Thursday, April 2, 2026
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डाकघर एजेंटों का भविष्य सुनिश्चित नहीं : एनएसएसएएआइ

की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग

कोलकाता: डाकघर एजेंटों का भविष्य सुनिश्चित नहीं है, केंद्र सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए, यह कहना है राष्ट्रीट अल्प बचत अभिकर्ता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पृथ्वीश भट्टाचार्य का सोमवार को कोलकाता प्रेस क्लब में संघ द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में श्री भट्टाचार्य ने एजेंटों की समस्याओं को रखते हुए 22 विभिन्न मांगों को रखा, जिन पर केंद्र सरकार को तुरंत ध्यान देने की मांग की. उन्होंने कहा कि पूरे देश में पुरुष और महिला मिलाकर कुल साढ़े पांच लाख एजेंट हैं, लेकिन इन एजेंटों को परिचय पत्र तक नहीं दिये गये हैं. बिना परिचय पत्र के काम करने के कारण चुनाव की घोषणा के समय ग्राहकों व निवेशकों के रुपये जमा करने जाने के दौरान एजेंटों को पुलिस की चेकिंग में पहचान पत्र नहीं रहने से परेशानियों को झेलना पड़ता है. वित्त मंत्रालय द्वारा हर एजेंट को जल्द से जल्द एक पहचान पत्र दिया जाना चाहिए, एजेंटों का भविष्य नहीं है, पेंशन, ग्रेच्युटी आदि की सुविधा चालू होनी चाहिए. यहीं नहीं अगर एजेंट मर जाते हैं, तो उनके परिवार को उसकी एजेंसी सौंप देना चाहिए, उन्होंने कहा कि एजेंसी के नवीनीकरण के दौरान हर तीन साल पर मांगी जानेवाली पुलिस सत्यापन रिपोर्ट को तत्काल रोक दिया जाना चाहिए, क्योंकि सरकार और लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए नियुक्त एजेंट असामाजिक या अपराधी नहीं है. उन्होंने कहा कि देश के हर डाकघरों में एजेंटों के बैठने और काम करने के लिए एक निश्चित स्थान तय किया जाना चाहिए. मौके पर एनएसएसएएआई के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार मिश्रा ने कहा कि डाकघर में अधिक समय लिंक फेल रहते है, जिस कारण एजेंटों को नुकसान उठाना पड़ता है. पहले एजेंटों का कमिशन एक प्रतिशत था, जिसे आधा कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से सभी स्तरों पर मजदूरी में वृद्धि की गयी है, हम मांग करते है कि मानकीकृत एजेंसी प्रणाली (एसएएस) एजेंट के दो प्रतिशत और महिला प्रधान क्षेत्रीय बचत योजना एजेंट (एमपीकेबीवाई) का कमिश्नपांच प्रतिशत किया जाये. एनएसएसएआई के बंगाल सर्कल के महासचिव सिंचन चटर्जी ने कहा कि एजेंटों की तमाम समस्याओं को लेकर आगामी दिन दो दिवसीय पांचवा राष्ट्रीय सम्मेलन होगा, जो हावड़ा के शरत सदन में आयोजित होगा. इस दौरान देश के 23 राज्यों से प्रतिनिधि शामिल होंगे.

