Friday, April 10, 2026
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शुभादि बाजार

शुभ सृजन नेटवर्क के कई उद्देश्यों में से एक प्रमुख उद्देश्य है – भारतीय हस्तशिल्प और कारीगरों को प्रोत्साहित करना। हमारे देश में हुनर तो है…माँग भी है औऱ बाजार भी है मगर नहीं है तो पहुँच…। इस पहुँच के न होने के कारण भी बहुत हैं…उसमें से एक अर्थ का अभाव तो है ही…पर मगर उससे भी बड़ा कारण है भाषा और अच्छी तरह प्रस्तुत न हो पाना। इस लिहाज से कहीं न कहीं एक प्रशिक्षण की जरूरत है जिससे कारीगर हो या व्यवसायी हो या घर से काम कर रही स्त्रियाँ या विद्यार्थी ही हों तो अपनी बात कह सकें…अपना सामान दिखा सकें…बेच सकें…आज सोशल मीडिया से बहुत मदद मिली है…फेसबुक पेज की कमी नहीं है औऱ न ही व्यावसायिक फेसबुक पेज की मगर यह तकनीक भी तो सबके हाथ में नहीं है…तो क्या किया जाए….हमारा आह्वान है कि आप ऐसे लोगों की आवाज बनें और हाथ बनें…खासकर युवा वर्ग जो बहुत कुछ कर सकता है। शुभादि बाजार में एक सामान्य शुल्क देकर आप अपने उत्पाद का प्रचार कर सकते हैं और हमारा प्रयास होगा कि हम आप तक सामान पहुँचा सकें मगर इसके लिए शुल्क अलग से लग सकते हैं। अगर आप एक सामान्य अनुबन्ध के तहत हमारे साथ काम करने के इच्छुक हैं या अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो हम आपकी मदद कर सकते हैं। शुभ सृजन सम्पर्क हिन्दी इन्फो डायरेक्टरी में पंजीकरण कर आप अपनी जानकारी अपलोड करते हैं तो आपको वरीयता और छूट तो मिलेगी ही…आपके या आपके ब्रांड के बारे में जानना लोगों के लिए आसान होगा। यह काम हम तीन रूपों में करेंगे –

शुभादि बाजार से सामान खरीदने के इच्छुक हैं तो हमें कमेन्ट्स बॉक्स में बता दें….या नीचे दिये गये मेल पर मेल कर दें।  हम आपकी बात सम्बन्धित उद्यमी तक पहुँचा देंगे। 

जरूरतमंद कारीगर – वोकल फॉर लोकल सिर्फ उत्पाद बनाने से सम्भव नहीं है…उसे बाजार तक पहुँचाना भी उतना ही जरूरी है। सोशल मीडिया की ताकत ने हाल ही यह किया है…आप अपने मोबाइल की मदद से बहुतों की सहायता कर सकते हैं..कैसे.. कारीगर और उसके सम्पर्क से जुड़ी जानकारी लीजिए…उसके 4-5 उत्पादों की तस्वीर और जानकारी लीजिए और अपलोड कर दीजिए शुभजिता पर…आपकी एक कोशिश किसी के घर को रोशन कर सकती है। दुनिया भर में न सही, उस शहर के लोग तो आपके जरिए उनकी मदद कर ही देंगे। ये आपकी एक स्टोरी होगी…शुभजिता के लिए जो आपके नाम औऱ आपकी तस्वीर के साथ जाएगी।

(सेवा निःशुल्क)

इसके अतिरिक्त इच्छुक युवा…अनुबन्ध के आधार पर हमसे इसी प्रकार जुड़ सकते हैं और अर्जन के अवसर भी प्राप्त कर सकते हैं।

बाकी सभी के लिए उत्पाद प्रदर्शन शुल्क (प्रोडक्ट डिस्प्ले चार्ज ) है। नये या उभरते उद्यमी हमसे सम्पर्क कर सकते हैं..

