Friday, April 10, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 426

88 दिन में 520 ऑनलाइन कोर्स करके बनाया विश्व रिकॉर्ड

तिरुअनन्तपुरम : दुनियाभर में जो लड़कियां पढ़-लिखकर अपने देश और माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं, उन्हीं में केरल की आरती रघुनाथ भी शामिल हैं। माता-पिता की इकलौती संतान आरती ने महामारी के दौरान घर में रहते हुए अपना समय पढ़ाई करने में बिताया।
आरती ने कंप्यूटर, बायोलॉजी से लेकर इकोनॉमिक्स पर आधारित अलग-अलग कोर्स किए। उन्होंने जिन यूनिवर्सिटीज से कोर्स किए उनमें जॉन हॉकिंस यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर, एमोरी यूनिवर्सिटी, कोरसेरा प्रोजेक्ट नेटवर्क और टेक्नीकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क भी शामिल हैं।
आरती कोच्चि में एलमकारा की रहने वाली हैं। वे एमईएस कॉलेज में एमएससी बायोकेमेस्ट्री की सेकंड ईयर स्टूडेंट हैं। उन्होंने 88 दिन में 520 ऑनलाइन कोर्स करके वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया। आरती ने किस तरह पढ़ाई की और उनके भविष्य की योजनाएं क्या है, जानिए खुद उन्हीं की जुबानी…
मैंने ऑनलाइन कोर्स की शुरुआत लॉकडाउन में रहते हुए जून के आखिरी हफ्ते से की। तब तक लॉकडाउन का काफी हिस्सा बीत चुका था। मुझे ये लगा कि जो वक्त बीत चुका है, उसे तो फिर से नहीं पाया जा सकता, लेकिन जो समय अभी बाकी है, उसका सही उपयोग करके ऑनलाइन कोर्स किए जा सकते हैं।
मैंने ये कोर्सेस करने में खूब मेहनत की। हालांकि मैं इतने सारे कोर्स कर पाऊंगी, इसकी मुझे उम्मीद नहीं थी, पर मेरी मेहनत रंग लाई। ऑनलाइन कोर्सेस की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे इन्हें कर सकते हैं। ये मेरी खुशनसीबी है कि 520 ऑनलाइन कोर्सेस करके मैंने वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया।
मैंने एमएससी ऑनलाइन क्लासेस करने के बाद बचे हुए समय में ऑन लाइन कोर्स किए। इनमें से जो कोर्स कंप्यूटर पर आधारित थे, वो मैं जल्दी पूरे कर लेती थी। लेकिन बायोलॉजी और साइकोलॉजी पर आधारित कोर्स करने में मुझे ज्यादा समय लगा क्योंकि उसे पढ़ने और समझने की ज्यादा जरूरत होती है।
मेरी तरह अन्य स्टूडेंट्स के लिए भी इस तरह के ऑनलाइन कोर्स करिअर को सफल बनाने में मदद कर सकते हैं। इन कोर्सेस को करने के बाद मिले सर्टिफिकेट हमारी प्रोफाइल अपडेट करने में मदद करते हैं। ये सभी कोर्सेस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त हैं जो काफी उपयोगी साबित होते हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

नहीं रहे संगीतकार राजन-नागेन्द्र जोड़ी फेम राजन

कन्नड़ फिल्मों के दिग्गज म्यूजिक कंपोजर राजन-नागेन्द्र जोड़ी फेम राजन का निधन हो गया है। 87 साल के राजन ने रविवार शाम बेंगलुरु स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। करीब 20 साल पहले राजन ने अपने छोटे भाई नागेन्द्र को खो दिया था। रिपोर्ट्स की मानें राजन-नागेन्द्र हिंदी सिनेमा की मशहूर जोड़ियों शंकर-जयकिशन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और कल्याणजी-आनंदजी के वर्ग के म्यूजिक कंपोजर थे। उन्हें कन्नड़ फिल्मों के कल्याणजी-आनंदजी कहा जाता था।
एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट से बातचीत में राजन के बेटे आर अनंत कुमार ने बताया, “वे एक दम स्वस्थ थे और ऑनलाइन म्यूजिक क्लास ले रहे थे। पिछले दो दिन से उन्हें अपच हो रही थी। रविवार रात 11 बजे घर में ही उन्होंने अंतिम सांस ली।”
राजन-नागेन्द्र की जोड़ी ने अपने 5 दशक लंबे करियर में करीब 375 फिल्मों में संगीत दिया था। इनमें से लगभग 200 कन्नड़ की फिल्में हैं। जबकि बाकी तमिल, तेलुगु, मलयालम, तुलु, हिंदी और सिंहला भाषा की फिल्में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके नाम म्यूजिक इंडस्ट्री में सबसे लंबे समय तक एक्टिव रहने वाली कंपोजर जोड़ी का रिकॉर्ड है।
राजन के छोटे भाई नागेन्द्र का निधन 4 नवंबर 2000 को बेंगलुरु में हुआ था। वे हर्निया का इलाज करा रहे थे। लेकिन बाद में उन्हें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याएं हुईं और वे बच नहीं सके।

