Saturday, April 4, 2026
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सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में मनाया गया गणतंत्र दिवस

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में 72वाँ गणतंत्र दिवस गूगल मीट के जरिए मनाया गया। स्कूल की प्राइमरी, मिडिल और सीनियर सेक्शन की छात्राओं ने इस समारोह में भाग लिया। छात्राओं को राजपथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड की झलकियाँ एक वीडियो में दिखायी गयी। छात्राओं को संविधान का अर्थ बताया गया और भारतीय संविधान के जनक डॉ. भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर दिखायी गयी। छात्राओं ने स्वाधीनता सेनानियों के परिधानों का अनुकरण किया, तिरंगे का उपयोग विभिन्न कलात्मक गति विधियों में किया। कुछ छात्राओं ने संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों की तरह अपनी सहपाठी छात्राओं के साथ संविधान पर चर्चा भी की। इस मौके पर छात्राओं ने विभिन्न कलाकृतियाँ बनायीं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग भी लिया।

एसबीएम बैंक सिंगापुर के स्टैश फिश के साथ लाया सम्पर्करहित प्रीपेड कार्ड्स

कोलकाता : एसबीएम बैंक ने सिंगापुर के स्टैश फिन के साथ मिलकर सम्पर्करहित प्रीपेड कार्ड्स शुरू किये हैं। नियो बैंकिंग स्टार्टअप स्टैश फिन के साथ साझीदारी में लाया गया कार्ड अंडरबैंक्ड ग्राहकों की क्षमता बढ़ाएगा। वीसा की सुविधा से युक्त कार्ड ईएमवी चिप सुरक्षा के अतिरिक्त निजी ओवरड्राफ्ट सुविधा, ग्राहक को 5 लाख रुपये तक के ऋण की सुविधा इस नये प्रीपेड कार्ड्स के जरिए मिलेगी। कार्ड ऑनलाइन या ऑफलाइन भुगतान तथा एटीएम से रुपये निकालने के लिए पूरे भारत में इस्तेमाल किया जा सकेगा। उपभोक्ता अपनी खरीददारी को ईएमआई में बदल सकेंगे और सिर्फ इस्तेमाल की गयी राशि पर ही उनको ब्याज देना होगा। स्टैश फिन के संस्थापक तुषार अग्रवाल ने उम्मीद जतायी कि यह नया कार्ड लाखों उपभोक्ताओं की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा। वहीं एसबीएम बैंक इंडिया के प्रमुख (रिटेल तथा कन्ज्यूमर बैंकिंग) नीरज सिन्हा ने यह नया कार्ड स्मार्ट बैंकिंग को प्रोत्साहन देगा।

बड़ाबाजार : यहाँ आग ही नहीं, उपेक्षा की राख में दबा सुनहरा गौरवशाली इतिहास भी है

बड़ाबाजार…कोलकाता के दिल का टुकड़ा…जो दिखता तो है इस टुकड़े को संवारना और समझना…दोनों ही अब तक शायद बाकी ही है। जब भी शहर के गौरवशाली इतिहास का जिक्र चलता है तो बड़ाबाजार का जिक्र…भीड़ भरी तंग गलियों और मुटिया – मजदूरों तक ही रुक जाता है। हकीकत यह है कि कोलकाता का इतिहास ही बड़ाबाजार के जिक्र से शुरू होता है….नहीं समझे….चलिए हम आपको बड़ाबाजार की तंग गलियों में छुपे इतिहास की ओर ले चलते हैं…और आज शुरुआत करते हैं…तंग गलियों वाले बड़ाबाजार के इतिहास से।

नीमतला में है दुर्गेश्वर महादेव यानी मोटा महादेव मंदिर…और यह वृहत्तर बड़ाबाजार का हिस्सा है

