कोलकाता : भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के एनसीसी कैडटों ने अलग अलग कई क्षेत्रों में उनके प्रदर्शनों पर पदक प्राप्त किये। बाईस वेस्ट बंगाल स्टेट किक बॉक्सिंग में एअर कैडेट सीएस यूओ अमित यादव और सीएस यूओ आशुतोष कुमार झा ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया। वहीं कैडट रितिक प्रसाद को एक स्वर्ण और एक रजत, सीडब्लूओ मौहम्मद साद कुरैशी को स्वर्ण और रजत, कैडट, खुशी लखेरा को स्वर्ण और रजत पदकों से पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने ज्योति, आशीष और रॉबिन की याद में आयोजित टूर्नामेंट में उनके बेहतरीन प्रदर्शन पर प्रदान किया।
वेस्ट बंगाल सिनियर स्टेट रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में भवानीपुर कॉलेज के बीकॉम ऑनर्स तृतीय वर्ष के छात्र अनिर्बान मंडल ने मिक्स्ड डबल में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं भवानीपुर कॉलेज के बीए पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स तृतीय वर्ष के छात्र दिप्त ज्योति को बंगाल सिनियर स्टेट रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट कैटेगरी सिंगल में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इस टूर्नामेंट का आयोजन पी एल राय इंडोर स्टेडियम सियालदह में संपन्न हुआ। एनसीसी की समन्वयक प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने सभी छात्रों को बेहतर प्रदर्शन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
भवानीपुर कॉलेज की एनसीसी टीम ने जीता स्वर्ण पदक
कज़ाकिस्तान खेलने पहुँची भवानीपुर कॉलेज की प्राप्ति सेन
कोलकाता : भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की बीए अंग्रेजी ऑनर्स द्वितीय वर्ष की छात्रा प्राप्ति सेन को टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया के अंतर्गत रिपब्लिक कज़ाकिस्तान के कारागंडा में टेबल टेनिस खेलने के लिए आमंत्रित किया गया है। ओपन अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस टूर्नामेंट के लिए प्राप्ति सेन का आमंत्रण भवानीपुर कॉलेज के साथ-साथ पश्चिम बंगाल राज्य और भारत देश के लिए गौरव की बात है। कज़ाकिस्तान में चलने वाला यह टूर्नामेंट 15-19 सितंबर 2021 तक चलेगा।
प्राप्ति सेन को भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो. दिलीप शाह और मैनेजमेंट के पदाधिकारियों, उपाध्यक्ष मीराज डी शाह एवं शिक्षकों की ओर से शुभकामनाएँ दी गईं।ये जानकारी डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी।
अर्चना संस्था के सदस्यों ने किया हिंदी का वंदन
कोलकाता : अर्चना संस्था की ओर से सदस्यों ने विभिन्न भावों की कविताओं, गीतों और दोहों की स्वरचित रचनाओं को सुनाया। साथ ही हिन्दी दिवस के अवसर पर हिंदी पर बहुत सी रचनाओं का पाठ ऑन-लाइन जूम पर किया। कहीं प्रेम के तराने,कहीं जीवन के अफसाने, हिन्दी भाषा का गुणगान, भारतीयता का अभिमान, गरीबी के शोले, आतंकी गोले, आत्ममंथन और विकृत जीवन के विभिन्न पहलुओं, प्रश्नों की चुभन ,कहीं हिंदी की सौतन, कहीं बुजुर्गों की दास्तां, कहीं प्रगति का रास्ता,रंग बिरंगे शब्दों से भरपूर सदस्यों ने रचनाओं की प्रस्तुति दी। डॉ वसुंधरा मिश्र – तुम्हारा सुंदर चेहरा उभर उठता है, मेरे मित्र मैं सुखी हूँ, हिम्मत चोरड़़िया ने दोहे –
