Sunday, April 5, 2026
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सुशान्त की हमेशा याद दिलाएगी ‘दिल बेचारा’

~ निखिता पाण्डेय

#दिल बेचारा मुकेश छाबड़ा के निर्देशन में बनी एक रोमांटिक फिल्म है, जो जाॅन ग्रीन द्वारा 2012 में बनायी फिल्म ‘The Fault in Our Stars’ पर आधारित है,जिसमें दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और अभिनेत्री संजना संघी ने बेहतरीन भूमिका निभाई है। इन दोनों पात्रों का नाम किज़ी बासु(Kizie Basu) और इमैनुएल राजकुमार जूनियर उर्फ मैनी(Manny) रहता है।इसमें अभिनेता सैफ अली खान की छोटी-सी भूमिका है, उनका नाम ‘अभिमन्यु वीर’ रहता है,जो एक संगीतकार होते हैं। सबसे मज़ेदार किरदार साहिल वैद का रहता है,जो मैनी का दोस्त ‘जगदीश पाण्डेय’ उर्फ ‘जेपी’ हो है,

“जन्म कब लेना है और मरना कब हम डिसाइड नहीं कर सकते हैं।

पर जीना कैसे है,वो हम डिसाइड कर सकते हैं………..।” – सुशांत

इस मूवी में एक बहुत अच्छी बात को दर्शाया गयी है जो आप कितने भी प्रेरक यानी मोटिवेशनल वीडियो देख लें,तो भी अपना नहीं पायेंगे। मगर सुशांत ने इस फिल्म के चरित्र को जिया है,उसमें खुद को डूबा लिया है और सागर की लहरों की तरह हम सबको अपने साथ बहाकर ले गया। जिंदगी बहुत खूबसूरत है और बहुत छोटी भी…..इसमें मुश्किलें भी है,तो सुकून की चादर भी है। अगर सारी ज़िंदगी सिर्फ ‘मैं’ और ‘तुम’ करने या बोलने में,नींचा दिखाने में,ताना मारने में,लड़ने-झगड़ने में ही बिता दोगे,तो ‘हम’ और ‘हमारा’ बनकर प्यार कब करोगे ???? मरने के बाद……….. ?

कहते हैं मरने के बाद की दुनिया कैसी होती है कोई नहीं जानता और मरने के बाद सब खुश रहते हैं ? जब जी रहे हो,इतनी सुंदर दुनिया मिली है,तो इसे जियो न……क्यूं जीते जी मर रहे हो और दूसरों को जीने नहीं दे रहे……।।।।।।।।
इसमें दोनों को कैंसर रहता है….और ये जानते हैं कि ये ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रहेंगे मगर फिर भी दोनों मज़ाक से शुरू हुई दोस्ती को एक-दूसरे में जान की तरह बस गये। जीने की वजह बन गये और मरने के पहले और मरने के बाद भी सिर्फ प्यार किया। शिकायत की कोई जगह नहीं थी। इन्होंने ज़िन्दगी को कभी नहीं कोसा बल्कि शुक्रिया अदा किया कि तुमने मुझे उससे मिलवाया और जीने की वजह दे दी। हम सबको यह सीख लेनी चाहिये कि हम सिर्फ ज़िंदगी को कोसते हैं कि हमारे पास ये नहीं है,वो नहीं है,वो सुंदर है,हम बदसूरत है,वो पतली है,हम मोटे हैं,वो अमीर है,हम गरीब है……वगैरह,वगैरह…हमारी शिकायतें कभी खत्म नहीं होती है….अरे! भगवान ने जो दिया है,जितना दिया है,वो काफी है…उनका धन्यवाद करो और जो भी है उसी में संतुष्ट रहो और जो भी मिलेगा,वो अच्छा ही होगा। बस इतनी छोटी-सी बात नहीं समझ सकते…..जब तक जीवन है,उसके हर पल को जियो और हर लम्हें को सुंदर तथा यादगार बनाओ….जीवन में कभी भी किसी चीज के प्रति पछतावा मत रखना….वरना जी नहीं पाओगे….जो भी करो सच्ची निष्ठा से करना, तभी सफलता मिलेगी। खुद से प्यार करना सीख लो,कभी कोई धोखा नहीं देगा और किसी की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी…..वो अंग्रेज़ी में कहते है न ‘Self love is very important,because it’pure’ अपने मन को सुंदर और पावन बनाना सीखो और दूसरे के चेहरे में उसकी खूबसूरती नहीं मन की सुंदरता देखो,तब जाकर इस दुनिया के हर कोने में अलौकिक सुंदरता दिखाई देगी। कभी-कभी कुछ लोग ऐसे मिलते हैं,जो कुछ ही मिनटों में आपकी चरखे वाली ज़िन्दगी को तेज़ गाड़ी-सी रफ़्तार दे देते हैं और उन्हें आप कभी भूल नहीं पायेंगे। जैसे हम सभी के पास स्मार्टफोन है,उसमें सभी के पास एक ‘गूगल मामा’ रहते हैं,तो आप सभी अपने जीवन का ‘गूगल मामा’ खोजे,जो आपके हर सवाल का जवाब दे सके,आपकी मंज़िल तलाशने में मदद कर सके और जब भी आप परेशान हो,तो एक असिस्टेंट की तरह आपका मनपसंद गाना सुनाकर मन शांत कर सके,दुःखी होने पर चुटकुले सुनाकर हंसा दे। अगर आप इतने काबिल बन गये,तो किसी के जीवन का ‘गूगल मामा’ बनकर उसे रास्ता दिखाएं……मन से जब आप अच्छा काम करेंगे न तो जो खुशी मिलती है, वह ‘Out of the World’ होती है और ऐसी खुशियां पैसे से कभी खरीदी नहीं जा सकती। फिल्म के अंतिम दृश्य में, वह चौथी दीवार तोड़ता है और किज़ी से बात करता है, जिसके लिए वह “सेरी” का जवाब देता है।इससे यह पता चला कि “OK” को तमिल भाषा में “सेरी” भी कहा जाता है।
अंत हर एक चीज़ों का होता है….इसका भी हो रहा है…..बस इतना ही कहूंगी कि आपके जीवन में जो भी है,उसे पास रखिये,दूर मत जाने दीजिये….वरना जब वो पास नहीं होगा, तो उसकी एहमियत पता चलती है…सभी के साथ रहिये और पास रहिये क्योंकि ये दिल जो हमारा है,वो बेचारा है….।

