Thursday, April 30, 2026
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बंगाल की रानी भवशंकरी, जिन्हें अकबर ने कहा था रायबाघिनी

वह भूरिश्रेष्ठ साम्राज्य की शासक थीं, जिसका शासन आधुनिक हावड़ा, हुगली, बर्दवान और मिदनापुर के बड़े हिस्से तक फैला हुआ था। रानी भवशंकरी पठानों और मुगलों के लिए इतनी आतंकित थीं कि बादशाह अकबर ने भी उन्हें रायबाघिनी नाम दिया था। भवशंकरी एक ब्राह्मण परिवार से थीं। उनके पिता दीनानाथ चौधरी पेंडो किले के सेनापति के अधीन नायक थे। दीनानाथ एक लंबे-चौड़े और हट्टे-कट्टे सैनिक थे, जो युद्धकला में अत्यंत कुशल थे। वह स्वयं एक हज़ार से ज़्यादा सैनिकों की एक टुकड़ी का नेतृत्व करते थे। उनके पास एक विशाल जागीर थी और वे अपनी प्रजा को युद्धकला में प्रशिक्षित होने के लिए प्रोत्साहित करते थे। दीनानाथ भूरिश्रेष्ठ के सम्मानित कुलीनों में गिने जाते थे। भवशंकरी का जन्म पेंडो में हुआ था, जो दीनानाथ की दो संतानों में से पहली संतान थीं। जब वह छोटी थीं, तो उनके छोटे भाई को जन्म देते समय उनकी माँ का देहांत हो गया था। हालाँकि उनके भाई का पालन-पोषण एक पालक माँ ने किया, लेकिन उनका बचपन अपने पिता के सानिध्य में बीता। कम उम्र से ही उनके पिता ने उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाज़ी और तीरंदाज़ी का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया था। वह भी सैन्य कवच पहनकर अपने पिता के साथ घुड़सवारी करती थीं। वह भूरिश्रेष्ठ राज्य की एक बहादुर युवा सैनिक के रूप में बड़ी हुईं। फिर उन्होंने युद्ध, कूटनीति, राजनीति, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र और यहाँ तक कि धर्मशास्त्र की भी शिक्षा ली। अपनी युवावस्था में भवशंकरी दामोदर नदी से सटे जंगल में शिकार के लिए जाती थीं। एक बार हिरण का शिकार करते समय उन पर जंगली भैंसों ने हमला कर दिया और उन्होंने अकेले ही उन्हें मार गिराया। उसी समय भूरिश्रेष्ठ के राजा रुद्रनारायण वहाँ से गुज़र रहे थे। एक युवती को भाले से एक जंगली भैंसे को मारते देखकर वे मोहित हो गए। वह उससे विवाह करना चाहते थे और राजपुरोहित हरिदेव भट्टाचार्य ने उनका विवाह तय कर दिया।
रानी भवशंकरी ने शुरू में ही यह निश्चय कर लिया था कि वह उसी पुरुष से विवाह करेंगी जो उन्हें तलवारबाज़ी में हरा देगा। हालाँकि, चूँकि राजा के लिए किसी आम आदमी के साथ नकली तलवारबाज़ी करना संभव नहीं था, इसलिए उसे अपना संकल्प बदलना पड़ा। उसने प्रस्ताव रखा कि राजा को भूरिश्रेष्ठ की संरक्षक देवी राजबल्लवी के सामने एक ही वार में एक जोड़ी भैंसों और एक भेड़ की बलि देनी होगी।
विवाह के बाद, भवशंकरी गढ़ भवानीपुर किले के ठीक बाहर, नवनिर्मित महल में रहने लगीं। राजा की पत्नी के रूप में, वह राजा के राजकीय कर्तव्यों में उनकी सहायता करने लगीं। उन्होंने राज्य के सैन्य प्रशासन में विशेष रुचि ली। वह नियमित रूप से प्रशिक्षु सैनिकों से मिलने जाती थीं और सैन्य ढाँचे के उन्नयन और आधुनिकीकरण की व्यवस्था करती थीं। वह प्रत्येक प्रजा को सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने लगीं। उन्होंने भूरिश्रेष्ठ की सीमाओं पर नए गढ़ किले बनवाए और मौजूदा किलों का जीर्णोद्धार करवाया।
उनकी कुलदेवी राजवल्लभी थीं, जो माँ चंडी का अवतार थीं और उनकी मूर्ति अष्टधातु से बनी थी। भवशंकरी उनकी पूजा करती थीं और एक बार उन्होंने कामना की कि कोई भी पुरुष उन्हें युद्ध में पराजित न कर सके। दो दिनों तक उपवास करने के बाद, तीसरे दिन उनकी प्रार्थना अंततः सुनी गई और उनकी मनोकामना पूरी हुई। जयदुर्गा ने उन्हें अपनी शक्ति का आशीर्वाद दिया और उन्हें एक तलवार दी जो गढ़ भवानीपुर स्थित राजमहल के पास झील के तल में रखी थी। भक्ति से ओतप्रोत भवशंकरी ने झील में स्नान करते समय तलवार स्वीकार कर ली। भवशंकरी की कुलदेवी आज भी पूरे हावड़ा जिले में अमता की मेलई चंडी, मकरदाह की माँ मकरचंडी, डोमजूर के पास एक गाँव जयचंडी ताला की माँ जया चंडी और बेतई की बेतई चंडी के रूप में पूजी जाती हैं।
