Saturday, October 31, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 312

दबंगई रोकेगा 13 साल की बच्ची द्वारा बनाया गया ऐप

गुरुग्राम: स्कूल कार्यक्रम में एक साथी छात्र की खिल्ली उड़ाये जाने का पांच साल पुराना दृश्य अनुष्का जॉली की याददाश्त में बहुत गहराई के साथ बैठ गया। इस घटना ने 13 साल की बच्ची को ‘कवच’ नाम से एक मोबाइल ऐप (Kavach Mobile App) बनाने के लिए प्रेरित किया। इस ऐप के लिए कक्षा आठवीं की छात्रा जॉली को 50 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
दबंगई रोकने के लिए तैयार किया डिजिटल मंच
स्कूल में दबंगई (Bulling) रोकने के लिए जॉली ने तीन साल पहले एक डिजिटल मंच तैयार किया, जिसका नाम है दबंगाई निरोधक दल यानी एंटी बुलिंग स्क्वाड। यह मंच विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को बिना नाम का खुलासा किए रिपोर्ट करने की सुविधा देने के लिए तैयार किया गया। इसे शैक्षणिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया गया। एबीएस का 100 से अधिक स्कूलों के 2000 से अधिक बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

क्या है ऐप की खासियत
कक्षा आठवीं की छात्रा ने ‘कवच’ नाम से एक मोबाइल ऐप भी बनाया है। इस ऐप की खासियत यह है कि विद्यार्थी और अभिभावक बिना अपने नाम का खुलासा किए छात्रों की दबंगई के खिलाफ शिकायत कर सकेंगे। इससे स्कूलों और परामर्शदाताओं को हस्तक्षेप करने और कार्रवाई करने का मौका मिल सकेगा। अपने नए विचार के कारण टीवी रियलिटी शो ‘शार्क टैंक इंडिया’ (Shark Tank India) की प्रतिभागी रहीं जॉली ने कहा, ”एक लड़की के साथ दबंगई की घटना मेरी याददाश्त में दर्ज हो गई और मैं अब तक उसका चेहरा नहीं भूल सकी। वह डरी हुई थी और खुद को असहाय महसूस कर रही थी।”

गुरुग्राम स्थित पाथवे स्कूल की छात्रा जॉली चाहती हैं कि स्कूल में दबंगई के खिलाफ एंबेसडर का एक मजबूत नेटवर्क बनाया जाए जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पीड़ित तक मंच या ऐप के जरिये पहुंच सके। जॉली ने बताया की दो निवेशकों ने उनके ऐप में 50 लाख रुपये का निवेश करने का प्रस्ताव दिया है। जॉली के विचार (आइडिया) में निवेश करने वालों में पीपल ग्रुप (शादी डॉट कॉम) के संस्थापक और सीईओ अनुपम मित्तल और बीओएटी के सह-संस्थापक अमन गुप्ता भी हैं। जॉली के पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के साथ-साथ एक उद्यमी भी हैं।

आयुर्वेदिक दवाओं से लौटी बेटी की आंखों की रोशनी, केन्या के पूर्व पीएम ने कहा भारत को शुक्रिया

