Friday, April 10, 2026
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सुशोभित हुई आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा, नये सिरे से संवर रहा है केदारनाथ धाम

  • 225 करोड़ रुपये की लागत से प्रथम चरण के निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं

उत्तराखंड की ये देवभूमि प्राचीन काल से ही ऋषियों की तपोस्थली रही है। साथ ही योगनगरी के रूप में ये विश्व के लोगों को आकर्षित करती रही है। हिमालय की ये तपोभूमि, जो तप और त्याग का मार्ग दिखाती है, उसके लिए पृथक राज्य के रूप में उत्तराखंड के निर्माण का सपना अटल बिहारी वाजपेयी जी ने पूरा किया था। अटल जी मानते थे कनेक्टिविटी का सीधा कनेक्शन विकास से है। उन्हीं की प्रेरणा से आज देश में कनेक्टिविटी के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अभूतपूर्व स्पीड और स्केल पर काम हो रहा है। उत्तराखंड की सरकार भी इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। बाबा केदार के आशीर्वाद से केदारधाम की भव्यता को और बढ़ाया जा रहा है, श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। चारधाम को जोड़ने वाली ऑल वैदर रोड़ पर तेज़ी से काम चल रहा है। चारधाम परियोजना, देश और दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बहुत बड़ी सुविधा तो बना ही रही है, साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को भी आपस में जोड़ रही है। कुमाऊं में चारधाम रोड के लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर हिस्से से इस क्षेत्र के विकास को नया आयाम मिलने वाला है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से भी उत्तराखंड की रेल कनेक्टिविटी को और विस्तार मिलेगा। सड़क और रेल के अलावा एयर कनेक्टिविटी को लेकर हुए कार्यों का लाभ भी उत्तराखंड को मिला है। देहरादून हवाई अड्डे की क्षमता को 250 पैसेंजर से बढ़ाकर 1200 तक पहुंचाया गया है। प्रधानमंत्री के दिशानिर्देशों के मुताबिक उत्तराखंड में हैलीपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

