2 साल में ही 3 गुना से अधिक हुई संपत्ति नयी दिल्ली । जिंदल ग्रुप की अध्यक्ष सावित्री जिंदल भारत की सबसे अमीर महिला हैं। फोर्ब्स बिलियनेयर सूची 2022 के अनुसार, सावित्रि जिंदल की कुल संपत्ति 17.7 अरब डॉलर है। सावित्री की संपत्ति में सिर्फ 2 साल में ही 12 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। वास्तव में उनकी संपत्ति दो साल में तीन गुना से अधिक हो गई। सावित्री जिंदल का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वे जब 55 साल की थीं, तब उनके पति ओम प्रकाश जिंदल की मौत हो गई थी। ओम प्रकाश जिंदल समूह के संस्थापक थे। ओम प्रकाश की मौत एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई थी। इसके बाद उन्होंने अपने पति का कारोबार संभाला। कोरोना में आधी घट गई थी संपत्ति
कोरोना काल के दौरान साल 2019 और 2020 में सावित्री जिंदल की संपत्ति 50 फीसदी तक घट गई थी। इसके बाद केवल दो साल में ही उनकी संपत्ति तीन गुना से अधिक हो गई। साल 2021 में जिंदल की संपत्ति 18 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी। कभी नहीं गई कॉलेज
एक रिपोर्ट के अनुसार, सावित्री जिंदल कभी कॉलेज नहीं गईं। इसके बावजूद पति की आकस्मिक मौत के बाद उन्होंने ही पूरा कारोबार संभाला। सावित्री जिंदल कहती हैं कि जिंदल परिवार में अधिकतर महिलाएं घर की जिम्मेदारी संभालती हैं। जबकि पुरुष बाहर के काम देखते हैं। इसके चलते सावित्री को अपने पति का कारोबार संभालने में काफी मेहनक करनी पड़ी। असम के तिनसुकिया में बीता बचपन
सावित्री जिंदल लगातार जिंदल ग्रुप को आगे ले जाने की दिशा में काम कर रही हैं। सावित्री का जन्म 20 मार्च 1950 को हुआ था। उनका बचपन असम के तिनसुकिया शहर में बीता। उन्होंने ओम प्रकाश जिंदल से साल 1970 में शादी की थी। उनके पति हरियाणा सरकार में मंत्री और हिसार निर्वाचन क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा के भी रहे थेसदस्य थे। सावित्री जिंदल के कुल 9 बच्चे हैं।
लाहौर । विभाजन के समय पाकिस्तान छोड़कर भारत जाने वाली 90 वर्षीय रीना छिब्बर वर्मा का रावलपिंडी में अपने पुश्तैनी मकान को देखने का सपना 75 साल बाद आखिरकार पूरा हो गया। पाकिस्तान ने भारतीय नागरिक वर्मा को वीजा दे दिया और वह वाघा-अटारी सीमा के जरिए शनिवार को यहां पहुंचीं।
पाकिस्तान पहुंचने के तुरंत बाद नम आंखों से वर्मा अपने गृह नगर रावलपिंडी रवाना हो गयीं, जहां वह अपने पुश्तैनी मकान प्रेम निवास एवं अपने स्कूल जाएंगी और अपने बचपन के दोस्तों से मिलेंगी। सोशल मीडिया पर अपलोड एक वीडियो में पुणे की रहने वाली वर्मा ने कहा कि उनका परिवार विभाजन के समय रावलपिंडी के देवी कॉलेज रोड पर रहता था।
उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, ‘‘मैं मॉडर्न स्कूल में पढ़ती थी। मेरे चार भाई-बहन भी उसी स्कूल में पढ़ते थे। मेरे भाई और एक बहन ने मॉडर्न स्कूल के समीप स्थित गोर्डन कॉलेज से भी पढ़ाई की।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बड़े भाई-बहनों के मुस्लिम दोस्त थे, जो हमारे घर आते-जाते रहते थे क्योंकि मेरे पिता प्रगतिशील विचारों वाले शख्स थे और उन्हें लड़कों एवं लड़कियों के आपस में मिलने से कोई दिक्कत नहीं थी। विभाजन से पहले हिंदू और मुसलमानों का कोई ऐसा मुद्दा नहीं था। यह सब तो विभाजन के बाद हुआ।’’
वर्मा ने कहा, ‘‘भारत का विभाजन हालांकि गलत था लेकिन जब अब यह हो गया है तो दोनों देशों को हम सभी के लिए वीजा पाबंदियों में ढील देने की दिशा में काम करना चाहिए।’’ भारत में पाकिस्तानी उच्चायोग ने सद्भावना दिखाते हुए वर्मा को तीन महीने का वीजा दे दिया। वर्मा 1947 में विभाजन के दौरान 15 साल की उम्र में भारत आयी थीं।