नयी दिल्ली । कोरोना संकट के दौरान भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा गया। भारत ने अपनी कोरोना वैक्सीन बनाई और वह सबसे ज्यादा प्रभावी वैक्सीनों में से एक है। इस बीच, भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की भी चर्चा होने लगी है। दरअसल, अफ्रीकी देश केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी देख नहीं पा रही थी। केरल में आयुर्वेदिक दवाओं से उनका उपचार किया गया और चमत्कार हो गया। पूर्व पीएम रैला ओडिंगा की बेटी की आंखों की रोशनी लौट आई है। वह पीएम मोदी से मिले और भारत की इस प्राचीन पद्धति की खूब तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग आयुर्वेद के फायदे की चर्चा कर रहे हैं।
आयुर्वेदिक दवाओं की ‘जय जय’
भारतीय आयुर्वेदिक इलाज ने अफ्रीकी देश केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रैला ओडिंगा की बेटी की आंखों की रोशनी लौटा दी है। यह दावा खुद केन्या के पूर्व पीएम ने किया है। केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रैला ओडिंगा ने कहा कि मैं अपनी बेटी की आंखों का इलाज करवाने के लिए केरल के कोच्चि आया था। 3 सप्ताह के इलाज के बाद उसकी आंखों की रोशनी में काफी सुधार हुआ है। रैला ओडिंगा ने कहा कि ये मेरे परिवार के लिए एक बड़ा आश्चर्य था कि हमारी बेटी इलाज के बाद लगभग सबकुछ देख सकती है। ये किसी चमत्कार से कम नहीं है।
पूर्व पीएम ने की आयुर्वेद की तारीफ
भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्दति की प्रशंसा करते हुए रैला ओडिंगा ने कहा कि इन पारंपरिक दवाओं के इस्तेमाल से आखिरकार उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई। उन्होंने कहा कि इससे हमें काफी आत्मविश्वास मिला। रैला ओडिंगा ने कहा कि मैंने इस उपचार पद्दति को अफ्रीका में लाने और चिकित्सा के लिए इन पौधों के इस्तेमाल करने के लिए पीएम मोदी के साथ चर्चा की। बीते 2 सालों में प्रधानमंत्री मोदी दुनियाभर में अपने सार्वजनिक संबोधनों में भारतीय आयुर्वेद के बारे में बताते आए हैं। आयुर्वेद चिकित्सा पद्दति की वकालत करते आये हैं।
पीएम मोदी ने की केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री से मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रैला अमोलो ओडिंगा से मुलाकात की और भारत-केन्या संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में कहा कि निजी यात्रा पर भारत आए ओडिंगा ने मोदी से मुलाकात की, जिन्होंने लगभग साढ़े तीन साल बाद केन्याई नेता से मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं के बीच दशकों से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। मोदी ने भारत और केन्या में 2008 के बाद से ओडिंगा के साथ अपनी कई मुलाकात के साथ-साथ 2009 और 2012 में ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ को दिए गए उनके समर्थन को याद किया।

कोविड-19 से 2020 में उबरे एक तिहाई बुजुर्गों में नयी जटिलताएं सामने आईं : बीएमजे अध्ययन

बोस्टन (अमेरिका) । अनुसंधान पत्रिका ‘बीएमजे’ में प्रकाशित एक अवलोकन अध्ययन में दावा किया गया है कि 2020 में कोविड​​-19 से उबरे लगभग एक तिहाई बुजुर्गों में कम से कम एक नयी जटिलता की स्थिति विकसित हुई, जिसमें प्रारंभिक संक्रमण के बाद के महीनों में चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

अमेरिका में ‘ऑप्टम लैब्स और हार्वर्ड टी एच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ऐसी स्थितियों में हृदय, गुर्दे, फेफड़े और यकृत समेत कई प्रमुख अंगों एवं प्रणालियों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य जटिलताएं शामिल हैं।

अनुसंधानकर्ताओं ने अमेरिका में स्वास्थ्य बीमा योजना रिकॉर्ड का उपयोग करके 2020 में 65 या उससे अधिक उम्र के ऐसे 133,366 व्यक्तियों की स्थिति का अध्ययन किया, जो एक अप्रैल, 2020 से पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे।

इन व्यक्तियों का 2020, 2019 के दौरान के तीन गैर-कोविड ​​तुलना समूहों से मिलान किया गया और एक समूह में श्वसन संबंधी बीमारी का पता चला। अनुसंधानकर्ताओं ने फिर कोविड-19 से उबरने के 21 दिनों के बाद शुरू होने वाली किसी भी किस्म की नयी जटिलता को दर्ज किया। उन्होंने उम्र, नस्ल, लिंग और क्या रोगियों को कोविड-19 के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, के आधार पर कई महीनों में बीमारी से उत्पन्न स्थितियों के लिए अतिरिक्त जोखिम की गणना की।

नतीजे बताते हैं कि 2020 में कोविड-19 से ठीक होने वाले व्यक्तियों में से 32 प्रतिशत लोगों को एक या अधिक नयी प्रकार की जटिलताओं के कारण इलाज कराना पड़ा। उसी समूह से तुलना करने पर यह पता चला कि कोविड-19 के रोगियों में सांस लेने में परेशानी, थकान, उच्च रक्तचाप और मानसिक स्वास्थ्य सहित कई स्थितियों के विकसित होने का खतरा बढ़ गया था।