आदिगुरू शंकराचार्य की प्रतिमा

साल 2013 में आई भीषण आपदा के बाद सबसे बड़ी चुनौती केदारपुरी के पुनर्निर्माण की थी। इसकी वजह यह थी कि त्रासदी में केदारनाथ के 23 हेक्टेयर क्षेत्र में से करीब 12-13 हेक्टेयर बाढ़ में बह गया था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में केदारपुरी का मास्टर प्लान इस तरह से तैयार किया गया है जिससे यह लंबे समय तक टिका रहे। पुनर्निर्माण की योजना से लेकर उसके कार्यनान्वयन की तैयारी इस प्रकार से की गयी कि नये इन्फ्रास्ट्रक्चर में कम से कम सौ साल कोई परेशानी न आए। माननीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन और निर्देशन में श्री केदारनाथ धाम में पांच महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य आरंभ हुए।
225 करोड़ रुपये की लागत से प्रथम चरण के निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। पहले चरण में श्री आदि शंकराचार्य समाधि का निर्माण, सरस्वती नदी एवं उसके घाटों की सुरक्षा, तीर्थ पुरोहितों के आवास निर्माण पर 70 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं तथा मंदाकिनी नदी एवं उसके घाटों की सुरक्षा और मंदाकिनी नदी पर 60 मीटर लंबे सेतु के निर्माण पर 155 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसके अतिरिक्त आस्था पथ का काम किया गया है ताकि वहां रहने वालों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार का कष्ट न हो। इसके अतिरिक्त श्री केदारनाथ धाम में भारत सरकार के संस्कृति विभाग के नेतृत्व में प्राचीन मूर्तियों का ओपन म्यूजियम बनाया जा रहा है। केदारपुरी के पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 184 करोड़ रुपये की लागत वाले निर्माण कार्य चल रहे हैं। ये काम अब अपने अंतिम चरण में है। इसे विश्व स्तरीय धार्मिक स्थल बनाया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य केदारनाथ की धारक क्षमता को ध्यान में रखकर किया गया है। विशेष ध्यान इस बात पर दिया गया है कि पुनर्निर्माण से जुड़ा हुआ जो भी काम हो वो पुरानी शैली में ही हो। श्री केदानाथ धाम में निम्न विकास कार्य किये जा रहे हैं।
केदारनाथ धाम कें मार्ग पर बनाए जाएंगे फैब्रिकेटेड रेन शेल्टर 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर उत्तराखंड सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। इस कड़ी में केदारनाथ विकास प्राधिकरण/टिहरी विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के लिए स्वीकृत 422.39 लाख रुपये की लागत वाली योजना के लिए शासन की ओर से 168.96 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गयी है। इसके तहत श्री केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग में कई जगह फैब्रिकेटेड रेन शेल्टर का निर्माण किया जाएगा। इसका सीधा लाभ केदारनाथ आने वाले घरेलू और विदेशी तीर्थयात्रियों को मिलेगा।
केदारनाथ विकास प्राधिकरण/टिहरी विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के अंतर्गत 133.25 लाख रुपये की लागत से श्री केदारनाथ धाम पैदल यात्रा मार्ग के गौरीकुंड से जंगल चट्टी मार्ग खंड में निश्चित अंतराल पर फैब्रिकेटेड रेन शेल्टर शेड का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से 53.30 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गयी है। जबकि लगभग 145.30 लाख रुपये की लागत से श्री केदारनाथ धाम पैदल मार्ग के अंतर्गत भीमबली से रामबाड़ा मार्ग खंड (वाया नवनिर्मित वैकल्पिक मार्ग) के मध्य निश्चित अंतराल पर फैब्रिकेटेड रेन शेल्टर शेड का निर्माण किया जाना है। इसके लिए शासन की ओर से 58.12 लाख रुपये का बजट जारी किया गया। ऐसे ही 143.84 लाख रुपये की लागत से बनने वाले श्री केदारनाथ धाम पैदल यात्रा मार्ग के अंतर्गत जंगल चट्टी से भीमबली मार्ग खंड में निश्चित अंतराल पर फैब्रिकेटेड रेन शेड के निर्माण के लिए शासन की ओर से 57.54 लाख रुपये जारी किए गए।
केदारनाथ धाम में रावल और पुजारियों के लिए होगा तीन मंजिला इमारत का निर्माण
विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम में यात्रा और पूजा का सफल आयोजन कराने के लिए रावल और पुजारियों को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलेगी। इसके लिए केदारनाथ धाम में रावल व पुजारियों के लिए तीन मंजिला इमारत का निर्माण किया जाएगा। जिसके लिए शासन की ओर से 10 करोड़ रुपये का बजट जारी किए गए हैं। केदारनाथ के रावल ही धाम में छह माह की पूजा-अर्चना के लिए पुजारी को अधिकृत करते हैं।
श्री केदारनाथ धाम से करीब 300 मीटर सरस्वती नदी समीप बनने वाले तीन मंजिला इमारत में 18 कक्षों का निर्माण किया जाएगा। 6.39 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस इमारत में रावल निवास, पुजारी आवास, भोग मंडी, पंथेर आवास, समालिया आवास, वेदपाठी आवास, पूजा कार्यालय आदि की व्यवस्था की जाएगी। जिसके लिए उत्तराखंड शासन की ओर से 10 करोड़ रुपये की धनराशि उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड को प्राप्त हो चुकी है। जिसकी पहली किस्त मार्च और दूसरी किश्त जुलाई को जारी की गयी है।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रसाद योजना
प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रसाद योजना के तहत श्री केदारनाथ के रूट पर अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 34.78 करोड़ की स्वीकृति प्रदान करते हुए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की ओर से अब तक 27.83 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है। योजना के तहत धाम में होने वाले सभी विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं। जबकि श्री बद्रीनाथ धाम के लिए योजना के तहत भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय की ओर से 39.23 करोड़ की  धनराशि स्वीकृत करते हुए 11.77 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है। जिसकी मदद से बद्रीनाथ धाम में योजना के तहत होने वाले कार्यों को तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रसाद योजना के तहत गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए होने वाले विकास कार्यों की 54.35 करोड़ रुपये की डीपाआर पर प्रशासनिक स्वीकृति मिल गयी है।

