Friday, April 10, 2026
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कोरोना एक अवसर है आगे बढ़ने का

साक्षी झा

दुनिया भर में जब भी महामारी ने अपनी दस्तक दी है,और लोगों को बुरी तरह से प्रभावित किया है,तब मनुष्य और मजबूत होकर उभरा हैl यानी जहां एक और महामारी ने लोगों को तबाह कर दिया वहीं दूसरी ओर लोगों को बेहतर तरीके से जीवन जीने के लिए आगे बढ़ाएं हैं। कोरोना वायरस एक अभिशाप होते हुए भी यह एक वरदान के रूप में भी सामने आया हैl एक और समाज में बदलाव देखने को मिला है वही अर्थव्यवस्था को भी नए तरीके से आगे बढ़ने का रास्ता मिला हैl नई खोज के लिए लोगों ने प्रयास किए हैं, और उन्हें सफलता भी मिली है l कार्य करने के नए- नए तरीके विकसित हुए हैंl

 कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन में अब कंपनियां अपने कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करवा रही है। यह कंपनियों के सोच में एक बड़ा बदलाव है क्योंकि पहले कंपनियां मानती थी कि कर्मचारी घर से काम नहीं कर सकते ।जबकि आज कर्मचारी घर से सुव्यवस्थित तरीके से काम कर रहे हैं ।वही पहले जिन सेक्टर में घर से काम करने का विकल्प नहीं होता था,वहां भी वर्क फ्रॉम होम के लिए दरवाजे खुल गए है,और ऐसी संभावना बढ़ गई है कि कोरोना के बाद भी कंपनियां इस विकल्प को अपना सकती है ।जिससे कि वह अपने ऑफिस के खर्च को कम कर सकेंगे।कर्मचारियों को अच्छा लैपटॉप, हाई स्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा देकर कंपनियां काम को और सस्ता और सुलभ बना सकती है ।एक और परिवर्तन देखने को मिला मिल सकता है कि अब  वर्क फ्रॉम होम हो जाने से लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल सकता है । बिना  शॉपिंग मॉल गए भी लोग घर बैठे ही अपनी पसंद की चीजें आसानी से ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए खरीद सकेंगे ।इनका प्रचलन काफी तेजी से बढ़ जाएगा ।इंटरनेट पर ऑनलाइन चीजों को बेचने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों की संख्या भी बढ़ जाएगी ।

डिजिटल इवेंट्स को बढ़ावा मिलेगा।फिजिकल रूप से उपस्थित ना होते हुए भी लोग एवं इवेंट्स का आनंद ले सकेंगे ।इंटरनेट पर इस्तेमाल बढ़ जाएगा। डेटा का उपयोग बढ़ जाएगा लोग इवेंट्स में भी ऑनलाइन ही हिस्सा लेंगे।          कोरोना वायरस महामारी एक सकारात्मक पक्ष लेकर आई है।लॉकडाउन हो जाने की वजह से दूसरे देशों पर निर्भरता घटेगी।कोरोना के कारण चीन से आने वाले सभी तरह के कच्चे माल की आवाजाही बंद हो जाने से देश के कई मैन्युफैक्चरिंग पाटस के बंद करना पड़ गया है ।अब कंपनियां स्वदेशी तकनीक पर ध्यान देगी, और इसके लिए जरूरी कच्चे माल के लिए बाहर के देशों पर निर्भरता को कम करेंगे ।इससे देश में उत्पादन बढ़ेगा।

  लॉकडॉन की वजह से डिजिटल लेन -देन में हुई तेजी, बैंक डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दे रहे हैं,इसके कारण डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ गया है ।कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए आरबीआई के गवर्नर ने ग्राहकों से कहा कि जितना मुमकिन हो उतना डिजिटल बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करें ।सरकार ने भी इसको बढ़ावा देने के लिए कई प्लेटफार्म को इस कार्य के लिए मंजूरी दी है ।एक तरफ से देखा जाए तो डिजिटल भारत का सपना भी हमारा पूरा हो रहा है।

 स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी अधिक जोर दिया गया है । कोरोना के कारण देश के अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर करने का गंभीर प्रयास हुआ है ।यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा ।पब्लिक हेल्थ सिस्टम में सुधार आया।बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों और कस्बों समेत ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर होगी।

शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है ।दुनियाभर के देशों में स्कूल और विश्वविद्यालयों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है,कि अब पढ़ाई के तरीके में बदलाव लाया जाए। लॉकडाउन के कारण ऑनलाइन या वर्चुअल कक्षाओं का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है । ऐसे में भविष्य में छात्रों को वर्चुअल कक्षाओं या ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए ही पढ़ने की आदत डालना पढ़ सकती है।

  दूरदर्शन भारत  का सरकारी  चैनल है ।जिसे  लोग  प्राय भूल ही गए थे परंतु लॉकडाउन के  वजह से “दूरदर्शन”पर ‘रामायण’, ‘महाभारत’ आदि कार्यक्रम पुन प्रसारित किया गया था जिसे लोग काफी ही पसंद कर रहे थे। इसका उद्देश्य सिर्फ कार्यक्रम को दिखाना नहीं बल्कि पूर्व लोक- संस्कृति ,लोकपरंपरा आदि को नई पीढ़ी से अवगत कराना है। इसका लाभ ‘दूरदर्शन’ को मिला। 

 लॉकडाउन की वजह से जहां देशवासियों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।वहीं कुछ फायदे भी हुए हैं जैसे -वायु प्रदूषण के स्तर में काफी गिरावट भी आई है। पश्चिम बंगाल की यदि बात करें,तो जनवरी महीने में कोलकाता में वायु प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक था ।वायु प्रदूषण में कोलकाता ने नयी दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया था और खतरनाक स्तर पर आ गया था ।’लॉकडाउन’ की वजह से सड़कें सुनसान हो गयीं, गाड़ियों और फैक्ट्रियॉ  बंद हो गई । ऐसा केवल कोलकाता में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी हुआ ।पर्यावरण में वायु शुद्ध हो गई ।वायु प्रदूषण के लिए बदनाम रहने वाले राज्य में तेजी से हालत सुधरी है ।शहरों में पक्षी की चह-चाहट सुनाई देने लगी।

 आज की दुनिया में जहां छोटी-छोटी बातों को लेकर इंसान दूसरे इंसान का दुश्मन बनता जा रहा है,उसी समय में कुछ लोग धर्म ,जाति ,संप्रदाय आदि भूल कर एक दूसरे की मदद के लिए अग्रसर हो रहे हैं  ।समाज में बहुत अधिक बदलाव देखने को मिला है ।लोगों में कम्युनिटी फीलिंग भर गई है। गरीबों के प्रति लोगों में सहानुभूति बढ़ गई है।साथ ही साथ वैश्विक मानवता और सहचरी  का परिचय मिल रहा है ।धैर्य की शक्ति का परीक्षण भी हो रहा है।

 इस दुनिया के कुछ छोटे से कोने में रहने वाले कई लोगों के दिल में जानवरों के लिए जो मोहब्बत है, वह वाकई प्रशंसनीय और प्रेरणादाई है ।पूरे देश में पिछले 1 महीने में कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन ने इंसानों से कहीं दयनीय स्थिति जानवरों की हो गई है,क्योंकि इंसान तो फिर भी बोलकर,रोकर या चिल्लाकर अपनी पीड़ा बयां कर सकता है, लेकिन यह मासूम बेजुबान पशु -पक्षी अपनी पीड़ा कहे भी तो किसे?उन्हें तो फिलहाल सुनने वाला भी कोई इंसान नहीं है, अधिकतर लोग अपने घरों के अंदर बैठे हैं ।ऐसी स्थिति में कुछ लोग इंसानियत का फर्ज निभाते हुए इन बेजुबानो की सेवा का फर्ज निभाते हुए बेजुबान की सेवा के लिए आगे आए हैं ।जिनसे हर किसी को सीख लेनी चाहिए ।

 मैने खुद नयी-नयी सी रेसिपी सीखी।साथ ही साथ किचन की गतिविधियों में अपने को शामिल किया। हमने साथ मिलकर कई फूलों के पौधे लगाए। कुछ नई किताब पढी और बहुत कुछ नया लिखा भी ।इस भागती -दौड़ती जिंदगी में लॉकडाउन के रूप में जो समय मिला, इस समय हम उन रिश्तेदारों से भी बात की जिनसे जल्दी बात नहीं हो पाती है अर्थात रिश्तेदारो से भी बातें नहीं हो पाती है अर्थात  रिश्ते  सवारने  का  एक  सुनहला अवसर और  इसमें हम छोटी-छोटी बातों में खुश होना सीखा । कोरोना जैसे  आपदा से लड़ना सीखा और मिलजुल कर रहना भी  सिखाया ।बाहर की नकारात्मक और व्यस्त जीवन में से दूर परिवार के साथ स्वयं खुश रहने और एक-दूसरे को खुश रखने का प्रयास।