बशुरी का युद्धक्षेत्र, रायबाघिनीपाड़ा – उन्होंने तारकेश्वर के पास छौनापुर में किले की सीमावर्ती खाई के ठीक बाहर एक मंदिर बनवाया। यह मंदिर एक सुरंग द्वारा निकटवर्ती किले से जुड़ा था जो एक पलायन मार्ग था। उन्होंने बशुरी गाँव में एक भवानी मंदिर भी बनवाया। इस काल में, भूरिश्रेष्ठ कृषि और व्यापार में समृद्ध होने लगा। वस्त्र और धातुकर्म जैसे स्वदेशी उद्योग फलने-फूलने लगे। शीघ्र ही भवशंकरी ने राजकुमार प्रतापनारायण को जन्म दिया। राजा रुद्रनारायण ने विद्वानों को भूमि और सोना तथा चाँदी, वस्त्र और भोजन प्रदान किया। हालाँकि, रुद्रनारायण की मृत्यु तब हुई जब प्रतापनारायण केवल पाँच वर्ष के थे। गौड़ और पांडुआ के पठान नवाबों के शासन के दौरान भूरिश्रेष्ठ राज्य अधिकांशतः तटस्थ रहा। हालाँकि, कालापहाड़ के धर्मांतरण के कारण, रुद्रनारायण ने संभावित आक्रमण की आशंका में व्यापक युद्ध की तैयारी शुरू कर दी थी। मुगलों से पराजित होने के बाद, बंगाल के पठानों ने उड़ीसा में शरण ली। उड़ीसा में अपने ठिकाने से, उस्मान खान के नेतृत्व में पठान बंगाल पर आक्रमण करने की योजना बना रहे थे। भवशंकरी ने राज्य के मामलों का भार राजस्व मंत्री दुर्लभ दत्ता और सेनापति चतुर्भुज चक्रवर्ती को सौंपा।
सशस्त्र सेना लेकर राजकुमार प्रतापनारायण के साथ कस्तसंग्रह के लिए रवाना हो गई थीं। उनके पास महिला अंगरक्षक थीं। हालाँकि, वह दिन के अधिकांश समय युद्ध पोशाक में रहती थीं और अपनी तलवार और बन्दूक साथ रखती थीं। इस बीच, चतुर्भुज चक्रवर्ती ने पठान सेनापति उस्मान खान के साथ एक गुप्त समझौता किया, जिसके अनुसार वह अपनी सेना के साथ मुगलों के खिलाफ लड़ाई में पठान सेना में शामिल होंगे और पठानों की जीत पर वह भूरिश्रेष्ठ के नए शासक बनेंगे। चतुर्भुज चक्रवर्ती से मिली खुफिया जानकारी से पोषित पठान सेना भवशंकरी और उनके बेटे को जीवित पकड़ने के लिए निकल पड़ी। उस्मान खान स्वयं अपने बारह प्रशिक्षित, अनुभवी और सबसे भरोसेमंद सैनिकों के साथ हिंदू भिक्षुओं के वेश में प्रवेश किया। 200 पठान सैनिकों की एक और टुकड़ी भेष बदलकर उनका पीछा करेगी। हालाँकि, उस्मान की अग्रिम सेना को अमता में देखा गया और जैसे ही यह खबर रानी तक पहुँची, उन्होंने निकटतम गैरीसन से 200 रक्षकों की एक टुकड़ी बुलाई। रात होने पर, उन्होंने अपने कवचधारी वस्त्रों के ऊपर श्वेतपट्टा धारण किया और पूजा-अर्चना में लीन हो गईं। उनकी महिला अंगरक्षकों ने मंदिर के बाहर पहरा दिया और सैनिक जंगलों में फैल गए।
जब एक पठान सैनिक ने सुरक्षा व्यवस्था भंग करके मंदिर परिसर में घुसने की कोशिश की, तो युद्ध छिड़ गया। महिला अंगरक्षकों ने तुरंत कार्रवाई की और तलवारबाज़ी शुरू हो गई। जल्द ही शाही रक्षक भी युद्ध में शामिल हो गए। पठान बुरी तरह पराजित हुए और जब उन्होंने भागने की कोशिश की, तो शाही रक्षकों ने उनका पीछा करके उन्हें मार डाला। यहाँ तक कि उस्मान भी भाग गया। वहीं, मुगल सम्राट अकबर, जो बंगाल में पठानों के पुनरुत्थान से हमेशा सावधान रहते थे, ने भूरिश्रेष्ठ के साथ गठबंधन को मजबूत करने का फैसला किया। उन्होंने मान सिंह को रानी भवानीशंकरी के पास भेजा और एक विशेष समारोह में संधि-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इस संधि के माध्यम से, भूरिश्रेष्ठ की संप्रभुता को मुगल साम्राज्य द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। संधि के अनुसार, भूरिश्रेष्ठ को संधि के प्रतीक के रूप में एक स्वर्ण मुद्रा, एक बकरा और एक कंबल भेजना आवश्यक था। महारानी भवशंकरी को रायबाघिनी की उपाधि दी गई थी और मुगलों ने कभी भी उनके राज्य में हस्तक्षेप नहीं किया।
(साभार – गेट बंगाल डॉट कॉम)

