Sunday, June 28, 2026
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आयोजित हुआ हिन्दी मेले का ऑडिशन

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन तथा यूको बैंक की प्रेरणा शक्ति से आयोजित 26वें हिंदी मेले में ऑडिशन के तीसरे दिन चित्रांकन, कविता पोस्टर और काव्य आवृत्ति वर्ग ‘क’ का ऑडिशन किया गया, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 550 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चित्रांकन शिशु वर्ग के लिए विषय का बंधन नहीं था ।वर्ग ‘अ’ के लिए निर्धारित विषय ‘किसान’ पर प्रतिभागियों ने सुंदर चित्र बनाए। कविता पोस्टर ऑडिशन के लिए निर्धारित विषय अज्ञेय की कविता ‘सांप’ का वैविध्यपूर्ण पोस्टर प्रतिभागियों ने बनाया। इस ऑडिशन में निर्णायक की भूमिका में सुलोचना सारश्वत, अनिल गौड़, नागेश शर्मा मौजूद थे ।कार्यक्रम का सफल संचालन निखिता पांडेय, ममता साव,संजय सिंह, हरेकृष्ण यादव तथा इबरार खान ने किया। काव्य आवृति वर्ग ‘क’ के निर्णायक रामकेश सिंह ने कहा-“सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुति सराहनीय है।युवा प्रतिभा से समृद्ध नौजवान संभावनाएं से भरे हैं। नीलम कुमारी ने हिंदी मेला वर्चुअल माध्यम के बारे में कहा कि “मेला का यह स्वरूप निश्चित तौर पर ज्यादा व्यापक और आकर्षक है।” इस वर्ग का संचालन राहुल गौड़ और विकास जायसवाल ने किया। चित्रांकन के संयोजक प्रो. इबरार खान के कहा- “बच्चों ने ‘किसान’ विषय पर बेहद गंभीर चित्र बनाएं और अज्ञेय की कविता ‘सांप’ के व्यंग्य को बखूबी पोस्टर का रूप दिया। कविता पोस्टर की संयोजक प्रो. मधु सिंह थीं।

ऑडिशन के पहले और दूसरे चरण में काव्य आवृत्ति, आशु भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।इन प्रतियोगिताओं के ऑडिशन में देश के विभिन्न राज्यों जैसे- पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, केरल, मध्य प्रदेश, गुजरात के अलावा विदेश (कनाडा, मॉरीशस) से लगभग 950 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। काव्य आवृत्ति ‘शिशु’ वर्ग, ‘अ’ वर्ग, ‘क’ वर्ग के ऑडिशन को सफल बनाने में निर्णायक के रूप में डॉ विवेक सिंह, प्रो. अल्पना नायक, रामकेश सिंह, प्रो.रेणु गुप्ता, नागेंद्र पंडित और नीलम प्रसाद ने अपना बहुमूल्य समय दिया ।काव्य आवृत्ति का सफल संचालन मनीषा गुप्ता, पूजा सिंह, राजेश सिंह, नैना प्रसाद, गायत्री वाल्मीकि, सूर्य देव राय तथा धन्यवाद ज्ञापन सौमित्र आनंद ने दिया। आशु भाषण ‘अ’ और ‘क’ वर्ग के ऑडिशन में निर्णायक के रूप में प्रो. गीता दूबे, एन. चन्द्र राव, रंजीत कुमार संकल्प, प्रो. नीरज शर्मा उपस्थित थे।आशु भाषण के अंतर्गत ‘सड़क पर किसान’, ‘विज्ञापन और हिंदी भाषा’, ‘सिनेमा का समाज पर प्रभाव’, ‘धार्मिक कट्टरता बनाम मानवता’ आदि जैसे समसामयिक विषयों पर देश-विदेश के प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति दी।डॉ गीता दुबे ने कहा कि हिंदी मेला का यह आयोजन भीषण भय के बीच उल्लास और सृजन का अभियान है। कार्यक्रम का सफल संचालन नागेंद्र पंडित, साक्षी झा, प्रीति साव ने किया। वाद-विवाद वर्ग ‘अ’ और वर्ग ‘क’ के ऑडिशन में निर्णायक की भूमिका में प्रीति सिंघी, कलावती कुमारी, गुलनाज़ बेग़म, गौतम लामा ने अपना योगदान दिया और ऑडिशन का संचालन उत्तम कुमार और विकास जायसवाल ने किया। इस अवसर पर भारतीय भाषा परिषद के निदेशक शंभुनाथ ने कहा – “यह युवाओं का मेला है। वर्चुअल माध्यम से मेला राज्य के बाहर निकल कर देश और विदेश के विभिन्न संस्थानों तक पहुँचा है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है।”।धन्यवाद ज्ञापन देते हुए संस्था के संयुक्त महासचिव संजय जायसवाल ने कहा हिंदी मेला बच्चों -नौजवानों को रचनात्मक मंच प्रदान करने के साथ सांस्कृतिक आंदोलन की जमीन तैयार कर रहा है।