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा, ‘‘हमारे परिणाम स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और अन्य प्रमुख हितधारकों को भविष्य की स्वास्थ्य जटिलताओं को लेकर बड़े पैमाने पर अनुमान लगाने और स्वास्थ्य संसाधनों के उपयोग के लिए योजना में सुधार करने में मदद कर सकते हैं।’’

विश्व इतिहास पर 10 साल के बच्चे ने लिखी किताब

नयी दिल्ली । विश्व इतिहास पर 10 साल के जैक संगीत द्वारा लिखी गई किताब ‘वर्ल्ड हिस्ट्री इन थ्री प्वाइंट्स’ अपने सभी पाठकों को तीन छोटे-छोटे अध्यायों में विश्व इतिहास के सभी विषयों की जानकारी दिलचस्प तरीके से देने का वादा करता है। हैचेट इंडिया द्वारा प्रकाशित इस किताब में ‘‘प्राचीन मिश्र से लेकर चीन की राजशाही और काले दिनों, औद्योगिक क्रांति, चाणक्य, मैक्स वेबर से लेकर एलेक्सजेंडर और अशोक, क्रूसेड से लेकर ईरानी क्रांति, सुकरात और हेगल तक का जिक्र किया गया है।’’

इस किताब के साथ लेखन की दुनिया में कदम रख रहे संगीत ने पीटीआई/भाषा को बताया, ‘‘ऐसी दुनिया में जहां लोगों का ध्यान एक जगह बमुश्किल ही टिकता है और लोग ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसी माइक्रोब्लॉगिंग साइटों को ज्यादा पसंद करते हैं, इतिहास ऐसा विषय है जिसमें लोगों को अभी तक एक तथ्य के लिए दुनिया खंगालनी पड़ती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सामान्य किताबों में लेखक मिनट दर मिनट घटनाओं का जिक्र करते हैं और वह कुछ ज्यादा लंबी हो जाती हैं।’’

संगीत का कहना है, ‘‘मेरी किताब ‘वर्ल्ड हिस्ट्री इन थ्री प्वाइंट्स’ इतिहास को कम शब्दों में आसानी से समझाती है। मैंने विस्तार की जगह आसानी से तथ्यों/घटनाओं को समझाने का प्रयास किया है।’’ संगीत को नॉन-फिक्शन श्रेणी में दुनिया के सबसे कम उम्र के प्रकाशित लेखकों में गिना जा रहा है। वह बेंगलुरु के स्टार एजुकेशन अकादमी में पांचवीं के छात्र हैं।

आईपीएल : युवराज सिंह के बाद दूसरे सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ी बने ईशान किशन

बेंगलुरू । स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन इंडियन प्रीमियर लीग नीलामी के इतिहास में युवराज सिंह के बाद दूसरे सबसे महंगे भारतीय खिलाड़ी बन गए जिन्हें मुंबई इंडियंस ने सनराइजर्स हैदराबाद से लंबी होड़ के बाद 15 करोड़ 25 लाख रूपये में फिर खरीदा ।
भारत के इस युवा खिलाड़ी के लिये मुंबई और हैदराबाद के बीच जबर्दस्त होड़ लगी जिसमें मुंबई ने बाजी मारी । ईशान का आधार मूल्य दो करोड़ रूपये था ।
युवराज को दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) ने 2015 सत्र से पहले रिकॉर्ड 16 करोड़ रूपये में खरीदा था । इससे एक साल बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर ने उन्हें 14 करोड़ रूपये में खरीदा ।
आईपीएल के इतिहास में सबसे महंगे खिलाड़ी दक्षिण अफ्रीका के हरफनमौला क्रिस मौरिस हैं जिन्हें 2021 में मिनी नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने 16 . 25 करोड़ रूपये में खरीदा था जबकि उनका बेसप्राइज 75 लाख रूपये था । मौरिस ने उस सत्र में 11 मैचों में 15 विकेट लिये लेकिन बल्ले से कमाल नहीं कर सके ।
आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज पैट कमिंस को कोलकाता नाइट राइडर्स ने 2020 में 15 . 5 करोड़ रूपये में खरीदा था जिसे इस नीलामी में साढे सात करोड़ रूपये में फिर खरीदा । न्यूजीलैंड के काइल जैमीसन को आरसीबी ने 2021 में 15 करोड़ रूपये में और इंग्लैंड के हरफनमौला बेन स्टोक्स को राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स ने 2017 में 14.5 करोड़ रूपये में खरीदा था ।

