Tuesday, April 7, 2026
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‘बंगीय हिंदी परिषद’ में ऑनलाइन काव्य-गोष्ठी ‘कविकल्प’ का आयोजन

कोलकाता :  कलकत्ते की प्राचीन हिंदी संस्था ‘बंगीय हिंदी परिषद’ में काव्य-गोष्ठी कविकल्प का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड ने की और सभी युवा रचनाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए अपने स्वागत भाषण में परिषद के मंत्री डॉ. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने दिवंगत काली प्रसाद जायसवाल को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी लिखी कविताओं का पाठ कर उन्हें याद किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने सभी युवा कलमकारों को नवसंवत्सर की बधाई देकर सृजनशील बने रहने की सीख दी। रमाकांत सिन्हा ने सरस्वती वंदना के साथ अपना काव्य-पाठ किया। अनेक नए कवियों ने नवसंवत्सर की कविता के साथ समसामयिक मुद्दों पर भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।गोष्ठी में शामिल अन्य कवि थे – श्री गजेन्द्र नाहटा,श्री नंदलाल रौशन,श्रीमती सुदामी यादव,निखिता पाण्डेय, संघमित्रा रॉय,सूर्यदेव रॉय, रीमा पांडेय, अभिषेक पाण्डेय,पुष्पा मिश्रा,डॉ. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी, डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड तथा सुषमा राय पटेल। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड ने यह बताया कि इस मुश्किल समय में भी हम सब डिजिटल पटल से साहित्य और साहित्यकारों से परस्पर जुड़े हैं, यह अत्यंत सराहनीय है। इस कार्यक्रम का संचालन कविकल्प गोष्ठी की संयोजक पुष्पा मिश्रा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन परिषद की संयुक्त मंत्री, सुषमा राय पटेल ने किया।

मिस्र में मिला 3000 साल पुराना ‘सोने’ का अद्भुत शहर

काहिरा : मिस्र में मिले तीन हजार साल पुराने अद्भुत शहर की चर्चा पूरी दुनिया में है। इतने साल बीत जाने के बाद जाने के बाद भी मिस्र के इस ‘सबसे बड़े’ प्राचीन शहर के अवशेषों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे अभी कल ही इन्‍हें बनाया गया हो। इस शहर को ‘प्राचीन मिस्र का पोम्‍पेई’ भी कहा जा रहा है। लक्‍जर शहर की रेत के नीचे इस करीब 3400 साल पुराने शहर के मिलने की घोषणा मिस्र के चर्चित पुरातत्‍ववेत्‍ता डॉक्‍टर जही हवास ने पिछले सप्‍ताह की थी। अब इस ‘सोने के शहर’ का पहला वीडियो दुनिया के सामने आ गया है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि मिस्र का यह शहर वर्ष 1922 में तूतनखामून के मकबरे की खोज के बाद सबसे बड़ी खोज है। करीब 7 महीने की खुदाई के बाद इस शहर का पता चला है। इस शहर में अभी अगले कई साल तक आम आदमी को जाने की इजाजत नहीं होगी। इस बीच यूट्यूब चैनल एनेक्केसटी के संचालकों ने इस पूरे शहर का वीडियो जारी किया है। उन्‍होंने कहा कि ये फुटेज उनके पास एक्‍सक्‍लूसिव हैं और अब तक नहीं देखे गए हैं।

मिस्र में खोजा गया सबसे विशाल प्राचीन शहर
मशहूर मिस्र विशेषज्ञ जाही हवास ने ऐलान किया है कि ‘खोए हुए सुनहरे शहर’ की खोज लग्जर के करीब की गई है। यहां राजाओं की घाटी स्थित है। टीम ने एक बयान जारी कर बताया कि डॉ. जाही के तत्वाधान में मिस्र के मिशन में एक शहर मिला है जो रेत के नीचे खो गया था। बयान में कहा गया है, ‘शहर 3000 हजार साल पुराना है, एमेनोटेप III के शासनकाल का और तूतनखामेन के दौरान भी चलता रहा।’इस शहर को मिस्र में खोजा गया सबसे विशाल प्राचीन शहर बताया जा रहा है।

जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की मिस्र की कला और पुरातत्वविद प्रफेसर बेट्सी ब्रायन ने बताया कि तूतनखामेन के मकबरे की खोज के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी पुरातत्व खोज है। खोज में अंगूठियों जैसे जेवर, रंगीन बर्तन, ताबीज और एमेनटॉप III की मोहर लगीं मिट्टी की ईंटें मिली हैं। इससे पहले कई बार इस शहर की खोज की गई थी लेकिन इसे कोई खोज नहीं सका। उम्मीद जताई गई है कि आगे की खोज में कई खजाने मिल सकते हैं।

मिस्र के लोगों की अमीरी का गवाह
इस टीम ने पिछले साल सितंबर में खोज शुरू की थी। लग्जर के पास रामसेस III और एमेनटॉप III के मंदिरों के बीच में काहिरा से 500 किमी दूर खोज की गई। कुछ ही हफ्तों में उन्हें सभी जगहों पर मिट्टी की ईंटों से बनीं आकृतियां मिलने लगीं। खुदाई में एक विशाल शहर निकला जो काफी अच्छी हालत में संरक्षित था। करीब-करीब पूरी बनी दीवारें और रोजमर्रा के सामान से भरे कमरे तक पाए गए। टीम के बयान में कहा गया है कि ये इलाका हजारों साल बाद ऐसे मिला है जैसे कल ही का हो। सात महीने बाद कई इलाकों को खोज लिया गया था। इसमें अवन के साथ बेकरी और बर्तनों का स्टोर भी मिला। यहां तक कि प्रशासनिक और रिहायशी डिस्ट्रिक्ट भी मिलीं। एमेनटॉप III ने विरासत में ऐसा साम्राज्य पाया था जो यूफरेट्स से सूडान तक फैला था। उसकी मौत 1354 ईसा पूर्व में हुई। उसने चार दशकों तक राज किया। इस काल को समृद्धि और भव्य इमारतों के लिए जाना जाता है। इनमें लग्जर के पास लगीं उसकी और उसकी रानी की विशाल प्रतिमाएं शामिल हैं। ब्रयान ने बताया कि इस खोज से प्राचीन मिस्र के सबसे अमीर काल को जाना जा सकेगा।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

जरूरी है कि भारतीय मानक ब्यूरो हेलमेट निर्माण व बिक्री की निगरानी करे: उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के लिए यह जरूरी है कि वह हेलमेट के विनिर्माण तथा बिक्री की सख्त निगरानी करे, क्योंकि यह उपभोक्ताओं की सुरक्षा से संबंधित है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की है। याचिका में दावा किया गया है कि एनजीओ ने 2019 से आज की तारीख तक 1400 से अधिक शिकायतें की हैं जिनमें हेलमेट के विनिर्माण और बिक्री में विभिन्न कथित अवैधता और अनियमितताओं के बारे में जानकारी दी गई है।
गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘उत्प्रेरित कंज्यूमर फाउंडेशन’ ने वकील तुषार ए जॉन के जरिए दायर याचिका में दावा किया है कि बीआईएस हेलमेट के विनिर्माण और बिक्री की उचित तरीके से निगरानी नहीं कर रहा है। संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद, न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, “यह देखते हुए कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा दांव पर है, हेलमेट के विनिर्माण और बिक्री की सख्त निगरानी और पर्यवेक्षण की जरूरत है।”
अदालत ने बीआईएस को निर्देश दिया कि वह एनजीओ की शिकायतों पर गौर करे तथा एक स्थिति रिपोर्ट दायर करे। इस रिपोर्ट में शिकायतों पर की गई कार्रवाई का संकेत होना चाहिए और उन कदमों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए जो हेलमेट के विनिर्माण तथा बिक्री की निगरानी के लिए प्राधिकरण ने उठाएं हैं ताकि आईएसआई चिन्ह का दुरुपयोग न हो।
जॉन ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि कुछ कंपनियां आईएसआई चिन्ह का उपयोग कर रही हैं जबकि उनका लाइसेंस रद्द किया जा चुका है। वहीं कुछ अन्य उस क्षेत्र के हेलमेट बना रहे हैं जिसके लिए उनके पास आईएसआई चिन्ह का इस्तेमाल करने का लाइसेंस नहीं हैं।

