Saturday, April 4, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 384

रिपोर्टर दीदी की क्लास- पत्रकारिता की परिभाषा

पत्रकारिता की अलग परिभाषा देखें और आपकी नजर में परिभाषा क्या होगी. कमेंट्स बॉक्स में लिखकर बताएं. जो परिभाषा सबसे सटीक होगी. उसे अगली कक्षा में पढ़ा जाएगा –

 

शुभजिता पंचम वर्षपूर्ति उत्सव

शुभजिता ने 5 वर्ष पूरे किए। टीम शुभजिता की प्रस्तुति और वीडियो निर्माण निखिता पांडेय द्वारा। आपको धन्यवाद के साथ सादर समर्पित

मिला अंतिम रूप, शीघ्र ही लागू हो सकते हैं नये श्रम कानून

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने चार लेबर कोड के तहत नियमों को अंतिम रूप दे दिया है। इससे इन सुधारों का वास्तविकता में उतरने का रास्ता खुला है। इन्हें जल्द ही लागू करने के लिए नोटिफाई किया जाएगा। चार कोड वेतन, औद्योगिक सम्बन्धों, सामाजिक सुरक्षा और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन (OSH) को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचित किया जा चुका है लेकिन इन चार कोड को लागू करने के लिए नियमों को अधिसूचित किए जाने की जरूरत है।

परामर्श की प्रक्रिया पूरी

अब मंत्रालय ने चार कोड के ड्राफ्ट नियमों पर परामर्श की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है और उन्हें नोटिफिकेशन के लिए बना लिया है। श्रम सचिव अपूर्वा चंद्र ने कहा कि हमने चार कोड के तहत नियमों को अंतिम रूप दे दिया है, जो चार लेबर कोड को लागू करने के लिए जरूरी हैं। वे इन नियमों को अधिसूचित करने के लिए तैयार हैं। राज्य चार कोड को तहत नियमों को बनाने के लिए अपना काम कर रहे हैं।

संसद ने चार मुख्य कोड वेतन, इंडस्ट्रीयल रिलेशंस, सामाजिक सुरक्षा और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन (OSH) को पारित किया था, जिससे 44 केंद्रीय श्रम कानून पुर्नगठित होते हैं। वेतन पर कोड को संसद ने 2019 में पास किया था, जबकि दूसरे तीन कोड को दोनों सदनों से 2020 में पारित किया गया था। मंत्रालय एक बार में ही सभी चार कोड को लागू करना चाहता है। इन नियमों को बनाने के बाद, अब चारों को कोड को एक साथ अधिसूचित किया जा सकता है।

कुछ नियम राज्य भी बनाएंगे

इससे पहले 8 फरवरी को चंद्र ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि नियमों को बनाने की प्रक्रिया पहले से जारी है और इसके आने वाले हफ्ते में पूरे होने की उम्मीद है। सभी हितधारकों को नियमों को बनाने में परामर्श किया गया है। मंत्रालय जल्द ही चार कोड को लागू करने की स्थिति में होगा जिनमें वेतन, इंडस्ट्रीयल रिलेशंस, सामाजिक सुरक्षा और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन (OSH) पर कोड शामिल हैं।

क्योंकि श्रम समवर्ती सूची का विषय है, क्योंकि कुछ नियमों को राज्यों द्वारा भी चार कोड के तहत बनाया जाएगा। राज्य भी ड्राफ्ट नियमों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया में हैं और उन्हें लागू करने के लिए परामर्श जारी है।

