कोलकाता । हेरिटेज बिजनेस स्कूल ने लिंकन इंटरनेशनल बिजनेस स्कूल, यूके के सहयोग से फर्म और संस्थानों पर वैश्विक घटनाओं का प्रभाव, जोखिमों और स्थितियों के प्रति लचीलापन और उनसे उभरने के तरीकों को लेकर अन्तरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया। इस वेबिनार में कोविड -19 के बाद की अर्थव्यवस्था, महामारी के बाद पर्यावरणीय प्रभाव, महामारी के प्रभाव के लिंग प्रभाव और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में हेरिटेज बिजनेस स्कूल के चीफ मेंटर एवं बंधन बैंक के चेयरमैन डॉ. अनूप सिन्हा, लिंकन यूनिवर्सिटी में कोर एवं एलआईआईआरएच आईएसएबी के रेजिलिएन्स के प्रोफेसर प्रो. डीन फादर्स ने वक्तव्य रखे। इसके अतिरिक्त ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के ग्लोबल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट में इकोनॉमिक्स ऑफ पोवर्टी रिडक्शन के प्रेसिडेंशियल फेलो डॉ. उपासक दास, यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के एसोसिएट प्रोफेसर (रीडर) डॉ. शुभाशीष चौधरी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट, भारत के निदेशक प्रो. पार्थ राय, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, ब्रिटेन, के प्रो. मार्टिन पार्कर, आईआईएम कलकत्ता की प्रो. रुना सरकार एवं ढाका विश्वविद्यालय की प्रो. सलमा अख्तर ने भी विचार रखे।
पूरे सम्मेलन का संयोजन हेरिटेज बिजनेस स्कूल की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिमू चौधरी, लिंकन इंटरनेशनल बिजनेस स्कूल, यूके की अनुसंधान निदेशक प्रोफेसर साइमन लिली, लिंकन इंटरनेशनल बिजनेस स्कूल, यूके में डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स की एसोसिएट प्रोफेसर (रीडर) प्रो. श्राबनी साहा, हेरिटेज बिजनेस स्कूल के चीफ मेंटर डॉ. अनूप सिन्हा ने किया। हेरिटेज बिजनेस स्कूल एवं पैटन इंटरनेशनल लि. के चेयरमैन एवं कल्याण भारती ट्रस्ट के ट्रस्टी एच. पी. बुधिया ने कहा कि हर वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञों के व्यावहारिक परामर्श विद्यार्थियों तक ले जाने के उद्देश्य से इस तरह के आयोजन किये जाते हैं।
सम्मेलन 19 फरवरी 2022 तक चला।
हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, कोलकाता के सीईओ पी.के.अग्रवाल ने कहा, “यह सम्मेलन छात्रों को कोविड -19 के कारण वैश्विक झटके के बाद अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों को जानने में मदद करेगा।”
हेरिटेज बिजनेस स्कूल में अन्तरराष्ट्रीय वेबिनार
सन्मार्ग ‘वाद – संवाद’ परिचर्चा का तीसरा संस्करण आयोजित
कोलकाता । सन्मार्ग ने हाल ही में वाद – संवाद नामक परिचर्चा का तीसरा संस्करण आयोजित किया। परिचर्चा में ‘क्या आज का भारत इंडिया है’ विषय पर चर्चा हुई। अलका जालान फाउंडेशन, कोलकाता में यह परिचर्चा आयोजित हुई।
भारत में अनेक धर्म हैं और अनेक संस्कृतियाँ हैं, धर्म और भाषा के सम्बन्धों को लेकर प्रश्न उठते हैं और इस विषय पर विचार करने के लिए परिचर्चा आयोजित की गयी। इस परिचर्चा का विषय था ‘क्या आज का भारत इंडिया है?’
