अड्डा 247 एक वेबसाइट है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करने के लिए बनायी गयी है। इसके सभी फीचर आप इसके ऐप में भी पा सकते हैं। Adda 247 एप बैंकर्स अड्डा(bankersadda.com) और एसएससी अड्डा(sscadda.com) टीम का आधिकारिक एप है। यह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक निःशुल्क एप है, जो उम्मीदवारों को विभिन्न परीक्षाओं जैसे – बैंक, एसएससी, रेलवे, टीचिंग और डिफेंस के क्षेत्र की परीक्षाएं शामिल हैं। Adda247 ऐप, आईबीपीएस पीओ , आईबीपीएस क्लर्क, एसो, एसएससी सीजीएल, सीएचएसएल (CHSL), एमटीएम (MTS), रेलवे, सीटीईटी (CTET), आरआरबी एनटीपीसी, एसबी पीओ, एसबीआई क्लर्क, एसबीआई पीओ, एसबीआई क्लर्क, बैंक पीओ, बैंक क्लर्क, एलआईसी एएओ, और डीएसएसएसबी जैसी सरकारी परीक्षाओं के इच्छुक उम्मीदवारों की मदद करता है ।
Adda 247 की विशेषता
– दैनिक आधार पर टॉपिक बेस्ड फ्री क्विज/ प्रश्नावली
– दोनों भाषाओं में बेस्ट कंटेंट उपलब्ध
– परीक्षा के लेटेस्ट पैटर्न पर आधारित कंटेंट
– बेस्ट फीचर्स और टेक्नोलॉजी के साथ प्रयोग करने में आसान
– कंटेंट डाउनलोड करने के बाद ऑफलाइन भी प्रयोग कर सकते हैं
– ऑनलाइन लाइव क्लासेज / फ्री मॉक / गत वर्ष आधारित मॉक / मेमोरी बेस्ड फ्री मॉक
– सभी सरकारी परीक्षाओं पर कवरेज
महत्वपूर्ण सेक्शन :
★ परीक्षाओं की विस्तृत सूचना पायें : बैंक परीक्षा –
आईबीपीएस ( IBPS), एसबीआई (SBI) , आरबीआई (RBI), एसएससी परीक्षाएं – एसएससी (SSC) सीजीएल (CGL), सीएचएसएल ( CHSL), जे ई (JE), रेलवे परीक्षाएं – आरआरबी (RRB) एनटीपीसी ( NTPC), जेई ( JE), एएलपी(ALP)/टेक्निकल, ग्रुप -डी, बीमा परीक्षाएं – एलआईसी (LIC) (एएओ) AAO, टीचिंग परीक्षाएं – सीटीईटी (CTET), डीएसएसएसबी (DSSSB) एवं डिफेंस परीक्षाएं 2019-20.
★ डेली जीके अपडेट: करेंट अफेयर्स किसी भी सरकारी परीक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा होता है। यह ऐप आपको रियल टाइम के आधार पर करंट अफेयर्स से अपडेट रखता है। Adda247 ऐप आपको डेली जीके अपडेट का सारांश भी प्रदान करता है। यह आपको आईबीपीएस, बैंक पीओ, एसबीआई पीओ, क्लर्क, एसएससी सीजीएल, आरबीआई, आरआरबी रेलवे और अन्य सरकार परीक्षाओं के लिए सभी करंट अफेयर्स देता है।
★ मॉक टेस्ट सीरीज़ और ई बुक्स: Adda247 ऐप एसएससी, आईबीपीएस, बैंक पीओ, क्लर्क, आरबीआई और रेलवे परीक्षाओं के लिए मॉक टेस्ट और ई बुक्स के रूप में बेस्ट स्टडी सोर्स प्रदान करता है। उम्मीदवारों को भारत की बेस्ट फेकल्टी द्वारा तैयार किये गये लेटेस्ट परीक्षा पैटर्न के आधार पर स्टडी मेटीरियल दीया जाता है। इसमें सभी बैंक, एसएससी और रेलवे परीक्षा 2019 से संबंधित महत्वपूर्ण पीडीएफ, आर्टिकल्स, लेसन्स, वीडियो सोल्यूशन शामिल हैं।
★ वीडियो कोर्स: परीक्षा की विज़ुअल तैयारी के लिए एसएससी , बैंक और रेलवे परीक्षाओं में Adda247 के वीडियो कोर्स की सुविधा प्रदान की जाती है। ये ऑनलाइन लेक्चर्स बेस्ट स्ट्रेटजी के साथ उम्मीदवारों को लैस करने में मदद करते हैं ताकि वे सरकारी परीक्षाओं को क्रैक कर सकें।