मिस इंडिया नहीं बनी लेकिन सबके दिल तक जरूर पहुंची मान्या सिंह

पापा के ऑटोरिक्शा पर की सवारी

मुम्बई : मिस इंडिया 2020 रनरअप चुनी गई मान्या सिंह ने ऑटोरिक्शा की सवारी की। उनके पिता चालक की सीट पर बैठे जबकि उनकी मां ने पीछे की सीट पर बैठकर ‘ब्यूटी क्वीन’ का हाथ पकड़ रखा था। मान्या के पिता ओम प्रकाश सिंह ऑटोरिक्शा चालक हैं। उनके माता-पिता ने कहा कि यह एक असंभव सपने को संभव बनाने की कहानी है। इस दौरान 18 ऑटोरिक्शा की एक किलोमीटर तक ठाकुर गांव क्षेत्र से ठाकुर विज्ञान और वाणिज्य कॉलेज तक रैली निकाली गयी और ओमप्रकाश ने इस रैली का नेतृत्व किया। मान्या के पिता ओमप्रकाश ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”आज जब मैं ऑटो चला रहा था, तब यह अनियंत्रित खुशी थी। मैं कोशिश कर रहा था कि मैं रोऊं नहीं। मुझे याद आया कि कैसे मैं उसे कभी-कभी उसके कॉलेज तक छोड़ता था। आज, मैं उसे उसके सिर पर क्राउन के साथ ले जा रहा था। मुझे लगता है कि मुझे मेरे जीवन की खुशी मिल गई है।”

पिता के साथ मान्या

19 वर्षीय मान्या की मां मनोरमा ने रैली के बाद कहा, ”मैं मान्या के जैसी बेटी पाकर भाग्यशाली हूं। उसने अपने सपने को हासिल करने के लिए दिन-रात एक कर दिया। हम उसके साथ खड़े रहे और उसने यह सब कर दिखाया। अब, मुझे आशा है कि सभी माता-पिता अपनी बेटियों को आसमान छूने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। कृपया अपनी बेटियों का समर्थन करें, ताकि वे सपने देखती रहें।” मुम्बई में जन्मीं मान्या का पालन पोषण उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर हाटा में हुआ था। मान्या को पिछले सप्ताह एक समारोह में वीएलसीसी फेमिना मिस इंडिया 2020 रनर-अप का ताज पहनाया गया। ओमप्रकाश (45) अपने परिवार के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो वह अपने आंसूओं को रोक नहीं पा रहे थे जबकि 38 वर्षीय मनोरमा ने अपनी बेटी और छोटे बेटे को शिक्षित करने के अपने संघर्ष को याद किया।