शिक्षिका नीलम सिंह द्वारा सूरदास के तीन पदों की सप्रसंग व्याख्या

क्षितिज कक्षा 10 भाग अ,सरल एवं सटीक व्याख्या,भाषा शिल्प सहित

वीडियो सौजन्य – हिन्दी का आंगन

https://www.youtube.com/watch?v=qs51DUdKf1o&feature=youtu.be

 

मन की मन ही मांझ रही’

 

हमारे हरि हारिल की लकरी

https://www.youtube.com/watch?v=LRJ1fmevIIM&feature=youtu.be

महानगर में विजया दशमी पर जलाया गया 20 फीट लम्बे रावण का पुतला

कोलकाता : सॉल्टलेक सांस्कृतिक संसद कमेटी और सन्मार्ग द्वारा आयोजित दशहरा उत्सव में मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ 20 फीट लंबा रावण का पुतला जलाया गया। मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतले लगभग 15 फीट लंबे थे । सेंट्रल पार्क (सॉल्टलेक), कोलकाता में आयोजित इस दशहरा उत्सव में कोलकाता नगर निगम के प्रशासनिक बोर्ड के अध्यक्ष फिरहाद बॉबी हकीम, राज्य के अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस, विधाननगर की मेयर, सॉल्टलेक सांस्कृतिक संसद के अध्यक्ष ललित बेरीवाला तथा पूर्व राज्यसभा सांसद विवेक गुप्ता समेत अन्य लोग उपस्थित थे। समारोह का उद्देश्य पश्चिम बंगाल की समृद्ध संस्कृत और परम्परा को लोगों तक पहुँचाना था।

कोविड -19 को देखते हुए हर प्रकार की सावधानी रखी गयी थी। इस आयोजन के बारे में बात करते हुए, सॉल्टलेक सांस्कृतिक संसद के अध्यक्ष ललित बेरीवाला ने कहा, “हमें समारोह आयोजित करने की अनुमति दी गई थी लेकिन सब कुछ सरल तरीके से करने के लिए कहा गया। दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाने के लिए हमने कमर कस ली, जहाँ समिति के केवल कार्यकारी सदस्य ही मौजूद थे और जनता के लिए पूरे समारोह का सीधा प्रसारण था। हमने रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का पुतला जलाया और भगवान से प्रार्थना की कि राज्याभिषेक भी अग्नि में जल जाए। इस बीमारी ने सब कुछ खराब कर दिया है, इसलिए यह दशहरा उम्मीद से अच्छाई के साथ-साथ इस घातक बीमारी पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होगा।

शी ने जारी किया ‘एब्यूज्ड दुर्गा’ कैलेंडर

कोलकाता : लॉकडाइन के दौरान महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले काफी तेजी से बढ़े। घर से काम करते हुए महिलाओं को शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है। ऐसी घटनाओं के खिलाफ जागरुकता लाने के उद्देश्य से शी – शगुफ्ता हनाफी इवेन्ट्स ने हाल ही में दुर्गा पूजा के दौरान विशेष कैलेंडर जारी किया जिसमें महिलाओं के दोनों ही रूपों को दर्शाया गया है। शी की संस्थापक शगुफ्ता हनाफी ने कहा कि साल भर माँ दुर्गा के आगमन की प्रतीक्षा की जाती है मगर घरों में जो दुर्गा है, उनका सम्मान नहीं किया जा रहा। महिलाओं को माँ, बहन, पत्नी के रूप में देखा जाता है मगर यह याद नहीं रहता कि वह सबसे पहले एक स्त्री है। कैलेंडर में दर्शायी गयी महिलाएं सामाजिक संस्था बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी की शुभचिन्तक हैं। इनमें प्राणिक हीलिंग विशेषज्ञ पायल वर्मा, किंग क्वीन की विजेता अजन्ता चाकलादार, उद्यमी शफाकत कमाल और किशोरी मॉडल आरुषी वर्मा शामिल हैं। कैलेंडर में महिलाओं के प्रसन्नता और दुःख, दोनों को दर्शाया गया है। इस अभियान के दौरान एक काव्य प्रतियोगिता भी थी जिसमें पूरे देश से 93 प्रविष्टियाँ आयी थीं। इसके अतिरिक्त इसी विषय पर एक नृत्य प्रतियोगिता भी थी। समारोह में अभिनेत्री पापिया अधिकारी, आईसीसीआर के क्षेत्रीय निदेशक, पूर्व गौतम दे औऱ कवि शुषमेली दत्ता भी मौजूद रहे।

