Saturday, October 31, 2026
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महाभारत के भीम प्रवीण कुमार सोबती का निधन

नयी दिल्ली । बीआर चोपड़ा के सीरियल महाभारत में भीम का किरदार निभाने वाले अभिनेता प्रवीण कुमार सोबती का हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। प्रवीण कुमार 74 साल के थे। अभिनेता ने सोमवार देर रात को दिल्ली में अशोक विहार स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, बेटी, दो छोटे भाई और एक बहन है।
प्रवीण अपने विशाल कदकाठी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई। साढ़े 6 फीट लंबे अभिनेता और खिलाड़ी पंजाब के रहने वाले थे। अभिनय में आने से पहले प्रवीण एक हैमर और डिस्कस थ्रो एथलीट थे। वह एशियाई खेलों में चार मेडल (2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य) जीत चुके थे।

उन्होंने दो ओलंपिक खेलों (1968 मैक्सिको खेलों और 1972 म्यूनिख खेलों) में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वह अर्जुन पुरस्कार विजेता भी रहे। खेल के कारण ही प्रवीण कुमार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डिप्टी कमांडेंट की नौकरी मिली।
प्रवीण ने 70 के दशक के अंत में मनोरंजन की दुनिया में कदम रखा। टाइम्स ऑफ इंडिया के को दिए एक इंटरव्यू में, प्रवीण ने अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म साइन करने को याद करते हुए था वह एक टूर्नामेंट के लिए कश्मीर में थे। उनकी पहली भूमिका रविकांत नागाइच के निर्देशन में बनी थी जिसमें उनका कोई डायलॉग नहीं था।

भारतीय भाषा परिषद में कविता बसंतोत्सव

कोलकाता । कोरोना महामारी के धीरे-धीरे अंत के साथ उल्लसित बसंत का स्वागत करने के लिए भारतीय भाषा परिषद में कविता बसंतोत्सव का आयोजन हुआ| परिषद की अध्यक्ष ने अपने समापन वक्तव्य में कहा कि हम बसंत और हर तरह की सृजनात्मकता का परिषद प्रांगण में स्वागत करते हैं| अध्यक्षता करते हुए परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ ने कहा कि बसंत नवजीवन के फिर से शुरू होने का संकेत है| कविता और समाज के बीच खाई चौड़ी हुई है, फिर भी कविताएं लिखी जा रही हैं क्योंकि कविता मनुष्य के भावजगत का प्रसार करती है| कवि संसार की सांस्कृतिक आंखें हैं| इसलिए उनकी दृष्टि संकीर्णता से ऊपर उठने की प्रेरणा देती है| कविता के शब्द भय, छद्म और शोर के पार ले जाते हैं| अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो संजय जायसवाल ने कहा कि बसंत पेड़-पौधों में भेदभाव नहीं करता, वह हर जगह छाता है| मनुष्य का हृदय भी बसंत की तरह विशाल होना चाहिए|
कविता बसंतोत्सव में कविता पाठ करने वाले वरिष्ठ और युवा कवियों में थे- सेराज खान बातिश,आशुतोष, अभिज्ञात, जितेंद्र जितांशु, रावेल पुष्प, गीता दुबे, रचना सरन, यशवंत सिंह, जीवन सिंह, कलावती कुमारी, मानव जायसवाल, ओम प्रकाश प्रसाद, रोहित प्रसाद पथिक, मधु सिंह, इबरार खान, सीमा प्रजापति, राजेश सिंह, तृषानिता बनिक, रेशमी सेन शर्मा, मुकुंद शर्मा, सपना कुमारी, शिवप्रकाश दास, नगेंद्र पंडित, मनीषा गुप्ता, नीतू सिंह भदौरिया| इस अवसर पर उदयराज सिंह, अवधेश प्रसाद, महेश जायसवाल सहित बड़ी संख्या में शहर के साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे।
प्रो संजय जायसवाल ने कविता सत्र का संचालन किया और परिषद के मंत्री डॉ केयूर मजमुदार ने धन्यवाद दिया|

