Wednesday, April 8, 2026
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भवानीपुर कॉलेज में दो दिवसीय चित्रकला कार्यशाला

कोलकाता : भवानीपुर कॉलेज में वाटर कलर के द्वारा चित्रकला एवं रंगों के संयोजन को वेपर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया , सुप्रसिद्ध कलाकार और वाटर कलर की कला में निपुण डॉ अमेय पारेख के लिए लगभग 80 विद्यार्थियों को ऑनलाइन स्केच और उसमें रंग भरना सिखाया। किसी ने खूब कहा है कि वाटर कलर एक ऐसी भौतिकी जीवन की धारा है जो स्वयं के चरित्र का दर्पण है उसे अप्रत्याशित और रंगीन होने दें। पैंटिग एक कला है जो कलाकार की भावनाओं का चित्रण करती है वास्तविकता से बचने और उसमें गोते लगाने के माध्यम से संदेश को चित्रित करने का एक तरीका है। यदि मैं नहीं तो वह है जो लोगों की कल्पना का अंकन करता है जो उन्होंने कभी नहीं सोचा। रंगों के स्केच और पैंटिग जैसे रंगों का जादू है द्रव्य रंगों से अद्भुत कृति बन जाती है। डॉ. अमेय पारेख के निर्देशन में विद्यार्थियों ने जलीय रंगों के द्वारा ब्रश को चलाने के विभिन्न तरीकों को सीखा। धैर्य और संयम से भरे विद्यार्थियों ने पैंटिग को जूम पर बनाना सीखा जो एक अलग अनुभव है।
प्रकृति में पहाड़ी क्षेत्र और समतल धरती का सामंजस्यपूर्ण बंटवारा करने में वाटर कलर के रंग बहुत ही माहिर होते हैं बशर्ते अच्छी तरह से किया जाय अन्यथा पैंटिग के बिगड़ने का डर रहता है। यह बहुत ही बारीकी का काम है जिसे डॉ पारेख ने बहुत ही गंभीरता और सरलता से समझाया। दो दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में विद्यार्थियों ने पैंटिग भी बनाई।
वाटर कलर वर्कशॉप का उद्घाटन किया भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने किया जिनके प्रयास से इस कार्यशाला को आयोजित किया। सार्थक बाधवा, जलक शाह, गौरव किल्ला का सक्रिय सहयोग रहा। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो. दिव्या ऊडीसी, डॉ. वसुंधरा मिश्र की उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

कोविड -19 के खिलाफ टीकाकरण को गति प्रदान करेगी नयी नीति: एसोचैम

कोलकाता : एसोचेम का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित कोविड वैक्सीन टीकाकरण की लागत का 75 प्रतिशत केंद्र के साथ टीके की खरीद का निर्णय कारगर साबित होगा। यह भारत के टीकाकरण कार्यक्रम को गति प्रदान करेगा। यह राज्यों को लड़ने के लिए अधिक संसाधनों के साथ छोड़ देगा। एसोचेम का मानना है कि “प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन ने भारत के टीकाकरण कार्यक्रम को एक स्पष्ट दिशा प्रदान की है, जिसका उद्देश्य सभी वयस्कों को मुफ्त टीकाकरण सुविधा प्रदान करना है, जबकि निजी क्षेत्र के अस्पतालों के माध्यम से भुगतान करने के इच्छुक लोगों के लिए एक खिड़की प्रदान करना है। संशोधित नीति सभी प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करेगी। एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि प्रधानमंत्री अन्न कल्याण योजना के विस्तार, 80 करोड़ लोगों को दिवाली तक मुफ्त राशन उपलब्ध कराने से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में खाद्य सुरक्षा की भावना पैदा होगी। “निर्णय से प्रवासी कामगारों को शहरों में वापस लौटने में भी मदद मिलनी चाहिए क्योंकि कोरोनोवायरस के मामले में काफी कमी आई है और कई राज्यों में अनलॉक करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है”। सूद ने कहा कि “व्यवसायों को फिर से शुरू करने में सक्षम बनाने के लिए विंडो कॉरपोरेट्स को अपने कार्य बल का टीकाकरण कराने में मदद करने वाली साबित हुई है”। उन्होंने कहा, एसोचैम यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार के साथ काम करना जारी रखेगा कि लोगों की पूरी सुरक्षा के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को जल्द से जल्द फिर से शुरू किया जाए।