इसरो की नैनो सैटेलाइट से अंतरिक्ष में जाएगी भगवद् गीता, 25 हजार लोगों के नाम भी

पीएम की तस्वीर भी होगी

नयी दिल्ली : 28 फरवरी को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक ऐसे सैटेलाइट लॉन्च करने वाला है, जो अपने साथ भगवद् गीता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और 25 हजार लोगों के नाम लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। देश के स्पेस मिशन के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा। इस मिशन की खास बात ये है कि इसे भारतीय स्टार्टअप स्पेसकिड्स इंडिया ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत तैयार किया है। इस नैनो सैटेलाइट को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) द्वारा छोड़ा जाएगा।
चार सैटेलाइट में से तीन भारत में निर्मित
महीने के आखिर में इसरो के इस नैनो सैटेलाइट के साथ दो अन्य भारतीय सैटेलाइट और ब्राजील के भी एक सैटेलाइट Amazonia-1 को लॉन्च करेगा। इन तीन भारतीय सैटेलाइट के नाम सतीश धवन, आनंद और यूनिटीसैट हैं। इनमें सतीश धवन सैटेलाइट भगवद् गीता, PM नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ 25 हजार स्टूडेंट्स के नाम लेकर जाएगा। इसे स्पेसकिड्स इंडिया की ओर से विकसित किया गया है। चारों सैटेलाइट को चेन्नई से 100 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा से PSLV C-51 के जरिये सुबह 10:24 बजे लॉन्च किया जाएगा।
सैटैलाइट में इसरो प्रमुख का भी नाम शामिल
स्पेसकिड्स इंडिया की संस्थापक और सीईओ डॉ. श्रीमथी केसन ने बताया कि हमने सैटेलाइट के टॉप पैनल में पीएम मोदी के नाम और उनकी फोटो को जोड़ दिया है। इसके अलावा इसरो प्रमुख डॉक्टर के. सिवन और वैज्ञानिक सचिव डॉक्टर आर उमा महेश्वरन का नाम नीचे के पैनल पर लिखा गया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी लोग बाइबल जैसी पवित्र पुस्तक अंतरिक्ष में ले जा चुके हैं। इसलिए हमने भी भगवद् गीता का नाम भेजने का फैसला किया है। डॉ. केसन के मुताबिक, स्पेसकिड्स इंडिया महान वैज्ञानिक सतीश धवन द्वारा बनाया गया था। यह एक ऐसी संस्था है जो छात्रों के बीच स्पेस साइंस को बढ़ावा देती है। इसलिए हमने इसमें 25 हजार स्टूडेंट्स के नाम शामिल किए हैं। वहीं, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश के स्टार्टअप इसे तैयार कर रहे हैं, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और नाम शामिल किया गया। इनके अलावा स्पेस साइंस के क्षेत्र में किए गए योगदान के लिए ISRO प्रमुख डॉक्टर के सिवन और वैज्ञानिक सचिव डॉक्टर आर उमा महेश्वरन का नाम शामिल करने का फैसला किया गया है।
चारों सैटेलाइट की पूरी जानकारी
Amazonia-1 पहला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जो पूरी तरह से ब्राजील द्वारा विकसित किया गया है। इसको इस मिशन का प्राथमिक पेलोड भी कहा जा रहा है।
आनंद को भारतीय स्टार्टअप Pixxel ने तैयार किया है। यह देश का पहला कॉमर्शियल निजी रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट है। बेंगलुरु की यह कंपनी 2023 तक 30 उपग्रहों को अंतरिक्ष में तैनात करने की योजना बना रही है।
सतीश धवन सैटेलाइट को चेन्नई बेस्ड स्पेसकिड्स इंडिया द्वारा बनाया गया है। यह अंतरिक्ष में मौजूद रेडिएशन और मैग्नेटोस्फीयर का अध्ययन करेगा।
यूनिटीसैट असल में तीन सैटेलाइटों से मिलकर बना है। इसे तमिलनाडु की जेप्पीआर इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी (JITsat), जीएच रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (GHRCEsat), नागपुर और काेयम्बटूर के श्री शक्ति इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी (Sri Shakthi Sat) ने मिलकर डिजाइन किया और बनाया है।

 