केदारनाथ में बनने वाले म्यूजियम में संजो कर रखी जाएगी उत्तराखंड की संस्कृति
भारत सरकार के संस्कृति विभाग के नेतृत्व में श्री केदारनाथ धाम में बनाए जाने वाले म्यूजियम में उत्तराखंड की संस्कृति को संजो कर रखा जाएगा। जिसमें मुख्य रूप से प्राचीन शिव मूर्तियों व चित्रों को शामिल किया जाएगा। केदारनाथ धाम में होने वाले विभिन्न विकास कार्यों के तहत अस्पताल, अतिथि गृह, पुलिस स्टेशन व अन्य निर्माण कार्याेँ के लिए 8 भवनों का ध्वस्तीकरण किया जाएगा।
साल 2013 में आई आपदा से हुई क्षति से उभरने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में श्री केदारनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न निर्माण व पुनिर्माण कार्य किए जाने हैं। केदारनाथ धाम में प्राचीन मूर्तियों का ओपन म्यूजियम बनाया जाएगा। जिसका कार्य भारत सरकार के संस्कृति विभाग के नेतृत्व में पूरा किया जाएगा। साथ ही तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरस्वती एवं मंदाकिनी नदी के संगम का अत्याधुनिक तरीके से पूर्ननिर्माण किया जाएगा। इसके अलावा श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दी जाए। इसके लिए धाम के पास अस्पताल भी तैयार किया जाएगा, जो अत्याधुनिक तकनीक और विभिन्न प्रकार की सुविधाओं से लैस होगा। इसके साथ ही धाम के आसपास एक अतिथि गृह, पुलिस स्टेशन और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी तैयार किया जाना प्रस्तावित है।
केदारनाथ धाम में बने जीएमवीएन और प्रशासनिक भवन वर्तमान में चालू हालत में हैं। जिसमें से 4 भवनों में प्रत्येक भवन में 5 कक्ष कुल 20 कक्ष हैं। जो यात्राकाल में जिला प्रशासन द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए शासकीय कार्य के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। अन्य 4 भवन हालनुमा कक्ष के रूप में निर्मित हैं। जिनका उपयोग वर्तमान में लाया जा रहा है। इन सभी भवनों का करीब 77.00 लाख रुपये की लागत से ध्वस्तीकरण किया जाएगा। जिनके स्थान में करीब 5462 लाख रुपये की लागत से धाम में अन्य भवनों का निर्माण कार्य किए जाएंगे।
श्री केदारनाथ में सुशोभित हुई आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा
श्री केदारनाथ धाम में आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा सुशोभित हुई। मैसूर के मूर्तिकारों द्वारा कृष्णशिला पत्थर से तैयार की 12 फीट ऊंची प्रतिमा की चमक के लिए उसे नारियल पानी से पॉलिश किया गया है।
साल 2013 में आई दैवीय आपदा में आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि भी बह गई थी। जिसके बाद माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देश में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि विशेष डिजाइन से तैयार की गई है। आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे छह मीटर जमीन की खुदाई कर बनाई गई है। समाधि के मध्य में मैसूर के मूर्तिकारों द्वारा तैयार प्रतिमा को सुशोभित किया गया।
पांच पीढ़ियों से मूर्तिकला की विरासत को संजोए हुए मैसूर के मूर्तिकार योगीराज शिल्पी ने अपने पुत्र अरुण के साथ मिलकर मूर्ति का काम पूरा किया है। आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा निर्माण के लिए देश भर के मूर्तिकारों की ओर से अपना मॉडल पेश किया गया था। जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से योगीराज शिल्पी को प्रतिमा तैयार करने के लिए अनुबंध किया गया था। इस विशेष परियोजना के लिए योगीराज ने कच्चे माल के रूप में लगभग 120 टन पत्थर की खरीद की और छेनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इसका वजन लगभग 35 टन है। योगीराज ने साल 2020 के सितंबर माह से प्रतिमा बनाने का काम शुरू किया था। मूर्तिकला आदि शंकराचार्य को बैठने की स्थिति में प्रदर्शित करती है।
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केन्द्र सरकार और राज्य सरकार का एजेंडा उत्तराखंड का समग्र विकास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीति सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास को लेकर उत्तराखंड का समग्र विकास करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इसका प्रदेश के हर एक व्यक्ति को सीधा लाभ मिलेगा।
सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री

आने वाले 10 सालों में रिकोर्ड तोड़ तीर्थयात्री आएंगे केदारनाथ :  पीएम मोदी

-पीएम मोदी ने आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का किया अनावरण

– नया आकर्षण बनी आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा

देहरादून। दिवाली के ठीक एक दिन बाद उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चारधामों में से एक तथा भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री केदारनाथ धाम पहुंचे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आदि गुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल पर उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इससे पहले गर्भगृह में पूजन करने के बाद पीएम ने यहां की परिक्रमा की। इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम में हो रहे तमाम विकास कार्यों से उत्तराखंड के पर्यटन को बहुत फायदा मिलेगा। पिछले 100 सालों में जितने श्रद्धालु यहां आए हैं, आने वाले 10 सालों में रिकोर्ड तोड़ पर्यटक और श्रद्धालु केदारनाथ आएंगे।

