Thursday, April 2, 2026
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विश्व गौरव की ओर बढ़ने की प्रेरणा देने वाला व्यक्तित्व था नेताजी का

शिव प्रकाश (राष्ट्रीय महासचिव तथा पश्चिम बंगाल प्रभारी, भाजपा)

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म जयंती पर विशेष

राष्ट्र आज महान देशभक्त नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहा है। सुभाष बाबू का जीवन वृत्त समस्त राष्ट्र साधकों, राष्ट्रचिंतकों के लिए गौरव बोध कराने वाला है। उनका सतत संघर्षपूर्ण, साहसिक जीवन प्रेरणा देना वाला है। सुभाष चंद्र बोस की पूर्ण स्वराज की अवधारणा का आशय भारतीय संस्कारों से आप्लावित राज्य था। बंगाल का शेर कहे जाने वाले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अग्रणी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। उनके नारोंदिल्ली चलो” और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगासे युवा वर्ग में एक नये उत्साह का प्रवाह हुआ था। पूरे देश में नेताजी के इस नारे को सुनकर राष्ट्रभक्ति की अलख जगी। जो लोग यह कहते हैं कि शांति और अहिंसा के रास्ते से भारत को आजादी मिली, उन्हें एक बार नेताजी के जीवन चरित्र का अध्ययन करना चाहिए।

सुभाष बाबू का जन्म आज के दिन 1897 में ओडिशा प्रांत के कटक में हुआ था। उनके पिता जानकी नाथ बोस एक प्रख्यात वकील थे जो कालांतर में बंगाल विधान सभा के सदस्य भी रहे। सुभाष बाबू एक सच्चे राष्ट्रभक्त, समाज सुधारक एवं आदर्श राजनेता थे। उनका आर्थिक सामाजिक चिंतन हमारा सदैव मार्गदर्शन करता है। उनके इसी समर्पण के कारण लोग प्यार से उन्हें नेताजी कहकर पुकारते थे। उनके विचारों पर स्वामी विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगोर की अमिट छाप थी। अपनी अधूरी आत्मकथा में स्वामी विवेकानंद की अक्सर कहने वाली ऋगवेद की उस ऋचा का वर्णन वह करते हैं। वह कहते हैं “आत्मनो मोक्षार्थम जगत हिताय” अर्थात पहले स्वतः को मोक्ष तथापि दूसरों के सुख के लिए संघर्ष, समर्पण करना चाहिए। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि मेरा नारायण दरिद्र नारायण है। इसका चरितार्थ प्रसंग सुभाष बाबू के जीवन में देखने को मिलता है।

उत्तरी बंगाल में भयावह बाढ़ आयी थी, जिसमें व्यापक तौर पर जनहानि हुई। उन दिनों सुभाष बाबू कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कालेज में पढ़ाई कर रहे थे और अपने कुछ मित्रों के साथ व बाढ पीड़ितों की सहायता में लगे थे। एक दिन वह जनसेवा कार्य में लगे थे तो उनके पिता ने कहा कि बेटा तुम कहां व्यस्त हो? सुभाष बाबू ने उत्तर दिया पिताजी मैं बाढ़ पीड़ितों की सेवा में लगा हूं। बाढ़ ने लोगों का घर-बार उजाड़ दिया है। उनकी यह हालत देखकर मेरा दिल रो उठता है। इस बार उनके पिता जानकीनाथ बोस ने कहा सुभाष मैं तुमसे सहमत हूं। लोगों की मदद जरूर करनी चाहिए, लेकिन ऐसा करने के लिए अपने कर्तव्यों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। अपने यहां दुर्गा पूजन का भव्य कार्यक्रम आजित किया गया है। इसमें मेरे साथ तुम्हारा होना भी बेहद आवश्यक है। पिता को जवाब देते हुए सुभाष बाबू ने कहा पिताजी मुझे माफ करिए। मेरा आपके साथ जाना संभव नहीं है। जब चारों ओर बाढ़ से हाहाकार मचा है, ऐसे मेरे दिमाग में केवल एक ही विचार आता है कि किस तरह लोगों की अधिक से अधिक मदद की जाए। मेरे लिए दीन-दुखियों में ही दुर्गा का वास है। मेरी पूजा के भागी यही लोग है। यह सुनकर उनके पिता भाव-विभोर हो गए। उनकी यही अनन्य देश प्रेम का भाव उन्हें अन्य महा पुरुषों से अलग करता है।

आइसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद प्रशासनिक सेवा में चयन होने के बाद भी उनको अंग्रेजों की नौकरी स्वीकार्य नहीं थी। देश के प्रति समर्पण और राष्ट्रहित में सोच की भावना में उन्होंने अंग्रेजों की नौकरी छोड़ दी। प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र देने के बाद सुभाष गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर चितरंजन दास की पार्टी के साथ जुड़े तथा राजनीति की शुरुआत की। वे बाल गंगाधर तिलक के पूर्ण स्वाराज्य के प्रचंड समर्थक थे।

स्वतंत्रता के राष्ट्रीय आंदोलन को विश्व पटल पर ले जाकर विश्व व्यापी बनाने का श्रेय सुभाष बाबू को ही जाता है। वह 1938 में विशेष आग्रह पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। गौर करने वाली बात यह है कि जब सुभाष बाबू कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, उस समय देश के अधिकांश प्रांतों में कांग्रेस की सरकार थी। कांग्रेस के समक्ष उस समय एक विकासवादी गवर्नेंस मॉडल प्रस्तु करने की चुनौती पैदा हुई। तत्कालीन सरकार में रक्षा और विदेश मामलों को छोड़कर बाकी सभी विभाग और मंत्रालय कांग्रेस सरकार के ही अधीनस्थ थे। इसे देखते हुए नेता जी ने बड़े निर्णय लिये और प्लानिंग कमेटी और साइंस काउंसिल का गठन किया। जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में बनी प्लानिंग कमेटी को सुभाष बाबू ने ‘बॉटम टू टॉप’ की अवधारणा पर विकास का मॉडल तैयार करने को कहा। लेकिन नेहरू ने तत्कालीन सोवियत संघ के मॉडल पर काम किया जिस पर बाद में कांग्रेस की सरकारों ने अमल किया। लेकिन महात्मा गांधी समेत तमाम कांग्रेसी नेताओं के विचारों से मेल नहीं खाने के चलते सुभाष चंद्र बोस ने 1939 में कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया। बाद में उन्होंने फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।

सुभाष चंद्र बोस की शख्सियत की विशेषताओं और उनमें छिपी राष्ट्र हित की भावना को अगर किसी राजनेता ने समझा और उस पर अमल किया है तो वे हैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने जब नीति आयोग का गठन किया तभी सुभाष बाबू की बनायी प्लानिंग कमेटी की आधारशिला को आकार मिल सका। मोदी सरकार की विकास की अवधारणा भी ‘बॉटम टू टॉप’ की सोच पर आधारित है। सुभाष चंद्र बोस की इस अवधारणा के आर्थिक चिंतन के मूल में स्वामी विवेकानंद, असम के विचारक शंकर देव, तमिलनाडु के तिरुवल्लू और बाबा साहेब अंबेडकर का विशेष महत्व है।

अंग्रेजों से आजादी के संघर्ष के दौरान जब बोस जी ने देखा कि शक्तिशाली संगठन के बिना स्वाधीनता मिलना मुश्किल है तो वे जर्मनी से टोकियो गए और वहां पर उन्होंने आजाद हिन्द फ़ौज की स्थापना की। देश से अंग्रेजों को निकालने की उनकी धुन और पूर्ण स्वराज की अवधारणा उनके मन में बसी थी। इसीलिए उन्होंने कहा “हमारी यह सेना हिंदुस्तान को अंग्रेजों की दासता से मुक्त करेगी।” लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी व्यापकता का जिक्र करते हुए कहा था कि आजाद हिंद सरकार ने हर क्षेत्र से जुड़ी योजनाएं बनायी थीं। इसका अपना बैंक था, अपनी मुद्रा थी और अपना डाक टिकट था। नेताजी की सूझबूझ का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि आजाद हिंद सरकार का अपना गुप्तचर तंत्र भी था। अपने युग से आगे की सोच रखते हुए नेताजी ने महिला सशक्तीकरण को भी महत्व दिया। आजाद हिंद फौज में महिला रेजिमेंट का गठन भी किया, जिसकी कमान कैप्टन लक्ष्मी स्वामीनाथन को सौंपी गई। सुभाष बाबू की दूरदर्शिता का उदाहरण आजाद हिंद फौज का अपना रेडियो और ‘फॉरवर्ड’ नाम की पत्रिका थी जिनके जरिए सुभाष चंद्र बोस के लेखों और भाषणों का प्रसार किया जाता था।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और अंबेडकर सरीखे महापुरुषों के सपनों का भारत निर्मित करने के काम में लगी हुई है। आत्मनिर्भर भारत अभियान सुभाष बाबू के आर्थिक चिंता का क्रियान्वयन है जो राष्ट्र को संपन्न बनाते हुए विश्व गौरव की ओर लेकर जाएगा।