वर्मा ने 1965 में पाकिस्तानी वीजा के लिए आवेदन दिया था लेकिन युद्ध के कारण दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर होने के कारण उन्हें वीजा नहीं मिला था। जीवन के नब्बे वसंत देख चुकी वर्मा ने कहा कि उन्होंने पिछले साल सोशल मीडिया पर अपने पुश्तैनी घर जाने की इच्छा जतायी थी। इसके बाद पाकिस्तानी नागरिक सज्जाद हैदर ने सोशल मीडिया पर उनसे संपर्क किया और रावलपिंडी में उनके घर की तस्वीरें उन्हें भेजी।
हाल में उन्होंने फिर से पाकिस्तानी वीजा के लिए आवेदन दिया, जिसे ठुकरा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान की विदेश मामलों की राज्य मंत्री हीना रब्बानी खार को सोशल मीडिया पर टैग करते हुए अपनी इच्छा व्यक्त की और उन्होंने उनके वीजा की व्यवस्था की।
नयी दिल्ली । पैकेटबंद और लेबल वाले खाद्य पदार्थ मसलन आटा, दालें और अनाज सोमवार से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में आ गए हैं। इनके 25 किलोग्राम से कम वजन के पैक पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू हो गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अनाज से लेकर दालों और दही से लेकर लस्सी तक खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाए जाने से संबंधित बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। इसमें कहा गया, ‘‘जीएसटी उन उत्पादों पर लगेगा जिनकी आपूर्ति पैकेटबंद सामग्री के रूप में की जा रही है। हालांकि, इन पैकेटबंद सामान का वजन 25 किलोग्राम से कम होना चाहिए।’’
दही और लस्सी जैसे पदार्थों के लिए यह सीमा 25 लीटर है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘18 जुलाई, 2022 से प्रावधान में लागू हो गया है और पहले से पैक तथा लेबल वाले उत्पादों की आपूर्ति पर जीएसटी लगेगा।’’
उदाहरण के लिए, चावल, गेहूं जैसे अनाज, दालों और आटे पर पहले पांच प्रतिशत जीएसटी तब लगता था जब ये किसी ब्रांड के होते थे। अब 18 जुलाई से जो भी सामान पैकेटबंद है और जिसपर लेबल लगा है, उन पर जीएसटी लगेगा।
इसके अलावा दही, लस्सी और मुरमुरे जैसी अन्य वस्तुएं यदि पहले से पैक और लेबल वाली होंगी, तो इनपर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा। ‘एफएक्यू’ में कहा गया कि पांच प्रतिशत जीएसटी पहले से पैक उन्हीं वस्तुओं पर लगेगा जिनका वजन 25 किलोग्राम या इससे कम है। हालांकि, खुदरा व्यापारी 25 किलो पैक में सामान लाकर उसे खुले में बेचता है तो इसपर जीएसटी नहीं लगेगा।
पिछले हफ्ते सरकार ने अधिसूचित किया था कि 18 जुलाई से बिना ब्रांड वाले और पैकेटबंद तथा लेबल वाले खाद्य पदार्थों पर पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। इससे पहले तक केवल ब्रांडेड सामान पर ही जीएसटी लगाया जाता था। इसमें कहा गया, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि अनाज, दालें और आटे के एक-एक पैकेट जिनका वजन 25 किलोग्राम/लीटर से अधिक है वे पहले से पैक एवं लेबल वाली वस्तुओं की श्रेणी में नहीं आएंगे, अत: इनपर जीएसटी नहीं लगेगा।’’
इसमें उदाहरण देते हुए कहा है कि खुदरा बिक्री के लिए पैकेटबंद आटे के 25 किलोग्राम के पैकेट की आूपर्ति पर जीएसटी लगेगा। हालांकि, इस तरह का 30 किलो का पैकेट जीएसटी के दायरे से बाहर होगा। यह भी बताया गया कि उस पैकेज पर जीएसटी लगेगा जिसमें कई खुदरा पैक होंगे। उसने उदाहरण दिया कि 50 किलो वाले चावल के पैकेज को पहले से पैक और लेबल वाला सामान नहीं माना जाएगा और इसपर जीएसटी नहीं लगेगा। एएमआरजी एंड एसोसिएट्स में वरिष्ठ साझेदार रजत मोहन ने कहा कि इस कर से चावल और अनाज जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुओं की मूल्य आधारित मुद्रास्फीति आज से ही बढ़ जाएगी।
