Tuesday, June 30, 2026
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जानिए नवरात्रि का महत्व

हर नवरात्र के पीछे का एक वैज्ञानिक आधार है। पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियां होती हैं। जिनमें से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है।
ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं। अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुद्ध रखने के लिए, तन-मन को निर्मल रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम ‘नवरात्र’ है।
अमावस्या की रात से अष्टमी तक या पड़वा से नवमी की दोपहर तक व्रत नियम के अनुसार चलने से नौ रात यानी ‘नवरात्र’ नाम सार्थक है। चूंकि यहां रात गिनते हैं इसलिए इसे नवरात्र यानि नौ रातों का समूह कहा जाता है।
रूपक के द्वारा हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है और, इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है।
मुख्य इन्द्रियों में अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में एवं शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुद्धि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन, नौ दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं।
हालांकि शरीर को सुचारू रखने के लिए विरेचन, सफाई या शुद्धि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं किन्तु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर 6 माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है जिसमें सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि, साफ-सुथरे शरीर में शुद्ध बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुद्ध होता है, क्योंकि स्वच्छ मन मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है।चैत्र और आश्विन नवरात्रि ही मुख्य माने जाते हैं इनमें भी देवी भक्त आश्विन नवरात्रि का बहुत महत्व है। इनको यथाक्रम वासंती और शारदीय नवरात्र कहते हैं। इनका आरंभ चैत्र और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को होता है। ये प्रतिपदा ‘सम्मुखी’ शुभ होती है।

नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। जिसमे चैत्र और आश्विन की नवरात्रियों का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि से हीजाती है विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इन दिनों प्रकृति से एक विशेष तरह की शक्ति निकलती है। इस शक्ति को ग्रहण करने के लिए इन दिनों में शक्ति पूजा या नवदुर्गा की पूजा का विधान है। इसमें मां की नौ शक्तियों की पूजा अलग-अलग दिन की । पहले दिन मां के शैलपुत्री स्वरुप की उपासना की जाती है। इस दिन से कई लोग नौ दिनों या दो दिन का उपवास रखते हैं।

(साभार – वेब दुनिया)

हिन्दू नववर्ष पर ‘राष्ट्रीय कवि संगम’ पश्चिम बंगाल का कवि सम्मेलन

कोलकाता : “असली नया वर्ष अपना यही है/ पश्चिम का करना नकल क्या सही है।” राष्ट्रीय कवि संगम, पश्चिम बंगाल इकाई द्वारा हिन्दू नववर्ष के पावन अवसर पर एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया,जिसकी अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष डॉ.गिरिधर राय ने की। यह कार्यक्रम गूगल मीट डिजिटल पटल पर आयोजित हुआ। इस गोष्ठी में कोलकाता के गणमान्य डॉ. गिरिधर राय (अध्यक्ष, पश्चिम बंगाल), आर पी सिंह (महामंत्री, पश्चिम बंगाल) तथा बलवंत सिंह (मंत्री,पश्चिम बंगाल) की उपस्थिति में मीना शर्मा (अध्यक्ष, दक्षिण 24 परगना) के स्वागत भाषण से कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। रीमा पाण्डेय ने सरस्वती वंदना का गायन प्रस्तुत किया। कवि सम्मेलन में गिरिधर राय ने अपनी नयी कविता हिन्दू नववर्ष के कुछ छंद सुनाये- -‘असली नया वर्ष अपना यही है/ पश्चिम का करना नकल क्या सही है’ , रामपुकार सिंह पुकार गाजीपुरी ने कहा- ‘जिये इक दूसरे खातिर सही संस्कार आ जाये/सफल नव वर्ष हो सबका उचित व्यवहार आ जाये’। गोष्ठी में शामिल अन्य कवि थे-रीमा पाण्डेय, जय प्रकाश पाण्डेय, रमाकांत सिन्हा, सुषमा राय पटेल, सीमा सिंह, देवेश मिश्र, निखिता पाण्डेय और अभिषेक पाण्डेय ने अपनी-अपनी स्वरचित कविता से नये वर्ष को नये रंग में ऐसा रंगा कि सभी श्रोतागण काव्य रस में सराबोर होकर झूम उठे।
कार्यक्रम का संचालन युवा रचनाकार निखिता पाण्डेय और अभिषेक पाण्डेय ने किया। पश्चिम बंगाल के प्रांतीय अध्यक्ष श्री गिरिधर राय ने अपनी उपस्थिति के साथ सभी का उत्साहवर्द्धन किया और अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए नए वर्ष की शुभकामनाएं दी तथा प्रांतीय मंत्री बलवंत सिंह ने युवा रचनाकारों से जुड़ी संभावनाओं को प्रोत्साहित किया। पश्चिम बंगाल के महामंत्री राम पुकार सिंह ने अपनी आशावादी कविता के माध्यम से इस विकट परिस्थिति से स्वयं को सुरक्षित रखने की सलाह दी और नववर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रांतीय मंत्री बलवंत सिंह गौतम ने सभी कवियों, अतिथियों और श्रोताओं को अपना अमूल्य समय देकर कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु हार्दिक धन्यवाद दिया।

भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में फोटोग्राफी प्रतिस्पर्द्धा

 कोलकाता : भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में ऑनलाइन फोटोग्राफी प्रतिस्पर्द्धा में पचास विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया और अपनी फोटोग्राफी के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला। फोटोग्राफी के इस प्रतिस्पर्धा की थीम स्प्रिंग यानी वसंत पर आधारित रही।

अलका सिंह (द्वितीय)

रिथिक संथालिया प्रथम, अलका सिंह द्वितीय, आदित्य चटर्जी तृतीय स्थान और विशेष स्थान पर मयंक बिदानी रहे। फोटोग्राफी में कॅरियर बनाने के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण जरिया है।

आदित्य चटर्जी (तृतीय)

फोटो खींचने के लिए विशिष्ट दृष्टि के साथ खींचने की कला के विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान होना भी जरूरी है।इस कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में राजश्री दास रहे जो एक जाने माने फोटोग्राफर हैं।

 

कॉलेज के डीन प्रो. दिलीप शाह ने फोटोग्राफी को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों को फोटोग्राफी के लिए प्रोत्साहित किया।इस कार्यक्रम का संयोजन शोभिक दास ने किया। प्रो दिव्या ओडसी, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी और गौरव किल्ला ने कार्यक्रम को आकार दिया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी दी ।

दि इकोनॉमिक टाइम्स ने भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज को दिया अवार्ड

कोलकाता :  इकोनॉमिक टाइम्स ने भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज को तीसरी बार प्रेस्टिजियस अवार्ड प्रदान किया। यह अवार्ड संपूर्ण देश के शैक्षणिक संस्थानों और गैर शैक्षणिक संस्थानों को दिया जाता है। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, कोलकाता को यह तीसरी बार प्रेस्टिजियस अवार्ड प्रदान किया गया है जो बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रोत्साहन से पूर्ण है। इस अवसर पर डीन प्रो दिलीप शाह ने इकोनॉमिक टाइम्स को धन्यवाद देते हुए कहा कि भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की छोटे-छोटे महत्वपूर्ण कार्यों को इकोनॉमिक टाइम्स की टीम ने गौर किया है यह अवार्ड उसी का परिणाम है।कॉलेज में होने वाले अट्ठारह से अधिक कलेक्टिव और कॅरियर विषयक विभिन्न विषयों पर वेबिनार, सामाजिक कार्यों के लिए एन एस एस आदि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग, साथ ही “प्रतिध्वनि “द्वारा नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए ऑडियो  बनाये गये हैं जो समाज के लिए महत्वपूर्ण भूमिका है।
एक अन्य कार्यक्रम में प्रो. दिलीप शाह ने बताया कि प्लेसमेंट ड्राइव के अंतर्गत कॉलेज में हर वर्ष कई प्रसिद्ध कंपनियां आकर विद्यार्थियों का प्लेसमेंट करती हैं। इस वर्ष भी कोरोना के नियमों का पालन करते हुए प्लेसमेंट हुए हैं। तिरसठ विद्यार्थियों ने प्लेसमेंट के लिए पंजीकरण करवाया।  जिसमें एडोर इंडिया, रिवर्स फेक्टर, फ्रुटर्स, यूरोडाइट, सिमको कंसल्टेंसी जैसी पांच कंपनियों ने कुल मिलाकर छब्बीस विद्यार्थियों  को प्लेसमेंट दिया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उडीसी ने किया। हमारे विद्यार्थियों को इकोनॉमिक टाइम्स ने प्रेस्टिजियस अवार्ड प्रदान कर कॉलेज को प्रोत्साहित किया है।

