मुम्बई : बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत की सोशल मीडिया टीम ने साल 2019 में आई अभिनेत्री की फिल्म ‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’ में उनके द्वारा निभाए गए किरदार के तौर पर डिजाइन की गई गुड़िया की तस्वीर साझा की है। मणिकर्णिका डॉल को साड़ी व पारंपरिक भारतीय आभूषणों से सजाया गया है, जो फिल्म में कंगना के लुक से प्रेरित है।
तस्वीर को ट्विटर पर साझा करते हुए टीम ने लिखा, “मणिकर्णिका डॉल बच्चों की नई पसंद है। यह अच्छी बात है जब बच्चे अपने नायकों के बारे में सीखते हुए बड़े होते हैं और देशभक्ति व बहादुरी से प्रेरित होते हैं।
‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’ पिछले साल 25 जनवरी को रिलीज हुई थी। कंगना फिल्म में शीर्षक भूमिका में थीं और यह फिल्म एक निर्देशक के तौर पर उनके डेब्यू को चिन्हित करती है। इस फिल्म के बाद कंगना ने अपने प्रोडक्शन हाउस का नाम भी मणिकर्णिका फिल्म्स रख दिया।
बच्चों की पसन्द बनीं ‘मणिकर्णिका’ की डॉल
मेरी कप्तानी छीनने और टीम से बाहर करने में ग्रेग चैपल ही नहीं, सभी थे शामिल’ : गांगुली
नयी दिल्ली : टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर को लेकर बात की है। गांगुली टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाते हैं, लेकिन 2005 का साल उनके लिए काफी निराशाजनक रहा था। उनसे कप्तानी छिनी और इसके बाद उन्हें टीम से भी बाहर कर दिया गया था। गांगुली ने कहा कि उन्हें टीम से निकालने में सिर्फ पूर्व कोच ग्रेग चैपल ही नहीं बल्कि पूरा सिस्टम शामिल था। गांगुली का मानना है कि उनसे कप्तानी छीनना नाइंसाफी थी।
एक बांग्ला दैनिक को दिए साक्षात्कार में गांगुली ने अपने कॅरियर के उस सबसे मुश्किल दौर के बारे में बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘वो मेरे करियर का सबसे बड़ा झटका था। मेरे साथ सरासर नाइंसाफी हुई थी। मुझे पता है कि आपको हमेशा न्याय नहीं मिल सकता, लेकिन फिर भी जो कुछ हुआ था मेरे साथ वो नहीं होना चाहिए था। मैं टीम इंडिया का कप्तान था और जिम्बाब्वे से जीतकर लौटा था और स्वदेश लौटते ही मुझे कप्तानी से हटा दिया गया था। मैंने 2007 वर्ल्ड कप भारत के लिए जीतने का सपना देखा था।’
‘2007 विश्व कप जीतना मेरा सपना था’
गांगुली ने आगे कहा, ‘इससे पहले हम फाइनल (2003 वर्ल्ड कप) में पहुंचे थे, मेरे पास यह सपना देखने के कारण थे। पांच सालों में टीम ने मेरी कप्तानी में अच्छा प्रदर्शन किया था, वो चाहे भारत में हो या फिर बाहर। इसके बाद आप अचानक मुझे टीम से ड्रॉप कर देते हैं? आप कहते हैं कि मैं वनडे इंटरनैशनल टीम का हिस्सा नहीं हूं और फिर मुझे टेस्ट टीम से भी बाहर कर दिया जाता है।’ गांगुली ने कहा कि मुझे इसमें कोई शक नहीं कि इसकी शुरुआत ग्रेग चैपल के बीसीसीआई को भेजे उस ई-मेल से हुई, जिसमें उनके खिलाफ काफी बातें लिखी गई थीं और जो लीक हो गया था।
क्या ऐसा होता है?’
गांगुली ने कहा, ‘मैं सिर्फ ग्रेग चैपल को इसका दोषी नहीं ठहराऊंगा। इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने ही यह सब शुरू किया था। उन्होंने मेरे खिलाफ बोर्ड को एक ई-मेल लिखा, जो लीक हो गया। क्या ऐसा कुछ होता है? क्रिकेट टीम एक परिवार की तरह होती है। लोगों में मतभेद हो सकते हैं, मिसअंडरस्टैंडिंग हो सकती है, लेकिन यह सब बातचीत से सुलझाया जा सकता है। आप कोच हैं, अगर आपको लगता है कि मुझे कुछ खास तरीके से खेलना चाहिए, तो आप मुझे बताइये। जब मैं खिलाड़ी के तौर पर टीम में लौटा, तो उन्होंने मुझे बताया, तो पहले क्यों नहीं ऐसा किया गया?’