 

 

यंग बॉयज क्लब ने “ऑपरेशन सिंदूर” थीम पर बनाया दुर्गापूजा मंडप

कोलकाता । मध्य कोलकाता के बहुचर्चित दुर्गापूजा कमेटियों में एक “यंग बॉयज क्लब” दुर्गा पूजा कमेटी ने इस वर्ष “ऑपरेशन सिंदूर” थीम के जरिए भारत के सशस्त्र बलों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर अपनी स्थापना के 56वें वर्ष का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है। तारा चंद दत्ता स्ट्रीट और सेंट्रल एवेन्यू को रवींद्र सरणी से जोड़ने वाले एक ऐतिहासिक स्थल में बने भव्य थीम पर यह जीवंत पूजा मंडप, हज़ारों लोगों को इसकी भव्यता को देखने के लिए अपनी ओर आकर्षित करेगा। कलाकार देबशंकर महेश द्वारा डिज़ाइन किए गए इस मनमोहक पंडाल में कई आकर्षक कलाकृतियाँ हैं, जो थीम को जीवंत बनाती हैं। इस मंडप में दर्शकों को भारतीय सेना के टैंकों और मिसाइलों की जीवंत प्रतिकृतियाँ देखने को मिलेंगी। इस थीम का मुख्य आकर्षण भारतीय सेना का सिर गौरव से ऊंचा करनेवाली देश की वो दो वीर बेटियां, महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह का सम्मान हैं। उनकी प्रतिकृतियाँ सेना में महिलाओं की शक्ति और नेतृत्व के सशक्त प्रतीक के रूप में खड़ी हैं। यंग बॉयज क्लब के मुख्य आयोजक राकेश सिंह ने कहा, दुर्गा पूजा हमारे लिए एक उत्सव से कहीं बढ़कर है। यह एक भावना है, जो लोगों को एक साथ बांधती है। हर साल हम एक ऐसी थीम प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं, जो न केवल आगंतुकों को आकर्षित करे, बल्कि अपने मंडप के जरिए एक गहरा संदेश भी दे। इस अवसर पर यंग बॉयज़ क्लब के युवा अध्यक्ष विक्रांत सिंह ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से, हम अपने उन सैनिकों के साहस और बलिदान को सलाम करना चाहते हैं, जो अटूट समर्पण के साथ हमारे देश की रक्षा करते हैं। यंग बॉयज़ क्लब के सह-आयोजक विनोद सिंह ने कहा, हर साल हमारा लक्ष्य एक ऐसी दुर्गा पूजा का आयोजन करना है, जो न केवल भव्यता के माध्यम से, बल्कि सार्थक कहानियों के माध्यम से भी एक अमिट छाप छोड़े। मूर्तिकार कुशध्वज बेरा ने देवी दुर्गा की मूर्ति बनाई है। पंडाल की थीम देशभक्ति से ओतप्रोत है। वहीं दुर्गा प्रतिमा अपनी पारंपरिक शैली को बरकरार रखते हुए पुराने और नए का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण प्रस्तुत करती है। यह अनूठा डिज़ाइन न केवल देवी का सम्मान करता है, बल्कि भारतीय सेना की वीरता को भी नमन करता है।

दिल्ली हाईकोर्ट में बैलेट पेपर से चुनाव कराने वाली याचिका खारिज

नयी दिल्ली । चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बदले बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने वाली याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए खारिज यह याचिका उपेंद्र नाथ दलाई नाम के व्यक्ति ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि देश में होने वाले सभी चुनाव केवल बैलेट पेपर (मतपत्र) के माध्यम से कराए जाएं, न कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के जरिए। याचिका में दावा किया गया था कि ईवीएम पर जनता का विश्वास नहीं रहा है और इससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े होते हैं। दलाई ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह चुनाव आयोग को निर्देश दे कि भविष्य में केवल बैलेट पेपर से ही वोटिंग कराई जाए। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ शब्दों में कहा कि ऐसा कोई आधार नहीं है, जिस पर कोर्ट इस याचिका को स्वीकार करे। अदालत ने कहा कि ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर चुनाव आयोग ने समय-समय पर पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाए हैं। साथ ही, वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) मशीनों के जरिए भी वोटिंग प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया गया है। चुनाव आयोग का भी हमेशा यही कहना रहा है कि ईवीएम एक भरोसेमंद और पारदर्शी व्यवस्था है, जिससे चुनाव प्रक्रिया तेज, निष्पक्ष और निष्कलंक बनती है।

रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा 78 दिनों का दिवाली बोनस

– बिहार के लिए 6 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी
नयी दिल्‍ली । केंद्रीय कैबिनेट में बुधवार को 10.90 लाख रेलवे कर्मचारियों को उत्पादकता आधारित बोनस (पीएलबी) को मंजूरी दे दी। यह बोनस दिवाली से पहले कर्मचारियों के अकाउंट में भेजा जाएगा। इसके लिए 1865 करोड़ 68 लाख रुपये के भुगतान को स्‍वीकृति दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार के बख्तियारपुर-राजगीर और झारखंड के तिलैया के बीच 104 किलोमीटर की रेल दोहरीकरण परियोजना को भी मंजूरी दी है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज 10 लाख 91 हजार 146 रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के उत्पादकता से जुड़े बोनस (पीएलबी) के रूप में 1865 करोड़ 68 लाख रुपये के भुगतान को स्‍वीकृति दी। रेलवे कर्मचारियों के बेहतर कामकाज को मान्‍यता देते हुए यह मंजूरी दी गई है।उन्होंने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार के बख्तियारपुर-राजगीर और झारखंड के तिलैया के बीच 104 किलोमीटर की रेल दोहरीकरण परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस पर करीब 2,192 करोड़ रुपये की लागत आएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार के लिए लगभग छह हजार करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह बोनस रेलवे कर्मचारियों के 78 दिनों के वेतन के बराबर है। हर साल दुर्गा पूजा, दशहरा की छुट्टियों से पहले पात्र रेल कर्मचारियों को पीएलबी का भुगतान किया जाता है। उन्‍होंने कहा कि इस वर्ष लगभग 10 लाख 91 हजार अराजपत्रित रेल कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर पीएलबी राशि का भुगतान किया जा रहा है। पिछले साल सरकार ने रेल कर्मचारियों के लिए 2,029 करोड़ रुपये के बोनस को मंज़ूरी दी थी। इससे 11,72,240 कर्मचारियों को लाभ हुआ था।उन्‍होंने कहा कि रेलवे के समग्र प्रदर्शन में सुधार के लिए रेल कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में पीएलबी भुगतान किया जाता है। प्रत्येक पात्र रेल कर्मचारी के लिए 78 दिनों के वेतन के बराबर अधिकतम देय पीएलबी की राशि 17 हजार 951 रुपये है। यह राशि विभिन्न श्रेणियों के रेल कर्मचारियों जैसे ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), स्टेशन मास्टर, सुपरवाइजर, तकनीशियन, तकनीशियन हेल्पर, पॉइंट्समैन, मंत्रालयिक कर्मचारी और अन्य ग्रुप-सी कर्मचारियों को दी जाएगी। रेल मंत्रालय ने जारी एक बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। रेलवे ने रिकॉर्ड 1614.90 मिलियन टन माल ढुलाई की और लगभग 7.3 बिलियन यात्रियों को गंतव्‍य स्‍थल तक पहुंचाया।

नवरात्रि विशेष : बंगाल में मां के 12 चमत्कारी धाम, जहां हर कण में शक्ति का वास

पश्चिम बंगाल शाक्त धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां पर आदिकाल से ही शक्ति उपासना की परंपरा विद्यमान रही है। शाक्त साधना के लिए बंगाल को विशेष महत्व प्राप्त है। प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में वर्णित 51 शक्तिपीठों में से 12 पवित्र शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल में स्थित हैं। नवरात्रि और दुर्गापूजा के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इन 12 शक्तिपीठों के बारे में…