यूएई में भारतीय लड़की ने मात्र दो घंटे में पढ़ लीं 36 किताबें

अबूधाबी : पूरी दुनिया में अभिभावक बचपन से ही अपने बच्‍चों के अंदर किताब पढ़ने की आदत डालते हैं और उन्‍हें उनका सबसे अच्‍छा दोस्‍त बताते हैं। भारतीय-अमेरिकी मूल की 5 साल की लड़की किआरा कौर की किताबों के साथ यह दोस्‍ती इतनी अच्‍छी हो गई कि उन्‍होंने रेकॉर्ड कायम कर दिया है। किआरा ने बिना रुके 105 मिनट या करीब दो घंटे में 36 किताबें पढ़कर विश्‍व रेकॉर्ड कायम किया है। किआरा अपने परिवार के साथ संयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) में रहती हैं। मात्र दो घंटे के अंदर इतनी किताबें पढ़ने के लिए किआरा का नाम लंदन वर्ल्‍ड बुक रेकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रेकॉर्ड में शामिल किया गया है। बहुत कम उम्र से ही किआरा किताब की काफी शौकिन हो गई थीं। फिर चाहे वह कार हो या आराम कर रही हों, उनके हाथों में किताबें हमेशा मौजूद रहती हैं। एक दिन एक नर्सरी टीचर ने उनकी तन्‍मयता के साथ पढ़ने की आदत को देखा और उसकी काफी प्रशंसा की।
किआरा का डॉक्‍टर बनने का सपना
किआरा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, ‘किताबों से पढ़ाई करना मेरे लिए बहुत आनंददायक रहता है। आप किताब को कहीं भी ले जा सकते हैं। फोन पर पढ़ने या वीडियो देखने में तब दिक्‍कत है जब लाइट नहीं होती है।’ किआरा ने बताया कि उन्‍हें वे किताबें पसंद हैं जिनमें रंगीन चित्र होते हैं और बड़े-बडे़ अक्षर में छपी होती हैं। उनकी पसंदीदा किताबों में सिंड्रेला, एलिस इन वंडरलैंड आदि शामिल हैं। किआरा के दादा जी ने उनके अंदर किताबों को पढ़ने का शौक पैदा किया था। उनकी मां कहती हैं, ‘किआरा अक्‍सर वाट्सऐप पर अपने दादाजी से घंटों कहानी सुनती रहती है। इसका किआरा के विकास में काफी ज्‍यादा प्रभाव पड़ा है।’ बड़ी होकर किआरा का डॉक्‍टर बनने का सपना है। वहीं पूरा परिवार किआरा की इस उपलब्धि से बेहद खुश है।