बीएचएस में शिक्षकों के लिए ऑनलाइन अंताक्षरी

कोलकाता : महामारी की बोरियत के बीच आशा की कुछ नई धुन लाने के लिए, बिड़ला हाई स्कूल ने 4 जून, 2021 की शाम को शिक्षकों के लिए एक ऑनलाइन अंताक्षरी ‘ए म्यूजिकल पाठशाला’ का आयोजन किया था। अंताक्षरी की मेजबानी पूर्व छात्र, मि. रजत बैद ने की। वे शहर में अंताक्षरी के क्षेत्र में पहचान बना चुके हैं।
इस ऑनलाइन कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए शिक्षक रोमांचित और उत्साहित थे। उन्होंने श्री बैद द्वारा आयोजित हर दौर को गाया और आनंद लिया। हालांकि सभी आठ टीमों ने एक मजबूत मधुर लड़ाई लड़ी थी, पहला स्थान टीम ‘ई-नोट’ ने हासिल किया था जिसमें रोहन सेनगुप्ता, रिया खेतान और स्पंदन बनर्जी शामिल थे।
इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और कार्यक्रम तब जीवंत हो गया जब मेजर जनरल वीएन चतुर्वेदी, कर्नल बेरा, मुक्ता नैन, फरीदा सिंह और लवलीन सैगल द्वारा कुछ पंक्तियों को गाया गया।

बीएचएस के पूर्व छात्रों ने की यास पीड़ितों की सहायता

कोलकाता : बिड़ला हाई स्कूल के पूर्व छात्र 09 जून 2021 को यास चक्रवात के कारण प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए सुंदरबन गए थे। उपाध्यक्ष सचिन सराफ के नेतृत्व में टीम नीरज चौधरी, शैलेश गनेरीवाला और अमित चिरावाला के साथ गयी थी। गोसाबा-सुंदरबन में स्थित धुल्की और सोनागांव में राशन, दवाइयां, पानी, शुद्धिकरण द्रव, कपड़े और अन्य आवश्यक सामान। इन 2 गांवों के 250-300 परिवारों को सहायता प्रदान की गयी। यह विजयनगर हाई स्कूल के प्राचार्य श्री सुकुमार पैरा और गोसाबा के एक स्थानीय निवासी की मदद के बिना संभव नहीं होता। पूर्व छात्रों ने 2 पानी पंप भी प्रदान किए हैं जिनका उपयोग ताजे पानी के तालाबों से खारा निकालने के लिए किया जाना है
पूर्व छात्र उन सभी के लिए आभारी हैं जिन्होंने इस नेक काम में योगदान दिया है।

पत्तियों से पर्यावरण के अनुकूल कपड़े बनाती हैं अरुंधति

अरुंधति कुमार का स्टार्ट अप ‘बीज’ टिकाऊ वस्तुओं यानी सस्टेनेबल मटेरियल को बढ़ावा देता है। वे अनानास, कैक्टस, कोर जैसे मटेरियल से फैशनेबल ऐसेसरीज बनाती हैं। अरुंधति की मां बंगाली हैं। वे एक भरतनाट्यम डांसर हैं जो हैंडलूम साड़ियां पहनना पसंद करती हैं। इसलिए अरुंधति ने हैंडलूम मटेरियल अपने घर में करीब से देखे। उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज से अपनी पढ़ाई की। एक बार यूरोप में छुटि्टयां बिताने के बाद उन्हें जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाले नुकसान का अहसास हुआ। तब उन्होंने अपने स्टार्ट अप के बारे में सोचा और वहां से आकर इसकी शुरुआत की।
अरुंधति बैग, वॉलेट और क्लच जैसी एसेसरीज बनाने के लिए रिसाइकिल और बायोडिग्रेडबल वस्तुओं का उपयोग करती हैं। सबसे पहले उन्होंने उदयपुर के ताज लेक पैलेस और जयपुर के रामबाग पैलेस में नौकरी की। यहां से उन्हें लग्जीरियस लाइफ स्टाइल का पता चला। वे कहती हैं – ”राजस्थान ने मुझे हमेशा प्रभावित किया है। यहां के संगीत, नृत्य, रंग और फैब्रिक ने मेरे जीवन पर अमिट छाप छोड़ी है”। अरुंधति ने अपना 40 वां बर्थडे मनाने के बाद एक बार फिर यूरोप ट्रिप की। यहाँ जलवायु परिवर्तन के नुकसान के बारे में उन्होंने जाना। उसके बाद ईको फ्रेंडली ऐसेसरीज को बढ़ावा देने के लिए अपने स्टार्ट अप के अंतर्गत इस उद्यमी ने मैक्सिको की कंपनी में विकसित किए गए मटेरियल नोपल कैक्टस का उपयोग किया। ये बहुत मुलायम लेदर होता है जिसका उपयोग हाई एंड लग्जरी प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है।