इसरो का 2022 में पहला प्रक्षेपण : धरती पर नजर रखने वाला उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2022 के अपने पहले प्रक्षेपण अभियान के तहत धरती पर नजर रखने वाले उपग्रह ईओएस-04 और दो छोटे उपग्रहों को पीएसएलवी-सी 52 के जरिए सोमवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। इसरो ने इसे ‘‘अद्भुत उपलब्धि’’ बताया है।
अंतरिक्ष एजेंसी के प्रक्षेपण यान पीएसएलवी ने अंतरिक्ष के लिए सुबह पांच बजकर 59 मिनट पर उड़ान भरी और तीनों उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। साल के पहले मिशन पर करीबी नजर रख रहे वैज्ञानिकों ने इस पर खुशी जतायी और तालियां बजाईं।
सफल प्रक्षेपण की घोषणा करते हुए इसरो ने कहा कि करीब 19 मिनट की उड़ान के बाद प्रक्षेपण यान ने उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया। उसने बताया कि ईओएस-04, इन्सपायर सैट-1 और आईएनएस-2टीडी को सुबह छह बजकर 17 मिनट पर सूर्य की तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया और उपग्रहों को जिन कक्षाओं में स्थापित किया गया, वह निर्धारित कक्षाओं के ‘‘बेहद करीब’’ है।
इसरो के ‘टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क’ ने बताया कि आने वाले दिनों में उपग्रह को अंतिम परिचालन की स्थिति में लाया जाएगा, जिसके बाद वह आंकड़ें मुहैया कराना शुरू करेगा।
इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने सफलतापूर्वक प्रक्षेपण के बाद कहा, ‘‘पीएसएलवी-सी52/ईओएस-04 मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। प्राथमिक उपग्रह ईओएस-04 को पीएसएलवी-सी52 ने बेहद सटीक कक्षा में स्थापित किया और इसके साथ ही गए उपग्रह इन्सपायर सैट-1 और आईएनएस-2टीडी को भी सही कक्षा में स्थापित किया।’’
संयोग से आज का प्रक्षेपण सोमनाथ के हाल में अंतरिक्ष विभाग के सचिव और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद पहला अभियान भी है। उन्होंने इस मिशन को संभव बनाने के लिए हर किसी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा, ‘‘यह अंतरिक्ष यान देश की सेवा करने के वास्ते हमारे लिए बड़ी संपत्तियों में से एक होगा।’’
मिशन के निदेशक एस आर बीजू ने कहा, ‘‘आज हमने जो हासिल किया है, वह वाकई शानदार है।’’
उपग्रह निदेशक श्रीकांत ने कहा कि ईओएस-04 प्रक्षेपण यान से अलग होने के बाद बिल्कुल सही-सलामत है और प्रक्षेपण के बाद सौर पैनल खुद तैनात होते हैं और उन्होंने वांछित ऊर्जा देना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ दिनों में उपग्रह धरती की तस्वीरें देने लगेगा। इसकी सेवाएं कई सरकारी विभागों का अहम हिस्सा होंगी। प्रिंट तथा परीक्षण के रूप में उद्योग भागीदारी के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने के देश के सपने को साकार करने की दिशा में ईओएस-04 ने एक छोटा-सा कदम उठाया है। हम अपने प्रयास में कामयाब हो गए हैं।’’
इससे पहले आज के प्रक्षेपण के लिए रविवार को सुबह चार बजकर 29 मिनट पर साढ़े 25 घंटे की उलटी गिनती शुरू हुई थी। ईओएस-04 एक ‘रडार इमेजिंग सैटेलाइट’ है जिसे कृषि, वानिकी और वृक्षारोपण, मिट्टी की नमी और जल विज्ञान तथा बाढ़ मानचित्रण जैसे अनुप्रयोगों एवं सभी मौसम स्थितियों में उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन 1,710 किलोग्राम है। इस उपग्रह की उम्र 10 वर्ष है। बेंगलुरु के यू आर राव उपग्रह केंद्र से प्रक्षेपित उपग्रह 2,280 वॉट ऊर्जा पैदा करता है।
पीएसएलवी अपने साथ में इन्सपायर सैट-1 उपग्रह भी लेकर गया, जिसे भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी) ने कोलोराडो विश्वविद्यालय, बोल्डर की वायुमंडलीय और अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला के सहयोग से तैयार किया है जबकि दूसरा उपग्रह आईएनएस-2टीडी एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक उपग्रह है।
इन्सपायर सैट-1 उपग्रह का उद्देश्य आयनमंडल के गति विज्ञान और सूर्य की कोरोनल ऊष्मीय प्रक्रियाओं की समझ में सुधार करना है। इसका वजन 8.1 किलोग्राम है। वहीं, 17.5 किलोग्राम वजनी आईएनएस-2टीडी के उपकरण के रूप में एक थर्मल इमेजिंग कैमरा होने से उपग्रह भूमि की सतह के तापमान, आर्द्रभूमि या झीलों के पानी की सतह के तापमान, वनस्पतियों (फसलों और जंगल) और तापीय जड़त्व (दिन और रात) के आकलन में सहायता प्रदान करेगा।
यह पीएसएलवी की 54वीं उड़ान है और 6 पीएसओएम-एक्सएल (स्ट्रैप-ऑन मोटर्स) के साथ ‘पीएसएलवी-एक्सएल कॉन्फिगरेशन’ का उपयोग करते हुए 23वां मिशन है।

