कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल में हर साल की तरह रवीन्द्र जयन्ती उत्साह के साथ मनायी गयी। कविगुरु की 160 जयन्ती पर हालाँकि हर साल की तरह प्रार्थना सभा में महामारी के कारण कार्यक्रम नहीं हो सका पर विद्यार्थियों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और वर्चुअल माध्यम पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
10वीं कक्षा ए के छात्र राजमित बनर्जी ने पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। उसने कवि गुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जीवन, कार्यों और उपलब्धियों से भी अवगत कराया। कार्यक्रम की शुरुआत आठवीं कक्षा के छात्रों द्वारा रवींद्र संगीत के साथ हुई। संगीतमय प्रस्तुति के बाद सातवीं कक्षा के छात्रों द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया गया। अंत में दसवीं कक्षा के छात्रों ने बेहतरीन आवृत्ति की।
बिड़ला हाई स्कूल में मनायी गयी रवीन्द्र जयन्ती
ताउते से निपटने के लिए सरकार के साथ है ऐसोचेम
कोलकाता : ताऊते तूफान से निपटने के लिए एसोतेम सरकार की पूरी सहायता करेगाष वाणिज्य, उद्योग और रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पश्चिमी तट पर आसन्न चक्रवात की तैयारियों की समीक्षा के लिए बुलाई गयी एक उच्च स्तरीय बैठक में, एसोचैम ने यह आश्वासन दिया है। संबंधित एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोविद -19 महामारी को रोकने और उसका इलाज करने के लिए महत्वपूर्ण उद्योग अरब सागर में “बहुत गंभीर” तूफान के निर्माण के कारण कम से कम व्यवधान पैदा कर रहे हैं।
बैठक में भाग लेते हुए बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री, मनसुख मंडाविया, अध्यक्ष विनीत अग्रवाल और महासचिव दीपक सूद के नेतृत्व में एसोचैम की टीम ने एनडीएमए जैसी शीर्ष राहत और परिचालन एजेंसियों के साथ तैयारियों को साझा किया।
एसोचैम के अध्यक्ष ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री को केंद्र और राज्यों की संबंधित एजेंसियों के साथ पूर्ण समन्वय का आश्वासन दिया ताकि विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, तरल चिकित्सा ऑक्सीजन और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों में लगे उद्योग प्रभाव से अधिकतम सीमा तक अछूते रहें।
उत्तरप्रदेश की अर्शी कोरोना मरीजों को मुफ्त में बाँट रही ऑक्सीजन सिलेंडर
अपने पिता की बीमारी के बाद शुरू किया काम
महामारी के बीच 26 साल की अर्शी लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराकर जीवन दान दे रही हैं। लोग उसे सिलेंडर वाली बिटिया के नाम से जानते हैं। अर्शी के पिता जब कोरोना पॉजिटिव हुए और उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो अर्शी को ऑक्सीजन जुटाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। तभी उसे ऑक्सीजन की वजह से लोगों को होने वाली परेशानी का अहसास भी हुआ और उसने अपनी स्कूटी पर ऑक्सीजन सिलेंडर रखकर कोरोना मरीजों के घर तक पहुंचाने की शुरुआत की। उत्तरप्रदेश के शाजापुर के मदार खेल में रहने वाली अर्शी अब तक मुफ्त में 20 ऑक्सीजन सिलेंडर बांट चुकी हैं। इस काम में उसके दो भाई और कुछ अन्य लोग भी मदद करते हैं। अर्शी के पिता को एक महीने पहले से ही सांस लेने में तकलीफ थी। होम आइसोलेशन में रहते हुए उनका ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा। तब डॉक्टर ने अर्शी से ऑक्सीजन सिलेंडर लाने को कहा। अर्शी ने जब नगर मजिस्ट्रेस के ऑफिस में जाकर ऑक्सीजन की मांग की तो उससे कहा गया कि घर में रहने वाले मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिलता है। उसके बाद उसने उत्तराखंड के एक सामाजिक संगठन से वाट्सएप के जरिये ऑक्सीजन जुटाई और वह ठीक हो गए। अर्शी ने उत्तरप्रदेश के शाहबाद और हरदोई में भी लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराकर जीवनदान दिया है। वह इस काम के बदले में किसी से पैसे भी नहीं लेती हैं।