बहुला शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले से लगभग 8 किलोमीटर दूर केतुग्राम के निकट अजय नदी के तट पर बहुला शक्तिपीठ स्थित है। मान्यता है कि यहां माता सती का बायां हाथ या भुजा गिरी थी। इस स्थान पर देवी बहुला के रूप में पूजी जाती हैं और भैरव को भीरुक कहते हैं।
मंगल चंद्रिका शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के उजानी गांव में यह शक्तिपीठ स्थित है। यहां माता की दाईं कलाई गिरी थी। इस स्थान पर माता को मंगल चंद्रिका रूप में पूजा जाता है। साधक और भक्त यहां विशेषकर मंगलवार और नवरात्रि पर दर्शन करने आते हैं।
त्रिस्रोता-भ्रामरी शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी जिले के सालबाड़ी ग्राम स्थित त्रिस्रोत स्थान पर माता का बायां पैर गिरा था। यहां देवी भ्रामरी के रूप में पूजी जाती हैं और शिव को अंबर या भैरवेश्वर कहा जाता है। भ्रामरी को मधुमक्खियों की देवी माना जाता है। देवी महात्म्य और देवी भागवत पुराण में उनकी महिमा का वर्णन मिलता है।
युगाद्या शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के खीरग्राम (क्षीरग्राम) में युगाद्या शक्तिपीठ स्थित है। यहां माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। यहां की शक्ति युगाद्या या भूतधात्री कहलाती हैं और शिव को क्षीरखंडक कहते हैं। यहां देवी युगाद्या की भद्रकाली मूर्ति विशेष आकर्षण है।
कालीपीठ (कालीघाट): पश्चिम बंगाल के कोलकाता का कालीघाट शक्तिपीठ सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। यहां माता के बाएं पैर का अंगूठा गिरा था। देवी यहां कालिका रूप में विराजमान हैं और भैरव को नकुशील कहा जाता है। कालीघाट मंदिर विश्वविख्यात है और लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष यहां दर्शन के लिए आते हैं।
वक्रेश्वर शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में दुबराजपुर स्टेशन से लगभग 7 किलोमीटर दूर वक्रेश्वर में यह पीठ स्थित है। पापहर नदी के तट पर यहां माता का भ्रूमध्य (मन:) गिरा था। यहां देवी महिषमर्दिनी के रूप में पूजी जाती हैं और भैरव वक्रनाथ कहलाते हैं।
देवगर्भा शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोलारपुर स्टेशन के निकट कोपई नदी के तट पर देवगर्भा शक्तिपीठ है। यहां माता की अस्थि गिरी थी। देवी यहां देवगर्भा के रूप में पूजी जाती हैं और भैरव रुरु नाम से विख्यात हैं।
विभाष शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तामलुक गांव (ताम्रलुक) में विभाष शक्तिपीठ स्थित है। यहां रूपनारायण नदी के तट पर माता का बायां टखना गिरा था। देवी कपालिनी (भीमरूप) कहलाती हैं और शिव शर्वानंद नाम से पूजित होते हैं। यहां वर्गभीमा का विशाल मंदिर आकर्षण का केंद्र है।
अट्टहास शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के लाभपुर स्टेशन से लगभग दो किलोमीटर दूर अट्टहास स्थान पर माता का अधरोष्ठ (नीचे का होंठ) गिरा था। यहां देवी फुल्लरा के रूप में पूजी जाती हैं और शिव विश्वेश कहलाते हैं। यह स्थान शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
नंदीपुर शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सैंथिया स्टेशन के समीप नंदीपुर गांव में यह शक्तिपीठ स्थित है। यहां माता का गले का हार गिरा था। यहां की शक्ति नंदिनी और भैरव नंदिकेश्वर कहे जाते हैं।
रत्नावली शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में रत्नाकर नदी के तट पर यह शक्तिपीठ स्थित है। यहां माता का दाहिना कंधा गिरा था। देवी कुमारी रूप में पूजी जाती हैं और शिव भैरव कहलाते हैं। इस शक्तिपीठ को रत्नावली या देवी कुमारी पीठ भी कहा जाता है।
नलहाटी शक्तिपीठ: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के नलहाटी स्टेशन के पास यह पीठ स्थित है। यहां माता के पैर की हड्डी गिरी थी। यहां देवी कालिका रूप में पूजी जाती हैं और भैरव योगेश कहलाते हैं।

नवरात्रि विशेष : भारत की 5 दिव्य गुफाएं जहां होते हैं माता के अद्भुत दर्शन

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस नौ दिवसीय उत्सव के दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। नवरात्रि में हर मंदिर और गली-मोहल्लों में माता रानी के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भारत में कुछ पवित्र गुफाएं ऐसी हैं, जहां नवरात्रि के समय मां दुर्गा प्रकट होती हैं या अपनी दिव्य ऊर्जा से भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। ये गुफाएं शक्ति पीठों से जुड़ी हैं और लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। आइए जानते हैं भारत की ऐसी 5 प्रमुख गुफाओं के बारे में, जहां नवरात्रि में मां दुर्गा के दर्शन होते हैं।

1. वैष्णो देवी गुफा – जम्मू और कश्मीर

त्रिकुटा पर्वत की ऊँचाइयों में स्थित यह गुफा माता वैष्णो देवी का अत्यंत पवित्र धाम है। यहां मां की तीन पिंडियां – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती – विराजमान हैं। मान्यता है कि नवरात्रि और अन्य शुभ अवसरों पर माता भक्तों को दर्शन देकर आशीर्वाद प्रदान करती हैं। गर्भगृह (मुख्य गुफा) तक पहुँचने के लिए श्रद्धालु लगभग 12 किलोमीटर की तीर्थयात्रा करते हैं, जो पैदल यात्रा के लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन आध्यात्मिक अनुभव से भरपूर होती है। यात्रा के दौरान भक्तों को रास्ते में अनेक मंदिर, धाम और प्राकृतिक झरने देखने को मिलते हैं। माता के दर्शन के पश्चात भक्तों का अनुभव इतना दिव्य होता है कि लोग इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव मानते हैं। वैष्णो देवी गुफा सिर्फ नवरात्रि में ही नहीं, बल्कि पूरे साल श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।