 सिंगल यूज प्लास्टिक पर 1 जुलाई से लगेगा प्रतिबन्ध

प्लास्टिक की कटलरी, झंडों व बैनर समेत कई उत्पाद शामिल
नयी दिल्ली ।  पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक के झंडों से लेकर ईयरबड तक पर एक जुलाई से पाबंदी होगी। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इसके उत्पादन, भंडारण, वितरण और इस्तेमाल से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। इसमें 30 जून से पहले इन पर पाबंदी की तैयारी पूरी करने को कहा गया है।
एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। ये प्लास्टिक उत्पाद लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। नुकसान को देखते हुए अगस्त 2021 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इस पर रोक को लेकर अधिसूचना जारी की थी। इसमें एक जुलाई से इस तरह के तमाम आइटमों पर पाबंदी लगाने को कहा गया था। इसी क्रम में सीपीसीबी की ओर से सभी संबंधित पक्षों के लिए नोटिस जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि 30 जून तक इन आइटमों पर पाबंदी की सारी तैयारी पूरी कर ली जानी चाहिए।
इन वस्तुओं पर रहेगी पाबंदी : सीपीसीबी के नोटिस के मुताबिक एक जुलाई से प्लास्टिक स्टिक वाले ईयरबड, गुब्बारे में लगने वाले प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, सजावट में काम आने वाले थर्माकोल आदि शामिल हैं। इसके साथ ही प्लास्टिक कप, प्लेट, गिलास, कांटा, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे जैसी कटलेरी आइटम, मिठाई के डिब्बों पर लगाई जाने वाली प्लास्टिक, प्लास्टिक के निमंत्रण पत्र, 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले पीवीसी बैनर आदि शामिल हैं।

रात में 860 डिग्री पर धधकती रहती है शुक्र ग्रह की सतह, नासा ने खींची पहली तस्‍वीर

