Friday, April 10, 2026
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पुष्पम की ‘प्लूरल्स पार्टी’ ने चुनाव प्रचार के लिये अपनायी ‘खोंयछा’ परंपरा

पटना : अखबारों में इश्तेहार के जरिए बिहार की राजनीति में दस्तक देने और स्वयं को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने वाली ‘प्लूरल्स पार्टी’ की प्रमुख पुष्पम प्रिया चौधरी चुनाव प्रचार के लिये ‘खोंयछा’ परंपरा के जरिये मतदाताओं से जुड़ रही है और हर परिवार से कपड़े का एक छोटा टुकड़ा, एक मुठ्ठी अनाज और एक रुपया माँग रही हैं। लंदन स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स से पढ़ाई करने वाली पुष्पम ने अपने चुनाव प्रचार के इस अभियान का नाम ‘बिहार का खोंयछा’ रखा है । पुष्पम की प्लूरल्स पार्टी अपने अभियान के दौरान एक ओर बिहार में कृषि क्रांति, औद्योगिक क्रांति और नगरीय क्रांति का खाका पेश करके युवाओं एवं पढ़े लिखे तबके तक पहुंचने का प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर ‘खोंयछा’ अभियान के जरिये महिलाओं को जोड़ रही हैं । गौरतलब है कि मिथिला में ‘खोंयछा’ को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है । बेटियों के घर से बाहर जाने या कहीं से घर आने पर उन्हें ‘खोंयछा’ देने की परंपरा है । माना जाता है इससे घर में सुख-समृद्धि आती है । ‘खोंयछा’ में अन्न का दाना और एक रुपए का सिक्का काफी अहम होता है। पुष्पम बिहार के जदयू नेता रहे और पूर्व विधान पार्षद विनोद चौधरी की पुत्री हैं ।

बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी प्लूरल्स पार्टी ने प्रथम चरण में 35 उम्मीदवार उतारे हैं । उनका कहना है कि सभी लोग नए हैं, लेकिन ऊर्जावान हैं । उनमें जीतने का जज़्बा है और उससे भी महत्वपूर्ण बिहार को बदलने का संकल्प है । वह खुद पटना की बांकीपुर सीट और मधुबनी की बिस्फी सीट से चुनाव लड़ रही हैं । मधुबनी ज़िले का बिस्फी क्षेत्र, मैथिली कवि- महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली है । ‘प्लूरल्स पार्टी’ के प्रत्याशियों के धर्म के कॉलम में बिहारी और जाति की जगह उनका पेशा लिखा है । प्लूरल्स पार्टी ने जिनको प्रत्याशी बनाया है, उनमें ज्यादा डॉक्टर, इंजीनियर और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं । प्लूरल्स की टीम जिस तरह से काम कर रही है, उसको देखते हुए मतदाता उनके, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मॉडल को अपनाने की चर्चा कर रहे हैं । बिहार की मुख्यमंत्री बनने पर अगले 10 वर्षों में प्रदेश को देश का सबसे विकसित राज्य बनाने का दावा करने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी ने ‘भाषा’ से कहा कि वह नहीं चाहती कि उनकी पार्टी की तुलना किसी और दल से की जाए ।
पुष्पम प्रिया ने मार्च के महीने में अपने जनसंपर्क अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से की थी । उनका कहना है कि वह राज्य के विकास के लिए सकारात्मक राजनीति करेंगी। पुष्पम प्रिया चौधरी ने अपने फेसबुक पेज पर मतदाताओं का आह्वान करते हुए नारा दिया है, ‘‘आइए 2020 चुनाव में बिहार बदल ही देते हैं, हमेशा के लिए! ’’ बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बनाए गए फेसबुक पेज को उन्होंने नाम दिया है, ‘‘लेट्स ओपन बिहार : थर्टी ईयर्स आफ लॉकडाउन’’।