‘बंगीय हिंदी परिषद’ में ऑनलाइन काव्य-गोष्ठी ‘कविकल्प’ का आयोजन

कोलकाता :  कलकत्ते की प्राचीन हिंदी संस्था ‘बंगीय हिंदी परिषद’ में काव्य-गोष्ठी कविकल्प का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड ने की और सभी युवा रचनाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए अपने स्वागत भाषण में परिषद के मंत्री डॉ. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने दिवंगत काली प्रसाद जायसवाल को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी लिखी कविताओं का पाठ कर उन्हें याद किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने सभी युवा कलमकारों को नवसंवत्सर की बधाई देकर सृजनशील बने रहने की सीख दी। रमाकांत सिन्हा ने सरस्वती वंदना के साथ अपना काव्य-पाठ किया। अनेक नए कवियों ने नवसंवत्सर की कविता के साथ समसामयिक मुद्दों पर भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।गोष्ठी में शामिल अन्य कवि थे – श्री गजेन्द्र नाहटा,श्री नंदलाल रौशन,श्रीमती सुदामी यादव,निखिता पाण्डेय, संघमित्रा रॉय,सूर्यदेव रॉय, रीमा पांडेय, अभिषेक पाण्डेय,पुष्पा मिश्रा,डॉ. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी, डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड तथा सुषमा राय पटेल। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड ने यह बताया कि इस मुश्किल समय में भी हम सब डिजिटल पटल से साहित्य और साहित्यकारों से परस्पर जुड़े हैं, यह अत्यंत सराहनीय है। इस कार्यक्रम का संचालन कविकल्प गोष्ठी की संयोजक पुष्पा मिश्रा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन परिषद की संयुक्त मंत्री, सुषमा राय पटेल ने किया।

मिस्र में मिला 3000 साल पुराना ‘सोने’ का अद्भुत शहर

काहिरा : मिस्र में मिले तीन हजार साल पुराने अद्भुत शहर की चर्चा पूरी दुनिया में है। इतने साल बीत जाने के बाद जाने के बाद भी मिस्र के इस ‘सबसे बड़े’ प्राचीन शहर के अवशेषों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे अभी कल ही इन्‍हें बनाया गया हो। इस शहर को ‘प्राचीन मिस्र का पोम्‍पेई’ भी कहा जा रहा है। लक्‍जर शहर की रेत के नीचे इस करीब 3400 साल पुराने शहर के मिलने की घोषणा मिस्र के चर्चित पुरातत्‍ववेत्‍ता डॉक्‍टर जही हवास ने पिछले सप्‍ताह की थी। अब इस ‘सोने के शहर’ का पहला वीडियो दुनिया के सामने आ गया है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि मिस्र का यह शहर वर्ष 1922 में तूतनखामून के मकबरे की खोज के बाद सबसे बड़ी खोज है। करीब 7 महीने की खुदाई के बाद इस शहर का पता चला है। इस शहर में अभी अगले कई साल तक आम आदमी को जाने की इजाजत नहीं होगी। इस बीच यूट्यूब चैनल एनेक्केसटी के संचालकों ने इस पूरे शहर का वीडियो जारी किया है। उन्‍होंने कहा कि ये फुटेज उनके पास एक्‍सक्‍लूसिव हैं और अब तक नहीं देखे गए हैं।