 

 

केएमएएमसी बना क्लाइमेट एक्शन हन्ड्रेड प्लस पर हस्ताक्षरकर्ता

कोलकाता : केएमएएमसी क्लाइमेट एक्शन हन्ड्रेड प्लस पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हो गया है। केएमएएमसी यानी कोटाक महिन्द्रा ऐसिट कम्पनी संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकृत पीआरआई (प्रिंसिपल्स फॉर रिस्पॉन्सिबल इन्वेस्टमेंट) पर हस्ताक्षर करने वाली पहली घरेलू सम्पत्ति प्रबन्धन कम्पनी बन गयी है। यह पहल केएमएमसी की सीमा स्थायीत्व और दायित्वपूर्ण निवेश रणनीति का हिस्सा है जिनमें भारतीय परिप्रेक्ष्य में ईएसजी फैक्टर्स और अवसरों पर जागरुकता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाता है। क्लाइमेट एक्शन हन्ड्रेड प्लस का जोर स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के संचालन पर है और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है।क्लाइमेट एक्शन 100+ के लिए हस्ताक्षरकर्ता के रूप में कम्पनी को अपने कॉरपोरेट क्षेत्र में प्रतिबद्ध होना पड़ता है। अंतर्निहित स्थिरता का एजेंडा यह है कि भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, पेरिस समझौते के लक्ष्यों के अनुरूप ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए काम करे। कोटाक महिन्द्रा एसेट मैनेजमेंट कम्पनी की सीनियर ईवीपी, (फंड मैनेजर तथा इक्वेलिटी रिसर्च की हे़ड) शिवानी सरकार कुरियन ने कम्पनी की इस उपलब्धि पर खुशी जतायी।

डॉ. वर्गीज कुरियर मेमोरियल ओरायन में पर्यावरण कार्यकर्ता आशीष कोठारी का व्याख्यान

कोलकाता/ जमशेदपुर : एक्सएलआरआई- जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने हाल ही में 7 वें डॉ वर्गीज कुरियन मेमोरियल ओरेशन का आयोजन किया। फ्रॉम अर्रुप सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड सस्टेनेबिलिटी (फेसेज), एक्सएलआरआई के तत्वावधान में, एएमयूएल के संस्थापक डॉ. वर्गीज कुरियन की याद में, जिसे “द मिल्कमैन ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता है, का उद्देश्य ओरायन को सुनने के लिए एक मंच प्रदान करना है। विचारशील नेताओं, सामाजिक उद्यमियों, विकास क्षेत्र के पेशेवरों और नीति निर्माताओं से सीखें जिन्होंने एक सशक्त, समृद्ध और टिकाऊ समाज के विचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस साल प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता और कल्पवृक्ष के संस्थापक आशीष कोठारी ने इको -स्वराज : रिकवरी टुवार्ड्स जस्टिस एंड सस्टेनिबिलिटी विषय पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने अपने वक्तव्य में पिछले 10 साल में विकास के नाम पर वृक्षों के काटने तथा वन भूमि को नष्ट करने पर चिन्ता जतायी। उन्होंने इसे प्रकृति, संस्कति और समुदायों के प्रति हिंसा करार दिया। उन्होंने कहा कि हमें एक बार ठहरकर सोचने की जरूरत है। इस अवसर पर एक्सएलआरआई के एस. जे. निदेशक फादर पी. क्रिस्ट्री तथा एक्सएलआरआई के यरोप सेन्टर फॉर इकोलॉजी एंड सस्टेनिबिलिटी के संयोजक प्रो, रघुराम टाटा ने भी विचार रखे।