माता अपनी जानकर, नमन करो सौ बार। हिंदी से ही हिंद है, कर लो ये स्वीकार।।, मीना दूगड़ – हिंन्दु है हम हिंदुस्तान हमारा, हिंदी भाषा का है जबरदस्त उजियारा। हिंदी का शब्दकोश शब्द, अर्थ और उसके मायने है जबरदस्त मानो छुपे कई कुबेर के खजाने।, विद्या भंडारी – ऋषियों-मुनियों का भारत एवं किताबों की दुनिया से जब गृहिणी में तब्दील होती जब।मेरे लिए इस घर का मृदुला कोठारी का गीत- एक कोना सुरक्षित कर दो उसे मेरे ही भीतर समाए रंगों से गहरा गहरा रंग दो, नव रतन भंडारी ने हिंदी भाषा के प्रति जागरूक होने से संबंधित कविता सुनाई, भारती मेहता अहमदाबाद से बुजुर्गों पर कविता- सड़क के किनारे धीमे- धीमे सहमा सा चलता हूँ एवं जिस राह से चलती हूँ..और जिन्दगी छलकाए चलती हूँ, उषा श्राफ ने यह जीवन एक प्रश्नावली कविता, सुशीला चनानी ने हिन्दी लगाकर बडी सी बिन्दी इतरा रही हैअंग्रेजी अपनी बांकी अदाओं से गृहस्वामी के ओ लुभा रही है।(हिन्दी पखवाड़े पर), नयनों में नीर हृदय में पीर जमुना के तीर बैठी है एकाकी राधा, राधा अष्टमी पर)गीत कविता , इंदु चांडक ने गीत और कविता कभी प्रश्न कभी उत्तर जीवन/फिर क्यों उलझा रहता है मन, मारो मरो मरो और मारो यह कैसा जीवन मंत्र है, प्रसन्न चोपड़ा ने मैं गरीब का बेटा,सोच रहा हूं लेटा, किस्मत का मारा सब कहते हैं बेचारा आदि सभी सदस्यों की बेहतरीन प्रस्तुतियां रही। मीना दूगड़ ने अपनी रचनात्मक रिपोर्ट दी जो सभी ने सराही। चांडक ने कार्यक्रम का संचालन – संयोजन किया और तकनीकी सहयोग दिया।
देवताओं में विशेष स्थान रखते हैं देव शिल्पी विश्वकर्मा
भगवान विश्वकर्मा को निर्माण का देवता माना गया है क्योंकि उन्होंने देवताओं के लिए कईयों भव्य महलों, भवनों, हथियारों और सिंघासनों का निर्माण किया था। मान्यता है कि एक बार भगवान विश्वकर्मा असुरों से परेशान देवताओं के गुहार पर महर्षि दधीची की हड्डियों से देवाताओं के राजा इंद्र के लिए एक वज्र बनाया था। ये वज्र इतना प्रभावशाली था कि सब असुरों का सर्वनाश हो गया। यहीं कारण है कि भगवान विश्वकर्मा का सभी देवताओं में विशेष स्थान है। विश्वकर्मा ने अपने हाथों से कई संरचनाएं की थीं। माना जाता है कि उन्होंने रावण की लंका, कृष्ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया था।
इसके अलावा उड़ीसा में स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण अपने हाथों से किया था। इसके अलावा उन्होंने कईयों हथियारों का निर्माण किया था जैसे कि भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और यमराज का कालदंड मुख्य हैं। इसके साथ ही उन्होंने दानवीर कर्ण के कुंडल और पुष्पक विमान की भी संरचना की थी। मान्यता है कि रावण के अंत के बाद राम, लक्ष्मण, सीता और अन्य सभी साथी इस विमान पर बैठकर अयोध्या वापस लौटे थे।
इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा ने जन्म लिया था। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार, वास्तुशास्त्र का देवता, मशीन का देवता आदि नामों से पुकारा जाता है। विष्णु पुराण में विश्वकर्मा को देव बढ़ई भी कहा गया है। माना जाता है कि इस दिन लोहे के बने सामानों की पूजा होती है और इस दिन पूजा करने से व्यापार में रात-दिन तरक्की होती है। इस पर्व को घरों के साथ-साथ दफ्तरों और कारखानों में मनाया जाता है। जो व्यापारी इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, वेल्डिंग और मशीनों के काम से जुड़े होते हैं उनके लिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। इस दिन मशीनों के साथ-साथ दफ्तरों और कारखानों की सफाई करके विस्वकर्मा की मूर्ति को सजाया जाता है। फिर लोग मशीनों, गाड़ियों, कम्प्यूटर की पूजा करते हैं।
(साभार – न्यूज ट्रैक डॉट कॉम)
18 शक्तिपीठों में स्थान रखता है आन्ध्र प्रदेश का पीठमपुरा शक्तिपीठ
पुरुहुतिका देवी मंदिर पीथापुरम, आंध्र प्रदेश स्थित है, और काकीनाडा से 20 किमी और राजमुंदरी से 75 किमी दूर है। इसे भारत में 18 शक्तिपीठों में से एक के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर कुक्कुटेश्वर स्वामी, कुंतीमाधव स्वामी, और श्री पद वल्लभ अनाघ दाता क्षेत्रम, अग्रहारम, श्री वेणु गोपाल स्वामी मंदिर के मंदिरों के लिए लोकप्रिय है।
इतिहास
पुरुहुतिका देवी की पूजा भगवान इंद्र ने की थी। जब इंद्र ने गौतम ऋषि के रास्ते में अहिल्या (गौतम महर्षि की पत्नी) से छल किया और महर्षि द्वारा शाप दिया गया था। इंद्र ने अपने वृषण खो दिए और साथ ही पूरे शरीर पर योनि के निशान बन गए । उन्होंने वास्तव में खेद महसूस किया और गौतम ऋषि से प्राथना की। ऋषि ने सूचित किया और स्वीकार किया कि योनि के निशान आंखों की तरह दिखाई देंगे ताकि इंद्र को उसके बाद सहस्राक्ष कहा जाएगा। इंद्र ने अपने वृषण खो दिए। वह उन्हें वापस अच्छा करना चाहता था। उन्होंने अपना राज्य छोड़ दिया, पिथिका पुरी गए और उन्होंने जगनमाता की तपस्या की। लंबे समय के बाद, जगनमाता ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें समृद्धि और वृषण से विभूषित किया। इंद्र वास्तव में संतुष्ट थे और उन्होंने उसे पुरुहुतिका देवी के रूप में प्रार्थना की। लंबे समय के बाद, जगद्गुरु श्रीपाद वल्लभ ने पीथापुरम में जन्म लिया। उन्होंने भी पुरुहुतिका देवी की पूजा की और अपनी पहचान भी बनाई। वह दत्तात्रेय का रूप है। और पीठापुरम को दक्षिणा काशी भी माना जाता है।
स्थापत्य