★ क्विज़ (प्रश्नावली): ऐप में क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, रीजनिंग, इंग्लिश, बैंकिंग, करंट अफेयर्स, कंप्यूटर नॉलेज, जनरल स्टडीज आदि के आधार पर समयबद्ध क्विज़ शामिल हैं, जो आईबीपीएस, बैंक पीओ और एसएससी सीजीएल और एसबीआई सहित सभी सरकारी नौकरियों के लिए उपयोगी हैं। ये क्विज़ एसबीआई पीओ के लिए ऑनलाइन टेस्ट सीरीज़, आईबीपीएस पीओ के लिए ऑनलाइन टेस्ट सीरीज़, बैंक पीओ के लिए ऑनलाइन टेस्ट सीरीज़ और एसएससी सीजीएल के लिए ऑनलाइन टेस्ट सीरीज़ के रूप में कार्य करते हैं।
★ मैगज़ीन: ऐप में टीम बैंकर्सअड्डा की पॉपुलर मैगज़ीन – कॉम्पीटिशन पॉवर पत्रिका भी है। आप Adda247 ऐप में कॉम्पिटिशन पावर मैगज़ीन को पढ़ भी सकते हैं और बुकमार्क कर सकते हैं।
★ स्टडी आर्टिकल्स : आपको दैनिक आधार पर सरकारी नौकरियों से संबंधित स्टडी आर्टिकल्स मिलते हैं, जो परीक्षा के बदलते पैटर्न और परीक्षा में पूछे जाने वाले नवीनतम प्रकारों के संबंध में अपडेट रखने में आपकी सहायता करते हैं।
ऐप के बारे में हमें अपनी प्रतिक्रिया दें। ऐप दोनों भाषाओं में उपलब्ध है – हिंदी भाषा और अंग्रेजी भाषा।
सामग्री – 1 बड़ा पपीता, 1 बड़ा चम्मच घी, भुनी इलायची, 2 बड़े चम्मच चीनी स्वादानुसार, सूखे मेवे। विधि – पपीते को कसकर हल्का उबाल लें और अतिरिक्त पानी हाथों से दबाकर निकाल लें। गैस पर कड़ाही चढ़ाएं और उसमें दूध डालें…लगातार आधा होने तक चलाते रहें और उसकी रबड़ी बना लें।
इस रबड़ी को अलग रखें। अब कड़ाही में घी डालें..गर्म होने दें..घी में पपीता भूनकर, घी में भुने मेवा, इलायची, रबड़ी डालकर पकाएं। चीनी स्वादानुसार डालें। गाढ़ा पेस्ट तैयार होने तक पकाते रहें। इसमें घी में भुने कटे सूखे मेवे डाल लें। ठंडा होने दें…जब जम जाएं तो बर्फी के आकार में काट लें।
रायता विद फ्रूट सलाद
सामग्री – 1 कसा खीरा, 1 कसा हुआ सेब, 1 गुच्छा कटे अंगूर, मुट्ठी भर किशमिश, चीनी, हरी मिर्च, ताजा गाढ़ा दही। विधि – एक बाउल लें। सभी सामग्रियों को मिला लें। इन्सटेंट फ्रूट सलाद तैयार है।
कोलकाता : कोरोना महामारी से विश्व परेशान है मगर इस पर नियंत्रण पाने का विश्वास भी है। इस विश्वास को दुर्गा पूजा आयोजक भी दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे काम भी कर रहे हैं। हाल ही में पूर्व कलिकाता सार्वजनीन दुर्गोत्सव कमेटी ने प्राक प्लेटिनम जयन्ती वर्ष पर एक विशेष पहल की। कमेटी ने महालया के दिन मास्क, पीपीई किट, सैनेटाइजर वितरित किया। इस दुर्गा पूजा कमेटी के मुख्य संगठन मानस रंजन दत्त द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार महाअष्टमी,अंजलि देते समय और दशमी के दिन भी सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। अंजलि के समय और माँ का वरण करते समय मास्क, पीपीई किट, दस्ताने वितरित किये जाएंगे। सभी को सैनेटाइज करने के बाद ही मंडप में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। कोलकाता में इस तरह का कदम उठाने वाली यह पहली पूजा कमेटी है। पूजा के दौरान सरकारी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। सामाजिक दूरी का ध्यान रखा जाएगा और मण्डप तीन ओर से खुला रहेगा।
