कोलकाता : भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में कैल्कुलेटर सिक्रेट पर वेबिनार का आयोजन किया गया। गत तीन वर्षों से कैल्कुलेटर के रहस्य को सहजता से समझने के लिए यह कार्यक्रम किया जाता है जो विद्यार्थियों में बहुत ही लोकप्रिय है। हर एक कार्यक्रम में 500 से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति रहती है।
कैल्कुलेटर हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हो गया है, चाहे परीक्षाएं हों या बिजनस हो या फिर घर- गृहस्थी का हिसाब किताब हो। कॉलेज के फैकल्टी प्रो. विवेक पटवारी जो गूगल सर्टिफाइड ट्रैनर होने के साथ-साथ सीए सीएस नेट क्वालिफाइड और विद्यार्थियों में लोकप्रिय अध्यापक के रूप में प्रसिद्ध हैं। कैल्कुलेटर में सिद्धहस्त प्रो पटवारी ने विद्यार्थियों से कैल्कुलेटर के विशेष बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। बिना साइंटिफिक कैल्कुलेटर के लोगारिदम के नंबरों के वेल्यू को निकालना भी बताया। इस अवसर पर डीन प्रो दिलीप शाह ने कैल्कुलेटर सीक्रेट पर अपने विचार व्यक्त किए। डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी।
भवानीपुर कॉलेज में कैल्कुलेटर सीक्रेट पर वेबिनार
भवानीपुर कॉलेज में उच्चतम अंक प्राप्त बैच 2019 के स्नातक 193 विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप सम्मान
कोलकाता : भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के प्रथम श्रेणी के विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह द्वारा 2019 के स्नातक विद्यार्थियों को मेडल, प्रशंसा प्रमाणपत्र, सर्टिफिकेट और एक वर्ष की फीस माफ़ कर उसका रूपये वापस करने का चेक दिया जाएगा। कोरोना काल में इस दीक्षांत समारोह को बहुत ही सीमित रूप से मनाया जाएगा। ये विद्यार्थियों के लिए उपलब्धि प्राप्ति का कार्यक्रम है जो उन्हें अपने स्नातक के दौरान तीन वर्षों में उनका कॉलेज अनुभव है।
प्रो दिलीप शाह ने सभी ऐसे विद्यार्थियों को जिन्होंने तीन वर्षों में सर्वश्रेष्ठ अंक और कॉलेज के अन्य इवेंट्स में बेहतर प्रदर्शन किए, उनको शुभकामनाएं दीं। अपने वक्तव्य में प्रो शाह ने आने वाले इवेंट्स और कॉलेज के विविध कलेक्टिव्स के विषय में भी जानकारी दी। कॉलेज में ही कोरोना के नियमों का पालन और सावधानीपूर्वक करते हुए सभी उच्च अंक विद्यार्थियों को दो बैचों में 73 विद्यार्थियों को एक एक करके विद्यार्थियों को बुलाकर उनको सर्टिफिकेट प्रदान किए। बचे हुए 120 विद्यार्थियों को उनके सर्टिफिकेट, मेडल और एक वर्ष की फीस को उनके बैंक एकांउट्स में हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इस अवसर पर मैनेजमेंट के सदस्यों में प्रदीप सेठ और नलिनी पारेख और टीचर्स इंचार्ज डॉ शुभब्रत गंगोपाध्याय ने विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ. वसुंधरा मिश्र ने।
माल्लिका श्रीनिवासन बनीं पीईएसबी चेयरपर्सन
नयी दिल्ली : निजी क्षेत्र की कंपनी ट्रैक्टर्स एण्ड फार्म इक्विपमेंट (टेएएफई) लिमिटेड की चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक माल्लिका श्रीनिवासन को सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएस बी) का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। इस संबंध में कार्मिक मंत्रालय ने आदेश जारी किया।
यह पहला मौका है जब किसी निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ को पीईएसबी का प्रमुख नियुक्त किया गया है। अधिकारी ने कहा कि पीईएसबी प्रमुख केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) में प्रबंधन के शीर्ष पदों पर नियुक्ति की जिम्मेदारी होती है। अधिकारी ने कहा कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने श्रीनिवासन को तीन साल के लिये पीईएसबी चेयरपर्सन के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी। उनकी नियुक्ति पद संभालने के दिन से तीन साल तक के लिये अथवा उनके 65 साल की आयु होने तक के लिये की गई है। संसद की एक समिति ने हाल ही में इसको लेकर आश्चर्य जताया था कि पीईएसबी कैसे प्रमुख के और एक सदस्य के बिना ही काम कर रहा है।
