Friday, April 10, 2026
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विप्रो के प्रेमजी 2019-20 में परमार्थ कार्यों के लिये उदारता से दान देने वालों में सबसे आगे

कोलकाता : सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी विप्रो के अजीम प्रेमजी परमार्थ कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। उन्हेंने पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में परोपकार कार्यों के लिये हर दिन 22 करोड़ रुपये यानी कुल मिलाकर 7,904 करोड़ रुपये का दान दिया और इस मामले में सूची में सबसे ऊपर रहे हैं। हारून रिपोर्ट इंडिया और एडेलगिव फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार प्रेमजी ने इस मामले में पूर्व में आगे रहे एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शिव नादर को पीछे छोड़ दिया है।

नाडर ने 2019-20 में 795 करोड़ रुपये का दान दिया जबकि एक साल पहले यह राशि 826 करोड़ रुपये थी। इससे पूर्व वित्त वर्ष यानी 2018-19 में प्रेमजी ने 426 करोड़ रुपये का दान दिया था। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी सूची में तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने पिछले वित्त वर्ष में 458 करोड़ रुपये का दान दिया जो एक साल पहले 402 करोड़ रुपये था। कोविड-19 महामारी फैलने के साथ इसकी रोकथाम के लिये दिग्गज उद्योगपतियों ने अपनी तरफ से पूरा योगदान दिया। इस मामले में टाटा संस ने सर्वाधिक 1,500 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जतायी जबकि प्रेमजी ने 1,125 करोड़ रुपये का योगदान दिया। वहीं अंबानी का योगदान 510 करोड़ रुपये का रहा। कंपनियों का कोरोना महामारी की रोकथाम के लिये योगदान में ज्यादातर हिस्सा पीएम-केयर्स फंड (प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन राहत कोष) में गया।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इसमें 500 करोड़ रुपये का योगदान दिया जबकि बिडला समूह ने 400 करोड़ रुपये दिये। टाटा के कुल योगदान में 500 करोड़ रुपये का पीम केयर्स फंड में योगदान शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि जिन लोगों ने 10 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया, उनकी संख्या मामूली रूप से बढ़कर 2019-20 में 78 रही जो एक साल पहले 72 थी। सूची में इन्फोसिस के नंदन निलेकणि (159 करोड़ रुपये), एस गोपाल कृष्णन (50 करोड़ रुपये) और एस डी शिबूलाल (32 करोड़ रुपये) भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार दानदाताओं की संख्या के लिहाज से मुम्बई अव्वल रहा। यहां के 36 लोगों ने परमार्थ कार्यों के लिये दान दिये। उसके बाद क्रमश: नयी दिल्ली (20) और बेंगलुरू का स्थान रहा। ई-वाणिज्य कंपनी फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक बिन्नी बंसल सबसे कम उम्र 37 साल के दानदाता रहे। उन्होंने 5.3 करोड़ रुपये का योगदान दिया। सूची में दानदाताओं की औसत उम्र 66 साल रही।

ओरिएंटेशन 2020 में भाग लिया भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने

कोलकाता : विद्यार्थियों की प्रतिभा को केवल डिग्री से नहीं तौला जा सकता, उसे मंच मिलना भी जरूरी है , यदि मंच कॉलेज में मिल जाय तो छात्र या छात्रा को बाहर से कुछ सीखने की जरूरत ही नहीं है। भवानीपुर कॉलेज में फर्स्ट सेमेस्टर के विद्यार्थियों के ओरिएंटेशन 2020 कार्यक्रम को ऑन-लाइन प्रस्तुत किया गया जो यू-ट्यूब के दो भाग में विभक्त है। तीन वर्षों की शिक्षा के दौरान ग्रेजुएट होकर निकलने वाले छात्रों के व्यक्तित्व को विकसित करने के लिए डिग्री के पाठ्यक्रम के साथ साथ में कई अन्य कैरियर संबंधित विषयों को सिखाया जाता है। सन् 1966 में स्थापित भवानीपुर कॉलेज कोलकाता महानगर के महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास और अपने कैरियर को विकसित करने के लिए अपना एक विशेष स्थान रखता  है। कॉलेज के डीन प्रो. दिलीप शाह ने फर्स्ट सेमेस्टर के नए दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का कॉलेज में स्वागत किया और  कॉलेज में अकादमिक शिक्षा से इतर चलने वाले लगभग 17 से अधिक कलेक्टिव विषयों की चर्चा की। प्रो. शाह ने बताया कि इंटरप्रिनरशिप किसी डिग्री से सरोकार नहीं रखती, इसे किसी भी स्ट्रीम के विद्यार्थी सीख सकते हैं। ये डिग्री के साथ भविष्य के लिए कैरियर ओरिएंटेड कोर्सेज हैं। इसे बीए बीएससी बीकॉम बीबीए के सभी विद्यार्थी प्राप्त कर सकते हैं। ओरिएंटेशन सेशन अकादमिक सत्र नहीं है, यह मूल्यों और व्यक्तित्व विकास के साथ साथ कैरियर ओरिएंटेड है।यू-ट्यूब में इसको दो दिनों में पंद्रह हजार लोगों द्वारा देखा गया जो कॉलेज के लिए गौरव की बात है।
17 से अधिक कलेक्टिव हैं जिसका उद्देश्य है सीखना, पढ़ना, नेतृत्व और स्वावलंबन की सीख देना । कॉमर्स में कैरियर के लिए कौन-सा विषय लेना है, कब और कैसे लेना है, विदेश में कैरियर के क्या अॉब्शन हैं आदि विषयों को बताने के लिए विशेषज्ञों की फैकल्टी टीम है। वर्किंग विथ जीएसटी, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन, फाइनेंशियल प्लानिंग, कॉमर्स प्लस, डेटा एनालिटिक, गूगल ट्रेनर, स्टार्ट अप ट्रेनिंग आदि के विषय में विद्यार्थियों को कॉलेज में ही शिक्षा देने का प्रावधान है।इन सभी की जानकारी फैकल्टी सदस्यों ने अपने वीडियो द्वारा दी।
सभी कलेक्टिव के एक वर्ष में लगभग 200 से अधिक इवेंट्स होते हैं जिसमें क्रिसेंडो (संगीत), फ्लेम (नृत्य), एसेम्बली आॉफ नेशन, इन एक्ट (थियेटर), बुलीस आइज (स्टॉक मार्केट) आर्ट इन मी (क्राफ्ट वर्क) आदि विभिन्न कलेक्टिव के विद्यार्थियों द्वारा संयोजन किया जाता हैं। प्रो. शाह ने विद्यार्थियों को अपनी सहज और प्रभावशाली भाषा में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ साथ कैरियर बनाने से संबंधित जानकारी दी जो वर्तमान समय की मांग है। ये विद्यार्थी के एटीट्यूड पर निर्भर करता है कि वे कौन से रंग का चुनाव करते हैं किस दिशा और क्षेत्र का चयन करते हैं।
यू- ट्यूब के एक भाग में बीए बीबीए और बीएससी के विद्यार्थियों के लिए है वहीं दूसरे भाग में बीकॉम के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया गया।
सबसे अधिक महत्वपूर्ण है भवानीपुर कॉलेज का प्लेसमेंट सेल जो पांच सालों से बड़ी कंपनियों द्वारा विद्यार्थियों का प्लेसमेंट करवा रहा है जिसमें देश की प्रमुख कंपनियां आटीसी, टाटा इंडिगो आदि अनेक कंपनियां आती हैं। इस सेल की संयोजक प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी हैं।  डीन आफिस में इसका रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है।
आर्ट एंड मी , एआन, बुल्स आइज, क्रीसेंडो, ईको इन एक्ट, एक्सप्रेशन, फैशन, फ्लेम, एनसीसी, एन एस एस, फिनोमिनन, क्विजार्ड, सेतु, उत्सव, वॉक्स पोप्यूली, नैक्सस, टीडेक्स आदि अनेक ग्रुपों में से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा के आधार पर मंच प्रदान किए जाते हैं जो   प्रतिभाशाली छात्रों को निखारने का अवसर देते हैं।
डीन प्रो. शाह ने प्रश्नोत्तर सेशन में चैट बॉक्स में आए प्रश्नों के उत्तर दिए। फैकल्टी विवेक पटवारी ने विद्यार्थियों के प्रश्न जैसे क्या इन कलेक्टिव के लिए किसी प्रकार की फीस है?प्रो शाह ने कहा कि कॉलेज सभी खर्च  वहन करता है बशर्ते कोई क्लास लेते हैं तो उसके वाजिब शुल्क लगते हैं। वहीं एक कलेक्टिव वाले दूसरे कलेक्टिव में भी जा सकते हैं। लिंक ऑन-लाइन दी गई है जिसमें वे अपने विषय का चुनाव भर सकते हैं।
एनसीसी(जल थल और वायुसेना), एन एस एस और स्पोर्ट्स के अलावा पारंपरिक त्योहार जैसे धमाल, फागुन, सरस्वती पूजा, पंद्रह अगस्त, 26 जनवरी, शिक्षक दिवस, प्रेमचंद जयंती, पुस्तकों पर चर्चा आदि अनेक कार्यक्रम किए जाते हैं।
इंडस्ट्रीयल विजिट के साथ साथ विद्यार्थियों का मनोरंजन भी होता है। ओरिएंटेशन 2020 कार्यक्रम में सभी नये विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

