एक नया आयाम देते हैं। इस कार्यक्रम की परिकल्पना कॉलेज डीन प्रो. दिलीप शाह ने की। इस पहल ने विद्यार्थियों की कल्पना शक्ति को निश्चित ही बड़ा एक आकाश दिया।फिनोमेनन 2020 इस वर्ष साइंस कम्युनिकेटर का समूह विभिन्न घटनाओं के विडियो बनाने के कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ा रहेगा। यह प्रथम चरण है। सभी विजेताओं को पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह जानकारी डॉ. वसुन्धरा मिश्र ने दी।

खुदीराम बोस सेन्ट्रल कॉलेज में वेब परिचर्चा व श्रुति नाटक

कोलकाता : खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज की ओर से पाठ्यक्रम में शामिल विषय ‘हिंदी नाटक का उदभव और विकास’ पर वेब परिचर्चा एवं दिवंगत प्रसिद्ध नाट्यकर्मी उषा गांगुली की स्मृति में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के नाटक ‘अंधेर नगरी ‘का श्रुतिनाट्य मंचन  किया गया। स्वागत भाषण देते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ सुबीर कुमार दत्ता ने कहा कि कोरोना महामारी जैसे संकट के समय हमारे कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।उन्होंने व्याख्यान के लिए आमंत्रित वक्ताओं और हिंदी विभाग के सभी शिक्षकों,  विद्यार्थियों और संगोष्ठी में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का स्वागत औपचारिक तौर पर स्वागत किया। विभागाध्यक्ष डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि परिचर्चा के लिए हमने पाठ्यक्रम में शामिल विषय को चुना है ताकि कलकत्ता विश्वविद्यालय के अधीनस्थ सभी कॉलेजों के हिंदी विद्यार्थी लाभांवित हो सकें. ऐसे आयोजनों का एक उद्देश्य यह भी है कि विद्यार्थियों में  साहित्यिक और सांस्कृतिक अभिरुचि का विकास हो।

विषय का प्रवर्तन करते हुए उन्होंने कहा नाटक साहित्य की सबसे वैविध्यपूर्ण और प्रभावी विधा है। हिन्दी नाटक का उदभव और विकास’ विषय पर विचार रखते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी की शिक्षिका डॉ वसुंधरा मिश्र ने हिंदी नाटक के उदभव और विकास की लम्बी परम्परा के बीच नाटकों के स्वरूप, कथ्य और रचना प्रक्रिया आदि पर आए बदलावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी नाटक ने साहित्य, कला और रंगमंच के बीच पुल का काम किया है।
इस अवसर पर सौरभ केशरी, साक्षी झा, प्रीति साव,बिंदी चौधरी,अंजलि पाठक, सिमरन जैसवारा ने उषा गांगुली की स्मृति में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के नाटक ‘अंधेर नगरी ‘का श्रुति नाट्य पाठ किया। प्रो किरण सिपानी ने कहा कि ऐसे आयोजन के लिए मैं हिंदी विभाग को धन्यवाद देती हूँ। प्रो संजय जायसवाल ने कहा कि विद्यार्थियों की यह उम्दा श्रुति नाट्य प्रस्तुति सही अर्थों में उषा गांगुली को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करता है। रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि ऐसे आयोजन भावी पीढ़ी को तैयार करने का काम कर रहे हैं।मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज अन्य संस्थानों को दिशा निर्देश देने का काम कर रहरहा है।
उमा झुनझुनवाला ने इस अवसर पर उषा गांगुली की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने अपने श्रुति पाठ से मुझे बांधे रखा। संगोष्ठी में प्रो. अरविंद मृधा, प्रो. तापसी घोष, डॉ विजया सिंह, डॉ रेणु गुप्ता, प्रो राकेश चौबे सहित काफी संख्या में विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो राहुल गौड़ और श्रुति नाटक का निर्देशन एवं संयोजन प्रो मधु सिंह ने किया।

माटी

  • पीहू

ताज़ा है ज़हन में
पर बरसों पुरानी है
दास्तां लकीरों की,
खींची गई थी
आर-पार
बेशुमार यादों,
अनगिनत सपनों,
एक जस्बात,
एक रूह,
और, एक माटी के।

वे समझेंगे क्या,
जन्मभूमि से बंधी हुई पीड़ा!
जो हुए नहीं बेघर,
छुटा नहीं पीछे
जिनका सर्वस्व।
पुश्तैनी घर,
मां का चौका,
बाबूजी के खेत,
दादाजी से मुट्ठी भर मिली
सिक्कों की सौगातें,
दादी के पान का बीड़ा
बहन की बिदाई,
भाई का तबला,
महावर से रंगे
बालिका वधु के पांव,
प्रथम पद चिन्ह लल्ला के,
स्कूल की घंटी,
कीचड़ से लथपथ
यारों संग फुटबॉल।
नहीं अट पाये थे
एक बक्से
दो गठरियों के अंदर।

उस माटी को
अपनेपन से छूने का
छिन गया है आज अधिकार भी,
जब छू पाते हैं
कांप उठता है रोम-रोम
टूट जाता है दबे क्रंदन का बांध
हो जाता है प्लावित,
खोखला हो चुका उनका
अपना ही अंतःकरण।

पर शेष नहीं है जिनकी शक्ति
वे ‘वहां’ से विरले
मिलने आये आदमियों को
छूकर हाथों से
जन्मदात्री माटी को
कर लेते हैं नमन।

गुंजते हैं अब दुआओं में
इबादत के शब्द
कि युगों की धूल में
हो जाने से पहले विलीन
अमूल्य स्मृतियां
माटी की,
आगामी पीढ़ियों के लिए
किस्सों में बुर्जुगों के
महकती रहे
माटी।