आईसीएआई ने जारी किया एमएसएमई मेंटरशिप प्रोग्राम

एमएसएमई व जीएसटी के लिए 100 सुविधा केन्द्र खोलेगा

कोलकाता : द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टेड अकाउंटेट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और ईस्टर्न इंडिया रीजनल काउंसिल (ईआईआरसी) का 45 वाँ दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन की थीम ‘चार्टेड अकाउंटेंट्स – क्रूसेडिंग द न्यू नॉर्मल’ थी और इसमें वर्चुअल तरीके से 2500 सदस्य पूरे भारत से जुड़े। यह क्षेत्रीय सम्मेलन सदस्यों का ज्ञान, दक्षता और उनके कौशल को बेहतर बनाने का तरीका है। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल जगदीप धनकड़ और प्रथम महिला सुदेश धनकड़ उपस्थित थीं। आईसीएआई के सी ए अतुल कुमार गुप्ता, ईआईआरसी के चेयरमैन सीए नितेश कुमार मोरे व अन्य पदाधिकारियों के अतिरिक्त यूको बैंक के ई डी रोहित जैन, जी बिजनेस के प्रबन्ध सम्पादक सी ए अनिल सिंघवी, एनएफएल की पूर्व एम डी नीरू ओबेराय, ऑयल इंडिया के निदेशक (वित्त) समेत अन्य अतिथि उपस्थित थे। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मजबूत करने के लिए एमएसएमई का महत्व समझते हुए तथा कोविड -19 की चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए आईसीएआई ने एमएसएमई मेंटरशिप प्रोग्राम आरम्भ किया है। इसके साथ ही एमएसएमई व जीएसटी के लिए 100 फेसिलिटेशन सेंटर यानी सुविधा केन्द्र खोलने की भी घोषणा की। दो सत्रों में विभाजित इस कार्यक्रम में विभिन्न मुद्दों पर परिचर्चा भी आयोजित की गयी।

5 की संख्या इसलिए है इतनी शुभ

सुनीता सुराना, युग्म ऐस्ट्रो कन्सल्टेंसी

पंचामृत से लेकर पंचमेवा तक का महत्व
पंचदेव :
सूर्य, गणेश, शिव, शक्ति और विष्णु ये पंचदेव कहलाते हैं। सूर्य की दो परिक्रमा, गणेश की एक परिक्रमा, शक्ति की तीन, विष्णु की चार तथा शिव की आधी परिक्रमा की जाती है।
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पांच उपचार पूजा :
गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य अर्पित करना पंच उपचार पूजा कहलाती है।
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पंच पल्लव :
पीपल, गूलर, अशोक, आम और वट के पत्ते सामूहिक रूप से पंच पल्लव के नाम से जाने जाते हैं।
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पंच पुष्प :
चमेली, आम, शमी (खेजड़ा), पद्म (कमल) और कनेर के पुष्प सामूहिक रूप से पंच पुष्प के नाम से जाने जाते हैं।
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पंच गव्य :
भूरी गाय का मूत्र (8 भाग), लाल गाय का गोबर (16 भाग), सफेद गाय का दूध (12 भाग), काली गाय का दही (10 भाग), नीली गाय का घी (8 भाग) का मिश्रण पंचगव्य के नाम से जाना जाता है।
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पंच गंध :
चूर्ण किया हुआ, घिसा हुआ, दाह से खींचा हुआ, रस से मथा हुआ, प्राणी के अंग से पैदा हुआ ये पंच गंध है।
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पंचामृत :
दूध, दही, घी, चीनी (शकर), शहद का मिश्रण पंचामृत के नाम से जाना जाता है।
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पंचांग :
जिस पुस्तक या ता‍लिका में तिथि, वार, नक्षत्र, करण और योग को सम्मिलित रूप से दर्शाया जाता है उसे पंचांग कहते हैं।
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पंचमेवा :
काजू, बादाम, किशमिश, छुआरा, खोपरागिट पंचमेवा के नाम से जाने जाते हैं।