‘टीम से ड्रॉप करने में सबका था हाथ’
गांगुली ने इसके लिए अकेले चैपल को जिम्मेदार नहीं ठहराया, कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि कोई सिस्टम की मदद के बिना कप्तान को हटा दे। उन्होंने कहा, ‘बाकी लोग भी निर्दोष नहीं थे। एक विदेशी कोच, जिसकी टीम सिलेक्शन में कोई नहीं राय मायने नहीं रखती थी, वो टीम इंडिया के कप्तान को ड्रॉप नहीं कर सकता। मुझे समझ में आ गया था यह बिना सिस्टम के सपोर्ट के नहीं हो सकता है। मुझे टीम से निकालने में सभी लोग शामिल थे, लेकिन मैं दबाव में बिखरा नहीं, मेरा आत्मविश्वास खत्म नहीं हुआ।’ 2005 में टीम से ड्रॉप होने के बाद गांगुली ने 2006 में दक्षिण अफ्रीकी दौरे के साथ टीम में वापसी की। इंटरनैशनल क्रिकेट में वापसी गांगुली ने रनों के साथ की और अगले दो साल में अपने करियर की कुछ यादगार पारियां खेलीं।
2008 में गांगुली ने लिया संन्यास
उन्होंने 2008 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था और रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी। गांगुली ने 311 वनडे इंटरनैशनल मैचों में 11363 रन और 113 टेस्ट मैचों में 7212 रन बनाए। उनके खाते में 22 वनडे इंटरनैशनल और 15 टेस्ट सेंचुरी शामिल हैं। गांगुली को महान कप्तानों में बिना जाता है, क्योंकि उन्होंने 2000 में हुए फिक्सिंग कांड के बाद टीम इंडिया को संभाला और अपनी कप्तानी में टीम को आगे बढ़ाया।
प्लास्टिक कचरे से बनीं एक लाख किलोमीटर सड़कें
नयी दिल्ली : केंद्र सरकार का सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे का प्रयोग सफल रहा है। विभिन्न सड़क निर्माण एजेंसियों ने अब तक एक लाख किलोमीटर से अधिक सड़कें प्लास्टिक कचरे से बनाई हैं। यह अधिक टिकाऊ, सस्ती और गड्ढा रहित हैं।
दशकों बाद प्लास्टिक कचरे को ठिकाने लगाने की राह मिल गई है। प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा कम होगा। इसके खाने से पशुओं की जान नहीं जाएगी और कूड़ा बीनने वालों की अतिरिक्त कमाई होगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जुलाई 2016 में सड़क निर्माण में ठोस और प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल करने की घोषणा की थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग में 10 फीसदी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया गया। सेंटर रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) द्वारा गुणवत्ता और क्षमता के अध्ययन के बाद जनवरी 2017 में राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्ग, जिला सड़कें, नगर निगम, नगर निकाय आदि सड़कों निर्माण में 10 फीसदी प्लास्टिक कचरे के प्रयोग करने के आदेश जारी हुए।
अधिकारी ने बताया कि देश के 11 राज्यों में एक लाख किलोमीटर सड़कें बन चुके हैं और चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा दो गुना बढ़ेगा। असम में इस साल पहली बार राष्ट्रीय राजमार्गों में एनएचएआईडीसीएल प्लास्टिक कचरे का प्रयोग शुरू हो गया है। इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) ने कोड ऑफ प्लास्टिक के नए मानक नवंबर 2013 में तैयार किए थे। प्लास्टिक कचरे को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने का यह विश्व का यह पहला कोड ऑफ प्लास्टिक है।
270 किलोमीटर लंबे जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग में प्लास्टिक का कचरा मिलाया गया। नोएडा सेक्टर 14ए में महामाया फ्लाइओवर तक सड़क निर्माण में छह टन प्लास्टिक कचरा लगा। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे के यूपी गेट के पास दो किमी सड़क के लिए 1.6 टन प्लास्टिक कचरा लगा। दिल्ली के धौलाकुआं से एयरपोर्ट जाने वाले एक किलोमीटर राजमार्ग में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हुआ।