जब आप मंदिर में आते हैं, प्रदक्षिणा समाप्त करते हैं और द्वार स्तम्भ के सामने आते हैं तो आप “याका सिला नंदी (एक पत्थर नंदी) दिखती है। याका शिला लेपाक्षी बसवेश्वर नंदाई के बाद दूसरी सबसे बड़ी है। इस मंदिर के सामने का प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में बना हुआ है। जैसे ही कोई इस मंदिर में प्रवेश करता है, कोई एक बड़ा गोपुरम देख सकता है जिसे अविश्वसनीय रूप से संवारा गया है और जो जलाशय का संरक्षण करता है। कहते हैं कि इस सरोवर में पापों से मुक्ति होती है। मंदिर में प्रवेश करने के बाद, ध्वज स्तम्भ के बगल में गया असुर के बड़े आकार के पाद मुद्रिका (निशान) देख सकते हैं। मंदिर के उत्तर की ओर, श्री चंदेश्वर स्वामी का मंदिर है। पूर्वोत्तर कोने में, काल भैरव का मंदिर है, जो क्षेत्र पालक (रक्षक) हैं। भगवान सुब्रह्मण्यम का एक ऐतिहासिक मंदिर उत्तर पश्चिम में मौजूद है जो तीर्थयात्रियों को उनके कुजा दोष से राहत देता है।
प्रतिमा
पुरुहुथिका देवी की मूर्ति के 4 हाथ हैं। उनके पास बीजों का एक थैला (बीजा), कुल्हाड़ी (परशु), कमल (कमला), और एक डिश (मधु पत्र) निचले-दाएं से निचले-बाएं क्रम में है। पहले पीथापुरम में उपासकों के 2 संप्रदाय पुरुहूतिका देवी की पूजा करते थे। सबसे पहले उन्हें पुरुहूथा लक्ष्मी (कमला और मधु पात्र का ध्यान करना) और समयाचार में पूजा करना और दूसरा उन्हें पुरुहुथम्बा (परशु और बीजा पर ध्यान करना) और वामाचार में पूजा करना।
मंदिर के सामने एक ही पत्थर से बनी नंदी (बैल) की एक बड़ी और सुंदर मूर्ति है। मुर्गे के सिर के आकार का शिव लिंग श्री कुक्कुटेश्वर स्वामी के नाम से जाना जाता है। श्री कुक्कुटेश्वर स्वामी की पत्नी, श्री राजराजेश्वरी का मंदिर शिव मंदिर के बगल में मौजूद है।
श्री राम, अयप्पा, श्री विश्वेश्वर, और श्री अन्नपूर्णा देवी, श्री दुर्गा देवी जैसे विभिन्न देवताओं के अन्य मंदिर हैं। यह श्री दुर्गा मंदिर के बगल में है, जो श्री पुरुहुतिका देवी का मंदिर है।
उत्सव
- अश्वीजा मास के दौरान दशहरा, (सितंबर-अक्टूबर) और माघ मास (फरवरी-मार्च) के दौरान शिवरात्रि बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।
- भगवान शिव का विवाह समारोह (स्वामीवारी कल्याणम) माघ मास के दौरान मनाया जाता है और माघ मास में कार उत्सव (रथौत्सवम) आसपास के शहरों के लोगों को भी आकर्षित करता है।
- कार्तिक मास (अक्टूबर- नवंबर) के दौरान कार्तिक दीपम भी मंदिर में मनाया जाता है।
- हर साल अश्वीय नवरात्रि के महीने में मंदिर में उत्सव मनाया जाता है।
कोरोना ने बदला डेटिंग का तरीका, अब स्थायीत्व की तलाश
पिछले साल बंबल ने अपने प्लेटफॉर्म में अनेक अपडेट किए, जिसमें डेटिंग प्रोफाइल में 150 नए इंटररेस्ट बैज फ्री की शुरुआत की और अपना नाईट इन फीचर लॉन्च किया, जहां दो लोग वीडियो चैट में इंटरैक्टिव गेम में हिस्सा ले सकते हैं। समर्पिता समद्दर कम्युनिकेशन डायरेक्टर बंबल इंडिया ने कहा कि जैसा हमारी नई रिसर्च में सामने आया है कि कोविड के बाद हर दो में से एक भारतीय स्थायी संबंध की तलाश कर रहा है।