नयी दिल्ली : कोविड-19 के कारण संकट में आई भारतीय अर्थव्यवस्था में अब सुधार होने लगा है। इसका ताजा संकेत गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन से मिला है। वित्त मंत्रालय के डाटा के मुताबिक, अक्टूबर में जीएसटी संग्रह 1.05 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है। फरवरी के बाद पहली बार GST कलेक्शन का आंकड़ा 1 लाख करोड़ के पार पहुंचा है।
80 लाख जीएसटीआर-3B रिटर्न फाइल हुए
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2020 तक कुल 80 लाख जीएसटीआर-3B रिटर्न फाइल किए गए हैं। इसकी बदौलत अक्टूबर-2020 ग्रॉस जीएसटी रेवेन्यू 1,05,155 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसमें 19,193 करोड़ रुपए का सीजीएसटी, 5,411 करोड़ रुपये का एसजीएसटी और 52,540 करोड़ रुपए का IGST शामिल है। इसके अलावा 8,011 करोड़ रुपये सेस के जरिए मिले हैं। आईजीएसटी में आयात किए गए सामान से वसूले गए 23,375 करोड़ रुपए भी शामिल हैं।
पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा रेवेन्यू
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अक्टूबर 2020 में GST कलेक्शन एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 10% ज्यादा रहा है। एक साल पहले समान अवधि यानी अक्टूबर 2019 में जीएसटी कलेक्शन 95,379 करोड़ रुपए रहा था। बयान में कहा गया है कि कोविड-19 के कारण आर्थिक गतिविधियों के रुकने से जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपए से नीचे आ गया था।
जीएसटी संग्रह अक्टूबर में 1.05 लाख करोड़, कोरोना के दौर में पहली बार 1 लाख करोड़ के पार
यूनियन बैंक ने दिवाली से पहले महिला ग्राहकों को दिया तोहफा
नयी दिल्ली: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) महिला ग्राहकों के लिए खास ऑफर लेकर आया है. इस ऑफर में बैंक महिला ग्राहकों को सस्ते में होम लोन दे रहा है. यानी अब आप अपने सस्ता घर खरीदने के सपने को आसानी से पूरा कर सकते हैं. बैंक ने 30 लाख रुपए से अधिक के होम लोन (Home Loan) पर ब्याज दर में 0.10 फीसदी की कटौती की गई है. वहीं, अगर आप महिला ग्राहक हैं तो बैंक आपको इस लोन पर 0.05 फीसदी एक्सट्रा छूट देगा.
बैंक ने प्रोसेसिंग चार्ज भी जीरो किए
बैंक की ओर से 30 लाख रुपये से अधिक के होम लोन पर ब्याज की दर में 0.10 फीसदी की कटौती की गई है. यहीं नहीं, महिलाओं को ब्याज दर में 0.05 फीसदी की अतिरिक्त छूट दी जा रही है. यानी, महिलाओं के लिए ब्याज दर 0.15 फीसदी सस्ता होगा. बैंक ने कहा कि उसने 31 दिसंबर 2020 तक होम लोन के लिए प्रोसेसिंग फीस भी शून्य कर दी है.
