Monday, April 6, 2026
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हाशिए के प्रश्न को केंद्र में लाने वाले लेखक हैं प्रेमचंद

प्रेमचंद स्मृति व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन
कोलकाता : खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा ‘प्रेमचंद स्मृति व्याख्यानमाला’ का आयोजन 30 जुलाई को किया गया। प्रेमचंद के  जयंती पर केंद्रित यह व्याख्यानमाला पिछले कई वर्षों से आयोजित हो रहा है। 140वीं  जयंती के अवसर पर ‘हाशिए के प्रश्न और प्रेमचंद’ विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया ।इस अवसर पर आमंत्रित वक्ता डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रेमचंद का रचना संसार  मानव जीवन का आख्यान है ।प्रेमचंद ने दबे हुए संदर्भों को केंद्र में लाया ।औपनिवेशिक सत्ता की साम्राज्यवादी चालाकियों को प्रेमचंद ने बेनक़ाब करते हुए सामंतवाद के साथ उनके गठबंधन पर  जमकर प्रहार किया है।वे हाशिए पर चले गए किसानों  -मजदूरों, स्त्री, राष्ट्र, दलित और भाषा के प्रश्न को राष्ट्रीयता की परियोजना और सामाजिक क्रांति से जोड़कर केंद्र में स्थापित किया । उन्होंने किसानों  को राष्ट्रीय चरित्र के रूप में गढ़ने का महत्वपूर्ण काम किया ।कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुबीर कुमार दत्ता के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने हिंदी विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विभाग निरंतर साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों को मंच प्रदान करता है ।उन्होंने कहा कि हमें प्रेमचंद से बहुत कुछ सीखना है ।
विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने व्याख्यानमाला की प्रयोजनीयता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह आयोजन प्रेमचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करने का मंच है।इस मंच से हम प्रेमचंद के मूल्यों को विद्यार्थियों तक प्रेषित करते हैं ।विद्यार्थी प्रेमचंद के साहित्य पर विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां करते हैं ।इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने ‘प्रेमचंद के पात्र बोलते हैं ‘ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रेमचंद के साहित्य के प्रमुख पात्रों के जरिए संवाद शैली में अभिनयात्मक पाठ किया । विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के कफ़न, सवा सेर गेंहू, सद्गति, बूढ़ी काकी, बड़े घर की बेटी आदि कहानियों के किरदारों के प्रमुख संवादों पर प्रभावी प्रस्तुति की। प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं को कहानी एवं पात्रों का नाम बताना था। श्रोताओं ने भी इसमें जमकर हिस्सा लिया ।इसमें सौरभ केशरी, ज्योति मिश्रा, उजाला यादव, निशा साव, प्रीति साव, प्रीति गुप्ता, नंदनी साव, सिमरन जैसवारा, साक्षी झा, सीमा प्रजापति, अभिनव प्रसाद, बिन्दी चौधरी और विशाल दास ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में
कोलकाता और अन्य शहरों के शिक्षक, साहित्यप्रेमी एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया ।
कार्यक्रम का संयोजन एवं सफल संचालन ककरते हुए प्रो. मधु सिंह ने कहा कि भारत की आत्मा के लेखक थे प्रेमचंद । धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राहुल गौड़ ने दिया ।

प्रेमचन्द

विवेक कुमार साव
ठाकुर का कुँआ

जो अब
कदाचित्
सूख चुका है
क्योंकि अब कोई नहीं
जाना चाहता
ठाकुर के कुएं के पास,
आज प्रेमचन्द होते
तो शायद लिखते
कहानियाँ नलों पर,
जिनकी पाइपें जुड़ी होती हैं
एक ही किसी बड़ी टंकी से।
और इस विमर्श के दौर में
लोग उन्हें जब
इससे निकाल कहते
स्वकेन्द्रित अनुभव वाला रचनाकार।

प्रेमचन्द भी तब ज़ार-ज़ार रोते।

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नहीं रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा

कोलकाता : बीते कई दिनों से बीमार चल रहे पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष सोमेन मित्रा का गुरुवार को तड़के निधन हो गया। वे 78 वर्ष के थे। पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। कांग्रेस पार्टी ने लिखा- ‘ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सोमेन मित्रा ने कुछ समय पहले अंतिम सांस ली है। यह हमारे लिए बड़ी क्षति है, हमारी संवेदनाएं दादा के परिवार के साथ हैं। उनकी आत्मा को शांति मिले।’ गौरतलब है कि 2 दिन पहले ही मित्रा की हालत ज्यादा बिगड़ने की सूचना मिली थी। इस खबर से बंगाल में शोक की लहर है।

(साभार – नयी आवाज डॉट कॉम)

महिन्द्रा यूनिवर्सिटी ने पेश की उच्च शिक्षा की रूपरेखा

कोलकाता : महिंद्रा समूह ने महिंद्रा यूनिवर्सिटी (एमयू) शुरू की। समूह का दावा है कि यह यूनिवर्सिटी भारत में विश्‍वस्‍तरीय, भविष्‍योन्‍मुखी शिक्षा उपलब्‍ध करायेगी। इसका उद्देश्‍य बहुमुखी रूप से कुशल ऐसे नेतृत्‍वकर्ता तैयार करना है, जो विचारशील व नवोन्‍मेषी होने के साथ-साथ नैतिक आचरण वाले व समानुभूतिशील हों। देश में उच्‍च शिक्षा दिये जाने के तरीके में सार्थक बदलाव लाने हेतु महिंद्रा यूनिवर्सिटी, मानविकी, नीति एवं दर्शन व डिजाइन के साथ विज्ञान व प्रौद्योगिकी के समन्वित अध्‍ययन के जरिए उत्‍कृष्‍ट अंतर्विषयक शिक्षा प्रदान करेगी। यह स्‍वायत्‍त विश्‍वविद्यालय के रूप में चलेगी। इसके पाठ्यक्रम को आधुनिक दौर की मांगों के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि डाटा साइंस, ब्‍लॉकचेन और डाटा एनालिटिक्‍स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को प्रभावी तरीके से उपयोग में लाया जा सके।

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन और महिंद्रा यूनिवर्सिटी के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कहा, “उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा में व्यक्तियों और राष्ट्रों के लिए परिवर्तनकारी शक्तियां समान हैं। महिंद्रा विश्वविद्यालय एक और अधिक संतुलित शिक्षा देने का प्रयास करेगा, अगली पीढ़ी के नेताओं को बनाने के लिए लिबरल आर्ट्स के साथ नवीनतम तकनीक का संयोजन करेगा, जो एक समग्र विश्व दृष्टिकोण रखता है। ”

महिंद्रा विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के विनीत नैय्यर ने कहा, “शिक्षा का परिदृश्य लगातार विकसित होने के साथ, शिक्षा के लिए एक गतिशील और सशक्त दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो व्यवसाय से परे हो और विश्व स्तर पर उद्योग की तकनीकी मांगों के साथ सम्‍मिलित हो। इसके अनुरूप, महिंद्रा विश्वविद्यालय एक समग्र शैक्षिक और सीखने का अनुभव प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जिसमें विश्लेषणात्मक और डिजाइन के नेतृत्व वाली सोच, मात्रात्मक और रचनात्मक समस्या को सुलझाने के कौशल और नवाचार और उद्यमशीलता के लिए एक जुनून शामिल है।

 

महिंद्रा विश्वविद्यालय के टेक महिंद्रा और प्रबंधन बोर्ड के प्रबंध निदेशक और सीईओ सीपी गुरनानी ने कहा, “महिंद्रा विश्वविद्यालय कौशल अंतराल को पाटने और वैश्विक नेताओं को बनाने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है जो गतिशील के अनुसार परिवर्तन, अनुकूलन और परिवर्तन के लिए तैयार हैं। बाजार की जरूरत और कारोबारी माहौल। विश्वविद्यालय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इमोशनल इंटेलिजेंस की शक्ति का लाभ उठाने पर केंद्रित बहु-अनुशासनात्मक सीखने की सुविधा भी प्रदान करेगा। इससे छात्रों को नए युग की दक्षताओं को विकसित करने और उद्यमशीलता की सोच को विकसित करने में मदद मिलेगी ताकि वे समाज के सामने आने वाली जटिल चुनौतियों को हल कर सकें।”