परिचर्चा में निर्माता एवं निर्देशक अतुल सत्य कौशिक, गायिका मालिनी अवस्थी, पत्रकार शाजिया इल्मी, लेखक तुहीन ए. सिन्हा, टैग मैंगो के सह संस्थापक एवं सीईओ दिव्यांशु दमानी, अधिवक्ता उज्जयिनी चटर्जी, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता प्रियदर्शिनी घोष बावा, सामाजिक कार्यकर्ता सुप्रिया सत्यम शामिल हुई। संचालन पत्रकार अनुराग पुनीत ने किया। इस अवसर पर अभिनेत्री ऋचा शर्मा, विधायक एव सन्मार्ग समूह के चेयरमैन विवेक गुप्त, सन्मार्ग समूह की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रुचिका गुप्त, सेलिब्रिटी प्रेरक वक्ता नैना मोरे उपस्थित थीं। सन्मार्ग समूह की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रुचिका गुप्त ने कहा कि सन्मार्ग वाद – संवाद का उद्देश्य हर इंडियन में भारतीय का सम्मान करना है या यूँ कहूँ कि हर भारतीय में इंडियन का।
वोट के महत्व

वोट में ऐइसन का बा
सत्ता परिवर्तन के ई अधिकार बा
पाँच साल में उ नजर ना अइले
चुनववा में वोट खातिर नेता रउवे द्वार बा
भैया लोग आपन वोट के किम्मत पहचानेके बा
काम पडेला त नेताजी ना मिलेनी
हर समय बिजी-बिजी रहेनी
पर काम होत कुछ ना दिखेला
खाली चुनववा में वोट के महत्व पता चलेला
सत्ता परिवर्तन के ई अधिकार बा
माता-बहिन, चाचा-चाची, भैया-भाभी से इहे हमार एक अपील बा
वोट के सही उपयोग करेके बा
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(कवि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) के स्त्री अध्ययन विभाग में पी-एच.डी., रिसर्च स्कॉलर, हैं)
सम्पर्क : [email protected]
मो. 8421966265
विद्यासागर विश्वविद्यालय में ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता पर अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी
मिदनापुर । विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से आजादी के अमृत महोत्सव पर ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता: राष्ट्र, इतिहास और लोकतंत्र’ विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग के शोधार्थी पंकज कुमार सिंह द्वारा सरस्वती वंदना के साथ हुआ। स्वागत वक्तव्य देते हुए विभागाध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार प्रसाद ने दिया। उन्होंने कुलपति प्रो. शिवाजी प्रतिम बसु के प्रति आभार प्रकट किया। उद्घाटन वक्तव्य देते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के कला और वाणिज्य के डीन प्रो.तपन कुमार दे ने कहा हिंदी विभाग द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी इस अर्थ में महत्वपूर्ण है कि आजादी के 75 वर्ष के इतिहास को हिंदी कविता में तलाशने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता के मूल स्वर पर चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी कविता जनोन्मुखी है। बीज भाषण देते हुए प्रो. दामोदर मिश्र (कुलपति, हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा) ने कहा कि स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता में राष्ट्र, इतिहास और लोकतंत्र पृथक नहीं बल्कि एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।उन्होंने स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता की समृद्ध परंपरा और वैशिष्टयों पर चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी कविता ने नवजागरणकालीन कविता की परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपना विषय बनाया। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रो मुक्तेश्वरनाथ तिवारी (अध्यक्ष, हिंदी एवं भाषा भवन, विश्व भारती, शांतिनिकेतन) ने कहा कि स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता ने साहसिक कार्य किया है। हिंदी कविता ने राष्ट्र और लोकतंत्र के दामन को थामे रखा।हिंदी कविता सामाजिक आजादी के स्वप्न का आख्यान है। स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता आजादी के बाद के संघर्ष का कथा है। डॉ सत्यप्रकाश तिवारी ने कहा कि आजादी के बाद के भारत के विविध छवियों पर चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी कविता ने आधुनिक विमर्शों को अपना केन्द्रीय स्वर बनाया। नीदरलैंड से जुड़ी डॉ पुष्पिता अवस्थी का नेटवर्क कमजोर रहने के कारण उन्होंने अपना संदेश भेजते हुए कहा कि हिंदी कविता उम्मीद और व्यवस्था-विरोधी कविता है। प्रो आशीष त्रिपाठी (काशी हिंदी विश्वविद्यालय, वाराणसी) ने कहा कि स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता प्रतिरोध और संघर्ष की कविता है।हिंदी कविता लोकतंत्र की क्रिटिक रचती है। हिंदी कविता ने मानव विरोधी अलोकतांत्रिक गठजोड़ और चरित्र को चिह्नित करती है। कार्यक्रम का संचालन डॉ संजय जायसवाल ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ श्रीकांत द्विवेदी ने दिया। तकनीकी संयोजन शोधार्थी मधु सिंह और रूपेश यादव ने किया। इस अवसर पर विज्ञान विभाग के डीन प्रो. सत्यजीत साहा, मकेश्वर रजक, नीरज शर्मा, कलावती कुमारी, ठाकुर, शशि शर्मा, जगदीश भगत ,प्रीति पटेल सहित देश-विदेश से बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
भारत में अब टेनर्स पोकेमॉन गो में एपेक्स शैडो ल्युजिया और हो-ओह का एनकाउंटर
कोलकाता । पोकेमॉन गो टूर भारत में अपने ग्लोबल इवेंट के दूसरे संस्करण का जश्न मनाने जा रहा है। एक दिवसीय इवेंट जोहतो का यह जश्न भारत में ट्रेनर्स को मौका देगा कि वे जोहतो क्षेत्र से पोकेमॉन का एनकाउंटर कर सकें, यह 2022 के सबसे बड़े इवेंट्स में से एक है। इवेंट का आयोजन 26 फरवरी 2022 सुबह 9 बजे से शाम 9 बजे तक होगा।
ट्रेनर्स, इवेंट के टिक्ड वर्ज़न से स्पेशल रीसर्च को पूरा कर नया मास्टवर्क रीसर्च लाईन पा सकेंगे। मास्टर रिसर्च को पूरा करने के बाद टेªनर्स पहली बार लेजेंडरी शैडो पोकेमॉन, एपेक्स शैडो ल्युजिया और एपेक्स शैडो हो-ओह के एनकाउंटर में सक्षम होंगे। ट्रेनर्स इवेंट के टिकटेड वर्ज़न में गोल्ड वर्जन या सिल्वर वर्ज़न के रोमांच का आनंद उठा सकेंगे। टेनर्स के पास जोहतो क्षेत्र में एनकाउंटर किए गए हर पोकेमॉन (इल्यूज़िव उनाउन सहित) को कैच, हैच, बैटल, प्रशिक्षित करने के लिए ठीक 12 घण्टे होंगे। इवेंट के दौरान टेनर्स इन पोकेमॉन के कई शाइनी वेरिएन्ट्स को भी एनकाउन्टर कर सकते हैं। पूरे इवेंट के दौरान 5 अलग-अलग घण्टों के लिए हेबिटेट्स होंगे, इसमें से हर हैबिटेट जोहतो क्षेत्र की किसी प्रतिष्ठित लोकेशन से प्रेरित होगा। ट्रेनर्स द्वारा चुने गए टिकटेड वर्जन इवेंट के अनुसार फैसला लिया जाएगा कि कौनसे पोकेमॉन के एनकाउंटर या कौन से पोकेमॉन के शाइनी होने की संभावना सबसे अधिक है।
इवेंट के दौरान 8 गोजिम टेनर्स कैरेक्टर्स, इन-गेम मैप पर दिखाई देंगे। पोकेमॉन गो ने जनवरी में एक प्रतियोगिता का आयोजन भी किया था, जिसके ज़रिए टेनर्स को गेम में शामिल होने का मौका मिला। पोकेमॉन गो टूर की टिकट- वर्तमान में जोहतो लाईव हैं और इन्हें रु 1050 की कीमत में इन-गेम खरीदा जा सकता है। इस अवधि के दौरान टेनर्स मिथिकल पोकेमॉन सेलेबी पर हाथ आज़मा सकते हैं, जिसे मैजिकल लीफ़ पर हमला करने के लिए जाना जाता है!