परिवार की सुरक्षा के लिए उनसे दूर हैं पहली महिला एंबुलेंस ड्राइवर सलीमा

पिछले एक साल से सलीना बेगम अपनी एंबुलेंस के जरिये कोविड-19 मरीजों की मदद कर रही हैं। हाल ही में उन्हें अपने इस काम के लिए 50,000 की राशि देकर सम्मानित किया गया। अपने काम के शुरुआत में वे सिर्फ गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाती थीं। लेकिन पिछले साल महामारी के गंभीर रूप लेने पर उन्होंने कोरोना पेशेंट को अस्पताल तक ले जाने की जिम्मेदारी भी संभाली। पिछले हफ्ते उन्हें राजगंज के एमएलए कृष्णा कल्याणी की ओर से यह राशि मिली। ये सम्मान उन्हें दूसरी बार मिला। इससे पहले पिछले साल भी उन्हें कोरोना वॉरियर के तौर पर सम्मानित किया जा चुका है।
सलीना ने अपनी मेहनत और साहस से कोरोना काल में इंसानियत को जिंदा रखने का काम बखूबी किया है। ऐसे माहौल में जब लोग कोरोना मरीजों को हाथ लगाना भी पसंद नहीं कर रहे, वे उन्हें घर से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाती हैं। सलीना ने बांग्ला भाषा में एमए किया है। उसने 2016 में स्टेट गवर्नमेंट के सेल्फ हेल्प प्रोग्राम से ट्रेनिंग लेकर एंबुलेंस ड्राइविंग की शुरुआत की। इस काम से वे हर महीने 7000 से 8000 रुपए महीना कमाती हैं। इन्हीं पैसों से उनका गुजारा होता है। पिछले एक साल के दौरान अपने परिवार को कोरोना इंफेक्शन से बचाने के लिए वे हेमताबाद के हेल्थ सेंटर में अपने परिवार से दूर एक छोटे से कमरे में अकेली रह रही हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

मिसाल बनीं रीढ़ की हड्‌डी में एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित नीना नीजर

नीना रीढ़ की हड्‌डी में एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं। वे इसकी वजह से चल नहीं पाती। लेकिन तमाम मुश्किलों के बाद भी जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहती हैं। निबंध, पेंटिंग और वाद-विवाद प्रतियोगिता में अब तक वे कई पुरस्कार जीत चुकी हैं। नीना का जन्म दुबई के एक बिजनेसमेन अब्दुल करीम नीजर के घर हुआ। जब वे एक साल की थीं तब से ये समझ में आया कि उनकी हडि्डयां कमजोर हैं जिसकी वजह से वह चल नहीं सकती। डॉक्टरों ने बताया कि उसे विटामिन डी की कमी है। उसके बाद उसकी कई सर्जरी हुईं। लेकिन जब कोई फायदा नहीं हुआ तो वह भारत आ गईं और चेन्नई में उनका इलाज हुआ।
उसके बाद लंदन और अमेरिका में भी सर्जरी हुई लेकिन कोई फायदा न होने पर वह फिर से दुबई चली गई। वहां उसने एम फिल की डिग्री ली। वह दिव्यांग बच्चों को मोटिवेट करने में अपना वक्त बिताने लगी और उसने इन बच्चों की मोटिवेशनल क्लास शुरू की। उसके बाद उसने एक अमेरिकन लड़के से शादी की और वह दो बच्चों की मां भी बनी। लेकिन जब बच्चों को भी नीना की तरह यही बीमारी हुई तो वे अपने बच्चों को अमेरिका के जेसंस फाउंडेशन ले गई जहां उनका इलाज हुआ। इन्हीं हालातों के बीच नीना दुबई से अमेरिका शिफ्ट हुईं और यूएस यूनिवर्सिटी से एजुकेशन लीडरशिप में पीएचडी की। नीना का इलाज और संघर्ष दोनों अब भी जारी है।

(साभार – दैनिक भास्कर)

मंदिर के फूलों की रिसाइक्लिंग कर पूजन सामग्री बना रहा है यह स्टार्टअप

दिल्ली स्थित सोशल इंटरप्राइज निर्मलया को सुरभि, कॉमर्स ग्रेजुएट राजीव बंसल के साथ मिलकर संभालती हैं। वह दिल्ली में 120 से अधिक मंदिरों के साथ काम करती हैं और फूलों के कचरे से अगरबत्ती, शंकु, धूप अगरबत्ती और हवन कप बनाती हैं। इसकी शुरुआत के बारे में बताते हुए राजीव कहते हैं कि अप्रैल 2019 में उन्होंने महाराष्ट्र के शिर्डी मंदिर में यह देखा कि किस तरह अर्पित किए फूलों को रिसाइकिल किया जाता है। इस पर रिसर्च करने के बाद उन्होंने सुरभि के साथ मिलकर निर्मलया की शुरुआत की।
इन दोनों ने दिल्ली के धाम कॉम्प्लेक्स में अपनी फैक्ट्री की स्थापना की। फैक्ट्री के शुरुआती दौर में यहां 40 महिलाएं काम करती थीं। लेकिन महामारी के चलते मंदिर बंद होने और प्रसाद में कमी आने की वजह से फिलहाल यहां 15 महिलाएं काम कर रही हैं। इनके द्वारा तैयार किए गए प्रोडक्ट्स की कीमत 150 से 1500 है जो ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं। इस ब्रांड के प्रोडक्ट्स गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता के एयरपोर्ट पर रिटेल स्टोर्स में भी मिल जाते हैं।  70 लाख से शुरू किए गए इस स्टार्ट अप के उद्यमी सुरभि और राजीव को आने वाले कुछ महीनों में अपने काम के बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

(साभार – दैनिक भास्कर)