इसके अतिरिक्त भविष्य में हमारी योजनाएं बहुत सी हैं…मगर फिलहाल इतना ही..

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विस्तृत जानकारी के लिए कृपया इस लिंक पर जायें

(भविष्य में कीमतों तथा शुल्क में परिवर्तन सम्भव)

मौन-गूँज” हिन्दी भाषा की अंतर्राष्ट्रीय वेब पत्रिका तथा वेबसाइट का लोकार्पण

मौन-गूँज” हिन्दी भाषा की अंतर्राष्ट्रीय वेब पत्रिका (साहित्य एवं सामाजिक सरोकारों की त्रैमासिकी) तथा मौन गूँज वेबसाइट का विधिवत रूप से विमोचन दिनांक गत 18 अक्टूबर को हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक तरीके से संस्थापक एवं मुख्य सम्पादक डॉ.मीनाक्षी सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा डॉ. प्रतिभा गर्ग की सरस्वती वंदना से किया गया। तत्पश्चात सभी अतिथियों ने पत्रिका का मुखपृष्ठ दिखाते हुए विमोचन का कार्य सम्पन्न किया।
विमोचन कार्यक्रम के शुभारंभ में मुख्य संपादक एवं संस्थापक डाॅ. मीनाक्षी सिंह  ने विशिष्ट अतिथियों का विस्तृत परिचय देते हुए भव्य रूप से उनका स्वागत किया। अपने स्वागत वक्तव्य में ही उन्होंने पत्रिका के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कहा कि इस पत्रिका के दो मुख्य उद्देश्य हैं- “हिन्द के साथ, हिंदी का विकास”, साथ ही, समाज के मौन, दलित, प्रताड़ित वर्ग की पीड़ा को मुखर करने के लिए एक सशक्त तथा समर्थ कलमकार वर्ग का संगठन जो सदियों से दबे-कुचले मौन को एक शाश्वत गूँज में परिवर्तित कर सके। समाज के दबे एवं शोषित वर्ग के विचारों, भावों, वेदनाओं और संवेदनाओं को मुखर एवं गूँजायमान करने का कार्य इस पत्रिका के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “मौन सृजन है, गूँज अभिव्यक्ति है”, उन्होंने बताया कि कोई भी संस्थान किसी एक आंख का स्वप्न नहीं होता अपितु कई स्वप्नों का विराट, विशाल पुंज होता है।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देवेन्द्र कुमार बहल, प्रधान संपादक, अभिनव इमरोज, नयी दिल्ली ने डॉ.मीनाक्षी सिंह जी को प्रसिद्ध संस्थान “हिंदी भाषा सहोदरी” द्वारा प्रदत्त की गयी उपाधि साहित्य व्योम की “परी” की सार्वजनिक रूप से घोषणा की। इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथि डाॅ.अकेला भाई, सचिव, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि यह पत्रिका समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करना चाहती है जिसकी आवाज सदियों से मौन रही है, उन्होंने मुख्य संपादक को हरसंभव सहायता का आश्वासन देते हुए कहा कि साहित्य के विकास में पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ी रहेगी।
इस कार्यक्रम में माननीय अजय भाटिया, अपर पुलिस अधीक्षक ने भी विचार व्यक्त करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया कि साहित्य की सेवा करते हुए पत्रकारिता में किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पुलिस की नौकरी के साथ-साथ साहित्य-जगत में पत्रिका के संपादन एवं संचालन की बारीकियों को साझा किया।
इस कार्यक्रम में डाॅ. रचना निगम, संपादक एवं प्रकाशक, नारी अस्मिता, बड़ौदा, ने कहा कि यह गौरव का क्षण है कि आज हिन्दी साहित्य जगत में अंतर्राष्ट्रीय वेब पत्रिका का शुभारंभ किया गया वह भी शोषित तथा प्रताड़ित वर्ग के हित का प्रण लेकर। उन्होंने कहा कि “मौन-गूँज” का नाम ही काफी है इसके उद्देश्य को प्रकट करने के लिए। समाज के उस मौन वर्ग की आवाज को गूँजायमान करना अपने आप में परिलक्षित करता है कि पत्रिका की क्या भूमिका रहने वाली है। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर शैलेन्द्र कुमार सिंह, नेहु, शिलांग ने भारत के विभिन्न प्रांतों में हिंदी के स्वरूपों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए “मौन गूँज” के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा पत्रिका की पंच लाइन “हिन्द के साथ, हिंदी का विकास” पर विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की।
विशिष्ट अतिथियों में “मौन गूँज” के संरक्षक एवं संपादक माननीय श्री प्रकाश सिंह का रिकॉर्डेड वक्तव्य कार्यक्रम में प्रेषित किया गया।  कार्यक्रम में बोलते हुए डाॅ.घनश्याम भारती जी, अतिथि संपादक,मौन गूँज, ने पत्रिका के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम का संचालन कुशल मंच संचालक तथा प्रसिद्ध लेखिका अरुणा उपाध्याय ने “मौन गूँज” की प्रतिभाशाली सदस्य तथा लेखिका निधि अग्रवाल तथा संध्या श्रीवास्तव के सहयोग से किया। उनकी मधुर वाणी एवं प्रभावी मंच संचालन कला से सभी अतिथिगण बहुत प्रभावित हुए । कार्यक्रम में संपादक एवं संस्थापक के “मौन गूँज” की व्याख्या “मौन सृजन है, गूँज अभिव्यक्ति है, मौन स्त्रोत है, गूँज शक्ति है” ने हर वक्ता तथा श्रोता को बहुत ही गहरे तक प्रभावित किया। यह मात्र शब्दों का समूह नहीं है अपितु यह पंक्तियाँ दीपक बन पत्रिका के मार्गदर्शक सिद्धान्त के रुप में संपादन-मंडल एवं रचनाकार सदस्यों को अनवरत प्रेरित करते रहेंगे ।
सभी अतिथियों के जवाबी वक्तव्य के रूप में अपनी बात रखते हुए डॉ. मीनाक्षी सिंह ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में, पत्रिका में शामिल किए गए रचनाकारों को प्रकाशित रचनाओं का पाठ करने के लिए आमंत्रित किया गया जिनमें मुकेश पोपली, छाया वर्मा, सुषमा कनुप्रिया, निधि अग्रवाल, डॉ प्रतिभा गर्ग जी, संध्या श्रीवास्तव, बिनोद कुमार मिश्र तथा कल्पना त्रिपाठी उपस्थित रहे तथा अपने रचना पाठ के माध्यम से उन्होंने पाठकों का ध्यान आकर्षित किया।
अंततः निधि अग्रवाल  तथा संध्या श्रीवास्तव के सहयोग से अरुणा उपाध्याय ने समाप्ति की ओर बढ़ते हुए कार्यक्रम का सार ज्ञापित किया एवं कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की तथा पाठकों से यह निवेदित किया कि मौन गूँज की वेबसाइट http://moungoonj.com/ पर जाकर पत्रिका ज़रूर पढ़ें तथा प्रवेशांक पर अपनी प्रतिक्रिया दें।