महिला ग्राहकों को मिलेंगे ये ऑफर्स-
31 दिसंबर 2020 तक लोन के लिए प्रोसेसिंग शुल्क के तौर पर आवेदक को बैंक को एक भी पैसा नहीं देना होगा।बैंक की ओर से 1 नवंबर से ही यह छूट लागू कर दी गयी है। बैंक ने होम लोन टेकओवर करने की स्थिति में दस हजार रुपए तक की छूट की भी पेशकश की है। इनके अलावा ऑटों और एजुकेशन लोन पर भी प्रोसेसिंग चार्ज हटा दिया गया है।
ज्यादा से ज्यादा ग्राहक उठाएंगे फायदा
बता दें बैंक ने त्योहारी सीजन में ग्राहकों के लिए खास ऑफर्स निकाले हैं। इसके साथ ही बैंक ने कहा कि त्योहारी सीजन को देखते हुए रिटेल और एमएसएमई सेगमेंट पर ध्यान देते हुए कई कैंपेन शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही बैंक ने कहा कि उनको उम्मीद है कि ज्यादा से ज्यादा लोन लेने वाले ग्राहक बैंक की इस स्कीम का फायदा उठा पाएंगे।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी सस्ता किया होम लोन
वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के तीसरे सबसे बड़े कर्जदाता बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने रेपो दर से जुड़े लोन पर ब्याज की दरों (BRLLR) को 7 फीसदी से घटाकर 6.85 फीसदी कर दिया है. बैंक की नई दरें 1 नवंबर 2020 लागू हो गयी। बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक हर्षद कुमार टी. सोलंकी ने कहा कि इससे होम लोन, मॉर्टगेज लोन, ऑटो लोन, एजुकेशन लोन, पर्सनल लोन के ग्राहकों को सीधा फायदा मिलेगा।
मिठाई बेचने के लिए रोज 120 किलोमीटर साइकिल चला रहा है वह
नदिया :कोरोना वायरस की सबसे ज्यादा मार गरीब व असहाय लोगों पर पड़ी है। रोजगार छीनने के साथ ही रोजी रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है। हालांकि इस विकट स्थिति के बावजूद कुछ बुलंद हौसले वाले लोग इन चुनौतियों का डटकर सामना कर रहे हैं। इन्हीं में से बंगाल के नादिया जिले का एक 19 वर्षीय लड़का इन दिनों मिठाई बेचने के लिए प्रतिदिन 120 किमी की यात्रा करके साईकिल से कोलकाता आता- जाता है, जिससे उसके परिवार की जीविका चलती है।
दरअसल मार्च में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद जब लोकल ट्रेन सेवाएं बंद हो गईं, तो लड़के का परिवार गरीबी के कारण संघर्ष करना शुरू कर दिया। लॉकडाउन, हालांकि युवा इमरान शेख के मजबूत इरादों को डिगा नहीं सका। उसने साइकिल से ही रोजाना कोलकाता आने का फैसला किया। इमरान मिठाई बेचने के लिए नदिया जिले के राणाघाट से कोलकाता आने जाने के लिए प्रतिदिन सात-आठ घंटे साईकिल चलाता है।
दरअसल, पहले वह मिठाई बेचने के लिए लोकल ट्रेनों से यात्रा करता था। नादिया अपनी मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है, मुख्य रूप से ‘सरपुरिया’। इमरान शेख उर्फ़ सागर, जो अपने इस काम से बहुत प्यार करता है, ने कहा- ‘मैं घर पर लॉकडाउन में नहीं बैठना चाहता था। लोग मुझसे मिठाई खरीदते थे और मैं अपना व्यवसाय नहीं खोना चाहता था। इसलिए, मैंने अनलॉक- 1 में अपने व्यवसाय को फिर से शुरू किया। लेकिन ट्रेनें नहीं चल रही थीं। इसलिए, मैंने अपने साइकिल की सवारी करके मिठाई बेचने के लिए कोलकाता आने का फैसला किया।’