नयीदिल्ली : नेहा भाटिया ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स किया है। पिछले तीन साल से वो ऑर्गेनिक फार्मिंग कर रही हैं। नेहा 16 एकड़ जमीन पर खेती कर रहीं है, इसमें नोएडा में तीन एकड़ पर सब्जियां, मुजफ्फरनगर में 12 एकड़ में फल, भीमताल में एक एकड़ पर ऑर्गेनिक हर्ब की खेती करतीं है। वे अपने उत्पाद ऑनलाइन भी बेचती हैं, हर महीने करीब 500 ऑर्डर आते हैं, जो किसान अपने उत्पाद मार्केट तक नहीं ले जा पाते, उनके प्रोडक्ट भी नेहा ऑनलाइन बेचती हैं।
आगरा की रहने वाली नेहा भाटिया दिल्ली में पली बढ़ीं, इसके बाद वो लंदन चली गईं। जहां उन्होंने 2014 में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स किया। सालभर वहां काम करने के बाद वो इंडिया वापस आ गई। 2017 में उन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग की शुरुआत की। आज वो देश में तीन जगहों पर खेती कर रही हैं। इससे वो सालाना 60 लाख रुपए कमा रही हैं। साथ ही कई किसानों को खेती की ट्रेनिंग देकर उनका जीवन भी संवार रही हैं।
31 साल की नेहा एक बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखती हैं। कहती हैं, ‘मैंने बहुत पहले ही तय कर लिया था कि मुझे व्यवसाय करना है लेकिन, सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि उसका सामाजिक लाभ और प्रभाव भी हो। उससे लोगों को भी फायदा हो। हालांकि, तब खेती के बार में नहीं सोचा था।’
नेहा बताती हैं, ‘दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद मैं एक सोशल ऑर्गनाइजेशन से जुड़ गई। मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा सहित कई राज्यों में एजुकेशन, हेल्थ जैसे इश्यूज के ऊपर काम किया। 2012 में लंदन चली गई। इसके बाद 2015 में भारत लौटी तो फिर से एक सामाजिक संस्था के साथ जुड़ गयीं। करीब दो साल काम किया। कई गांवों में गयीं, लोगों से मिली और उनकी दिक्कतों को समझा। इस दौरान मैंने महसूस किया कि लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या हेल्दी फूड्स की है, गांवों के साथ-साथ शहरों में भी लोगों को सही खाना नहीं मिल रहा है। नेहा कहती हैं, ‘ 2016 के अंत में मैंने क्लीन ईटिंग मूवमेंट लॉन्च करने का प्लान किया, ताकि लोगों को सही और शुद्ध खाना मिल सके। इसको लेकर रिसर्च करना शुरू किया, कई विशेषज्ञों से मिली। सबने यही कहा कि अगर सही खाना चाहिए तो सही उगाना भी पड़ेगा। जब अनाज और सब्जियां ही केमिकल और यूरिया वाली होंगी तो उनसे बना खाना ठीक कैसे हो सकता है। तब मैंने तय किया कि क्यों न खेती की जाए।’ नेहा कहती हैं, ‘खेती से मेरा कोई जुड़ाव नहीं था, मुझे तो फार्मिंग की बेसिक जानकारी भी नहीं थी। फार्मिंग शुरू करने से पहले मैंने 6-7 महीने की ट्रेनिंग ली, कई गांवों में गई, खेती के बारे में जानकारी ली। इसके बाद नोएडा में अपनी दो एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक सब्जियों की फार्मिंग की।’ वो कहती हैं, ‘मेरा पहला अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा। ज्यादातर सब्जियां सड़ गयीं, कुछ सब्जियां इतनी ज्यादा मात्रा में निकल गयीं कि हम उन्हें मार्केट में सप्लाई नहीं कर पाए। लोगों को फ्री में बांटना पड़ा। तकलीफ तो हुई लेकिन मैं हिम्मत नहीं हारी। मेरे पति पुनीत जो एक कंपनी में बिजनेस कंसल्टेंट थे, उन्होंने मेरा मनोबल बढ़ाया। कुछ दिन बाद वे भी नौकरी छोड़कर मेरे साथ जुड़ गए।’ नेहा बताती है कि दूसरी बार जब हमने खेती की तो अच्छी उपज हुई। हमने मार्केट में खुद जाकर अपना प्रोडक्ट बेचा, लोगों से मिलकर अपनी सब्जियों के बारे में बताया। कुछ दिनों बाद ही हमें बेहतर प्रतिक्रिया मिलने लगी। इसके बाद हमने दायरा बढ़ा दिया। नोएडा के बाद दो और जगह मुजफ्फरनगर और भीमताल में भी खेती करना शुरू कर दी।’नेहा 15 एकड़ जमीन पर अभी खेती कर रहीं है। इसमें नोएडा में तीन एकड़ जमीन पर सब्जियां, मुजफ्फरनगर में 10 एकड़ में फल और भीमताल में दो एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक हर्ब की फार्मिंग करतीं है। 50 के करीब वो सब्जियां उगाती हैं। उनकी टीम में 20 लोग काम करते हैं। बड़ी संख्या में किसान भी जुड़े हैं। इसके साथ ही वो फार्मिंग स्कूल और एग्रो-टूरिज्म को लेकर भी काम कर रही हैं। नेहा बताती हैं, ‘शहर के ज्यादातर बच्चे सब्जियां पहचान नहीं पाते हैं। उन्हें यह भी पता नहीं होता कि आलू ऊपर उगता है या नीचे, उनकी पत्तियां कैसी होती हैं। इसलिए हमने कुछ समय पहले फार्मिंग स्कूल प्रोजेक्ट लॉन्च किया। अलग-अलग स्कूल के बच्चे हफ्ते में एक दिन हमारे यहां आते हैं और फार्मिंग के बारे में सीखते हैं। एक दर्जन से ज्यादा स्कूलों से हमने टाइअप किया है। आगे हम इसे बड़े लेवल पर लेकर जाना चाहते हैं। साथ ही हम लोग समय-समय पर एग्रो टूरिज्म कैम्प लगाते हैं, लोगों को अपने फार्म पर आमंत्रित करते हैं और उन्हें मनपसंद क्लीन फूड खिलाते हैं। ताकि ऑर्गेनिक फूड्स को लेकर उनका इंटरेस्ट बढ़े। दिल्ली और नोएडा के आस-पास के काफी संख्या में लोग हमारे यहां आते हैं, अपनी पूरी फैमिली के साथ।’
वो कहती हैं, ‘हमने प्रौडिगल फार्म नाम से ई-कॉमर्स वेबसाइट भी लॉन्च की है। इस पर सब्जियां, जूस, आचार, सॉस,मसाले, फ्रूट्स जैसे प्रोडक्ट उपलब्ध हैं। साथ उन छोटे किसानों के भी प्रोडक्ट्स भी हम सप्लाई करते हैं जो मार्केट में जाकर अपना सामान नहीं बेच पाते या जो प्रोडक्ट हम खुद नहीं उगाते हैं। हर महीने 500 से ज्यादा ऑनलाइन ऑर्डर आते हैं। कोरोना के समय ऑनलाइन डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई थी।’ नेहा कहती हैं कि हम कोई भी प्रोडक्ट वेस्ट नहीं करते हैं, जो प्रोडक्ट मार्केट में नहीं भेज पाते उसे प्रोसेसिंग करके दूसरा प्रोडक्ट तैयार करते हैं और कस्टमर्स को देते हैं। इसके साथ ही हमलोग कोई भी पेस्टीसाइड या केमिकल यूज नहीं करते हैं। हमारा फोकस क्वांटिटी पे नहीं, क्वालिटी पर होता है। (साभार – दैनिक भास्कर)
वे देश की ऐसी पहली ट्रांसजेंडर महिला हैं जो एक राष्ट्रीय बैंक में 2015 से कार्यरत हैं
पटना : बिहार के चुनाव में इतिहास रचने वाली ट्रांसजेंडर मोनिका दास को विधानसभा चुनाव में पीठासीन पदाधिकारी बनाया जाएगा। ऐसा देश में पहली बार होगा जब किसी ट्रांसजेंडर को मतदान कार्य के लिए पीठासीन पदाधिकारी नियुक्त किया जाएगा। मोनिका दास एक बूथ की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगी। उन्हें पीठासीन अधिकारी के तौर पर 8 अक्टूबर को ट्रेनिंग दी जाएगी। मोनिका दास पटना की रहने वाली हैं और इनकी उम्र 32 साल है। मोनिका ने स्कूली शिक्षा नवोदय विद्यालय से और पटना यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया जिसमें वे गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उन्होंने पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री भी ली है।