प्रेम की खोज

डॉ. वसुंधरा मिश्र

मैं भटका
पलायन करने लगा
घर छोड़ हवा में उडा़
एक और घर बनाया
घर टँगा रहा
समाज देखता रहा
क्रिया प्रतिक्रिया चलती रही

मेरे अंश घर में रह गए
प्रेम खो गया, मैं खो गया लटके घर में
प्रेम की परिभाषा बदल गई
सिर्फ कंधे तक रह गया मैं
प्रेम बँट गया कई रूपों में
जीवन से गया भटक

कर्तव्य बोध से रहा अनजान
कोशिशें खत्म होने लगीं
मैं निहारने लगा मुझको
उम्र के इस पड़ाव पर ठहर
स्थिर हो, देखता रहा

पीछे छूटती गलियों, पगडंडियों पर
पैरों के निशान देते रहे
तुम्हारे होने का प्रमाण
कुरेदना, खोदना एक – एक कण को सहेजना
कितना कठिन है इस भाषा को पढ़ना

तुम भी तब अनजान भटका करते थे
अपनी पहचान पाने के लिए
आज सिर्फ़ तुम्हारे पैरों के पीछे ही
लोगों की जमात भाग रही है

अर्चना संस्था ने ऋतुराज वसंत का किया स्वागत 

कोलकाता । अर्चना संस्था की ओर से आयोजित स्वरचित गोष्ठी में संस्था के सदस्यों ने सर्वप्रथम सुरों की देवी भारत रत्न लता मंगेशकर जी को अपनी शब्दांजलि अर्पित की।’सुर शब्द बन बदली सी विलीन हो गई शून्य आकाश में’कविता मृदुला  कोठारी द्वारा और गीत ‘स्वर देवी को स्वरों से देते हम स्वरांजलि’ भारती मेहता और विद्या भंडारी ने ‘गाँऊगी हर गीत में तुमको /हृदय में तुम्हें बसाऊँगी ‘, संगीता चौधरी ने ‘तुम हो स्वर की मल्लिका’ प्रस्तुत कर सुर साम्राज्ञी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
हिम्मत चोरड़़िया ने कुंडलिया-गागर में सागर भरूँ, देना ऐसा ज्ञान।दोहे-दुश्मन भ्रम मत पालना, ये वीरों का देश।
समर भूमि में एक हैं, भले अलग परिवेश।।, सिमट अंधेरा अब गया, हुआ शिशिर का अंत।मृदुला कोठारी ने कू-कू कोयल बोलती,आया सुखद बसंत।।मन मंजीरा सुर वीणा के साथअधरों की बंसरी के संगछेड़ता जब अनहद मीठे राग विद्या भंडारी ने खुशबू मिट्टी की, संगीता चौधरी ने दोहे- कृपा करो मां शारदे और पतझड़ का ना जाने कैसा नाता है, क्यों मनाऊं मैं वैलेंटाइन डे, नोरतन मल भंडारी ने प्यार होता है/रेशमी धागों की गिरह की तरह/ हो जाये,/तो तोङना मुश्किल /जोङना मुश्किल। (2)खामोशी की भी होती है/ एक आवाज /कौन कहता है/उस तक नहीं/ पहुंच पाएगी / मेरी खामोशी।, हिम्मत चोरड़़िया ने मुक्तक विधाता छंद -हरा ये रंग कहता है, सदा खुशहाल बन रहना।, धनाक्षरी छंद-खेत अब लहराये, उपवन सरसाये,शशी कंकानी ने गीत -हर दिल में मस्ती छाने लगी/ये कैसा चढ़ने लगा खुमार/हौले से दस्तक किसने दी/कोई और नहीं ये है बसंत बहार,सुना कर कार्यक्रम का जोश बढ़ाया। वहीं मीना दूगड़ ने पूरे कार्यक्रम की रिपोर्ट अपनी कविता के द्वारा प्रस्तुत की – सुरीले मधुर दोहा गीत के साथ सजीला शुभारंभ और उतने ही सुरीले गीत के साथ आज की गोष्ठी की मनभावन संपन्नता। मध्य भाग सज उठा बसंत की बयार से, गुलाब की सौरभ से,लता जी के अमर स्मरण से, जीवन संगीत से, मिट्टी की खुशबू से, धरती आकाश के फासले में बसे ख्वाबों से, धनाक्षरी