खरबों के व्हाट्सऐप की नीतियों से अधिक कीमती है जनता की निजता : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप से कहा कि ऐप की नयी प्राइवेसी नीति के बाद भारतीय लोगों में निजता को लेकर काफी आशंकाए हैं। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि आप भले ही खरबों डॉलर की कंपनी होंगे, लेकिन लोगों के लिए निजता का मूल्य पैसों से ज्यादा है। चीफ जस्टिस ने इस प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर वॉट्सऐप, फेसबुक और केंद्र से जवाब मांगा है।
अदालत ने वरिष्ठ वकील श्याम दीवान की उस दलील का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में डेटा प्रोटेक्शन को लेकर कोई कानून नहीं है। चीफ जस्टिस बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की बेंच ने एक सुर में कहा कि मिस्टर दीवान की दलील से हम प्रभावित हैं। ऐसा कानून प्रभाव में लाना चाहिए। वॉट्सऐप अपनी नई प्राइवेसी के तहत भारतीयों का डेटा शेयर करेगा। इस डेटा शेयरिंग को लेकर भारतीयों में आशंकाएं हैं।
यूरोपीय नियमों पर कोर्ट का सवाल और वॉट्सऐप का जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने यूरोप की तुलना में भारत में प्राइवेसी स्टैंडर्ड गिराए जाने के आरोपों पर वॉट्सऐप से जवाब मांगा है। वॉट्सऐप ने इस पर कहा कि यूरोप में प्राइवेसी को लेकर खास कानून हैं। अगर भारत में भी वैसे ही कानून हों तो हम उनका भी पालन करेंगे।
क्या है वॉट्सऐप की नयी नीति ?
वॉट्सऐप यूजर जो कंटेंट अपलोड, सबमिट, स्टोर, सेंड या रिसीव करते हैं, कंपनी उसका इस्तेमाल कहीं भी कर सकती है। कंपनी उस डेटा को शेयर भी कर सकती है। यह पॉलिसी 8 फरवरी 2021 से लागू होनी थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद समय सीमा को बढ़ाकर 15 मई कर दिया गया है। पहले दावा किया गया था कि अगर यूजर इस नीति को सहमति नहीं देता है तो वह अपने अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। हालांकि, बाद में कंपनी ने इसे ऑप्शनल बताया था।
सरकार सोशल मीडिया पर सख्त
हाल ही में सरकार ने सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन के बारे में फेक न्यूज, आपत्तिजनक और हिंसा भड़काने वाले कंटेंट को लेकर नाराजगी जताई थी। राज्यसभा में IT मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा था, ‘हम सोशल मीडिया का सम्मान करते हैं। इसने आम लोगों को ताकत दी है। डिजिटल इंडिया प्रोग्राम में भी सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम है, लेकिन अगर इससे फेक न्यूज और हिंसा को बढ़ावा मिलता है तो हम कार्रवाई करेंगे। फिर वो ट्विटर हो या कोई प्लेटफार्म।’

 

यरवदा का मानसिक अस्पताल में स्वस्थ हो चुकी मरीजों को बना रहा है आत्मनिर्भर

यरवदा :  यरवदा के के क्षेत्रीय मानसिक अस्पताल में मानसिक बीमारी से स्वस्थ हुई महिलाओं को आईब्रो थ्रेडिंग से लेकर बालों को ट्रिमिंग करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हॉस्पिटल के वीमेंस विंग में एक ब्यूटी पार्लर भी बनाया गया है। यहां स्वस्थ हो चुकी तीन महिलाओं को ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह कार्य यशस्वी सामाजिक संस्था और एनजीओ की मुख्य सारिका मोरे के सहयोग से किया जा रहा है। इस अस्पताल की उप अधीक्षक डॉ. गीता कुलकर्णी ने बताया कि जो महिलाएं ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग ले रही हैं, वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और इस कोर्स को पसन्द कर रही हैं। कोरोना की वजह से मानसिक अस्पताल में होने वाली गतिविधियों को बंद कर दिया गया है। फिलहाल इन मरीजों को दी जाने वाली सिलाई, पेपर बैग और स्टेशनरी आइटम्स का प्रशिक्षण भी बंद है। इस हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. अभिजीत फडणवीस से बताया कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत महिलाओं को ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिन तीन महिलाओं को ये प्रशिक्षण मिला है, वे फिलहाल दो साल से यहां रह रही हैं। यहां के एक अन्य एनजीओ बापू ट्रस्ट की मदद से अस्पताल ने हाल ही में सात महिलाओं का पुनर्वास भी किया है।