अब सीधे यूट्यूब वीडियो से होगी खरीददारी, कम्पनी ने शुरू किया परीक्षण

यूट्यूब एक नए फीचर का परीक्षण कर रहा है। नया फीचर यूजर को सीधे वीडियो से उन उत्पादों को खरीदने की अनुमति देगा, जो उस वीडियो में दिखाई दे रहे हैं। व्यूअर्स यूट्यूब वीडियो में दिखाई दे रहे प्रोडक्ट खोज पाएंगे और उसे खरीद पाएंगे। वर्तमान में इस फीचर की टेस्टिंग अमेरिका में एंड्रॉयड, आईओएस और वेब पर लिमिटेड यूजर्स के साथ की जा रही है। क्रिएटर, जो टेस्टिंग का हिस्सा हैं, वे अपने वीडियो में कुछ प्रोडक्ट को जोड़ सकते हैं जो शॉपिंग बैग आइकन के माध्यम से खरीदने के लिए उपलब्ध होंगे। कंपनी ने गूगल सपोर्ट पेज पर टेस्ट किए जा रहे इस नए फीचर की जानकारी दी। कंपनी का कहना है कि इस फीचर्स से व्यूअर्स को वीडियो में दिखाई दे रहे प्रोडक्ट की जानकारी और उसे खरीदने के विकल्प मिलेंगे। यूट्यूब का कहना है कि वह इस पायलट प्रोजेक्ट पर फिलहाल चुनिंदा क्रिएटरों के साथ काम किया जा रहा है।
व्यूअर्स शॉपिंग बैग आइकन पर क्लिक करके चुनिंदा प्रोडक्ट की एक लिस्ट देख पाएंगे, जो वीडियो के निचले बाएं कोने में दिखाई देगा। यहां से, वे हर प्रोडक्ट के पेज का पता लगा सकते हैं, जहां उन्हें प्रोडक्ट खरीदने के लिए अधिक जानकारी, संबंधित वीडियो और विकल्प मिलेंगे।

उस्ताद गुलाम मुस्तफा का 89 साल की उम्र में निधन

मुम्बई : भारतीय शास्त्रीय संगीत के रामपुर सहसवान घराने से ताल्लुक रखने वाले उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का 89 साल की उम्र में निधन हो गया। खान साहब के निधन पर लता मंगेशकर और एआर रहमान ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्म श्री, 2006 में पद्म भूषण और 2018 में पद्म विभूषण अवॉर्ड से नवाजा था। उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के निधन की खबर उनकी बहू नम्रता ने सोशल मीडिया पर शेयर की। मुस्तफा खान का जन्म 3 मार्च, 1931 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। उस्ताद गुलाम मुस्तफा के शिष्यों में सोनू निगम के अलावा हरिहरन, शान, आशा भोंसले, गीता दत्त, मन्ना डे, एआर रहमान और लता मंगेशकर का नाम भी शुमार है। हाल ही में सोनू ने अपने व्लॉग में उनकी तरह गाते हुए एक वीडियो शेयर किया था।

बहू नम्रता गुप्ता खान के साथ मिलकर लिखे गए अपने संस्मरण ‘ए ड्रीम आई लिव्ड एलोन’ की लॉन्चिंग खान साहब ने अपने कब्रिस्तान में किए रियाज का राज भी खोला था। बकौल खान साहब- “मेरी उम्र करीब 12 बरस रही होगी। डर और झिझक से बचने के लिए कब्रिस्तान में जाता था। मेरे उस्ताद रोज दोपहर के खाने के बाद सोते थे और मुझसे घर जाकर रियाज करने कहते थे, लेकिन घर में बहुत शोर-गुल होता था, इसलिए कब्रिस्तान बिलकुल सुनसान और सही जगह थी रियाज के लिए। मुझे किसी का डर नहीं था। मैं वहां खुलकर गा सकता था।”