दरअसल, बाजार के मानकों की तुलना में इमरान की मिठाइयां बहुत सस्ती है। इमरान ने कहा, ‘मैं सुबह 3 बजे के आसपास घर से निकलता हूं और कोलकाता लगभग 7 बजे पहुंचते हैं। मिठाइयों में रसगुल्ला, गुलाब जामुन और लंगचा’ शामिल हैं, जिसे अपने बैग में भरकर ले जाते हैं। इसके अलावा सूखी मिठाइयों से भरा बैग भी ले जाता हूं। रास्ते में छोटे शहरों व गांवों से गुजरने के दौरान मिठाइयां बेचते हुए वे कोलकाता पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि शुरू में मैं प्रतिदिन 300 पीस मिठाई बेचता था, लेकिन मेरे ग्राहकों ने मुझे मिठाई की अधिक किस्में लाने के लिए प्रेरित किया। अब मैं रोजाना कम से कम 700 मिठाइयां बेचता हूं। उनके प्रत्येक मिठाई की कीमत मात्र 5 रुपये है। किफायती दाम व बेहतर स्वाद होने के चलते उनके मिठाई की काफी माँग रहती है।
(साभार – दैनिक जागरण)
इस धनतेरस पर गोल्ड ईटीएफ है बढ़िया विकल्प
भारत में त्योहारी सीजन चल रहा है और कुछ ही दिनों में दिवाली आने वाली है। दिवाली के साथ ही धनतेरस भी आ रहा है। धनतेरस पर लोग दूसरी कीमती चीजों के साथ-साथ सोना भी खूब खरीदते हैं। भारत में महिलाएं इस मौके पर सोने के जेवर बहुत अधिक खरीदती हैं। सोने की ज्वेलरी के अलावा बहुत से लोग इसमें निवेश भी करते हैं। सोने को निवेश से लिहाज से एक बढ़िया विकल्प माना जाता है। सोना निवेश के लिए सुरक्षित भी है इसीलिए जब शेयर बाजार गिरता है तो निवेशक सोने का रुख करते हैं। यदि आप दिवाली के खास मौके पर सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं तो आपके लिए गोल्ड ईटीएफ एक अच्छा विकल्प रहेगा। गोल्ड ईटीएफ की कई स्कीमों ने अच्छा रिटर्न दिया है। गोल्ड ईटीएफ में जम कर हो रहा निवेश गोल्ड ईटीएफ एक सुरक्षित जगह है। सेफ होने के चलते ही पहले की तुलना में अब ज्यादा लोग इस ऑप्शन में निवेश करने लगे हैं। एम्फी की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार जुलाई-सितंबर तिमाही में 2,426 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। आपको बता दें कि पिछले साल की समान अवधि में 172 करोड़ रुपये ही आए थे। निवेश के लिहाज से ये एक अच्छा मौका हो सकता है। ये होता है गोल्ड ईटीएफ एक्सपर्ट्स गोल्ड में निवेश को बहुत अच्छा तरीका मानते हैं। पर किसी भी निवेश के लिए ये जानना है जरूरी है कि आखिर गोल्ड ईटीएफ होता क्या है। गोल्ड ईटीएफ एक ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड है, जो गोल्ड के मौजूदा रेट पर ही आधारित होता है। इसमें अतिरिक्त लागत बहुत कम होती है। बता दें कि गोल्ड ईटीएफ में 1 इकाई में 1 ग्राम सोना होता है। अगर आप गोल्ड ईटीएफ में निवेश (खरीदना और बेचना) करना चाहते हैं तो बीएसई-एनएसई पर ये बिल्कुल शेयर की तरह ही होता है। जैसे आप शेयर खरीदें और रेट बढ़ने पर बेच देते हैं। इसी तरह गोल्ड ईटीएफ में निवेश होता है। होता है प्योर गोल्ड गोल्ड ईटीएफ का एक अहम फायदा ये है कि इसमें सोने की क्वालिटी 100 फीसदी शुद्ध होती है। इसलिए आपको सोने की शुद्धता को लेकर कोई टेंशन नहीं होगी। दूसरी बात गोल्ड ईटीएफ में सोना फिजिकल फॉर्म में नहीं होता, इसलिए आपको इसे रखरखाव की जरूरत नहीं होगी। इसलिए सुरक्षा की भी चिंता नहीं होगी।
कैसे करें गोल्ड ईटीएफ में निवेश जिस तरह म्यूचुअल फंड में एसआईपी की तरह निवेश किया जाता है उसी तरह गोल्ड ईटीएफ में भी एसआईपी के जरिए ही निवेश किया जा सकता है। गोल्ड ईटीएफ में आपको लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिल सकता है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश के लिए आपको डीमैट अकाउंट की जरूरत होगी। एक बार डीमैट खाता खुलने पर आप ऑनलाइन ही गोल्ड ईटीएफ की यूनिट्स खरीद-बेच सकेंगे। मिल सकता है अच्छा मुनाफा बता दें कि जब कोरोना जैसा कोई संकट आता है तो सोने की कीमतों में तेजी से इजाफा होता है। असल में ऐसे समय पर निवेशक शेयर बाजार से निकल कर सोने का रुख करते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस समय भी कोरोना संकट, इकोनॉमी में अस्थिरता और अमेरिकी चुनाव जैसे कारण हैं, जिनके चलते सोने के रेट ऊपर जा सकते हैं। यानी ये मुनाफा कमाने का अच्छा अवसर हो सकता है।