2. कामाख्या गुफा मंदिर – असम, गुवाहाटी

नीलाचल पर्वत पर स्थित यह गुप्त गुफा शक्ति और तांत्रिक रूपों का अद्भुत केंद्र है। यहां मां कामाख्या की पूजा उनके योनि रूप में की जाती है, मूर्ति के रूप में नहीं। अम्बुबाची मेला (जून) के अलावा नवरात्रि के दौरान भी भक्त यहां आते हैं। मान्यता है कि गुफा में देवी कामाख्या की दिव्य ऊर्जा न केवल महिलाओं के जीवन में बल देती है बल्कि पुरुषों और बच्चों को भी सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करती है। गुफा के भीतर की गहराई और रहस्यमय वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है। यहां आने वाले भक्तों का अनुभव अक्सर इतना दिव्य होता है कि लोग इसे जीवन की उच्चतम आध्यात्मिक यात्रा मानते हैं।

3. हरसिद्धि माता गुफा मंदिर – गुजरात, पोरबंदर के पास

द्वारका से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गुफा मां हरसिद्धि को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने यहीं मां की पूजा की थी। नवरात्रि में श्रद्धालु यहां माता के अद्भुत रूपों के दर्शन के लिए आते हैं। गुफा में मौजूद ऊर्जा इतनी प्रबल मानी जाती है कि भक्तों का मन और आत्मा दोनों ही शुद्ध हो जाते हैं। यहां का वातावरण शांत और आध्यात्मिक है, और नवरात्रि के समय विशेष पूजन, भजन और आरती के आयोजन होते हैं। यात्रा के दौरान आसपास की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और समुद्र के नज़ारे भी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

4. अंबाजी गुफा – गुजरात-राजस्थान सीमा

51 शक्ति पीठों में शामिल अंबाजी मंदिर की यह गुफा अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यहां माता की पूजा यंत्र रूप में की जाती है और कोई मूर्ति नहीं रखी गई है। नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया की रंगीन रौनक के बीच लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता है कि इस गुफा में माता की उपस्थिति महसूस होती है और यहां होने वाले भक्ति कार्य जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाते हैं। गुफा के भीतर का वातावरण इतना दिव्य और शांत है कि भक्त यहां घंटों बैठकर ध्यान, भजन और आरती करते हैं। इसके अतिरिक्त, आसपास की पहाड़ियाँ और प्राकृतिक झरने यात्रियों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ते हैं।

5. ज्वाला देवी गुफा – हिमाचल प्रदेश, कांगड़ा

हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में स्थित यह गुफा अपनी प्राकृतिक अग्नि ज्वालाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां मूर्ति के बजाय पृथ्वी की गहराइयों से निकलती ज्वालाओं की पूजा होती है। 51 शक्तिपीठों में से एक के रूप में यह गुफा श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। नवरात्रि में यहां आने वाले भक्त देवी की ऊर्जा का अनुभव करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। गुफा के चारों ओर हरियाली, पहाड़ों की छाँव और ठंडी हवा यात्रियों के अनुभव को और अधिक आध्यात्मिक बनाती है। मान्यता है कि ज्वाला देवी की कृपा से जीवन में संकट दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।

(स्रोत – लाइफ बेरी डॉट कॉम)

सक्रिय हुआ चुनाव आयोग , बंगाल में मतदान केंद्रों का डाटाबेस तैयार

कोलकाता । चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को 30 सितंबर तक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया है। यह प्रक्रिया अक्तूबर-नवंबर से शुरू हो सकती है। आयोग का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से विदेशी घुसपैठियों को हटाना और पारदर्शिता बढ़ाना है। सूत्रों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में हुई मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक में आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने 10 से 15 दिन में एसआईआर लागू करने के लिए तैयार रहने को कहा था। हालांकि अब स्पष्ट डेडलाइन तय करते हुए 30 सितंबर को अंतिम तारीख घोषित किया गया है। सभी राज्यों को पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूचियां तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य के सभी मतदान केंद्रों का विस्तृत डाटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका मकसद मतदाताओं को उनके निर्धारित मतदान केंद्र की पूरी जानकारी पहले से उपलब्ध कराना है। सीईओ कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, कई पुराने मतदाताओं के बूथ इस बार बदले जा सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आगामी चुनावों में मतदान केंद्रों की संख्या में करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों की तुलना में 2026 में कुल बूथों की संख्या बढ़कर 94 हजार से अधिक हो जाएगी। निर्वाचन आयोग के निर्देश के तहत अब किसी भी बूथ पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे। इसी कारण अतिरिक्त मतदान केंद्र बनाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, तैयार किए जा रहे डाटाबेस में प्रत्येक बूथ की लोकेशन, ढांचा और उपलब्ध सुविधाओं का ब्यौरा दर्ज किया जाएगा। इसमें रैंप, शौचालय, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ प्रवेश और निकास द्वारों की जानकारी भी होगी। इसके अलावा, मतदाता के घर से मतदान केंद्र की दूरी का विवरण भी उपलब्ध कराया जाएगा। सीईओ कार्यालय का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य मतदाताओं को पहले से स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि मतदान के दिन किसी प्रकार की परेशानी न हो। जिला और प्रखंड स्तर के चुनावी प्रशासन को इस डाटाबेस तक सीधा पहुंच दी जाएगी।