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद सामान्य जीवन वापस शुरू हो रहा है। महिलाओं को प्राथमिकता देने वाले डेटिंग ऐप बंबल ने भारत में डेटिंग के संबंध में विकसित हुए दिलचस्प ट्रेंड जारी किए हैं। भारतीय डेटर्स में स्पष्टता व आत्मविश्वास की नई भावना देखी गई है। जिसके चलते वो नए लोगों से मिलते हुए डेटिंग लाइफ को अपने नियंत्रण में ले रहे हैं। बंबल की ओर से किए गए रिसर्च से पता चलता है कि लोग कोविड से पहले के समय के मुकाबले ज्यादा स्वेच्छा से डेटिंग कर रहे हैं। वो संबंध में क्या तलाश रहे हैं इस बारे में वो अब ज्यादा ईमानदार हो गए हैं।
सर्वे रिपोर्ट में क्या आया सामने
कोरोना की दूसरी लहर के बाद दो में से एक भारतीय समर्पित और स्थायी संबंध की तलाश कर रहा है।
पांच में से एक भारतीय शादी करना चाहता है।( नई दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद टॉप पर)
तीन में से एक से ज्यादा यानी 33 प्रतिशत लॉकडाउन में छूट के बाद डेटिंग को लेकर ज्यादा आशान्वित हैं।
33 प्रतिशत भारतीय IRL (In Real Life) मुलाकात से पहले वीडियो डेट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बंबल ने डेटिंग की प्राथमिकताओं व पसंदमें परिवर्तन दर्ज किए और भविष्यवाणी की जो आदतें कोरोना में विकसित हुई हैं वो रातोंरात नहीं बदलेगी। पिछले साल वाले डेटिंग के नियम कई लोग छोड़ना नहीं चाहेंगे खासकर दूसरी लहर के बाद। क्या प्राथमिकताएं हैं और दूसरे साथी में क्या खोज रहे उसमें-
कॅरियर का विकल्प, महत्वाकांक्षा – 45 प्रतिशत
समान रुचि – 45 प्रतिशत
वित्तीय स्थिरता- 40 प्रतिशत
दया की भावना- 32 प्रतिशत
कोविड की दूसरी लहर के बाद ऑनलाइन डेटिंग में सकारात्मक व्यवहार में काफी बढ़ोत्तरी देखी गई है। सर्वे में शामिल 10 में से 9 भारतीयों को महसूस होता है कि डेटिंग के सकारात्मक व्यवहारों में बढ़ोत्तरी हुई है।
2021 में शीर्ष 5 डेट्स के जो विकल्प हैं उसमें-
लॉन्ग ड्राइव
रेस्टोरेंट में डाइनिंग
नजदीक के स्थानीय कैफे, चाय शॉप
पार्क में या नजदीक में वॉक पर जाना
जब थियेटर खुलेंगे तो मूवी के लिए जाना
पिछले साल बंबल ने अपने प्लेटफॉर्म में अनेक अपडेट किए, जिसमें डेटिंग प्रोफाइल में 150 नए इंटररेस्ट बैज फ्री की शुरुआत की और अपना नाईट इन फीचर लॉन्च किया, जहां दो लोग वीडियो चैट में इंटरैक्टिव गेम में हिस्सा ले सकते हैं। समर्पिता समद्दर कम्युनिकेशन डायरेक्टर बंबल इंडिया ने कहा कि जैसा हमारी नई रिसर्च में सामने आया है कि कोविड के बाद हर दो में से एक भारतीय स्थायी संबंध की तलाश कर रहा है।
एसबीआई ने घटाई होम लोन पर ब्याज दरें,प्रोसेसिंग फीस पर मिलेगी राहत
नयी दिल्ली : अगर आप भी आगामी त्योहारी सीजन में अपना घर खरीदने का सपना सजा रहे हैं तो देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने आप को बड़ी राहत दी है। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने फेस्टिव सीजन को देखते हुए होम लोन के ब्याज दर में कटौती की है।
अब तक अगर कोई व्यक्ति एसबीआई से होम लोन के रूप में ₹75 लाख से अधिक लेना चाहता था तो उसे 7.15 फीसदी के हिसाब से ब्याज चुकाना पड़ता था। फेस्टिव सीजन में SBI ने किसी भी रकम के होम लोन पर ब्याज दर 6.7 फीसदी कर दी है।