कार्टन रीसाइक्लिंग बन सकता है एक लाभजनक व्यवसाय
रीसाइक्लिंग मटेरियल्स से हम न केवल कचरे को कम कर रहे हैं, बल्कि संसाधनों को बचा रहे हैं और पर्यावरण को सुरक्षित भी रख रहे हैं। लेकिन हमारे देश में आज भी 300 मिलियन टन सॉलिड वेस्ट में से करीबन 10% रिसाइकिल किया जाता है और 70% से अधिक लैंडफिल में जाता है। रीसाइक्लिंग की चुनौतियों का समाधान करने के लिए तीन प्रमुख कारकों पर एक साथ ध्यान देने की जरूरत है। कलेक्शन और रीसाइक्लिंग के लिए वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी और प्रोसेस में इनोवेशन व सर्वश्रेष्ठ प्रणालियां और आखिर में निवेश क्षमता।
टेट्रा पैक स्थानीय और वैश्विक हितधारकों की एक विस्तृत श्रृंखला और ग्राहकों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करता रहा है, ताकि पैकेजिंग कलेक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जा सके। भारत में Tetra Pak 4 टेट्रा पैक फॉर रिसाइकिलर्स के साथ काम कर रहा है। इनमें परिवार नियंत्रित बिजनेस से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं।

1999 से पार्टनर: 12000 टन कार्टन तक प्रति वर्ष रीसाइक्लिंग संभव
यह एक ज़ीरो वेस्ट प्रक्रिया के माध्यम से कैप्स और स्ट्रॉ सहित इस्तेमाल किए पैक को पैनल बोर्ड में बदलता है। उपयोग: लकड़ी का बेहतर विकल्प – इसकी मदद से आप फर्नीचर, इंडस्ट्रियल पैलेट्स, पैसेंजर व्हीकल की सीटें, सजावटी सामान और बहुत कुछ बना सकते हैं। एक इंटीग्रेटेड रिसाइकिलर, जो दुनिया भर में कुछ में से एक है। 2009 से पार्टनर: 30,000 टन कार्टन तक प्रति वर्ष रीसाइक्लिंग सम्भव है।
यह इको-फ्रेंडली इंडस्ट्रियल पेपर्स और पॉलिमर एल्यूमीनियम पैलेट्स बनाता है
कागज का उपयोग हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले, पार्ले, मैकडॉनल्ड्स और KFC जैसी कंपनियों द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक पैकेजिंग के लिए किया जाता है। पॉलिमर पैलेट्स का उपयोग विभिन्न पाइप, पेन, पैलेट्स, छत टाइल, कृत्रिम फूल आदि बनाने के लिए किया जाता है।2016 से पार्टनर: 50,000 टन कार्टन तक प्रति वर्ष रीसाइक्लिंग सम्भव है। आईटीसी टेट्रा पैक के लिए पेपरबोर्ड का एक सप्लायर है। इस पेपरबोर्ड को टेट्रा पैक द्वारा पेय कार्टन्स के लिए पैकेजिंग मटेरियल्स में बदला जाता है, जिसका उपयोग आईटीसी द्वारा अलग- अलग तरह के जूस को पैकेज करने के लिए किया जाता है। इस्तेमाल किए गए पेय कार्टन को कोयम्बटूर में आईटीसी के पेपर मिल में वापस रिसाइकिल किया जाता है।
यह शीट बनाने के लिए पॉलिमर-एल्यूमीनियम कंपाउंड का उपयोग करता है।
प्रयुक्त हुआ– स्वच्छ भारत मिशन के तहत नालीदार छत, बायो-टॉयलेट, भारतीय रेलवे के लिए शौचालय, आंगनवाड़ी स्कूलों के लिए स्कूल फर्नीचर, कम लागत वाले आवास। इनकी रीसाइक्लिंग प्रक्रिया स्वयं एक ज़ीरो वेस्ट प्रक्रिया है। रिसाइकिल के बाद जो मटेरियल मिलता है वो किसी भी बाड़े का तापमान 5-7 डिग्री तक नीचे लाती है। इस्तेमाल किए गए पेय कार्टन को नए उत्पादों में बदलकर टेट्रा पैक और उसके पार्टनर्स बेहतर भविष्य बनाने और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में योगदान दे रहे हैं। रिसाइकिल किए हुए उत्पादों को खरीदकर या खरीदने के लिए कहकर आप भी इस बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं।