भाषा और गरीबी की सीमाओं को तोड़कर आईआईएम के प्रोफेसर बने रामचन्द्रन

कोच्चि : केरल के रहने वाले रंजीत रामचंद्रन ने फेसबुक पर अपने घर की तस्वीर पोस्ट की है और उस फोटो के नीचे लिखा है, ‘आईआईएम के एक प्रोफेसर का जन्म यहीं हुआ था।’ दरअसल, 28 साल के रामचंद्रन का पिछले दिनों आईआईएम- रांची में प्रफेसर के तौर पर चयन हुआ है। उनकी संघर्ष भरी कहानी काफी लोगों को प्रभावित कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रंजीत रामचंद्रन इन दिनों बेंगलुरु के क्रिस्ट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। शनिवार को उन्होंने केरल के अपने घर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और लिखा, ‘आईआईएम के प्रोफेसर का जन्म इसी घर में हुआ है।’
प्लास्टिक और ईंट से बना ये छोटा सा घर किसी झुग्गी की तरह दिखता है। उस झोपड़ी पर एक तिरपाल टंगा नजर आ रहा है जिसमें से बारिश के दिनों में पानी झोपड़ी में टपकता था। रंजीत रामचंद्रन के पिता रवींद्रन टेलर का काम करते हैं। मां मनरेगा में मजदूर हैं। रामचंद्रन अपने माता-पिता और तीन भाई-बहनों के साथ 400 वर्ग फीट के घर में रहते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी किया काम
पहरेदार से लेकर मशूहर संस्थान आईआईटी से स्नातक करने और अब रांची में आईआईएम में सहायक प्रफेसर बनने तक का 28 वर्षीय रंजीत रामचंद्रन का जीवन का सफर कई लोगों को जिंदगी में प्रतिकूल परिस्थतियों से संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।
पहरेदार का भी किया काम
केरल के वित्त मंत्री टी एम थॉमस इसाक ने फेसबुक पर रामचंद्रन को बधाई दी और कहा कि वह सभी के लिए प्रेरणापुंज है। वह सोशल मीडिया पर ‘रंजीत आर पानाथूर’ नाम से जाने जाते हैं। रामचंद्रन ने जब पायस टेंथ कॉलेज से अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की तब वह कसारगोड़ के पानाथूर में बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज में पहरेदार का काम कर रहे थे।
भाषा के चलते छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई
रामचंद्रन ने लिखा, ‘मैं दिन में कॉलेज जाता था और रात के समय टेलीफोन एक्सचेंज में काम करता था। स्नातक करने के बाद आईआईटी मद्रास में दाखिला मिला लेकिन उन्हें बस मलयालम भाषा आने के कारण मुश्किलें आईं। निराश होकर उन्होंने पीएचडी छोड़ देने का फैसला किया लेकिन उनके गाइड सुभाष ने उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए मना लिया।’
‘युवाओं को प्रेरित करने के लिए लिखी थी पोस्ट’
प्रोफेसर ने लिखा, ‘मैंने संघर्ष करने का फैसला किया और अपना सपना साकार करने की ठानी। पिछले ही साल पीएचडी पूरी की। पिछले दो महीने से बेंगलुरु के क्राईस्ट विश्वविद्यालय में सहायक प्रफेसर रहे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह पोस्ट फैल जाएगी। मैंने इस उम्मीद से अपने जीवन की कहानी पोस्ट की कि इससे कुछ अन्य लोगों को प्रेरणा मिलेगी। मैं चाहता हूं कि सभी अच्छा सपना देखें और उसे पाने के लिए संघर्ष करें।’