गीता प्रेस के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका का निधन
वाराणसी : गीता प्रेस के अध्यक्ष और धार्मिक पत्रिका कल्याण के संपादक राधेश्याम खेमका का शनिवार दोपहर को निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उनका हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार किया गया और उनके पुत्र राजा राम खेमका ने उन्हें मुखाग्नि दी। राधेश्याम खेमका पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और रविन्द्रपुरी स्थित एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके परिवार में पुत्र राजा राम खेमका और पुत्री राज राजेश्वरी चोखानी हैं।
शरद पगारे को उपन्यास ‘पाटलिपुत्र की सम्राज्ञी’ हेतु व्यास सम्मान
नयी दिल्ली : इतिहासकार और साहित्यकार शरद पगारे के उपन्यास ‘पाटलिपुत्र की सम्राज्ञी’ को केके बिड़ला फाउंडेशन के प्रतिष्ठित व्यास सम्मान (वर्ष 2020) के लिए चुना गया है। इस सम्मान के तहत चार लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न प्रदान किया जाता है। 5 जुलाई, 1931 को खंडवा (मप्र) में जन्मे शरद पगारे इतिहास में एमए, पीएचडी हैं और महाविद्यालयीन प्राचार्य पद से सेवानिवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन में रत हैं। वे शिल्पकर्ण विश्वविद्यालय, बैंकाक में अतिथि प्राचार्य के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। कई सम्मानों से नवाज़े जा चुके पगारे के अब तक पांच उपन्यास, छह कहानी संग्रह, दो नाटक व शोध प्रबंध प्रकाशित हुए हैं।
नहीं रहीं अभिनेत्री शशिकला, 88 साल की उम्र में निधन
मुम्बई : गुजरे जमाने की मशहूर अभिनेत्री शशिकला का गत 4 अप्रैल को 88 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। उनके निधन की खबर लेखिका किरन कोट्रियाल ने सोशल मीडिया पर शेयर की है। 100 से ज्यादा फिल्मों में सहायक भूमिका निभा चुकीं शशिकला का जन्म 4 अगस्त 1932 में महाराष्ट्र के शोलापुर में हुआ था। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को लेकर उन्हें 2007 में पद्मश्री सम्मान दिया गया था। इसके अलावा उन्हें 2009 में वी शांताराम अवॉर्ड्स के दौरान लाइफटाइम अचीवमेंट से भी नवाजा गया था।
शशि का पूरा नाम शशिकला जावलकर था, उन्होंने ओमप्रकाश सहगल से शादी की थी। महज 11 साल की छोटी उम्र में उनका परिवार मुंबई आ गया। जहां उनके पिता ने बेटी के लिए एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो जाकर काम ढूंढना शुरू किया। इसी दौरान शशिकला की मुलाकात एक्ट्रेस और सिंगर नूरजहां से हुई। नूरजहां को वे अच्छी लगीं और उन्होंने अपने पति से कहकर उन्हें फिल्म में काम दिलवा दिया। शशिकला ने 1945 में फिल्म ‘जीनत’ में काम किया। इस फिल्म के लिए उन्हें 25 रुपये मिले थे। फिल्मों के बाद शशिकला ने टीवी का रुख किया। जहां वे जीना इसी का नाम है, अपनापन, दिल देके देखो, आह, किसे अपना कहें और सोनपरी में काम किया। वहीं फिल्मों में माँ के रोल भी निभाए, जिनमें मदर 98, परदेसी बाबू, बादशाह, कभी खुशी कभी गम, मुझसे शादी करोगी और चोरी-चोरी जैसी फिल्में शामिल हैं।
ब्रिटेन की डेनिस कोट्स बनीं सबसे अधिक पैकज बनने वाली सीईओ पिचाई
मस्क और कुक को भी पीछे छोड़ा; 4750 करोड़ का पैकेज
दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले सीईओ की चर्चा करें तो पहला नाम अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई का आता है, इनके बाद एलन मस्क, टिम कुक और सत्या नडेला जैसी हस्तियां हैं। ब्रिटेन की एक महिला सीईओ ने सैलरी के मामले में इन सबको पीछे छोड़ दिया है। ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म बेट365 की फाउंडर और सीईओ डेनिस कोट्स को वित्त वर्ष 2020 में 4750 करोड़ रुपये का पैकेज मिला है।
53 साल की कोट्स ब्रिटेन की सबसे धनी महिला भी हैं और अब वे दुनिया के सबसे ज्यादा पैकेज पाने वाले सीईओ की सूची में शामिल हो गयी हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक वे पहले ही दुनिया के सबसे धनी 500 लोगों में शुमार हैं। पिछले एक दशक में कोट्स ने 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कमाए हैं। लगभग दो दशक पहले शुरू हुई बेट365 को ऑनलाइन गेम बेटिंग के कारण फायदा मिला है। कम्पनी की नेटवर्थ करीब 30 हजार करोड़ रुपये है। कंपनी को 2020 में 28,400 करोड़ राजस्व मिला, जो बीते साल की तुलना में 8% कम है। शेफील्ड यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन के बाद कोट्स अपने पिता की गैंबलिंग की दुकानों की एक छोटी सी चेन की अकाउंटेंट बन गई थीं। 22 साल की उम्र में वे एमडी बन गईं। दुकानों की संख्या बढ़ाने के साथ उन्होंने बिजनेस ऑनलाइन ले जाने का फैसला लिया। स्टोक सिटी फुटबॉल क्लब का स्वामित्व भी उनके पास है। ब्लूमबर्ग वेल्थ इंडेक्स में शामिल 17 ब्रिटिश धनकुबेरों में कोट्स एकमात्र महिला हैं। इनमें वर्जिन ग्रुप के फाउंडर रिचर्ड ब्रैनसन और टोटेनहम हॉटस्पर फुटबॉल क्लब के मालिक जो लुई शामिल हैं।
गैंबलिंग से अर्निंग : सुंदर पिचाई से दोगुना ज्यादा सैलरी ली कोट्स ने
ब्लूमबर्ग पे इंडेक्स के मुताबिक डेनिस कोट्स को करीब 4750 करोड़ रुपये मिले, जबकि अल्फाबेट (गूगल) के सीईओ सुंदर पिचाई को 2144 करोड़ मिले थे। टेस्ला के सीईओ मस्क को 3591 करोड़ रु. पैकेज मिला था। एपल सीईओ टिम कुक को 957 करोड़ रु. वहीं माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला को 306 करोड़ रु. सैलरी मिली। कोट्स ने कोरोना से जंग के लिए ब्रिटेन की सरकार को 100 करोड़ रु. से ज्यादा की मदद दी।
नहीं रहीं सौमित्र चटर्जी की पत्नी दीपा चटर्जी
मुम्बई: पिछले साल नवंबर महीने में बांग्ला फिल्मों के सुपरस्टार रहे और दुनिया भर में एक उम्दा अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले सौमित्र चटर्जी के निधन के बाद अब उनकी पत्नी दीपा चटर्जी का भी निधन हो गया। 83 वर्षीय दीपा चटर्जी ने शनिवार और रविवार की दरमियानी रात कोलकाता के कोलंबिया एशिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। कोलकाता से फोन पर माँ के गुजर जाने की खबर की पुष्टि करते हुए उनकी बेटी पौलोमी चटर्जी ने बताया कि उनकी माँ लम्बे समय से किडनी की समस्या से ग्रस्त थीं और उनकी दोनों किडनियों ने काम करना बंद दिया। उन्होंने बताया कि खराब हो चुकीं किडनियों से उपजी जटिलताओं के चलते रात 2.00 बजे के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया और वो चल बसीं।
पौलोमी चटर्जी ने कहा कि माँ पिछले 45 सालों से डायबिटीज से भी ग्रस्त थीं और तमाम तरह की समस्याओं के चलते एक अर्से से उन्हें ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी कराना पड़ रहा था। पौलोमी ने कहा, “मेरी माँ चार महीने पहले ही चल बसे बाबा को भी बहुत याद किया करती थीं और अक्सर मुझसे कहा करती थीं कि उन्हें अब उनमें जीने की और इच्छा नहीं बची है।”