(साभार – दैनिक जागरण)
नहीं रहे अभिनेता शॉन कॉनरी, चाहते थे, कोई और जेम्स बॉण्ड बने
1965 में जेम्स बॉण्ड की लोकप्रियता आसमान की ऊंचाइयों पर थी। उस समय जासूस के किरदार को अमर करने वाले शॉन कॉनरी ने प्लेबॉय मैग्जीन से कहा कि ‘यदि कोई अन्य कलाकार उनका किरदार निभाता है तो उन्हें आपत्ति नहीं होगी। दरअसल, मैं देखना चाहता हूं कि दूसरा इस रोल को किस तरह करेगा। बहुत लोग जेम्स बॉण्ड बन सकते हैं’। कॉनरी सही हो सकते हैं। लेकिन, दर्शकों की नजर में वे हमेशा पहले और सबसे अच्छे बॉण्ड रहेंगे।
गत शनिवार को 90 साल की आयु में अंतिम सांस लेने वाले कॉनरी की तुलना हमेशा उनके बाद जेम्स बॉण्ड बनने वाले अभिनेताओं से होती रही। रोजर मूर, टिमोथी डाल्टन, पीयर्स ब्रॉसनन, डेनियल क्रेग और जार्ज लेजनबी की अपनी-अपनी खासियत थी। फिर भी, उन्हें कॉनरी के हाव-भाव अपनाने पड़े थे। सीक्रेट एजेंट बॉण्ड के सर्जक इयॉन फ्लेमिंग 007 के रूप में रिचर्ड बर्टन या डेविड निवेन को पसंद करते थे। जॉन कॉर्क और ब्रूस सिवेली-जेम्स बॉण्ड: द लीगेसी किताब में लिखते हैं, कॉनेरी का प्रभाव केवल उनके खूबसूरत व्यक्तित्व के कारण ही नहीं बल्कि उनके अंदर मौजूद आत्मविश्वास से फूटता था। उनमें एक कुदरती आकर्षण था। वे लुभावने होने के साथ आक्रामक दिखते थे। बॉण्ड फिल्मों के निर्माता अलबर्ट ब्रोकोली उन्हें साहसी और दृढ़निश्चयी बताते थे। हैरी साल्ट्जमैन ने कहा, कॉनेरी जंगल के एक बड़े शेर के समान चलते हैं। बॉण्ड को संवारने का श्रेय कॉनेरी की शुरुआती फिल्मों के डायरेक्टर टेरेंस यंग को है। उन्होंने कॉनरी को जेम्स बॉण्ड के किरदार में ढाला। कैम्ब्रिज में पढ़े यंग आलीशान जिंदगी जीने के शौकीन थे। वे स्पष्टवादी थे। स्टंट डायरेक्टर जार्ज लीच कहते हैं, यंग निर्मम थे। सभ्य तरीके से सख्ती दिखाते थे।
1962 में जेम्स बॉण्ड सीरीज की पहली फिल्म डॉ.नो में कॉनरी थोड़े अनिश्चय से घिरे लगते थे। 1963 में फ्राम रशिया विद लव में उन्होंने सुधार किया। 1964 में गोल्डफिंगर के साथ कॉनेरी और बॉण्ड का व्यक्तित्व एकाकार हो गया। कॉनेरी कहते थे, बॉण्ड फिल्में एक्टर के रूप में परीक्षा नहीं लेती हैं। उनमें रग्बी खिलाड़ी के समान कड़ी मेहनत होती है। आपको 18 सप्ताह तक तैरना और जोर आजमाइश करनी पड़ती है। थंडरबॉल रिलीज होने के बाद कॉनरी ने कहा अब वे रास्ता बदलना चाहते हैं। वे किरदार और संवादों पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं। 1970 में बॉण्ड सीरीज से बाहर निकलने के बाद वे फिर डायमंड्स आर फॉर एवर फिल्म के साथ वापस आए। कॉनरी ने एक बार उन्हें अमर बनने वाले पात्र को एक संकट, एक विशेषाधिकार, एक मजाक और एक चुनौती बताया था।
ग्लोबल आयुष मेला के आयोजन में एसोचेम ने की आयुष मंत्रालय की मदद
कोलकाता : आयुर्वेद भारत की प्राचीन और कारगर उपचार पद्धति है। कोरोना काल में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखायी पड़ा। इसे और बड़े फलक पर ले जाने के लिए हाल ही में आयुष मंत्रालय द्वारा ग्लोबल आयुषमेला आयोजित हुआ और इस आयोजन में ऐसोचेम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। विशेषज्ञों ने इस बात को स्वीकार किया कि “ग्लोबल आयुषमेला” में कहा कि कोरोना आयुर्वेद और योग आदि की प्रभावकारिता और प्रासंगिकता को प्रदर्शित करने के लिए भेष में एक आशीर्वाद साबित हुआ है। पूरी दुनिया को आधुनिक समय जो अब नई रोशनी में देखने लगा है।