बीसीसीआई ने खोली तिजोरी, दोगुनी हुई पूर्व खिलाड़ी और अंपायर्स की पेंशन

मुम्बई । इंडियन प्रीमियर लीग की मीडिया अधिकारों की नीलामी से अब तब करीब 46000 करोड़ रुपये की कमाई कर चुके भारतीय क्रिकेट बोर्ड यानी बीसीसीआई ने पूर्व क्रिकेटरों (पुरुष और महिला) और पूर्व अंपायरों की मासिक पेंशन में बढ़ोतरी की घोषणा की। प्रथम श्रेणी के खिलाड़ियों में जिन्हें पहले 15,000 रुपये मिलते थे, उन्हें अब 30,000 रुपये मिलेंगे, जबकि 37,500 रुपये पाने वाले पूर्व टेस्ट खिलाड़ियों को अब 60,000 रुपये और 50,000 रुपये पेंशन वालों को 70,000 रुपये मिलेंगे।
अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी, जिन्हें अब तक 30,000 रुपये मिलते थे उन्हें अब से 52,500 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा 2003 से पहले संन्यास लेने और 22,500 रुपये पाने वाले प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों को पेंशन के तौर पर अब 45,000 रुपये मिलेंगे।
बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा, ‘यह बेहद जरूरी है कि हम अपने पूर्व क्रिकेटरों की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखे। खिलाड़ी बोर्ड के लिए जीवन रेखा की तरह है और बोर्ड के तौर पर यह हमारी जिम्मेदारी है कि खेल से संन्यास के बाद हम उनका ख्याल रखे। अंपायर गुमनाम नायकों की तरह हैं और बीसीसीआई उनके योगदान को समझता है।’
बीसीसीआई वर्षों से अंपायरों के योगदान को महत्व देता है और यह उनके लिए आभार व्यक्त करने का एक तरीका है। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने कहा, ‘लगभग 900 कर्मियों को योजना का लाभ मिलेगा, जिसमें 75 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों को 100 प्रतिशत की वृद्धि मिलेगी।’
बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण सिंह धूमल ने कहा, ‘बीसीसीआई आज जो कुछ भी है, वह अपने पूर्व क्रिकेटरों और अंपायरों के योगदान के कारण है। हमें मासिक पेंशन में वृद्धि की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जो हमारे पूर्व क्रिकेटरों की भलाई के लिए एक संकेत होगा।’

लंबे समय तक युगल साथ-साथ पति-पत्नी की तरह रहे तो वह शादीशुदा माने जाएंगे: सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर लंबे समय तक आदमी और औरत साथ-साथ (सहजीवन) रह रहे हों तो इसे शादी की अवधारणा मानी जाएगी। यानी सालों साल अगर कपल पति-पत्नी की तरह रह रहा हो तो यह धारणा माना जाएगा कि दोनों शादीशुदा हैं। ऐसे मामले में शादीशुदा जिंदगी को नकारने वाले पर दायित्व होगा कि वह साबित करे कि शादी नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यह भी कहा कि कपल अगर लंबे समय तक साथ रहते हैं तो उनके नाजायज संतान भी उनके परिवार की संपत्ति में हिस्से का हकदार है।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अगुवाई वाली बेंच के सामने यह मामला आया था कि क्या सहजीवन में रहने वाले कपल के मामले में पर्याप्त सबूत हैं कि साबित हो सके कि वह पति-पत्नी हैं? सुप्रीम कोर्ट के सामने यह भी सवाल था कि क्या लंबे समय से साथ रहने वाले कपल के इलिजिटिमेट यानी गैर कानूनी औलाद संपत्ति में हकदार होगा? सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वैसे कपल की संतान जो बिना शादी के लंबे समय से सहजीवन में रह रहे हैं वैसे बच्चे को भी फैमिली की संपत्ति में हक होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने रेकॉर्ड्स को देखा
सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों को परीक्षण कर बताया कि दस्तावेज से साबित होता है कि महिला और पुरुष दोनों सहजीवन यानी साथ-साथ लंबे समय से पति-पत्नी की तरह रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले के जजमेंट का हवाला देकर कहा कि यह सेटल व्यवस्था है कि अगर आदमी और औरत लंबे समय से सालों साल पति-पत्नी की तरह रह रहा हो और सहजीवन में हो तो यह धारणा होगी कि वह शादीशुदा हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा-114 में शादी को नकारने वाले की जिम्मेदारी होगी कि वह साबित करे कि शादी नहीं हुई थी। पहले भी सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने इस मामले में व्यवस्था दी हुई है
पहले कोर्ट ने क्या कहा था
इस मामले में 15 जून 2019 को दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर कपल पति-पत्नी की तरह सालों से साथ रह रहे हैं तो ये धारणा माना जाएगा कि दोनों शादीशुदा हैं और महिला पत्नी की तरह गुजारा भत्ता मांग सकती है। हाई कोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे रखी है कि अगर दोनों पार्टी पति-पत्नी की तरह सालों से साथ रह रहे हैं तो महिला द्वारा सीआरपीसी की धारा-125 में गुजारा भत्ता के दावे में ये माना जाएगा कि दोनों शादीशुदा युगल हैं।
कहा था सुप्रीम कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा हुआ है कि ये तय सिद्धांत है कि अगर आदमी और औरत लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहें तो गुजारा भत्ता के दावे के मामले में दोनों धारणा के तहत पति-पत्नी माने जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में व्यवस्था दे रखी है कि पत्नी की परिभाषा के तहत माना जाएगा कि अगर कोई कपल लंबे समय तक शादीशुदा युगल की तरह यानी पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे हैं तो सीआरपीसी की धारा-125 के तहत गुजारा भत्ता का दावा के समय शादी के सबूत पेश करने का शर्त नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था है कि अगर युगल पति-पत्नी के तौर पर लंबे समय से साथ रहते हैं तो ये अनुमान व धारणा माना जाता है कि दोनों शादीशुदा युगल हैं।