उनके पिता भगवान ढोली सेल्स टैक्स अफसर थे जबकि मां अनीता रानी भौमिक बीएसएनएल की रिटायर्ड कर्मचारी हैं। वे देश की पहली ट्रांसजेंडर महिला हैं जो एक राष्ट्रीय बैंक में 2015 से कार्यरत हैं। मोनिका से पहले पश्चिम बंगाल की ट्रांसजेंडर महिला रिया सरकार को पोलिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया था।
मोनिका जब तीन साल की थी तब पड़ोसियों को उनके ट्रांसजेंडर होने की जानकारी हुई। जब वे थोड़ी बड़ी हुई तो उनके बोलचाल के तरीके की वजह से कोई उनसे दोस्ती नहीं करता था। इन सबके बावजूद मोनिका ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्हें अपनी मेहनत के बल पर पीठासीन अधिकारी बनने का गौरव मिला है। फिलहाल मोनिका को अपनी इस उपलब्धि पर गर्व है। मोनिका अपनी इस उपलब्धि से काफी खुश हैं। उन्होंने कहा – ”मैं इसे ट्रांसजेंडर समुदाय की जीत मानती हूं। मैं ट्रांसजेंडर्स के प्रति लोगों का नजरिया बदलना चाहती हूं। आज भी ऐसे कई ट्रांसजेंडर हैं जो समाज में नजरअंदाज किए जाने की वजह से सामने आने की हिम्मत नहीं करते। मेरी कामयाबी उन्हें प्रोत्साहित करेगी”।
पांच साल पहले अपनी तीन महीने की बेटी की खातिर शुरू किया था ये काम फिलहाल निशा के इस स्टार्टअप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है
चेन्नई : 2016 में निशा रामासामी की तीन महीने की बेटी को त्वचा से जुड़ी समस्या एटोपिक डर्मेटाइटिस हुई जिसमें त्वचा लाल हो जाती है और उस पर खुजली होती है। तभी उन्हें ये भी लगा कि इस बच्ची को प्लास्टिक के खिलौनों से एलर्जी है। चेन्नई में रहने वाली निशा एक मॉन्टेसरी टीचर हैं। जब उसने अपनी बेटी को घुटनों के बल इधर-उधर चलते और कई चीजों के साथ खेलते हुए देखा तो उसे ये लगा कि क्यों न कुछ ऐसे खिलौने बनाए जाए जिससे बेटी को त्वचा एलर्जी होने का डर न रहे। अपनी इसी सोच के साथ निशा ने बढ़ई की मदद से लकड़ी के खिलौने बनाए। वैसे भी मार्केट में न्यू बोर्न से लेकर तीन साल तक के बच्चों के लिए मिलने वाले खिलौनों की संख्या काफी कम है। निशा कहती हैं – ”यही वो उम्र होती है जब एक शिशु का विकास होता है और वो बोलना सीखता है। इसलिए इस उम्र के बच्चों का खास ध्यान रखा जाना चाहिए”।
तब निशा ने नीम की लकड़ी से शिशु के लिए टीथर और रेटल्स बनाना शुरू किया। निशा के अधिकांश मिलने-जुलने वाले लोग भी पैरेंट्स हैं। उन्हें निशा का ये क्रिएशन बहुत पसंद आया। उन्होंने अपने बच्चों के लिए भी निशा को इसी तरह के खिलौने बनाने के ऑर्डर दिए। यहीं से निशा के फाउंडेशन ‘अरिरो वुडन टॉयज’ की शुरुआत हुई। निशा ने पति वसंत के साथ मिलकर 2018 में इसे शुरू किया।