नयी जीएसटी दरें लागू, 375 चीजें होंगी सस्ती

नयी दिल्‍ली । देश में वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नई दरें नवरात्रि के पहले दिन सोमवार को यानी 22 सितंबर से लागू हो गयी। ग्राहकों को जीएसटी सुधारों का फायदा देने के लिए कंपनियां लगातार अपने-अपने उत्पादों की कीमतें घटा रही हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि अब तक किन-किन कंपनियों ने जीएसटी सुधारों का लाभ ग्राहकों को देने का ऐलान किया है। जीएसटी की नई दरें लागू होने के बाद रसोई में इस्तेमाल होने वाले सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और उपकरणों और वाहन तक लगभग 375 वस्तुएं 22 सितंबर से सस्ती हो जाएंगी। नवरात्रि के पहले दिन से लागू होने वाली जीएसटी दरों में मुख्य रूप से अब पांच और 18 फीसदी की दो कैटेगरी होंगी। हालांकि, लग्जरी और विलासितापूर्ण वाली वस्तुओं पर अलग से 40 फीसदी कर लगाया जाएगा। तंबाकू और संबंधित उत्पाद 28 फीसदी से अधिक उपकर की श्रेणी में बने रहेंगे। सरकार का निर्देश है कि नई दरें लागू होने के बाद व्यापार और उद्योग जगत इसका पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचाएं। जीएसटी दरों में कटौती के बाद टेलीविजन (टीवी) निर्माता कीमतों में 2,500 रुपये से 85 हजार रुपये तक की कमी करने जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को जीएसटी में कटौती का पूरा लाभ मिल सकेगा। साथ ही टीवी विनिर्माताओं को सोमवार से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन में अच्छी बिक्री की उम्मीद है। टेलीविजन और एसी, वॉशिंग मशीन जैसे कई उत्पादों की कीमतें कम हो गई हैं। 32 इंच से अधिक स्क्रीन साइज वाले टीवी सेट पर जीएसटी शुल्क मौजूदा 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी हो जाएगा। अमूल कंपनी ने 700 से ज्यादा उत्पादों की कीमतों में कटौती की है।  इनमें घी, मक्खन, बेकरी एवं अन्य उत्पाद शामिल हैं। 610 रुपये किलो वाला घी अब 40 रुपये सस्ता होगा। 100 ग्राम मक्खन 62 रुपये के बजाय 58 रुपये व 200 ग्राम पनीर 99 रुपये के बजाय 95 रुपये में मिलेगा। टेट्रा पैकेज्ड दूध दो से तीन रुपये सस्ता होगा। इससे पूर्व मदर डेयरी भी दाम में जीएसटी कटौती की घोषणा कर चुकी है। देश की प्रमुख वाहन कंपनियों मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंडई मोटर इंडिया सोमवार से अपनी कारों की कीमतें कम करने जा रही हैं। लक्जरी कार विनिर्माता मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू के साथ-साथ दोपहिया वाहन कंपनियां 22 सितंबर से लागू नए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ कीमतें कम करने जा रही हैं। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी कारों की कीमतों में 1.29 लाख रुपये तक की कटौती की है। कंपनी ने अपनी छोटी कारों की कीमतों में 8.5 फीसदी से अधिक की कटौती करने का भी फैसला किया है।