मिस्र में खोजा गया सबसे विशाल प्राचीन शहर
मशहूर मिस्र विशेषज्ञ जाही हवास ने ऐलान किया है कि ‘खोए हुए सुनहरे शहर’ की खोज लग्जर के करीब की गई है। यहां राजाओं की घाटी स्थित है। टीम ने एक बयान जारी कर बताया कि डॉ. जाही के तत्वाधान में मिस्र के मिशन में एक शहर मिला है जो रेत के नीचे खो गया था। बयान में कहा गया है, ‘शहर 3000 हजार साल पुराना है, एमेनोटेप III के शासनकाल का और तूतनखामेन के दौरान भी चलता रहा।’इस शहर को मिस्र में खोजा गया सबसे विशाल प्राचीन शहर बताया जा रहा है।

जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की मिस्र की कला और पुरातत्वविद प्रफेसर बेट्सी ब्रायन ने बताया कि तूतनखामेन के मकबरे की खोज के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी पुरातत्व खोज है। खोज में अंगूठियों जैसे जेवर, रंगीन बर्तन, ताबीज और एमेनटॉप III की मोहर लगीं मिट्टी की ईंटें मिली हैं। इससे पहले कई बार इस शहर की खोज की गई थी लेकिन इसे कोई खोज नहीं सका। उम्मीद जताई गई है कि आगे की खोज में कई खजाने मिल सकते हैं।

मिस्र के लोगों की अमीरी का गवाह
इस टीम ने पिछले साल सितंबर में खोज शुरू की थी। लग्जर के पास रामसेस III और एमेनटॉप III के मंदिरों के बीच में काहिरा से 500 किमी दूर खोज की गई। कुछ ही हफ्तों में उन्हें सभी जगहों पर मिट्टी की ईंटों से बनीं आकृतियां मिलने लगीं। खुदाई में एक विशाल शहर निकला जो काफी अच्छी हालत में संरक्षित था। करीब-करीब पूरी बनी दीवारें और रोजमर्रा के सामान से भरे कमरे तक पाए गए। टीम के बयान में कहा गया है कि ये इलाका हजारों साल बाद ऐसे मिला है जैसे कल ही का हो। सात महीने बाद कई इलाकों को खोज लिया गया था। इसमें अवन के साथ बेकरी और बर्तनों का स्टोर भी मिला। यहां तक कि प्रशासनिक और रिहायशी डिस्ट्रिक्ट भी मिलीं। एमेनटॉप III ने विरासत में ऐसा साम्राज्य पाया था जो यूफरेट्स से सूडान तक फैला था। उसकी मौत 1354 ईसा पूर्व में हुई। उसने चार दशकों तक राज किया। इस काल को समृद्धि और भव्य इमारतों के लिए जाना जाता है। इनमें लग्जर के पास लगीं उसकी और उसकी रानी की विशाल प्रतिमाएं शामिल हैं। ब्रयान ने बताया कि इस खोज से प्राचीन मिस्र के सबसे अमीर काल को जाना जा सकेगा।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

जरूरी है कि भारतीय मानक ब्यूरो हेलमेट निर्माण व बिक्री की निगरानी करे: उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के लिए यह जरूरी है कि वह हेलमेट के विनिर्माण तथा बिक्री की सख्त निगरानी करे, क्योंकि यह उपभोक्ताओं की सुरक्षा से संबंधित है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की है। याचिका में दावा किया गया है कि एनजीओ ने 2019 से आज की तारीख तक 1400 से अधिक शिकायतें की हैं जिनमें हेलमेट के विनिर्माण और बिक्री में विभिन्न कथित अवैधता और अनियमितताओं के बारे में जानकारी दी गई है।
गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘उत्प्रेरित कंज्यूमर फाउंडेशन’ ने वकील तुषार ए जॉन के जरिए दायर याचिका में दावा किया है कि बीआईएस हेलमेट के विनिर्माण और बिक्री की उचित तरीके से निगरानी नहीं कर रहा है। संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद, न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, “यह देखते हुए कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा दांव पर है, हेलमेट के विनिर्माण और बिक्री की सख्त निगरानी और पर्यवेक्षण की जरूरत है।”
अदालत ने बीआईएस को निर्देश दिया कि वह एनजीओ की शिकायतों पर गौर करे तथा एक स्थिति रिपोर्ट दायर करे। इस रिपोर्ट में शिकायतों पर की गई कार्रवाई का संकेत होना चाहिए और उन कदमों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए जो हेलमेट के विनिर्माण तथा बिक्री की निगरानी के लिए प्राधिकरण ने उठाएं हैं ताकि आईएसआई चिन्ह का दुरुपयोग न हो।
जॉन ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि कुछ कंपनियां आईएसआई चिन्ह का उपयोग कर रही हैं जबकि उनका लाइसेंस रद्द किया जा चुका है। वहीं कुछ अन्य उस क्षेत्र के हेलमेट बना रहे हैं जिसके लिए उनके पास आईएसआई चिन्ह का इस्तेमाल करने का लाइसेंस नहीं हैं।