आरम्भ हो गयी मिस इंडिया 2022 की तलाश
कोलकाता । सौंदर्य दूतों की खोज में मिस इंडिया ऑर्गेनाइजेशन अपने काम को डिजिटल मीडिया स्पेस में ले जा रहा है। डायनामिक फॉर्मेट से संचालित वीएलसीसी की प्रस्तुति फेमिना मिस इंडिया 2022 का दृष्टिकोण युवाओं को सशक्त बनाने और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर भारत की सर्वश्रेष्ठप्रतिभा के प्रतिनिधित्व करने में निहित है।
अब दूसरी बार अपने वर्चुअल फॉर्मेट में प्रतियोगिता ने 28 राज्यों के प्रतिनिधियों और दिल्ली, जम्मू और कश्मीर के प्रतिनिधियों के अलावा केंद्र शासित प्रदेशों के एक प्रतिनिधि का चयन करने के लिए 14 फरवरी से 31 फाइनलिस्ट का राष्ट्रव्यापी हंट शुरू किया है। राज्य के प्रतिनिधियों की चयन प्रक्रिया केवल मोज ऐप के माध्यम ऑडिशन वीडियो टास्क सबमिशन आमंत्रित करने के लिए एकऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।
इस प्रतियोगिता के बारे में गर्व और जोश के साथ बात करते हुए नेहा धूपिया ने कहा, “फेमिना मिस इंडिया की यात्रा में हर साल, मुझे पुरानी यादों की एक मजबूत भावना महसूस होती है क्योंकि यह मुझे उन सभी सीखों और अनुभवों पर वापस ले जाती है जो मैंने प्राप्त किए हैं और जीवन भर संजोए रखेंगे। इतने उत्साह से भरे इन युवा प्रतिभागियों को दुनिया कामुकाबला करने के लिए तैयार होते देखना हमेशा अच्छा लगता है। सफल होने की उनकी इच्छा ही सभी को प्रेरित करती है।”
सेफोरा, मोज और रजनीगंधा पर्ल्स द्वारा संचालित वीएलसीसी फेमिना मिस इंडिया 2022 की विजेता मिस वर्ल्ड सौंदर्य प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। मिस इंडिया का खिताब जीतना न केवल आपको प्रसिद्धि दिलाएगा, बल्कि आपको मनोरंजन और ग्लैमर के केंद्र के रूप में पहचान रखने वाले मैक्जिमम सिटी – मुंबई में रहने का मौका भी देगा।
उस विरासत को जारी रखते हुए जिसने छह मिस वर्ल्ड देखीं, जिन्होंने विश्वपटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कर हमें गौरवान्वित किया- रीता फारिया(1966), ऐश्वर्या राय (1994), डायना हेडन (1997), युक्ता मुखी (1999), प्रियंका चोपड़ा (2000) और मानुषी चिल्लर (2017), नए ताज धारक की तलाश शुरू हो गयी है।
नारायणा हेल्थ में रीनल ट्यूमर कंसोर्टियम नेक्स्ट जेनरेशन क्रायोएब्लेशन टेक्नोलॉजी की सुविधा
कोलकाता । कैंसर के लिए उपलब्ध पारंपरिक उपचारों के अनुसार, कई मामलों में ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है। सर्जरी एक जटिल प्रक्रिया है वहीं चिकित्सा क्षेत्र की नयी तकनीक ने परिदृश्य बदला है। 3डी विज़ुअलाइज़ेशन के साथ, न्यूनतम इनवेसिव तकनीक और तेजी से रिकवरी रोबोटिक सर्जरी पर चिकित्सकों का भरोसा बढ़ा है। इस विजन को आगे बढ़ा नारायणा हेल्थ, कोलकाता ने कैंसर केयर में उन्नत उपचार के लिए रीनल ट्यूमर कंसोर्टियम और नेक्स्ट जेनरेशन क्रायोएब्लेशन टेक्नोलॉजी इंस्टालेशन सुविधा आरम्भ की।