सूरत की बेकरी में बना 48 फीट लंबा रामसेतु केक

सूरत : गुजरात के सूरत में ब्रेडलिनर बेकरी चेन ने 48 फीट लंबा रामसेतु केक तैयार किया है। केक पर भगवान श्रीराम के 16 गुणों को लिखा गया है। यहां के लोगों से यह भी अपील की गई है कि वे अपनी जीवन में इन 16 गुणों को अपनाएं। 16 फरवरी तक 1,084 व्यक्तियों को 400 ग्राम रामसेतु केक मुफ्त दिया गया। इसके अलावा बेकरी के हर कर्मचारी के एक दिन के वेतन से जुटाए गए 1,11,111 रुपए की राशि राममंदिर निर्माण निधि के तौर पर भी सौंपी जा रही है। इसके साथ ही 12 फरवरी से खरीदारी करने वाले ग्राहकों के बिल से 1,21,111 रुपये की धनराशि भी राम मंदिर निर्माण निधि को दान की गई है। यह पहल राम मंदिर निर्माण में सहयोग देने के लिए शुरू किए गए ‘हर कदम राम के नाम संकल्प’ अभियान के तहत की गयी है। रामसेतु 48 किलोमीटर का था इसलिए इस केक को भी 48 फीट लंबा बनाया गया है। ब्रेडलिनर के निदेशक नितिनभाई पटेल ने कहा कि राम देश की आस्था, प्रेम, वीरता, धर्म है। अब राम के जन्मस्थान पर एक भव्य राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। मंदिर निर्माण को देखते हुए ही हर कदम राम के नाम संकल्प अभियान का शुभारंभ किया गया है।

 

ढाई अक्षर प्रेम’ के….

बलवंत सिंह गौतम 
प्रेम! क्या कहूँ। कैसे कहूँ। किस रूप में कहूँ। प्रेम की कोई व्याख्या नहीं कोई परिभाषा नहीं। प्रेम एक एहसास हैं जो ह्रदय को ख़ुशियों से भर देता हैं ।प्रेम से भक्ति-भावना जाग्रत होती है और एक अलौकिक शक्ति भी मिलती हैं । प्रेम ही आत्मा हैं, और परमात्मा हैं। प्रेम शाश्वत सत्य हैं, सनातन हैं, प्रेम ही दिव्य रस हैं। प्रेम तो एक लगाव हैं, ईश्वरीय अनुभूति हैं।प्रेम एक ऐसा मंदिर हैं, जिसके अनेक पुजारी हैं।जिसके पूजने के तरीके, विधियाँ अलग अलग हैं। प्रेम ही सच्चा जीवन हैं। ‘दो ’ अक्षर की मौत और ‘तीन’ अक्षर के जीवन में हम ढाई अक्षर के ‘प्रेम’ के चारों तरफ ही तो घूम रहे हैं। प्रेम की नमी की कमी हो तो ज़िंदगी के खेत में उत्तम बीज पड़ने पर भी कुछ नहीं उगता। प्रेम ही सार तत्व है। यदि किसी ने सच्चा प्रेम पा लिया या महसूस कर लिया अथवा इसकी बारीकियों को समझ लिया तो मानो उसका जीवन धन्य हो गया। प्रेम एक हैं पर उसके स्वरूप अनेक हैं ! प्रेम केवल स्त्री-पुरुष के संबंधों तक सीमित नहीं हैं। प्रेम स्त्री-पुरुष के मध्य होने वाले स्वाभाविक आकर्षण मात्र नहीं हैं। यदि ऐसा हैं तो वो प्रेम एक आसक्ति मात्र हैं और आसक्ति केवल स्वंय के स्वार्थसिद्धि की ही पूरक होती हैं । भारत में प्रेम की परिभाषा विराट हैं, अनंत हैं। भगवान -भक्त, माता-पिता,भाई-बहन, पुत्र-पुत्री, मित्र-बन्धु, गुरु-शिष्य,पति-भार्या, प्रेमी-प्रेमिका ! पर सबसे ऊपर हैं देशप्रेम ! राष्ट्र प्रेम से बढ़कर कुछ हो ही नहीं सकता हैं। सच्चा प्रेम हमें स्वर्गीय अनुभूति प्रदान करता हैं। भारतीय संस्कृति में सच्चे प्रेम का वास्तविक अर्थ व्यापकता के साथ बताया गया हैं। कभी श्रवण कुमार के माँ-बाप की सेवा की कथाओं में, कभी महाकवि विद्यापति के मां गंगे की भक्ति में, कभी महादेवी वर्मा के पशु पक्षियों से लगाव में, कभी हरिप्रसाद की बांसुरी में, तो कभी दशरथ माँझी के संकल्प में, कभी भरत की भातृ प्रेम में, कभी राधा की चाहत में, कभी मीरा के इंतज़ार में,कभी अहिल्या के उद्धार में, कभी रुक्मिणी के समर्पण में, तो कभी शबरी के जूठे बैर अर्पण में हमें निःस्वार्थ प्रेम की झलक मिलती हैं । हम भारतीय का प्रेम अनोखा हैं, निराला हैं। हर एक मानव से प्रेम, प्रकृति से प्रेम, वन सम्पति से प्रेम, जल, थल, नभ के सभी जीवों से प्रेम जग ज़ाहिर हैं । प्रेम तो भारत के पेड़-पौधों में, पशु पक्षियों में, नदियों में, पहाड़ों में, वादियों में, हवाओं में भारत की प्रकृति के कण – कण में हैं।सिर्फ इसे महसूस करने की जरूरत हैं ।लेकिन आज मानवीय स्वार्थ के वशीभूत होकर हम प्राकृतिक संरचना के साथ छेड़छाड़ करने से भी नहीं हिचकते। प्रकृति से प्रतिस्पर्धा की बड़ी कीमत आज कोरोना वायरस, उत्तराखंड में हुई आपदा के द्वारा हमें चुकानी पड़ रही हैं। जिस भारत में भक्ति रस की गंगा बहती थी और दिलो में प्रेम धड़कता था, आज वहाँ नफरत की आग दहक रही हैं।आतंक अपना साम्राज्य विस्तार कर रहा हैं। हमारी भारतीय संस्कृति की रक्षा संतों ने ही की है और संतों ने ही समाज का निर्माण किया हैं।आइए इस बसंत हम सभी प्रण ले कि भारत में ही नहीं पूरे संसार में फैले हुए आतंक को खत्म करके रहेंगे ।आइए आज हम सब मिलकर संकल्प लेते हैं प्रकृति और ईश्वर की बनाई रचना से फिर से प्रेम करने का, उनकी रक्षा करने का।