वैज्ञानिक रोहिणी गोडबोले को फ्रेंच ऑर्डर ऑफ मेरिट का प्रतिष्ठित सम्मान

मुम्बई की भौतिकी वैज्ञानिक रोहिणी गोडबोले को फ्रांस के प्रतिष्ठित सम्मान ऑर्डर नेशनल ड्यू मेरिट से सम्मानित किया गया। उन्हें ये पुरस्कार न सिर्फ फ्रांस और इंडिया के बीच सहयोग के कारण बल्कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को आने के लिए प्रोत्साहित करने की वजह से भी मिला। यह घोषणा 13 जनवरी 2021 को आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा की गई। रोहिणी सेंटर फॉर हाई एनर्जी फिजिक्स, भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलुरु में प्रोफेसर हैं। रोहिणी का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ। उन्होंने सर परशुराम भाऊ कॉलेज, पुणे से बीएससी की डिग्री ली। इसके बाद रोहिणी ने भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान मुंबई से एमएससी किया। 1979 में इस महिला वैज्ञानिक ने ब्रूक स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क से पीएचडी की। उन्होंने 1982 में 1995 तक बॉम्बे यूनिवर्सिटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट में लेक्चरर और रीडर के तौर पर काम किया। 1995 में रोहिणी ने इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप मे काम किया है। 1998 में वह प्रोफेसर बनीं।फिजिक्स के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्यों के लिए 2019 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इससे पहले 2009 में उन्हें सत्येंद्रनाथ बोस पदक मिला। रोहिणी ने अब तक तीन किताबों का संपादन किया। उनकी एक किताब लीलावती की बेटियों, भारत की महिला वैज्ञानिकों पर आधारित थी। उन्होंने 150 से अधिक शोध पत्रों का लेखन भी किया है।

दो कश्मीरी बहनों ने बर्फ से बना दी महिला डॉक्टर की मूर्ति

श्रीनगर :  श्रीनगर की भारी बर्फबारी के बीच कश्मीर की दो बहनों ने कोरोना वॉरियर्स को श्रद्धांजलि देने के लिए बर्फ से प्रतिमा बनायी। इनमें से एक बहन डॉक्टर तो दूसरी वकील है। इनकी प्रतिमा को देखने कई लोग यहां आ रहे हैं। इन बहनों के नाम डॉ. कुर्तुल एन जोहरा और एमन जोहरा है। इस खूबसूरत स्नो आर्ट में एक लेडी डॉक्टर और कोविड वैक्सीन वाली सिरिंज दिखाई दे रही हैं। इसके अलावा स्टेथेस्कोप और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का शॉर्ट फॉर्म भी लिखा हुआ है। डॉ. कुर्तुल एन जोहरा ने इस प्रतिमा से कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वाले योद्धाओं को शुक्रिया कहा है। ये महिलाएं अपने प्रतिमा से महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दे रही हैं। उन्होंने कहा कि महामारी में डॉक्टर्स, पुलिस, एंबुलेंस ड्राइवर्स और मीडिया ने खास भूमिका अदा की है। महिला डॉक्टर की प्रतिमा बनाकर जोहरा उन महिलाओं को श्रद्धांजलि देना चाहती हैं जो महामारी के बीच दिन-रात लोगों की सेवा में लगी रहीं। कुर्तुल एन ने बताया कि वैक्सीन के साथ सिरिंज उम्मीदों की ओर इशारा करती है।

तेलंगाना की बाबुरी सिरिशा बनीं पहली लाइन विमेन

तेलंगाना के बिजली विभाग में लाइनमैन की पोस्ट के लिए जो भर्ती निकाली गई थी उसमें महिलाओं को वर्जित लिखा गया था। लेकिन सिरिशा ने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर इस बैन का विरोध किया। उन्होंने ये कहा कि जो काम लड़के कर सकते हैं, उसे मेरी तरह लड़कियां क्यों नहीं कर सकतीं। सिरिशा ने ट्रेड में आईटीआई की पढ़ाई पूरी की है।

आखिर सिरिशा की जीत हुई और उसके साथ आठ और लड़कियों ने इस पोस्ट के लिए आवेदन किया। उनमें से सिरिशा ने ये परीक्षा पास की। इसके साथ ही उसने बिजली के खंभे पर चढ़ने की परीक्षा भी पास की। इस साहसी लड़की ने खंभे पर चढ़ने और फिर उतरने में एक मिनट से भी कम समय लिया। सिरिशा को तेलंगाना की पहली लाइन वुमन बनने का सम्मान मिला है।

सिरिशा की उम्र 20 साल है। वे सिद्दीपट्‌ट राज्य के मारकूक मंडल में गणेशपल्ली गांव की निवासी हैं। सिरिशा का कहना है कि एक लाइन वुमन के तौर पर उन्हें कड़ी मेहनत करना होती है। वे अपने काम के बल पर ये बताना चाहती हैं कि महिलाएं किसी भी काम में पुरुषों से कम नहीं हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)