#खुश रहो,खुशियां बिख़ेरो #सेरी #ज़िन्दगी का टैगलाइन।

 

सेना में भी महिलाओं को बराबरी का हक, स्थायी कमीशन का आदेश जारी

नयी दिल्ली: केन्द्र सरकार ने गत गुरुवार को सेना में भी महिलाओं को बराबरी का हक देने के लिए स्थायी कमीशन देने की विधिवत घोषणा कर दी। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) की महिला अधिकारियों को अब सेना की सभी दस शाखाओं में स्थायी कमीशन मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में एक ऐतिहासिक फैसले में एसएससी के तहत नियुक्त सभी महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन का रास्ता साफ कर दिया था। सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए संगठन में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। अब महिला अधिकारियों को आर्मी एयर डिफेंस, सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एवियेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मेकैनिकल इंजीनियर (ईएमई), आर्मी सर्विस कोर, आर्मी आयुध कोर और इंटेलिजेंस कोर के अलावा मौजूदा शाखा जज एंड एडवोकेट जनरल और सैन्य शिक्षा कोर में स्थायी कमीशन मिलेगा। कर्नल आनंद ने कहा कि महिलाओं के चयन के लिए जल्द ही चयन बोर्ड सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया था एक माह का वक्त
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सात जुलाई को केंद्र सरकार को एक माह का और वक्त देते हुए स्थायी कमीशन पर फरवरी का अपना फैसला लागू करने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने फरवरी में कहा था कि महिलाओं को भी कमान देने पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही लैंगिक भेदभाव समाप्त करते हुए कहा था कि सभी महिला अधिकारी स्थायी कमीशन की हकदार हैं।
सेवानिवृत्ति की उम्र तक मिलेगा सेवा का लाभ
सेना में फिलहाल महिला अधिकारियों को केवल दो शाखाओं जज एडवोकेट जनरल और शिक्षा कोर में ही स्थायी कमीशन मिलता था। एसएससी के तहत महिला अधिकारियों को शुरू में पांच वर्ष के लिए लिया जाता था, जिसे बढ़ा कर 14 वर्ष तक किया जा सकता था। स्थायी कमीशन मिलने से उन्हें सेवानिवृत्ति की उम्र तक सेवा का लाभ मिलेगा। लंबे अर्से से महिलाओं के लिए सेना में स्थायी कमीशन की मांग उठ रही थी।
युद्ध अभियानों में स्थायी नियुक्ति नहीं
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद महिला अधिकारियों को सेना में स्थायी कमीशन का रास्ता तो साफ हो गया, लेकिन अब भी तकनीकी कारणों से उन्हें युद्ध अभियानों में स्थायी नियुक्ति नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी युद्ध अभियानों में भेजने के फैसले को अपने आदेश से अलग रखा था। अभी शॉर्ट सर्विस कमीशन से आए पुरुष अधिकारियों को 10 साल बाद स्थायी कमीशन का विकल्प मिलता है, लेकिन महिला अधिकारियों को नहीं।
एसएससी अधिकारियों को नहीं मिलती है पेंशन