नयी दिल्ली । केंद्र ने विगत पांच वर्षों में सात शहरों और नगरों के नाम बदलने को मंजूरी प्रदान की है जिनमें इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करना भी शामिल है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से प्रदेश का नाम तीनों भाषाओं-बांग्ला, अंग्रेजी और हिंदी में ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव आया है।
मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने को 15 दिसंबर, 2018 को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दिया गया।
उनके अनुसार, आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी शहर का नाम राजा महेंद्रवरम करने, झारखंड में नगर उंटारी का नाम श्री बंशीधर नगर करने को भी मंजूरी दी गई। मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश के बीरसिंहपुर पाली को मां बिरासिनी धाम, होशंगाबाद का नाम नर्मदापुरम करने और बाबई का नाम माखन नगर करने को स्वीकृति दी गई।
हल्दिया । मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इडस्ट्री ने हल्दिया में “एमसीसीआई डेस्टिनेशन हल्दिया 2022” नामक सेमिनार आयोजित किया। कठिन समय में विकास विषय पर आयोजित यह सेमिनार द्विस्तरीय एवं त्रिस्तरीय शहरों तक पहुँचने के अभियान का अंग था। सेमिनार का उद्धाटन । मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के एमएसएमई एवं टेक्सटाइल राज्य मंत्री श्रीकांत महता ने किया हल्दिया नगर पालिका के अध्यक्ष सुधांशु मण्डल और विशिष्ट अतिथि हल्दिया विकास प्राधिकरण के चेयरमैन ज्योर्तिमय कर उपस्थित थे।
सेमिनार को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री श्रीकांत महता ने हल्दिया की विकास क्षमता के बारे में बताया। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बनाए गए उद्योग अनुकूल माहौल और इस क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित करने के लिए एकल खिड़की योजना के बारे में बताया। उन्होंने हल्दिया को विकास पथ पर ले जाने के लिए उद्योग और सरकार के बीच आपसी समर्थन और सहयोग पर जोर दिया। सुधांशु मंडल ने उद्योगपतियों को हल्दिया और उसके आसपास के क्षेत्र में निवेश करने और इकाइयां स्थापित करने के लिए आगे आने के लिए आमंत्रित किया, क्योंकि इस क्षेत्र में उद्योग रखने के लिए इसका सबसे अच्छा पारिस्थितिकी तंत्र है।
ज्योतिर्मय कर ने हल्दिया में उद्योग के अनुकूल माहौल का उल्लेख किया जहां कोई हड़ताल नहीं है और न ही मानव दिवस का नुकसान होता है। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों के लिए हर संभव समर्थन का आश्वासन दिया।
सेमिनार के अन्य मुख्य वक्ताओं में पूर्व मिदनापुर के अतिरिक्त। जिला मजिस्ट्रेट, भूमि और भूमि सुधार श्री अनिर्बान कोले, हल्दिया की अतिरिक्त। पुलिस अधीक्षक श्रद्धा एन पांडे, पूर्व मिदनापुर के डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज सेंटर के जी एम गौतम साधुखान, इंडोरामा इंडिया प्रा। लिमिटेड के सीओओ चंद्र शेखर प्रसाद, एक्साइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चीफ ऑपरेशन मैनेजर टी. के. पान, और पश्चिम मिदनापुर जिला चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आनन्द गोपाल उपस्थित थे।
स्वागत भाषण में एमसीसीआई की ट्रान्सपोर्ट एवं शिपिंग की लॉजिस्टिक काउंसिल के चेयरमैन लवेश पोद्दार ने कहा कि चेम्बर हल्दिया के विकास को अगले स्तर पर ले जाने के लिए सभी महत्वपूर्ण हितधारकों के साथ हल्दिया में एक परिषद स्थापित करने की योजना बना रहा है। उन्होंने इस पहल में अधिकारियों और हितधारकों से समर्थन और सहयोग मांगा।