महामारी के बीच चेन्नई की ट्रांस महिलाएं मुफ्त में बांट रहीं खाना
लॉकडाउन के शुरुआती दौर में खुद पैसे जुटाकर की पहल
ट्रांस कम्युनिटी किचन में श्रीजीत, आरूवी, अनीश और शरन कार्तिक नाम की ट्रांस महिलाएं जरूरतमंदों के लिए खाना बनाते हुए देखी जाती हैं। इनके अलावा यहां लगभग 12 महिलाएं काम कर रही हैं। श्रीजीत ने बताया कि लॉकडाउन के शुरुआती दौर में ट्रांस समुदाय के कुछ लोगों ने मिलकर गरीबों के लिए खाने की व्यवस्था करने के उद्देश्य से फंड इकट्ठा किया। वहीं ये भी महसूस किया कि महामारी की वजह से खाना तो दूर लोगों को साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा है। श्रीजीत के अनुसार, मैं इन सभी महिलाओं को लंबे समय से जानती हूँ। वे समाज के लिए हर संभव प्रयास करने को तत्पर रहती हैं। खाने के साथ ही वे उन लोगों को अपनापन देना चाहती हैं जो बेसहारा हैं। ट्रांसवुमन की टीम हाइजीन के सभी प्रोटोकॉल फॉलो करती हैं। उनका काम सुबह 4:30 बजे शुरू होता है और रात को 9 बजे तक जारी रहता है। ये टीम सुबह, दोपहर और शाम को लॉकडाउन के बीच गरीबों में खाना बांटते हुए देखी जाती है।
सबसे पहले इन महिलाओं ने नाश्ते में रवा खिचड़ी और लंच में वेजिटेबल बिरयानी बांटने की शुरुआत की। रात के खाने में रोटी और सब्जी बांटी। ये महिलाएं खाने के साथ जरूरतमंदों को पानी की बोतल भी देती हैं। 2 मई के बाद से इन्होंने नाश्ते में पोंगल, दिन के खाने में सांभर और चावल व रात के खाने में जैम व बिस्किट बांटा। वे एक वक्त में लगभग 400 लोगों को मुफ्त में खाना बांटती हैं।
ईरान की मैकेनिक मरियम रूहानी ला रही हैं बदवाव
तेहरान : ईरान की राजधानी तेहरान के एक अंधेरे गैरेज में वेल्डिंग, फैब्रिकेटिंग और चार पहिया गाड़ियों पर पेंटिंग करते हुए 34 साल की मरियम रूहानी को देखा जा सकता है। उसकी यूनिफॉर्म पर जगह-जगह ग्रीस के निशान दिखाई देते हैं। वह अपने लंबे बालों को बेसबाल कैप से कवर किए हुए काम करती हैं। आमतौर पर ईरान के नॉर्थइस्टर्न बॉर्डर पर बसे गांव आघ मजर की रहने वाली अधिकांश लड़कियों की कम उम्र में शादी कर दी जाती है। रूहानी ने बताया कि वे अपने गांव की इसी धारणा को बदलने का प्रयास कर रही हैं। वह पूरी सावधानी के साथ कार पर कोटिंग करती हैं। मरियम एक किसान की बेटी हैं। वे अपने गांव के अन्य बच्चों की तरह मजदूरी करते हुए बड़ी हुई हैं। लेकिन अपने पांच बहन-भाईयों में सबसे अलग रूहानी का रुझान बचपन से अपने पापा के ट्रैक्टर पर रहता। बड़े होने पर रूहानी ने हेयर ड्रेसर के तौर पर अपने काम की शुरुआत की। फिर वह मेकअप आर्टिस्ट बन गई। उसके बाद परिवार के कुछ लोगों की सहमति से वह कार पॉलिश करने लगी और डिटेलर बन गई। उसके इस काम के बारे में जब रिश्तेदारों को पता चला तो कई रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया। लेकिन रूहानी के पापा ने उसका पूरा साथ दिया। यहां तक कि अपने काम में आगे बढ़ने की वजह से उन्होंने रूहानी के शादी के कई प्रस्ताव भी ठुकरा दिए। मरियम ने टर्की से कार पॉलिशिंग सर्टिफिकेट लिया। उसके बाद तेहरान में किराए की दुकान लेकर अपने काम की शुरुआत की। फिलहाल रूहानी अन्य महिलाओं को भी तमाम रूकावटों के बाद आगे बढ़ने और अपने काम को सिखाने में मदद कर रही हैं।