सेना में पेंशन पाने के लिए कम से कम 20 साल की सेवा जरूरी है। लिहाजा शॉर्ट सर्विस कमीशन से आए अधिकारियों को पेंशन की सुविधा नहीं मिलती है। अब महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन मिलने से उन्हें भी पेंशन का लाभ मिलेगा।
स्थायी कमीशन से क्या बदलेगा
स्थायी कमीशन दिये जाने का मतलब यह है कि महिला सैन्य अधिकारी अब रिटायरमेंट (सेनानिवृत्ति) की उम्र तक सेना में काम कर सकती हैं। अगर वे चाहें तो पहले भी नौकरी से इस्तीफा दे सकती हैं। अब तक शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में नौकरी कर रही महिला अधिकारियों को अब स्थायी कमीशन चुनने का विकल्प दिया जाएगा। स्थायी कमीशन के बाद महिला अधिकारी पेंशन की भी हकदार हो जाएंगी।
इन विभागों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन
महिला अधिकारियों को न्यायाधीश एडवोकेट जनरल, सेना शिक्षा कोर, सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कॉर्प्स, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स और इंटेलिजेंस कोर में स्थायी कमीशन दिया जाएगा।
क्या है शॉर्ट सर्विस कमीशन
भारतीय सैन्य सेवा में महिला अधिकारियों की शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से भर्ती की जाती है। जिसके बाद वे 14 साल तक सेना में नौकरी कर सकती हैं। इस अवधि के बाद उन्हें रिटायर (सेनानिवृत्त) कर दिया जाता है। हालांकि 20 साल तक नौकरी न कर पाने के कारण रिटायरमेंट के बाद उन्हें पेंशन नहीं दी जाती है।

महिलाओं के लिए टीवीएस लाई नयी जेस्ट

शुरुआती कीमत 58,460 रुपये
टीवीएस टो मोटर्स ने महिलाओं के लिए BS6 इंजन के साथ नयी जेस्ट को बाजार में उतार दिया है। इसकी शुरुआती दौर में 58,460 रुपये (एक्स-शोरूम, चेन्नई) की कीमत पर लाया गया है। टीवीएस जेस्ट को दो वेरिएंट्स (हिमालयन और मैट) व छह रंगों के विकल्प रेड, ब्लू, पर्पल, ब्लैक, येलो और टर्कोइज ब्लू में खरीदा जा सकेगा।
कम्पनी ने दावा किया है कि यह BS6 मॉडल बेहतर माइलेज देगा और इसकी परफोर्मेंस भी बेहतर होगी। इस स्कूटर में 109.7cc का फ्यूल इंजेक्शन इंजन लगाया गया है जो 7.81 bhp की पॉवर और 8.8 Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है। स्कूटर में नए BS6 इंजन के अलावा और कोई अपडेट कंपनी ने नहीं दिया है। स्कूटर के ब्रेक, सस्पेंशन, हेडलाइट, टेललाइट, बॉडी पैनल में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें एल ई डी डीआरएल्स (LED DRL’s) के साथ हैलोजन हेडलैंप, एलईडी टेललैंप और यूएसबी चार्जिंग पोर्ट दिया गया है। स्कूटर में ड्यूल-टोन सीट कवर भी मौजूद है। सस्पेंशन की बात करें तो स्कूटर में आगे ड्यूल टेलीस्कोपिक फोर्क सस्पेंशन जबकि पीछे हायड्रोलिक मोनोशॉक सस्पेंशन मिलेगा।
इस स्कूटर में 19 लीटर की अंडर सीट स्टोरेज स्पेस मिलती है जबकि फ्यूल टैंक 5-लीटर का है। इसमें कॉम्बी ब्रेकिंग सिस्टम तकनीक दी गयी है और साथ ही एनालॉग इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मौजूद है।