महिलाओं के लिए जरूरी है सही आर्थिक सुरक्षा की तैयारी

आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में आदमियों से पीछे नहीं हैं। लेकिन वित्तीय मामलों में महिलाएं पुरुषों से पीछे रह जाती हैं। महिलाओं को अपने कैरियर के साथ बचत और निवेश पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे वो भविष्य को लेकर सही प्लानिंग कर सकेंगी। हम यहां कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं, जिनका ध्यान रखकर नौकरीपेशा महिलाएं सही फाइनेंशियल प्लानिंग के सकती हैं।
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का वेतन रहता है कम
पुरुषों और महिलाओं की सैलरी एक समान नहीं होती इस कारण इनकी फाइनेंशियल प्लानिंग भी अलग-अलग होनी चाहिए। एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार 2019 में अगर पुरुष को 100 रुपए सैलरी मिलती है, तो महिला को 79 रुपए ही मिलते हैं। यानी करीब 21 फीसदी कम। इसलिए कम आय को देखते हुए महिलाओं के लिए और भी जरूरी है कि वे अच्छा निवेश पोर्टफोलियो बनाकर पैसा कमाना और जोड़ना शुरू करें। ताकि वो कम समय में अपने लिए पर्याप्त फंड जुटा सकें।
कई बार महिलाओं के करियर का ग्राफ हमेशा बढ़ता हुआ नहीं हो पाता। अलग-अलग कारणों से कई बार आपको करियर से ब्रेक लेना पड़ सकता है। कुछ शादी के बाद नौकरी छोड़ देती हैं, कुछ प्रेग्नेंसी के दौरान या उसके बाद। इससे कॅरियर ग्रोथ और आय, दोनों प्रभावित होती हैं। आपने रिटायरमेंट के लिए पैसे इकट्‌ठा करने का जो लक्ष्य रखा है, वह इससे प्रभावित हो सकता है। इस अंतर को कम या खत्म करने लिए निवेश की बेहतर प्लानिंग करना बहुत जरूरी है।
महिलाओं में कम होती है वित्तीय साक्षरता
ग्लोबल फाइनेंशियल लिटरेसी एक्सीलेंस सेंटर द्वारा 2017 में किए गए सर्वे के अनुसार दुनियाभर में केवल 20 फीसदी महिलाओं को ही फाइनेंशियल कंसेप्ट (वित्तीय साक्षरता) की समझ है। यह पुरुषों से 8 फीसदी कम है। वित्तीय साक्षरता का मतलब है किसी व्यक्ति को बजट बनाने, पैसा बचाने, खर्चों पर नियंत्रण करने, कर्ज संभालने, रिटायरमेंट की प्लानिंग करने और संपत्ति जोड़ने की बेहतर समझ हो। इसलिए जरूरी है कि आप फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में पढ़कर या किसी एक्सपर्ट से बात करें। इससे आपको बचत और निवेश की सही समझ होगी।
इमरजेंसी फंड बनाना है जरूरी
रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ने के अलावा नौकरी जाने जैसी आपातकालीन स्थितियों के लिए भी आपको तैयार रहना चाहिए। यह इमरजेंसी फंड आपके कम से कम 6 महीने के वेतन के बराबर होना चाहिए। इससे आपको कोरोना काल जैसे बुरे वक्त से निपटने में मदद मिलेगी।
अपने खर्च का रखें हिसाब
बचत या निवेश के साथ ये भी बहुत जरूरी है कि आप अपने खर्च का भी हिसाब रखें। क्योंकि महिलाओं के खर्च और जरूरतें पुरुषों से अलग होती हैं। इस वजह से उनके सामने अलग ही वित्तीय चुनौतियां भी होती हैं। खर्च का हिसाब रखने से उन्हें अपने बचत का अंदाजा लगाना आसान हो जाएगा, और आप ज्यादा बचत सकेंगे।
सही सेवानिवृत्ति योजना जरूरी
सेंसस ऑफिस के सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत किए गए सर्वे के मुताबिक भारत में महिलाएं आदमियों की तुलना में ज्यादा जीवित रहती हैं। इस वजह से उनकी रिटायरमेंट प्लानिंग अवधि भी बढ़ जाती है। जीवनसाथी के गुजर जाने के बाद उनकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें इस समय को ध्यान में रखने हुए प्लानिंग करनी चाहिए।
लॉन्ग टर्म हेल्थ इंश्योरेंस लेना रहेगा सही
अगर आप सिंगल महिला हैं तो आपके लिए लॉन्ग टर्म हेल्थ इंश्योरेंस (केयर इंश्योरेंस) लेना भी एक अच्छा आइडिया है। ऐसा हो सकता है कि उम्रदराज होने के बाद आपको इसकी जरूरत पड़े, खासतौर पर तब, जब आपकी देखभाल के लिए कोई मौजूद न हो। हालांकि ऐसे लॉन्ग-टर्म हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम की कीमत ज्यादा होती है लेकिन इसे जितने जल्दी ले लेंगे, उतना कम कीमत पर यह मिल सकता है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