अब आपकी मर्जी के बिना नहीं आएंगे एसएमएस

नयी दिल्ली : क्या आप अपने मोबाइल पर आने वाले अनचाहे एसएमएस से परेशान हैं? अगर ऐसा है तो जल्दी ही आप इनसे छुटकारा पा सकते हैं। आप यह तय कर सकते हैं कि कौन आपको मेसेज भेजेगा और कौन नहीं। आप कंपनी या ब्रांड को यह भी सकेंगे कि आप किस दिन और किस समय प्रमोशनल मेसेज रिसीव करने की स्थिति में होंगे। इसमें समस्या यह है कि आपको 400,000 से अधिक कंपनियों को खुद ही यह बताना होगा कि आप उनके एसएमएस रिसीव करने के इच्छुक हैं या नहीं। ये वो कंपनियां हैं जिनकी नजर संभावित ग्राहक के तौर पर आप पर है। टेलिकॉम ऑपरेटर फ्रॉड और अनचाहे एसएमएस को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित मैकेनिज्म अपना रहे हैं जिसका तीसरा हिस्सा कंसेंट यानी सहमति है। टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टेलिकॉम ऑपरेटर्स से इसे अपनाने को कहा है। ऑपरेटर्स ने दुनिया के सबसे बड़े ब्लॉकचेन आधारित सॉल्यूशन डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) के पहले दो एलिमेंट्स को लागू कर दिया है। इसका मकसद देश में एक अरब से अधिक मोबाइल फोन यूजर्स के एसएमएस ट्रैफिक पर नजर रखना है। लेकिन इसका तीसरा एलिमेंट यानी यूजर की सहमति सबसे चुनौतीपूर्ण और टाइम टेकिंग पार्ट है। इसकी वजह यह है कि करीब 400,000 कंपनियां रोज करीब एक अरब प्रमोशनल एसएमएस भेजती हैं।
तीन साल लगेंगे
भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया, बीएसएनएल और एमटीएनएल की ब्लॉकचेन सर्विस प्रोवाइडर Tanla Platforms के चेयरमैन उदय रेड्डी का कहना है कि अगर एक अरब कस्टमर्स 400,000 कंपनियों के लिए कंसेंट देंगे तो इससे भारी डेटाबेस तैयार होगा। डीएलटी की अपलोड कैपेसिटी 100 टीपीएस (ट्रान्जेक्शन पर सेकेंड) की है। यानी इस पर 10 अरब कंसेंट अपलोड करने में तीन साल लगेंगे। जाहिर है कि इतने लंबे समय तक इसे रोका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेटर्स का कंसोर्टियम इस समस्या को कम से कम समय में दूर करने के लिए काम कर रहा है। इसमें टान्ला के अलावा आईबीएम और टेक महिंद्रा भी शामिल है।
हालांकि ट्राई ने तीसरे चरण के क्रियान्वयन के लिए ऑपरेटर्स के समक्ष कोई समयसीमा नहीं रखी है। इस प्रोजेक्ट में आईबीएम और टेक महिंद्रा रिलायंस जियो के पार्टनर हैं। उन्होंने इस बारे में ईटी के सवालों का जवाब नहीं दिया। स्विगी, ऐमजॉन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और नाइकी जैसी कंपनियां अपने ऐप्स या इन स्टोर परचेजेज और बिलिंग के जरिए आसानी से कस्टमर्स की सहमति ले सकते हैं। लेकिन देश में करीब 6.3 करोड़ छोटी इकाइयां हैं जो अपनी मार्केटिंग जरूरतों के लिए एसएमएस रूट का इस्तेमाल करती हैं या करना चाहती हैं।
क्या है नए सिस्टम का मकसद
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि नए सिस्टम का मकसद एसएमएस के जरिए होने वाले फाइनेंशियल फ्रॉड्स को रोकना है। लेकिन सिम बेस्ड रूट से यह बदस्तूर जारी है। सिम बेस्ड रूट का मतलब पर्सनल मेसेजेज से है जो ऑफिशियल हेडर के बजाय फोन नंबर से आते हैं। बैंकरों को आशंका है कि कस्टमर्स का डेटाबेस बनाने और इसे टेलिकॉम कंपनियों और सर्विस प्रोवाइडर्स जैसी थर्ड पार्टीज के साथ साझा करने से निजता के मौलिक अधिकार के उल्लंघन का खतरा है। जानकारों का कहना है कि पहले दो चरण के सख्त नियम कमर्शियल एसएमएस चैनल की ग्रोथ के लिए घातक हो सकता है। टेलीमार्केटिंग फर्म कलाएरा के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर अनिकेत जैन ने कहा कि कई ब्रांड्स ईमेल और वॉट्सऐप जैसे प्रचार के दूसरे तरीकों पर विचार कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि वे एसएमएस के नियमों का पालन नहीं करना चाहते हैं लेकिन उन्हें पता है कि कंसेंट का रास्ता बहुत लंबा और चुनौतियों से भरा है। वे इससे बचना चाहते हैं।

अंतरिक्ष : यूएई ने रचा एक और इतिहास, चुनी अरब देशों की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री