 

वीरांगना मिलनोत्सव सम्पन्न

शीघ्र घोषित की जाएंगी भावी योजनाएं

कोलकाता/टीटागढ़ः अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन पश्चिम बंगाल का गत शनिवार की शाम वीरांगना मिलनोत्सव टीटागढ़ में सम्पन्न हुआ। इसमें प्रदेश इकाई की वीरांगनाओं में भाग लिया व संगठन की भावी योजनाओं की रूपरेखा तैयारी की गयी। संगठन की प्रदेश अध्य़क्ष एवं विख्यात गायिका प्रतिभा सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी संकट के कारण पिछले कुछ महीनों से संगठन की गतिविधियों ठप पड़ गयी थीं। इस बीच कुछ बैठकों व सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए मगर वे वर्चुअल थे। अब कोरोना संकट के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए कुछ कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

मिलनोत्सव में विभिन्न सदस्यों ने अपने अपने सुझाव रखे कि कैसे सामाजिक दूरी का अधिकाधिक पालन करते हुए भी समाज सेवा के भावी कार्यक्रमों को अंजाम दिया जाये। इस अवसर पर सुनीता सिंह, आशा सिंह, इंदु सिंह, ललिता सिंह, विद्या सिंह, जयश्री सिंह, सुलेखा सिंह, शकुंतला साव, सुजाता गुप्ता, अनिता साव के प्रस्तावों पर विचार विमर्श किया गया। भावी कार्यक्रमों की घोषणा जल्द की जायेगी।

थियेटरों और ओटीटी पर आ रही है ‘स्मेल’

कोलकाता : फिल्म ‘स्मेल’ थियेटर और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होगी। कहानी एक तस्वीर और उसके चित्रकार की हत्या और उससे जुड़े रहस्यों के आस – पास घूमती है। यह एक थ्रिलर फिल्म होगी जिसमें गन्ध की भूमिका महत्वपूर्ण है। फिल्म में अमित चन्दा और सायरी साहा नामक नये कलाकारों को प्रमुख भूमिका में लिया गया है। महत्वपूर्ण भूमिकाओं में राजेश शर्मा, जॉय सेनगुप्ता, इन्द्रनील सेनगुप्ता, सुब्रत दत्ता समेत कई अन्य कलाकार हैं। फिल्म के प्रस्तुतकर्ता महक इन्टरटेन्मेंट हैं और निर्माता राज मलिक हैं। फिल्म के जनवरी में प्रदर्शित होने की उम्मीद है।

कोरोना के बीच धनतेरस के स्वागत को तैयार आभूषणों का संसार

आभूषणों का जिक्र हो तो बऊबाजार का जिक्र चल ही पड़ता है। बऊबाजार ज्वेलरी हब है और आज बी.बी. गांगुली स्ट्रीट के नाम से जाना जाता है। यह बेहद पुराना औऱ ऐतिहासिक बाजार है जो इतिहास का महत्वपूर्ण पन्ना है। पड़ताल में आज शुभजिता बऊबाजार ज्वेलरी हब की ओर हम चलते हैं। शुद्ध सोने के आभूषणों की कारीगरी के लिए यह बाजार प्रसिद्ध है और हल्के आभूषण बनाये जाते हैं। कोरोना की मार इस बाजार पर पड़ी है मगर सामने धनतेरस है तो आभूषणों का यह संसार उदास कैसे रह सकता है..तो बऊबाजार एक बार फिर तैयार हो रहा है। सुषमा कनुप्रिया की पड़ताल आपके सामने है – 