किसान ही बनेंगे बीज बैंक के मालिक, आत्मनिर्भर भारत योजना में दिया जाएगा लाइसेंस

नयी दिल्ली : देश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री की घोषणा फलीभूत हो रही है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण विभाग ने बीज बैंक योजना को बड़े पैमाने पर शुरू करने का एलान किया है। इसके तहत अब देशभर में जिलेवार बीज बैंक बनेंगे। इसके लिए किसानों को ही बीज बैंक का लाइसेंस दिया जाएगा। इससे किसान बीज के उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। इस योजना में देश के साढ़े छह सौ जिलों में बीज बैंक खोले जाने हैं। देश में इस समय लगभग तीस फीसदी बीज किसान स्वयं बनाता है बाकी बीजों के लिए उसे बाजार और सरकारी सस्ते बीजों की उपलब्धता पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऐसे में कई बार उसे बीज की गुणवत्ता के चलते बड़ी ही कम पैदावार या बीमार फसल जैसी दुश्वारियां भी झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में किसानों को इस दिशा में सक्रिय करने के लिए मंत्रालय ने पूर्व के लाइसेंस नियमों में भी काफी ढील दी है। इसमें अब  बीज बैंक के लाइसेंस के लिए कक्षा दस पास होना ही काफी होगा।
किसान को स्थानीय कृषि प्रसार केंद्र पर प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित कर दिया जाएगा। लाइसेंस के लिए अन्य योग्यताएं हैं उसके पास अपनी या बटाई अथवा पट्टेदारी में कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए। उसे राज्य स्तर से बीज के स्तर और मानकों के लिए निबंधन और प्रमाणन करना होगा।
सरकार द्वारा उन्हें एक मुश्त रकम प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाएगी। इसके अलावा भंडारण की सुविधा के लिए प्रशिक्षण के साथ उपलब्ध संसाधनों पर सब्सिडी भी दी जाएगी। बीज बैंक का लाइसेंस लेने वाले किसान को उसके बीज का बाजार दिलाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
बीज का मूल्य भी पहले से ही तय किया जाएगा। इसके लिए फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी पर 20 फीसदी राशि को जोड़कर प्रसंस्करण बीज के आधार पर क्रय मूल्य का निर्धारण राज्य बीज निगम करेगा। इसके लिए बीज निगम पहले प्रयास में बीज उत्पादक किसानों के खलिहानों से बीजों का संग्रहण करेगा।
नए बीज उत्पादक किसानों को बीज उत्पादन हेतु क्षेत्रीय प्रबंधन एवं केंद्रीय प्रभारी द्वारा आधार बीज मूल्य का भुगतान लेकर उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिला स्तर पर बीज बैंक हो जाने से किसान को अच्छे और सस्ते बीज मिलने की राह तो आसान होगी ही साथ ही किसान भी उच्च गुणवत्ता की फसल को उपजाने के लिए प्रोत्साहित होंगे, क्योंकि उन्हें इस प्रक्रिया के चलते महंगे बीजों से निजात और उत्पादक की विश्वसनीयता का लाभ मिल सकेगा।