धाम में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित होने से उत्तराखंड पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही श्री केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों के लिए पर्यटन की दृष्टि से नया आकर्षित स्थल भी तैयार हुआ है। इससे प्रदेश और चारधाम यात्रा से जुड़े व्यापारियों व कारोबारियों को न केवल आर्थिक लाभ मिलेगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ में तमाम निर्माण कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। पीएम मोदी ने कहा कि कि बाबा केदार में आकर बेहद अलग अनुभूति होती है, जो बरबस मुझे अपनी तरफ खींच लेती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य के सामने बैठकर मुझे आदि शंकराचार्य के नजरों से तेज पुंज नजर आ रहा था। गरूड़ चट्टी से मेरा विशेष लगाव है। सरस्वती के घाट, मंदाकनी पर पुल बनाकर यात्रा सुगम होगी। पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड में होमस्टे के नेटवर्क से देश-दुनिया के पर्यटकों व तीर्थयात्रियों को घर जैसी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। श्री केदारनाथ धाम में परंपरा और आधुनिकता के मेल से हुए विकास कार्यों से श्रद्धालुओं व तीर्थ पुरोहितों को सहायता मिलेगी। साथ ही केदारनाथ धाम तक तीर्थयात्रियों को केबल कार से पहुंचाने की भी तैयारी की जा रही है।

वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का हिमालय और हिमालय के तमाम मंदिरों से विशेष लगाव रहा है। प्रधानमंत्री ने हमेशा से यहां से आध्यात्मिक दिव्य ऊर्जा प्राप्त की है। पीएम मोदी का धन्यवाद करते हुए सीएम धामी ने कहा कि उनके निर्देश पर ही केदारनाथ के पुनर्निर्माण के कार्य संपन्न हो रहे हैं। साल 2013 में आई दैवीय आपदा में आदि गरु शंकराचार्य की समाधि बह गई थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देश में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि अद्भुत तरीके से बनाई गई है। इसका सीधा लाभ उत्तराखंड के पर्यटन और यहां के स्थानीय लोगों को मिलेगा।

सशक्तीकरण की संस्कृति का प्रतीक है रवीन्द्र सरणी का श्री श्री महालक्ष्मी मंदिर

उत्तर कोलकाता के बड़ाबाजार में बहुत से मंदिर हैं और बहुत से मंदिर ऐतिहासिक भी हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक मंदिर है श्री श्री महालक्ष्मी मंदिर। श्री श्री महालक्ष्मी मंदिर 100 साल पुराना है। उत्तर कोलकाता में रवीन्द्र सरणी पर स्थित यह मंदिर काफी लोकप्रिय है। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह मंदिर कभी शिव मंदिर ही था। इस मंदिर को सशक्तीकरण का प्रतीक कहा जाये तो यह गलत नहीं होगा। यह मंदिर न सिर्फ सिर्फ देवी महालक्ष्मी के स्वरूप को समर्पित है बल्कि इस मंदिर की सेवायत भी एक महिला ही हैं। कोलकाता में यह एकमात्र मंदिर है जहाँ माँ महालक्ष्मी नारायण के साथ नहीं हैं। इस मंदिर में महालक्ष्मी के साथ गणेश जी की प्रतिमा आपको दिखेगी।


मंदिर की स्थापना के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। मंदिर की स्थापना चुन्नी लाल त्रिवेदी ने की थी। दरअसल, पास ही स्थित लोहिया अस्पताल के मालिकों ने उनसे शिव मंदिर की स्थापना करने को कहा था और चुन्नी लाल त्रिवेदी के परिवार की कुलदेवी महालक्ष्मी हैं तो उन्होंने शिव मंदिर तो स्थापित किया ही, इसके साथ ही अनुमति लेकर महालक्ष्मी मंदिर भी स्थापित किया। इस मंदिर में महालक्ष्मी की 10 विद्याओं में कमला स्वरूप में देवी की पूजा होती है। यहाँ देवी की विशेष साधना होती है और मान्यता है कि यहाँ मनोकामना पूरी होती है। करोड़ों व्यवसायियों ने माँ महालक्ष्मी की पूजा कर सफलता प्राप्त की। यह महानगर में अकेला महालक्ष्मी मंदिर है। लक्ष्मी जन्मोत्सव इस मंदिर का प्रमुख त्योहार है जो राधा अष्टमी को मनाया जाता है। इसके बाद दीपावली का त्योहार उत्साह से मनाया जाता है और दूर – दूर से दर्शनार्थी आते हैं। मंदिर में चारों वेदों का पाठ होता है। उत्सवों के दौरान मंदिर में पुलिस व्यवस्था सख्त होती है।

इस मंदिर की सेवायत एक महिला हैं। प्रो. ममता त्रिवेदी इस समय यह बड़ा दायित्व सम्भाल रही हैं। 2013 से ही यह जिम्मेदारी वे सम्भाल रही हैं। प्रो. त्रिवेदी कहती हैं कि उनको अपने परिवार का पूरा सहयोग मिल रहा है औऱ सारा परिवार ही मंदिर का कार्य़ करता है। मंदिर में महालक्ष्मी की प्रतिमा दक्षिण भारत से है और श्री गणेश जी की प्रतिमा जयपुर से आई है। इस मंदिर में देवी का चेहरा बहुत सुन्दर और सौम्य है।