एसोचैम ने भारत सरकार, आयुष मंत्रालय, भारत को ‘ग्लोबल आयुषमेला’ आयोजित करने के लिए, एक तीन दिवसीय आभासी एक्सपो का आयोजन करने के लिए, एक मंच योग्य हिस्सेदारी धारकों को नेटवर्क प्रदान करने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने और उद्योग के नेताओं को सम्मानित करने के लिए भागीदारी की । तीन दिवसीय कार्यक्रम में सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के प्रमुख व्यक्तित्वों और विशेषज्ञों का एक समूह शामिल जिसने पैनल चर्चा, व्याख्यान और प्रासंगिक विषयों पर बातचीत की। ऐसोचेम द्वारा संकलित ‘उत्तर पूर्व के लिए ग्रामीण विकास के लिए औषधीय पौधे ’नामक एक शोध रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्य़ालय के राज्य मंत्री तथा प्रमुख अतिथि डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रदान की गयी। आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा ने इस अवसर पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि
आयुर्वेदिक प्रतिरक्षा बढ़ाने के क्षेत्र में भारत का गढ़ हमें वर्तमान और भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए एक मजबूत स्थिति में रखता है। सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इस उभरते उद्योग की वृद्धि का समर्थन कर रही है और 4000 करोड़ की घोषणा की गयी है, जो आयुष्मान क्षेत्र के लिए विशेष रूप से औषधीय पौधों के लिए आत्मानिर्भव्य के तहत घोषित की गयी है। ”“औषधीय पौधों की 10 लाख हेक्टेयर की खेती जल्द ही एक वास्तविकता होगी और आयुष क्षेत्र के विकास में सहायता के लिए स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर होंगे। अगले छह महीने में देश में पाँच ऐसे इन्क्यूबेशन सेंटर आएंगे। साथ ही, इस क्षेत्र में पूरे देश में 68 शोध अध्ययन किए जा रहे हैं। ये सभी मंत्रालय और सरकार की ओर से दायर अपनी सही जगह देने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। आयुष में बढ़ती दिलचस्पी के साथ, अब निजी खिलाड़ियों सहित सभी साझेदारों के लिए एक साझा आम सपने की दिशा में काम करने का समय है, जो देश में और उससे आगे की वृद्धि आयु है।
पंतजलि विश्वविद्यालय के उप कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा, ‘आज हम सीधे तौर पर एक करोड़ से अधिक परिवारों के साथ जुड़े हुए हैं और विभिन्न तरीकों से कुल मिलाकर 50 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच चुके हैं। ये सभी स्थापित चीजें हैं इसलिए मैं सभी से हमारे पारंपरिक ज्ञान और दवाओं से अधिकतम लाभ प्राप्त करने का अनुरोध करता हूँ। ”
“अब लोगों ने कोरोनिल को एक निवारक दवा के रूप में और एक सुरक्षा कवच के रूप में भी स्वीकार कर लिया है। मुझे यह साझा करने में खुशी हो रही है कि प्रसिद्ध अणु अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ने कोरोनिल शोध कार्य को स्वीकार कर लिया है और एक या दो दिन में उनकी वेबसाइट पर प्रकाशित होगा। इससे न केवल कोरोनिल बल्कि इसके पीछे जाने वाले व्यापक शोध कार्य को और अधिक स्वीकृति मिलेगी। ” उसने जोड़ा।
भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी की भारतीय प्रणालियों की सार्वभौमिक अच्छाई और लाभों के बारे में बात करते हुए, डॉ। निरंजनहिरनंदानी, अध्यक्ष एसोचैम ने कहा, “आयुर्वेद और प्रतिरक्षा कोरोनोवायरस के साथ लड़ाई के लिए एक शाखा है। हमें एक समग्र अनुमोदन की आवश्यकता है।