क्या है रीनल ट्यूमर कंसोर्टियम और नेक्स्ट जेनरेशन क्रायोएब्लेशन टेक्नोलॉजी इंस्टालेशन
नारायणा हेल्थ, कोलकाता के इंटरवेंशनल एंड एंडोवास्कुलर रेडियोलॉजी के प्रमुख डॉ. शुभ्रो रॉय चौधरी ने कहा, रीनल ट्यूमर, विशेष रूप से छोटे रीनल ट्यूमर के निदान और प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव आया है। अन्य कारणों से की जाने वाली इमेजिंग में वृद्धि के कारण, इन ट्यूमर का अक्सर किसी भी लक्षण पेश करने से पहले संयोग से छोटे आकार में पता लगाया जाता है। सर्जिकल अभ्यास में, पिछले 50 वर्षों में प्रतिमान में इस बदलाव ने कठिन सर्जरी, (पूरे गुर्दे को हटाने) से गुर्दे के हिस्से को हटाने के लिए प्रेरित किया, जिसे आंशिक नेफरेक्टोमी के रूप में जाना जाता है। यह सर्जरी भी विकसित हुई है, शुरू में एक खुले अंदाज में की गई और बाद में लैप्रोस्कोपिक रूप से की गई और अब बहुत कुशलता से, रोबोटिक रूप से की गई। कोलकाता में नारायण हेल्थ पहले से ही अपने दोनों स्थलों पर अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की पेशकश कर रहा है। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के विकास के समानांतर, इंटरवेंशनल थेरेपी का विकास हुआ है, विशेष रूप से छोटे किडनी ट्यूमर के लिए, जिससे इन ट्यूमर को पारंपरिक सर्जरी के बिना सफलतापूर्वक ठीक किया जाता है। पिनहोल के माध्यम से इन ट्यूमर का प्रभावी ढंग से इलाज करने की मौजूदा तकनीकों में रेडियोफ्रीक्वेंसी या माइक्रोवेव एब्लेशन शामिल हैं। इन तकनीकों का प्रदर्शन पहले से ही 20 वर्षों की अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता के साथ दुनिया में एक बड़ी श्रृंखला के साथ किया जा रहा है। इस आयुध में जोड़ा गया अब छोटे गुर्दे के ट्यूमर के सुई आधारित सूक्ष्म-आक्रामक उपचार की नवीनतम तकनीक है, जिसे क्रायोएब्लेशन कहा जाता है, एक ऐसी तकनीक जो कैंसर को अपने पथ में जमा देती है।
दर्द रहित उपचार प्रदान करता है क्रायोएब्लेशन
क्रायोएब्लेशन छोटे गुर्दे के ट्यूमर का न्यूनतम इनवेसिव, स्कारलेस और दर्द रहित उपचार प्रदान करता है जिसे व्यापक रूप से दुनिया भर में सबसे अत्याधुनिक तकनीक के रूप में स्वीकार किया जाता है, जिसमें आसपास के सामान्य गुर्दे के ऊतकों को न्यूनतम नुकसान होता है और गुर्दे के कार्य का संरक्षण होता है। यह अत्याधुनिक उपचार अब एनएच कोलकाता में उपलब्ध है – यह उपचार देने वाला उपमहाद्वीप का एकमात्र निजी क्षेत्र का अस्पताल है। डॉ. रॉय चौधरी ने कहा कि यह विशेष तकनीक ट्यूमर को मारने के लिए आइसबॉल बनाने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन का उपयोग करती है जो बाद में ओवरटाइम पर वापस आ जाती है। क्रायोब्लेशन और रोबोटिक सर्जरी की पेशकश करने वाले विशेषज्ञों के साथ – साथ रोगियों को अब पूरे उपचार स्पेक्ट्रम में गुर्दे के कैंसर के उपचार की पूरी पसंद की पेशकश की जाती है, जो दुनिया में कहीं और उपलब्ध है। इस रेनल ट्यूमर कंसोर्टियम में यूरोलॉजिस्ट, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट सहित एक बहु-विषयक बोर्ड शामिल है।