कोलकाता के ट्रैफिक पुलिसकर्मी को ब्रिटिश संसद में मिलेगा ‘द प्राइड ऑफ बंगाल’ अवार्ड

अरुप मुखर्जी पुरुलिया में चलाते हैं शबर बच्चों के लिए निःशुल्क आवासीय स्कूल

कोलकाता, विशाल श्रेष्ठ। कोलकाता पुलिस के एक साधारण से ट्रैफिक पुलिसकर्मी को उनके असाधारण कार्यों के लिए ब्रिटिश संसद में ‘द प्राइड आफ बंगाल अवार्ड्स’ से सम्मानित किया जाएगा। ये हैं 47 साल के अरूप कुमार मुखर्जी। अरूप कोलकाता पुलिस के साउथ ट्रैफिक गार्ड में कांस्टेबल के पद पर हैं। अरूप वर्षों से बंगाल के पुरुलिया जिले के सबसे पिछड़े आदिवासी समुदायों में शामिल ‘शबर’ के सामाजिक उत्थान में जुटे हुए हैं। पुरुलिया में सब उन्हें ‘शबर पिता’ के नाम से जानते हैं। अरूप को आगामी 20 जुलाई को ‘हाउस आफ कामंस’ में सामाजिक कार्य एवं समुदाय समर्थन’ श्रेणी के तहत इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा और पुरुलिया के गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को ब्रिटिश संसद में मान्यता प्रदान की जाएगी। ब्रिटिश संस्था एडवाटेक फाउंडेशन की तरफ से यह पुरस्कार दिया जाता है।
अरूप पुरुलिया के पुंचा थाना इलाके के पारुई गांव में शबर समुदाय के बच्चों के लिए आवासीय स्कूल चलाते हैं, जहां उनके रहने से लेकर खाने-पीने तक की सारी व्यवस्था निश्शुल्क है। अरूप ने इस स्कूल की शुरुआत 2011 में 15 बच्चों के साथ की थी। वर्तमान में स्कूल में 125 बच्चे पढ़ते हैं।
न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात की संस्थाएं भी कर चुकी हैं सम्मानित
इससे पहले न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात की संस्थाओं की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। न्यूजीलैंड की सामाजिक संस्था की ओर से अरूप को प्रेरणादायी पुलिसकर्मी की संज्ञा देते हुए उनका नाम ‘मार्वलस बुक आफ रिकार्ड्स’ में दर्ज किया गया है। एक अमेरिकी संस्था की ओर से उन्हें सम्मानित करते हुए उनका नाम ‘हाई रेंज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड्स’ में शामिल किया गया है। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात की सामाजिक संस्था ने उन्हें ‘ब्रेवो इंटरनेशनल बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड्स’ में जगह दी है।
अरूप ने बताया-‘अंतरराष्ट्रीय सामाजिक संस्थाओं से मिल रहे सम्मान से मैं अभिभूत हूं। पुरस्कार व सम्मान से निश्चित रूप से उत्साह बढ़ता है लेकिन मैं पुरस्कार या सम्मान की चाह में काम नहीं करता बल्कि ऐसा करके मुझे आंतरिक रुप से काफी खुशी मिलती है।’ अरूप ने लाकडाउन के समय फंड जुटाकर शबर समुदाय के चार हजार परिवारों के खाने-पीने की भी व्यवस्था की थी। अरूप मूल रूप से पारुई गांव के ही रहने वाले हैं। उनके परिवार में माता-पिता, चाचा-चाची, पत्नी और एक बेटा-बेटी हैं। अरूप 2011 से कोलकाता ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत हैं।

(साभार – दैनिक जागरण)

अग्निपथ योजना : सेना भर्ती में बड़ा बदलाव, चार साल के लिए मिलेगा देश सेवा का मौका