पास ही हनुमान जी की प्रतिमा और शिवलिंग है। यही शिवलिंग सबसे पहले स्थापित किया गया था। कोरोना काल को देखते हुए दर्शन के नियमों में बदलाव किया गया है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी दर्शन की व्यवस्था की जा रही है।
प्रो. त्रिवेदी मंदिर का विस्तार करना चाहती हैं। युवा पीढ़ी को परम्परा से अवगत करवाना चाहती हैं। संस्कृति और आध्यात्मिक अध्ययन की परम्परा से जोड़ना चाहती हैं। छात्रवृत्ति दादा जी के नाम पर शुरू करना चाहती हैं और मंदिर को भी थोड़ा और बड़ा करना चाहती हैं। निश्चित रूप से यह मंदिर परम्परा और परिवर्तन का शानदार संयोजन है।

 

मराठी कथाकार गुरुनाथ नाईक का निधन

पुणे : कई रहस्यपूर्ण उपन्यासों सहित 1,200 से अधिक पुस्तकें लिखने वाले प्रसिद्ध मराठी कथाकार गुरुनाथ नाईक का लंबी बीमारी के बाद महाराष्ट्र में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। नाईक के पारिवारिक सूत्रों ने गुरुवार को उनके निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मूल रूप से गोवा के रहने वाले नाईक का निधन बुधवार शाम को पुणे के अस्पताल में हुआ।
सोलह साल पहले मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित होने के बाद से वह लिखने में अक्षम थे। उनका उपचार चल रहा था। नाईक ने 1970 से 1982 के बीच 700 से अधिक रहस्यपूर्ण उपन्यास लिखे और अपनी किताबों में कई काल्पनिक रहस्यमयी चरित्र गढ़े।
‘जहरी पे’, ‘कैबरे डांसर’, ‘महामानव’, ‘रक्तचा पौस’ उनकी कुछ लोकप्रिय पुस्तकों में शामिल हैं। उन्होंने अपनी कहानियां आकाशवाणी पर भी सुनाईं। नाईक ने लातूर में एक मराठी समाचार पत्र के संपादक के तौर पर भी सेवाएं दीं।
(साभार – दैनिक भास्कर)

प्रख्यात वायलिन वादक प्रभाकर जोग का निधन

पुणे : प्रख्यात वायलिन वादक प्रभाकर जोग का गत रविवार को यहां अपने आवास पर अधिक आयु संबंधी दिक्कतों के कारण निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे। उनके परिवार के करीबी सूत्रों ने यह जानकारी दी।।
उन्होंने भारत और दुबई में ‘गनारे वायलिन’ शो के तहत 80 से अधिक एकल प्रस्तुति दी थी। छह दशकों से अधिक समय तक संगीतज्ञ और संगीतकार के रूप में काम करने वाले जोग ने मराठी और हिंदी फिल्म संगीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि संगीत क्षेत्र ने एक सच्चा साधक खो दिया है। बारह वर्ष की आयु में, जोग ने संगीत कार्यक्रमों में वायलिन बजाना शुरू कर दिया था क्योंकि पिता की अप्रत्याशित मृत्यु के बाद उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।
उन्होंने बाद में संगीतकार सुधीर फड़के (जो बाबूजी के नाम से लोकप्रिय थे) के सहायक के रूप में काम किया। ‘गीत रामायण’ सीरीज के गीतों में जोग की वायलिन धुनें हैं। उन्होंने फड़के के साथ ‘गीत रामायण’ के करीब 500 शो किए। फिल्मों में, उन्हें मराठी फिल्म ‘श्री गुरुदेवदत्त’ में वायलिन वादक के रूप में पहला काम मिला। उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए थे जिनमें 2015 में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ के लिए प्रतिष्ठित गान सम्राज्ञी लता मंगेशकर पुरस्कार भी शामिल है।
मंगेशकर (92) ने ट्विटर पर जोग को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मुझे यह सुनकर दुख हुआ कि महान वायलिन वादक और संगीतकार प्रभाकर जोग का आज निधन हो गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।’ जोग की आत्मकथा ‘स्वर आले जुलुनी’ में उनके जीवन और उनकी संगीत यात्रा का विवरण है।

नोटबंदी, डिजिटल भुगतान की सुविधा के बीच जारी है ‘नकदी मैजिक’