‘घर से काम’ नीति का विस्तार करेगा माइक्रोसॉफ्ट

 कुछ कर्मचारियों के लिए इसे स्थायी बनाएगा

ह्यूस्टन : अमेरिका के सिएटल स्थित दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी ‘घर से काम’ नीति का विस्तार करने और कुछ कर्मचारियों के लिए इसे स्थायी बनाने का निर्णय लिया है। कम्पनी ने नया ‘‘वृहद कार्यस्थल’’ दिशानिर्देश जारी किया है जिसमें एक खाका पेश किया गया है किस प्रकार कर्मचारी विभिन्न जगहों पर रहते हुए अधिक लचीले तरीके से कामकाज कर सकते हैं और यहां तक कि वे देश में किसी अन्य स्थान पर भी जा सकते हैं । कंपनी ने कहा है कि वह महामारी के दौरान बदलती जरूरतों को समायोजित करने के लिए काम करती रहेगी। माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारियों को उनके कामकाजी सप्ताह के 50 प्रतिशत से कम समय के लिए घर से स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति देगा। इसके साथ ही प्रबंधक दूरस्थ इलाकों से स्थायी रूप से काम करने को मंजूरी दे सकेंगे। माइक्रोसॉफ्ट की कर्मचारियों के मामलों को देखने वाली मुख्य अधिकारी कैथलीन होगन ने आधिकारिक माइक्रोसॉफ्ट ब्लॉग पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हम, कारोबारी जरूरतों को संतुलित करते हुए हर व्यक्ति की कार्य शैली के अनुसार जहां तक संभव होगा, उसका समर्थन करने का प्रयास करेंगे । साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि हम अपनी संस्कृति के अनुसार जीवन जीते रहें ।’’ माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला ने कहा कि उनका ध्यान तीन प्रमुख विचारों पर केंद्रित हैं कि महामारी के बीच काम की प्रकृति कैसे बदल रही है: सहयोग में काम कैसे होता है, कम्पनियों के अंदर कैसे सीखा जाता है और यह सुनिश्चित करना कि कर्मचारी कैसे बाहर परेशान न हों। कम्पनी ने यह भी कहा कि अधिकांश कर्मचारियों के कामकाजी समय में लचीलापन आया है।

 बच्चों के पास नहीं थे ऑनलाइन क्लास के मोबाइल फोन, शिक्षकों ने की मुफ्त व्यवस्था

मुम्बई : कोरोना के संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए ऑनलाइन क्ला स को बढ़ावा दिया गया है। हालांकि ऐसे परिवार के बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में ऐसे बच्चों के लिए मुम्बई म्यूनिसिपल एंड प्राइवेट उर्दू टीचर्स यूनियन मोबाइल फोन पुस्तकालय की शुरुआत की है। यूनियन ने कक्षा 1-10 के छात्रों के लिए इमामवाड़ा क्षेत्र में एक मुफ्त मोबाइल फोन पुस्तकालय शुरू किया है। आर्थिक रूप से कमजोर छात्र, जो मोबाइल फोन नहीं खरीद सकते थे, वे अब यहां ऑनलाइन कक्षाओं में भाग ले रहे हैं। कक्षा में अब तक 22 छात्र शामिल हो चुके हैं।
केंद्र प्रभारी शाहिना सईद ने कहा कि कुछ छात्रों के पास या तो मोबाइल फोन नहीं थे या उनके परिवार में केवल एक मोबाइल फोन था। तो हमने उनके लिए ये व्यवस्था की है। उन्हें ऑनलाइन पढ़ाया गया और उनका पाठ्यक्रम पूरा किया जा रहा है। कक्षाएं सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक आयोजित की जाती हैं। कोरोना निर्देशों का पालन किया जा रहा है।