बूड़ो से से लेकर बड़ाबाजार बनने की यात्रा
बड़ाबाजार मतलब एक बड़ा बाजार…यह तो हिन्दी में हुआ मगर बांग्ला में इस नाम को लेकर एक और कहानी भी है..कहा जाता है कि यह बड़ा दरअसल ‘बूड़ो’ है जो बांग्ला में शिव का लोकप्रिय नाम है। कहा जाता है कि बूड़ो को बड़ा राजस्थान से आकर बसने वाले व्यवसायियों ने बनाया…और बूड़ो….बड़ाबाजार कहलाने लगा…मगर हमें और पीछे देखना होगा….जब यह इलाका सूतानाटी कहलाता था…सूतानाटी ही वह इलाका है जहाँ शहर कोलकाता के संस्थापक जॉब चारनक का पहला कदम पड़ा था…1690 में। सुरक्षा की दृष्टि से ही उन्होंने अपने लिए सूतानाटी को चुना था क्योंकि पश्चिम में यह नदी के कारण सुरक्षित था तो दक्षिण और पूर्व में दलदल था…इसलिए आसानी थी…सिर्फ उत्तरी इलाके को सुरक्षा की जरूरत थी। तब सूतानाटी, कलिकाता और गोविन्दपुर..ये तीन गाँव मुगलिया सल्तनत के लिए काफी खास थे जिसकी जमीन्दारी के अधिकार बरिशा के सवर्ण राय चौधरी परिवार के पास थे। 10 नवम्बर 1698 को जॉब चारनक के उत्तराधिकारी और दामाद चार्ल्स आयर ने इस परिवार से जमीन्दारी अधीग्रहीत कर ली। 1757 तक ईस्ट इंडिया कम्पनी मुगलों को इन गाँवों के लिए नियमित तौर पर किराया दिया करती थी।

बड़ाबाजार यानी कलकत्ते का स्याह हिस्सा

कोलकाता की प्रगति से आशंकित नवाब सिराज उद दौला ने 1756 में कोलकाता पर आक्रमण किया और इसका नाम अपने दादा के नाम पर अलीनगर रख दिया…कोलकाता तब एक बार फिर 1758 में ही ब्रिटिशों द्वारा बंगाल पर कब्जा करने के बाद ही लौट पाया। तब सिराज उद दौला के आक्रमण से जो तबाही और नुकसान हुआ. वह अंग्रेजों को दिख नहीं सका मगर हकीकत यह थी कि गोविन्दपुर, कलिकाता, सूतानाटी और चितपुर में सिर्फ कलिकाता को नुकसान हुआ जिसे व्हाइट कलकत्ता कहा गया मगर बड़ाबाजार किसी भी बड़ी क्षति से बच गया…सिर्फ आग को छोड़कर। अंग्रेज विस्थापितों ने फाल्ता में 40 मील (64 किमी) इलाके में अस्थायी इलाका बनाया। ब्रिटिश शासन के शक्तिशाली बनने के पहले इस इलाके में सेठ और बसाक व्यवसायियों का साम्राज्य हुआ करता था,,और ब्रिटिशों के आगमन के बाद नये अन्दाज में ये परिवार फलने – फूलने लगे। जनार्दन सेठ ब्रिटिशों के व्यावसायिक एजेंट थे शोभाराम बैशाख (1690 -1773) ईस्ट इंडिया कम्पनी को कपड़े बेचकर लखपति बन गये।

चितपुर रोड

इसके पहले भी नाम आता है मुकुन्दराम सेठ का जो, 16 वीं सदी के आरम्भ में हुआ करते थे और सप्तग्राम से गोविन्दपुर आये थे। जब गोविन्दपुर नष्ट हुआ तो सेठ सूतानाटी हाट आ गये…जो आज का बड़ाबाजार है। जनार्दन सेठ सबसे महत्वपूर्ण नाम है जो कि केनाराम सेठ (इनको किरनचन्द्र सेठ भी कुछ लोग कहते हैं) के पुत्र थे और इनके दो भाई थे…बनारसी और नन्दराम। आप आज गंगाजल के बिकने से परेशान होते हैं तो हम आपको बता दें कि जनार्दन सेठ के पुत्र बैष्णवचरण सेठ का व्यवसाय ही था बोतलों में गंगाजल बेचना। शोभाराम बसाक के पुत्र राधाकृष्ण बसाक बंगाल के दीवान हुआ करते थे। 18वीं सदी में तब तक बड़े घराने सम्पत्तियों में निवेश करने लगे थे। शोभाराम बसाक ने अपने उत्तराधिकारियों के लिए 37 मकान रख छोड़े थे और राम कृष्ण सेठ ने सिर्फ बड़ाबाजार इलाके में ही 16 मकान छोड़े थे।