इन जगहों पर भी चल रहा है निर्माण
चेन्नई, पुणे, जमशेदपुर, इंदौर, लखनऊ आदि शहरों में प्लास्टिक कचरे की सड़कें बनाई जा रही हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय की पांच लाख और अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में 50 किलोमीटर के दायरे में प्लास्टिक कचरे के लिए कलेक्शन सेंटर बनाने की योजना है।
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भारतीय मूल के 58 सीईओ 11 देशों में लहरा रहे परचम
36 लाख से अधिक लोगों को दे रहे रोजगार
वाशिंगटन : भारतीय मूल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) का दबदबा कॉरपोरेट वर्ल्ड में तेजी से बढ़ा है। इसी का परिणाम है कि अमेरिका, कनाडा और सिंगापुर सहित 11 देशों में भारतीय मूल के 58 सीईओ का परचम लहरा रहा है। इनमें माइक्रोसाफ्ट के सत्य नडाला से लेकर गूगल के सुंदर पिचाई भी शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल के दिग्गज पेशेवरों के संगठन ‘इंडियास्पोरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मूल के 58 सीईओ दुनिया भर में 36 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं। साथ ही सालाना 1000 अरब डॉलर की कमाई कर रहे हैं। भारतीय मूल के अधिपत्य वाले इन कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4,000 अरब डॉलर से अधिक है।
सफलता की शिखर पर पहुंचने का रफ्तार बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में भारतीय मूल के कारोबारी नेता पहले से कहीं अधिक संख्या में कॉरपोरेट सफलता के शिखर पर पहुंच रहे हैं। इनमें से कई अपने मंचों का इस्तेमाल सामाजिक परिवर्तन की पैरोकारी के लिए कर रहे हैं। भारतीय मूल के सीईओ के कार्यकाल के दौरान इन कंपनियों ने 23 प्रतिशत का वार्षिक लाभ दिया। ये प्रतिफल एसएंडपी 500 कंपनियों के मुकाबले काफी अधिक है।
तकनीकी के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी बोलबाला
भारतीय सीईओ के बारे में आम धारणा यह है कि वे तकनीकी क्षेत्र से होते हैं, लेकिन 58 सीईओ की यह सूची उस मिथक को दूर करती है। इंडियास्पोरा के संस्थापक एम आर रंगास्वामी ने कहा कि ये सीईओ बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता वस्तुओं और परामर्श सहित कई अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन अधिकारियों की उम्र 37 वर्ष से 74 वर्ष के बीच है और इनकी औसत उम्र 54 साल है।
कोरोना वायरस से निपटने में अहम भूमिका
कोरोना वायरस महामारी के दौरान इन कंपनियों ने मानवीय सहायता के लिए बहुत योगदान किया और साथ ही अपने कर्मचारियों, अपने ग्राहकों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लोगों का ध्यान रखा। रंगस्वामी ने कहा, ये कंपनियां कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए बहुत कुछ कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सूची में शामिल कई अधिकारियों ने ब्लैक लाइव्स मैटर जैसे मुद्दों पर अपनी एक सक्रिय स्थिति बनाई, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे जातीय समानता और नस्लीय न्याय पाने के मामले में अश्वेत समुदाय के साथ खड़े हैं। भारतीय मूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की इस सूची में भारत के प्रवासियों के साथ ही युगांडा, इथियोपिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में पैदा हुए पेशेवर शामिल हैं।
कारोबार और समाज को नयी दिशा दे रहे हैं भारतीय