पंचमी

पूजा सिंह 
शाम के चार बजे कॉलेज के गेट पर बड़ी हल-चल मची हुई थी जैसे बड़े दिनों बाद कुछ भूला सा मिल गया था कल पंचमी है दोस्तो ने खूब उत्साह से कहा माँ दुर्गा का पंडाल देखने चलेंगे।देखते तो परिवार के साथ भी हैं मगर दोस्तों के साथ देखने का मज़ा तो कुछ और ही है प्रताप ने कहा।बात पंचमी की हुई नही कि लड़कियों ड्रेस और खाने को ही ज्यादा महत्व देना सही समझा।कोई गाउन पहनने की बात कह रहा है और कोई जीन्स की किसी और ने बहुत ही खूबसूरत टॉप की बात की ,अच्छा हमारे चप्पल कैसे जंचेंगे? कॉलेज का गेट इन्ही बातों से गूंज रहा था।राखी अब भी चुप थी सबकी बातों पर मुस्कुरा कर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थी, दिखावा ऐसे जैसे उसके पास भी इन सारी चीजों की कमी नही है, और सोचे जा रही थी कि एक खूबसूरत टॉप और जीन्स जैसे कपड़े पहन कर ही लोग मॉर्डन बनते हैं?मेरे पास जो भी है जैसा भी है वही पहनूँगी और अच्छी भी लगूंगी लेकिन कपड़ो से कोई मॉर्डन नही बनता फिर भी इसे पहनने के अपने शौक भी तो होते हैं कॉलेज के समय में अगर कुरती के अलावा कोई और कपड़े पहन कर शौक न पूरे करू तो कब? अगर कोई मना न करता तो शायद इनकी तरह मैं भीकुछ स्टाइलिश पहन पाती! और ऊपर से आर्थिक तंगी। किसी भी तरह की जिम्मेवार बनने के पहले डर और आर्थिक व्यवस्था पहले सताती है।अचानक पुनिता ने एक झटका दिया राखी अपने असल दुनियां से उनकी दुनिया में फिर से वापस आगई ।हम लोगों ने एस्प्लेनेड जाने का प्लान किया है माही को नई चप्पल चाहिये चलो सब साथ मे चलते हैं पुनिता ने कहा।मगर मैं तो सिर्फ तीस रुपये लेकर आई हूँ अपने पैसे का बैग आज जल्दी में घर पर ही छोड़ दिया राखी ने जैसे बात छुपाने की कोशिश की।तेरे मेट्रो का किराया मैं दे दूंगी तू बाद में मुझे दे देना पुनिता ने उसका हाथ खीचते हुए कहा।
दुर्गा पूजा का बाज़ार धरमतल्ला बाज़ार को काफी गरम किए हुए थी किसी भी चीज पर नज़र जाती तो ठहर ही जाती थी झमाझम भीड़ में एक अलग ही हलचल थी।रंग बिरंगे टॉप और गाउन वह अपने कल्पना में पहन रही थी फिर भी खुद को कठोर और स्वाभिमानी बनाते हुए वह अपने पापा का शुक्रिया करती क्योंकि उनके बदौलत हर रोज़ वह कॉलेज आपाती थी मगर माँ के ताने हर रोज़ घर से निकलने के पहले मुँह मीठा करवाते झूठ भी तो नही कहती थी उस तीस रुपये के घर मे कोई काम हो सकता था कि जैसे मै बहाने से घर से अलग रहना चाहती होऊं।
घर पहुँचने में शाम के सात बज गए थे सीढिया चढ़ने में डर लग रहा था कि क्या बहाना बनाऊ जिससे माँ की डांट से बचा जा सके उनकी हर बार की एक ही बात राखी को याद दिलाती थी कि उसकी जाति स्त्री जाति है ठीक ही तो कहती है एक कलम चलाने से परिवार कैसे संभाला जा सकता है माँ अपने जीवन मे परिवार को संभालते जो कष्ट भोगते आई है शायद उससे मुझे भी रूबरू करवाना चाहती हो ताकि आगे चल कर ससुराल का ताना ना सहना पड़े।
आज पंचमी है दिन में ही घूमने का एक प्रोग्राम बनाया गया है मगर बड़ी मुश्किल से माँ को मनाया है आठ बजे तक आजाने का वायदा कर और और पापा से दो सौ रुपये की माँग कर जाने को तैयार हुई बड़े शौक से दीदी के घर से मिले कुरती को पहना और घर स निकली
माझेरहाट रेलवे स्टेशन पे सारे दोस्त एक साथ मिले एक दूसरे की तारीफों के तो जैसे पुल बंधे हैं, राखी तू अच्छी लग रही है मगर हम लोगों ने तो ड्रेस कोड जीन्स रखा था वो पहनती तो एक अच्छा ग्रुप बनता ।राखी का उस समय बिगड़ा तो कुछ भी नही मगर अंदर से बाहर तक झकझोर सी गई उसे लगा वह भला आई ही क्यों?अब सब अपनी तरह से सेल्फी लेंगे मुझ पर दया करके मुझे भी शामिल करेंगे खैर दोस्त ऐसे तो नही है सोच कर आगे बढ़ी।प्रताप ने कहा मौलाली से शुरू करेंगे औऱ न्यू अलीपुर देखते हुए घर जाएंगे हाँ ठीक है माही ने हामी भरी,
न्यू अलीपुर में 4:30 बजे ही कितनी भीड़ है ना जाने कितनी देर लाइन में खड़े रहना पड़ेगा? पंडाल देख कर निकलने में शाम के सात बज गए थे घर भी जाना है नही अब नही घुमुंगी। सुनो मेरी तबियत ठीक नही लग रही है घर जाना है और बिना किसी के उत्तर पाए सरपट निकल पड़ती है। बस को भी सरपट भगा देना चाहती है सात से साढ़े सात समय तीर की तरह निकलता जा रहा है उफ्फ अब ये दुर्गा पूजा का जाम मेरी ही गलती हुई क्यों नही वो जल्दी निकल गई आई भी तो कौन सा दोस्तो में खुद को को शामिल कर पाई । आठ बजने वाले हैं अब भी बस बीस मिनट की दूरी पर है बात कुछ बड़ी नही है थोड़ी सी अपनी ज़िंदगी जीने ही तो गई थी कोई बड़ा पाप नही किया क्या पुनिता और माही भी ऐसे ही डर रही होंगी नही शायद वे शाशन में नही अनुशाशन में है और यही तो ज़रूरत है बस थोड़ा सा खुलासा मिलने पर वे सांस ले सकती है बिगड़ नही सकती।राखी बिना किसी के सवाल किए खुद को जवाब दिए जा रही थी और मोबाइल की घंटी लगातार उसे घर की याद दिला रही थी।