उल्लेखनीय है कि सत्यजीत रे की बांग्ला फिल्म ‘अपूर संसार’ से अपना फिल्मी करियर शुरू करनेवाले और फिर उनके निर्देशन में बनी 14 फिल्मों में काम करनेवाले सौमित्र चटर्जी का 15 नवंबर, 2020 को कोलकाता में निधन हो गया था। 85 साल के सौमित्र चटर्जी को कोरोना के चलते अस्पताल में दाखिल कराया गया था मगर कोरोना नेगेटिव आने के बाद पैदा हुईं अन्य जटिलताओं के चलते उनका निधन हो गया था। सौमित्र और दीपा ने 1960 में पारंपरिक बांग्ला रीति-रिवाजों के साथ शादी की थी।
बगैर रिजर्वेशन कर सकेंगे सफर, रेलवे ने शुरू कीं 71 अनारक्षित ट्रेनें
नयी दिल्ली : अब आप बिना रिजर्वेशन के भी आप सफर कर सकेंगे। रेलवे ने बड़ी संख्या में 5 अप्रैल से अनारक्षित ट्रेन पटरी पर उतारे हैं। इससे दिल्ली-एनसीआर के साथ ही सहारनपुर, अमृतसर, फिरोजपुर, फजिल्का समेत कई जगहों की राह आसान होगी। पांच अप्रैल से ज्यादातर अनारक्षित ट्रेन लोगों की राह आसान करने लगेंगी। उत्तरी रेलवे की तरफ से कुल 71 अनारक्षित मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की सूची जारी की गयी।
वहीं रेल मंत्रालय ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। रेल मंत्रालय ने ट्वीट किया, ‘रेलवे भारतीय रेल यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी करते हुए 5 अप्रैल से 71 अनारक्षित ट्रेन सेवाएं आरंभ करने जा रहा है। ये ट्रेनें यात्रियों के सुरक्षित और आरामदायक सफर को सुनिश्चित करेंगी।’
इस ट्वीट में एक लिंक दिया गया है, जिसमें ट्रेनों की सूची दी गई है। कोविड की वजह से अनारक्षित ट्रेनें स्पेशल ट्रेन के नाम से चलेंगी। लिहाजा इन ट्रेनों का किराया पैसेंजर ट्रेनों जैसा सस्ता नहीं होगा बल्कि मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों जैसा होगा।
यहाँ के लिए होंगी अनारक्षित ट्रेनें
सहारनपुर-दिल्ली जंक्शन, फिरोजपुर कैंट-लुधियाना, फजिल्का-लुधियाना, बठिंडा-लुधियाना, वाराणसी-प्रतापगढ़, सहारनपुर-नई दिल्ली, जाखल-दिल्ली जंक्शन, गाजियाबाद-पानीपत, शाहजहांपुर-सीतापुर, गाजियाबाद-मुरादाबाद समेत कई शहरों के लिए अनारक्षित ट्रेन चलेंगी।
भवन निर्माण के लिए अब गोबर से तैयार होगी फौलाद से भी मजबूत ईंट
रायपुर : सहज भरोसा नहीं होता कि सूखे हुए गोबर में आग नहीं लगेगी। यहां तो घर ही गोबर की ईंटों (गोक्रीट) से तैयार हो रहे हैं। लैब जांच में साबित हो गया है कि 350 डिग्री सेंटिग्रेड तापमान पर भी इन ईटों का कुछ नहीं बिगड़ेगा। इन ईंटों में 80 फीसद गोबर है। बाकी 20 फीसद में चूना, मिट्टी, ग्वार, नींबू का रस और अन्य पदार्थ हैं। हरियाणा के रोहतक निवासी रसायनशास्त्री डा. शिव दर्शन मलिक की खोज को रायपुर नगर निगम से जुड़ी संस्था ‘पहल सेवा समिति’ ने प्रयोग में लाना शुरू कर दिया है। संतोषी नगर स्थित नगर निगम के गोठान में गोबर से ईंटों का उत्पादन शुरू हो गया है। वैज्ञानिक प्रविधि से तैयार ईंटों के लिए आधा दर्जन से अधिक ग्राहकों की मांग भी पहुंच चुकी है।
प्रयोगशाला की जाँच में सफल : बिना भट्टी और पानी के यह ईंटें दस से बारह दिनों में तैयार हो जा रही हैं। हरियाणा के सोनीपत स्थित माइक्रो इंजीनियरिंग एंड टेस्टिंग लैबोरेट्री से फरवरी महीने में कराई गई जांच काफी उत्साहवधर्क रही। एक मार्च 2021 को प्राप्त रिपोर्ट में ही पता चला कि 350 डिग्री सेंटिग्रेट पर भी गोबर की ईंट सुरक्षित है और उसमें आग नहीं लगेगी। गोधन के गोबर से तैयार ईट की ताकत 11 एमपीए तक है जो सत्तर से अस्सी साल तक खराब नहीं होती। यहां उल्लेखनीय है कि कच्ची मिट्टी के घरों की ताकत औसतन 0.5 एमपीए (मेगा पास्कल) हुआ करती है तो पकी हुई लाल ईंट की ताकत औसतन 14 एमपीए होती है। इसके साथ ही लाल ईंट की तरह यह गर्मी में तेजी से गर्म और ठंड में ठंडी भी नहीं होती। ऐसे में गोबर की ईट से घर में बिजली की खपत भी कम होगी। गोक्रीट के उत्पादन में लागत कम होने के कारण इसकी कीमत लाल ईंट से कम है।