के हरे भरे लहलहाते खेतों से, प्यार के रेशमी धागों से, खामोशी की जुबां से,क्रोध की जहरीली गोली के दुष्प्रभाव से,मधुसिक्त मकरंद में डूबे श्रद्धा स्वरों से सभी सदस्यों की रचनाओं को शब्दों में पिरो कर रचनाओं की माला भेंट की। और अपनी कविता -कल रात सपने में गुलाब से मुलाकात हो गई / बगीचे में खिले खिले, सफेद गुलाबी लाल पीले-वैलेंटाइन डे की संस्कृति/मात्र सात दिनों पर टिकी प्यार की बंजर धरती सुनाया।
सुशीला चनानी ने ऋतु बसन्त में ए सखी,धरा करे श्रृंगार। जैसे पिय घर पग धरे,दुल्हन पहली बार।, हाइकु-बासन्ती हवा/भरे मदिर भाव/धिरकें पाव/गीत-खोलो खोलो सखी मन के किंवाड,बसन्त ऋतु आयी है !, लता जी को समर्पित दोहा-सारा जीवन कर दिया,सात सुरों के नाम
सांस सांस संगीत था,सप्तक ही था धाम।।, उषा सराफ ने धरती से आकाश तक का फ़ासला न होता, /तो ख्वाबों का कारवाँ कहाँ होता सुनाया। इंदू चांडक – आया आया जी बसंत ऋतुराज /मावड़ळी रै आंगणियै/बाज्या ढोल मंजीरा चंग सुरीला साज/मावड़ळी रै आंगणियै गीत से वसंत का स्वागत किया। व्यंग्य के वरिष्ठ कवि बनेचंद मालू नेे क्रोध किए गुण बहुत हैं,/क्रोध कीजिए रोज…….पैराशूट और दिमाग,/रह जाएँ अधखुले तो / हो जाए सत्यानाश…….सुनाया जो नया प्रयोग रहा। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कविता ‘वसंत’ नभ से उतरता वसंत /इतराता इठलाता /भर गया जब सूखी टहनियों पर /तभी तो उतर आता है जमीन पर /मदमस्त हो वसंत भी। और’ रचना ‘ गर्भ के किस कोने में /तुम छिपी थी, सुनाया। कार्यक्रम का संचालन और तकनीकी सहयोग इंदु चांडक की काव्यात्मक अभिव्यक्ति से पूर्ण रहा।

बीएचएस में मनायी गयी सरस्वती पूजा

कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल में सरस्वती पूजा उत्साह के साथ मनायी गयी। विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी माता सरस्वती की आराधना वसंत पंचमाी को आयोजित की गयी। कक्षा आठवीं से बारहवीं तक के छात्र इस अवसर पर पूजा में शामिल हुए। पूजा के साथ ही एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इसके पूर्व स्कूल की प्रिंसिपल लवलीन सैगल ने सरस्वती पूजा को गर्व का क्षण बताया। सरस्वती वंदना का गायन सीनियर सेक्शन की श्रीपर्णा ने किया और जूनियर सेक्शन की शिक्षिकाओं ने नृत्य प्रस्तुत किया। स्टूडेंट काउंसिल के छात्र अध्यक्ष देवांशु चौधरी ने स्कूल की सरस्वती पूजा को लेकर विदाई वक्तव्य रखा। कार्यक्रम ऑनलाइन तथा ऑफलाइन, दोनों ही रूपों में आयोजित किया गया था। ऑनलाइन कार्यक्रम की शुरुआत रिशान बंद्योपाध्याय एवं देवेश पाल की काव्य आवृति से हुई। तीसरी कक्षा के श्रीहन सरकार ने गीत और अर्घ्यज्योति सेन ने मधुर ध्वनि बाजे गीत गाया। विद्यार्थियों ने उम्मीद जतायी कि भविष्य में सरस्वती पूजा प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों और बगैर प्रतिबंध के आयोजित की जा सके।
रिपोर्ट – रोहिताश्व दास (छात्र)