वॉशिंगटन । अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने पार्कर सोलर प्रोब की मदद से पहली बार शुक्र ग्रह के सतह की अद्भुत तस्‍वीरें खींची हैं। इस तस्‍वीर में शुक्र ग्रह के ऊंचाई वाले इलाके और मैदानी क्षेत्र आदि स्‍पष्‍ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इन तस्‍वीरों को खींचने के लिए पार्कर सोलर प्रोब को कई बार शुक्र ग्रह के उन इलाकों का चक्‍कर लगाना पड़ा जहां अंधेरा था। कई बार की मेहनत के बाद नासा के वैज्ञानिकों को शुक्र ग्रह की अद्भुत तस्‍वीर मिली है। नासा के वैज्ञानिक ब्रायन वुड ने कहा, ‘आकाश में शुक्र ग्रह तीसरी सबसे चमकीली वस्‍तु है लेकिन अभी हाल तक शुक्र ग्रह के बारे में हमें बहुत कम जानकारी थी। शुक्र ग्रह की सतह कैसी दिखती है, यह भी नहीं पता था। ऐसा इसलिए था कि क्‍योंकि शुक्र ग्रह का वातावरण बहुत घना था जिससे साफ तस्‍वीरें आ नहीं पाती थीं।’ वुड इस शोध के शीर्ष लेखक हैं और वरिष्‍ठ भौतिकविद हैं।
शुक्र ग्रह की सतह पर तापमान 863.33 ड‍िग्री फारेहाइट
वुड ने कहा, ‘अब अंतत: हम पहली बार अंतर‍िक्ष से शुक्र ग्रह की सतह को देख पा रहे हैं।’ इस तस्‍वीर से शुक्र ग्रह की विविध भौगोलिक स्थिति का पता चला है। इसमें ऊंचाई वाले और निचले इलाके तथा कई भौगोलिक विशेषताएं नजर आ रही हैं जो खोज के लिए काफी अहम हो सकती हैं। इस आंकड़े से यह भी पता चला है कि शुक्र ग्रह की सतह पर तापमान 863.33 फारेहाइट है। इससे पहले भी शुक्र ग्रह की सतह की तस्‍वीरें ली गई थीं कि लेकिन उतनी साफ नहीं थी जिससे की इंसान की आंखों से उसे देखा जा सके। दरअसल, शुक्र ग्रह पर सल्‍फ्यूरिक एसिड और कार्बन डॉई ऑक्‍साइड के बादल छाए रहते हैं। ये इतने घने होते हैं कि तस्‍वीरें साफ नहीं आ पाती हैं। वह भी तब जब शुक्र ग्रह रोशनी में मोती की तरह से नजर आता है। घने बादल होने की वजह से रोशनी बहुत कम मात्रा पर शुक्र ग्रह की सतह तक पहुंच पाती है।
गर्म लोहे की तरह से चमकती दिखाई देती है चट्टानी सतह
रात के समय भी शुक्र ग्रह बहुत गर्म होता है लेकिन पार्कर प्रोब ने उसकी तस्‍वीर खींचने में सफलता हासिल कर ली। वुड ने कहा, ‘शुक्र ग्रह की सतह रात में भी 860 डिग्री गर्म रहती है। शुक्र ग्रह की सतह इतना गर्म होती है कि उसकी चट्टानी सतह चमकती दिखाई देती है। यह कुछ उसी तरह से होती है जैसे भट्ठी में से निकाले जाने पर लोहा दिखता है।

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने बनाया ‘नकली सूरज’, तोड़े ऊर्जा के सारे व‍िश्‍व रिकॉर्ड