स्वदेशी आन्दोलन का पहचान गोविन्द भवन

समय बदला और 18 सदीं के मध्य में सेठ और बसाक का गौरवशाली साम्राज्य खत्म होने लगा…कोलकाता और बड़ा जो हो रहा था। इनके साथ ही सूतानाटी भी गायब होने लगी और इतिहास के पन्नों में खोती चली गयी। कहा जाता है कि शोभाबाजार राजबाड़ी के नवकृष्ण देव को सूतानाटी की तालुकदारी दी जाने वाली थी। सूतानाटी सस्कृति आज भी बंगाल के अभिजात्य समाज का प्रतीक है दो शहरी सामंती संस्कृति थी। सूतानाटी हाट से ही 18वीं सदी में आज के बड़ाबाजार के लिए रास्ता बना। तब यह बाजार 500 बीघा जमीन में फैला था और बाकी 400 बीघा में आवासीय इलाके थे। सेठ औऱ बसाक के अतिरिक्त यहाँ स्वर्ण का व्यवसाय करने वाले मलिक व अन्य घराने थे। आज के कलाकार स्ट्रीट में जिस इलाके को हम ढाकापट्टी कहते हैं यह ढाका के साहा कहे जाने वाले वस्त्र व्यवसासियों का घर हुआ करता था और सम्भव है कि ढाका शब्द इसी वजह से जुड़ा हो। इन व्यवसासियों का ढाका, मुर्शिदाबाद और कासिमबाजार से गहरा सम्पर्क था।

और फिर आकर बसा मारवाड़ी समुदाय

अब सवाल उठता है कि राजस्थान से मारवाड़ी समुदाय कब आकर बड़ाबाजार में बस गया तो मारवाड़ी समाज तो यहाँ 17वीं सदी से ही आने लगा था मगर इसके पहले अकबर के समय से ही राजस्थान के बाद व्यवसाय के विस्तार में यहाँ के लोग जुट गये थे। मुर्शिदाबाद मे हजारीमल का नाम आता है और परमानेंट सेटलमेंट के बाद इन्होंने जमीनें भी खरीदनी शुरू कर दीं। पोरवाल मारवाड़ी दुलालचन्द सिंह का नाम आता है जो ढाका में रहते थे और उन्होंने कई बाजार बनवाये।

राम मंदिर के नाम से विख्यात सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय जहाँ एक मंदिर और पुस्तकालय भी है

बाकरगंज, पटुआखाली औऱ कोमिलिया जिलों में ढाका के ख्वाजा की साझीदारी में इनकी सम्पत्ति थी और ये जूट का कारोबार भी करते थे। नवाब मीर कासिम ने सेना को फिर से उन्नत करने के लिए जगत सेठ से मदद माँगी थी और मदद नहीं मिली उनको मरवा भी दिया। 19वीं सदी में मारवाड़ी समाज का बंगाल आगमन और उनकी स्थिति, दोनों मजबूत हुआई। ताराचंद घनश्याम दास, बंसीलाल अबीरचंद, सदासुख गम्भीरचन्द, हरसुखदास, बालकिसनदास, कोठीवाल डागा, रामकिसन बागड़ी ने व्यावसायिक स्तर पर बंगाल से लेकर बांग्लादेश यानी तब के पूर्वी बंगाल में स्थिति मजबूत कर ली थी। जूट के कारबार पर इनका वर्चस्व था…आगे चलकर स्वाधीनता आन्दोलन में भी आर्थिक स्तर पर इस समुदाय ने सहयोग दिया और बूड़ो बाजार धीरे – धीरे आज का बड़ाबाजार बन गया। बड़ाबाजार में कई कटरे हैं…सदासुख कटरा. राजा कटरा….इनका भी अपना महत्व है…।