नयी दिल्ली । रक्षा मंत्रालय ने सेना भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। सेना भर्ती के लिए सरकार की ओर से ‘अग्निपथ भर्ती योजना’ को लॉन्च किया गया है। इस मौके पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया, इसके तहत सेना में चार साल के लिए अग्निवीरों यानी युवाओं की भर्ती की जाएगी। सरकार की ओर से यह कदम सेना की औसत उम्र कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि इस समय सेना की औसत उम्र 32 साल है, जिसे अगले कुछ सालों में 26 साल करने का प्रयास किया जाएगा। यह योजना रक्षा बलों के खर्च और आयु प्रोफाइल को कम करने की दिशा में सरकार के प्रयासों का एक हिस्सा मानी जा रही है। ऐसे में बिंदुवार समझते हैं क्या है यह योजना और युवाओं को किस तरह से मिलेगा मौका?
‘अग्निपथ भर्ती योजना’ के तहत युवा चार साल की अवधि के लिए सेना में शामिल होंगे और देश की सेवा करेंगे। चार साल के अंत में लगभग 75 फीसदी सैनिकों को ड्यूटी से मुक्त कर दिया जाएगा और उन्हें आगे के रोजगार के अवसरों के लिए सशस्त्र बलों से सहायता मिलेगी। केवल 25 फीसदी जवानों को चार साल बाद भी मौका मिलेगा। हालांकि यह तभी संभव होगा जब उस समय सेना की भर्तियां निकली हों।
कई निगम ऐसे प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं के लिए नौकरी आरक्षित करने में भी रुचि लेंगे जिन्होंने देश की सेवा की है। योजना के तहत सशस्त्र बलों का युवा प्रोफाइल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। युवाओं को नई तकनीकों से प्रशिक्षित किया जाएगा।
चार साल की नौकरी छोड़ने के बाद युवाओं को सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा। जो 11.71 लाख रुपए होगा। योजना के तहत इस साल 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी।
जानें कितना मिलेगा वेतन
साल         महीनेवार वेतन  हाथ में आने वाली राशि

प्रथम वर्ष    30000               21000
दूसरे वर्ष    33000                23100
तीसरे वर्ष   36000                25580
चौथे वर्ष    40000                28000
चार साल बाद मिलेगा सेवा निधि पैकेज
वेतन से कटने वाला पैसा अग्निवीर कॉर्प्स फंड में जमा होगा। जितना पैसा अग्निवीर के वेतन से कटेगा, उतनी ही राशि सरकार भी अग्निवीर कॉर्प्स फंड में डालेगी, जो चार साल की सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीर को ब्याज सहित वापस मिलेगा। यह राशि करीब 11.71 लाख रुपये होगी, जो सेवा निधि पैकेज के रूप में मिलेगी। पूरी राशि कर मुक्त होगी।

भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रगानानंदा ने जीता नार्वे शतरंज ओपन का खिताब

स्टैवैगनर (नार्वे)। युवा भारतीय ग्रैंडमास्टर (जीएम) आर प्रज्ञानानंद नार्वे शतरंज ग्रुप ए ओपन शतरंज टूर्नामेंट के नौ दौर के मुकाबले में 7.5 अंकों के साथ विजेता बने।
शीर्ष वरीयता प्राप्त 16 वर्षीय जीएम ने शानदार लय को जारी रखते हुए पूरे टूर्नामेंट के दौरान अजेय रहे। उन्होंने शुक्रवार की देर रात साथी भारतीय अंतरराष्ट्रीय मास्टर (आईएम) वी प्रणीत पर जीत के साथ टूर्नामेंट का समापन किया। प्रज्ञानानंद (ईएलओ 2642) दूसरे स्थान पर काबिज आईएम मार्सेल एफ्रोइम्स्की (इजराइल) और आईएम जंग मिन सेओ (स्वीडन) से एक अंक आगे रहे।
प्रणीत छह अंकों के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर थे, लेकिन कम टाई-ब्रेक स्कोर के कारण आखिरी तालिका में छठे स्थान पर खिसक गये।
प्रणीत के अलावा प्रज्ञानानंद ने विक्टर मिखलेव्स्की (आठवां दौर), विटाली कुनिन (छठा दौर), मुखमदजोखिद सुयारोव (चौथा दौर), सेमेन मुतुसोव (दूसरा दौर) और माथियास उननेलैंड (पहला दौर) को शिकस्त दी। उन्होंने अपने अन्य तीन मुकाबले ड्रॉ खेले।