मास्टरकार्ड के अध्यक्ष और सीईओ अजय बंगा ने कहा, भारतीय मूल के सीईओ आज के दौर में वैश्विक कारोबार और समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ नई दिशा के लिए प्रेरित कर रहे हैं। भारतीय अपनी विविध अनुभव से बहुत कुछ सीखतें हैं और समय आने पर उसे सामाज को देते हैं। हमारे आसपास जो रहते हैं उनकी जिंदगी में बदलाव लाने के लिए हम अहम रोल अदा करते हैं।
अभिनेत्री दिव्या चौकसे का निधन
मुम्बई : अभिनेत्री-गायिका दिव्या चौकसे कैंसर से डेढ़ साल से चल रही जंग हार गयीं और रविवार को उनका निधन हो गया। वह 28 साल की थीं।
दिव्या की पहली फिल्म ‘है अपना दिल तो आवारा’ (2016) में उनके साथ काम कर चुके निर्देशक मंजोय मुखर्जी के अनुसार अभिनेत्री ने अपने गृहनगर भोपाल में अंतिम सांस ली।
मुखर्जी ने बताया, ‘‘वह करीब डेढ़ साल से कैंसर से जूझ रही थीं। वह सही हो गयी थीं, लेकिन कुछ महीने बाद कैंसर फिर उभर गया। इस बार वह उबर नहीं सकीं। आज सुबह भोपाल में उनका निधन हो गया।
फ्लिपकार्ट, कर्नाटक सरकार मिलकर करेंगे हस्तशिल्प का प्रसार
बेंगलुरू : ई-वाणिज्य कंपनी फ्लिपकार्ट ने शुक्रवार को कहा कि उसने स्थानीय कला, शिल्प और हथकरघा क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिये कर्नाटक सरकार के साथ एक समझौता किया है। कम्पनी ने एक बयान में कहा कि यह पहल उसके फ्लिपकार्ट समर्थ कार्यक्रम के तहत की गई है। उसने कहा कि कर्नाटक सरकार के एमएसएमई एवं खदान विभाग के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये हैं, जिसके तहत स्थानीय कला, शिल्प और हथकरघा क्षेत्रों ई-वाणिज्य मंच पर लाया जा सके तथा बाजार में पहुंच प्रदान की जा सके।
कम्पनी ने एक विज्ञप्ति में कहा, फ्लिपकार्ट समर्थ कार्यक्रम के तहत भागीदारी से कर्नाटक के स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों को अपने हॉलमार्क उत्पादों को देश भर के ग्राहकों के समक्ष प्रदर्शित करने की सुविधा मिल सकेगी।
उसने कहा कि कर्नाटक सरकार और फ्लिपकार्ट समूह दोनों ने समाज के इन वंचित वर्गों के लिये व्यापार के अवसरों को बढ़ाने के रास्ते बनाने पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे मेड इन इंडिया को लेकर हो रहे प्रयासों में भी तेजी आयेगी।
एमएसएमई और खदान विभाग के प्रधान सचिव महेश्वर राव ने कहा, “फ्लिपकार्ट के साथ समझौता राज्य में वाणिज्यिक और सामाजिक विकास में सहायक होगा। यह साझेदारी कर्नाटक के स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा व्यवसायों को एक राष्ट्रीय उपभोक्ता आधार तक ले जाने में मदद करेगी।’’
फिटनेस प्रमाणपत्र जारी होने से पहले दर्ज होगा फास्टैग का ब्योरा
नयी दिल्ली : सरकार ने फिटनेस प्रमाणपत्र जारी होने से पहले देशभर के वाहनों का फास्टैग ब्योरा दर्ज करने का फैसला लिया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि इसके लिए एनआईसी को पत्र लिखा गया है और उसकी प्रतियां सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी गई हैं। मंत्रालय ने कहा कि वाहन पोर्टल के साथ नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (एनईटीसी) के साथ तालमेल किया गया है।
वाहन सिस्टम में वाहन पहचान नंबर या वाहन पंजीकरण नंबर के जरिये फास्टैग का सभी ब्योरा दर्ज किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि फास्टैग ने सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल के भुगतान के लिए रेडियो फ्रिक्वेंसी पहचान तकनीक का इस्तेमाल किया है। टोल भुगतान के लिए प्रीपेड या सीधे खाते को इससे जोड़ दिया गया है।