मिस्र के ‘प्राचीन खजाने’ का मिला रास्ता, 3300 साल पुराने बबून ने दिखाया मार्ग

मिस्र अपनी प्राचीन कहानियों और अपने फिरौन के लिए दुनियाभर में मशहूर है। ऐसी ही एक प्राचीन कहानी है ‘भगवान की जमीन’ की। इसे लेकर कहा जाता है था कि यहां से निकलने वाले लोगों के हाथ हमेशा खजाना लगा करता था। कहा जाता है कि यह दुनिया के सबसे पुराने काल्पनिक कथाओं में से एक है।
पुरातत्वविदों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि ऐसी एक जगह प्राचीन मिस्र में हुआ करती थी। इसके लिए उन्होंने एक पुराने बबून की खोपड़ी को सबूत के तौर पर पेश किया है, जो 3300 साल पुराना है। इसे लेकर पुरातत्वविदों ने कहा कि यह उसी जगह की है।
लेखों में हुआ यहां के खजाने का उल्लेख
प्राचीन मिस्र में लोगों ने 4500 साल पहले इस स्थान पर जाना शुरू किया और हजारों साल तक यहां की यात्रा करते रहे। इस स्थान को लेकर जितने भी लेख लिखे गए, उसमें खजाने के तौर खाने के सामान से लेकर धातु और दुर्लभ जानवरों का जिक्र था। हालांकि, आज तक किसी के हाथ यह खजाना नहीं लगा पाया है। लेकिन अब बबून की खोपड़ी मिलने के बाद एक बार फिर प्राचीन कथा की ओर पुरातत्वविदों का ध्यान जाना शुरू होगया है।
कहां है खजाने का इलाका
डार्टमाउथ कॉलेज में प्राइमेटॉलजिस्ट नथेनियल डॉमिनो और उनके साथियों को बबून की खोपड़ी एक ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित रखी मिली। इसके बाद डॉमिनो ने अपने साथियों संग मिलकर बबून के दांतों में मिलने वाले स्ट्रॉन्शियम के आइसोटोप्स का अध्ययन करना शुरू किया।
बता दें कि जानवरों के दांतों के इनैमल में स्ट्रॉन्शियम के आइसोटोप्स से यह पता चलता है कि जानवर ने किस जगह अपना जीवन बिताया होगा। डॉमिनो ओर उनके साथियों को पता चला कि यह बबून मिस्र में न पैदा होकर हॉर्न ऑफ अफ्रीका के क्षेत्र में पैदा हुआ होगा।
वर्तमान में यहां इरिट्रिया, इशियोपिया और सोमालिया जैसे देश स्थित हैं। माना जा रहा है कि यही क्षेत्र खजाना का इलाका है। इसी आधार पर माना जा रहा है कि यह  बबून उसके खजाने का हिस्सा है। यही कारण है कि माना जा रहा है कि प्राचीन कहानी सच साबित होने वाली है।
वहीं, बॉस्टन विश्वविद्यालय की पुरातत्वविद कैथरिन बार्ड ने साल 2001 से लेकर 2011 तक मिस्र के लाल सागर तट पर स्थित मेर्सा नामक एक जगह पर खुदाई की। इस दौरान उन्हें यहां से 2800 साल पुराना एक पत्थर मिला। पत्थर पर इस जगह का उल्लेख किया गया था। बार्ड ने कहा कि अब नयी खोज के जरिए हमें यह पता चल पाएगा कि आखिर यह जगह कहां स्थित है।