इस नए स्थापित क्रायोएब्लेशन सिस्टम में अन्य उपयोगी अनुप्रयोग होंगे, जिसमें बिना किसी निशान के सौम्य स्तन फाइब्रोएडीनोमा का उपचार, हड्डी और कोमल ऊतक ट्यूमर का उपचार शामिल है और इसे पूरे एनएच नेटवर्क में पेश किया जाएगा रोगी एक दिन के भीतर बिना किसी निशान के घर जा सकते हैं और तेजी से सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं। इस सुविधा की घोषणा के दौरान डॉक्टर डॉ. शभ्रो रॉय चौधरी, इंटरवेंशनल एंड एंडोवास्कुलर रेडियोलॉजी के प्रमुख, डॉ सत्यदीप मुखर्जी, सलाहकार- रोबोटिक सर्जरी, यूरो-ऑन्कोलॉजी, डॉ तरुण जिंदल, ऑन्कोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी, यूरो-ऑन्कोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार, डॉ विवेक अग्रवाल, निदेशक और वरिष्ठ सलाहकार- मेडिकल ऑन्कोलॉजी व हेमेटो-ऑन्कोलॉजी विभाग, डॉ चंद्रकांत एमवी, सलाहकार- मेडिकल ऑन्कोलॉजी व हेमेटो-ऑन्कोलॉजी विभाग, मौजूद थे।
कैंसर केयर में टीम के सभी अनुभवी और कुशल सर्जनों ने सम्मेलन में नेक्स्ट जेनरेशन क्रायोएब्लेशन टेक्नोलॉजी के साथ कैंसर के उन्नत और केंद्रित उपचार के बारे में चर्चा की । नारायणा हेल्थ के क्षेत्रीय निदेशक (पूर्व) आर वेंकटेश ने कहा, ‘हमारे अस्पताल में मरीज उन्हें सर्वोत्तम देखभाल और उपचार प्रदान करने के हमारे सक्रिय प्रयासों के साक्षी रहे हैं। इन हाईटेक परिवर्द्धन के साथ हम उनके चिकित्सा मुद्दों के इलाज के लिए सबसे उन्नत तकनीक लाने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हैं।’
नहीं रहे बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज
उदारीकरण से पहले के दौर में भारत में ‘हमारा बजाज’ धुन एक वक्त मध्यमवर्गीय भारतीय परिवारों की महत्वाकांक्षा का प्रतीक थी और उनके बेहतर भविष्य की आकांक्षाओं को प्रतिध्वनित करती थी। यह धुन थी बजाज ऑटो की और इसके पीछे बेहद बड़े कद वाले बेखौफ उद्योगपति थे राहुल बजाज। स्पष्ट और खुलकर बोलने वाले राहुल बजाज ने परमिट राज के दौरान दो पहिया और तीन पहिया वाहनों का ब्रांड स्थापित करके अपना दम दिखाया था। बजाज समूह के पूर्व चेयरमैन राहुल बजाज का गत 12 फरवरी शनिवार को पुणे में उनके आवास पर निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। उन्होंने बजाज ऑटो में गैर-कार्यकारी निदेशक और चेयरमैन पद से पिछले वर्ष 30 अप्रैल को इस्तीफा दिया था हालांकि वह चेयरमैन एमेरिटस बने रहे।
साफगोई थी उनकी खासियत
बिना लाग लपेट के अपनी बात रखने वाले बजाज कूटनीति में पारंगत अन्य उद्योगपतियों से अलग थे, साफगोई उनकी खासियत थी भले इसकी वजह से सरकार के साथ ठन जाए, चाहे अपने खुद के बेटे के साथ आमना-सामना हो जाए। नवंबर 2019 की बात है, उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह, समेत मंत्रियों के एक समूह पर चुभने वाले सवाल दाग दिए थे। राहुल बजाज का जन्म 10 जून 1938 को कलकत्ता में हुआ था। उनके दादा जमनालाल बजाज ने 1926 में बजाज समूह की स्थापना की थी।