नहीं रहे  200 से अधिक मरीजों की जान बचाने वाले आरिफ

नयी दिल्ली/गाजियाबाद : दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में अनचाने दुश्मन कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ जंग जारी है, लेकिन इसमें कई बहादुर कोरोना वॉरियर्स को अपनी जान से हाथ थोना पड़ रहा है। ताजा मामले में अपनी जान जोखिम में डालकर 200 से ज्यादा मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने वाले आरिफ खान ने दुनिया को अलविदा कह दिया। 25 साल से शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ जुड़े आरिफ खान कोरोना वायरस से संक्रमित थे। शनिवार की सुबह उपचार के दौरान हिंदूराव अस्पताल में निधन हो गया। आइये जानते हैं कि कौन थे आरिफ खान, जिनके निधन पर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु और चर्चित कवि कुमार विश्वास समेत तमाम गणमान्य लोगों ने शोक जताया है।
200 से अधिक लोगों की बचाई थी जान
दिल्‍ली के सीलमपुर इलाके में रहने वाले आरिफ खान ने कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर 200 से ज्यादा मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया था। इसी के साथ 100 से अधिक शवों को अंत्येष्टि के लिए श्मशान पहुंचाया। आरिफ को जानने वालों का कहना है कि कोरोना महामारी ने एक जिंदादिल वॉरियर की जान ले ली। वह बेहद जिंदादिल शख्यिसियत थे। हमेशा मुस्कुराकर अपने काम को अंजाम देते थे।
आरिफ खान पिछले 25 साल से शहीद भगत सिंह सेवा दल के साथ जुड़े थे। आरिफ मुफ्त में एम्बुलेंस की सेवा मुहैया कराने का काम करते थे। सेवा दल से जुड़े पदाधिकारियों की मानें तो कोरोना के दिल्ली के दस्तक देने के साथ ही वह 21 मार्च से संक्रमित मरीजों को उनके आवास से अस्पताल और आइसोलेशन सेंटर तक ले जाने का काम कर रहे थे। शहीद भगत सिंह सेवा दल के संस्थापक जितेंद्र सिंह शंटी के मुताबिक, आरिफ खान ने मुस्लिम होकर भी अपने हाथों से 100 से अधिक हिंदुओं के शव का अंतिम संस्कार किया था। यह उनकी शख्सियत का दर्शाता है कि वह धर्म-जाति से ऊपर उठकर कितना नेक काम कर रहे थे।
जितेंद्र सिंह शंटी का कहना है कि आरिफ खान 24 घंटे कोरोना संक्रमितों के लिए उपलब्ध रहते थे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दिल्ली में रात 2 बजे कोरोना के मरीजों को घर से ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया था। इनमें से कुछ की मौत के बाद उन्हें अंतिम संस्‍कार के लिए भी लेकर गए थे। बिना किसी थकान और शिकायत के। आरिफ की हिम्मत की दाद देनी होगी, क्योंकि 3 अक्टूबर को तबीयत खराब हुई थी, लेकिन वह कोरोना संक्रमित को लेकर अस्पताल जा रहे थे। शहीद भगत सिंह सेवा दल की तरफ से अब तक कुल 623 कोरोना संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाया गया है, जिनमें 200 से ज्यादा मरीजों को आरिफ ने पहुंचाया। मुहम्मद आरिफ खान अपने परिवार के साथ वेलकम इलाके में स्थित लोहा मंडी में किराये के एक घर में रहते थे। आरिफ परिवार के मुखिया थे और परिवार का खर्च चलाने की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। बड़े बेटे आसिफ ने के मुताबिक, पिछले हफ्ते 6 अक्टूबर को अब्बू के कोरोना संक्रमित होने का पता चला था। ऑक्सीजन स्तर कम होने पर शुक्रवार को हिंदू बाड़ा राव अस्पताल में भर्ती कराया गया फिर शनिवार सुबह उनकी मौत की सूचना आई।
शहीद भगत सिंह सेवा दल के संस्थापक जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि मुहम्मद आरिफ खान बहुत ही ईमानदार व सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। अगर उनके फोन पर किसी मरीज का फोन आ जाता था तो वह अपने निजी काम छोड़कर तुरंत उसकी मदद के लिए तैयार हो जाते थे। वह संक्रमित होने से पहले तक लगातार कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे रहे। करीब साढ़े छह महीने से तो वह अपने घर भी नहीं गए थे। एंबुलेंस की पार्किंग में ही उन्होंने डेरा डाल दिया था। जब भी उन्हें घर पर जाने के लिए कहा जाता था, तो वह बस यही कहा करते थे कि अभी संक्रमण फैला हुआ है। एंबुलेंस में रोजाना कोरोना मरीजों के बीच रहते हैं। घर जाने पर परिवार को संक्रमित होने का खतरा रहेगा।

सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिये कब्जा स्वीकार्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिये शाहीन बाग जैसे सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिये कब्जा स्वीकार्य नहीं है। शाहीन बाग में पिछले साल दिसंबर में संशोधित नागरिकता कानून को लेकर शुरू हुआ धरना प्रदर्शन काफी लंबा चला था।
न्यायालय ने कहा कि धरना प्रदर्शन एक निर्धारित स्थान पर ही होना चाहिए और विरोध प्रदर्शन के लिये सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर कब्जा करके बड़ी संख्या में लोगों को असुविधा में डालने या उनके अधिकारों का हनन करने की कानून के तहत इजाजत नहीं है।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार और दूसरे लोगों के आने-जाने के अधिकार जैसे अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा।
पीठ ने कहा, ‘‘लोकतंत्र और असहमति एक साथ चलते हैं।’’पीठ ने कहा कि इसका तात्पर्य यह है कि आन्दोलन करने वाले लोगों को विरोध के लिये ऐसे तरीके अपनाने चाहिए जो ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अपनाये जाते थे। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर विरोध प्रदर्शन के लिये अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता, जैसा कि शाहीन बाग मामले में हुआ।
न्यायालय ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पिछले साल दिसंबर से शाहीन बाग की सड़क को आन्दोलनकारियों द्वारा अवरूद्ध किये जाने को लेकर दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फैसला सुनाते हुये पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस जैसे प्राधिकारियों को शाहीन बाग इलाके को प्रदर्शनकारियों से खाली कराने के लिये कार्रवाई करनी चाहिए थी।
न्यायालय ने कहा कि प्राधिकारियों को खुद ही कार्रवाई करनी होगी और वे ऐसी स्थिति से निबटने के लिये अदालतों के पीछे पनाह नहीं ले सकते। शाहीन बाग की सड़क से अवरोध हटाने और यातायात सुचारू करने के लिये अधिवक्ता अमित साहनी ने याचिका दायर की थी।
शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई पूरी की थी। न्यायालय ने उस समय टिप्पणी की थी कि विरोध के अधिकार के लिये कोई एक समान नीति नहीं हो सकती है।
साहनी ने कालिन्दी कुंज-शाहीन बाग खंड पर यातायात सुगम बनाने का दिल्ली पुलिस को निर्देश देने के लिये दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने स्थानीय प्राधिकारियों को कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुये इस स्थिति से निबटने का निर्देश दिया था।इसके बाद, साहनी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। साहनी ने कहा कि व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुये इस तरह के विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘इसे 100 दिन से भी ज्यादा दिन तक चलने दिया गया और लोगों को इससे बहुत तकलीफें हुयीं। इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में कल चक्का जाम था। उन्होंने 24-25 सितंबर को भारत बंद का भी आह्वाहन किया था।’’ भाजपा के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग ने अलग से अपनी याचिका दायर की थी, जिसमें प्रदर्शनकारियों को शाहीन बाग से हटाने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, कोविड-19 महामारी की आशंका और इस वजह से निर्धारित मानदंडों के पालन के दौरान शाहीन बाग क्षेत्र को खाली कराया गया और तब स्थिति सामान्य हुई थी।

केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन

नयी दिल्ली : देश के प्रमुख दलित नेताओं में से एक केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन गत 8 अक्टूबर को हो गया। उनके पुत्र और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने पिता के निधन की सूचना दी। पासवान 74 साल के थे। लोजपा के संस्थापक और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पासवान कई सप्ताह से यहां के एक अस्पताल में भर्ती थे। हाल ही में उनके हृदय की सर्जरी हुई थी।
समाजवादी आंदोलन के स्तंभों में से एक पासवास बाद के दिनों में बिहार के प्रमुख दलित नेता के रूप में ऊभरे और जल्दी ही राष्ट्रीय राजनीति में अपनी विशेष जगह बना ली। 1990 के दशक में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़े मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने में पासवान की भूमिका महत्वपूर्ण रही। खगड़िया में 1946 में जन्मे पासवान का चयन पुलिस सेवा में हो गया था लेकिन उन्होंने अपने मन की सुनी और राजनीति में चले आए। पहली बार 1969 में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए। वह आठ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और कई बार हाजीपुर संसदीय सीट से सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीते।

अभी बहुत से राज्य नहीं खोलना चाहते स्कूल

नयी दिल्ली  :  अनलॉक 5.0 के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 15 अक्तूबर से स्कूल खोलने को लेकर हरी झंडी दे दी है। मगर अब भी बहुत से राज्य ऐसे हैं जो स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं हैं। जहां कुछ राज्य अब भी इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे हैं कि स्कूलों को कब खोला जाए। वहीं कई त्योहारों के मौसम के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि अधिकांश राज्यों में माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। राज्यों में विभिन्न सरकारी विभागों के भीतर परामर्श जारी हैं, जिनमें से कई ने अपनी कैबिनेट बैठकों में भी इस मुद्दे को उठाया है। हितधारकों, विशेषकर माता-पिता के साथ भी बैठकें जारी हैं। कई राज्यों ने स्थिति की समीक्षा के लिए पैनल बनाए हैं। हरियाणा पहले ही स्कूलों को खोल चुका है। वहीं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड अक्तूबर के तीसरे हफ्ते से स्कूल खोलने के लिए तैयार हैं।
उत्तर प्रदेश चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोल रहा है। राज्य में 19 अक्तूबर से नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं के लिए स्कूल खोले जा रहे हैं। लेकिन उपस्थिति दर्ज करवाना अनिवार्य नहीं होगा क्योंकि छात्रों के पास ऑनलाइन कक्षाओं को जारी रखने का विकल्प होगा। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिवाली के बाद स्कूल खोलने के संकेत दिए हैं।
महाराष्ट्र ने हाल की कैबिनेट की बैठक में दिवाली खत्म होने के बाद इसपर फैसला लेने का निर्णय लिया है। गुजरात भी दिवाली का इंतजार करेगा। वहीं ओडिशा और असम ने दुर्गा पूजा खत्म होने तक स्कूल नहीं खोलने का फैसला किया है। आंध्र प्रदेश ने दो नवंबर की एक अस्थायी तिथि निर्धारित की है। दिल्ली, गोवा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने अभी तक इसपर कोई फैसला नहीं लिया है। कई राज्यों को लगता है कि स्कूल खोलने की आवश्यकता सीमित या बिना इंटरनेट की पहुंच वाले छात्रों के लिए है।