बिंग बेफिकर ने उतारे चीनी रहित उत्पाद

कोलकाता : दिवाली आ रही है और मिठाइयों को लेकर लोगों की माँग भी बढ़ रही है मगर सेहत का ध्यान रखने वाले मिठाइयों को लेकर असमंजस में हैं। अब बिंग बेफिकर यह अड़चन दूर कर रहा है और इसने चीन रहित स्वादिष्ट डेयरी उत्पाद बाजार में उतारे हैं। इनमें से कुछ वेगान और ग्लूटेन रहित हैं और इनमें ओट्स और सूखे मेवे भी हैं। बिंग बेफिकर के मेन्यू में है – 9 अलग फ्लेवर वाला रम बॉल्स, लोडेड चॉको- चिप ब्राउनी, बॉम्बबोलूनी जैसे उत्पाद। बिंगे के पास उपहार बॉक्स भी हैं जिसमें चॉको ब्लिस बॉक्स, ड्राई फ्रूट गुडी बॉक्स, (चीनी रहित ओट्स और सूखे मेवों से भरे लड्डू) रम बॉल्स के साथ, चॉकलेट्स टार्ट, ओट्स। ये सभी उत्पाद स्वीगी और जोमेटो पर उपलब्ध होंगे। बिंग बेफिकर की संस्थापक अनीषा मोहता ने कहा कि दिवाली के मौके को देखते हुए ब्रांड स्वाद और सेहत को साथ रख रहा है।

विद्यार्थियों की सहायता करेगा द एन्थेना एडुकेशन ऐप

कोलकाता : द एन्थेना एडुकेशन ऐप सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य सामग्री दे रहा है। खासकर जरूरतमंद विद्यार्थियों का खास रखा गया है। यह विद्यार्थियों को बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी टिप्स दे रहा है जिनमें परीक्षाओं, फॉर्म्स, नतीजों से सम्बन्धित जानकारी भी होगी। विषय विशेषज्ञ विद्यार्थियों की सहायता और कॅरियर सम्बन्धी मार्गदर्शन करेंगे। द एन्थेना एडुकेशन ऐफ में सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों तथा उत्तर सहित क्वेश्चन बैंक भी है। विद्यार्थी लाइव डिस्कशन और संशय मिटाने के लिए विशेष सत्र का लाभ उठा सकते हैं। जेईई औऱ नीट के उम्मीदवारों के लिए अलग से व्यवस्था है। बच्चों के लिए आर्ट और क्राफ्ट वीडियो उपलब्ध हैं और मेधावी परीक्षार्थियों के लिए छात्रवृत्ति परीक्षा है। विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार दिये जाएंगे। यह ऐप आविष्कार के लिए विद्यार्थियों को फंड भी मुहैया करवाएगा। एन्थेना एडुकेशन ऐप के संस्थापक राजीव कुमार दत्ता ने कहा कि समाज के लिए उपयोगी किसी भी परियोजना होने पर उसका आकलन कर उसकी फंडिंग की जाएगी। जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद करने पर विशेष जोर है।

 