अपने स्टार्ट अप को आगे बढ़ाने के लिए इस कपल ने स्वीडन, इंडोनेशिया और चीन की यात्रा कर वहां बनने वाले खिलौनों के बारे में जानकारी ली। इन्होंने ये भी जाना कि इन खिलौनों पर किस तरह का पेंट होता है और इन्हें स्टोर करके अधिक समय तक कैसे रखा जाता है। वहां से लौटने के बाद निशा ने स्थानीय कारीगरों को खिलौने बनाने से जुड़ी कई बारीकियों को सीखाया। अपने स्टार्ट अप के जरिये निशा नौनिहालों के लिए पजल्स, रेटल्स, टीथर्स, स्लाइडर्स, स्टेप स्टूल और इंडोर जिम एसेसरीज डिजाइन करती हैं। उनके बनाए प्रोडक्ट्स अमेजन और फ्लिपकार्ट सहित 20 प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। फिलहाल निशा के इस स्टार्ट अप से 200 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।
उनके बर्तन बैंक में पांच सौ थालियां, गिलास एवं चम्मच हैं, जिसका पूरा हिसाब-किताब रजिस्टर में मेंटेन किया जाता है इन महिलाओं की दोस्ती लगभग 21 साल पुरानी है। सबसे पहले उन्होंने बाजार से पन्नी में सामान लेना बंद किया था
भोपाल : भोपाल में शक्ति नगर निवासी चार महिलाएं इला मिड्ढा, श्वेता शर्मा, स्मिता पटेल और डॉ. मधुलिका दीक्षित ने मिलकर बर्तन बैंक बनाया है। उनका मकसद पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्लास्टिक और डिस्पोजल के थाली-गिलास का उपयोग नहीं करना है।
इस उद्देश्य से यहां धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए बर्तन नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं। उनके बर्तन बैंक में पांच सौ थालियां, गिलास एवं चम्मच हैं, जिसका पूरा हिसाब-किताब रजिस्टर में मेंटेन किया जाता है।
इन महिलाओं की दोस्ती लगभग 21 साल पुरानी है। सबसे पहले उन्होंने बाजार से पन्नी में सामान लेना बंद किया। वे अपने साथ घर से ही बैग लेकर जाती थीं। उन्हें यह मालूम था कि जानवर पन्नियां खाने की वजह से मर जाते हैं। इसलिए उन्होंने बर्तन बैंक शुरू किया।
इन महिलाओं ने बताया कि हम जब भी किसी कार्यक्रम में जाते थे तो वहां डिस्पोजल थालियों में खाना सर्व किया जाता था। तब हमें महसूस हुआ कि इससे हमारे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। साथ ही जानवरों को भी नुकसान हो रहा है, क्योंकि जानवर इन्हीं डिस्पाेजल थालियों को खा जाते हैं।
ये सभी महिलाएं पर्यावरण प्रेमी हैं। इन्होंने सोचा कि इतना प्लास्टिक वेस्ट इकट्ठा हो रहा है जो आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत हानिकारक है। इस बात को ध्यान में रखते हुए आपस में पैसे एकत्र कर बर्तन बैंक की शुरुआत की।
उनके इस कार्य में मीना दीक्षित और हरिप्रिया पंत ने काफी सहयोग किया। इसके बाद किसी आयोजन के लिए वे बर्तन नि:शुल्क देती हैं। खास बात यह है कि बर्तन बैंक में प्लास्टिक का कोई भी सामान यूज नहीं होता है। उनके इस काम में अशोक पटेल, रमनदीप अहलूवालिया, कल्पना सिंह और योगेश गुड्डू सक्सेना का विशेष सहयोग रहा है।
इला मिड्ढा, श्वेता शर्मा, डॉ. मधुलिका दीक्षित और स्मिता पटेल ने बताया कि बर्तन बैंक खुलने के बाद से डिस्पोजल, थर्माकोल की प्लेट और प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का उपयोग काफी हद तक बंद हो गया है। वे अपने घर से ही बर्तन बैंक संचालित कर रही हैं।
उनके इस कार्य से पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है। कोरोना वायरस के चलते सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाता है। बर्तन देने से पहले वे सामने वालों को इतना जरूर कहते हैं कि बर्तन अच्छी तरह साफ करके वापिस करें, ताकि किसी को परेशानी न हो।