ई-अदालत परियोजना को मिला डिजिटल इंडिया अवॉर्ड

नयी दिल्ली : भारत सरकार के न्याय विभाग की ई-अदालत सेवा परियोजना ने इस साल का डिजिटल इंडिया पुरस्कार जीता है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि परियोजना को यह पुरस्कार केंद्रीय मंत्रालय या विभाग में ‘डिजिटल शासन में उत्कृष्टता’ श्रेणी में मिला है। पुरस्कार वितरण समारोह 30 दिसंबर को होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि ई-अदालत परियोजना की संकल्पना भारतीय न्यायपालिका में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी को लागू करने के लिए तैयार राष्ट्रीय नीति एंव कार्य योजना-2005के आधार पर बनायी गयी थी । उच्चतम न्यायालय की ई-समिति ने न्यायापलिका में बदलाव के विचार के साथ राष्ट्रीय नीति एंव कार्य योजना सौंपी थी। ई-अदालत परियोजना मिशन के तहत पर पूरे देश में चलाई जा रही है और जिला अदालतों को डिजिटल करने की इस परियोजना की निगरानी एंव वित्तपोषण न्याय विभाग कर रहा है।

कोविड-19 महामारी की वजह से घटी परिवारों की बचत : सर्वे

नयी दिल्ली: कोविड-19 महामारी की वजह से परिवारों की बचत में गिरावट आई है। एक सर्वे में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने कहा है कि महामारी की वजह से उनकी बचत कम हुई है।
सर्वे में कहा गया है कि नौकरी छूटना, वेतन कटौती या भुगतान में देरी जैसी वजहों से परिवारों की बचत प्रभावित हुई है। लोकल सर्किल्स के उपभोक्ताओं के रुख पर छमाही सर्वे में कहा गया है कि महामारी के अब नौ माह हो गए हैं। बड़ी संख्या में उपभोक्ता रोजगार गंवाने और वेतन कटौती की वजह से अपनी वित्तीय स्थिति में आई गिरावट से उबर नहीं पाए हैं। सर्वे में शामिल 8,240 लोगों में से 68 प्रतिशत ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से पिछले आठ माह में उनकी बचत घटी है।
यह सर्वे त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं के खर्च के रुख, अगले चार माह के लिए खर्च की योजना, परिवार की आमदनी को लेकर उम्मीद तथा मार्च तक बचत की स्थिति के आकलन के लिए किया गया है।
सर्वे पर देश के 302 जिलों से करीब 44,000 प्रतिक्रियाएं मिलीं। इसमें 62 प्रतिशत पुरुष और 38 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। सर्वे में शामिल लोगों में से 55 प्रतिशत पहली श्रेणी के शहरों से है। 26 प्रतिशत दूसरी श्रेणी और 19 प्रतिशत तीसरी और चौथी श्रेणी के शहरों या ग्रामीण जिलों से हैं।
सर्वे के अनुसार, करीब 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अगले चार माह के दौरान विवेकाधीन उत्पाद या संपत्तियां खरीदने पर खर्च करेंगे। ‘‘करीब 10 प्रतिशत लोगों का कहना था कि अगले चार माह में उनकी विवेकाधीन खरीद पर 50,000 रुपये से अधिक खर्च करने की योजना है। वहीं 21 प्रतिशत ने कहा कि इस अवधि में वे 10,000 से 50,000 रुपये खर्च करेंगे।