सोयी हुई जातियाँ पहले जगेंगी

”न निवसेत् शूद्रराज्ये” मनु का यह कहना बहुत बड़ा अर्थ-गौरव रखता है। शूद्रों के राज्य में रहने से ब्राह्मण-मेधा नष्ट हो जाती है। पर यह यवन और गौरांगों के 800 वर्षों के शासन के बाद भी हिंदोस्तान में ब्राह्मण और क्षत्रिय हैं, जो लोग ऐसा कहते हैं, वे झूठ तो बोलते ही हैं, ब्राह्मण और क्षत्रिय का अर्थ भी नहीं समझते। इस समय भारत में न ब्राह्मण हैं, न क्षत्रिय, न वैश्य, न अपने ढंग की शिक्षा है, न अपने हाथ में राज्य-प्रबंध, न अपना स्वाधीन व्यवसाय। प्रोफेसर अंगरेज, मान्य शिक्षा पश्चिमी, शासन अंगरेजी, शासक अंगरेज; व्यवसायी अपर देशवाले वैश्य, व्यवसाय की बागडोर, मांग, दर का घटाव-बढ़ाव उनके हाथों। ऐसी परिस्थिति में चाहे काशी के पूर्वकाल के वैश्य ‘स’ महाशय संस्कृत पढ़ लेने के कारण ब्राह्मण की परिभाषा संस्कृतज्ञ करें, और हर भाषा के पंडित को हर जाति का ब्राह्मण मानें या कलकत्ते के करोड़पति विदेशी मालों के दल्लाल – ‘डागा’ जी वैश्य-शिरोमणि अपने को समझे लें, या सूबेदार मेजर जट्टासिंह अपने को आदर्शक्षत्रिय साबित करें, हैं सब शूद्र ही। म्लेच्छ-प्रभाव में रहकर कभी कोई पूर्वोक्त त्रिवर्ण में से किसी का अधिकार प्राप्त नहीं कर सकता। एक और बात यह भी है कि कोई राष्ट्र तब तक स्वाधीन नहीं हो सकता, जब तक उसके ये तीनों वर्ण – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य जग न गये हों- उसकी मेधा पुष्ट, शासन स्वाधीन सुदृढ़ और वाणिज्य स्वायत्त तथा प्रबल न हो। गुलाम के मानी गुलाम, बाहरी और भीतरी परिस्थितियों का दास।