हार्वर्ड से किया था एमबीए
बजाज ने दिल्ली के स्टीफन कॉलेज से स्नातक और अमेरिका के हार्वर्ड बिजनस स्कूल से एमबीए किया। अपने पिता कमलनयन बजाज की टीम में उप महाप्रबंधक के रूप में उन्होंने काम शुरू किया और 1968 में 30 साल की उम्र में वह मुख्य कार्यपालक अधिकारी बने।
ऑटोमोबाइल, जनरल बीमा तथा जीवन बीमा, निवेश एवं उपभोक्ता फाइनेंस, घरेलू उपकरण, इलेक्ट्रिक लैंप, पवन ऊर्जा, स्टेनलेस स्टील जैसे क्षेत्रों में कारोबार करने वाले बजाज समूह का नेतृत्व संभालकर उन्होंने इसे वृद्धि के रास्ते पर बढ़ाया। उनके नेतृत्व में बजाज ऑटो का कारोबार 7.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये हो गया।
चेतक स्कूटर बना आकांक्षा का प्रतीक
2008 में उन्होंने बजाज ऑटो को तीन इकाईयों-बजाज ऑटो, बजाज फिनसर्व और एक होल्डिंग कंपनी में बांटा। उनके बेटे राजीव बजाज और संजीव बजाज ऑटो और फाइनेंस कंपनियों को संभाल रहे हैं। कंपनी का बजाज चेतक स्कूटर मध्यमवर्गीय भारतीय परिवारों की आकांक्षा का प्रतीक बना।
फोर्ब्स ने 2016 में दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में उन्हें शामिल किया था। उस वक्त उन्हें लिस्ट में 722वीं रैंक मिली थी और उनकी नेट वर्थ 2.4 अरब डॉलर थी। अगर फोर्ब्स की रीयल टाइम लिस्ट के हिसाब से देखें तो 12 फरवरी 2022 को राहुल बजाज की नेट वर्थ 8.2 अरब डॉलर यानी करीब 62000 करोड़ रुपये है। राहुल बजाज को दोपहिया वाहन की दुनिया में एक क्रांति लाने के लिए जाना जाता है।
राहुल बजाज ने 1965 से लेकर 2005 तक यानी 40 साल तक बजाज ऑटो के चैयरमैन का पद संभाला और कंपनी को बुलंदियों तक पहुंचाया। उनके बाद 2005 में उनके बेटे राजीव बजाज ने कंपनी की बागडोर अपने हाथ ले ली। 2006 में वह राज्य सभा में सांसद के तौर पर चुने गए और 2010 तक देश की सेवा राजनीति में रहते हुए की। राजनीति की दुनिया में रहते हुए भी वह हर बात पर अपनी बेबाक राय देते रहे। 2005 के बाद भी वह नॉन-एग्जिक्युटिव चेयरमैन की भूमिका में रहे और 2021 में उन्होंने यह पद छोड़ा।
राहुल बजाज की तरफ से समाज को दिए गए योगदान के चलते उन्हें 2001 में पद्म भूषण सम्मान से भी नवाजा गया था। स्कूटर की दुनिया में क्रांति से उन्होंने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा दिया था। राहुल बजाज कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के दो बार (1979-80 और 1999-2000) प्रेसिडेंट भी चुने गए। इस दौरान उन्हें 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तरफ से लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाजा गया था। उन्हें ‘नाइट ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ नाम के फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