भारतीय डाक, आईपीपीबी के ग्राहक अब ऐप ‘डाकपे’ के जरिए कर सकेंगे लेन-देन

नयी दिल्ली : डाक विभाग (भारतीय डाक) और भारतीय डाक भुगतान बैंक (आईपीपीबी) के उपभोक्ता अब ऐप ‘डाकपे’ के जरिए बैंकिंग सेवाओं का परिचालन कर सकते हैं। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को इस ऐप की शुरुआत की। डाकपे देशभर में भारतीय डाक और आईपीपीबी द्वारा डाक नेटवर्क के जरिए प्रदान की जाने वाली डिजिटल वित्त और बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
डाकपे कई तरह की सेवाओं यानी पैसा भेजने, क्यूआर कोड को स्कैन करने सेवाओं के लिए तथा दुकानों पर डिजिटल तरीके से भुगतान करने में मदद करेगा। इसके अलावा यह ग्राहकों को देश में किसी भी बैंक के साथ इंटरऑपरेबल बैंकिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा।
प्रसाद ने इस ऐप को जारी करते हुए कहा कि डाकपे से भारतीय डाक की विरासत और समृद्ध होगी, जो आज देश के सभी परिवारों तक पहुंचने वाली है। यह एक नवोन्मेषी सेवा है, जो सिर्फ बैंकिंग सेवाओं और डाक उत्पादों तक ऑनलाइन पहुंच ही उपलब्ध नहीं कराती है, बल्कि यह एक विशिष्ट अवधारणा है जिसमें कोई ऑर्डर देकर डाक वित्तीय सेवाओं को अपने घर के दरवाजे पर पा सकता है।

5 राज्यों में 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार : सर्वेक्षण

नयी दिल्ली : देश के 22 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के मुताबिक 5 राज्यों की 30 फीसदी से अधिक महिलाएं अपने पति द्वारा शारीरिक एवं यौन हिंसा की शिकार हुई हैं, वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैरसरकारी संगठनों (एनजीओ) ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ऐसी घटनाओं में वृद्धि की आशंका जताई है। महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में सबसे बुरा हाल कर्नाटक, असम, मिजोरम, तेलंगाना और बिहार में है।
सर्वेक्षण में 6.1 लाख घरों को शामिल किया गया। इसमें साक्षात्कार के जरिए आबादी, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और पोषण संबंधी मानकों के संबंध में सूचना एकत्र की गई। एनएफएचएस-5 सर्वेक्षण के मुताबिक कर्नाटक में 18-49 आयु वर्ग की करीब 44.4 फीसदी महिलाओं को अपने पति द्वारा घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा जबकि 2015-2016 के सर्वेक्षण के दौरान राज्य में ऐसी महिलाओं की संख्या करीब 20.6 फीसदी थी।
सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 40 फीसदी महिलाओं को उनके पति द्वारा शारीरिक और यौन हिंसा झेलनी पड़ी जबकि मणिपुर में 39 फीसदी, तेलंगाना में 36.9 फीसदी, असम में 32 फीसदी और आंध्रप्रदेश में 30 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हुईं। इस सर्वेक्षण में 7 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में पिछले एनएफएचएस सर्वेक्षण की तुलना में घरेलू हिंसा के मामलों में वृद्धि दर्ज की गयी।