महिंद्रा विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो यजुलु मेडुरी ने कहा, “महिंद्रा विश्वविद्यालय का उद्देश्य वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की उद्योग की जरूरतों के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए आवश्यक उद्योग-अकादमी सहयोग के माध्यम से हमारे देश के भावी कार्यबल के लिए शिक्षित वातावरण में क्रांति लाना है। विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय संकाय की विशेषज्ञता को एक साथ लाएगा और शीर्ष शैक्षणिक भागीदारों के साथ नवाचार और अनुसंधान केंद्रों तक पहुंच प्रदान करेगा। हम इंजीनियरिंग, कानून, प्रबंधन, शिक्षा, मीडिया और लिबरल आर्ट्स, डिजाइन और अन्य से संबंधित अध्ययनों तक पहुंच प्रदान करते हुए छात्रों के लिए एक समग्र शिक्षण मंच बनने की योजना बना रहे हैं।”

(साभार – नयी आवाज डॉट कॉम)

पीएफ अकाउंट से घर बैठे इस तरह निकालें पैसे

जिन लोगों की नौकरी कोरोना संकट काल में चली गई है या उनकी सैलरी में कटौती हो गई है, तो उन्हें यह जानना बेहद जरूरी है कि कर्मचारी भविष्य निधी संगठन यानी (ईपीएफओ) अलग-अलग कारणों से रिटायरमेंट से पहले भी पीएफ निकालने की सुविधा देता है। तो आप एक निश्चित सीमा तक पीएफ के पैसों को निकाल कर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। आप बच्चों की शादी करने, घर खरीदने या फिर किसी तरह की मेडिक इमरजेंसी की स्थिती में भी अपने पीएफ से पर्याप्त राशी निकाल सकते हैं। ऑनलाइन के इस जमाने में आप कुछ ही मिनटों में बिना किसी दिक्कतों के ईपीएफ पोर्टल के द्वारा पीएफ अकाउंट में जमा हुए राशि को निकालने के लिए अनुरोध कर सकते हैं।

  • आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन निश्चित रुप से एक्टिव होना चाहिए।
  • आपका आधार नंबर आपके अकाउंट से जरूर लिंक होना चाहिए और वेरिवाईड भी जरूर होना चाहिए।
  • आपके यूएएन से आपका सही आईएफसी कोड और अकाउंट नंबर जुड़ा होना चाहिए।
  • आपका आधार आपके मोबाइल नंबर से जुड़ा होना चाहिए।
  • आपका केवाईसी दस्तावेज बिल्कुल अपडेटेड होना चाहिए।
  • ईपीएफ राशि को निकालने के लिए इस तरह आगे बढ़ें :-
 ईपीएफ के यूनिफाइड मेंबर पर अपने यूएएन पासवर्ड और कैप्चा कोड के साथ लॉग-इन करें।
 लॉग-इन करने के बाद ‘ऑनलाइन सर्विस’ टैब के अंदर क्लेम (फ्रम-31,19,10c & 10D) पर क्लिक करें।
 इसके बाद आपके सामने एक नया पेज खुल जाएगा। इस पेज पर आप यूएएन से लिंक्ड हुए बैंक अकाउंट नंबर डालें। इसके बाद वैरिफाई पर क्लिक करें।
बैंक खाते की जानकारी की पुष्टी करने के बाद आपको ईपीएफओ के जरिए बताए गए नियमों या शर्तों को कंफर्म करें।अब प्रोसीड फॉर ऑनलाइन क्लेम पर क्लिक करदें।
इसके बाद आप ड्रॉप डाउन लिस्ट से पीएफ निकालने की वजह चुने।
अब आप अपना पूरा पता भरें। इसके साथ ही आप चेक या बैंक पासबुक की स्कैन कॉपी भी अपलोड करदें
अब आप सभी शर्तों को सिलेक्ट करते हुए गेट आधार ओटीपी पर क्लिक करें।
आपके आधार से लिंक्ड मोबाइल पर ओटीपी आएगा, उसे निर्दिष्ट स्थान पर ओटीपी भरने के बाद आप उस फॉर्म को सबमिट कर सकते हैं।
(साभार – अखंड भारत)