9 नवंबर को होगा फाइनल मिताली राज, स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर को मिली कप्तानी मुम्बई : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने वुमन्स टी-20 चैलेंज यानी महिलाओं के आईपीएल का शेड्यूल घोषित कर दिया है। टूर्नामेंट में 3 टीमों सुपरनोवास, वेलोसिटी और ट्रेलब्लाजर्स के बीच फाइनल समेत 4 मुकाबले होंगे। फाइनल 9 नवंबर को खेला जाएगा। हरमनप्रीत कौर को सुपरनोवाज और मिताली राज को वेलोसिटी का कप्तान बनाया गया है। ट्रेलब्लाजर्स की कमान स्मृति मंधाना संभालेंगी। पहला मैच डिफेंडिंग चैम्पियन सुपरनोवाज और रनरअप रही वेलोसिटी के बीच 4 नवंबर को खेला जाएगा।
टी-20 चैलेंज का शेड्यूल
तारीख मैच समय
4 नवंबर सुपरनोवास vs वेलोसिटी शाम 7.30 बजे
5 नवंबर वेलोसिटी vs ट्रेलब्लाजर्स दोपहर 3.30 बजे
7 नवंबर ट्रेलब्लाजर्स vs सुपरनोवास शाम 7.30 बजे
9 नवंबर फाइनल शाम 7.30 बजे थाईलैंड की नाथाकन पहली बार टूर्नामेंट खेलेंगी
तीनों टीम में भारतीय खिलाड़ियों के अलावा इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश न्यूजीलैंड के खिलाड़ी भी शामिल होंगे। थाईलैंड की नाथाकन चानथाम पहली बार टूर्नामेंट खेलेंगी। नाथाकन चानथाम को ट्रेलब्लेजर्स की टीम में शामिल किया गया है। बिग बैश लीग और वुमन्स चैलेंजर्स के शेड्यूल में टकराव की स्थिति बनी है। ऐसे में बिग बैश लीग खेलने वाले प्लेयर टी-20 चैलेंजर्स में नहीं खेलेंगे। अक्टूबर के तीसरे हफ्ते यूएई जा सकती हैं टीमें
सूत्रों के मुताबिक, यदि हेल्थ से जुड़े नियमों में बदलाव नहीं किए गए, तो तीनों टीमें अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में यूएई रवाना हो सकती हैं। उन्हें वहां 6 दिन के लिए क्वारैंटाइन रहना पड़ेगा। 2018 में शुरू हुआ टी-20 चैलेंज
वुमन्स टी-20 चैलेंज पहली बार 2018 में खेला गया था। तब एक ही मुकाबला हुआ था, जिसमें सुपरनोवाज ने ट्रेल ब्लेजर्स को हराया था। 2019 में भी बीसीसीआई ने आईपीएल के दौरान महिलाओं की तीन टीमों के बीच 4 टी-20 मैच कराए थे। तब तीसरी टीम वेलोसिटी की एंट्री हुई थी। महिला टी-20 चैलेंज 2020 के लिए तीनों टीमें: सुपरनोवाज: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), जेमिमा रोड्रिग्स , चमारी अट्टापट्टू, प्रिया पुनिया, अनुजा पाटिल, राधा यादव, तान्या भाटिया (विकेटकीपर), शशिकला श्रीवर्धने, पूनम यादव, शकीरा सैल्मन, अरुंधती रेड्डी, पूजा कुमारी, वस्त्रकार, आयुषी सोनी, अयाबोंगा खाका, मुस्कान मलिक। ट्रेलब्लाजर्स: स्मृति मंधाना (कप्तान), दीप्ति शर्मा (उपकप्तान), पूनम राउत, ऋचा घोष, डी हेमलता, नुजहत परवीन (विकेटकीपर), राजेश्वरी गायकवाड़, हरलीन देओल, झूलन गोस्वामी, सिमरन दिल बहादुर, सलमा खातून, सोफी एक्लेस्टोन, नाथाकन चानथाम, डींड्रा डॉटिन, काशवी गौतम। वेलोसिटी: मिताली राज (कप्तान), शिफाली वर्मा, वेदा कृष्णमूर्ति, सुषमा वर्मा (विकेटकीपर), एकता बिष्ट, मानसी जोशी, शिखा पांडे, देविका वैद्य, दिव्यदर्शिनी, मनाली दक्षिणी, लेग कास्पेरेक, डेनियल वाइट, सुन लुस, जहांआरा आलम, एम अनाग शामिल है।