ऐ सखी सुन – देवी के देश में बाजार की माया से है पूजा और व्रत की महिमा

गीता दूबे

सभी सखियों को नमस्कार और करवा चौथ की शुभकामनाएँ । अरे, इतना चकित क्यों हो रही हो सखियों, “तीज” और “करवा चौथ” तो हम औरतों का राष्ट्रीय त्यौहार है। हम भले ही सब त्यौहार भूल जाएँ लेकिन “तीज” और “करवा चौथ” भूल गए तो इसकी सजा सात जन्मों तक भुगतनी पड़ेगी। कभी आपने ध्यान दिया है सखी, त्यौहार शब्द के आगे एक और शब्द जुड़ा है, वह है तीज। तो बूझिए तो जरा कि इसका मतलब क्या है, इसका अर्थ है भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, भारतवर्ष की नारियों द्वारा बड़े स्तर पर मनाया जाने वाला त्यौहार या व्रत जिस दिन तमाम सती- साध्वी नारियाँ पति की लंबी उम्र की कामना के लिए पूरे चौबीस घंटे का निर्जला उपवास करती हैं। घर भर को पका कर खिलाने के बाद खुद भूखा रहकर सज -संवर‌ कर शिव पार्वती की पूजा करती हैं ताकि उनका सुहाग अखंड रहे। भले ही बहुत से हास्य कवि जो चुटकुले नुमा कविताएँ सुनाकर मंच ही नहीं श्रोताओं का  भी ह्रदय भी, क्षण भर के लिए ही क्यों न सही जीत लेते हैं, मंच पर से इस व्रत का मजाक उड़ाते हुए कहते हैं, “गाय के उपवास करने पर बैल की सेहत पर भला क्या असर पड़ता है” और पुरूषों के साथ स्त्रियाँ भी यह सुनकर पेट पकड़कर हँसती हैं, लेकिन इन कवियों और श्रोता पुरूषों की  पत्नियाँ अगर उनके लिए यदि व्रत उपवास करना छोड़ दे तो वह निश्चित तौर भी चिंता के मारे दिल का रोग पाल लेंगे। तो इसीलिए त्यौहार शब्द के आगे इस “तीज” शब्द को स्थायी रूप से जोड़ दिया गया है ताकि इसे किसी भी तरह  विस्मृत न किया जा सके। अर्थात सारे त्यौहार एक तरफ तो तीज दूसरी तरफ। हालांकि यह व्रत करवा चौथ की तुलना में ज्यादा कठिन है लेकिन इसकी सुख्याति उसकी तुलना में कम है। देखो सखी, वह जमाना गया जब अल्लाह के मेहरबान होने से गधे पहलवान हुआ करते थे। अब नये दौर का नया मुहावरा है कि “मीडिया मेहरबान तो गधा पहलवान” तो मीडिया करवा चौथ के महिमामंडन में जोर शोर से लगा हुआ है। अब “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” की सिमरन अर्थात काजोल अगर सोलह शृंगार करके, अपने हाथ में पूजा की थाली लेकर गीत गाएगी, “तेरे हाथ से पीकर पानी, दासी से बण जाऊं रानी” और छल कौशल से शाहरुख जैसे नायक के हाथों पानी पीकर अंततः अपनी मनचाही जिंदगी जीने में सफल हो जाएगी तो किस लड़की का विश्वास करवा चौथ पर पुख्ता नहीं होगा। आज हर लड़की और लड़का अपने आपको फिल्मी नायक नायिका से कम नहीं समझते और फिल्मी नायिकाएँ तो करवा चौथ ही करती दिखाई जाती हैं तीज वीज नहीं। एक आध भोजपुरी सिनेमा में इसकी महिमा का गान होता होगा, तो हो। खैर सखी, असली मुद्दा तो‌ यह है कि इस सर्वव्यापी मीडिया की बदौलत करवा चौथ हम नारियों का राष्ट्रीय त्यौहार बन गया है। शायद इसीलिए जो त्योहार कभी पंजाब, राजस्थान अथवा उत्तर प्रदेश के एक अंश विशेष में मनाया जाता था, आज देश भर की स्त्रियों  द्वारा धूम धाम से मनाया जाता है। मीडिया ही नहीं आजकल बाजार ने भी सर्वशक्तिमान ईश्वर की जगह ले ली है और इसे राष्ट्रीय त्यौहार बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है। इस अवसर पर बाजार महिलाओं के सामानों पर डिस्काउंट देकर उन्हें लूटता है तो बड़े- बड़े रेस्टोरेंट अपने यहाँ टेबल बुक कराने पर आकर्षक छूट का ललचाने वाला ऑफर भी देते हैं। वैसे भी मोहल्लेदारी का जमाना बीत चुका है जब मोहल्ले भर की औरतें किसी एक के पक्के घर की छत पर चाँद देखकर पूजा किया करती थीं। वैश्विक आंधी में चाँद भी वैश्विक हो गया हे जो किसी शानदार होटल की छत से बेहद लुभावना और आकर्षक दिखाई देता है और साथ में ढेर सारे चित्ताकर्षक प्रस्ताव भी लाता है, मसलन,.”हमारे होटल की छत से चाँद देखें और सपरिवार रात्रि भोजन पर आकर्षक छूट के साथ ही दिलकश उपहार भी जीतें।” 

सखियों, कभी आपने सोचा है कि शक्ति पूजा के बीच में यह करवा चौथ का पावन पर्व क्यों आता है ? सोचिए तो सही, एक या दो नहीं बंगाल में तो तीन- तीन देवियों की पूजा अर्थात दुर्गा, लक्ष्मी और काली पूजा के बीच मध्यमणि सा सुशोभित है, यह पति पूजा का पर्व।  देवियों की पूजा तो पूरा देश करता है लेकिन पतिदेव की पूजा सिर्फ घर की लक्ष्मी ही करती है। हाँ, हमारे इस महान नारीपूजक देश में पत्नी देवी की पूजा का कोई त्यौहार नहीं है क्योंकि या तो वह देवी है या फिर पाँव की जूती। घर की लक्ष्मी तो उसे कभी- कभार फुसलाने, बहलाने के लिए कह दिया जाता है। 