टाइम्स ग्रुप की अध्यक्ष इंदु जैन का निधन
मुम्बई : टाइम्स ग्रुप की अध्यक्ष इंदु जैन का बृहस्पतिवार को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। समूह के समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ ने एक ट्वीट में जैन को आजीवन आध्यात्मिक साधक, अग्रणी परोपकारी, कला की प्रतिष्ठित संरक्षक और महिला अधिकारों का जबदस्त समर्थक बताया।
टाइम्स ग्रुप के सूत्रों ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण से उत्पन्न जटिलताओं के कारण उनका निधन हो गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने दिल्ली में अंतिम सांस ली।
जैन कल्याणकारी गतिविधियों के लिए स्थापित टाइम्स फाउंडेशन की संस्थापक भी थीं और उन्होंने उद्योग लॉबी फिक्की की महिला विंग की भी स्थापना की। उन्हें 2016 में देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
मैक्सिको की एंड्रिया मेज़ा बनी 69वीं मिस यूनिवर्स
हॉलीवुड : मैक्सिको की एंड्रिया मेज़ा ने मिस यूनिवर्स का 69वां खिताब अपने नाम किया है। मेज़ा ने मिस ब्राजील को शिकस्त देकर यह ताज जीता है। गत विजेता जोजिबिनी तुंज़ी ने मेज़ा के सिर पर मिस यूनिवर्स का ताज सजाया। मेज़ा के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री है। तुंज़ी एक जनसंपर्क पेशेवर हैं। दक्षिण अफ्रीकी की रहने वाली तुंज़ी मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने वाली पहली अश्वेत महिला हैं और उनके पास यह ताज दिसंबर 2019 से था, क्योंकि पिछले साल महामारी के कारण इस प्रतियोगिता को रद्द कर दिया गया था। इस समारोह की मेज़बानी ‘एक्सेस हॉलीवुड्स’ की मारियो लोपेज और अभिनेत्री, मॉडल तथा 2012 में मिस यूनिवर्स रह चुकी ओलिवियो कुल्पो ने की है। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण अमेरिका के फ्लोरिडा में हॉलीवुड के सेमिनोल हार्ड रॉक होटल एवं कैसिनो हॉलीवुड से किया गया। समारोह से पहले ‘मिस यूनिवर्स ऑर्गनाइजेशन’ की अध्यक्ष पाउला एम शुगार्ट ने कहा कि उन्होंने इस प्रतियोगिता को सुरक्षित बनाने के लिए महीनों तक योजनाएं बनाई हैं और इस समारोह में वही दिशा-निर्देशों का अनुसरण किया गया है जो मेमफिस में नवंबर 2020 में मिस यूएसए के लिए आयोजित कार्यक्रम में लागू किए गए थे।
टेलीविजन पत्रकार अंजन बंदोपाध्याय का निधन
कोलकाता : वरिष्ठ पत्रकार एवं लोकप्रिय टीवी प्रस्तोता अंजन बंद्योपाध्याय का रविवार रात को कोलकाता के एक निजी अस्पाल में निधन हो गया। वह करीब एक महीने पहले कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गए थे। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। बंदोपाध्याय 56 साल के थे और वह बांग्ला समाचार चैनल जी-24 घंटा के संपादक थे। अधिकारी ने बताया कि बंदोपाध्याय का निधन रात करीब नौ बजकर 25 मिनट पर हुआ। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंदोपाध्याय के निधन पर शोक व्यक्त किया है। अंजन बंदोपाध्याय पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय के भाई थे।
अनोखा है धनंजय चक्रवर्ती का ‘सबुज रथ’
कोलकाता : ऊपर हरी घास से भरा एक छोटा-सा लॉन है. पीछे की तरफ 6 गमलों में आकर्षक पौधे व सामने की तरफ सजावटी पौधों के भरे दो गमले रखे हुए हैं। 42 वर्षीय धनंजय चक्रवर्ती इस छोटे से बाग के बागवान हैं. बड़े जतन से वह रोज इन पौधों व लॉन में पानी डालते हैं और फिर इसे लेकर सड़क पर उतरते हैं.