राफेल इसलिए है भारत के लिए जरूरी

दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमानों में शुमार राफेल बुधवार को आखिरकार भारत पहुंच गए। फ्रांस के मेरिगनेक एयरबेस से करीब सात हजार किमी सफर तय करने के बाद दोपहर करीब 3 बजकर 10 मिनट पर वायुसेना के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर पहला राफेल विमान उतरा। इसके बाद एक-एक कर बाकी चारों विमानों ने 3 बजकर 13 मिनट तक लैंडिंग की। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया समेत शीर्ष अधिकारियों ने सातों जांबाज पायलटों की अगवानी की।
इससे पहले, राफेल विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने पर दो सुखोई-30 विमानों ने उनकी अगवानी की व अंबाला एयरबेस पर लैंड करने के बाद वाटर सैल्यूट दिया गया। हालांकि, राफेल को वायुसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया है, लेकिन औपचारिक समारोह अगस्त में होगा। कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल होंगे।
भारत के लिए राफेल के मायने…
वायुसेना का बढ़ा मनोबल: भारती वायुसेना का मनोबल बढ़ा है। राफेल युद्ध जीतने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
दुश्मन पर बढ़त : अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों से लैस है। दुनिया की सबसे घातक समझे जाने वाली हवा से हवा में मार करने वाली मेटयोर मिसाइल किसी भी एशियाई देश के पास नहीं है।

तकनीक में आगे : स्टील्थ तकनीक यानी कि रडार को चकमा देने की ताकत है। किसी भी मौसम में दुश्मन की सीमा के भीतर जाकर हमला कर सकता है। साथ ही यह हिमालय के उपर भी उड़ सकता है, यह क्षमता बहुत कम विमानों में है।राफेल की टक्कर का कोई लड़ाकू विमान चीन और पाकिस्तान के पास नहीं है। हवा से हवा और हवा से जमीन पर वार करने के मामले में राफेल का चीन या पाकिस्तान के विमानों से कोई तुलना ही नहीं है। पाक के पास जो सबसे आधुनिक विमान अमेरिका से आए एफ-16 और एफ-17 ही हैं। चीन के पास सबसे आधुनिक विमान चेंगदु जे-20 है। दूसरे देशों की नकल कर चीन ने इसे बनाया है और इसे लेकर उसके दावे भी संदिग्ध हैं।
लीबिया, इराक और सीरिया में राफेल की खूबियां साबित हो चुकी हैं। राफेल में न सिर्फ उससे ज्यादा खूबियां हैं बल्कि भारत ने अपनी जरूरतों के मुताबिक इसमें कुछ संशोधन भी करवाए हैं।

…इसलिए अंबाला में तैनाती
चीन-पाकिस्तान के साथ तनातनी को देखते हुए इन्हें जोधपुर के बजाय अंबाला में तैनात किया गया है। यहां से ये एलओसी और एलएसी पर जल्दी पहुंच सकते हैं। दूसरा, अंबाला बेस दिल्ली से महज 200 किमी करीब होने के कारण रणनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम है।

पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक के लिए अंबाला से उड़े थे मिराज
दिल्ली से महज 200 किमी की दूरी पर स्थित अंबाला एयरबेस रणनीतिक महत्व का स्क्वार्डन रहा है, जो दिल्ली में वेस्टर्न एयर कमांड के अधिकार में आता है। फरवरी 2019 में पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक के लिए मिराज यहीं से उड़े थे और सफल आप्रेशन कर लौटे थे। इसके अलावा, 1999 के कारगिल युद्ध के समय में भी अंबाला के इस एयरबेस ने अहम भूमिका निभाई थी, जब 234 ऑपरेशनल उड़ानें यहां से भरी गई थीं।
सुखोई के 23 साल बाद नया विमान…
रूस से सुखोई लड़ाकू विमानों की खरीद के करीब 23 साल बाद अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का बेड़ा वायुसेना को मिला है। एनडीए सरकार ने 2016 में फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन के साथ 36 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59 हजार करोड़ का करार किया था।

वायुसेना के पास 31 स्क्वॉड्रन
यह सौदा वायुसेना की कम होती युद्धक क्षमता में सुधार के लिए किया गया था। वायुसेना के पास फिलहाल 31 स्क्वॉड्रन हैं, जबकि कम से कम 42 स्क्वॉड्रन होने चाहिए।