शेरशाहबादी मुस्लिम : जहाँ चाहकर भी बेटियों के लिए रिश्ता नहीं खोज पाते परिवार

सुपौल : मस्तारा बानो अगले साल 50 की हो जाएंगी। लेकिन, आज भी वो अपनी उम्र 32 साल ही बताती हैं। इस उम्मीद के साथ कि शायद ऐसा करने से ही सही, उनके लिए शादी का कोई रिश्ता आ जाए। जीवन के 50 बसन्त अकेले ही गुजार देने वाली मस्तारा को डर है कि अगर वे अपनी असल उम्र बताएंगी तो शादी से जुड़ी उनकी आखिरी उम्मीद भी टूट जाएगी। उम्र के इस मुहाने पर खड़ी मस्तारा इसी तरह शादीशुदा जिंदगी में दाखिल होने के अपने सपने को जिंदा रखे हुए हैं। मस्तारा जिस पंचायत में रहती हैं वहां सैकड़ों महिलाओं का दर्द भी बिलकुल उनके जैसा ही है। पूरी जिंदगी कुंवारी रहना ही इन महिलाओं की नियति है। यह फैसला अगर इन महिलाओं ने अपनी इच्छा से लिया होता तो इसमें कुछ भी गलत नहीं था।
लेकिन, शेरशाहबादी मुस्लिम समुदाय की परंपराएं ही कुछ ऐसी हैं कि इनमें लगभग हर दस में से दो लड़कियां ताउम्र अविवाहित ही रह जाती हैं। बिहार के सुपौल जिले में नेपाल सीमा से बमुश्किल दस किलोमीटर की दूरी पर कोचगामा पंचायत है। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में ज्यादातर मुस्लिम शेरशाहबादी समुदाय के ही हैं। इस पंचायत के साथ ही सीमांचल के कई दूसरे जिलों और नेपाल में भी शेरशाहबादी समुदाय के लोग रहते हैं। कोचगामा के ही रहने वाले महबूब आलम बताते हैं, ‘शेरशाहबादी समुदाय में लड़की के परिजन न तो अपनी बेटी के लिए रिश्ता खोजते हैं और न ही किसी से ऐसा करने को कह सकते हैं। अगर वे ऐसा करते हैं तो यह समझा जाता है कि लड़की में जरूर कोई दोष है जो खुद ही उसके लिए लड़का तलाश रहे हैं। तब लड़की की शादी और भी मुश्किल हो जाती है।’वे आगे कहते हैं, ‘लड़की वाले सिर्फ रिश्ता आने का इंतजार ही कर सकते हैं। इसलिए जिन लड़कियों के लिए रिश्ता आता है उनकी तो शादी हो जाती है, लेकिन जिनके लिए नहीं आता वो ताउम्र सिर्फ रिश्ते का इंतजार ही करती रह जाती हैं।’
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अबु हिलाल बताते हैं, ‘महिलाओं के अविवाहित रह जाने की यह समस्या तब से मजबूत हुई जब से लोग दहेज के लालच में फंसना शुरू हुए। अब उन्हीं लड़कियों की शादी आसानी से होती है जो या तो खूबसूरत हों या जिनके पास दहेज देने के लिए पैसा हो। जिन लड़कियों का कद कुछ कम है, रंग गोरा नहीं है या नैन-नक्श अच्छे नहीं हैं उनकी शादी नहीं हो पाती। कई बार ऐसा भी होता है कि दो-तीन बहनों में से लड़के वाले छोटी बहन को पसंद कर लेते हैं। ऐसे में बड़ी लड़की से पहले छोटी की शादी हो जाती है और फिर बड़ी की शादी लगातार मुश्किल होती चली जाती है।’
शेरशाहबादी समुदाय में अविवाहित महिलाओं की कुल संख्या कितनी है, इसका कोई ताजा आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन, हाल ही में आई वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र की चर्चित किताब ‘रुकतापुर’ के अनुसार, सिर्फ कोचगामा पंचायत में ही कुछ साल पहले 35 साल से ऊपर की अविवाहित महिलाओं की संख्या 140 से ज्यादा थी। कोचगामा पंचायत के दो बार मुखिया रह चुके और साल 2010 में कांग्रेस से विधानसभा चुनाव लड़ चुके शाह जमाल