कोलकाता : नोटबंदी के सालों बाद भी नकदी का जादू जारी है। अब भी यह भुगतान का सर्वप्रिय तरीका बना हुआ है।अब तो इसका इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। 8 अक्टूबर को खत्म पखवाड़े (14 दिन की अवधि) में लोगों के पास नकदी बढ़कर 28.30 लाख करोड़ रुपये हो गयी। यह नोटबंदी से पहले 4 नवंबर 2016 को 17.97 लाख करोड़ रुपये था यानी करीब पांच साल में लोगों के पास नकदी 57.48% बढ़ी है। गत 8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने 500 और 1,000 रुपए के नोटों को बंद कर दिया था। बाद में 500 और 2000 रुपये के नए नोट जारी किए गए। नोटबंदी के बाद से सरकार लगातार सिस्टम से कैश घटाने के लिए डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहित कर रही है। यूपीआई जैसे भुगतान के साधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, नकदी का इस्तेमाल फिर भी कम होता नहीं दिख रहा।

लॉकडाउन में लोगों के पास बढ़ी नकदी
सिस्टम में कैश के बढ़ने का एक कारण कोरोना महामारी को माना जा रहा है। 2020 में जब कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन लगाया गया था तो अपनी रोजाना की जरूरतों का सामान खरीदने के लिए लोगों ने नकदी को जमा करना शुरू कर दिया था।

त्योहारी सीजन में माँग बढ़ी  
त्योहारी सीजन के दौरान, नकदी की माँग ज्यादा रहती है क्योंकि बड़ी संख्या में व्यापारी अभी भी एंड-टू-एंड ट्रांजैक्शन के लिए नकद भुगतान पर निर्भर हैं। लगभग 15 करोड़ लोगों के पास बैंक अकाउंट नहीं होना भी इसकी एक वजह है। इसके अलावा, टीयर 1 सिटी के 50% की तुलना में टियर 4 सिटी में 90% ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन का पेमेंट मोड नकदी होती है।

नकदी का गणित
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया  के अनुसार, ‘जनता के पास कैश का कैल्कुलेशन बैंकों के पास मौजूद कैश को सुर्कुलेशन इन करेंसी से घटाकर किया जाता है। सीआईसी का मतलब देश के भीतर मौजूद वो नकदी  या करेंसी है जिसका उपयोग  उपभोक्ता और व्यवसायी के बीच लेनदेन के लिए किया जाता है।