भारतीय स्टेट बैंक के इस फैसले से होम लोन लेने वाले ग्राहकों को 45 बेसिस प्वाइंट की बचत होगी। अगर कोई व्यक्ति 30 साल के लिए ₹75 लाख का होम लोन लेता है तो उसे इससे ₹8 लाख तक की बचत हो सकती है।
15 बेसिस पॉइंट की बचत
एसबीआई ने कहा है कि नॉन सैलरीड लोगों को अब तक होम लोन के लिए 15 बेसिस पॉइंट अधिक ब्याज पर होम लोन मिलता था। फेस्टिव सीजन में इस अंतर को भी खत्म कर दिया गया है। बैंक ने एक बयान में कहा, “अब SBI से होम लोन लेने में किसी व्यक्ति के पेशे के हिसाब से कोई भेद भाव नहीं किया जाएगा। इससे नॉन सैलरीड पेशेवर को फेस्टिव सीजन में होम लोन पर 15 बेसिस पॉइंट की बचत होगी।”
प्रोसेसिंग फीस माफ़
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने होम लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए प्रोसेसिंग फीस को पूरी तरह माफ कर दिया है। इसके साथ ही बैंक ने दावा किया है कि जिन लोगों क्रेडिट स्कोर बढ़िया है उन्हें ब्याज दरों पर आकर्षक छूट दी जा सकती है।
भारतीय स्टेट बैंक के प्रबन्ध निदेशक (रिटेल एंड डिजिटल बैंकिंग) सी एस शेट्टी ने कहा, “इस त्योहारी सीजन में हमने होम लोन की ब्याज दर को आकर्षक बनाने की हर संभव कोशिश की है। होम लोन पर आकर्षक ब्याज दरें हर तरह के ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। एसबीआई के होम लोन पर 6.7 फीसदी की ब्याज दर बैलेंस ट्रांसफर के मामलों में भी लागू है। इसके साथ ही एसबीआई और भी कई आकर्षक ऑफर शुरू किए हैं।
भविष्य की कार के लिए चींटियाँ बनेंगी रास्ता
वॉशिंगटन : खुद से चलने वाली गाड़ी के कई रूप हमने फिल्मों में देखे हैं। ऐसी कार का ख्याल दिलचस्प है, जो भीड़भाड़ वाली सड़कों पर दूसरे वीइकल्स, सड़क पर चल रहे लोगों, गड्ढों, खुदाई और आपातकालीन स्थितियों के बीच आसानी से बिना ड्राइवर के पैसेंजर को उसकी मंजिल तक पहुंचा दे। हालांकि, ऐसी तकनीक पर हाथ आजमा रहीं ऑटोमोबाइल कंपनियों को परिणाम अब तक मनमुताबिक नहीं मिले हैं। इस बीच वैज्ञानिक और शोधकर्ता ऐसी ड्राइवरलेस ऑटोनोमस कार बनाने के लिए अब चींटियों जैसे सामाजिक कीड़ों का सहारा ले रहे हैं।
चीटियों का नेविगेशन दुर्घटना से बचा सकता है
वैज्ञानिको और शोधकर्ताओं का दावा है कि चींटियां समूहों में नेविगेट करने का सबसे कारगर तरीका चालक रहित कारों को दुर्घटनाओं से बचने में मदद कर सकता है। ऐसे ही एक तरीके को कलेक्टिव या स्वार्म इंटेलिजेंस कहा जाता है। आजकल ट्रकों और कारों पर जीपीएस और सैटेलाइट नेविगेशन का मतलब भी स्वार्म इंटेलिजेंस ही है। इसके जरिए वे बड़ी दुर्घटनाओं से बचने के लिए अन्य वाहनों को एआई द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर भरोसा करते हैं। जीपीएस दूसरे सोर्स से मिले डेटा के आधार पर हमें बताता है कि आगे रास्ते में ट्रैफिक जाम है या रास्ते को डाइवर्ट किया गया है।
स्वार्म इंटेलिजेंस क्या है?