 

आर्यनंदा बाबू के सिर पर सजा ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’ की विजेता का ताज

मिला पांच लाख रुपये का नकद इनाम

मुम्बई : जी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’ के आठवें सीजन का शानदार समापन हुआ। इस ग्रैंड फिनाले एपिसोड में जैकी श्रॉफ, शक्ति कपूर और गोविंदा जैसे खास मेहमानों की उपस्थिति में जबर्दस्त रोमांच देखने को मिला। इस सीजन की सबसे बेहतरीन परफॉर्मर्स में से एक आर्यनंदा बाबू को सारेगामापा लिटिल चैंप्स की विजेता के रूप में चुना गया। उन्हें एक प्रतिष्ठित ट्रॉफी के अलावा नगद पुरस्कार के रूप में 5 लाख रुपए का चेक भी दिया गया। इस प्रतियोगिता में हर चुनौती को पार करते हुए आर्यनंदा को कड़ी टक्कर देने वाले फाइनलिस्ट्स – रणिता बनर्जी और गुरकीरत सिंह को क्रमशः फर्स्ट एवं सेकंड रनर अप घोषित किया गया। विजेताओं का चुनाव जनता की वोटिंग के आधार पर किया गया, जिसे दर्शकों का जबर्दस्त प्रतिसाद मिला।
अपनी जीत से बेहद उत्साहित आर्यनंदा ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मेरा सपना सच हो गया है! सारेगामापा लिटिल चैंप्स का यह सफर मेरे लिए सीखने का एक बढ़िया अनुभव रहा। मैं सभी मेंटर्स और जजों की आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मेरा सहयोग किया।