सीएम मैटीरियल थे ममता के मेंटर सुब्रत मुखर्जी


लोकनाथ तिवारी

बंगाल के सीएम मैटीरियल सुब्रत मुखर्जी एक ऐसे राजनेता थे जिनमें दक्ष प्रशासक के गुण थे। कोलकाता के मेयर के रूप में उन्होंने 2000 से 2005 तक इसका प्रमाण भी दिय़ा था। स्वर्गीय इंदिरा गांधी उनको रॉयल बंगाल टाइगर कहती थी। ज्योति बाबू से उनके बेहद मधुर संबंध थे। जिस कोलकाता नगर निगम के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा था, उसे न केवल लाभजनक निगम बना दिया बल्कि पेयजल, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, एरियावाइज टैक्स सिस्टम जैसी कई जन कल्याणकारी परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया। उस दौरान मैं सन्मार्ग में रिपोर्टर था। लगभग रोज सायंकाल में हम सभी मेयर के कार्यालय में उनके साथ होते थे। राज्य, देश, दुनिया के विभिन्न विषयों पर चर्चा होती थी। इंदिरा गांधी, ज्योति बसु, प्रियरंजन दासमुंशी का जिक्र होने पर उनका चेहरा खिल उठता था। कई स्मृतियां हैं। इमरजेंसी की, छात्र राजनीति की, ज्योति बाबू के जमाने की, क्या-क्या लिखें, क्या छोड़ें….
बहुत कम लोग जानते होंगे कि समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता रहे स्वर्गीय अमर सिंह की बुनियाद बनाने में सुब्रत मुखर्जी का अहम योगदान था। सुब्रत मुखर्जी ने जब 1982 के विधानसभा चुनाव में कोलकाता के बड़ाबाजार इलाके में स्थित जोड़बागान सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा तो उनके प्रचार में हिंदी प्रदेशों से कई दिग्गज नेता प्रचार करने आये। चूंकि जोड़ाबागान हिंदीभाषी बहुल क्षेत्र है, इसलिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह भी आये। सुब्रत मुखर्जी ने बातों ही बातों में एक बार बताया था कि उस समय अमर सिंह उनके एक सहयोगी के सहयोगी थे (सुब्रत मुखर्जी के शब्दों में चमचे का चमचा)। वीर बहादुर सिंह को एयरपोर्ट से लाने की जिम्मेदारी किसे दी जाये, तब अमर सिंह का नाम सुझाया गया क्योंकि वह सुंदर, व्यवहार कुशल व हिंदी भाषी युवक थे। अमर सिंह उसी समय वीर बहादुर सिंह के करीब आये और उसके बाद उत्तर प्रदेश होते हुए केंद्र की राजनीति में कहां तक पहुंचे यह इतिहास है।
सुब्रत मुखर्जी को राज्य की वर्तमान सीएम ममता बनर्जी का भी मेंटर माना जाता है। तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रहे सुब्रत मुखर्जी को इतिहास में एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर याद किया जाएगा, जिन्होंने बंगाल की राजनीति में 50 से भी अधिक वर्षों तक काम कर अपनी विशेष पहचान बनाई। सुब्रत मुखर्जी की 75 वर्ष की उम्र में दीपावली की रात गुरुवार को कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में 1946 में जन्में मुखर्जी अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। बंगाल की राजनीति उन्होंने 1960 के दशक में एक छात्र नेता के रूप में शुरू किया। मुखर्जी ने 1967 में बंगबासी कॉलेज के छात्र नेता के रूप में उस समय राजनीति में प्रवेश किया, जब पश्चिम बंगाल में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी। मुखर्जी ने अपनी संगठनात्मक क्षमता, वाकपटुता तथा भाषण देने के शानदार कौशल के जरिए राजनीति में तेजी से प्रगति की और जल्द ही कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बन गए।
कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रियरंजन दास मुंशी ने मुखर्जी की संगठनात्मक क्षमता को पहचाना और उसी तरह उन्हें निखरने का मौका दिया। दोनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल में नक्सलियों और वामपंथियों के खिलाफ राजनीतिक तथा वैचारिक लड़ाई लड़ी और कांग्रेस की जड़ें मजबूत करने का काम किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी सुब्रत मुखर्जी की वाकपटुता और संगठनात्मक क्षमता से प्रभावित होकर उनकी प्रशंसा करते हुए उनको रॉयल बंगाल टाइगर कहा था। मुखर्जी ने 1971 में चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और 25 साल की उम्र में बालीगंज विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पश्चिम बंगाल में सबसे कम उम्र का विधायक बनने का गौरव हासिल किया।
मुखर्जी 1972 में बंगाल में कांग्रेस के भारी जनादेश के साथ सत्ता में लौटने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रॉय की कैबिनेट में सबसे कम उम्र के मंत्री बने। उन्हें सूचना और संस्कृति राज्य मंत्री बनाया गया था। वर्ष 1977 में चुनाव हारने के बावजूद कांग्रेस पार्टी में मुखर्जी की प्रतिष्ठा कम नहीं हुई और वह तेजी से आगे बढ़ते रहे। मुखर्जी ने 1982 के विधानसभा चुनाव में जोड़बागान सीट से जीत हासिल कर वापसी की।
सुब्रत मुखर्जी हरफनमौला व्यक्ति थे। 1980 के दशक में मुनमुन सेन के साथ एक टेलीविजन धारावाहिक में अभिनय भी किया। उन्होंने चौधरी फर्मास्यूटिकल नामक एक धारावाहिक में हीरो की भूमिका की थी। उनमें ग्लैमरस अभिनेत्री मुनमुन सेन के साथ स्विमिंग पुल का दृश्य बहुत चर्चित हुआ था। उस धारावाहिक के निर्माता थे अग्निदेव चटर्जी। धारावाहिक के 14 एपिसोड ही प्रचारित हो सके। सुब्रत मुखर्जी के स्विमिंग पुल वाले सीन के बाद ऐसी परिणति तो होनी ही थी।

जमशेदपुर प्रेस क्लब के नये कार्यालय का उद्घाटन

जमशेदपुर : जुबिली पार्क गेट नम्बर-2 साकची के सामने स्थित नये प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर के कार्यालय का उद्घाटन शुक्रवार को झारखंड  के स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री बन्ना गुप्ता व वरीष्ट पत्रकार सिद्धीनाथ दुबे ने संयुक्त रूप से किया।  इस मौके पर क्लब के अध्यक्ष पुतुल सिंह उर्फ प्रशांत सिंह, महासचिव अंजनी पांडेय समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। उद्घाटन के बाद अपने सम्बोधन में मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारों को लेकर संवेदनशील है। इस भवन में पत्रकार अपने फुरसत के क्षण बिता सकेंगे। पत्रकार जनता की अभिव्यक्ति है और उनकी सुविधा का ध्यान रखना जनप्रतिनिधि का दायित्व है।

कोरोना काल में पत्रकारों ने अपने कर्तव्य का निर्वाह कुशलता के साथ किया है और अपनी जान भी जोखिम में डाली है। उम्मीद है कि पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य सुविधा के क्षेत्र में बड़ी घोषणा कर सकती है।  मंत्री ने भविष्य में हरसम्भव सहयोग का आश्वासन दिया। वरिष्ट पत्रकार सिद्धीनाथ दुबे एवं क्लब के अध्यक्ष प्रशांत सिंह पुतुल ने भी मंत्री के सहयोगी रवैये की सराहना की। गौरतलब है कि इस नये भवन का निर्माण मंत्री बन्ना गुप्ता की पहल पर करवाया गया है।