बयान में कहा गया है कि मंत्रालय ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि नए वाहनों के पंजीकरण के साथ और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने से पहले फास्टैग का ब्योरा दर्ज किया जाए। मंत्रालय ने इस योजना के लिए नवंबर 2017 में अधिसूचना जारी की थी। इस साल मई तक देशभर में कुल 1.68 फास्टैग जारी हो चुका है।
अब बर्नआउट की बात कर रहे हैं 83% विपणन और संचार पेशेवर
राचेल मोंटेन्ज़ कॅरियर को लेकर परामर्श देती हैं। फोर्ब्स में प्रकाशित उनके द्वारा लिए गये इस साक्षात्कार का अनुवाद निखिता पांडेय ने किया है। हम अनुवाद के साथ आपको मूल लेख का लिंक भी दे रहे हैं, जहाँ आप इसे पढ़ सकें।
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विपणन और संचार पेशेवरों के 83% अब बर्नआउट की रिपोर्ट करते हैं। हाल ही में 7,000 पेशेवरों को राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण देने वाले सर्वेक्षण में पाया गया कि विपणन और संचार पेशेवरों ने उच्चतम बर्नआउट के साथ नौकरी के कार्यों में सबसे खराब प्रदर्शन किया, 83.3% रिपोर्टिंग के साथ वे बाहर जलाए गए थे। एक विश्वविद्यालय-प्रशिक्षित कैरियर कोच के रूप में, मुझे सबूत और शोध-आधारित सिद्धांतों को नियुक्त करना पसंद है। मैंने प्रेरक सिद्धांतों, संक्रमणकालीन सिद्धांतों , तीन शीर्ष कैरियर सिद्धांतों , आत्म-प्रभावकारिता और अधिक के बारे में बात की है, लेकिन मुझे यह भी पता है कि अभ्यास या अन्वेषण के बिना, सिद्धांत सपाट हो जाता है। जैसा कि आप अपने अगले कैरियर कदम के बारे में सोचते हैं, मैं चाहताहूं कि आप अपनी जागरूकता को विस्तारित प्रश्नों, परिचय और संसाधनों के माध्यम से विस्तारित करें, विशेष रूप से इस समय जब आप बर्नआउट की अधिक घटनाओं का अनुभव कर रहे हैं। मैकल शॉ से मिलते हैं। वह एक टेक-चालित ऑनलाइन रिटेलर, Overstock.com पर मार्केटिंग के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करती हैं –
राशेल मोंटेन्ज़: उद्योग के साथ शुरू करते हैं, आपको क्या लगता है कि तीन सबसे बड़ी चुनौतियां हैं?
मैकल शॉ: 1. अधिग्रहण बनाम अवधारणा का सही संतुलन ढूंढना विपणक के लिए चुनौती बनी हुई है। वर्तमान समय के अनुसार वफादार लोगों को अलग किए बिना नए ग्राहकों को कैसे आकर्षित करें। आज, विपणक के पास इस समस्या को हल करने के लिए डेटा की जबरदस्त मात्रा है। फिर भी, इसके साथ, अधिग्रहण और प्रतिधारण उपायों के रूप में प्रयासों और बजटों को सटीक रूप से चित्रित करने के तरीके पर नए प्रश्न उठते हैं।
2. दूसरे, दीवारों वाले बगीचे। अधिक उपभोक्ता गोपनीयता का समर्थन करने के लिए ऑनलाइन विश्व संक्रमण के रूप में, विपणक के पास प्रत्येक विज्ञापन एवेन्यू की दक्षता को ट्रैक करने के लिए कम उपकरण हैं। कुकीज़ और ट्रैकिंग अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएंगे, इसलिए मुझे नए तरीकों का परीक्षण करने का अवसर मिला।
3. अंत में, उपभोक्ताओं का छोटा ध्यान अवधि। 1980 के दशक में एक बच्चे के रूप में, मैं शनिवार की सुबह जल्दी उठती था और कार्टून देखती था। हर 5-8 मिनट में, विज्ञापनदाताओं को मुझसे बात करने की अनुमति दी गयी, जबकि मैंने टीवी शो को जारी रखने के लिए बेसब्री से इंतजार किया। अगली पीढ़ी उतना टेलीविजन नहीं देख रही है। एक दोस्त के रूप में इसे रखा, वे “फोन देख रहे हैं”। एक बार के 30 मिनट के एपिसोड अब 3 मिनट के यूट्यूब वीडियो या 15 सेकंड के टिकटॉक्स हैं। विपणक को एक यादगार ब्रांड संदेश बनाने के लिए रचनात्मक, नए तरीके खोजने होंगे।
मोंटैज़: समुदाय बर्नआउट से बचने और पिटाई करने के लिए महत्वपूर्ण है। समुदाय बनाने के लिए आपके कुछ पसंदीदा कार्यक्रम और संगठन क्या हैं?