उर्फ लाल मुखिया बताते हैं कि कुछ साल पहले इस समस्या को सुलझाने के लिए पूरे समुदाय ने एक बैठक बुलाई थी। करीब सात साल पहले भारत और नेपाल के अलग-अलग इलाकों में रह रहे शेरशाहबादी समुदाय के लोगों ने इस बैठक में शामिल होकर तय किया था कि अब लड़की वालों को भी रिश्ता खोजने या इसकी पहल करना शुरू कर देना चाहिए। लाल मुखिया कहते हैं, ‘इस पहल से काफी असर हुआ। अब ऐसी लड़कियों की संख्या कम है, जिनकी शादी नहीं हो रही हो। अब तो लड़कियां खुद भी लड़के को पसंद कर लेती हैं और उनकी शादी हो जाती है।’ लाल मुखिया की इस बात से गाँव के अन्य लोग सहमत नहीं हैं। अबु हिलाल कहते हैं, ‘उस बैठक के बाद भी कुछ नहीं बदला है। लोग आज भी लड़की का रिश्ता लेकर नहीं जाते।’
आज भी समुदाय की लड़कियों के लिए घर से निकलने पर सौ पहरे हैं, उन्हें काम करने या मजदूरी करने की भी इजाजत नहीं है और वे पढ़ाई भी सिर्फ मदरसों में ही कर सकती हैं। द हंगर प्रोजेक्ट के लिए काम करने वाली शाहीना परवीन ने इन महिलाओं की आवाज कई बार उठाई है। शाहीना परवीन मानती हैं कि इस समस्या से निकलने के लिए जो कदम उठाए जाने चाहिए, उनमें से एक अहम कदम लड़कियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना भी है। वे कहती हैं, ‘ये लड़कियां अगर बाहर निकलेंगी, अच्छी पढ़ाई करेंगी और नौकरियां करने लगेंगी तो निश्चित ही इस समस्या से भी निकल जाएंगी।’
लेकिन, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मुस्लिम समुदाय में ऐसा होना बहुत मुश्किल है। वहां तमाम मौलवी लड़कियों को मदरसों तक ही सीमित रखने की वकालत करते हैं और लोग उन्हीं की बात मानते हैं। बल्कि लड़कियों पर भी मौलवी के उपदेशों का ही सबसे मजबूत असर रहता है।
जो लड़कियां अविवाहित रह जाती हैं वो अपनी पैतृक सम्पत्ति पर भी दावा नहीं कर पाती। ऐसे में वो लड़कियां हमेशा अपने भाई पर बोझ समझी जाती हैं और माना जाता है कि वे भाई के रहम पर ही पल रही हैं और भाई उन्हें साथ रखकर उन पर अहसान कर रहा है।’बिहार में जब चुनाव होने जा रहे हैं तो शेरशाहबादी समुदाय की इन हजारों अविवाहित महिलाओं का मुद्दा किसी के लिए भी चर्चा का विषय नहीं है। जिस विधानसभा क्षेत्र में इस समुदाय की बहुलता है, वहां भी इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं है।
शाहीना परवीन कहती हैं, ‘इनमें से अधिकतर महिलाएं कुपोषण और एनीमिया से पीड़ित होती हैं क्योंकि बेहद मुश्किल से इन्हें दो वक्त का खाना नसीब होता है। रमजान में जो लोग जो दान-धर्म करते हैं उसके सहारे ही इनका पेट भरता है। पॉलिसी के स्तर पर आज तक इनके लिए कुछ नहीं किया गया। विधवा महिलाओं को जो पेंशन मिलती है ये महिलाएं उसकी भी हकदार नहीं होती जबकि देखा जाए तो इनका पूरा जीवन विधवा महिलाओं की तरह ही अकेला और बेसहारा रहकर बीतता है।’
ये अविवाहित महिलाएं अपने हालात के लिए अपनी किस्मत के अलावा किसी और को दोषी नहीं मानती। लेकिन, वे सरकार से इतना जरूर चाहती हैं कि जब पूरे देश को आत्मनिर्भर बनाने की बात हो रही है और आत्मनिर्भर भारत’ का नारा जगह-जगह गूंज रहा है तो सरकार इन्हें भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कोई पहल करे।

