Friday, April 10, 2026
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राखी‌ ‌सिर्फ‌ ‌भाई-‌ ‌बहन‌ ‌का‌ ‌त्योहार‌ ‌ही‌ ‌नहीं‌

प्रो. गीता दूबे

 

जब झाँसी की रानी ने भेजी थी बांदा के नवाब को राखी

भाई-बहनों के बीच प्रेम और सौहार्द का प्रतीक रक्षाबंधन बुंदेलखंड में सांप्रदायिक सौहार्द का भी पर्व है। इसकी बुनियाद 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने बांदा के तत्कालीन नवाब अली बहादुर सानी को राखी भेजकर डाली थी। अपनी मुंह बोली बहन को राखी के उपहार में नवाब 10 हजार फौज लेकर खुद फिरंगी सेना से मोर्चा लेने झांसी पहुंच गए थे। बुंदेलखंड में आज भी रक्षाबंधन सौहार्द का संदेश देता है।

तमाम मुस्लिम बहनें भी अपने हिंदू भाइयों को राखी बांधतीं हैं। मुंह बोले हिंदू भाई भी उनकी रक्षा के वचन समेत कई उपहार देते हैं। सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द की नींव 1857 की क्रांति में पड़ गई थी। अंग्रेजी सेना ने झांसी के किले को चारों तरफ से घेर लिया था। रानी लक्ष्मीबाई किले में घिर गईं थीं। रानी ने अपने डाकिए (पत्र वाहक) दुलारे लाल के हाथ बांदा नवाब अली बहादुर को राखी भेजी और उसके साथ एक पत्र भी। यह पत्र चैत्र सुदी संवत सत्र 1914 (ईसवी 1857) को भेजा। चिट्ठी शुद्ध बुंदेली भाषा में लिखी थी। जिसका सार यह था कि अंग्रेजों से लड़ना बहुत जरूरी है। पत्र पाते ही शीघ्र मदद को आएं। इतिहासकार बताते हैं कि रानी झांसी की राखी और हस्तलिखित पत्र मिलते ही नवाब अली बहादुर अपने 10 हजार सैनिकों की फौज लेकर झांसी कूच कर गए।

रानी द्वारा नवाब को भेजा गया हस्तलिखित पत्र
हमारी राय है कि विदेशियों का शासन भारत पर न भव चाहिजे और हमको अपुन कौ बड़ौ भरोसौ है और हम फौज की तैयारी कर रहे हैं। सो अंग्रेजन लड़वौ बहुत जरूरी है। पाती समाचार देवै में आवे। यह पत्र कलम और स्याही से लिखा प्रतीत होता है। इसमें न तो कोई विराम है और न शब्दों में कोई स्पेस (दूरी) है।

 

 

कोरोना -19 को मात देकर विद्यार्थियों ने किया स्वाधीनता सेनानियों को नमन

 परिवार मिलन ने आभासी पटल पर आयोजित की 40वीं हिन्दी देशभक्ति गीत प्रतियोगिता
कोलकाता : कोविड -19 से उत्पन्न चुनौतियों के बीच भी देशभक्ति का रंग और भी निखर आया। परिवार मिलन द्वारा आयोजित 40वीं अन्तर्विद्यालय हिन्दी देश -भक्ति गीत प्रतियोगिता में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। राधाकिशन झुनझुनवाला चैरिटी ट्रस्ट के सौजन्य से आयोजित इस प्रतियोगिता में इस वर्ष 11 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की प्रतिभागिता रही। युवा प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न स्वतन्त्रता सेनानियों की गाथा सुरों में ढालकर सभी का मन मोह लिया। आभासी पटल पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व शिक्षामंत्री डॉ. रवीन्द्र शुक्ल ने एक तरफ जहाँ सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्द्धन किया इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अंग्रेज इतिहासकार भारत कभी नहीं आये थे और पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाने वाला इतिहास हमारा वास्तविक इतिहास नहीं है। अब इस इतिहास को बदलने की जरूरत है। परिवार मिलन द्वारा आयोजित इस हिन्दी देशभक्ति गीत प्रतियोगिता को उन्होंने नयी पीढ़ी में राष्ट्रीय चेतना भरने वाला अभिनव प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली के साथ इस तरह के आयोजन वर्तमान पीढ़ी को देशभक्ति का संस्कार दे कर उसे देश का जिम्मेदार नागरिक बना सकते हैं। प्रतियोगिता में इस बार प्रत्येक शिक्षण संस्थान को विषय स्वरूप स्वाधीनता सेनानियों के नाम दिये गये थे और इन पर भी प्रस्तुति करनी थी। प्रतिभागियों ने गीत के साथ सम्बन्धित स्वाधीनता सेनानी के जीवन की जानकारी स्लाइड्स और वीडियो के जरिए दी।