राहुल बजाज के 2 बेटे राजीव बजाज और संजीव बजाज हैं, जो कंपनी के मैनेजमेंट में हैं। वहीं उनकी बेटी सुनैना बजाज की शादी मनीष केजरीवाल से हुई है, जो Temasek India के प्रमुख रह चुके हैं। 10 जून 1938 को जन्मे राहुल बजाज ने 1958 में दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली। उन्होंने अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए भी किया था।
अगर आज आप कोई गाड़ी खरीदना चाहें और वह बहुत लोकप्रिय हो तो कुछ दिन, हफ्ते या अधिकतम कुछ महीनों के वेटिंग पीरियड के बाद गाड़ी आपको मिल जाएगी, लेकिन उस दौर में ऐसा नहीं था। एक वक्त था जब बजाज के स्कूटर हमारा बजाज वाले विज्ञापन से खूब लोकप्रिय थे। हर किसी की जुबां पर हमारा बजाज छाया रहता था। बजाज के स्कूटर का वेटिंग पीरियड सालों में पहुंच जाता था। कई लोग तो बुकिंग की पर्ची बेचकर ही पैसे कमा लेते थे, क्योंकि मांग बहुत ज्यादा थी और सप्लाई बहुत कम।
बजाज ऑटो की स्थापना 1960 में हुई थी, जिससे पहले यह कंपनी बछराज ट्रेडिंग कॉरपोरेशन हुआ करती थी। हमारा बजाज की कहानी 1926 से शुरू होती है, जब जमनालाल बजाज ने कारोबार के लिए बछराज एंड कंपनी नाम की फर्म बनाई थी। उनकी मौत के बाद दामाद रामेश्वर नेवटिया और दो बेटों कमलनयन और रामकृष्ण बजाज ने बछराज ट्रेडिंग कॉरपोरेशन की स्थापना की। आजादी के बाद 1948 में विदेशों से पार्ट्स मंगाकर उन्होंने दो-पहिया और तीन-पहिया गाड़ियां बनाईं।
जब बेटे के काम पर जताई निराशा…
2005 में उन्होंने कंपनी की जिम्मेदारी धीरे-धीरे अपने बेटे राजीव बजाज को सौंपनी शुरू की। राजीव बजाज ऑटो के प्रबंध निदेशक बन गए और कंपनी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया। हालांकि, जब राजीव ने 2009 में स्कूटर को छोड़कर बजाज ऑटो में पूरा ध्यान मोटरसाइकिल विनिर्माण पर देना शुरू किया तो राहुल बजाज ने अपनी निराशा नहीं छिपाई। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा, ‘‘मुझे बुरा लगा, दुख हुआ।’’
बिना डरे बोलते थे सरकार के खिलाफ
मुंबई में नवंबर 2019 में उन्होंने एक कार्यक्रम में सरकार द्वारा आलोचना को दबाने के बारे में खुलकर बोला जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल मौजूद थे। उन्होंने कहा था, ‘‘भय का माहौल है, यह निश्चित ही हमारे मन मस्तिष्क पर है। आप (सरकार) अच्छा काम कर रहे हैं उसके बावजूद हमें भरोसा नहीं कि आप आलोचना को स्वीकार करेंगे।’’
पद्म भूषण से सम्मानित
बजाज जून 2006 में राज्यसभा में मनोनीत हुए और 2010 तक सदस्य रहे। उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था तथा कई विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई। वह इंडियन एयरलाइंस के चेयरमैन, आईआईटी-बॉम्बे के निदेशक मंडल के चेयरमैन समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। आज तक वह ऐसे इकलौते व्यक्ति रहे जो उद्योग चैंबर सीआईआई के दो बार अध्यक्ष रहे, पहली बार 1979-80 और फिर 1999 से 2000 तक।