स्वाधीनता आन्दोलन से भी गहरा रिश्ता है बड़ाबाजार का

आज अग्निकांड ही बड़ाबाजार की पहचान बनाये जा रहे हैं

महात्मा गाँधी के स्वदेशी को जन – जन तक पहुँचाने में और समाज सुधार व सेवाकार्य के क्षेत्र में भी बड़ाबाजार के व्यवसायियों की बड़ी भूमिका है। स्वदेशी ही क्यों, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में भी बड़ाबाजार लगातार काम कर रहा है। आप जिन उद्योगपतियों के योगदान को खारिज करते आ रहे हैं, स्त्री शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के पीछे उनका बड़ा योगदान है और यह पूरे देश में है। इस पर हम एक – एक करके बात करेंगे लेकिन हम कुछ नाम फिलहाल जरूर बताना चाहेंगे जिससे आपको अन्दाजा लगे…दुःख का विषय है कि इस इतिहास को सहेजने के लिए तत्परता की कमी है मगर है तो इतिहास ही, इसलिए हमारी तरफ से छोटा सा प्रयास इस श्रृंखला के रूप में हम ला रहे हैं। गोविन्द भवन, शुद्ध खादी भंडार से लेकर मारवाडी हॉस्पिटल या श्री विशुद्धानंद हॉस्पिटल हो या मारवाड़ी बालिका विद्यालय, माहेश्वरी बालिका व विद्यालय या श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय, बड़ाबाजार लाइब्रेरी या सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय। हमें हैरत है कि इतिहास के इस सुनहरे अध्याय पर बात क्यों नहीं होती।

हो सकता है कि कोलकाता को जॉब चारनक ने बसाया हो मगर बड़ाबाजार को मारवाड़ी और बिहार – उत्तर प्रदेश समेत अन्य हिन्दीभाषी प्रदेशों के योगदान से ही बना है। हम यह नहीं जानते कि हर मारवाड़ी बड़ाबाजार में रहता है या नहीं मगर हम इतना जरूर जानते हैं कि बड़ाबाजार हर मारवाड़ी के दिल में रहता है क्योंकि प्रवासियों के इतिहास का बड़ा भाग बड़ाबाजार की इन तंग गलियों में रहता है। हकीकत फिर भी यही है कि किसी सरकार की नजर इस विरासत पर नहीं जाती और उन्नति के नाम पर पर स्थानान्तरण के बहाने खोजे जा रहे हैं। बड़ाबाजार आग लगने के लिए बदनाम है मगर यह कोई नहीं बताता कि यही तंग गलियाँ, यही कटरे आपकी अर्थव्यवस्था को आज भी धार दे रहे हैं। आज भी हर त्योहार की खरीददारी के लिए लोग बड़ाबाजार ही जाते हैं…फिर इसे सहेजने और विकसित करने की जगह स्थानान्तरण की बात क्यों सोची जा रही है…यह हमारी समझ के बाहर है।

आज भी पुराने कोलकाता में खड़ी विशाल राजप्रासाद उस पुराने वैभव की स्मृतियाँ ताजा करते हैं। आज बड़ाबाजार ही नहीं बल्कि बंगाल, कोलकाता और देश के विकास में भी मारवाड़ी समुदाय का अपना योगदान है…जिस पर हमारी बात होगी।

स्त्रोत साभार –

विकिपीडिया – सूतानाटी पेज 

बांग्लापीडिया – मारवाड़ी

भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि

कोलकाता :  भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के प्रांगण में गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा फहराया गया जिसमें प्रदीप सेठ, नलिनी पारीख आदि प्रबन्धन के सदस्यों की उपस्थिति रही। एनसीसी के कैडट आशुतोष कुमार झा और अमित यादव के नेतृत्व में झंडे को सलामी दी गई। कैप्टन आदित्य राज के सहयोग से कॉलेज की एनसीसी टीम से चुने गए विशिष्ट केडेटों को कॉलेज द्वारा सम्मानित किया गया ।डीन प्रो दिलीप शाह ने भारतीय संविधान के प्रस्तावना को पढ़ा जिसे विद्यार्थियों और शिक्षकों ने दोहराया। 26 नवंबर 1949 को इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया जो भारतीय व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली और बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प प्रदान करती है।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए कॉलेज के इन एक्ट के विद्यार्थी ने चंद्रशेखर आजाद का अभिनय करते हुए आजाद के जज्बातों को आवाज दी।कॉलेज के एनसीसी टीम की समन्वयक और कोऑर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने एनसीसी के छात्र छात्राओं द्वारा आयोजित लड़कियों की सुरक्षा और आत्मसम्मान के लिए किए गए प्रदर्शन कार्यक्रम का संचालन किया। इसमें आशुतोष कुमार झा और खुशी लकराना आदि की टीम ने मार्शल आर्ट की तकनीक द्वारा लड़कियों को अपनी सुरक्षा के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। अन्य सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन यू-ट्यूब और फेसबुक के माध्यम से प्रीरिकार्डिंग द्वारा लाइव प्रसारण किया गया। कोरोना काल में सोशयल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बहुत ही कम संख्या में उपस्थित होकर गणतंत्र दिवस समारोह मनाया गया, मिठाई के पैकेट भी वितरित किए गए । डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी।