निर्विवाद ट्रैक रिकॉर्ड वाला राफेल सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में शामिल
इन विमानों में तीन एक सीट वाले, जबकि दो विमान दो सीट वाले हैं।
इन्हें अंबाला की 17वीं स्क्वॉड्रन में शामिल किया गया, जिसे ‘गोल्डन एरोज’ के नाम से भी जाना जाता है।
इन विमानों के वायुसेना में शामिल होने से चीन और पाकिस्तान पर भारत को हवाई युद्धक क्षमता में बढ़त हासिल होगी।

(साभार – अमर उजाला)

शिक्षकों की गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता, एक से चार साल तक का होगा बीएड कोर्स

नयी दिल्ली : नई शिक्षा नीति-2020 में मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने की पूरी कोशिश की गई है। नई नीति में छात्रों के साथ शिक्षकों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रावधान किया जाएगा, जिससे उनकी योग्यता का भरपूर फायदा छात्रों को मिल सके। इसके लिए अगले दो सालों के भीतर शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर का मानक तैयार किया जाएगा। शिक्षकों के लिए अगले दो सालों के भीतर न्यूनतम डिग्री बीएड होगी, जो उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर एक से चार साल की होगी। एमए के बाद एक साल और इंटरमीडिएट के बाद चार साल।

बदलती शिक्षा  के अनुरूप शिक्षण तकनीक को अपनाने पर जोर

बीएड प्रोग्राम में शिक्षा शास्त्र की विधियों को शामिल किया जाएगा, जो छात्रों को मूलभूत शिक्षा, साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान, बहुस्तरीय अध्यापन और मूल्यांकन करने में महारत हासिल कराए। इसमें समय के साथ बदलती शिक्षा के अनुरुप शिक्षण टेक्नोलॉजी को अपनाने पर जोर दिया जाएगा। के. कस्तूरीरंगन कमेटी ने अपनी सिफारिशों में शिक्षकों के प्रशिक्षण में व्यापक सुधार के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण और सभी शिक्षा कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस मंजूर कर लिया है। देश में एक जैसे शिक्षक और एक जैसी शिक्षा को आधार बनाकर इसे लागू किया जाएगा। विद्यालयों में स्थानीय ज्ञान और लोक विद्या जैसी जानकारियों के लिए स्थानीय पेशेवरों को अनुबंध पर लिया जा सकता है। इससे छात्रों को स्थानीय ज्ञान प्राप्त हो सकेगा। उन्हें ‘मास्टर इंस्ट्रक्टर’ के नाम से जाना जाएगा। इनमें स्थानीय कला, संगीत, कृषि, व्यवसाय, खेल, कारपेंटिंग और अन्य कौशल शामिल होंगे।

शिक्षकों के लिए भी बनेगा एकसमान राष्ट्रीय मानक
वर्ष 2022 तक नेशनल काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एनसीटीई) को नेशनल प्रोफेशनल स्टैंडर्ड फॉर टीचर्स के लिए समान मानक तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। काउंसिल यह कार्य जनरल एजुकेशन काउंसिल के निर्देशन में पूरा करेगी। वर्ष 2030 तक सभी बहु आयामी कालेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के पठन पाठन के कोर्स को उसी के अनुरूप अपग्रेड करना होगा। उस समय तक शिक्षकों के लिए न्यूनतम डिग्री बीएड की अवधि चार साल करनी होगी। बीएड की दो साल की डिग्री उन ग्रेजुएट छात्रों को मिल सकती है, जिन्होंने विषय विशेष में चार साल की पढ़ाई की होगी। चार साल की ग्रेजुएट की पढ़ाई के साथ एमए की भी डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को बीएड की डिग्री एक साल में ही प्राप्त हो जाएगी। लेकिन वह विषय विशेष का ही शिक्षक हो सकेगा।
बदलती शिक्षा के अनुरूप शिक्षण टेक्नोलॉजी को अपनाने पर जोर
बीएड प्रोग्राम में शिक्षा शास्त्र की विधियों को शामिल किया जाएगा, जो छात्रों को मूलभूत शिक्षा, साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान, बहुस्तरीय अध्यापन और मूल्यांकन करने में महारत हासिल कराए। इसमें समय के साथ बदलती शिक्षा के अनुरुप शिक्षण टेक्नोलॉजी को अपनाने पर जोर दिया जाएगा। के. कस्तूरीरंगन कमेटी ने अपनी सिफारिशों में शिक्षकों के प्रशिक्षण में व्यापक सुधार के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण और सभी शिक्षा कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस मंजूर कर लिया है। देश में एक जैसे शिक्षक और एक जैसी शिक्षा को आधार बनाकर इसे लागू किया जाएगा। विद्यालयों में स्थानीय ज्ञान और लोक विद्या जैसी जानकारियों के लिए स्थानीय पेशेवरों को अनुबंध पर लिया जा सकता है। इससे छात्रों को स्थानीय ज्ञान प्राप्त हो सकेगा। उन्हें ‘मास्टर इंस्ट्रक्टर’ के नाम से जाना जाएगा। इनमें स्थानीय कला, संगीत, कृषि, व्यवसाय, खेल, कारपेंटिंग और अन्य कौशल शामिल होंगे।