एसोचेम देगा रियल एस्टेट और ग्रीन बिल्डिंग सेक्टर में पुरस्कार
कोलकाता : एसोचेम और केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ अनूठी पहल की है। भारत के शीर्ष उद्योग निकाय ने भारत के पहले रियल्टी एंड सस्टेनेबिलिटी कंफ्लुएंस एंड अवार्ड्स 2020 की घोषणा की है, जो रियल एस्टेट कम्पनियों तथा पेशेवरों के योगदान को पहचानने के लिए है। 27 नवम्बर से 3 दिसम्बर 2020 तक 7 दिनों का लंबा मेगा प्लेटफॉर्म उन कुछ प्रमुख मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा जो इन क्षेत्रों में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं और विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों पर विचार-विमर्श करने के लिए हितधारकों, नीति निर्माताओं और उद्योग के नेताओं को एक वैश्विक मंच प्रदान करेंगे। रियल एस्टेट क्षेत्र की वृद्धि और स्थिरता के लिए।
एसोचेम के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरनंदानी ने इस पहल की घोषणा करते हुए बताया कि कोविड -19 से पहले, अचल संपत्ति के बुनियादी ढांचे पट्टे पर देने वाली गतिविधि, नयी परियोजनाओं की शुरुआत, उपलब्ध पूंजी और बाजार की मजबूत मांग के साथ मजबूत थे। महामारी के कारण, रियल एस्टेट क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। काम की कमी के कारण अपने गृहनगर में श्रम का प्रवासन भी अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ा और अचल संपत्ति में भावनाओं को प्रभावित किया। हालांकि, हाल ही में अर्थव्यवस्था के फिर से खोलने के कारण, रियल्टी क्षेत्र ने भी पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ”एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा, “भारत में रियल एस्टेट सेक्टर 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। 2025 तक, यह देश की जीडीपी में 13 प्रतिशत का योगदान देगा। इस क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाने के लिए हितधारकों के लिए इस तरह एक मंच पर आना महत्वपूर्ण है। मेरा दृढ़ता से मानना है कि इस क्षेत्र में बहुत सी नौकरियों का उत्पादन करने और हमारी अर्थव्यवस्था को आवश्यक गति प्रदान करने की क्षमता है। ”जेम एसोचेम, नारेडको.सीबीआरई और हीरानंदानी ग्रुपहावे जैसे विभिन्न शीर्ष संगठनों ने समय पर पहल के लिए हाथ मिलाया।
डॉ. बी. बी. सिंह को मिलेगा ग्लोबल टीचर अवार्ड 2020
कोलकाता : महानगर के आदर्श हिन्दी हाई स्कूल, खिदिरपुर. उच्च माध्यमिक के हेडमास्टर डॉ. बृज भूषण सिंह को 2020 का ग्लोबर टीचर अवार्ड प्रदान किये जाने की घोषणा की गयी है। डॉ. सिंह को सारी दुनिया के 110 देशों की सूची से चुने गये शिक्षकों में शामिल हैं, जिनको यह सम्मान मिलेगा।

ए के एस एडुकेशन अवार्ड्स द्वारा दिया जाने वाले इस पुरस्कार का तीसरा संस्करण आगामी 22 नवम्बर को आयोजित होगा। गौरतलब है कि डॉ. सिंह को एनसीसी में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भी सराहना मिलती रही है। इस ऑनलाइन पुरस्कार समारोह का सोशल मीडिया माध्यमों पर प्रसारण होगा और लाइव स्ट्रीमिंग होगी।
ज्योतिषी भाग्य वक्ता होता है, भाग्य विधाता नहीं
मुम्बई की रहने वाली सुनीता सुराना एक साथ कई क्षेत्रों मे सक्रिय हैं। वे नेचुरोपैथी डॉक्टर और ज्योतिषी हैं मगर उनको रसोई और ग्राफिक्स दोनों का शौक है। युग्म ऐस्ट्रो कन्सल्टेंसी और क्रेजी फॉर चॉकलेट्स की प्रमुख सुनीता सुराना से शुभजिता की बातचीत हुई, पेश हैं प्रमुख अंश –
अपने बारे में बताइये?