यूएई में भारतीय लड़की ने मात्र दो घंटे में पढ़ लीं 36 किताबें

अबूधाबी : पूरी दुनिया में अभिभावक बचपन से ही अपने बच्‍चों के अंदर किताब पढ़ने की आदत डालते हैं और उन्‍हें उनका सबसे अच्‍छा दोस्‍त बताते हैं। भारतीय-अमेरिकी मूल की 5 साल की लड़की किआरा कौर की किताबों के साथ यह दोस्‍ती इतनी अच्‍छी हो गई कि उन्‍होंने रेकॉर्ड कायम कर दिया है। किआरा ने बिना रुके 105 मिनट या करीब दो घंटे में 36 किताबें पढ़कर विश्‍व रेकॉर्ड कायम किया है। किआरा अपने परिवार के साथ संयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) में रहती हैं। मात्र दो घंटे के अंदर इतनी किताबें पढ़ने के लिए किआरा का नाम लंदन वर्ल्‍ड बुक रेकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रेकॉर्ड में शामिल किया गया है। बहुत कम उम्र से ही किआरा किताब की काफी शौकिन हो गई थीं। फिर चाहे वह कार हो या आराम कर रही हों, उनके हाथों में किताबें हमेशा मौजूद रहती हैं। एक दिन एक नर्सरी टीचर ने उनकी तन्‍मयता के साथ पढ़ने की आदत को देखा और उसकी काफी प्रशंसा की।
किआरा का डॉक्‍टर बनने का सपना
किआरा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, ‘किताबों से पढ़ाई करना मेरे लिए बहुत आनंददायक रहता है। आप किताब को कहीं भी ले जा सकते हैं। फोन पर पढ़ने या वीडियो देखने में तब दिक्‍कत है जब लाइट नहीं होती है।’ किआरा ने बताया कि उन्‍हें वे किताबें पसंद हैं जिनमें रंगीन चित्र होते हैं और बड़े-बडे़ अक्षर में छपी होती हैं। उनकी पसंदीदा किताबों में सिंड्रेला, एलिस इन वंडरलैंड आदि शामिल हैं। किआरा के दादा जी ने उनके अंदर किताबों को पढ़ने का शौक पैदा किया था। उनकी मां कहती हैं, ‘किआरा अक्‍सर वाट्सऐप पर अपने दादाजी से घंटों कहानी सुनती रहती है। इसका किआरा के विकास में काफी ज्‍यादा प्रभाव पड़ा है।’ बड़ी होकर किआरा का डॉक्‍टर बनने का सपना है। वहीं पूरा परिवार किआरा की इस उपलब्धि से बेहद खुश है।