स्वार्म इंटेलिजेंस डिसेंट्रलाइज्ड सेल्फ ऑर्गनाइज्ड सिस्टम का एक समूह का एक सामूहिक व्यवहार है। यह प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों प्रकार का होता है। साइंस डायरेक्ट ने कहा कि आज इस सिद्धांत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का काम बताया जा रहा है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉडर्न एजुकेशन के अनुसार, यह शब्द पहली बार 1989 में गेरार्डो बेई और जिंग वेन द्वारा सेलुलर रोबोट सिस्टम के संदर्भ में पेश किया गया था।
स्वार्म इंटेलिजेंस क्या कर सकती है?
वैज्ञानिकों ने चीटियों के घोंसलों और खाद्य स्रोतों के बीच सबसे छोटा रास्ता खोजकर सबसे जटिल समस्याओं को हल करने की उनकी दक्षता के कारण ही स्वार्म इंटेलिजेंस के कॉन्सेप्ट को लिया है। स्वार्म इंटेलिजेंस की अवधारणा बिलकुल सरल तरीके से काम करती है। इसके जरिए समाजिक कीड़े के रूप में प्रसिद्ध चीटियां अपने परिवेश में स्थानीय रूप से एक-दूसरे से बातचीत करती हैं। इसलिए जब ड्राइवरलेस कारों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा तब स्वार्म इंटेलिजेंस के जरिए बना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यातायात की भीड़ के बारे में सूचित करेगा और आने वाले खतरों के बारे में चेतावनी देगा।
चीटियों का सामूहिक व्यवहार सबसे ज्यादा प्रभावशाली
चींटियां एक वायरलेस फेरोमोन नेटवर्क का उपयोग करती हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई चींटी दूसरे से आगे न निकल जाए। इससे उन्हें अपने रास्ते में कभी भी ट्रैफिक जाम या एक-दूसरे से टक्कर की संभावना बिलकुल खत्म हो जाती है। भोजन या रास्तों की खोज के दौरान बड़े पैमाने पर यातायात नियंत्रण तकनीक के कारण उनके सामूहिक व्यवहार को सबसे प्रभावशाली माना जाता है।
आंध्र प्रदेश में मिली 12वीं सदी की गणेश प्रतिमा
हाथ में कमल और मोदक लिए हुए हैं भगवान गजानन
हैदराबाद : आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में 800 साल पुरानी भगवान गणेश की मूर्ति मिली है। चिनगंजम मंडल के मोतुपल्ली गांव में किसान वेंकटेश्वरलू को प्रतिमा उस समय मिली जब वह अपने खेत में काम कर रहा था। इस खोज को लेकर पुरातत्वविद शिव नागी रेड्डी का कहना है कि करीब 800 साल पुरानी यह प्रतिमा 3 फूट 6 इंच लंबी, 2 फूट 6 इंच चौड़ी और एक फूट 6 इंच ऊंची है। यही नहीं कमल के आसन पर पद्मासन मुद्रा में मिली इस प्रतिमा के एक हाथ में मोदक और दूसरे हाथ में दंत है, लेकिन दोनो हाथ क्षतिग्रस्त हैं। प्रतिमा नाग यज्ञोपवीत सहित और भी आभूषण धारण किए हुए है।
चोला राजाओं के शासन की हो सकती है मूर्ति
कोदनडा रामस्वामी मंदिर मे लगे तमिल शिलालेखों के आधार पर ये अनुमान लगाया गया है कि 12 शताब्दी की ये प्रतिमा उस समय की है जब यहां चोला राजाओं का शासन था। फिलहाल इस प्राचीन प्रतिमा को कोदनडा रामस्वामी मंदिर में रखा गया है। गणेश उत्सव के दौरान इस प्रतिमा के मिलने से लोगों का हुजूम उमड़ रहा है। लोग यहां आकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
ग्रेनाइट पत्थर की बनी हुई है प्रतिमा