सखियों, दिमाग पर जोर डालिए और सोचिए कि आखिर पति पूजा के त्यौहार ये क्यों और कब से मनाए जाते होंगे। इन त्यौहारों की पृष्ठभूमि में हमारी सामाजिक आर्थिक व्यवस्था है। मानव सभ्यता के आरंभिक चरण में या कबीलाई संस्कृति में इस तरह के त्यौहारों का अस्तित्व नहीं था क्योंकि वहाँ स्त्री- पुरूष दोनों कंधे से कंधा मिलाकर काम करते थे। लेकिन  सभ्यता के बदलते दौर में जब समाज में गौरवशाली विवाह संस्था का जन्म हुआ और क्रमशः जब आर्थिक मोर्चा पूरी तरह से पुरूष ने संभाल लिया, वह परिवार का केन्द्र बिंदु बन गया।  घर की देहरी के अंदर कैद कर दी गई स्त्रियाँ पूरी तरह से पुरूषों पर निर्भर या उनकी आश्रित हो गईं, तब से वह उनकी सलामती और लंबी उम्र के लिए तरह -तरह के व्रत उपवास करने लगीं। चूंकि पुरूष ने उनके भरण पोषण की जिम्मेदारी उठाई इसीलिए स्त्रियाँ उसकी सलामती के लिए पूजा पाठ करने लगीं। पति पर पूर्णतया निर्भर अबलाएँ जो पति के न रहने पर पूरी तरह से अनाथ हो जातीं, उनका अपने स्वामी अर्थात पति या मालिक की सलामती के लिए व्रत उपवास करना स्वाभाविक ही था। और इस तरह पुरूष का सामाजिक रूतबा लगातार ऊपर उठता गया और स्त्रियाँ इस पुरूषतांत्रिक समाज में अनवरत शोषण की आदी होती गईं। बदलते समय के साथ स्त्रियाँ पहले साक्षर हुईं फिर शिक्षित हुईं और धीरे धीरे आर्थिक स्वतंत्रता भी अर्जित की लेकिन मानसिक गुलामी से मुक्त होने में शायद थोड़ा वक्त और लगेगा। इसीलिए सखियों औरतों की आजादी सिर्फ पर्स से नहीं शुरू होती बल्कि अपनी रूढ़ियों और पारंपरिक बेड़ियों से मुक्त होना भी आवश्यक है। तो सखियों, थोड़ा सोचिए कि आपके लिए भी व्रत रखने की परंपरा समाज के किसी हिस्से में है क्या ? हाँ, आजकल बहुत से उदारमना पति लाड़ प्यार में अपनी पत्नी के लिए करवा चौथ का व्रत जरूर रखने लगे हैं लेकिन आनुपातिक स्थिति अभी भी विषम ही है। आप, थोड़ा सोचिए सखियों। आप से अगले हफ्ते फिर मुलाकात होगी।  

 

खुशियों में भरें मिठाई की मिठास

शेफ सुनीता सुराना, क्रेजी फॉर चॉकलेट्स

सुनहरा दानेदार मोहन थाल
सामग्री : २ कटोरी मोटा बेसन, 1/4 चम्मच इलायची पाउडर, 1.5 कटोरी चीनी, 10 कटे हुए बादाम , 10 कटे हुए पिस्ता, 3/4 कटोरी घी, 1/2कटोरी दूध

विधि : बर्तन में बेसन छान लें। अब घी को हल्का गर्म कर लें और २ चम्मच घी और दूध बेसन में डालकर इसे आपस में अच्छी तरह मिला लें। फिर कड़ाही में बचा हुआ घी डालकर गैस पर गर्म करने रखें। कड़ाही में बेसन का मिश्रण और इलायची पाउडर डालकर चलाते हुए मध्यम आंच पर भूरा होने तक भूनें। अलग बर्तन में चीनी और पानी डालकर गैस पर धीमी आंच पर रखें. इसे 2 तार की चाशनी बनने तक पकाएं। जब भुना हुआ बेसन थोड़ा ठंडा हो जाए तो इसमें धीरे-धीरे चाशनी डालते हुए बेसन को लगातार चलाते रहें। अगर आपको मिश्रण सख्त लग रहा है तो इसमें आवश्यकतानुसार थोड़ा और दूध डालकर मिलाएं इससे मिश्रण नर्म हो जाएगा। अब मिश्रण को किसी थाली या ट्रे में डालकर फैलाएं। इसके ऊपर से बादाम और पिस्ता डालें। इसके बाद मिश्रण को चौकोर टुकड़ों में काटें। जब मोहनथाल पूरी तरह ठंडे हो जाएं तब जब चाहें मीठे में ये खास मिठाई सर्व करें।