एस एन लक्ष्मी ने 58 मिनट में 46 डिशेज बनाकर कायम किया वर्ल्ड रिकॉर्ड

चेन्नई : चेन्नई में एस एन लक्ष्मी सांई श्री ने 58 मिनट में 46 डिशेज बनाकर यूनिको वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया। लक्ष्मी ने बताया कुकिंग में उसका शौक माँ की वजह से पैदा हुआ। उसने अपनी माँ से खाना बनाना सीखा। वे वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम आने से भी बेहद खुश हैं। लक्ष्मी की मां का नाम एक कलाईमगल है। उन्होंने बताया – ”लॉकडाउन के दौरान लक्ष्मी ने कुकिंग सीखने की शुरुआत की। मैं तमिलनाडु स्थित अपने घर पर अलग-अलग तरह की पारंपरिक चीजें बनाती हूं। लॉकडाउन में जब लक्ष्मी ने मुझे रसोई में इन चीजों को बनाते हुए देखा तो उसने भी इसे सीखने की कोशिश की। जब मैंने लक्ष्मी की इस रुचि के बारे में मेरे पति को बताया तो उन्होंने कुलीनरी एक्टिवटी में वर्ल्ड रिकार्ड के लिए लक्ष्मी का नाम देने का फैसला किया। इस बारे में जब हमने और जानकारी जुटाई तो पता चला कि लक्ष्मी से पहले केरल में 10 साल की सान्वी ने 30 डिशेज बनाकर वर्ल्ड रिकार्ड कायम किया था। लेकिन लक्ष्मी ने 46 डिशेज बनाकर सान्वी का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

शादी के पहले दुल्हन गिरी छत से, अवधेश ने अस्पताल में की शादी

लखनऊ :  यूपी में रहने वाली आरती शादी के एक दिन पहले छत से गिर गई। उसकी रीढ़ की हड्‌डी में चोट आई। आरती के दूल्हे का नाम अवधेश है। अवधेश ने कहा जो हमारे साथ हुआ, वह हमारी किस्मत है। अवधेश ने डॉक्टर से अनुमति ली और अस्पताल में ही आरती से शादी की। इस शादी में दोनों परिवारों के लोग शामिल हुए। आरती का इलाज कर रहे डॉ. सचिन सिंह ने बताया कि आरती की रीढ़ की हड्‌डी में चोट आई है। फिलहाल वह अपना पैर भी नहीं हिला सकती। इसलिए हमने अस्पताल में ही अवधेश को आरती के साथ शादी करने की इजाजत दी।

दुल्हन ने कहा- ”मेरी इस हालत को देखकर मैं डर गई थी लेकिन मेरे पति ने मुझे हिम्मत दी। उन्होंने कहा कि अगर मैं कभी ठीक नहीं हुई और इसी हालत में बिस्तर पर रही, तब भी वे हमेशा मेरा साथ देंगे”। सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होते ही कई लोगों ने अवधेश की तारीफ की, वहीं लोग आरती के जल्दी ठीक होने की दुआ भी कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा-‘इसे कहते हैं सच्चा प्यार’। दूसरे यूजर ने लिखा – ”ये गुण बहुत कम लड़कों में देखने को मिलता है। उस माता-पिता की तारीफ करना चाहिए जिसने अवधेश को जन्म दिया”।

क्रिसमस पर बनाइए अंडा रहित ब्राउनी

शेफ सुनीता सुराना

सामग्री :  2 कप मैदा या आटा, 2 बड़ा चम्मच चीनी पाउडर, 2 बड़ा चम्मच कोकोआ पाउडर, 2 बड़ा चम्मच दूध, 1 छोटा चम्मच तेल, 2 बड़ा चम्मच कटे हुए मेवे (काजू, बादाम, आखरोट आदि), 2 बड़ा चम्मच चॉकलेट सिरप
विधि : सबसे पहले एक बर्तन में मैदा या आटा लें, अब इसमें चीनी पाउडर, कोकआ पाउडर, और सूखे मेवे डालकर मिला लें। फिर इसमें दूध, चॉकलेट सिरप और तेल डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब इस मिश्रण को 2 मिनट के लिए माइक्रोवेव में 180 डिग्री सेल्सियस पर रख कर बेक करें। स्वादिष्ट चॉकलेट ब्राउनी तैयार है। थोड़ा ठंडा होने के बाद आइसक्रीम के साथ परोसें।