लंदन । ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने ‘नकली सूरज’ बनाने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने सूरज की तकनीक पर परमाणु संलयन को अंजाम देने वाले एक रिएक्‍टर को बनाने में सफलता हासिल कर ली है जिससे अपार ऊर्जा निकलती है। ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी के पास किए गए प्रयोग के दौरान 59 मेगाजूल ऊर्जा इस रिएक्‍टर से निकली जो दुनिया में अपने आप में रेकॉर्ड है। इतनी मात्रा में ऊर्जा पैदा करने के लिए 14 किलो टीएनटी का इस्‍तेमाल करना पड़ता है।
इस शानदार प्रॉजेक्‍ट को ज्‍वाइंट यूरोपीयन टोरुस ने कूल्‍हाम में अंजाम दिया है। वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि को मील का पत्‍थर करार दिया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से सितारों की ऊर्जा का दोहन किया जा सकेगा और धरती पर सस्‍ती और साफ ऊर्जा मिलने का रास्‍ता साफ होगा। प्रयोगशाला ने 59 मेगाजूल ऊर्जा पैदा करके साल 1997 में बनाया गया अपना ही रेकॉर्ड तोड़ दिया है। ब्रिटेन के परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण ने बुधवार को इस सफल प्रयोग का ऐलान किया।
परमाणु संलयन पर आधारित ऊर्जा को वास्‍तविक रूप दिया।
एजेंसी ने कहा कि 21 दिसंबर को आए परिणाम विश्‍व‍भर में परमाणु संलयन की तकनीक पर आधारित ऊर्जा के सुरक्षित और सतत आपूर्ति की क्षमता का प्रदर्शन है। ब्रिटेन के विज्ञान मंत्री जार्ज फ्रीमैन ने इस परिणाम की तारीफ की है और इसे मील का पत्‍थर करार दिया है। फ्रीमैन ने कहा, ‘ये इस बात का प्रमाण हैं कि ब्रिटेन में उल्‍लेखनीय शोध और नई खोजों को बढ़ावा दिया गया है और यूरोपी सहयोगियों की मदद से परमाणु संलयन पर आधारित ऊर्जा को वास्‍तविक रूप दिया गया है।
परमाणु संलयन तकनीक में ठीक उसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया जाता है जो सूरज गर्मी पैदा करने के लिए करता है। ऐसा माना जाता है कि भविष्‍य में इससे मानवता को भरपूर, सुरक्षित और साफ ऊर्जा स्रोत मिलेगा जिससे जलवायु परिवर्तन की समस्‍या से निजात मिल सकेगा। परमाणु संलयन पर केंद्रीत ब्रिटिश प्रयोगशाला में यह सफलता वर्षों के प्रयोग के बाद मिली है। इस प्रयोगशाला में डॉनट के आकार की मशीन लगाई गई है जिसे टोकामैक नाम दिया गया है।
सूरज के केंद्र की तुलना में 10 गुना ज्‍यादा गर्म किया
जेईटी प्रयोगशाला में लगाई टोकामैक मशीन दुनिया में सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली है। इस मशीन के अंदर बहुत कम मात्रा में ड्यूटीरियम और ट्रीटीयम भरा गया। ये दोनों ही हाइड्रोजन के आइसोटोप हैं और ड्यूटीरियम को हैवी हाइड्रोजन कहा जाता है। इसे सूरज के केंद्र की तुलना में 10 गुना ज्‍यादा गर्म किया गया ताकि प्‍लाज्‍मा का निर्माण किया जा सके। इसे सुपरकंडक्‍टर इलेक्‍ट्रोमैग्‍नेट का इस्‍तेमाल करके एक जगह पर रखा गया। इसके घूमने पर अपार मात्रा में ऊर्जा निकली। परमाणु संलयन से पैदा हुई ऊर्जा सुरक्षित होती है और यह एक किलोग्राम में कोयला, तेल या गैस से पैदा हुई ऊर्जा की तुलना में 40 लाख गुना ज्‍यादा ऊर्जा पैदा करती है।

भारत की ‘राइटिंग विद फायर’ ऑस्कर 2022 के लिए नामांकित

नयी दिल्ली । भारत के डॉक्यूमेंट्री ‘राइटिंग विद फायर’ ने 94वें ऑस्कर अवॉर्ड्स की अंतिम नॉमिनेशंस लिस्ट में जगह बनाई है। ट्रेसी एलिस रॉस और लेसली जॉर्डन ने मंगलवार शाम को ‘अकैडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ के ट्विटर अकाउंट पर इस नॉमिनेशंस की घोषणा की।
रिंटू थॉमस और सुष्मित घोष द्वारा निर्देशित ‘राइटिंग विद फायर’ में ‘खबर लहरिया’ के उत्थान की कहानी बयान की गई है, जो दलित महिलाओं द्वारा निकाला जा रहा भारत का एकमात्र अखबार है। इस डॉक्यूमेंट्री में दलित महिलाओं के एक समूह की कहानी दिखाई गई है, जिन्होंने अपनी मुख्य संवाददाता मीरा के नेतृत्व में अखबार को प्रासंगिक रखने के उद्देश्य से उसे प्रिंट से डिजिटल माध्यम में लाया। ऑस्कर पुरस्कार समारोह का आयोजन मार्च 27 को लॉस ऐंजलिस के डॉल्बी थिएटर में किया जाएगा। इस डॉक्यूमेंट्री के को-डायरेक्टर घोष ने कहा, ‘हम काफी खुश हैं। यह हमारे लिए और भारतीय सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ा क्षण है।’