बीएचएस में ऑफलाइन होंगी आठवीं की वार्षिक परीक्षाएँ

कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल अब कक्षाएँ फिर से आरम्भ हो गयी हैं। सरकारी आदेश के बाद गत 3 फरवरी से स्कूल खोला गया और आठवीं से बारहवीं तक की कक्षाएँ आरम्भ हुईं। 50 प्रतिशत ऑफलाइन और 50 प्रतिशत ऑनलाइन कक्षाएँ आरम्भ हुईं। इसे लेकर स्कूल ने गत 4 फरवरी को एक ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किया था। यह सत्र अभिभावकों को उनके बच्चों की सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करने और कोविड प्रोटोकॉल के प्रति सजग करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। स्कूल की प्रिंसिपल लवलीन सैगल ने स्कूल द्वारा उठाये गये कदमों की जानकारी दी, जिनमें थर्मल स्क्रीनिंग, सैनेटाइजेशन भी शामिल थे। सातवीं एवं आठवीं कक्षा की कोऑर्डिनेटर रेनु बुबना शेड्यूल, बैठने की व्यवस्था को लेकर जानकारी दी। आठवीं की वार्षिक परीक्षाएँ ऑफलाइन होंगी। अभिभावकों ने भी अपनी राय रखी, हाँलांकि बच्चों को स्कूल भेजने पर उनकी राय अलग – अलग दिखी।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में आयोजित हुई वर्चुअल पिकनिक

कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में हाल ही में वर्चुअल पिकनिक आयोजित की गयी। इस वर्चुअल पिकनिक में छात्राओं ने विश्व के अलग – अलग स्थानों का आनंद लिया। खूबसूरत गाउन से सजी नर्सरी की छात्राओं ने फ्लोरिडा की वाल्ट डिज्नी की जादुई दुनिया का आनंद लिया और इसका विषय था माई मैजिक वर्ल्ड। छात्राओं ने डिज्नी थीम के परिधान पहन रखे थे। छात्राओं ने प्रिंसेज डेज आउट, डोरा द एक्सप्लोरर जैसे गेम खेले। किंडरगार्टन की छात्राएं हिमाचल प्रदेश की सोलोंग घाटी की वर्चुअल सैर पर पहुँचीं, परियों की कहानी देखी, बोनफायर बनाया और अंत में सूप बनाकर पीया। पहली कक्षा की छात्राएँ हर्शे चॉकलेट वर्ल्ड, दूसरी कक्षा की छात्राएं अफ्रीका के सवाना ग्रासलैंड, तीसरी कक्षा की छात्राएँ सिंगापुर के अंडरवाटर वर्ल्ड पहुँचीं। इसी प्रकार अन्य छात्राओं ने भी इस तरह की यात्राओं का आनन्द उठाया। संगीत, नृत्य और मजेदार भोजन के साथ यह वर्चुअल पिकनिक और भी जम गयी।