भाषा और गरीबी की सीमाओं को तोड़कर आईआईएम के प्रोफेसर बने रामचन्द्रन

कोच्चि : केरल के रहने वाले रंजीत रामचंद्रन ने फेसबुक पर अपने घर की तस्वीर पोस्ट की है और उस फोटो के नीचे लिखा है, ‘आईआईएम के एक प्रोफेसर का जन्म यहीं हुआ था।’ दरअसल, 28 साल के रामचंद्रन का पिछले दिनों आईआईएम- रांची में प्रफेसर के तौर पर चयन हुआ है। उनकी संघर्ष भरी कहानी काफी लोगों को प्रभावित कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रंजीत रामचंद्रन इन दिनों बेंगलुरु के क्रिस्ट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। शनिवार को उन्होंने केरल के अपने घर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और लिखा, ‘आईआईएम के प्रोफेसर का जन्म इसी घर में हुआ है।’
प्लास्टिक और ईंट से बना ये छोटा सा घर किसी झुग्गी की तरह दिखता है। उस झोपड़ी पर एक तिरपाल टंगा नजर आ रहा है जिसमें से बारिश के दिनों में पानी झोपड़ी में टपकता था। रंजीत रामचंद्रन के पिता रवींद्रन टेलर का काम करते हैं। मां मनरेगा में मजदूर हैं। रामचंद्रन अपने माता-पिता और तीन भाई-बहनों के साथ 400 वर्ग फीट के घर में रहते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी किया काम
पहरेदार से लेकर मशूहर संस्थान आईआईटी से स्नातक करने और अब रांची में आईआईएम में सहायक प्रफेसर बनने तक का 28 वर्षीय रंजीत रामचंद्रन का जीवन का सफर कई लोगों को जिंदगी में प्रतिकूल परिस्थतियों से संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।
पहरेदार का भी किया काम
केरल के वित्त मंत्री टी एम थॉमस इसाक ने फेसबुक पर रामचंद्रन को बधाई दी और कहा कि वह सभी के लिए प्रेरणापुंज है। वह सोशल मीडिया पर ‘रंजीत आर पानाथूर’ नाम से जाने जाते हैं। रामचंद्रन ने जब पायस टेंथ कॉलेज से अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की तब वह कसारगोड़ के पानाथूर में बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज में पहरेदार का काम कर रहे थे।
भाषा के चलते छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई
रामचंद्रन ने लिखा, ‘मैं दिन में कॉलेज जाता था और रात के समय टेलीफोन एक्सचेंज में काम करता था। स्नातक करने के बाद आईआईटी मद्रास में दाखिला मिला लेकिन उन्हें बस मलयालम भाषा आने के कारण मुश्किलें आईं। निराश होकर उन्होंने पीएचडी छोड़ देने का फैसला किया लेकिन उनके गाइड सुभाष ने उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए मना लिया।’
‘युवाओं को प्रेरित करने के लिए लिखी थी पोस्ट’
प्रोफेसर ने लिखा, ‘मैंने संघर्ष करने का फैसला किया और अपना सपना साकार करने की ठानी। पिछले ही साल पीएचडी पूरी की। पिछले दो महीने से बेंगलुरु के क्राईस्ट विश्वविद्यालय में सहायक प्रफेसर रहे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह पोस्ट फैल जाएगी। मैंने इस उम्मीद से अपने जीवन की कहानी पोस्ट की कि इससे कुछ अन्य लोगों को प्रेरणा मिलेगी। मैं चाहता हूं कि सभी अच्छा सपना देखें और उसे पाने के लिए संघर्ष करें।’