 

शुभजिता रसोईघर प्रतियोगिता – थीम – व्रत की थाली – परिणाम

सबसे पहले तो शुभजिता रसोईघर प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए धन्यवाद। आपकी प्रतिक्रिया ने हमारा उत्साह बढ़ाया और हमारी निर्णायक निशा सलूजा ने इस थीम के लिए जो विजयी प्रविष्टियाँ चुनीं, वह आपके सामने है। इस थीम के लिए हमें जो प्रविष्टियाँ मिलीं…उसमें से कुछ अधूरी सी रहीं और प्रतियोगिता में शामिल नहीं की गयीं। प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अब से वे अपनी व्यंजन विधि के साथ उसकी और अपनी तस्वीर भेजना न भूलें। तस्वीर न रहने पर आपकी प्रविष्टि को स्वीकार कर पाना शुभजिता के लिए सम्भव नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही अपने बारे में, अपने किसी हुनर, योग्यता, रुचि की जानकारी भी दें। बहरहाल शुभजिता रसोईघर की पहली थीम व्रत की थाली थी और इस थीम की विजेता हैं – निभा सिंह, प्रथम उपविजेता हैं सुधा ओझा और द्वितीय उप विजेता हैं…शिखा राय…आप सभी को बहुत बधाई और धन्यवाद