कर्मचारियों के कोविड -19 परीक्षण को लेकर सक्रिय हुआ कॉरपोरेट जगत

टीसीएस, विप्रो, जेपीएमसी, जीवीके बायो, मिंडा और ओला ले रहे हैं मेडीबडी की सेवाएं

कोलकाता : देश में लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियाँ फिर से आरम्भ हो रही हैं । इसे देखते हुए कॉरपोरेट जगत पूरी तरह सजग है और कम्पनियाँ कर्मचारियों का कोविड -19 परीक्षण करवा रही हैं। टीसीएस, विप्रो, जेपीएमसी, जीवीके बायो, मिंडा और ओला जैसी कम्पनियाँ मेडीबडी की सेवाएं ले रही हैं।
एबीएफआरएल जैसे कॉरपोरेट्स ने पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता करने के लिए मेडीबडी, हर किसी के 24 * 7 हेल्थकेयर दोस्त, को ऑनबोर्ड किया है। कॉरपोरेट घराने तेजी से एंटीजन और एंटीबॉडी परीक्षणों के लिए स्क्रीनिंग कर रहे हैं और कोरोनावायरस से अपने कर्मचारियों की रक्षा कर रहे हैं। मेडी बडी की टीम कार्यालयों का दौरा कर रही है और नमूने एकत्र करके परीक्षण में सहायता कर रही है जबकि कार्यालयों में लौटने वाले सभी कर्मचारियों का परीक्षण किया जा रहा है, मेडी बडी नियोक्ता के आधार पर अनुकूलन प्रदान करता है।


इसके अतिरिक्त, जैसे-जैसे मामले बढ़ रहे हैं, मेडी बडी इस महामारी से लड़ने के लिए प्रत्येक नागरिक को भारत भर में घरेलू अलगाव सहायता प्रदान कर रहा है। यह सेवा अलग-अलग लागतों पर 3 पैकेजों में दी जाती है और इसमें आइसोलेशन और अलगाव प्रक्रिया पर मार्गदर्शन, असीमित आहार विशेषज्ञ और फिटनेस विशेषज्ञ परामर्श, 1 महीने के लिए असीमित 24 * 7 टेलीकॉन्सेलेशन, असीमित 24 * 7 कोरोना हेल्पलाइन, लेख, मेलर्स, और जैसी सुविधाएँ हैं। सेवाओं से संबंधित युक्तियां, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से एक आइसोलेशन किट जिसमें शामिल है सैनेटाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर, IR थर्मामीटर, और बीएमडब्ल्यू बैग। मेडी बडी की एक टीम आवश्यक स्थापित करने और वितरित करने के लिए घरों का दौरा करेगी और अलगाव प्रक्रिया पर मार्गदर्शन ऑनलाइन किया जाएगा। मरीजों को दवाओं की मुफ्त होम डिलीवरी का भी लाभ मिल सकता है। वे आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के अनुसार सेंटर विजिट या होम सैंपल कलेक्शन के माध्यम से कोविड -19 टेस्ट की भी पेशकश करते हैं।
मेडी बडी – डॉक्सऐप के सह संस्थापक तथा सीईओ सतीश कन्नन ने कहा. ‘हमने वायरस से निपटने में मदद करने के लिए एक होम आइसोलेशन सपोर्ट प्रोग्राम की संकल्पना की। हम प्रत्येक भारतीय को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की आशा करते हैं। ”

 

के 2 टीएमटी ने उतारा टीएमटी ब्रांड ‘के2जेनॉक्स’