यह छोटा-सा बाग उनकी पीली टैक्सी में गुलजार है जिसे धनंजय चक्रवर्ती टैक्सी नहीं ‘सबुज रथ’ यानी हरा रथ कहते हैं। धनंजय ने टैक्सी को ही बाग बना दिया है, ताकि अपने स्तर पर वह प्रदूषण को कुछ कम कर सकें। दक्षिण कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के टालीगंज के करुणामयी निवासी धनंजय चक्रवर्ती कहते हैं, ‘बचपन से ही पेड़-पौधों से मुझे बेइंतहां लगाव था. बच्चे खिलौनों से खेलना पसंद करते हैं, लेकिन मुझे पौधों से खेलना पसंद था।’
ठिगने कदकाठी के धनंजय ने महज आठवीं तक ही पढ़ाई की है। वह शुरुआती दिनों में एक फैक्टरी में काम करते थे लेकिन फैकटरी में लॉक आउट होने के बाद बेकार हो गये। इसी बीच एक टैक्सी मालिक से टैक्सी मिल गयी।12-13 साल से टैक्सी चला रहे चक्रवर्ती बताते हैं-
‘मुझे हमेशा यह लगता रहा कि पेड़-पौधे भी कुछ बोलते हैं, लेकिन हम समझ नहीं पाते। मैं देखता था कि शहर में पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं और इससे मैं बहुत परेशान रहा करता था। मैं चाहता था कि लोगों को हरियाली का संदेश दूं, लेकिन मुझे कोई माध्यम नहीं दिख रहा था।’
जब टैक्सी मिली, तो उन्हें हरियाली का संदेश देने की एक वजह भी मिल गयी। इसकी कहानी भी रोचक है। हुआ यों कि एक दिन टैक्सी में एक यात्री चढ़ा, जिसके पास शराब की बोतल थी। इस बोतल से ही टैक्सी को सबुज रथ में तब्दील कर देने का खयाल उनके जेहन में आया। वह कहते हैं, ‘तीन-चार साल पहले का वाकया है। यह रात को मैंने अपनी टैक्सी में एक पैसेंजर को चढ़ाया। वह शराब के नशे में था। उसे उसके गंतव्य पर उतार कर मैंने टैक्सी गैरेज में लगा दी। सुबह जब मैं टैक्सी लेकर निकला तो देखा कि पीछे की सीट के नीचे शराब की एक खाली बोतल रखी हुई थी। बोतल की बनावट आकर्षक थी। मैं उस बोतल को फेंकना नहीं चाहता था, इसलिए सोचने लगा कि इसका वैकल्पिक उपयोग क्या हो सकता है। उसी वक्त मुझे खयाल आया कि क्यों न इसमें कोई पौधा लगा कर टैक्सी में रख दिया जाए।’
वह आगे बताते हैं, ‘मैंने बोतल को साफ किया और उसमें मनी प्लांट लगा कर उसे टैक्सी की पिछली सीट के पीछे की खाली जगह में रख दिया। यह देख कर मेरे कुछ दोस्तों ने कहा कि टैक्सी में पौधा जिंदा नहीं रहेगा लेकिन मैं यह मानने को तैयार नहीं था, सो पौधे की देखभाल करने लगा। कुछ ही दिनों में मनी प्लांट में नयी कोंपले फूंट आयीं और मैं रोमांचित हो गया।’
काफी दिनों तक टैक्सी में ही मनी प्लांट पलता रहा. एक दिन चक्रवर्ती के दोस्तों ने तंज कसा, जिसके बाद ही टैक्सी को एक चलते-फिरते बाग में तब्दील कर दिया गया. धनंजय चक्रवर्ती ने कहा, ‘मनी प्लांट को देख कर मेरे कुछ दोस्तों ने मुझ पर तंज कसा कि अब मुझे अपने सिर पर ही पौधा लगा लेना चाहिए। यह सुन कर मुझे खयाल आया कि अपने सिर पर तो नहीं, लेकिन टैक्सी की छत पर घास लगायी जा सकती है. लेकिन, इसमें दिक्कत थी कि टैक्सी की छत में ढलाना थी। मैंने टैक्सी की छत में तब्दीली कर लॉन लगाने की इजाजत टैक्सी मालिक से ले ली और एक पुरानी टैक्सी की छत खरीद ली। उक्त छत को उल्टी कर अपनी टैक्सी की छत में लगवा दिया व उसकी चारों तरफ लोहे का पत्तर लगवा दिया। फिर उसमें घास लगा दी. इस तरह टैक्सी की छत पर लॉन सज गयी। इसके बाद टैक्सी की पिछली सीट के पीछे की खाली जगह में छह पौधे और सामने की तरफ दो पौधे लगाये।’