निभा सिंह

विजेता – निभा सिंह

व्यंजन – मालपुआ

  • सामग्री – 1 कप गेहूं का आटा या मैदा, 2-3 केला मसला हुआ, 1 चम्मच सौंफ पिसी हुई, 3-4 इलायची पिसी हुई, 1 बड़ा चम्मच कद्दूकस किया नारियल, 3-4 छोटा चम्मच चीनी, 3 बड़े चम्मच दूध, आवश्यकतानुसार घी

विधि – मालपुआ बनाने के लिए सबसे पहले दूध में चीनी डालकर एक घंटे के लिए रख दें। तब तक एक बर्तन में आटा छानकर, इसमें मसला हुआ केला ,सौंफ, इलायची और कद्दूकस नारियल डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें।  जब दूध में चीनी घुल जाए, तो चीनी-दूध के घोल को आटे के मिश्रण में डालकर इसे एक चम्मच से फेंटते हुए मिलाएं।

इस तरह आटे का न ज्यादा गाढ़ा, न ज्यादा पतला पेस्ट तैयार कर लें. यदि पेस्ट अच्छी तरह नहीं बना, तो इसमें थोड़ा पानी डालकर फेंट लें.। अब एक कड़ाही में घी डालकर, उसे गैस पर गर्म करने रखें।  घी गर्म होने के बाद गैस की आंच मध्यम करके, एक बड़े चम्मच में आटे का पेस्ट लेकर, उसे गोल पूरी के आकार में घुमाते हुए घी में डालें और पुआ फ्राई करें। मालपुआ दोनों तरफ से पलट कर लाल होने तक सेकें, इसी तरह सभी पुए बनाएं। और फिर दो तार की चाशनी बनाकर उसमें यह मालपुए टिप कर दे। रबड़ी के साथ मालपुए को माँ दुर्गा के भोग के रूप में प्रयोग कर सकते है ।

 

सुधा ओझा

प्रथम उपविजेता – सुधा ओझा

व्यंजन –  वेजी पनीर हनी टिक्का
सामग्री – 1 कप पनीर के चौकोर टुकड़े, 1 शिमला मिर्च, 1 सेब, 1खीरा (छिलके के साथ) , 1 चम्मच मधु और नींबू का रस स्वादानुसार, 1 बड़ा टमाटर, 1 छोटा चम्मच काली मिर्च, 2-3 हरी मिर्च, 1बड़ा चम्मच घी, सफेद तिल आवश्यकतानुसार, सेंधा नमक इच्छानुसार
विधि – सफेद तिल को हल्का भूनकर निकाल लें। कड़ाही गर्म करें और घी डालें। गर्म होने पर पनीर के टुकड़े डालें। काजू को हल्का सुनहरा होने तक भून लें।

इसके बाद शिमला मिर्च, सेब, खीरा, अखरोट डालकर चला लें। कटी हरी मिर्च और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह चलाती रहें। आप या सिर्फ मधु या सिर्फ चीनी इस्तेमाल कर सकती हैं। या फिर आधा मधु और आधी चीनी भी डाल सकती हैं। इस पर नींबू का रस डालें। सबसे अन्त में टमाटर डालें पर ध्यान रहे कि वह गले नहीं। नमक के बगैर भी यह व्यंजन काफी स्वादिष्ट लगेगा। अन्त में भुनी हुई सफेद तिल से सजाकर परोसें।

नोट – यह व्यंजन बगैर नमक के भी खाया जा सर आप चाहें तो सेंधा नमक भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