अबु धाबी : अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात एक सुनहरे दौर की कहानी लिखता जा रहा है। पिछले साल मंगल पर मिशन भेजने वाला वह पहला अरब देश बना और अब एक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। देश ने अपनी पहली महिला ऐस्ट्रोनॉट को चुना है। नोरा अल मतरूशी को मोहम्मद अल मुल्ला के साथ ऐस्ट्रोनॉट चुना गया है। 4 हजार लोगों के बीच से नोरा को चुना गया है।
एमिरेट्स ऐस्ट्रॉनॉट्स प्रोग्राम के दूसरे बैच से स्नातक हुईं 28 साल की नोरा अब अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के ऐस्ट्रोनॉट के साथ ट्रेनिंग शुरू करेंगी। इस बारे में यूएई के उपराष्ट्रपति और शासक हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन रशीद अल मकतूम ने ऐलान किया है। खलीज टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 1993 में जन्मीं नोरा की बचपन से ही स्पेस और ऐस्ट्रोनॉमी में दिलचस्पी थी। वह स्टारगेजिंग इवेंट्स में जाया करती थीं।
संयुक्त अरब अमीरात यूनिवर्सिटी से मकैनिकल इंजिनियरिंग की डिग्री लेने के बाद वह अमेरिकन सोसायटी ऑफ मकैनिकल इंजिनियर्स की सदस्य बनीं। उन्होंने 2011 में मैथ ओलंपियाड में पहला स्थान हासिल किया था। वह नैशनल पेट्रोलियम कंस्ट्रक्शन कंपनी में इंजीनियर थीं और कंपनी की युवा परिषद की पांच साल तक उपाध्यक्ष रहीं। उन्होंने कई साल तक वॉलंटिअर के तौर पर विज्ञान के क्षेत्र में काम किया।
इससे पहले यूएई के मंगल मिशन होप के प्रॉजेक्ट डायरेक्टर ओमरान शराफ ने बताया था कि सरकार युवाओं को प्रेरित करना चाहती है और अपनी इकॉनमी को ज्ञान पर आधारित करना चाहती है। अच्छी बात ये है कि इसका असर अभी से दिखने लगा है। अब यूनिवर्सिटी प्योर साइंस में 5 नए अंडरग्रैजुएट कोर्स ला रही हैं और युवाओं की स्पेस साइंस में दिलचस्पी बढ़ने लगी है।

क्या है एनएफटी, जो लाखों में पहुँचा देता है ट्वीट और मीम्स की कीमत

नयी दिल्ली : पिछले कुछ दिनों से एनएफटी शब्द काफी चर्चा में है। एनएफटी यानी नॉन-फंजिबल टोकन। कुछ दिन पहले ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी का सबसे पहला ट्वीट एनएफटी के तौर पर नीलामी के लिए रखा गया, जिसकी बोली 24 लाख डॉलर लगी। इससे पहले 10 सेकंड की वीडियो क्लिप करीब 66 लाख डॉलर यानी करीब 48.44 करोड़ रुपये में बिकी। ऐसे ही क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज में काम करने वाले एक दम्पति ने शादी पर एक दूसरे को एनएफटी रिंग्स देने का फैसला किया। इन सब वाकयों से स्पष्ट है कि एनएफटी एक लोकप्रिय शब्द बन चुका है और लोगों के मन में इसे लेकर कई सवाल भी हैं।
आखिर क्या है एनएफटी?
एनएफटी का इस्तेमाल डिजिटल आर्ट और डिजिटली मौजूद चीजों के लिए हो रहा है। फंजिबल का अर्थ है कि दो चीजें आपस में इंटरचेंजेबल हैं, जैसे कि 100 रुपये के नोट। डिजिटल आर्ट भी अनलिमिटेड हो सकती हैं और एक डिजिटल आर्ट की कई कॉपी बनाई जा सकती हैं। लेकिन एनएफटी का इस्तेमाल कर एक आर्टिस्ट एक कॉपी को ओरिजिनल करार दे सकता है। यही वजह है कि बीपल नामक आर्टिस्ट के कोलाज ‘ एवरीडेज – द फर्स्ट 5000 डेज ’ की लाखों कॉपीज में से एक ओरिजिनल कॉपी एक नीलामी के दौरान 7 करोड़ डॉलर में बिकी। नॉन फंजिबल को यूनीक भी कह सकते हैं। NFT की मदद से बीपल ने अपने ओरिजनल आर्टवर्क को ओरिजनल साबित किया।