जज भी आत्मनिर्भर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कर रहे सुनवाई, खुद टाइप कर रहे फैसले

नयी दिल्ली : कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर होने की अपील पर देश में कितना अमल होगा, यह तो समय बताएगा लेकिन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश मजबूरी में ही सही, लेकिन आत्मनिर्भर होने लगे हैं।
कोरोना महामारी के दौरान उच्चतम न्यायालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई के कारण न्यायाधीश कोर्ट मास्टर को आदेश लिखवाने के बजाय खुद ही अपना आदेश टाइप करने लगे हैं जिसका फायदा उन्हें खुद नजर आने लगा है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की टिप्पणी से तो कम से कम ऐसा ही लगता है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने मंगलवार को एक मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान अपने अनुभव साझा करते कहा कि वे वर्चुअल सुनवाई करते हुए जो भी आदेश देते हैं, उसे खुद ही लैपटॉप पर टाइप भी करते हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि मैं कोर्ट मास्टर को आदेश देने के बजाय अब खुद लैपटॉप पर आदेश लिखता हूं, क्योंकि यह डिक्टेशन देने के मुकाबले ज्यादा आसान, सरल और सहज होता है। लैपटॉप पर अपना खुद का आदेश टाइप करना बहुत अच्छा है, क्योंकि यह आदेश बहुत सटीक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इसका एक फायदा और है कि आदेश टाइप करने के बाद टाइपिंग के कारण होने वाली अशुद्धि को ठीक करने की जरूरत नहीं पड़ती।
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय में मार्च के मध्य से ही कोरोना को लेकर ऐहतियात बरती जाने लगी थी और कुछ दिनों तक तो केवल दोनों पक्षों और उनके वकीलों को ही अदालत कक्ष में सुनवाई के लिए जाने दिया जाता था। मीडियाकर्मियों का प्रवेश भी वर्जित था। बाद में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई शुरू होने लगी, जो अब भी जारी है। ऐसे में कोर्ट मास्टर मौजूद नहीं रह पाते हैं तो इससे मदद मिलेगी।

फ्लिपकार्ट ने पेश किया नया डिजिटल बाजार ‘होलसेल’