 

 

शिखा राय

द्वितीय उपविजेता – शिखा राय

व्यंजन – मखाने की खीर

सामग्री – 100 ग्राम मखाना, 50 ग्राम घी, 500 ग्राम दूध, 250 ग्राम शक्कर, 2 छोटी इलायची (कुटी हुई)

विधि – पहले मखाने को घी में अच्छी तरह हल्की आँच में 5 मिनट के लिए भून लें। फिर दूध को धीमी आँच पर 10 -15 मिनट के लिए उबालें। फिर उसमें इलायची डालें।

उसके बाद उसमें मखाना डालकर धीमी आँच पर 10 – 15 मिनट पकाएं और फिर उसमें शक्कर डालकर और 10 मिनट तक पकाकर बन्द कर दें। इसे कुट्टु के आटे की पूरी के साथ खाएं।

निशा सलूजा

निर्णायक निशा सलूजा

-शुभजिता रसोईघर प्रतियोगिता की निर्णायक निशा सलूजा वेज होम शेफ हैं। मिस एंस मिसेज बंगाल 2018 की विजेता रह चुकी हैं। बेस्ट फ्रेंड सोसायटी की अम्फान परियोजना की आवाज भी हैं।

 

 

अगली थीम – मिष्ठी यानी बंगाल की मिठाई

 प्रविष्टि भेजने की अन्तिम तिथि – 25 अक्टूबर 2020

कृपया नियम देखें

( प्रतिभागी और व्यंजन की तस्वीर के बगैर भेजी गयी प्रविष्टि स्वीकार नहीं की जायेगी)

नहीं रहे एमपीबीएफएचएसएस के प्रिंसिपल शिक्षाविद् हरबर्ट जॉर्ज

कोलकाता : एम पी बिड़ला फाउंडेशन हायर सेकेंडरी स्कूल, बेहला के प्रिंसिपल शिक्षाविद् हरबर्ट जॉर्ज का निधन हो गया है। वे 75 वर्ष के थे औऱ अपने पीछे पत्नी, बेटे और बेटी को छोड़ गये हैं। भवानीपुर सिमेन्ट्ररी में उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को होगा। हरबर्ट जॉर्ज को उनकी अनुशासनप्रियता के लिए जाना जाता है। वे पिछले 30 साल से एम पी बिड़ला फाउंडेशन हायर सेकेंडरी स्कूल, बेहला से जुड़े रहे और शिक्षण संस्थान को नयी ऊँचाइयों पर ले गये। उनके नेतृत्व में स्कूल ने अकादमिक तथा अन्य गैर शैक्षणिक (को -करिकुलर) गतिविधियों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अलग पहचान बनायी। एमपीबीएफएचएसएस से जुड़ने से पहले हरबर्ट जॉर्ज डॉन बॉस्को (लिलुआ) तथा सेंट आगस्टीन्स डे स्कूल, कोलकाता से जुड़े रहे। वे एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ए एस आई एस सी) के सदस्य भी थे।

माइक्रोमैक्स करेगा नए ब्रांड के साथ धमाकेदार एंट्री

भारतीय कम्पनी माइक्रोमैक्स एक बार फिर से बाजार में एंट्री करने की तैयारी कर रही है। इस बार कम्पनी नए ब्रांड और बिल्कुल नए कलेवर में दस्तक देगी। इसका खुलासा खुद कम्पनी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर किया है। माइक्रोमैक्स भरोसेमन्द ब्रांड रहा है और अब कम्पनी फिर फिर से बाजार में दस्तक देने की तैयारी कर रही हैं। कंपनी ने अपने सब-ब्रांड के नाम का खुलासा भी कर दिया है। माइक्रोमैक्स के सहसंस्थापक राहुल शर्मा ने घोषणा की है कि वह जल्द ही बाजार में ‘In’ ब्रांड को लेकर आने वाले हैं। कंपनी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर राहुल शर्मा ने एक वीडियो शेयर किया है और इस वीडियो में उन्होंने अपने अपकमिंग सब-ब्रांड ‘In’ का खुलासा किया है। साथ ही उसके बॉक्स की फोटो भी शेयर की है।
शेयर किए गए वीडियो में कहा गया है कि कम्पनी ने चाइनीज स्मार्टफोन्स के आने के बाद बाजार में अपना अस्तित्व कहीं खो दिया था। लेकिन अब लोग एक बार फिर से मेड इन इंडिया ब्रांड की ओर रूख कर रहे हैं। ऐसे में माइक्रोमैक्स भी आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा बनने जा रहा है। कम्पनी इस बार बिल्कुल अलग अंदाज में एक नया ब्रांड लेकर आने वाली है।