प्रतियोगिता आरम्भ होने के बाद संचालन और अगले प्रतिभागी का परिचय भी विद्यार्थियों ने ही दिया। प्रतियोगिता में बीडीएम इंटरनेशनल स्कूल (रामप्रसाद बिस्मिल) को प्रथम, लक्ष्मीपत सिंहानिया अकादमी (रानी लक्ष्मीबाई) को द्वितीय और हरियाणा विद्या मंदिर (शिवाजी) को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त श्री शिक्षायतन को वीर सावरकर द्वारा रचित मराठी गीत के लिए विशेष पुरस्कार दिया गया। अन्य प्रतिभागी शिक्षण संस्थानों में सैफी हॉल (पृथ्वीराज चौहान), मारवाड़ी बालिका विद्यालय (रानी दुर्गावती), द बी एस एस स्कूल (महाराणा प्रताप), अग्रसेन बालिका शिक्षा सदन (झाला मन्ना), एम. सी. केजरीवाल विद्यापीठ (कुँवर सिंह), राजस्थान विद्या मंदिर (मंगल पांडे) तथा बिड़ला हाई स्कूल (बिरसा मुंडा) शामिल थे और सभी ने सराहनीय प्रदर्शन किया। सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहनस्वरूप हर साल की तरह प्रतिभागिता स्मृति चिह्न, प्रमाणपत्र दिया गया। इस वर्ष स्वतन्त्रता के अमृत महोत्सव वर्ष प्रवेश पर सभी प्रतिभागियों को रजत स्मृति चिह्न भी दिया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक का दायित्व डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी, वरिष्ठ शिक्षक बलवन्त सिंह और संगीत शिक्षिका कुमकुम भट्टाचार्य ने सम्भाला। स्वागत भाषण परिवार मिलन की अध्यक्ष दुर्गा व्यास ने दिया और कार्यक्रम का संचालन भारती अग्रवाल ने किया। निर्णय की घोषणा संस्था के प्रधान सचिव संदीप अग्रवाल ने की। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के सहसचिव अजीत बच्छावत ने किया। कार्यक्रम में सभी माध्यमों से देश के विभिन्न प्रांतों से 200 से अधिक सुधि दर्शकों ने शामिल होकर छात्र – छात्राओं का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम के प्रसारण की तकनीकी व्यवस्था को सुचारु रखने का दायित्व सिद्धांत चांदगोठिया तथा हर्ष टांटिया ने सम्भाला। कार्यक्रम को सफल बनाने में अरुण चूड़ीवाल, राजेन्द्र कानूनगो अमित मूंधड़ा, विनीता मणोत तथा अंजू गुप्ता ने विशेष योगदान दिया।

ला मार्टिनयर फॉर ब्वायज में गूँजी देशभक्ति की धुन

हिन्दी ज्योत्सना क्लब द्वारा आयोजित इंटर स्कूल देशभक्ति मीट में शामिल हुए 26 स्कूल