तुलसी, लौंग, दालचीनी केक

सामग्री : 1 कप मैदा, 1/2 चम्मच पिसा हुआ जायफल, 1/2 चम्मच अदरक (पिसा हुआ), 6 बड़े चम्मच पिघला हुआ मक्खन, 1/2 कप कैस्टर शुगर, 2 बड़े चम्मच क्रीम, 1/2 चम्मच वनिला एसेंस, 1 चम्मच बैकिंग पावडर, 3 बड़े चम्मच दूध, 3 बड़े चम्मच खांड, 1 चुटकी नमक, दाल शक्कर (पिसी हुई) 1 चुटकी, आइसिंग शुगर 2 चम्मच।
विधि : सबसे पहले ओवन को 180 सेंटीग्रेड पर गरम कर लें। मक्खन में कैस्टर अथवा शुगर मिलाकर खूब फेंटें और क्रीमी कर लें। क्रीम में एसेंस मिलाकर फेंटें तथा एक और रख दें। मैदा, बैकिंग पावडर, नमक, जायफल व दाल शक्कर को छानकर उसमें मक्खन व क्रीम का मिश्रण मिला दें, फिर दूध से मुलायम गूंथ लें।
अब मैदे के मिश्रण से एक-तिहाई भाग निकालकर उसमें खांड डाल दें। फिर केक टिन में सेट करके तीस मिनट बेक कर लें। बेक्ड केक को बीस मिनट ठंडा होने रख दें, फिर शेष गूंथे मैदे को चाकू से केक के आसपास लगा दें और ओवन में पुनः रखकर बीस मिनट बेक कर लें। आइसिंग शुगर में थोड़ा गरम पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और केक के ऊपर सजाकर पेश करें।
कैसे बनाएं केक पढ़ें 16 सरल टिप्स
* अभी कोरोना टाइम चल रहा हैं ऐसे समय में आप केक बनाते समय खास तौर पर अदरक, तुलसी, लौंग, दालचीनी का उपयोग करके केक बना सकते हैं, यह केक सर्द भरे मौसम में आपके लिए हेल्दी साबित होगा।
* केक बनाते समय ध्यान रखें कि मैदा ज्यादा पुराना न हो।
* चीनी बिलकुल महीन पीसें और मैदे वाली छलनी से दो-तीन बार में छानें।
* मैदा एक ही दिशा में फेंटें, केक अच्छा फूलेगा।
* केक बेक करने से पहले ओवन गर्म कर लें ताकि तापमान एक समान रहे।
* बेकिंग डिश में जरा भी नमी नहीं रहना चाहिए, इसके लिए उसे अच्छी तरह सुखा लें अन्यथा केक ठीक से फूलेगा नहीं।
* केक का सामान फ्रिज में से थोड़ा पहले निकालकर बाहर रख लें ताकि उनका तापमान सामान्य रहे।
* दूध डालना हो तो ठंडा न डालें बल्कि हल्का गुनगुना करके डालें।
* केक अच्छी तरह फूले, इसके लिए एक दिन पहले मिश्रण को फेंटकर रख लें।
* केक में सोडा या बेकिंग पावडर निर्धारित मात्रा से अधिक न डालें अन्यथा केक फटने लगेगा।
* केक पकाते समय आंच एक समान रखें। यदि इलेक्ट्रिक ओवन में पकाएं तो तापमान 300 डिग्री से कम न रखें।
* बेकिंग डिश में केक रखने से पूर्व उसे चिकना कर लें ताकि केक निकालने में आसानी रहे।
* यदि केक ज्यादा पक जाए या थोड़ा जल जाए तो तेज धार वाले चाकू से ऊपरी एवं किनारे वाला भाग काटकर आइसिंग करें।
*आइसिंग के लिए ताजी क्रीम एवं आइसिंग का प्रयोग करें तथा आइसिंग सेट से ही आइसिंग करें।
* यदि दो-तीन केक बनाने हों तो एक साथ न बनाकर एक-एक करके बनाएं।
* केक पक गया या नहीं, इसकी जांच करने के लिए साफ सलाई को केक के बीच में डालें। यदि केक सलाई में चिपके तो समझें कि पका नहीं है, यदि न चिपके तो समझिए केक तैयार है।
(साभार – वेबदुनिया)