शॉ: शाॅपटाॅक(ShopTalk), शीर्ष खुदरा उद्योग सम्मेलनों में से एक, सफलता की कहानियों, उद्योग के नेताओं और अत्याधुनिक विपणन विक्रेताओं का एक गतिशील संयोजन लाता है। उनकी वार्षिक घटना ई-काॅमर्स और डिजिटल मार्केटिंग क्षेत्रों में शिक्षा का एक ठोस संतुलन बनाती है और साथियों से मिलने और विचारों को साझा करने के लिए नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करती है। यह 2018 में एक शॉपटॉक इवेंट में था, जो कि द फीमेल कोटिएंट द्वारा आयोजित द गर्ल्स लाउंज (जिसे अब इक्विटी लाउंज के रूप में जाना जाता है) में पेश किया गया था, जो लैंगिक समानता का समर्थन करने वाली संस्था है। उनके लाउंज, अध्ययनों, प्रकाशनों और नेटवर्क के माध्यम से, मुझे उन चुनौतियों का पता चला, जिसका सामना एक बतौर उद्यमी और व्यवसाय का नेतृत्व करने वाली महिला के रूप में करना पड़ता है, जो अद्वितीय नहीं हैं और न ही मेरी क्षमताओं का संकेत हैं। मेरे नेतृत्व की इस भावना ने यह पता लगाने के लिए मुझे मुक्त कर दिया कि नेतृत्व शैली मेरे लिए प्रामाणिक थी और उसमें आत्मविश्वास पाया। मेकर्स वुमन एक और संस्था है जिसे मैं प्रेरणा और समावेश के लिए लिंक्डइन पर फॉलो करती हूं। वे प्रासंगिक जानकारी और प्रतिभाशाली महिलाओं के माध्यम से उत्थान करते हैं।
मोंटेन्ज़: अपने कॅरियर के बारे में अधिक बात करते हैं। आपका सबसे बड़ा प्रभाव क्या था जो आपको आपकी पिछली नौकरी से मिला है जहां आप अभी हैं?
शॉ: प्रायोजन। चीफ ऑफ़ स्टाफ़ के रूप में मेरी पूर्व स्थिति में, मेरे अधिकांश दिन सीखने में बीत रहे थे कि मुख्य विपणन अधिकारी ने कैसे सोचा और विभिन्न परिदृश्यों पर प्रतिक्रिया दी। इस अनौपचारिक सलाह ने मुझे उन समस्याओं के लिए एक अलग कोण प्रदान किया जिसके जरिए हम समस्याओं का हल करते हैं, और मेरे मालिक ने मेरी क्षमताओं के आधार पर अपने अनुभव के आधार पर मेरी उम्मीदवारी को प्रायोजित किया।
मोंटेन्ज: आपके हाल के सबसे महत्वपूर्ण नेतृत्व निर्णयों में से कुछ क्या हैं?
शॉ: मैंने हाल ही में जो सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, मैं उस व्यक्ति और नेता को परिभाषित कर रही हूँ जो मैं बनना चाहती हूँ। मेरे मूल्यों को परिभाषित और प्रतिबद्ध करना, प्रतिक्रिया और आलोचना के आसपास की सीमाओं को जो निर्धारित करता है, जो मैं चाहती हूँ और मुझे जो कुछ भी नहीं देता है उसे छांट देती हूँ।
मोंटेन्ज़: अपने परिवर्तनशील कौशल के बारे में हमसे बात करें?
शॉ: मैं खुद को कई भूमिकाओं में देखती हूँ और स्थितियों को अपने प्रदर्शन को बढ़ाने वाली चीजों के रूप में देखती हूँ। मैं वर्तमान में एक मार्केटर , नेतृत्वकर्ता, कर्मचारी, महिला, माँ और सहयोगी के रूप में कई भूमिकाओं में काम करती हूँ। उन दिशानिर्देशों के भीतर, मैंने सहानुभूति को सबसे हस्तांतरणीय कौशल पाया है। जब मैं वास्तव में खुद को किसी और की जगह रखकर देखती हूँ तो (ग्राहक, कर्मचारी, बॉस, बच्चे, दोस्त) , स्थिति के बारे में मेरी समझ बढ़ जाती है।
मोंटेंज़: मार्केटिंग उद्योग में सफलता के लिए आपके पास सबसे अच्छा सुझाव क्या हैं?