कोलकाता : ला मार्टिनियर फ़ॉर ब्वायज के हिन्दी ज्योत्सना क्लब द्वारा आयोजित इंटर स्कूल देशभक्ति मीट, 2021 का आयोजन हाल ही में यू ट्यूब पर किया गया। यह हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को मनाने, राष्ट्रवादी गौरव को आत्मसात करने और हिंदी भाषा के उपयोग को लोकप्रिय बनाने के लिए हर साल करवाया जाता है। अन्तरविद्यालय मिडिल स्कूल हिन्दी वाद – विवाद प्रतियोगिता का आयोजन गत 12 अगस्त को गया था। कुल 26 स्कूलों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। इस वर्ष शहर के बाहर और यहाँ तक कि राज्य के बाहर के कई स्कूलों जैसे फ्रैंक एंथोनी पब्लिक स्कूल, नयी दिल्ली, सोफिया गर्ल्स स्कूल, मेरठ और सम्मानित वेल्हम गर्ल्स स्कूल, देहरादून शामिल थे, और कई अन्य स्कूल जैसे- राजस्थान विद्या मंदिर, लोरेटो स्कूल, मॉडर्न हाई स्कूल, लोरेटो कॉन्वेंट एंटाली, श्री शिक्षायतन, डॉनबॉस्को स्कूल, बंडेल, जूलियन डे स्कूल हावड़ा, सैफी हाई स्कूल, बी डी एम इंटरनेशनल स्कूल, सनशाइन स्कूल, वीरपाड़ा,  बिड़ला हाई स्कूल, ला मार्टिनियर फॉर गर्ल्स, सिल्वर प्वाइंट स्कूल, सैफी हॉल, सेंट जेम्स स्कूल, एम पी बिड़ला फ़ाउंडेशन हायर सेकंडेरी स्कूल, लोरेटो स्कूल धर्मतल्ला, दिल्ली पब्लिक स्कूल रुबी पार्क , वेलेंड गोल्डस्मिथ स्कूल पाटुली, द कलकत्ता एम्मनुएल स्कूल पश्चिम बंगाल, और आर्मी पब्लिक स्कूल बालीगंज।
वाद विवाद प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित करवायी गयी। पहले चरण के लिए स्कूलों को ग्रुप ए और ग्रुप बी में बांटा गया था। वर्गीकरण 30 जुलाई को सभी को एक साथ लाकर ऑनलाइन बैठक में किया गया। अंतिम चरण के लिए 12 स्कूल चुने गये। प्रतिभागियों ने प्रस्ताव पर बहस की “एक सभ्य समाज में मृत्युदंड का स्थान नहीं है।” हार्दिक अग्रवाल (डीपीएस रूबी पार्क से) को मोशन के लिए सर्वश्रेष्ठ वक्ता और आरव तिवारी (डॉन बॉस्को स्कूल, बंडेल से) को मोशन अवॉर्ड के लिए उपविजेता वक्ता का खिताब मिला ।
दूसरी ओर, लड़कियों के लिए ला मार्टिनियर से दिव्यांशा जैन ने प्रस्ताव के खिलाफ सर्वश्रेष्ठ वक्ता और एम पी बिड़ला फाउंडेशन हायर सेकेंडरी स्कूल के राजदीप घोष ने प्रस्ताव के खिलाफ उपविजेता का पुरस्कार जीता । अंत में डीपीएस रूबी पार्क विजेता के रूप में उभरा और ला मार्टिनियर फ़ॉर गर्ल्स को उपविजेता चुना गया ।
निर्णायकों में कई वरिष्ठ दिग्गज शामिल थे। ग्रुप ए का निर्णय हर्षित चोखानी, विनय कुमार ओझा और डॉक्टर उमेश कुमार सिंह ने किया। ग्रुप बी के लिए हमारे पास प्रोफ़ेसर कम्मू खटिक, डॉ. निरुपमा पांडेय और श्री अशोक शर्मा थे ।
फाइनल राउंड में अंजू के पॉल, विशाल सिंह, डॉक्टर विवेकमणि त्रिपाठी, डॉक्टर सत्यप्रकाश तिवारी और डॉक्टर मीनू भटनागर की पांच निर्णायक शामिल थे। डॉक्टर विवेकमणि त्रिपाठी गुआंगदोंग यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज में इंडो-चाइनीज स्टडीज के प्रोफेसर हैं।
तीनों चरणों में हिन्दी ज्योत्सना क्लब के संस्थापक बलवंत सिंह,  डोयल रे और चंदन कुमार ने संचालन किया जबकि समय नियामक का दायित्व शशांक सिंह, सैम आनंद, शिवंक जैन और ऋषित सोनी ने सम्भाला। ला मार्टिनियर फ़ॉर बॉयज के वरिष्ठ शिक्षकों और अन्य हाउस मास्टर्स ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं ।
मिडिल स्कूल के प्रमुख सिडनी मेनेज़ेस ने छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें “स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने” को कहा और “हमारे दैनिक जीवन में हिंदी के महत्व” के बारे में बताया। ला मार्टिनियर कलकत्ता के सचिव सुप्रियो धर ने कहा, “हमें ऐसे आयोजनों की और अधिक जरूरत है ताकि छात्रों को स्वतंत्र रूप से खुद को अभिव्यक्त करने का अवसर मिले ।”अंतिम दौर कार्यवाहक प्राचार्य पी ए जॉन स्टीफन के भाषण के साथ समाप्त हुआ जो और उन्होंने सभी प्रतिभागियों को कहा, “भाग लेना ही अपने में जीत के बराबर है।” 75 स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए 15 अगस्त, 2021 को देशभक्ति मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम का समापन कार्यवाहक प्रधानाचार्य के भाषण और बलवंत सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में 75वाँ स्वतन्त्रता दिवस समारोह