भवानीपुर कॉलेज ने सरस्वती सम्मान समारोह में शिक्षक और शिक्षिकाएँ पुरस्कृत

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में सरस्वती पूजा उत्सव के दौरान लगभग 33 शिक्षकों को सरस्वती सम्मान 2022 से पुरस्कृत किया गया। हर वर्ष यह पुरस्कार उन शिक्षकों को दिया जाता है जिनके पुस्तकों और आलेखों का प्रकाशन यूजीसी के तहत हुआ है। उन्हें शाल और धनराशि देकर पुरस्कृत किया गया ।इस वर्ष पी. एचडी प्राप्त शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। वालिया हॉल में स्थापित सरस्वती मूर्ति की पूजा का प्रांरभ कॉलेज प्रबंधन की वरिष्ठ अधिकारी नलिनी पारेख द्वारा किया गया। विद्यार्थियों के साथ सभी शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने आरती कर माँ सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित की। बाद में, छात्र – छात्राओं ने शंख, रंगोली, थाली सज्जा और संस्कृत श्लोक की प्रतियोगिता में हिस्साी लिया। सभी कार्यक्रम कॉलेज के टर्फ पर संपन्न हुआ, शंख बजाने में शिक्षक और शिक्षिकाओं ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन दीप्ति पंचारिया और ओम पचीसिया ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रारंभ सरस्वती वंदन नृत्य, संगीत से हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में छात्रों ने भी नृत्य किया।
कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने उपस्थित बीस से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया, साथ ही कॉलेज की कोआर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय,, नलिनी पारेख, रेणुका भट्ट, प्रो दिव्या उदेशी, जितू भाई , उमेश ठक्कर, प्रो गार्गी, प्रो कृपा शाह , डॉ. वसुंधरा मिश्र एवं सभी छात्र छात्राओं के प्रतिनिधियों ने अपना सक्रिय योगदान दिया। महाप्रसाद और पूजा-अर्चना की सभी तैयारियाँ गैर शैक्षणिक कर्मचारियों द्वारा की गई। इस अवसर पर कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज शाह ने अपने वक्तव्य में सभी शिक्षकों को सरस्वती सम्मान समारोह की शुभकामनाएँ दी। प्रतिभागी विद्यार्थियों में एलोरा चौधरी, सुजल शाॉ, मोहित गुप्ता शंख प्रतियोगिता में क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय रहे। श्लोक प्रतियोगिता में गौरव चौधरी, कशिश दोलानी और ओम पचीसिया क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय, आरती थाली सज्जा में निहारिका मूधडा़, कृपा सहल, एलोरा चौधरी क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय एवं रंगोली सज्जा में प्रथम अलका सिंह, मौमिता राय, द्वितीय विनिता रे, श्रुति प्रधान और तृतीय स्थान पर रुकय्या कानपुरवाला और जाहरा कलकत्ता वाला रहे। इस अवसर पर शिक्षकों में प्रो चिरंजीत, प्रो अरुंधति, प्रो सम्पा सिन्हा आदि शिक्षकों ने शंख वादन कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया।
सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों तथा गैर शैक्षणिक कर्मचारियों एवं सुरक्षा कर्मियों को सभी मौसमी फलों का प्रसाद, लड्डू और खिचड़ी, सब्जी, कूल चटनी, आदि का महाप्रसाद ग्रहण किया । कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

तीन दिवसीय राष्ट्रीय शीतकालीन खेलों का समापन

विभिन्न प्रतियोगिताओं में 17 राज्यों के 250 प्रतिभागियों ने लिया था हिस्सा

कोलकाता। चमोली जिले के जोशीमठ में स्थित प्रसिद्ध हिमक्रीड़ा स्थली औली में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शीतकालीन खेलों का बुधवार को समापन हो गया  खेलों के समापन के मौक़े पर आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। पारम्परिक वेशभूषा में कलाकारों ने लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। वहीं इस मौके पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

पर्यटन विभाग, गढ़वाल मंडल विकास निगम, आईटीबीपी और उत्तराखंड स्कींइग एंड स्नो बोर्ड एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 07 से 09 फरवरी तक औली में तीन दिवसीय राष्ट्रीय शीतकालीन खेलों का आयोजन किया गया था। जिसका प्रदेश के मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू ने बतौर मुख्य अतिथि शुभारंभ किया था। खेल प्रतियोगिताओं में देश के 17 राज्यों के 250 से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। खिलाड़ियों ने अल्पाइन स्कीइंग के तहत सलालम और जायंट सलालम प्रतियोगिताओं में अपना हुनर दिखाया।