टैक्सी के पौधों की देखभाल वह खुद करते हैं। लॉन में फिल्टर लगा हुआ जिससे उसमें पानी डालने पर पानी साफ होकर बाहर निकल जाता है। टैक्सी की चारों तरफ हरियाली बचाने से संबंधित नारे लिखे हुए हैं। टैक्सी 10 से 12 घंटे महानगर कोलकाता की सड़कों पर घूम-घूम कर हरियाली बचाने का संदेश रही है।
टैक्सी में लॉन और पौधे लगाने से एक फायदा यह हुआ है कि उसमें सफर करनेवाले लोगों को चिलचिलाती धूप में भी काफी आराम मिलता है। चक्रवर्ती की मानें तो टैक्सी में बाहर की तुलना में तापमान कम रहता है। गर्मी में ज्यादातर टैक्सियां पेड़ की छांव में आराम फरमाती हैं लेकिन धनंजय चक्रवर्ती का सबुज रथ शहर के चक्कर लगाता है क्योंकि लॉन व पौधों के कारण टैक्सी के भीतर का तापमान बाहर की तुलना में कम होता है। कोलकाता के पर्यावरणविद सौमेंद्र मोहन घोष कहते हैं, टैक्सी की छत पर लॉन व भीतर पौधे होने के कारण बाहर की तुलना में टैक्सी के भीतर तापमान कम से कम 5 डिग्री सेल्सियस कम रहता है।
वैसे, टैक्सी में लगे लॉन व पौधों की देखभाल के लिए धनंजय चक्रवर्ती को अतिरिक्त रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन पैसेंजरों से वह अतिरिक्त भाड़ा नहीं लेते। वह कहते हैं, ‘टैक्सी में सवार होनेवाले यात्री टैक्सी में फूल-पौधे देख कर खुश हो जाते हैं। टैक्सी में यात्री सवार होते हैं, तो उन्हें महूसस होता है कि वे टैक्सी में नहीं किसी बाग में बैठे हुए हैं। टैक्सी के भीतर की सजावट याभियों को खूब भाती है और उतरते वक्त वे अतिरिक्त रुपये भी दे देते हैं।
ग्रीन टैक्सी की लोग जब तारीफ करते हैं, तो धनंजय उन लोगों से भी अपने घरों में पौधे लगाने की अपील करते हैं, ताकि पर्यावरण प्रदूषण से बचा रहे।
चक्रवर्ती ने कहा, ‘कई लोग कहते हैं, कि उनके पास जगह नहीं है पौधे लगाने के लिए, तो मैं अपनी टैक्सी का हवाला देता हूं। मैं उन्हें कहता हूं कि अगर मैं टैक्सी में पौधे लगा सकता हूं, तो कहीं भी पौधे लगाये जा सकते हैं, बस इच्छाशक्ति की जरूरत है।’
उनकी टैक्सी की कोलकाता में खूब चर्चा होती है। जिन सड़कों से टैक्सी गुजरती है, लोग तसवीरें खींचते हैं। महानगर के इक्का-दुक्का ऑटोरिक्शा में भी पेड़-पौधे लगाये गये हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि टैक्सी को चलते-फिरते बाग में तब्दील कर देने का एक फायदा यह भी हुआ है कि उन्हें 10-15 फिक्स्ड पैसेंजर मिल गये हैं।
धनंजय चक्रवर्ती अपनी अंबेसडर को भी सबुज रथ में बदलने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरी भावी योजना है कि मैं अपने अंबेसडर को भी चलता-फिरता बाग बनाऊं और अंबेसडर लेकर देशभर में घूम-घूम कर हरियाली बचाने के लिए लोगों को जागरूक करूं।’
नहीं रहे कोरोना योद्धा डॉ. के. के. अग्रवाल
नयी दिल्ली: पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( आईएमए) के पूर्व अध्यक्ष डॉ के.के. अग्रवाल का कोरोना संक्रमण की वजह से निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली. कोरोना से लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार वो जिंदगी की जंग हार गए. डॉक्टर अग्रवाल 62 साल के थे जो पिछले कई दिनों से भर्ती थे। डॉक्टर अग्रवाल पिछले सालभर से, वह कोविड महामारी पर वीडियो पोस्ट कर रहे थे और बीमारी के विभिन्न पहलुओं और इसके प्रबंधन के बारे में बात कर रहे थे। उनके ट्विटर प्रोफाइल पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा गया है कि उन्होंने सोमवार को रात 11.30 बजे इस महामारी के कारण दम तोड़ दिया। उन्हें एक सप्ताह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था.