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में हाल ही में 75वाँ स्वतन्त्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। स्कूल की प्रिंसिपल कोइली दे ने इस अवसर पर ध्वजारोहण किया। इस सप्ताहव्यापी उत्सव में विभिन्न कक्षाओं की छात्राओं ने विशेष रूप से आयोजित असेम्बली में भाग लिया। नर्सरी तथा किंडरगार्टेन कक्षाओं में थीम थी ‘आई लव माई कंट्री – इंडिया’ और इसमें अकादमिक तथा कोकरिकुलर गतिविधियाँ शामिल थीं। नर्सरी की छात्राओं ने स्वतन्त्रता सेनानियों का वेश धारण किया। आर्ट एवं क्राफ्ट की कक्षा में छात्राओं ने राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ वनस्पति रंग यानी वेजीटेबल प्रिंटिंग तकनीक की सहायता से तिरंगा फूलदान व पात्र बनाये। नन्ही छात्राओं ने देशभक्ति गीत ‘नन्हा मुन्ना राही हूँ’ भी गाया। किंडरगार्टेन की छात्राओं ऑरगेमी कला का उपयोग करते हुए फूल बनाए जिसके माध्यम से तिरंगे का अर्थ समझाया गया। छात्राओं ने इन्ट्रैक्टिव व्हाइटबोर्ड पर स्वतन्त्रता दिवस कार्ड बनाया। बच्चों को लाल किले की वर्चुअल सैर कराई गयी। पहली कक्षा की छात्राओं ने कविता और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया तो दूसरी कक्षा की छात्राओं ने भारत की संस्कृति तथा आधुनिक समय में लड़कियों की आजादी पर बात की। चौथी कक्षा की असेम्बली में भारतीय स्वतन्त्रता दिवस संघर्ष की गाथा पर बात रखी और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। पाँचवीं कक्षा की छात्राओं ने विभिन्न स्वाधीनता सेनानियों पर पावर प्रेजेन्टेशन दिया। इस अवसर पर एक वीडियो भी जारी किया गया।

गोल्फ ग्रीन अरबन कॉम्प्लेक्स (फेज 1) में 75वाँ स्वतन्त्रता दिवस

कोलकाता : गोल्फ ग्रीन अरबन कॉम्प्लेक्स (फेज 1) में 75वाँ स्वतन्त्रता दिवस मनाया गया। सबसे पहले ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद आवास में रहने वाले लोगों ने इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें बुर्जुगों ने भी भाग लिया।