फोरम में सरकारी अधिकारियों, हल्दिया के कॉर्पोरेट क्षेत्र और पुरबा और पश्चिम मिदनापुर की एमएसएमई इकाइयों ने भाग लिया। सत्र का समापन एमसीसीआई के डायरेक्टर जनरल डॉ. सौगत मुखर्जी के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल में हाल ही में इंटर हाउस डिबेट आयोजित किया गया। स्कूल के 6 हाउस इस प्रतियोगिता में प्रतिभागी बने जिसका विषय था – भारत लोकतंत्र के रूप विफल रहा। हर हाउस में दो वक्ता थे जिसमें एक पक्ष और दूसरा विपक्ष में। विपक्ष में बात रखने वाली टीम को सवाल पूछने का अवसर दिया गया। प्रतियोगिता का संचालन बीएचएस के पूर्व छात्र ईशान बनर्जी ने किया। प्रतियोगिता में अशोक हाउस को सर्वश्रेष्ठ टीम का और गाँधी हाउस के सुनरित कुमार चन्दा को सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार मिला। सर्वश्रेष्ठ प्रश्न पूछने के लिए श्रृंगल भट्टाचार्य को पुरस्कार मिला।
कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में कॅरियर फेयर आयोजित किया गया। 11 एवं 12वीं कक्षा के लिए आयोजित इस कॅरियर मेले में 15 प्रख्यात कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों ने भाग लिया। इन संस्थानों में साई यूनिवर्सिटी, चेन्नई, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी. बंगलुरू, थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला, अहमदाबाद यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद, एंग्लो ईस्टर्न अकादमी, मुम्बई, वर्ल्ड यूनिवर्सिटी ऑफ डिजाइन. सोनीपत, फ्लेम्स यूनिवर्सिटी, पुणे, द एमिराट्स अकादमी ऑफ हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट, यूएई. कुलीनरी इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका, यूनिवर्सल बिजनेस स्कूल, मुम्बई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट एंड डिजाइन. नयी दिल्ली, इकोल इन्टुट लैब, जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम एवं आईएफआईएम, बंगलुरू शामिल थे। इस कॅरियर मेले में थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला के प्रोफेसर पद्मकुमार नैयर, जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी की पुष्पा जोशी एवं आईएफआईएम, बंगलुरू की दीपू कृष्णन ने विचार रखे। विद्यार्थियों ने इन संस्थानों के स्टॉल पर बहुत सारी जानकारी प्राप्त की जिससे भविषय की दिशा तय करने में उनको मदद मिली।
कोलकाता । हाल ही में रक्षक फाउंडेशन की तरफ से पैरोल पर आए कुछ कैदियों के लिए उनके बेहतर कार्य हेतु सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान पैरोल पर आए तीन कैदियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूर्व डीजीपी आईपीएस मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। वहीं संयुक्त आयुक्त आईपीएस सुजय चंदा भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता व रक्षक फाउंडेशन की तरफ से चैताली दास ने कहा कि इस प्रकार के सम्मान समारोह के आयोजित करने का हमारा मुख्य लक्ष्य इनके जीवन को बेहतर बनाने का है। जीवन में मौका भी उन्हीं को मिलता है जिनमें कुछ अच्छा करने व बनने की इच्छा होती है। उन्होंने बताया कि आजीवन कारावास काट रहे तीन दोषियों मैदुल मोल्लाह, मुक्खलेचुर रहमान मंडल और इंद्रजीत पॉल को कोरोना के दौरान पैरोल दी गई थी। उन्होंने अपने जीवन को बदलने और समाज को कुछ वापस देने का फैसला किया। रक्षक फाउंडेशन ने उन्हें जूट के क्षेत्र में अच्छा करने का मौका दिया और उन्होंने करके दिखाया भी। चैताली ने बताया कि उनकी फाउंडेशन के साथ वे 2016 से ही दमदम केंद्रीय सुधार गृह में काम कर रहे हैं। कोरोना के दौरान पैरोल मिली थी लेकिन अब जेल वापस जाने का समय आ गया है। वहीं संयुक्त आयुक्त आईपीएस सुजय चंदा ने मैदुल मोल्लाह, मुक्खलेचुर रहमान मंडल और इंद्रजीत पॉल की कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि जीवन में बेहतर होने और दुनिया को कुछ साबित करने के लिए जो उन्होंने हासिल किया है वह जीने का एक बेहतर उद्देश्य है।