देश में 18 करोड़ लोग गठिया रोग से पीड़ित, अब युवा भी बन रहे शिकार

गठिया से बचने के लिए हफ्ते में 5 दिन 30 मिनट नियमित कसरत करें
अपने जोड़ों को चोट लगने से सुरक्षित रखें, गलत तरीके से उठने- बैठने और सोने की आदत न डालें
नयी दिल्ली  : भारत में गठिया के शिकार लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। देश की पूरी जनसंख्या में से करीब 15%, यानी लगभग 18 से 20 करोड़ लोग गठिया की चपेट में हैं। अभी तक यह बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन बदलते परिवेश में यह बीमारी युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। रुमेटॉएड आर्थराइटिस 25 से 30 साल के युवाओं में भी बढ़ रही है। इसके मामले पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक देखे जा रहे हैं। एम्स दिल्ली में रुमेटोलॉजी विभाग की हेड डॉ. उमा कुमार के मुताबिक गठिया कई प्रकार के होते हैं। गठिया बीमारी भी है और कई सारी बीमारियों का लक्षण भी। लेकिन हर जोड़ों का दर्द गठिया नहीं होता। कैंसर में और थॉयराइड जैसी बीमारियों में भी गठिया हो सकती है।
गठिया होने के बाद भी उसको बेअसर किया जा सकता है
डॉ. उमा कहती हैं कि डाइबिटीज के मरीजों की तरह गठिया के मरीज भी सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। लेकिन उसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जोड़ों में दर्द और शरीर में अकड़न को नजरअंदाज बिलकुल न करें, अगर ऐसा लगातार हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह लें।
अपनी दिनचर्या को नियमित रखना जरूरी है, इसमें गैप खतरनाक हो सकता है। खाने-पीने से लेकर सोने-जगने और एक्सरसाइज समेत सबकुछ नियमित होना चाहिए।
एक्सरसाइज गठिया से लड़ने के लिए सबसे जरूरी और असरदार हथियार है। नियमित एक्सरसाइज भी बहुत जरूरी है। लेकिन जो कुछ भी एक्सरसाइज हम कर रहे हैं वह डॉक्टर की सलाह पर होनी चाहिए।
हो सकता है गठिया से बचाव
डॉ. उमा ने गठिया से बचने के लिए 11 उपाय बताए। उनके मुताबिक कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर हम इस समस्या से बच सकते हैं।
डॉक्टर उमा के मुताबिक हथेली, उंगलियों, कोहनी, घुटने कूल्हे के जोड़ को चोट लगने से सुरक्षित रखें। गलत तरीके से उठने- बैठने और सोने की आदत न डालें। मोटापे से बचें, कभी-कभी मोटापे से होने वाली बीमारी जैसे डायबिटीज और हाइपरटेंशन भी आर्थराइटिस यानी गठिया की वजह बन सकता है।
गठिया से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि स्मोकिंग यानी बीड़ी और सिगरेट से दूर रहें। कैल्शियम और विटामिन डी युक्त डाइट भी गठिया होने से बचा सकती है। एक्सरसाइज सबसे ज्यादा जरूरी है, हफ्ते में पांच दिन 30 मिनट नियमित एक्सरसाइज करनी चाहिए।
साफ-सफाई रखकर गठिया से बचा जा सकता है। स्ट्रेस यानी तनाव मुक्त रहने से भी गठिया से बचा जा सकता है, इसलिए ज्यादा न सोचें और खुश रहने का प्रयास करें। योग बहुत जरूरी है। योग के कुछ आसन करके हम अपने ऑटो इम्यून सिस्टम को अच्छा बनाए रख सकते हैं। पूरी नींद लेना भी जरूरी है।
फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाना चाहिए
डॉ. उमा के मुताबिक, अनुवांशिक कारणों से भी गठिया हो सकती है। यानी आपके पहले की पीढ़ी में अगर किसी को इसके लक्षण रहे हों तो, आगे की पीढ़ी में भी इसके असर दिखने की संभावना रहती है। हालांकि बेहतर खान-पान और अनुशासन ही इसकी काट है।
बार-बार वायरल और बैक्टिरियल इंफेक्शन होना भी गठिया की वजह बन सकता है। हमें वायरल और बैक्टिरियल इंफेक्शन से बचना चाहिए। सब्जियों और फलों में इस्तेमाल होने वाले पेस्टीसाइड भी गठिया के रिस्क फैक्टर में से एक हैं। हमें फलों और सब्जियों को अच्छे से धोकर ही खाना चाहिए।
गठिया रोग क्या है?
गठिया या आर्थराइटिस 100 से भी ज्यादा तरीके क्या होते हैं। गठिया रोग मूलत: प्यूरिन नामक प्रोटीन के मेटाबोलिज्म की वजह से होती है। खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। व्यक्ति कुछ देर के लिए बैठता या फिर सोता है तो यही यूरिक एसिड जोड़ों में इकट्ठा हो जाते हैं, जो अचानक चलने या उठने में तकलीफ देते हैं। ध्यान न देने पर घुटना, कूल्हा आदि इंप्लांट करने की भी नौबत आ जाती है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

बीएचएस में ‘चुनौतीपूर्ण समय में सकारात्मक सोच’ पर वेबिनार

कोलकाता : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर बिड़ला हाई स्कूल ने अभिभावकों के लिए विशेष कार्यक्रम किया। इस मोटिवेशनल टॉक यानी प्रेरक बातचीत का आयोजन कक्षा 6 से लेकर 12वीं के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर किया गया था। चुनौतीपूर्ण समय में सकारात्मक सोच, विषय पर आयोजित इस वेबिनार में वक्ता प्रख्यात मनोविद् व सलाहकार उम्मीद फाउंडेशन की ट्रस्टी सलोनी प्रिया थीं। वे शिक्षा प्रबन्धन. मानवीय विकास, अभिभावकों के मार्गदर्शन के साथ जरूरतमंद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करती आ रही हैं। उन्होंने इस वेबिनार में मानसिक स्वास्थ्य पर बात की और सकारात्मक रहने के तरीके भी साझा किए। उन्होंने भावनात्मक प्रबन्धन के मह्त्व को समझाया। उन्होंने कहा कि बच्चों को संरक्षण, मार्गदशन और भावनात्मक समर्थन की जरूरत है। बिड़ला हाई स्कूल की प्रिंसिपल लवलीन सैगल ने योद्धा बनने की सलाह दी। अभिभावकों ने इस कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लिया।