(साभार – दैनिक जागरण)

34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव, अब नहीं होंगी 10 व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएँ

एम.फिल खत्म, अब सीधे पीएचडी कर सकेंगे विद्यार्थी 
मानव संसाधन मंत्रालय अब होगा शिक्षा मंत्रालय

नयी दिल्‍ली :कैबिनेट ने नयी शिक्षा नीति (New Education Policy 2020) को हरी झंडी दे दी है। 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि ये नीति एक महत्वपूर्ण रास्ता प्रशस्‍त करेगी। ये नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। इस नीति पर देश के कोने कोने से राय ली गई है और इसमें सभी वर्गों के लोगों की राय को शामिल किया गया है। देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि इतने बडे़ स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन हुआ है।

अहम बदलाव  नयी शिक्षा नीति के तहत अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा। बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो, एक विषय के तौर पर पढ़ाये जाएंगे।

– 9वीं से 12वीं कक्षा तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी। स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत पढ़ाया जाएगा

-वहीं कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी. यानि कि स्नातक के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्‍लोमा, तीसरे साल में डिग्री मिलेगी.

– 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें उच्च शिक्षा नहीं लेनी है। वहीं उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी. 4 साल की डिग्री करने वाले विद्यार्थी एक साल में एम.ए. कर सकेंगे।
– अब विद्यार्थियों को एम.फिल नहीं करनी होगी बल्कि एम. ए. के छात्र अब सीधे पीएचडी कर सकेंगे।

इतने बड़े पैमाने पर संग्रहित की गयी थी राय
इस शिक्षा नीति के लिए कितने बड़े स्तर पर रायशुमारी की गई थी, इसका अंदाजा इन आंकड़ों से सहज ही लगाया जा सकता है. इसके लिए 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6,600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह ली गयी थी.
विद्यार्थी बीच में कर सकेंगे दूसरे कोर्स
उच्च शिक्षा में 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 50 फीसदी हो जाएगा। वहीं नयी शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर वो दूसरा कोर्स कर सकता है।
उच्च शिक्षा में भी कई सुधार किए गए हैं. सुधारों में ग्रेडेड अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता (फाइनेंशियल ऑटोनॉमी) आदि शामिल हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स शुरू किए जाएंगे। वर्चुअल लैब्स विकसित किए जाएंगे. एक नेशनल एजुकेशनल साइंटफिक फोरम (NETF) शुरू किया जाएगा। बता दें कि देश में 45 हजार कॉलेज हैं।
सरकारी, निजी, डीम्‍ड सभी संस्‍थानों के लिए होंगे समान नियम
हायर एजुकेशन सेक्रटरी अमित खरे ने बताया, ‘ नए सुधारों में तकनीक और ऑनलाइन शिक्षा पर जोर दिया गया है. अभी हमारे यहां डीम्ड यूनविर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज और स्टैंडअलोन इंस्टिट्यूशंस के लिए अलग-अलग नियम हैं। नयी शिक्षा नीति के तहत सभी के लिए नियम समान होंगे।