(साभार – दैनिक भास्कर)

देवी

गीता दूबे

कैसे करूं आराधन देवी

कैसे तुझे मनाऊं,

सूखा चंदन, बिखरी रोली

कैसे तुझे सजाऊं।

दानव का संहार करे तू

मानव का कल्याण,

सबकी झोली तू भरती है

दे करूणा का दान।

देव दनुज का फर्क मिटा अब

कैसे तुझे बताऊं,

सूजी आंखें, उखड़ी सांसें

कैसे तुझे रिझाऊं।

मानव ही दानव बन बैठा

मचा है हाहाकार

भूल गया जग की मर्यादा

औ जीवन का सार

ऐसे रौरव नरक में माता

कैसे तुझे बुलाऊं।

सूखे फूल, टूटी माला

अब क्या तुझे चढ़ाऊं।

मन बेकल, तन घायल देवी

नयन से बहती धार,

कौन सुने फरियाद हमारी

तुझ पे टिकी है आस।

एक बार फिर

बन कर काली

धर ले हाथ कृपाण,

सारे दानव करें समर्पण

या कर उन पर वार।

हर नारी के ह्रदय में कर माँ

साहस का संचार।

मुझको इतना वर दे‌ मैया

मैं दुर्गा बन जाऊं,

हाथ खड्ग लें मैं भी सबको

अपना शौर्य दिखाऊं।

पापमुक्त कर इस धरती को

“गीत” मैया के गाऊं।

तेरा रूप धरूं माँ पहले

फिर मैं तुझे रिझाऊं।

थाल सजाकर पूजा का, माँ

तेरी बलि -बलि जाऊं।

तेरी शक्ति पाकर माता

मैं तुझ सी बन जाऊं।

तभी करूं माँ पूजा तेरी

तब ही तुझे मनाऊं।

तू मुझमें मैं तुझमें मैया

सबको यही बताऊं।

सारे जग का तम हर ले, माँ

ऐसे दीप जलाऊं।

तेरे चरणों में देवी मैं

सारे असुर सुलाऊं।।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कोविड -19 के मरीजों को मेडीबडी देगा अस्पतालों की जानकारी

कोलकाता : कोविड – 19 के मरीजों की बढ़ती संख्या और मरीजों की परेशानी देखकर मेडीबडी नयी सुविधा लाया है।  हॉस्पिटल बेड एविबिलिटी चेकर नामक नया फीचर अब मेडीबडी ऐप पर उपलब्ध होगा जिसमें नजदीकी अस्पतालों की जानकारी भी मिलेगी। ऐप के इस नये फीचर से अस्पतालों में बेड की उपलब्धता, उनका पता भी जाना जा सकेगा। ऐप आईओएस और एन्ड्रॉएड मोबाइल पर डाउनलोड किया जा सकेगा। विस्तृत जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं –

Online Covid Bed Availability checker

‘माँ’ होगी इस बार भवानीपुर 75 पल्ली दुर्गा पूजा की थीम

कोलकाता : महानगर में शारदीय उत्सव की चमक दिखायी देने लगी है और पंडाल सजने लगे हैं। कोविड -19 को देखते हुए सामाजिक दूरी का पालन करते हुए माँ दुर्गा के स्वागत में महानगर सज रहा है। भवानीपुर 75 पल्ली का पंडाल ऐसा ही पंडाल है जिसका उद्धघाटन हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया। पिछले कुछ वर्षों में यह पंडाल काफी चर्चा में रहा है और इस बार पूजा की थीम ‘माँ’ है।

क्लब के सचिव सुबीर दास ने कहा कि 55वें वर्ष की व्यापक सफलता के बाद 56वें वर्ष में भी टीम में उत्साह है। इस बार अनिमेष दास नामक युवा कलाकार को दायित्व दिया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर पूजा के आयोजन को आगे ले जाने के लिए लन्दन शारद उत्सव (एलएसयू) से समझौता किया गया है।

हेल्दी होम मेड माइक्रोवेव ब्राउनी

रसोईघर में शुभजिता की नयी पेशकश। क्रेजी फॉर चॉकलेट्स में हम आपके लिए ला रहे हैं, व्यंजनों की अलग – अलग श्रृंखला. और शुरुआत मीठे से यानी माइक्रोवेव ब्राउनी से…तो दावत है –

सामग्री – गेहूं का आटा 250 ग्राम,आधा कप कोको पाउडर, आधा कप पाउडर शुगर, आधा कप ब्राउन कैस्टर शुगर
आधा कप मिल्क पाउडर, सिट्रिक ऐसिड 1 चुटकी, बेकिंग पाउडर 2 टी स्पून, बेकिंग सोडा 1 टी स्पून, सॉल्ट 1/2 टी स्पून, वनीला एसेंस 6 बूंद, मिल्क 1और 1/2 कप, तेल 4 टेबल स्पून

विधि – सभी सूखी सामग्री को एक साथ मिला लें अब दूध और तेल को भी मिक्स कर लें। इस मिश्रण को माइक्रोवेव सेफ बाउल में 4 मिनट के लिए माइक्रोवेव में हाई पावर पर पकाएं। गरमा गरम आइसक्रीम के साथ सर्व करें और पूरे परिवार के साथ आनंद लें।

(रेसिपी सौजन्य – क्रेजी फॉर चॉकलेट)

 

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