अटैचमेंट क्षेत्र

वर्धा विश्वविद्यालय, कोलकाता केंद्र में एमए में प्रवेश का अवसर

कोलकाता:  केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले शिक्षण संस्थान महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के साल्ट लेक, सेक्टर-3 स्थित क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता में एम.ए. हिंदी साहित्य में रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए एक अवसर और दिया जा रहा है। केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 30 जनवरी 2021 है। चयनित विद्यार्थियों के नामों की सूचना और ऑनलाइन शुल्क जमा करके नामांकन संबंधी प्रक्रिया 01 फरवरी तक पूरी कर ली जाएगी। विशेष जानकारी के लिए विश्वविद्यालय के वेबसाइट www.hindivishwa.org का अवलोकन किया जा सकता है तथा केंद्र के फोन नंबर : 033-46039985 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

गणतंत्र दिवस पर भायी डिजिटल इंडिया आत्मनिर्भर भारत की झाँकी

नयी दिल्ली : गणतंत्र दिवस पर परेड में इलेक्ट्रानिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी की झाँकी को खूब सराहना मिली। यह झाँकी डिजिटल इंडिया आत्मनिर्भर भारत की थीम पर आधारित थी और इसे आईटीडब्ल्यू प्लेवर्क्स ने डिजाइन किया था। मेटी डिजिटव इंडिया आत्मनिर्भर भारत की यह झाँकी एन ई जीडी के अध्यक्ष व सीईओ तथा अभिषेक सिंह के मार्गदर्शन में तैयार की गयी थी। वे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक भी हैं। झाँकी के आगे ए आई रोबोट का थ्री डी मॉडल था। इसके साथ ही एल ई डी वॉल पर डिजिटल क्षेत्र में भारत की प्रगति को दर्शाया गया था। अगले भाग में मोबाइल फोन पर बात करते हुए किसान को दर्शाया गया था। झाँकी के अंत में एक आधुनिक रोबोटिक आर्म थी जिसमें सरकार द्वारा दी गयी डिजिटल सुविधाओं का वीडियो था जिसमें कोविड -19 टीकाकरण अभियान का चित्रण भी शामिल रहा।

कोविड -19 को चुनौती की तरह लें युवा : डॉ. किरण बेदी

जमशेदपुर : एक्सएलआरआई जमशेदपुर के पीजीडीएम (जी एम) की प्लेसमेंट कमेटी द्वारा आयोजित लीडरशिप टॉक में वर्चुअल माध्यम पर पुडुचेरी की उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने युवाओं को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि कोविड -19 अध्ययन का विषय हो सकता है और युवाओं को इसे चुनौती की तरह लेना चाहिए। इसने हमारी नेतृत्व क्षमता को सामने लाने में भी मदद की है। परिवार और काम के बीच सन्तुलन रखने की जरूरत है। एक्सएलआरआई जमशेदपुर के डीन (अकादमिक) प्रो. आशीष के पानी ने किरण बेदी का स्वागत किया। इस व्याख्यान को विद्यार्थियों के अतिरिक्त शिक्षकों व अतिथियों ने भी सुना और देखा।