 

एक नवम्बर से ऑथेंटिकेशन कोड सिस्टम से मिलेगी रसोई गैस

नयी दिल्ली :  रसोई गैस सिलेंडर लेने के लिए अब ओटीपी की जरूरत पड़ेगी क्योंकि 1 नवम्बर से नियम बदल रहे हैं। नये नियम के अनुसार अब किसी भी उपभोक्ता को एलपीजी सिलेंडर बिना ओटीपी के नहीं मिलेगा। होम डिलिवरी के समय आपको वो कोड डिलिवरी ब्वॉय को देना पड़ेगा, उस ओटीपी या कोड के बिना अब गैस की होम डिलिवरी नहीं होगी। सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी मिल रही है कि तेल कंपनियों ने इस नये नियम को लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। इस कोड बेस्ड डिलिवरी सिस्टम का उद्देश्य गैस की हेराफेरी को रोकना है। ओटीपी नियम लागू हो जाने से गैस की चोरी रोकी जा सकेगी। तेल कंपनियों ने इस कोड बेस्ड सिस्टम को डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड नाम दिया है।
सौ स्मार्ट शहरों में होगा लागू
जानकारी के मुताबिक डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड सिस्टम अभी सिर्फ सौ स्मार्ट शहरों में लागू होगा। बताया जा रहा है कि इस सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट पहले से ही जयपुर में जारी है और इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं जिसके बाद इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने की योजना पर काम हो रहा है।
रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जायेगा कोड
नये सिस्टम में उपभोक्ता जब गैस की बुकिंग करेगा तो उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर कोड भेजा जायेगा, जिसे डिलिवरी के वक्त उसे डिलिवरी ब्वॉय को देना पड़ेगा अन्यथा गैस की डिलिवरी नहीं होगी. ऐसे में यह जरूरी है कि अगर आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नहीं है, तो उसे जल्दी से अपडेट करा दें अन्यथा एक नवम्बर से आपको गैस लेने में परेशानी हो सकती है

जेट एयरवेज के नये मालिक बने मुरारी जालान

रांची : कर्ज में फंसी एयरलाइंस कंपनी जेट एयरवेज को नये मालिक मिल गये हैं। लंदन के कालरॉक कैपिटल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएइ) के निवेशक मुरारी लाल जालान वाली कंसोर्टियम अब जेट एयरवेज की नयी मालिक होगी। जेट एयरवेज को कर्ज देने वाली क्रेडिटर्स कमिटी (सीओसी)ने इसकी मंजूरी दे दी है।
करीब एक साल पहले जेट एयरवेज को आर्थिक संकट के कारण बंद करना पड़ा था. रांची के लिए यह गर्व की बात है. गर्व इसलिए कि मुरारी लाल जालान रांची से ही अपने व्यवसाय की शुरुआत की थी. परिवार के कई सदस्य अभी भी रांची में रहते हैं. फिलहाल वह यूएइ में एमजे डेवलपर्स के मालिक हैं। जेट एयरवेज के कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत ब्रिटेन की कलरॉक कैपिटल और संयुक्त अरब अमीरात के मुरारी जालान के प्रस्ताव को शनिवार को मंजूरी दे दी। जेट एयरवेज के समाधान पेशेवर (आरपी) आशीष छावछरिया ने बीएसइ फाइलिंग में कहा कि प्रस्ताव पर इ-वोटिंग के बाद योजना को मंजूरी दी गयी। बंद हो चुकी विमानन कंपनी को दो समूहों से प्रस्ताव मिले थे। जिस समूह के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया है, उसमें फ्लोरियन फ्रिट्च द्वारा स्थापित ब्रिटेन की कलरॉक कैपिटल और संयुक्त अरब अमीरात के मुरारी जालान शामिल हैं। एक अन्य बोली हरियाणा की फ्लाइट सिमुलेशन तकनीक केंद्र, मुंबई की बिग चार्टर और अबू धाबी की इंपीरियल कैपिटल इंवेस्टमेंट्स एलएलसी ने मिल कर प्रस्तुत की थी। मुरारी लाल जालान की कम्पनी फिलहाल इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, माइनिंग और टूरिज्म क्षेत्र में भी कार्य कर रही हैं।