वॉलमार्ट इंडिया का किया अधिग्रहण
नयी दिल्ली/बंगलूरू : फ्लिपकार्ट समूह ने देश के 650 अरब डॉलर के थोक कारोबार बाजार में उतरने के लिए नए डिजिटल बाजार ‘फ्लिपकार्ट होलसेल’ शुरू करने की घोषणा की। साथ ही कंपनी ने वॉलमार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदी है।
वॉलमार्ट इंडिया देश में ‘बेस्ट प्राइस’ नाम से थोक दुकानों का परिचालन करती है। अभी इसके देशभर में 28 स्टोर हैं। फ्लिपकार्ट की ओर से यह घोषणा ऐसे समय की गयी है जब कंपनी ने हाल ही में वॉलमार्ट के नेतृत्व वाले निवेशकों के समूह से 1.2 अरब डॉलर का निवेश जुटाया है। हालांकि फ्लिपकार्ट ने वॉलमार्ट इंडिया के अधिग्रहण सौदे के मूल्य का खुलासा नहीं किया है।
गौरतलब है कि वॉलमार्ट इंडिया, दुनिया की सबसे बड़ी खुदरा कारोबार कंपनियों में से एक वॉलमार्ट के पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी है। वहीं फ्लिपकार्ट में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए वॉलमार्ट ने 2018 में 16 अरब डॉलर का निवेश किया था।
कम्पनी ने एक बयान में कहा कि ‘फ्लिपकार्ट होलसेल’ एक बी2बी (कंपनियों के बीच आपस में कारोबार) डिजिटल बाजार होगा। फ्लिपकार्ट अगस्त में इसका परिचालन शुरू करेगी। कंपनी ने कहा कि यह देश के खुदरा बाजार की जान किराना और लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान देगा। कंपनी छोटे कारोबार क्षेत्र को उचित मूल्य पर उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला में से चुनने का अवसर प्रदान करेगी।
फ्लिपकार्ट होलसेल का नेतृत्व कंपनी के वरिष्ठ कर्मी आदर्श मेनन करेंगे। वहीं वॉलमार्ट इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर अग्रवाल अधिग्रहण पूरा होने तक अपने पद पर बने रहेंगे। उसके बाद उन्हें वॉलमार्ट में ही कोई और जिम्मेदारी दे दी जाएगी। वहीं वॉलमार्ट इंडिया के करीब 3,500 अन्य कर्मचारी फ्लिपकार्ट में शामिल होंगे।

वाराणसी में खुलेगा देश का पहला कौशल विकास विश्वविद्यालय

यूपी के साथ बिहार और झारखंड के युवाओं को भी मिलेगा मौका

 वाराणसी : बनारस में कौशल विकास विश्वविद्यालय खुलने जा रहा है। यह पूर्वांचल के युवाओं को सौगात होगी। विश्वविद्यालय में कौशल मिशन के तहत तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा देने के साथ ही शोध भी होंगे। इसके अलावा निजी कम्पनियों की मदद से बाजार में मांग के अनुरूप अनुबंध पर पाठ्यक्रम भी संचालित होंगे। कौशल विकास मंत्रालय ने इस सम्बंध में जिला प्रशासन से प्रस्ताव मांगा है। विश्वविद्यालय के लिए करीब 30 से 50 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। प्रशासन ने पिंडरा में स्थित करीब 100 एकड़ सरकारी जमीन में यह हिस्सा देने की तैयारी शुरू कर दी है। पिंडरा एसडीएम को जमीन के राजस्व के रिकॉर्ड सहित अन्य दस्तावेज का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि मंत्रालय की माँग पर अगले हफ्ते तक जमीन के सम्बंध में प्रस्ताव बनाकर भेज दिया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी गति
जिलाधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय खुलना न केवल पूर्वांचल बल्कि यूपी, बिहार, झारखंड सहित आसपास के प्रदेशों के युवाओं के लिए यह सुनहरा मौका होगा। देशभर में कौशल विकास केंद्रों में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों के कौशल विकास की व्यवस्था अभी तक कहीं नहीं है। लिहाजा सरकार ने बनारस में विश्वविद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान को तेजी से गति देगा।
विवि में प्रस्तवित पाठ्यक्रम – हेल्थ केयर और फिजियोथेरेपी, वेलनेस मैनेजमेंट प्रोग्राम, डाटा कलेक्ट करने का प्रशिक्षण, कृषि की नवीन तकनीक आधारित पाठ्यक्रम, स्किल इन इलेक्ट्रिक व्हीकल
कौशल विकास को बढ़ावा व रोजगारपरक शिक्षा देने के उद्देश्य से सरकार विश्वविद्यालय खोलने जा रही है। जिला प्रशासन जमीन तलाश कर अगले हफ्ते तक मंत्रालय को प्रस्ताव भेज देगा।