वर्धा विश्वविद्यालय, कोलकाता केंद्र में गणतंत्र दिवस समारोह

कोलकाता :   72वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता में एक समारोह का आयोजन किया गया। आरम्भ में केंद्र प्रभारी डॉ. सुनील कुमार ‘सुमन’ ने बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर और महात्मा गांधी की तस्वीर पर माल्यार्पण करने के बाद तिरंगा झंडा फहराया। राष्ट्रगान के उपरांत उन्होंने सभी को संविधान की प्रस्तावना की शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. सुनील ने कहा कि दुनिया के सबसे लोकतंत्र वाले देश भारत में आज का दिन बेहद अहम है। आज का दिन सम्भव बनाने में हज़ारों-लाखों लोगों ने अपनी कुर्बानियाँ दीं। अतः हम सबकी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि हम लोकतांत्रिक मूल्यों को मज़बूत करने और देश की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रखने में अपना योगदान दें। इसके लिए जरूरी है कि देश में समतामूलक समाज बनाने की दिशा में काम हो। डॉ. सुनील ने कहा कि अकादमिक जगत समाज में तार्किकता और वैज्ञानिकता स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है और इसी से सही मायनों में गणतन्त्र और संविधान की रक्षा हो सकती है। इस अवसर पर केंद्र कर्मी डॉ आलोक कुमार सिंह, सहायक संपादक राकेश श्रीमाल, सुखेन शिकारी, रीता बैद्य, मीडिया प्राध्यापक डॉ ललित कुमार, युवा लेखक और शोधार्थी बृजेश प्रसाद, पत्रकार सुशील पाण्डेय, पूजा साव, शास्वती मुखर्जी, विवेक साव, साक्षी कुमारी, नीतु कुमारी, बलबीर मोदी समेत नन्हीं मेहमान रोशनी उपस्थित रहे।

गणतंत्र दिवस पर लीजिए तीन रंग की चटनियों का स्वाद

लाल शिमला मि्र्च की चटनी

सामग्री :  1 लाल शिमला मिर्च, 1 प्याज, 2 हरी मिर्च, 1 कप हरा धनिया, 1 चम्मच तेल, 1 चम्मच राई, 1 चम्मच उड़द दाल, 1/2 चम्मच लाल मिर्च, 1/4 चम्मच हींग।

विधि : एक पैन में तेल गरम करें, आधी राई, दाल और हींग डालें फिर प्याज डालकर अच्छे से भूनें। लाल शिमला मिर्च और हरी मिर्च डालें। अब धनिया पत्ती और नमक डाल कर पकाएं। जब यह ठंडा हो जाएं तो ग्राइंडर में पीस लें। शेष बची सामग्री का तड़का बना कर चटनी पर लगा लें। स्वादिष्ट चटनी बनकर तैयार है।

नारियल की चटनी

सामग्री :  एक बड़ा कप कसा हुआ नारियल, एक मुट्ठी भुनी हुई मूंगफली, छिली हुई दो छोटी हरी मिर्च, एक छोटा चम्मच कसा हुआ अदरक, एक बड़ा चम्मच भुनी हुई दाल चीनी, नमक, स्वादानुसार
तडके के लिए :  आधा छोटा चम्मच सरसों के दाने, एक लाल मिर्च, 2 से 3 कड़ी पत्ता, एक चम्मच तेल

विधि : नारियल की चटनी बनाने के लिए, एक मिक्सर में नारियल, हरी मिर्च, अदरक, भुनी हुई मूंगफली, नमक और थोडा पानी डालकर अच्छा पेस्ट तैयार कर लें। अब एक छोटे पेन में तेल गर्म कर उसमें सरसों, लाल मिर्च और कड़ी पत्ते के बीज डालकर, चटकने तक भून लें। अब तैयार नारिरल के पेस्ट में इस तडके को डाल दें। आपकी नारियल की चटनी बनकर तैयार है।

 

धनिये की चटनी

सामग्री : हरा धनिया 100 ग्राम (बारीक कटा हुआ), 2 लहसुन की कलियां, 2 से 3 हरी मिर्च, नमक स्वादानुसार, ½ छोटे चम्मच जीरा, ½ नींबू

विधि : हरे धनिये की चटनी बनाने के लिए हरे धनिए को पानी से अच्‍छी तरह धो लीजिए। मिक्सर जार में कटा हुआ हरा धनिया, लहसुन, हरी मिर्च, जीरा, नमक और थोड़ा पानी डाल कर बारीक पीस लें। सारी सामग्री पीसने के बाद इसमें नींबू का रस निचोड़ कर अच्छे से मिक्स कर लें। हरे धनिए की तीखी चटपटी चटनी तैयार है।

(साभार – हेल्थ शॉट्स)

कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरान्त महावीर चक्र, 40 को मिलेगा जीवन रक्षा पदक