मोटुपल्ली हेरिटेज सोसायटी के सचिव आर. दशरथरामी रेड्डी की सूचना पर प्लेच इंडिया फाउंडेशन के डॉ. ई शिवनागी रेड्डी ने गांव का दौरा किया और मूर्ति की जानकारी जुटाई। उन्होंने बताया कि मूर्ति ग्रेनाइट पत्थर की बनी हुई है।
निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है भारत: सर्वेक्षण
नयी दिल्ली : डेलॉयट के एक सर्वेक्षण के अनुसार, आर्थिक वृद्धि की अच्छी संभावनाओं और कुशल कार्यबल के कारण भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।
सर्वेक्षण के नतीजे से पता चलता है कि बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय उद्योगपति भारत की अल्प एवं दीर्घकालीन संभावनाओं में विश्वास रखते हैं और देश में अतिरिक्त निवेश और पहली बार निवेश करने की योजना बना रहे हैं।
‘इंडियाज एफडीआई ऑपर्चूनिटी’ सर्वेक्षण के अनुसार, “सर्वेक्षण में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और सिंगापुर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के 1,200 शीर्ष अधिकारियों से सवाल किए गए। इसमें पाया गया कि भारत अपने कुशल कार्यबल और आर्थिक वृद्धि की अच्छी संभावनाओं के लिए ऊंचे अंक पाते हुए निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।”
इसमें कहा गया कि भारत सात पूंजी-गहन क्षेत्रों – कपड़ा और परिधान, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, औषधि, वाहन एवं कलपुर्जे, रसायन तथा पूंजीगत उत्पादों में अधिक से अधिक एफडीआई आकर्षित करने का लक्ष्य बना सकता है। इन क्षेत्रों ने 2020-21 में देश के व्यापार निर्यात में 181 अरब डॉलर का योगदान दिया था।
सर्वेक्षण के अनुसार इन सात क्षेत्रों में त्वरित परिणाम दिखाने और वैश्विक मिसाल कायम करने की जरूरी संभावना, अवसर और क्षमता है।
इसमें पाया गया कि अमेरिका में चीन, ब्राजील, मेक्सिको और वियतनाम जैसे बाजारों की तुलना में भारत को लेकर सबसे मजबूत सकारात्मक धारणा है। अमेरिका और ब्रिटेन के उद्योगपतियों ने भारत की स्थिरता में अधिक विश्वास व्यक्त किया।
सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत में व्यापार करने में आसानी में सुधार के लिए हाल के सुधारों के बावजूद निवेशकों के बीच इन सुधारों के लेकर कम जागरुकता बनी हुई है।
सर्वेक्षण में पाया गया, “तदनुसार, भारत को चीन और वियतनाम की तुलना में व्यापार करने के लिए एक अधिक चुनौतीपूर्ण वातावरण माना गया।”
इसमें कहा गया कि जहां भारत को राजनीतिक और आर्थिक दोनों रूप से स्थिर माना जाता है, देश ने संस्थागत स्थिरता, यानी नियामक स्पष्टता और कुशल न्यायिक निवारण एवं तंत्र के वर्ग में कम अंक हासिल किए।
इसमें यह भी कहा गया कि अपर्याप्त बुनियादी ढांचा मौजूदा और संभावित निवेशकों द्वारा बताया गया एक और नकारात्मक कारक था।
डेलॉयट ग्लोबल के सीईओ पुनीत रंजन ने कहा: “हमारा मानना है कि भारत में व्यापार करने में आसानी में सुधार के कारण ही दृष्टिकोण बेहतर हो सकता है, जिसमें वित्तीय लाभ और अन्य सुधार शामिल हैं। ये सकारात्मक कदम मुझे इस बात को लेकर और आश्वस्त करते हैं कि भारत 5,000 डॉलर की अर्थव्यव्यवस्था बनने की अपनी महत्वाकांक्षा की ओर बढ़ रहा है।”