काम के बोझ तले सबसे ज्यादा दबे हुए हैं कोलकाता वाले

कोलकाता : कोलकाता के लोग काम के बोझ तले सबसे ज्यादा दबे हुए हैं, जिसकी वजह से वे अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे। एक संस्था की ओर से देश के 13 शहरों के नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर किए गए सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक कोलकाता के लोगों पर मानसिक दबाव क्रमशः बढ़ रहा है। कोलकाता के 65 फीसद लोग काम के दबाव के कारण अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे और पेशे की प्रकृति की वजह से 59 फीसद लोग अपने शौक को पूरा नहीं कर पा रहे। इनमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल शामिल है। कोलकाता के 62 फीसद लोगों को महसूस हो रहा है कि व्यस्तता के कारण उनके पार्टनर उन्हें समय नहीं दे पा रहे अथवा वे देना ही नहीं चाहते। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कोलकाता के 66 फीसद लोग काम के दबाव के कारण अपने शरीर की न्यूनतम देखभाल भी नहीं कर पा रहे। उनके लिए जिम, फिटनेस सेंटर अथवा योगासन केंद्र जाने के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है।
वहीं 43 फीसद लोग पेशागत व्यस्तता के कारण अपने बच्चों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो तकरीबन 56.5 फीसद लोगों का मानना है कि काम के दबाव के कारण वे अपना शौक पूरा करने में असमर्थ हैं जबकि 72 फीसद लोगों का मानना है कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ने के कारण उनके पार्टनर उन्हें कम समय दे रहे हैं।

इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का

मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं। इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां, जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है । नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गा कवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।

ये शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है।

1. प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ – नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है।

पथया – जो हित करने वाली है।

कायस्थ – जो शरीर को बनाए रखने वाली है।
अमृता – अमृत के समान
हेमवती – हिमालय पर होने वाली।
चेतकी – चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता) शिवा – कल्याण करने वाली।

2. द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानी ब्राह्मी- ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है।

यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी की आराधना करना चाहिए।

3. तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर- नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है। यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।

4. चतुर्थ कूष्मांडा यानी पेठा- नवदुर्गा का चौथा रूप कूष्मांडा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं। इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कूष्मांडा देवी की आराधना करना चाहिए।

5. पंचम स्कंदमाता यानि अलसी – नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।

अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।

इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।

6. षष्ठम कात्यायनी यानी मोइया- नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है। इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करना चाहिए।

7. सप्तम कालरात्रि यानी नागदौन – दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है। यह नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है। इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली एवं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को करना चाहिए।

8. अष्टम महागौरी यानी तुलसी- नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र। ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है एवं हृदय रोग का नाश करती है।

तुलसी सुरसा ग्राम्या सुलभा बहुमंजरी।
अपेतराक्षसी महागौरी शूलघ्‍नी देवदुन्दुभि:
तुलसी कटुका तिक्ता हुध उष्णाहाहपित्तकृत् ।
मरुदनिप्रदो हध तीक्षणाष्ण: पित्तलो लघु:।