प्रख्यात नृत्यांगना अमला शंकर का निधन

कोलकाता :  देश की मशहूर डांसर अमला शंकर का कोलकाता में शुक्रवार को निधन हो गया। वह 101 साल की थीं। अमला शंकर दिग्‍गज कोरियोग्राफर उदय शंकर की पत्‍नी थीं। अमला शंकर ने उस दौर में नृत्य सीखा, जब महिलाओं के नाचने को समाज में हेय दृष्‍ट‍ि से देखा जाता था। अमला शंकर, सितार वादक पंडित रवि शंकर की भाभी हैं। अमला शंकर की पोती और नृत्यांगना श्रीनंदा शंकर ने ट्विटर पर लिखा, ‘आज हमारी ‘थम्मा’ हमें छोड़ गईं। वह 101 वर्ष की थी। हमने पिछले महीने ही उनका जन्मदिन मनाया था। काफी बेचैन हूं, मुम्बई और कोलकाता के लिए कोई उड़ान उपलब्ध नहीं है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।’श्रीनंद शंकर ने अपने पोस्‍ट में आगे लिखा है, ‘एक युग का अंत। ….जो कुछ भी दिया उसके लिए शुक्रिया।’ अमला शंकर 90 साल की उम्र तक नृत्‍य के क्षेत्र में सक्रिय रहीं। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने 2011 में उन्‍हें ‘बंग विभूषण’ से सम्मानित किया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अमला शंकर के निधन पर शोक जताया है। उन्‍होंने कहा, ‘अमला शंकर जी के निधन से नृत्य की दुनिया को अपूरणीय क्षति पहुंची है।’

अमला शंकर का जन्म 27 जून, 1919 को अविभाजित भारत के जसोर में हुआ था जो अब बांग्लादेश में है। बचपन से ही वह कला और संगीत में रुचि रखती थीं। उनके पिता उस दौर के एक मशहूर बिजनेसमैन थे। उस दौर में जब समृद्ध घराने के लोग अपनी लड़कियों और महिलाओं को डांस से दूर रखते थे, अमला के पिता ने उनकी रुचि को आगे बढ़ाया। साल 1931 में अमला शंकर की मुलाकात उदय शंकर से हुई थे। दोनों इंटरनेशनल कोलोनियल एग्‍जीबिशन में श‍िरकत करने पेरिस पहुंचे थे। खास बात यह है कि तब अमला शंकर सिर्फ 11 साल की थीं। नृत्‍य में रुचि होने के कारण अमला ने उदय शंकर का डांस ग्रुप जॉइन कर लिया और फिर पूरी दुनिया और अपने नृत्य का दीवाना बना दिया। बताया जाता है कि साल 1939 में अमला एक डांस ग्रुप के साथ चेन्नई में परफॉर्मेंस दे रही थीं, तभी उदय शंकर ने उन्हें शादी का प्रस्ताव दिया। इसके तीन साल बाद 1942 में अमला और उदय शादी के बंधन में बंध गए। दोनों के दो बच्चे हैं बेटा आनंद और बेटी ममता। आनंद जहां कंपोजर और डांसर हैं, वहीं ममता अभिनोत्री व नृत्यांगना हैं। अमला शंकर ने साल 1948 में ‘कल्‍पना’ फिल्‍म में मुख्‍य भूमिका निभाई थी। यह फिल्‍म उदय शंकर ने ही बनाई थी। फिल्‍म की कहानी यंग डांसर्स के सपनों और डांस अकादमी पर आधारित थी। अमला शंकर ने कान फिल्‍म फेस्‍ट‍िवल में भी श‍िरकत की थी और रेड कारपेट पर चलकर सुर्ख‍ियां बटोरी थीं। अमला के योगदान को देखते हुए उन्‍हें 2012 में संगीत नाट्य अकादमी टैगोर रत्‍न पुरस्‍कार भी मिला।

 

 

मीरा के पद

 शिक्षिका -नीलम सिंह

मीराबाई के बारे में – कृष्ण की दीवानी मीरा का जन्म 1503 में ‘मेड़ता ‘के समीप ‘चोकड़ी’ गांव में हुआ था। उनका लालन पालन पितामह राव जोधा ने किया। राह दूदा:अच्छे योद्धा और वैष्णव भारत थे। बचपन से ही मीरा बाई को गिरिधर कृष्ण के प्रति प्रेम हो गया था। मीराबाई का विवाह 13 वर्ष की आयु में ही राणा सांगा के बड़े पुत्र भोजराज से‌1556में हुआ। रचनाएं-मीरा के नाम से अनेक कार्य रचनाएं प्रचलित हैं।उनकी समस्त रचनाओं को ‘मीरा पदावली ‘के नाम से प्रकाशित किया गया है। भाषा शैली-मीराबाई की काव्य भाषा सामान्यतः राजस्थानी मिश्रित ब्रज है।उनके काव्य में गुजराती का विशेष पुट है। संगीत और छंद की दृष्टि से उनका कार्य श्रेष्ठ है।