कोलकाता : टीमएमटी बार निर्माता कम्पनी के 2 (केएवाई2) ने अपनी ब्रांड पहचान को पुख्ता करते हुए नयी तकनीक वाला प्रीमियम टीएमटी ब्रांड ‘के2जेनॉक्स’ उतारा है। कम्पनी के मुताबिक यह नया ब्रांड खास रिब डिजाइन वाला है जो हेक्सागोनल पैटर्न में कंक्रीट के साथ मजबूती से जुड़ जाता है और भूकम्प के जोखिम वाले इलाकों में बेहद उपयोगी है। 720 डिग्री हेक्सागन के इसके आन्तरिक कोण उत्कृष्ट जुड़ाव देते हैं। ‘के2जेनॉक्स’ का उपयोग करने पर स्टील की खपत 20 प्रतिशत कम होती है। ‘के2जेनॉक्स’ के निदेशक सुनील अग्रवाल को उम्मीद है कि इस नये ब्रांड से कम्पनी मजबूत होगी। कम्पनी ने 30 विनिर्माण संयंत्रों से गठबन्धन किया है औऱ देशभर में 3500 डीलरों का तगड़ा नेटवर्क है। कम्पनी को सालाना टर्नओवर 2500 करोड़ रुपये से बढ़कर 3500 करोड़ होने की उम्मीद है।

फ्रेश टू होम इंडिया कन्ज्यूमर टेक के तहज सी फंडिंग से जुटाए 121 मिलियन डॉलर

बेंगलुरू : ऑनलाइन ई – कॉमर्स ब्रांड फ्रेश टू होम ने सीरीज सी फंडिंग में 121 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी सीरीज बतायी जा रही है। यह फंडिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ऑफ दुबई (आईसीडी ), एसेन्ट कैपिटल और यूनाइटेड स्टेट्स इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (डीएफसी), द अलाना ग्रुप एवं अन्य निवेशकों के नेतृत्व में की गयी। सीरीज बी से मुख्य निवेशक आयरन पिलर ने 19 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ इस राउंड में हिस्सा लिया। बार्कलेज इस सौदे के लिए परामर्शदाता था। फ्रेश टू होम के सह संस्थापक एवं सीईओ शान कदाविल ने कहा कि माँग बढ़ रही है औऱ वर्तमान में जुटायी गयी राशि उनकी कम्पनी पूरी क्षमता के साथ भारत एवं मध्य – पूर्व में तेजी से विस्तार करने में सहायक होगी।

निटको ने कई राज्यों में किया विस्तार, खोले 10 – 12 नये स्टोर

कोलकाता : टाइल निर्माण और सतह डिजाइन कम्पनी, कई राज्यों में अगले 2-3 महीनों में 10-12 नए स्टोर खोलने की योजना बना रही है। ये स्टोर चंडीगढ़, हरियाणा, केरल, कोलकाता, अमृतसर (पंजाब) और तमिलनाडु में खोले जाएंगे। नए स्टोरों में से, कम्पनी ने बड़े पैमाने पर तीन स्टोर खोलने की योजना बनाई है, जबकि शेष सभी मध्यम-से-मध्यम स्तर पर होंगे। मुम्बई मुख्यालय वाली इकाई ने पिछले कुछ वर्षों में लगभग 60 स्टोर खोले हैं। वर्तमान में, कम्पनी के पास देश में 120 सक्रिय फ्रेंचाइजी-संचालित स्टोर हैं।
निटको ( एनआईटीसीओ) ने कोरोनोवायरस महामारी के कारण देश भर में चल रहे तालाबंदी के मद्देनजर व्हाट्सएप पर ग्राहकों के लिए डिजिटल समाधान शुरू किया है। इस पहल के माध्यम से, ग्राहक केवल एक क्लिक में अपने घरों के आराम से अपने पसंदीदा टाइल्स और संगमरमर को ब्राउज़, चयन और ऑर्डर कर सकेंगे।

निटको लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक विवेक तलवार ने कहा, “निटको टाइल्स, मार्बल और मोज़ेक स्पेस में एक अच्छी तरह से स्थापित ब्रांड है। अगले कुछ महीनों में विभिन्न राज्यों में अधिक स्टोर खोलने से इन भूगर्भिक क्षेत्रों में हमारी उपस्थिति को और मजबूती मिलेगी। ये आगामी स्टोर ग्राहकों को सस्ती कीमत पर हमारी प्रकृति-प्रेरित टाइलों की एक किस्म के माध्यम से परिमार्जन करने में सक्षम बनाएंगे। जबकि अप्रैल में कोरोनोवायरस के प्रकोप के बाद अर्थव्यवस्था निकट आ गई थी, पिछले कुछ महीनों में चीजें बेहतर दिखने लगी हैं। हम आशावादी बने हुए हैं कि रियल एस्टेट और अन्य निर्माण-संबंधी गतिविधियों में तेजी आने से टाइल्स और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ेगी। ”
निटको न केवल भारत के लिए उत्पाद बनाती है, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, नेपाल, बहरीन, युगांडा सेशेल्स, बोत्सवाना, जाम्बिया, मालदीव, पोलैंड, कतर, केन्या, इथियोपिया, कुवैत, ताइवान जैसे 40 विभिन्न देशों को निर्यात करती है। तंजानिया, फिजी, आदि। कम्पनी ने सफलतापूर्वक अभिनव डिजिटल समाधान भी लॉन्च किए हैं जिसके माध्यम से ग्राहक व्हाट्सएप के माध्यम से अपने उत्पादों को खरीद सकते हैं।