कोलकाता । भारत सरकार द्वारा गठित नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम) कोलकाता के तत्वावधान में पावरग्रिड पूर्वी क्षेत्र-2 द्वारा दिनांक 15 जुलाई 2022 को “महाकवि निराला काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सुप्रियो चट्टोपाध्याय, मुख्य महाप्रबंधक (परियोजनाएं), धर्मेन्द्र कुमार ज़वेरी, मुख्य महाप्रबंधक (संपदा प्रबंधन), संजीव कुमार, महाप्रबंधक (मा.सं) कोल इंडिया व सदस्य सचिव नराकास (उपक्रम) कोलकाता, अंजन सन्याल, महाप्रबंधक (मा.सं) द्वारा दीप प्रदीपन करके किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में डॉ. संजय जायसवाल, युवा कवि व सहायक प्रोफेसर, विद्यासागर विश्वविद्यालय और डॉ विमलेश त्रिपाठी, हिंदी अधिकारी, साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स युवा कवि एवं कथाकार आमंत्रित थें।
प्रतियोगिता में कोलकाता स्थित विभिन्न पीएसयू कार्यालयों से 66 प्रतिभागियों ने, सुप्रसिद्ध संकलित व स्वरचित कविताओं की आवृत्ति की। कार्यक्रम के समापन सत्र में विनय रंजन, निदेशक (कार्मिक), कोल इंडिया व अध्यक्ष, नराकास (उपक्रम) कोलकाता ने विजेताओं को पुरस्कार व प्रमाणपत्र प्रदान करके कार्यक्रम का गौरव बढ़ाया। उन्होंने पावरग्रिड द्वारा इस प्रथम नराकास कार्यक्रम को बेहतरीन रूप से आयोजित किए जाने की सराहना की। प्रतिक्रिया सत्र में प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की प्रशंसा की। उल्लेखनीय है कि हिंदीतर भाषी वर्ग की प्रतियोगिता में पावरग्रिड के प्रतिभागी सास्वत सुंदर सुर, वरिष्ठ महाप्रबंधक (वि.व ले) ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।
महिलाओं पर समाज परिवार और देश का दायित्व रहा है। बच्चों से लेकर परिवार, संस्कृति से लेकर संस्कार, शिक्षा से लेकर अच्छे नागरिक बनाने का कार्य सब कुछ महिलाओं पर होता है। तीज-त्यौहार रीति-रिवाज परंपराओं को महिलाएँ ही आगे बढ़ाती हैं। वसंत के समान ही वर्षा भी भारतीय साहित्य में सम्मान और गौरव का स्थान पाती रही है। हर भाषा के लोक गीत हैं, वैदिक ऋषियों ने मेघों के शक्तिशाली रूप का यशोगान उल्लसित कंठ से किया है।इंद्र मेघों के शक्तिशाली अधिपति रहे। समय के साथ उनका प्रभाव असफल होता गया और इंद्र देवता की छवि में कमी आती गई और बाद में उपेंद्र देवता ने भारतवर्ष में धर्म साहित्य शिल्प संगीत और कला के क्षेत्र को छा लिया।
घनों के राजा इंद्र रंगमंच से चुपचाप हट गए और घनश्याम वहाँ डट गए। हिंदू पुराणों के अनुसार यह घटना द्वापर युग में घटी थी। भागवत पुराण में इंद्र की पूजा रोककर गोवर्धन पूजा करवाई। इंद्र ने भी बदला लेने के लिए मूसलाधार वर्षा करवाई जिससे द्युलोक से भूलोक तक जल ही जल हो गया।
श्रावण का महीना उत्सव का महीना है। मानसूनी हवाएँ वारिश लाती हैं और तपती धरती को भीगो देती हैं। नागार्जुन की पंक्तियाँ हैं –
बादल को घिरते देखा है बहुत ही प्रसिद्ध पंक्तियाँ हैं।
कन्हैयालाल सेठिया जी की पंक्तियाँ –
नीर भरी नदियाँ लहराते सागर उनमें प्यास बुझाते
किंतु गगन की एक बूंद हित चातक के नयनों में जल है।