अब आपकी मर्जी के बिना नहीं आएंगे एसएमएस

नयी दिल्ली : क्या आप अपने मोबाइल पर आने वाले अनचाहे एसएमएस से परेशान हैं? अगर ऐसा है तो जल्दी ही आप इनसे छुटकारा पा सकते हैं। आप यह तय कर सकते हैं कि कौन आपको मेसेज भेजेगा और कौन नहीं। आप कंपनी या ब्रांड को यह भी सकेंगे कि आप किस दिन और किस समय प्रमोशनल मेसेज रिसीव करने की स्थिति में होंगे। इसमें समस्या यह है कि आपको 400,000 से अधिक कंपनियों को खुद ही यह बताना होगा कि आप उनके एसएमएस रिसीव करने के इच्छुक हैं या नहीं। ये वो कंपनियां हैं जिनकी नजर संभावित ग्राहक के तौर पर आप पर है। टेलिकॉम ऑपरेटर फ्रॉड और अनचाहे एसएमएस को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित मैकेनिज्म अपना रहे हैं जिसका तीसरा हिस्सा कंसेंट यानी सहमति है। टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टेलिकॉम ऑपरेटर्स से इसे अपनाने को कहा है। ऑपरेटर्स ने दुनिया के सबसे बड़े ब्लॉकचेन आधारित सॉल्यूशन डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) के पहले दो एलिमेंट्स को लागू कर दिया है। इसका मकसद देश में एक अरब से अधिक मोबाइल फोन यूजर्स के एसएमएस ट्रैफिक पर नजर रखना है। लेकिन इसका तीसरा एलिमेंट यानी यूजर की सहमति सबसे चुनौतीपूर्ण और टाइम टेकिंग पार्ट है। इसकी वजह यह है कि करीब 400,000 कंपनियां रोज करीब एक अरब प्रमोशनल एसएमएस भेजती हैं।
तीन साल लगेंगे
भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया, बीएसएनएल और एमटीएनएल की ब्लॉकचेन सर्विस प्रोवाइडर Tanla Platforms के चेयरमैन उदय रेड्डी का कहना है कि अगर एक अरब कस्टमर्स 400,000 कंपनियों के लिए कंसेंट देंगे तो इससे भारी डेटाबेस तैयार होगा। डीएलटी की अपलोड कैपेसिटी 100 टीपीएस (ट्रान्जेक्शन पर सेकेंड) की है। यानी इस पर 10 अरब कंसेंट अपलोड करने में तीन साल लगेंगे। जाहिर है कि इतने लंबे समय तक इसे रोका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेटर्स का कंसोर्टियम इस समस्या को कम से कम समय में दूर करने के लिए काम कर रहा है। इसमें टान्ला के अलावा आईबीएम और टेक महिंद्रा भी शामिल है।
हालांकि ट्राई ने तीसरे चरण के क्रियान्वयन के लिए ऑपरेटर्स के समक्ष कोई समयसीमा नहीं रखी है। इस प्रोजेक्ट में आईबीएम और टेक महिंद्रा रिलायंस जियो के पार्टनर हैं। उन्होंने इस बारे में ईटी के सवालों का जवाब नहीं दिया। स्विगी, ऐमजॉन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और नाइकी जैसी कंपनियां अपने ऐप्स या इन स्टोर परचेजेज और बिलिंग के जरिए आसानी से कस्टमर्स की सहमति ले सकते हैं। लेकिन देश में करीब 6.3 करोड़ छोटी इकाइयां हैं जो अपनी मार्केटिंग जरूरतों के लिए एसएमएस रूट का इस्तेमाल करती हैं या करना चाहती हैं।
क्या है नए सिस्टम का मकसद
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि नए सिस्टम का मकसद एसएमएस के जरिए होने वाले फाइनेंशियल फ्रॉड्स को रोकना है। लेकिन सिम बेस्ड रूट से यह बदस्तूर जारी है। सिम बेस्ड रूट का मतलब पर्सनल मेसेजेज से है जो ऑफिशियल हेडर के बजाय फोन नंबर से आते हैं। बैंकरों को आशंका है कि कस्टमर्स का डेटाबेस बनाने और इसे टेलिकॉम कंपनियों और सर्विस प्रोवाइडर्स जैसी थर्ड पार्टीज के साथ साझा करने से निजता के मौलिक अधिकार के उल्लंघन का खतरा है। जानकारों का कहना है कि पहले दो चरण के सख्त नियम कमर्शियल एसएमएस चैनल की ग्रोथ के लिए घातक हो सकता है। टेलीमार्केटिंग फर्म कलाएरा के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर अनिकेत जैन ने कहा कि कई ब्रांड्स ईमेल और वॉट्सऐप जैसे प्रचार के दूसरे तरीकों पर विचार कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि वे एसएमएस के नियमों का पालन नहीं करना चाहते हैं लेकिन उन्हें पता है कि कंसेंट का रास्ता बहुत लंबा और चुनौतियों से भरा है। वे इससे बचना चाहते हैं।