स्वतन्त्रता दिवस : भवानीपुर कॉलेज ने किया कस्तूरबा गाँधी को नमन

कोलकाता : पचहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अमृत महोत्सव का पालन करते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में तिरंगा फहराया गया। प्रबन्धन के सदस्यों रेणुका भट्ट , नलिनी पारीख , पंकज पारीख, जितेंद्र शाह, रजनीकांत दानी आदि के साथ कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. सुमन मुखर्जी, डीन प्रो. दिलीप शाह, टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय, (प्रातःकाल) की कोऑर्डिनेटर प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी, डॉ. समीर दत्ता, दिव्या उदेशी आदि की उपस्थिति रही। कोविड 19 के सभी प्रोटोकोल का पालन करते हुए बहुत ही कम संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।अन्य सभी कार्यक्रम ऑनलाइन यूट्यूब पर रिकाडेड प्रसारित किए गए। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी के रूप में इन-एक्ट की छात्रा ने, कस्तूरबा गाँधी को अभिनयात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की जो सराहनीय रही ।
एनसीसी 31 बंगाल बटालियन कोल बी के कैडट्स ने मार्च पास्ट करते हुए झंडे को सलामी दी और सभी ने राष्ट्रगीत गाया। विशेष बात यह रही कि प्रथम बार एनसीसी की एसडब्लू की टुकड़ी ने मार्च पास्ट किया। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि विंग कमांडर विष्णु शर्मा ने युवाओं को राष्ट्र के योगदान के लिए प्रेरित किया और आर्मी और वायु सेना का महत्व बताया। विंग कमांडर विष्णु शर्मा को कस्तूरबा गाँधी की फोटो उपहार स्वरूप प्रदान की मैनेजमेंट के वरिष्ठ सदस्य पंकज पारीख ने। ऑनलाइन माध्यम पर विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत, नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी। एनसीसी के जिन कैडेटों ने कोरोना के समय में लोगों को बेड, खून, वैक्सीन, ऑक्सीजन आदि की मदद के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्हें सम्मानित किया गया। कॉलेज में परमवीर चक्र से सम्मानित विक्रम बत्रा पर बनी फिल्म ‘शेरशाह’ भी दिखाई गई। कॉलेज के प्लेसमेंट हॉल में कोविड के नियमों का पालन करते हुए व्यवस्था की गई। अंत में सभी को नाश्ते के पैकेट वितरित किए गए। पूरे कार्यक्रम को कॉलेज की यूट्यूब पर लाइव देखा जा सकता है। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में बिखरे टोक्यो ओलम्पिक्स -2020 के रंग

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की छात्राओं को ओलम्पिक्स के अनूठे रंग देखने को मिले। सभी कक्षाओं की छात्राओं को पावर प्वाइंट प्रेजेन्टेशन और यू ट्यूब वीडियो के जरिए इन खेलों का इतिहास दिखाया गया। ओलम्पिक्स के सूत्र वाक्य यानी मोटो से लेकर उसके ध्वज का महत्व, शपथ, मशाल, मस्कट यानी शुभंकर के बारे में छात्राओं को जानकारी दी गयी। शिक्षिकाओं ने इस दिशा में विशेष योगदान किया..और नियमित तौर पर इन खेलों के बारे में छात्राओं को जानकारी दी जाती रही। नर्सरी की छात्राओं से परिचयात्मक सत्र के दौरान किसी विशेष खेल के प्रति किसी छात्रा की रुचि से भी शिक्षिकाएँ अवगत हुईं। इन छात्राओं ने इयर बड प्रिंटिंग के जरिये ओल्मपिक्स के पाँच रिंग्स यानी छल्ले बनाये। किंडरगार्ठन की छात्राओं ने अपनी कम्प्यूटर क्लास में एम एस पेंट पर ओलम्पिक्स रिंग्स को एक अनूठा रूप दिया। पदकों की गणना के जरिए उनको अधिक और कम संख्या के बारे में बताया गया। कई मूल्यपरक कहानियाँ सुनायी गयीं। गूगल अर्थ की मदद से छात्राओं ने जापान की वर्चुअल सैर भी की। पहली और दूसरी कक्षा की छात्राओं ने खेलों का महत्व समझाते हुए स्लाइड्स और पोस्टर बनाये। चौथी कक्षा की हर छात्रा ने इन खेलों में भाग लेने वाले 6 देशों को चुना, उनका ध्वज बनाया तथा विश्व के नक्शे पर इनका पता लगाया। पाँचवीं कक्षा की छात्राओं ने इन खेलों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ एकत्रित कीं और तस्वीरों के साथ अपनी कॉपियों में सजाया। पहली से पाँचवीं कक्षा की जनरल नॉलेज यानी सामान्य ज्ञान की कक्षा इन खेलों पर ही केन्द्रित रही। छात्राएँ टोक्यो ओलम्पिक्स से जुड़े समाचार और तथ्य एक दूसरे से साझा करने में व्यस्त रहीं। इस अवसर पर छात्राओं ने एक विशेष वीडियो भी बनाया।