वेदों से लेकर अभी तक न जाने कितने ही कवियों, साहित्यकारों और दार्शनिकों आदि ने वर्षा के प्रति अपने भावों को व्यक्त किया है। आषाढ़ से ही वर्षा ऋतु का आगमन हो जाता है। बंगाल में काल बैशाखी बैशाख से ही वारिश की दस्तक देने लगती है। कालिदास ने मेघदूत की रचना ही कर डाली जो विश्व में एक अनूठी और अद्भुत रचना है।
आषाढ़स्य प्रथम दिवसे मेघमाश्लिष्ट सानु ।
वप्र क्रीडा परिणत गज प्रेक्षणियम ददर्श।।
प्रथम श्लोक से ही मेघों को अपना संदेशवाहक मानते हुए अभूतपूर्व वर्णन किया है। बादल वही हैं जो प्रकृति जड़चेतन और पूरे ब्रह्माण्ड को अपनी शीतलता प्रदान करते हैं।
सावन और संगीत का अटूट रिश्ता है। सावन पर मेरी कविता को देखें – – –
मन का सावन–
सावन मन में बरसता है।
जब रस रंग और रास से मन पूर्ण होता है तो सावन होता है।
निश्छल और उन्मुक्त हँसी से चेहरा भरा हो तो सावन है।
चिंताओं की तमाम लकीरें जब पानी की तरह पारदर्शी हो जाए तो सावन है।
होठ पर जब बचपन के गीत आने लगें तो सावन है।
एक पैर से दूसरा पैर जब खेलने लगे तो सावन है।
पेड़ों की पत्तियों से गिरती बूदें जब शरीर को भिगो दें तो सावन है।
तन और मन के पोर पोर कुछ कहकर भी जब कुछ न कहें तो सावन है।
आसमान में सात रंगों का इंद्रधनुष दिखाई दे तो सावन है।
हमारे मन का मयूर जब नाचे तो सावन है।
यूँ ही तो कोई सावन नहीं मनाता है।
किसान अपनी लहलहाती फसलें देखकर झूम उठता है, तब सावन है
भारत ऋतुओं से फलता-फूलता है, त्योहार मनाता है, खुशियाँ मनाता है। तब सावन है
कोयल की कूंक जब सुनाई दे तो सावन है।
हर बच्चा वृद्ध और स्त्री के चेहरे पर सुकून हो तो सावन है
मजदूर जब त्योहार मनाए तो सावन है
कृषि के साथ कृष्ण बांसुरी बजाएं तो सावन हैं
क्रोधित वर्षा के नैनों की धारा जब बुझ जाएं तो सावन है
बाढ़ के खतरे न आएं पशु-पक्षी और मानव के जीवन सुरक्षित हों तो सावन है।
निराला कहते हैं – बादल गरजो
घेर घेर घोर गगन धाराधर ओ
ललित ललित काले घुंघराले
बाल कल्पना के से पाले
सूर तुलसी जायसी सभी ने पावस ऋतु का सुंदर सरस वर्णन किया है।
महादेवी वर्मा जी ने – – नीर भरी दुख की बदली
नागार्जुन – – मेघ बजे घन कुरंग
बादल को घिरते देखा है।
बूंदों की रिमझिम में संगीत का सरगम होता है। इस मौसम में हवा बादल पेड़ पपीहे सब झूमते गाते हुए से लगते हैं।
भक्ति संगीत और कविताओं में वर्षा ऋतु प्रकृति की सहचरी है। वर्षा मानव मन की अनुभूतियों की ही अभिव्यक्ति है।
यह उल्लास लोककंठ से बारहमासी कजरी झूलागीतों के रूपों में फूटता है। मेघ मल्हार का आदि राग कवि हृदय में भी गीत के रूप में उतरता है। सावन और संगीत का अटूट संबंध कई नवगीतों में मिलता है।
बरसात का प्रेम से चिर संबंध है। इस ऋतु में प्रणय की पुरानी स्मृतियाँ ताजा हो उठती हैं। विरह की वेदना तीव्र हो जाती है और मिलन की आतुरता बढ़ जाती है। बादलों का अत्याचार बाढ़ के रूप में तबाही भी लाता है। बाढ़ की त्रासदी के कई वर्णन मिलते हैं।
तुलसी के रामचरित मानस में सीता वियोग में राम को भी बादलों के गरजने से डर लगता है।
घन घमंड नभ गरजत घोरा,
प्रिया हीन डरपत मन मोरा।
सूर की गोपियाँ कृष्ण के वियोग में कहती हैं – –
निस दिन बरसत नैन हमारे,
सदा रहत पावस ऋतु इन पे जब से स्याम सिधारे।
कबीर की उलटवासी देखें –
बरसे कंबल भीजे पानी
कबिरा बादल प्रेम का
हम परि बरष्या आइ
अंतरि भीगी आत्मां हरि भयी बनराई
जायसी ने महाकाव्य पद्मावत में – – – नागमती की विरह की पीड़ा को इस प्रकार व्यक्त किया है। – –
चढ़ा असाढ़ गगन घन बाजा
साजा विरह दुंद दल बाजा **
सावन बरस मेह अति पानी
भरनी परिहौं बिरह झुरानी
वर्षा ऋतु सांस्कृतिक नवोन्मेष का बीजारोपण करता है।