मेरा नाम सुनीता सुराना है। मैं एक नेचुरोपैथी डॉक्टर हूँ। 9 साल से ज्योतिष और वास्तुशास्त्र का अभ्यास कर रही हूँ।
आप ज्योतिषी हैं, यहाँ महिलाएं कम हैं, आपका अनुभव कैसा रहा?
सही है ज्योतिष के क्षेत्र में महिलाएं बहुत काम हैं। हालांकि टैरो कार्ड्स पढ़ने के क्षेत्र में बहुत महिलाएं हैं पर वैदिक ज्योतिष और वास्तु के क्षेत्र में महिलाएं कम दिखती हैं। बतौर महिला इस क्षेत्र में मुझे अपनी पहचान बनाने में वक़्त लगा लेकिन सटीक भविष्यवाणी एवं लोगो की समस्याओं के प्रति सफतापूर्वक किए गए बदलावों ने रास्ते सुगम बना दिए।
वास्तु और कुंडली एक दूसरे की पूरक हैं।
ज्योतिष में विज्ञान और अन्ध विश्वास को लेकर संशय है?
अंकशास्त्र भी कहीं कहीं पर व्यक्ति को पहचानने में मदद करता है। पर मेरा अनुभव कुंडली और वास्तु को एक साथ लेकर चलने में सटीक रहा। कभी कभी एक दूसरे के अभाव में भविष्यवाणी सही नहीं बैठती। यह सत्य है कि आज भी कुछ लोग ज्योतिष को अन्धविश्वास मानते हैं। पर मैं अपने अनुभव से यह दावे के साथ कह सकती हूं कि यह सत्य है। सही गणना करने पर मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन किए जा सकते हैं। उनकी तकलीफों को कम किया जा सकता है।
ज्योतिष क्या भाग्यवाद सिखाता है?
ज्योतिषी भाग्य वक्ता होता है भाग्य विधाता नहीं। एक सुयोग्य ज्योतिषी जीवन के अंधेरे रास्तों में रोशनी डाल सकता है। आने वाली समस्याओं से अवगत करा कर आपको उनसे लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।
आप किस तरह से काम करती हैं और कौन सी पद्धति आपको प्रिय है?
एक सफल ज्योतिषी बनने के लिए ध्यान यानी मेडिटेशन अहम भूमिका निभाता है। सुबह 5 बजे ध्यान लगाना मैं कभी नहीं भूलती। यही वजह है कि अपने कार्य के साथ साथ अपनी रुचि जैसे खाना पकाना और ग्राफिक्स डिजाइनिंग को भी समय दे पाती हूं जो मुझे खुशी देता है या यूँ कहें स्वयं से मिलवाता है। सुकून मिलता है।
आपकी भावी योजना क्या है?
इतने वर्षों के कार्य के बाद एक इच्छा ने जन्म लिया है कि हमारे भारत देश में कोई भी व्यक्ति वास्तु की जानकारी के अभाव में किसी तकलीफ में ना रहे। मैं सभी भाई बहन को उनके जीवन की प्राथमिक वास्तु से जुड़ी समस्याओं से दूर करना चाहती हूं।
आपकी भावी योजना क्या है?
मैं शुभजिता के सभी पाठकों से निवेदन करना चाहती हूँ अपने जीवन की मूल समस्या को ढूंढ कर उसका निवारण करें न किउसके साथ रहने की आदत डालें। अगर आपको समस्या पता है तो उसका निवारण भी है। उसे ढूंढे और खुशहाल जीवन व्यतीत करें।