वर्धा विश्वविद्यालय कोलकाता केंद्र में स्वतंत्रता दिवस समारोह

कोलकाता :  महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता में 75वें स्वतन्त्रता दिवस समारोह का आयोजन किया गया। आरंभ में केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ ने संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर पर फूल-माला चढ़ाई। फिर ध्वजारोहण के साथ तिरंगे को सलामी दी और राष्ट्रगान सम्पन्न हुआ। इसके बाद उन्होंने वहाँ उपस्थित अतिथियों, कर्मियों एवं विद्यार्थियों को भारतीय संविधान की प्रस्तावना की शपथ दिलाई। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ सुनील ने कहा कि हमें हर कीमत पर आज़ादी के महत्व को समझना है और इसके लिए दी गई कुर्बानियों को भी याद रखना है। आज़ादी तभी तक सुरक्षित है, जब तक यहाँ लोकतंत्र सुरक्षित है और इसके लिए हमें अपने संविधान को हमेशा मजबूत बनाकर रखना होगा। डॉ सुनील ने नई पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा कि वे एक सजग और जिम्मेदार नागरिक बनें। हम सबको मिलकर जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा, क्षेत्र और जेंडर संबंधी भेदभाव के खिलाफ़ लड़ते रहना है, तभी यह देश सही मायने में आगे बढ़ पाएगा। इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में सबसे पहले नन्हीं मेहमान रुक्मिणी मुखर्जी ने रबीन्द्रनाथ टैगोर की अंग्रेज़ी कविता सुनाई। नैना प्रसाद ने ‘ये मेरे वतन के लोगों’ का गायन करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। शोधार्थी बृजेश प्रसाद ने युवा कवि राकेश कबीर की कविता ‘विद्रोह’ का पाठ किया। स्वाति मिश्रा, पूजा कुमारी और भारती कुमारी साव ने देशभक्ति गीत सुनाया। सरस्वती मुखर्जी, रीता बैद्य और सुखेन शिकारी ने बांग्ला गीत प्रस्तुत किया। सुशील कुमार सिंह और विवेक कुमार साव ने अपनी स्वरचित कविता सुनाई। इस आयोजन में राकेश श्रीमाल, डॉ आलोक कुमार सिंह, दशरथ कुमार यादव, हेमकांत कुमार, रबिन्द्र माहतो, निशा बारी, स्वेता कुमारी गुप्ता, अरुनव हालदार और मौसमी गुप्ता की सहभागिता महत्वपूर्ण रही।

आईवीएफ से जन्मे बच्चे का जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र के पिता का नाम बताना जरूरी नहीं: कोर्ट

तिरुवनंतपुरम : केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को अपने एक फैसले में कहा है कि ‘आईवीएफ’ जैसी सहायक प्रजनन तकनीकों से अकेली महिला के गर्भधारण को मान्यता दी गई है और ऐसे में इन पद्धति से जन्मे बच्चों के जन्म-मृत्यु पंजीकरण में पिता की जानकारी मांगना निश्चित तौर पर मां के साथ-साथ उस बच्चे के सम्मान के अधिकार को भी प्रभावित करता है। अदालत ने कहा कि राज्य को ऐसी प्रक्रिया से जन्मे बच्चों के जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के लिए उचित ‘फार्म’ मुहैया कराना चाहिए। उच्च न्यायालय ने फैसले में कहा, ‘सिंगल पैरेंट या एआरटी से मां बनी अविवाहित महिला के अधिकार को स्वीकार किया गया है, ऐसे में पिता के नाम के उल्लेख की जरूरत, जिसे गुप्त रखा जाना चाहिए, उसकी निजता, स्वतंत्रता और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन है।’ यह फैसला अदालत ने एक तलाकशुदा महिला की याचिका पर सुनाया जिन्होंने ‘ इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (आईवीएफ) प्रक्रिया से गर्भधारण किया था और केरल जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमावली 1970 में पिता की जानकारी देने संबंधी नियम को चुनौती दी थी।

जानकारी देने को बताया निजता का उल्लंघन
महिला ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि पिता के नाम का खुलासा नहीं किया जा सकता क्योंकि शुक्राणु दानकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और यहां तक उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसके अलावा पिता की जानकारी देने की जरूरत उनकी निजता, स्वतंत्रता और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन है।

जरूरी ना होने पर डोनर की पहचान नहीं हो सकती जाहिर
महिला ने पिता के नाम का कॉलम खाली रखकर प्रमाण पत्र जारी करने के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि यह भी उनके सम्मान, निजता और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने महिला के दावे को स्वीकार करते हुए कहा कि एकल महिला द्वारा एआरटी प्रक्रिया से गर्भधारण करने को देश भर में स्वीकार किया गया है और शुक्राणु दान करने वाले की पहचान विशेष परिस्थितियों में और कानूनी रूप से जरूरी नहीं होने तक जाहिर नहीं की जा सकती।