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित
एनएफटीज, बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी की तरह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित है। एनएफटीज यूनीक एसेट क्लास हैं, जिन्हें थर्ड पार्टी की मदद के बिना ऑनलाइन क्रिएट किया जा सकता है, रखा जा सकता है और ट्रेड किया जा सकता है। ब्लॉकचेन एक ऐसा डेटाबेस है, जहां जानकारी/सूचना ब्लॉक्स में स्टोर रहती है। ये ब्लॉक्स एक चेन के जरिए आपस में जुड़े रहते हैं। उदाहरण के लिए बिटक्वॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी डिसेंट्रलाइज्ड ब्लॉकचेन पर आधारित होती हैं। इसमें हर ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड तो होता है लेकिन व्यक्ति डेटा को कंट्रोल नहीं कर सकता। जानकारी कई कंप्यूटर्स में सेव रहती है। इसके चलते डिटेल्स में बदलाव करना, हैक करना या सिस्टम के साथ धोखाधड़ी असंभव होती है। क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाला हर ट्रांजेक्शन अपने आप अपडेट हो जाता है।
एनएफटी आर्टवर्क में होती है यह खासियत
एनएफटी है तो कुछ साल पहले से लेकिन महामारी काल में एनएफटीज में दुनिया की रुचि जागी। जब आर्ट और एंटरटेनमेंट वेन्यू बंद थे, तो आर्टिस्ट व एंटरटेनर्स ने लोगों व खरीदारों से जुड़ने के नए रास्ते तलाशे। एनएफटीज डिजिटल सामान में कुछ गुण भर देती है, जिससे उनकी कीमत तय करना संभव होता है। उदाहरण के लिए जो कोलाज 7 करोड़ डॉलर में बिका, उसकी खासियत यह थी कि उसमें आर्टिस्ट के विशेष ब्लॉकचेन पर किए हुए सिग्नेचर की फाइल मौजूद थी। एनएफटीज वायरल मीम्स के क्रिएटर्स को उनके सिग्नेचर वाली कॉपी की बिक्री करने की इजाजत देती है। एनएफटी कोड की लाइन्स से ज्यादा कुछ नहीं है। ये ब्लॉकचेन पर इसे रजिस्टर कर आर्टवर्क की यूनीकनेस को स्थापित करते हैं।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

पोएला बैशाख को लेकर बिंगो बेफिकर का खास मेन्यू

कोलकाता : पोएला बैशाख के मौके पर बिंगो बेफिकर ने खास बंगाली थाली पेश की है। इस थाली में मल्टीग्रेन आटे की लुची, ब्राउन राइस पुलाव, कोशा आलू दम, भाजा मूँग दाल, छोलार दाल, डालना समेत कई व्यंजनों के साथ रसगुल्ला, मिष्टी दोई तथा छेनार जलेबी भी रहेगी। यह मेन्यू 18 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगा। बिंगो बेफिकर की संस्थापक अनीषा मोहता के अनुसार ग्राहक स्वीगी और जोमेटो से भी यह खाना ऑर्डर कर सकेंगे।

मर्लिन ग्रुप बांग्ला नव वर्ष पर लाया ‘मोनेर प्रानेर बांगाली’

कोलकाता : बांग्ला नववर्ष पर मर्लिन ग्रुप ने ‘मोनेर प्रानेर बांगाली’ शुरू किया है। इस दौरान चित्रांकन, बांग्ला लेखन, गायन और फैशन शो आयोजित होंगे। 17 अप्रैल को गायक रुपंकर बागची मर्लिन समूह के फेसबुक पेज पर लाइव होंगे। सभी प्रतियोगिताओं की थीम बांग्ला संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ते हुए तैयार की गयी है। गत 7 अप्रैल से आरम्भ हुई ये प्रतियोगिताएं 15 अप्रैल तक चलेंगी। मर्लिन समूह के प्रबन्ध निदेशक साकेत मोहता ने बताया कि विजेताओं के लिए इस दौरान आकर्षक उपहार भी रहेंगे। हर श्रेणी में एक विजेता होगा और इनके बीच से ही ‘मोनेर प्रानेर बांगाली’ चुना जायेगा।