 

सूजी के लड्डू
सामग्री :  1 कप सूजी , 1 कप शक्कर, 1/2 कप घी, 1 इलायची, 8 काजू


विधि : एक पैन गरम करें और रवा डालें, आंच कम करें और रवा को तब तक भूने जब तक अच्छी खुशबू न आ जाए, रवा रंग न बदलें और समान रूप से भूनें। इसे सुनिश्चित करने के लिए, लगातार हिलाते रहें। ठंडा करें और मिक्सर का उपयोग करके इसे बहुत महीन पाउडर में पीस लें। चीनी को एक बहुत ही महीन पाउडर में, इलायची के साथ मिलाएं। एक बड़े कटोरे में पीसा हुआ रवा और चीनी डालें। टूटे हुए काजू को घी में भूनें और इन्हें रवा और चीनी के मिश्रण में
अच्छी तरह मिलायें। थोड़ा ठंडा करें। इस मिश्रण में से छोटी-छोटी बॉल्स बना लें, इसे कसकर रोल करें, यदि मिश्रण सूखा लगे, इसमें थोड़ा दूध और गर्म घी डालें और फिर से बॉल्स बनाएं।

 

पनीर के लड्डू

सामग्री :  200 ग्राम पनीर,  3/4 कप गाढ़ा दूध, 3/4 कप चीनी,  2 नग इलायची,  2 बूंदें केवड़ा एसेंस, केसर , 1 छोटा चम्मच घी

विधि: पनीर को अच्छी तरह से अपनी उँगलियों से रगड़ें। मिक्सी के जार में क्रम्बल किया हुआ पनीर भी ले सकते हैं । इसमें कंडेन्स्ड मिल्क, दूध, केसर और इलायची मिलाएं। इसे एक चिकने पेस्ट होने तक पीसें। एक बड़ी कड़ाही में, पनीर का पेस्ट लें और उसमें 1 छोटा चम्मच घी डालें। आंच को मध्यम कर दें और लगातार हिलाते रहें जब तक कि मिश्रण गाढ़ा न हो जाए और पैन के किनारों को छोड़ते हुए एक साथ हो जाए। घी लगी प्लेट में निकाल दें । मिश्रण को अच्छी तरह से गूंध लें और एक साथ ले आएं। अब केवड़ा एसेंस मिला लें और अपना मनपसंद आकार देकर केसर और पिस्ता से सजा कर सर्व करें।

साल का स्वर्णिम समय, गोल्ड ईटीएफ से बनाएं इसे और भी सुनहरा

डी.पी. सिंह, चीफ बिजनेस ऑफिसर, एस बी आई म्यूचुअल फंड

यह साल का ऐसा समय है जबकि हम साथ मिलकर परिवार और दोस्ती के जज़्बे का जश्न मनाते हैं। यह साल का ऐसा भी समय है जबकि हम अंदर-बाहर की सफाई करते हैं जिसका लक्ष्य होता है, “पुराने को विदा, नए का स्वागत।” भारत में त्योहारी मौसम आम तौर पर अक्तूबर अंत से शुरू होकर साल के आखिर तक चलता है और ख़रीदारों तथा दुकानदारों के लिए बहुत अच्छा मौका होता है। इस पवित्र मौके पर घर सजाये जाते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान होता है, नये कपड़े खरीदे जाते हैं और नए उपकरण, गैजेट, यहाँ तक कि वाहन भी लिए जाते हैं।

साल का यह समय ऑनलाइन ख़रीदारी उत्सव का भी होता है जो इस त्योहारी उत्साह की मांग पूरी करते हैं। इस साल विशेष तौर पर ऑनलाइन शॉपिंग का विशेष तौर पर प्रसार हुआ है क्योंकि कोरोना वाइरस के डर से लोग घर के बाहर नहीं निकल रहे और दुकानों पर जाकर ख़रीदारी करने से बच रहे हैं। मीडिया में आई रपट के मुताबिक लगभग 85 प्रतिशत लोग ऑनलाइन शॉपिंग पसंद करते हैं।

मौजूदा ऑनलाइन शॉपिंग उत्सव की सफलता का श्रेय लोगों में लॉकडाउन आदि की वजह से जमा मांग और वायरस को त्योहारी मौसम को प्रभावित न करने देने और परंपरा का पालन करने की दृढ़ता हो दिया जा सकता है।