नयी दिल्ली, एजेंसियां। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार ने पिछले साल 15 जून को गलवन घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुए संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान करने की घोषणा की है। महावीर चक्र युद्धकाल में दिया जाने वाला दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। उनके अलावा पुलवामा में हुए हमले से पहले आतंकियों की विस्फोटकों से भरी कार का पीछा करके उन्हें रोकने की कोशिश में अपनी जान न्योछावर करने वाले सीआरपीएफ के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर मोहन लाल को वीरता के लिए सर्वोच्च पुलिस पदक प्रदान करने की घोषणा की गई है। सरकार की ओर से की गई घोषणा के मुताबिक सूबेदार संजीव कुमार (मरणोपरांत) कीर्ति चक्र प्रदान किया गया है। जबकि नायब सूबेदार मुडुराम सोरेन (मरणोपरांत), हवलदार के. पलानी (मरणोपरांत), नायब दीपक सिंह (मरणोपरांत), सिपाही गुरतेज सिंह (मरणोपरांत) और हवलदार तेजेंद्र सिंह को वीर चक्र प्रदान किया गया है। मेजर अनुज सूद (मरणोपरांत), राइफलमैन प्रणव ज्योतिदास और सोनम शेरिंग तमांग को शौर्य चक्र प्रदान किया गया है। इनके अलावा सरकार ने 207 पुलिस वीरता पदक, उत्कृष्ट सेवा के लिए 89 राष्ट्रपति पुलिस पद और सराहनीय सेवा के लिए 650 पुलिस पदक प्रदान करने की घोषणा की है।

40 लोगों को जीवन रक्षा पदक प्रदान किए जाने की स्वीकृति

उधर, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दूसरों का जीवन बचाने के लिए बहादुरी दिखाने वाले 40 लोगों को जीवन रक्षा पदक प्रदान किए जाने की स्वीकृति दी है। इनमें एक केरल से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति का नाम भी शामिल है जिसे सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक (मरणोपरांत) प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच के लिए सीबीआइ में एसएसपी के रूप में प्रतिनियुक्त दिल्ली पुलिस के अधिकारी महेश भारद्वाज को असाधारण सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया गया है। फरवरी, 2018 में उन्हें मणिपुर में सुरक्षा बलों द्वारा कथित फर्जी मुठभेड़ों और मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच में शामिल करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई में प्रतिनियुक्त किया गया था।

उत्तम जीवन रक्षा पदक भी किए गए प्रदान

गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, आठ लोगों को उत्तम जीवन रक्षा पदक और 31 लोगों को जीवन रक्षा पदक 31 प्रदान किए जाएंगे। जीवन रक्षा पदक श्रृंखला के पुरस्कार तीन श्रेणियों- सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक, उत्तम जीवन रक्षा पदक और जीवन रक्षा पदक के तौर पर दिए जाते हैं। केरल के मुहम्मद मोहसिन को सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक-2020 (मरणोपरांत) के लिए नामित किया गया है। ये पुरस्कार किसी व्यक्ति के संकट में पड़े जीवन को बचाने और उसकी मदद करने के लिए दिए जाते हैं। इस पुरस्कार के तहत पदक, गृह मंत्रालय द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपपत्र और कुछ निश्चित राशि प्रदान की जाती है। गुजरात के रामशीभाई रतनभाई समद, महाराष्ट्र के परमेश्वर बालसजी नागरगोजे, पंजाब की अमनदीप कौर, तेलंगाना के कोरिपेल्ली स्त्रुजन रेड्डी तथा कई अन्य लोगों को उत्तम जीवन रक्षा पदक प्रदान किए जाएंगे।

आइटीबीपी के 17 जवान पुलिस पदक से सम्मानित

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के 17 जवानों को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को विभिन्न श्रेणियों के पुलिस सेवा पदक से सम्मानित किया गया। दो अधिकारियों को उनकी बहादुरी के लिए पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया, जबकि तीन को उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और 12 को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि डिप्टी कमांडेंट राजेश कुमार लूथरा को जुलाई, 2019 में लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ गतिरोध को रोकने के लिए साहस और सूझबूझ का परिचय देने के लिए पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। वहीं, सहायक कमांडेंट अनुराग कुमार सिंह को 2017 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियान चलाने के लिए दूसरी बार वीरता पदक प्रदान किया गया। पदक पाने वाले अन्य अधिकारियों में महानिरीक्षक (आइजी) दीपम सेठ को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया और उपमहानिरीक्षक सुधाकर नटराजन को उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है। उत्तराखंड कैडर के 1995 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी सेठ 2019 के मध्य से लद्दाख में स्थित आइटीबीपी के उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती मोर्चे का नेतृत्व कर रहे हैं।