भट्ठे में महिला-बच्चे की मौत से प्रेरणा : पहल सेवा समिति के अध्यक्ष राजकुमार साहू और उपाध्याक्ष रितेश अग्रवाल ने बताया कि जनवरी में बेमेतरा जिले के एक धधकते ईंट भट्ठे के धंसने से मां और तीन वर्षीय बच्चे की मौत की घटना ने विचलित कर दिया। उन्हें विकल्पों पर विचार के लिए मजबूर कर दिया। इसी क्रम में गोबर से ईंट निर्माण का विचार आया तो गाय के गोबर से वैदिक प्लास्टर बनाने वाले डा. शिव दर्शन मलिक से संपर्क कर ईटों के निर्माण का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। एक आदमी एक दिन में गोबर की 200 ईंटें तैयार कर रहा है। बीकानेर स्थित अनुसंधान केंद्र द्वारा नियमित रूप से अन्य लोगों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न गोठानों में गोबर से गमला, लक्ष्मी गणेश, कूड़ादान, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती, मोमबत्ती एवं अगरबत्ती स्टैंड आदि चीजों का निर्माण हो रहा है।
गोबर की ईंट को न आग चाहिए न पानी : रोहतक निवासी डा. शिव दर्शन मलिक इन दिनों बीकानेर स्थित वैदिक प्लास्टर एवं गौक्रीट अनुसंधान केंद्र स्थित अपनी प्रयोगशाला में व्यस्त हैं। वहां गोबर की ईट से मकान तैयार हो चुका है। डा. मलिक के मुताबिक, गोवंश के गोबर में प्रोटीन और फाइबर होता है। प्रोटीन मजबूती प्रदान करता है तो फाइबर किसी भी वस्तु को जोड़ने के लिए जरूरी है। सीधे तौर से कहें तो यह ईंट पूरी तरह ईको फ्रेंडली है। दूसरी तरफ लाल ईंट में मिट्टी कटाई से खेती प्रभावित होती है। ईंट पाथने में पानी का तो पकाने में कोयले का उपयोग होता है। इससे मिट्टी, पानी का दोहन और वायु प्रदूषण होता है। स्वयं रसायनशास्त्री डा. मलिक कहते हैं, भारतीय संस्कृति में गोबर के महत्व को पीढ़ी दर पीढ़ी मान्यता मिलती रही है। इस ईंट के निर्माण में केवल और केवल देसी गाय और बैल का ही गोबर उपयुक्त है। देसी गोवंश बचाने के लिए इस शोध का अधिकाधिक प्रचार जरूरी है। उन्होंने बताया कि रोहतक में अभी तक सात प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें देश भर से 70 से अधिक लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर गौक्रीट से ईट व मकान बनाना आरंभ कर चुके हैं। हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में ईंटों का उत्पादन शुरू हो गया है। रोहतक, बीकानेर और झारखंड के चाकूलिया में कमरे भी बन चुके हैं।
भवन निर्माण की तकनीकी : वर्तमान दौर में बहुमंजिली इमारतों में पहले ढांचा तैयार होता है उसके बीच ईंटें लगती है। इन ईंटों पर वजन नहीं पड़ता। इन्हें नो लोड वीयरिंग वाल करते हैं। इसलिए बहुमंजिली इमारतों में गोबर की ईंटों के प्रयोग में किसी भी स्तर पर कोई परेशानी नहीं है। विभिन्न स्थानों पर इस दिशा में काम चल रहा है। पूरे विश्व में हरित भवनों के निर्माण में हैंपक्रीट का उपयोग होता है। इसमें भांग का हिस्सा 80 फीसद होता है। हैंपक्रीट में भी आग नहीं लगती। चूना मिलने से भांग या गोबर की प्रकृति बदल जाती है और यह फायर प्रूफ बन जाता है। डा. मलिक के अनुसार, मुख्य लक्ष्य मानव जीवन में गोधन को उपयोगी बनाना है।
दस हजार ईंटों का इंतजार : पेशे से भवन निर्माता रायपुर के नीरज वैष्णव ने बताया कि उन्हें दस हजार ईंटें मिलने का इंतजार है। वर्ष 2005 एनआइटी से सिविल इंजीनियरिंग करने वाले नीरज के अनुसार, गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट ने उन्हें काफी प्रभावित तो गोबर के प्रयोग ने आकíषत। शुरुआती तौर पर उन्होंने फार्महाउस में कमरों को नेचुरल लुक (प्राकृतिक रूप) देने के लिए गौक्रीट का प्रयोग करने की योजना बनाई है। परिणाम अच्छा रहने पर भवनों के निर्माण में भी इसका प्रयोग किया जाएगा।
( साभार: दैनिक जागरण)