शॉ : उत्सुक रहो। आप किन उत्पादों और सेवाओं को खरीदते हैं? उन फैसलों को बनाने में आप क्या महत्व रखते हैं? अपने परिवार और दोस्तों से भी ऐसे ही सवाल पूछें। सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने ग्राहकों से पूछें – या तो सर्वेक्षण के माध्यम से या अन्य अनुभवों का परीक्षण करने के लिए। उपभोक्ताओं के अलग-अलग उद्देश्यों को समझें और अपने ब्रांड और उत्पाद को उनकी यात्रा में कैसे खड़ा कर सकते हैं ?
मोंटेन्ज़: यह कई लोगों के लिए एक कठिन समय है, क्या ऐसा कुछ है जो आपके कप को भर रहा है?
शॉ : मैंने हाल ही में लीड के लिए ब्रेन ब्राउन की हिम्मत पूरी की । खुद को नेतृत्व के सिद्धांतों पर मूल्यांकन करते हुए वह साहस, भेद्यता, सहानुभूति और विकास सिखाती है और मुझे अधिक समावेशी और संपूर्ण बनाती है। मैंने यह भी सीखा है कि एक लचीला टीम के साथ वित्तीय परिणाम देने के लिए अपनी ऊर्जा और समय प्रबंधन में सुधार कैसे करें ?
रुस में दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन का सफल परीक्षण
रूस की सेचेनोव यूनिवर्सिटी में गत रविवार 13 जुलाई को दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन का सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा हुआ। ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी वुतिम तारासोव संस्थान के निदेशक ने बताया कि जिन लोगों पर इस वैक्सीन का परीक्षण किया गया है, उनमें से पहले समूह को बुधवार (15 जुलाई) को तथा दूसरे समूह को 20 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी।
उन्होंने कहा, “सेचेनोव यूनिवर्सिटी ने स्वयंसेवियों पर विश्व की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन का सफलता पूर्वक परीक्षण पूरा कर लिया है।” रूस के ‘द गैमली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी’ द्वारा विकसित की गई वैक्सीन के चिकित्सकीय परीक्षण की शुरुआत 18 जून से शुरू हुई थी।
सेचेनोव विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान, उष्णकटिबंधीय एवं संक्रमण जनित रोग संस्थान के निदेशक अलेक्जेंडर लुकाशेव ने बताया कि इस ट्रायल का मकसद यह पता लगाना है कि क्या यह वैक्सिन मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है और इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। उन्होंने, कहा कि वैक्सीन के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है और यह मौजूदा समय में बाजार में उपलब्ध टीकों के समान सुरक्षित है।
लुकाशेव ने कहा कि आगे की वैक्सीन विकास योजना पर पहले से ही उत्पादन रणनीति निर्धारित की जा रही है, जिसमें वायरस के साथ महामारी विज्ञान की स्थिति और बड़े स्तर पर उत्पादन करने की संभावना शामिल है। तारासोव ने कहा कि महामारी की स्थिति में सेचेनोव विश्वविद्यालय ने न केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में बल्कि एक वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान केंद्र के रूप में भी काम किया है जो ड्रग्स जैसे महत्वपूर्ण और जटिल उत्पादों के निर्माण में भाग लेने में सक्षम है… हमने इस टीके के साथ काम करना शुरू किया, प्रीक्लिनिकल स्टडीज और प्रोटोकॉल डेवलपमेंट, और क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं।
आईसीएसई : लॉ मार्टिनियर के शिवांश को मिले 98.20 प्रतिशत
कोलकाता : सीआईएससीई द्वारा संचालित आईसीएसई (दसवीं) की बोर्ड परीक्षा में ला मार्टिनियर फॉर ब्वायज के छात्र शिवांश चांडक ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इस परीक्षा में शिवांश ने 98.20 प्रतिशत अंक प्राप्त किये हैं। उसे हिन्दी, कम्प्यूटर, मैथेमेटिक्स, अंग्रेजी साहित्य, ज्योग्राफी और बायोलॉजी जैसे विषयों में शत – प्रतिशत अंक मिले हैं। शिवांश को खेलों में भी रुचि है और वह अपने स्कूल के लिए बास्केटबॉल के कई टूर्नामेंटों में भाग ले चुका है। वह अर्थव्यवस्था की दुनिया में अपनी जगह बनाना चाहता है। उसे मैथेमेटिक्स और कम्प्यूटर साइंस में रुचि है। हम बता दें कि शिवांश के पहले उसके भाई ने भी वर्ष 2016 में आईसीएसई की परीक्षा में पूरे भारत में चौथा स्थान प्राप्त किया था।