सोने की ऑनलाइन ख़रीदारी

त्योहारी मौसम में एक जो पवित्र काम होता है वह है किसी भी रूप में सोने की ख़रीदारी। पारंपरिक तौर पर लोग सोना जेवरात और सोने के सिक्के के रूप में खरीदना ज़्यादा पसंद करते हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में डिजिटल फ़ारमैट में सोने की मांग में बढ़ोतरी दिखी है।

सोने को हमेशा महत्वपूर्ण खर्च के तौर पर देखा जाता है और इसके लिए बहुत योजना बनाने की ज़रूरत होती है। लेकिन डिजिटल सोने की सुविधा है कि यह कम राशि और अपनी सुविधानुसार मात्रा में ऑनलाइन खरीदा जा सकता है।

सोने के जेवरात खरीदने का अर्थ है कि इसमें बनाने का शुल्क भी शामिल होता है और इसके साथ सुरक्षा की चिंता भी जुड़ी होती है। ये इकाइयां सोने के जेवरात के विपरीत कम मात्रा की होती हैं। साथ ही डिजिटल सोना जिस तरह की तरलता प्रदान करता है वह बहुत सुविधाजनक है क्योंकि निवेशकों के लिए इसे रीडीम करना बैंक से पैसे निकालने की तरह आसान है।

गोल्ड ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स

डिजिटल फ़ारमैट में सोना गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड ऑफ फंड्स से भी खरीदा जा सकता है। गोल्ड ईटीएफ म्यूचुअल फंड हैं जो स्टॉक एक्स्चेंज में सूचीबद्ध हैं। ये ईटीएफ सोने की रीयल टाइम कीमत का अनुसरण करते हैं और इनकी इकाइयां शेयर की तरह खरीदी तथा बेची जा सकती हैं। ईटीएफ सोना रखने का सुविधाजनक और दक्ष माध्यम है।

दीर्घकालिक स्तर पर ठोस सोने की कीमत हमेशा बढ़ेगी। हालांकि, महामारी के कारणवैश्विक वृद्धि के बारे में हाल में पैदा अनिश्चितता के बीच सोने की मांग बढ़ी है जिससे कीमत में इज़ाफ़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में गोल्ड ईटीएफ खरीदना सोना खरीदने के मुक़ाबले ज़्यादा सस्ता है।

मसलन, एक ग्राम सोने की कीमत करीब 4,500-5,000रुपए के बीच होगी जबकि यदि आप गोल्ड ईटीएफ़ में निवेश करना चाहें तो 1,000 रुपए तक का भी निवेश कर सकते हैं। जिनके पास डीमैट खाते नहीं हैं उनके लिए गोल्ड फंड ऑफ फंड्स निवेश का अच्छा विकल्प हो सकता है। ये फंड गोल्ड ईटीएफ़ में निवेश करते हैं और म्यूचुअल फंड जैसे परिचालन करते हैं। आप इनमें एकमुश्त निवेश या 500 रुपए तक की एसआईपी के जरिये भी निवेश से कर सकते हैं।

सुविधा के अलावा सोने में निवेश से आपके निवेश पोर्टफोलियो में विविधता आती है। अच्छे पोर्टफोलियो में विभिन्न किस्म की परिसंपत्तियों का मिश्रण होना चाहिए ताकि अधिकतम मुनाफा दर्ज़ हो सके और जोखिम कम हो सके। परिसंपत्ति के तौर पर सोना मुद्रास्फीति के जोखिम और इक्विटी एवं ऋण जैसे अन्य परिसंपत्ति वर्गों द्वारा पेश विभिन्न किस्म के जोखिम से सुरक्षा प्रदान करता है। सोना भू-राजनैतिक जोखिमों से बचाव का अच्छा रास्ता है। चाहे महामारी हो या व्यापार संघर्ष या तेल की कीमतों में अप्रत्याशित बदलाव की स्थिति, सोना ही है जो ज़्यादातर देशों की रक्षा करता है और यही वजह है कि सोने की मांग अब तक के उच्चतम स्तर पर है।

भारतीयों के लिए सोना परंपरा, धन के प्रति प्रेम और निवेश का मिलाजुला रूप है। यह परिवार की विरासत का हिस्सा है और परिसंपत्ति तथा प्रगति का संकेत है। इसलिए फैशन, गैजेट, और एलईडी टीवी पर बेपनाह खर्चते हुए डिजिटल गोल्ड में भी कुछ पैसे खर्च करें और अपने भविष्य को शानदार बनाएँ।