इस देवी की आराधना हर सामान्य एवं रोगी व्यक्ति को करना चाहिए।

9. नवम सिद्धिदात्री यानी शतावरी- नवदुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है। सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए।

इस प्रकार प्रत्येक देवी आयुर्वेद की भाषा में मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित एवं साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करती है। अत: मनुष्य को इनकी आराधना एवं सेवन करना चाहिए।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
(साभार – वेब दुनिया)

त्योहार के मौसम में सेल वाली खरीददारी, इन बातों का रखें ध्यान

त्योहारी सीजन में अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, पेटीएम मॉल जैसे ऑनलाइन ई-कॉमर्स ऑनलाइ सेल लेकर आई हैं। इमें प्रोडक्ट पर कई डिस्काउंट के साथ कैशबैक के साथ कई ऑफर हैं, लेकिन अगर आप ऑनलाइन सेल में खरीददारी करते हैं तो इन बातों का ध्यान रखना आपके लिए जरूरी है। सेल में कई बार लोगों के साथ धोखा भी हो जाता है और खराब प्रोडक्ट आ जाता है। बाद सामान वापस करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कई बातों का ध्यान रखना आपके लिए आवश्यक है।
1. ज्यादा डिस्काउंट वाले उत्पादों को परखें

ज्यादा डिस्काउंट पर मिलने वाले उत्पाद अच्छी तरह से जांच कर लें। ज्यादातर डिस्काउंट दो तरह के उत्पाद पर होता है पहला है जिस प्रोडक्ट को लॉन्च किया जा रहा है ताकि उसकी मार्केटिंग हो सके या दूसरा वो उत्पाद जिनका स्टॉक खत्म करना है। ऐसे में नए उत्पाद की खरीदारी सोच-समझकर करें। उसके रिव्यू नहीं होते और आप फर्स्ट हैंड यूजर होंगे। दूसरा वह उत्पाद जो स्टॉक आउट नहीं हो रहे उनको खरीदने से पहले भी ये देख लें कि वह आपके काम का है या नहीं।

2. कैशबैक शर्त को समझें

जिस उत्पाद के साथ कैशबैक मिल रहा है उसकी शर्तों को जरूर समझें। कई बार किसी प्रोडक्ट पर कैशबैक कूपन मिलते हैं और कूपन इस्तेमाल करने की अलग शर्त और पाबन्दी होती है। कुछ उत्पाद के साथ अकाउंट में कैशबैक आता है वह ऑफर अच्छा है। कई बार किसी बैंक का क्रेडिट या डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने पर कैशबैक मिलता है।

3. जरूरी है रिटर्न पॉलिसी

कभी भी कोई वस्तु सेल में खरीदें तो यह जरूर देख लें कि उसकी रिटर्न पॉलिसी क्या है। कई बार ज्यादा डिस्काउंट देखकर लोग सामान खरीद लेते हैं लेकिन पसंद न आने पर या क्वालिटी खराब होने पर रिटर्न करने पर वह रिटर्नेबल नहीं होते।

4. शिपिंग कास्ट का रखें ध्यान

ऑनलाइन शॉपिंग वस्तु की की कीमत अलग होती है लेकिन बाद में शिपिंग चार्ज लगाने के बाद भुगतान करते समय कीमत बढ़ जाती है। ऐसे में भुगतान करने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसमें कितनी शिपिंग कॉस्ट है। कई बार ऑनलाइन उत्पाद खरीदने पर हैंडलिंग कॉस्ट जैसे खर्चे भी बढ़ जाते हैं।

5. करें कीमत की तुलना

अगर आप ऑनलाइन सेल में कोई उत्पाद खरीद रहे हैं तो वही उत्पाद दूसरी साइट पर भी कंपेयर करें। इससे आपको उसकी कीमत और गुणवत्ता के बारे में पता चलेगा।