गुलाम जाति का उत्थान भी गुलामी से होता है। जहां ब्राह्मण होंगे क्षत्रिय वैश्य होंगे उसके उत्थान की जरूरत क्या है? वह तो उठा हुआ है ही। उठने की जहां कहीं आवश्यकता हुई है, वहीं मोह या दास्य का अंधकार रहा है। वहीं स्वतंत्रता के आलोक की आवश्यकता हुई है – उठाने के लिए। और, उस प्रभात में उठीं भी वे ही जातियां, जो रात के पहले से सोयी हुई थीं, जिनकी नींद एक चोट खूब लग चुकी है। अतः सब जिस जागरण की आशा से पूर्वाकाश अरुण हो रहा है, उसमें सबसे पहले तो वे ही जातियां जागेंगी, जो पहले की सोयी हुई – शूद्र, अंत्यज जातियां हैं। इस समय जो उनके जागने के लक्षण हैं, वही आशाप्रद हैं, और जो ब्राह्मण-क्षत्रियों में देख पड़ते हैं, वे जगाने के लक्षण नहीं, वह पीनक है – स्वप्न के प्रलाप हैं। विरासत में पहले के गुण अब शूद्र और अंत्यज ही अपनावेंगे। यहां की सभ्यता के ग्रहण करने का क्षेत्र वहीं तैयार है। ब्राह्मण और क्षत्रियों में उस पूर्व-सभ्यता का ध्वंसावशेष ही रह गया है। उनकी आंखों का वह पूर्व-स्वप्न अब शूद्रों तथा अंत्यजों के शरीरों में भारतीयता की मूर्तियों की तरह प्रत्यक्ष होगा।

वर्तमान सामाजिक परिस्थिति पूर्ण मात्रा में उदार न होने पर भी विवाह आदि में जो उल्लंघन कहीं-कहीं देखने को मिलते हैं, वे भविष्य के ही शुभ चिह्न प्रकट कर रहे हैं। संसार की प्रगति से भारत की घनिष्ठता जितनी ही बढ़ेगी, स्वतंत्रता का ब्राह्म रूप जितना ही विकसित होगा, असवर्ण विवाह का प्रचलन भी उतना ही होता जाएगा। देश के कल्याणकामी यदि इन अनेक गौण बातों पर ध्यान दें, एक शिक्षा के विस्तार के लिए प्रबंध करें, इतर जातियों में शिखा का प्रसार हो, तो असवर्ण विवाह की प्रथा भी जारों से चल पड़े। अभी तो अशिक्षित लोग भी पूर्वकाल के ब्राह्मण-कुमारों से अपनी लड़की का विवाह नहीं कर सकते। अपने-अपने फिरके का सबको खयाल है। वर्ण-समीकरण की इस स्थिति का ज्ञान विद्या के द्वारा ही यहां के लोगों को हो सकता है। इसके साथ-ही-साथ नवीन भारत का रूप संगठित होता जाएगा, और यही समाज की सबसे मजबूत शृंखला होगी। यही साम्य पश्चात् वर्ण-वैषम्य से – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य के रूपों में पुनः संगठित होगा।

– ‘वर्तमान हिंदू-समाज’ से, मासिक ‘सुधा’, जनवरी, 1930 में पहली बार प्रकाशित

(साभार – हिन्दी समय)