 

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अमेरिकी युवा वैज्ञानिक प्रतियोगिता की विजेता बनी भारतीय मूल की अनिका

नयी दिल्ली : विज्ञान के माध्यम से किसी समस्या का समाधान निकालने की वास्तव में कोई उम्र नहीं होती। भारतीय मूल की अमेरिकी किशोरी अनिका चेब्रोलू ने अपने एक शोध से इसे सही साबित कर दिखाया है। केवल 14 वर्ष की उम्र में अपने शोध के लिए उन्हें 25 हजार डॉलर यानी करीब 18 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्राप्त हुई है।
अनिका का यह शोध वैश्विक महामारी बन चुके कोविड-19 का संभावित इलाज तलाशने में उपयोगी हो सकता है। उल्लेखनीय है कि कोविड-19 का कारगर उपचार तलाशने में दुनियाभर के वैज्ञानिक दिन-रात जुटे हुए हैं। इस किशोरी के शोध में वैज्ञानिकों को संभावनाएं दिख रही हैं।
अनिका के परिवार की पृष्ठभूमि मूलतः आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले से जुड़ी है। 3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज नामक इस प्रतियोगिता में उन्होंने अपनी छाप ऐसे समय में छोड़ी है, जब दुनिया कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रही है।
इस प्रतियोगिता का आयोजन अमेरिका के मिनिसोटा में स्थित एक प्रमुख विनिर्माण कंपनी 3एम द्वारा किया जाता है। अनिका ने अंतिम चरण में नौ प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर यह पुरस्कार हासिल किया है। इन पुरस्कारों की घोषणा करते हुए 3एम प्रतियोगिता की वेबसाइट www.youngscientistlab.com पर अनिका की उपलब्धि के बारे में जानकारी दी गयी है।
3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज प्रतियोगिता की विजेता अनिका चेब्रोलू कोविड-19 जैसी भयंकर महामारी सार्स-सीओवी-2 नामक वायरस के संक्रमण के चलते होती है। ऐसे में वायरस के प्रसार को निष्क्रिय करना बेहद आवश्यक है। अनिका ने इसके लिए एक मॉलिक्यूल यानी अणु की खोज की है।
बताया जाता है कि यह मॉलिक्यूल इन-सिलिको प्रक्रिया के जरिये वायरस को एक स्पाइक प्रोटीन में बांधकर उसे फैलने से रोक सकता है। अनिका ने वर्चुअल तरीके से इसे प्रस्तुत करके दिखाया है। अपनी इस सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए अनिका ने कहा कि ‘मैं अमेरिका के शीर्ष युवा वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होकर खुश हूँ।”
अमेरिकी के टेक्सास में रहने वाली अनिका कुछ समय पहले एक किस्म के फ्लू की चपेट में आ गयी थीं और उससे उबरने के प्रयासों के बीच ही उन्हें इस दिशा में शोध करने की प्रेरणा मिली। हालांकि, शुरुआत में कोरोना कहीं उनके दिमाग में नहीं था। 3एम वेबसाइट पर इस स्पर्धा की सूचना मिलने पर उन्होंने इसमें शामिल होने का फैसला किया। अथक प्रयत्न और समर्पण से आखिरकार उनकी झोली में यह पुरस्कार आ गया। अनिका जीवन और समस्त ब्रह्मांड का आधार विज्ञान को मानती हैं, जिसे पूरी तरह समझने में सतत और अधिक प्रयास करने होंगे। भविष्य में अनिका एक मेडिकल शोधकर्ता और प्रोफेसर बनने का इरादा रखती हैं।

(इंडिया साइंस वायर)