 

रोशनी के त्योहार में कुछ मीठा हो जाए

कलाकन्दसामग्री – पनीर-250 ग्राम, खोया-250 ग्राम, क्रीम- ½ कप, दूध-1/2 कप, चीनी-1 1/2 कप, इलाइची पाउडर- 1 छोटा चम्मच, पिस्ता-बादाम बारीक करटे हुए- 2 बड़ा चम्मच, 1 ½ बड़ा चम्मच घी

विधि – सबसे  पहले इस मिठाई को बनाने के लिए पनीर और मावा को आप कद्दूकस की मदद से अच्छी तरह से मसल  लें और फिर मिला लें। इसके बाद इस पूरे मिश्रण में आप दूध और क्रीम को अच्छी तरह से मिलाएं। फिर कढ़ाई में घी गर्म कर लें, जिसमें तैयार किया हुआ मिश्रण डाल दें। मध्यम आंच पर इसे अच्छी तरह से भून लें। जब ये सारी सामग्री अच्छी तरह से मिल जाए तो इसमें आप चीनी मिलाएंगी और थोड़ा सा पानी डालेंगी जब चीनी पूरी तरह से घुल जाए और मिश्रण सूख जाए तो इसमें इलायची पाउडर मिलाएं। जब इस पके हुए  मिश्रण को एक बड़ी थाली में डालें तो पहले आपको उसमें चारो तरफ घी लगा लें। इसके बाद इसे चौकोर आकार में काटना चाहिए फिर बार में सूखे मेवे  से सजा दें। फिर बाद में इसको फ्रिज में स्टोर कर लेना चाहिए, आप इस मिठाई को 3-4 दिन तक खास सकती हैं।

दिल बहार बर्फी 

सामग्री – नारियल का बुरादा- 2 कप, कंडेस्ड मिल्क – 1 कप, केवड़ा जल- 4 बूंद, रूह आफजा- 1 चम्मच, रेड फूड कलर – 1 बूंद, पिस्ता- 2 चम्मच

विधि – दिल बहार बर्फी बनाने के लिए आपको  सबसे पहले एक बर्तन में नारियल का बुरादा  निकालना होगा, लेकिन 3 चम्मच नारियल का बुरादा बचाकर अलग रख लें। फिर  बर्तन में कंडेंस्ड, केवडा वाटर, छोटी इलायची पाउडर डाल दें. इसके बाद फिर इन सब चीजों को अच्छी तरह से मिक्स कर लें, जब तक मिश्रण तैयार न हो जाए। इसके बाद बचा हुआ नारियल का बुरादा लेकर उसमें 3 चम्मच कंडेस्ड मिल्क मिला लें। अब नारियल को दो हिस्सों में बांट लें,  एक भाग पर रुह आफजा डालें, इसके बाद अब एक ट्रे या प्लेट लें और उसमें तेल लगाकर बचा हुआ बुरादा छिड़क दें। अब इसमें पहले सफेद बर्फी वाला हिस्सा डालें इसके बाद सफेद वाले मिश्रण के ऊपर गुलाबी वाले बुरादे को डालकर अच्छे से दबा करके सेट कर लें. इसके ऊपर सूखे मेवे से सजावट  करके 15 से 20 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें। अब ये मिठाई अब सभी को परोसें।

दीपावली मनाइए स्वदेशी अन्दाज में

दीपावली हम सब मना रहे हैं तो घर सजाने के लिए और उसे बेहतरीन बनाने के लिए आस – पास नजर डालने की जरूरत है। ऐसे स्वदेशी हस्तनिर्मित उत्पाद आपको बाजार में दिखेंगे जिनको देखकर आपका काम ही आसान नहीं होगा बल्कि आपका मन खिल भी उठेगा। महानगर के राम मंदिर बाजार से कुछ ऐसे ही उत्पाद हमें दिखे जो हम आपसे साझा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे –

रंगोली बनाने का समय न हो तो यह स्टिकर रंगोली एक बढिया विकल्प है

 

गेंदे के फूल नहीं मिल रहे तो प्लास्टिक से बने यह हार आपकी समस्या को सुलझा देंगे और इनको साफ करना भी आसान है

 

दीयों का यह गिफ्ट पैक आप उपहार में भी दे सकते हैं और घर भी सजा सकते हैं

 

परिवार की कल्पना को साकार करता यह दीया हमें भा गया

 

घर को देसी लुक देने में यह कन्दील दीया आपकी मदद करेगा

 

इसे दरवाजे पर लगाइए या आलमारी में, यह हर जगह सुन्दर लगेंगे