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि औली में आयोजित हुए राष्ट्रीय शीतकालीन खेलों के सफल आयोजन के लिए आयोजक बधाई के पात्र हैं। प्रदेश में शीतकालीन व साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से लगातार काम किया जा रहा है। इस प्रकार के आयोजन अधिक से अधिक हो इसके लिए प्रदेश के अन्य जगहों को वि‌कसित किया जाएगा, ताकि उत्तराखंड और देश का युवा अनेक स्पर्धाओं में प्रतिभाग कर सके। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

यह रहे विजेता

राष्ट्रीय शीतकालीन खेलों के तहत खेले गए अल्पाइन जाईट सलालम अंडर 18  पुरुष वर्ग में जम्मू कश्मीर के फैजान अहमद लोन पहले स्थान पर रहे जबकि जम्मू कश्मीर के ही अजहर फैयाज दूसरे और कर्नाटक के वर्णव वर्मा तीसरे स्थान पर रहे। अल्पाइन सलालम महिला वर्ग अंडर-21 प्रतियोगिता में हिमाचल की दिया ने खिताब अपने नाम किया। जबकि हिमाचल प्रदेश की ही शाक्षी दूसरे औ विपाशा तीसरे स्थान पर रही। अल्पाइन जायंट सलालम पुरुष वर्ग अंडर 16 में जम्मू कश्मीर के रोमान उल मदिना ने पहला स्थान प्राप्त ‌किया जबकि हिमाचल प्रदेश के शाहिल दूसरे और जम्मू कश्मीर के सदय जैन तीसरे स्थान पर रहे। स्नोबोर्ड सलालम पुरुष वर्ग अंडर 19 में जम्मू कश्मीर के वकार अहमद ने पहला स्थान ह‌ासिल किया। दिल्ली के वसीम अहमद दूसरे और जम्मू कश्मीर के मुबाशिर मकबुल तीसरे स्थान पर रहे। स्नो बोर्ड सलालम सीनियर पुरुष वर्ग का पहला, दूसरा और तीसरा स्थान आर्मी रेड ने जीता। जिसमें विवेक राणा पहले, रिंगजिंग नुरबू दूसरे और कुलविंदर शर्मा तीसरे स्थान पर रहे। उधर अलपाइन जायंट सलालम महिला वर्ग अंडर 18 में उत्तराखंड की सुहानी ठाकुर पहले, हिमाचल प्रदेश की पलक ठाकुर दूसरे और ‌जम्मू कश्मीर की रिधा अलताफ तीसरे स्थान पर रही।

वाणी प्रवाह 2022 – प्रतियोगिता – स्वरचित कविता- तिरंगे में लिपटे हुए फिर एक दिन

निहारिका मिश्रा

आज देश का हर नागरिक चाहता है,
बच्चा बच्चा हो सुभाष सा,
हर बच्चे में हो साहस
कर सके विरोध अन्याय का,
हर बच्चे में हो कुब्बत,
रखे मान अपनी आजादी,
संविधान और न्याय का l
इन्हीं लोगों की सोच बदल जाती है,
जब बात अपने बच्चों पर आती है l
क्यों? आखिर क्यों हैं ऐसा?
उन्हें किस बात का भय है?
कहीं यह भय
अपनों से बिछड़ने का तो नहीं?
या फिर मौत को गले लगाने का?
यदि ऐसा है तो विचार लें,
मौत सब को आती है l
इसका मतलब यह तो नहीं,
कि हम बेड़ियां को गले लगाएँ l
क्यों नहीं समझते फर्क आप?
आम आदमी होने
और एक फौजी होने का?
एक दायरे से मोहब्बत करने का?
और पूरे देश से मोहब्बत करने का?
एक परिवार को छोड़,
पूरे देश को एक परिवार बनाने का?
सबके दिलोदिमाग में बस जाने का?
सीना ताने तिरंगा लहराने का?
तिरंगे को फहराते हुए
राष्ट्रगान गाने का?
देश के लिए शान से जीने,
और शान से मर जाने का l
और फिर सबको मिले यह सौभाग्य…..
तिरंगे में लिपटे हुए फिर एक दिन,
अपनी गलियों में लौट आने का |