पीएम ने दिया स्वदेशी अपनाने का मंत्र

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। उन्होंने देशवासियों को नवरात्र और जीएसटी सुधारों को लेकर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जीएसटी बचत उत्सव में आपकी बचत बढ़ेगी और आप अपनी पसंद की चीजों को और ज्यादा आसानी से खरीद पाएंगे।राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जाने-अनजाने में हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत सी विदेशी चीजें जुड़ गई हैं। हमारी जेब में कंघी देशी है कि विदेशी है, हमें पता ही नहीं। अब हमें इससे मुक्ति पानी होगी। हमें वो चीजें खरीदनी होंगी जो भारत में बनी हो, जिसमें हमारे देश के बेटे-बेटियों का पसीना हो, हमें देश के घरों को स्वदेशी का प्रतीक बनाना है। गर्व से कहो कि मैं स्वदेशी खरीदता हूं, मैं स्वदेशी सामान की बिक्री भी करता हूं। ये हर भारतीय का मिजाज बनना चाहिए। जब ये होगा तो भारत तेजी से विकसित होगा। मेरा आज सभी राज्य सरकारों से भी आग्रह है कि आत्मनिर्भर भारत के इस अभियान के साथ, स्वदेशी के इस अभियान के साथ अपने राज्यों में उत्पादन को गति दें। पूरी ऊर्जा और उत्साह से। निवेश के लिए माहौल बनाएं, जब केंद्र और राज्य मिलकर आगे बढेंगे तो विकसित भारत का सपना पूरा होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब हमें आत्मनिर्भरता के मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा। जो देश के लोगों की जरूरत है, जो हम देश में बना सकते हैं, वो हमे देश में ही बनाना चाहिए। जीएसटी की दरें कम होने से नियम और प्रक्रियाएं और आसान बनने से हमारे एमएसएमई, हमारे लघु, कुटीर उद्योगों को बहुत फायदा होगा। उनकी बिक्री बढ़ेगी और टैक्स भी कम देना पड़ेगा। यानी उनको भी डबल फायदा होगा। इसलिए आज मेरी एमएसएमई से, चाहे लघु हों या सूक्ष्म या कुटीर, आप सबसे बहुत अपेक्षाएं हैं। आपको भी पता है कि जब भारत समृद्धि के शिखर पर था, तब अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हमारे लघु-कुटीर उद्योग थे। भारत की मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी बेहतर होती थी। हमें उस गौरव को वापस पाना है। हम नागरिक देवो भवः के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहे हैं। अगर हम इनकम टैक्स में छूट और जीएसटी में छूट को जोड़ दें तो एक साल में जो निर्णय हुए हैं, उससे देश के लोगों को 2.5 लाख करोड़ से ज्यादा की बचत होगी। इसलिए यह बचत उत्सव बन रहा है।पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 11 साल में देश में 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को हराया है। गरीबी को परास्त किया है और गरीबी से बाहर निकलकर एक बहुत बड़ा समूह नियो मिडिल क्लास के तौर पर बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। इस क्लास की अपनी महत्वाकांक्षाएं और सपने हैं। इस साल सरकार ने 12 लाख तक की इनकम को टैक्स मुक्त कर उपहार दिया और जब 12 लाख तक वेतन पर टैक्स शून्य हो जाए तो मध्यमवर्ग को तो काफी सुविधा हो जाती है। अब गरीब की बारी है. नियो मिडिल क्लास की बारी है। अब इन्हें डबल बोनांजा मिल रहा है। जीएसटी कम होने से देश के नागरिकों के लिए अपने सपने पूरे करना और आसान होगा।

भारत में तेजी से बढ़ रहे अमीर परिवार, हर 30 मिनट में एक नया मिलेनियर्स

नयी दिल्ली । भारत में अमीरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होने का दावा मर्सिडीज बेंज हुरून इंडिया वेल्थ रिपोर्ट 2025 में किया गया है, जिससे भारत ग्लोबल वेल्थ सेंटर के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से बनी चुनौतियों के बावजूद भारत में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एनएचआई) और मिलेनियर्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में अभी करीब 8.71 लाख ऐसे करोड़पति परिवार हैं, जिनकी नेटवर्थ एक मिलियन डॉलर या उससे अधिक है। मर्सिडीज बेंज हुरून इंडिया वेल्थ रिपोर्ट 2025 के अनुसार मिलेनियर्स की संख्या के मामले में देश में मुंबई और दिल्ली सबसे आगे हैं। इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि हर 30 मिनट में देश में एक नया परिवार मिलेनियर का दर्जा हासिल कर रहा है। पिछले 4 साल की अवधि में देश में ऐसे अमीरों की संख्या में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार 2025 में देश में मिलिनेयर्स की संख्या बढ़ कर 8,71,700 हो गई है। इसके पहले 2024 में देश में मिलिनेयर परिवारों की कुल संख्या 7.41 लाख थी। इसी तरह 2023 में देश में ऐसे धनी परिवारों की संख्या 6.31 लाख, 2022 में 5.38 लाख और 2021 में मिलिनेयर परिवारों की कुल संख्या 4.58 लाख थी। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में मुंबई में सबसे अधिक मिलेनियर परिवार रहते हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 1.42 लाख मिलेनियर परिवार रहते हैं, जबकि पूरे महाराष्ट्र में ऐसे अमीर परिवारों की संख्या 1,78,600 है। मिलेनियर परिवारों की संख्या के मामले में देश में दिल्ली दूसरे स्थान पर है। दिल्ली में ऐसे अमीर परिवारों की संख्या 68,200 है, जबकि बेंगलुरु में 31,600 मिलेनियर्स रहते हैं। कोलकाता में ऐसे अमीर परिवारों की संख्या 26,600 है। चेन्नई में एक मिलियन डॉलर या उससे अधिक नेटवर्थ वाले करोड़पति परिवारों की संख्या 22,800 है। पुणे में ऐसे परिवारों की संख्या 22,500 और हैदराबाद में ऐसे 19,800 परिवार हैं। चेन्नई में ऐसे अमीर परिवारों की संख्या 10,800 है, जबकि सूरत में ऐसे परिवारों के संख्या 5,700 है।