सिकोइया ने भारतीय स्टार्टअप, अन्य को फंड के लिए जुटाए 2.85 अरब डॉलर

नयी दिल्ली । उद्यम पूंजी फर्म सिकोइया इंडिया और सिकोइया साउथईस्ट एशिया ने एक बयान में कहा कि उसने स्टार्टअप और अन्य उपक्रमों के वित्त पोषण के लिए 2.85 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं।
इस क्षेत्र में किसी भी उद्यम पूंजी फंड द्वारा एक किश्त में जुटाई गई यह सबसे बड़ी राशि है। इसमें से दो अरब डॉलर की राशि दो फंडों के जरिए भारत के लिए जुटाई गई है, जबकि शेष 85 करोड़ डॉलर दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए हैं।
सिकोइया ने एक बयान में कहा, ‘‘सिकोइया इंडिया और सिकोइया साउथईस्ट एशिया ने मिलकर नए फंडों के जरिए 2.85 अरब डॉलर जुटाए हैं। इसमें इंडिया वेंचर एंड ग्रोथ फंड शामिल है।’’ सिकोइया ने इस क्षेत्र में पहले किए गए निवेश को तेजी से निकाला भी है और उसने इस तरह पिछले 18 महीनों में चार अरब डॉलर हासिल किए।
फर्म के पास इस क्षेत्र में 36 यूनीकॉर्न हैं, जिनमें जोमैटो, अनअकैडमी, पाइनलैब्स, बायजूस और रोजरपे शामिल हैं।

नीट-पीजी की विशेष काउंसिलिंग न कराने का सरकार का फैसला मनमाना नहीं : उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने नीट-पीजी-2021 में 1,456 सीट को भरने के लिए विशेष काउंसलिंग कराने का अनुरोध करने वाली कई याचिकाएं गत शुक्रवार को खारिज कर दी और कहा कि विशेष काउंसिलिंग न कराने का सरकार और चिकित्सा परिषद का फैसला मनमाना नहीं कहा जा सकता है।
न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे जन स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि विशेष काउंसिलिंग न कराने का सरकार और मेडिकल काउंसिलिंग कमिटी (एमसीसी) का फैसला चिकित्सा शिक्षा और जन स्वास्थ्य के हित में है।
पीठ ने कहा, ‘‘जब भारत सरकार और एमसीसी ने काउंसिलिंग का कोई भी विशेष चरण न कराने का फैसला जब सोच समझकर लिया है,तो इसे मनमाना नहीं माना जा सकता।’’ न्यायालय ने कहा कि छात्र अकादमिक सत्र के करीब एक साल और काउंसिलिंग के आठ से नौ चरणों के बाद उन खाली सीटों पर दाखिले के लिए प्रार्थना नहीं कर सकते, जिनमें से ज्यादा नॉन-क्लिनिकल हैं।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि नीट-पीजी-2021 में अखिल भारतीय कोटा के लिए विशेष ‘स्ट्रे राउन्ड’ की काउंसलिंग की सीमा होनी चाहिए और शिक्षा तथा लोगों के स्वास्थ्य से समझौता करके छात्रों को दाखिला नहीं दिया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने बुधवार को शीर्ष न्यायालय को बताया था कि उसने नीट-पीजी-21 के लिए चार चरणों की ऑनलाइन काउंसलिंग की है और वह विशेष काउंसलिंग कराकर 1,456 सीट को नहीं भर सकता है क्योंकि सॉफ्टवेयर बंद हो गया है।
उच्चतम न्यायालय ने नीट-पीजी-21 में 1450 से अधिक सीटें खाली रहने पर बुधवार को मेडिकल काउंसिलिंग समिति (एमसीसी) को फटकार लगाई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इसने न केवल उम्मीदवारों को मुश्किल में डाला है बल्कि इससे डॉक्टरों की भी कमी होगी। नीट-पीजी 2021-22 परीक्षा में बैठने वाले और अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) काउंसलिंग एवं राज्य कोटा काउंसलिंग के पहले और दूसरे चरण में भाग लेने वाले डॉक्टरों ने ये याचिकाएं दायर की थीं।
वकील तन्वी दुबे के जरिए डॉ. आस्था गोयल और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं में से एक में कहा गया है कि 18 अप्रैल को एक अधिसूचना में एमसीसी ने घोषणा की थी कि यूजी काउंसलिंग में 323 खाली सीट हैं और ये मूल्यवान सीट बर्बाद न हों, इसके लिए विशेष काउंसलिंग कराई जाएगी।
याचिका में कहा गया कि यहां यह उल्लेख करना उचित है कि एमसीसी पहले भी ऐसी प्रक्रिया का पालन करता रहा है जहां सीट बर्बाद न जाने के उद्देश्य से यूजी और पीजी के लिए विशेष काउंसलिंग कराई जाती है। हालांकि, इस साल यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

पीएम का अगले डेढ़ साल में 10 लाख लोगों की नियुक्तियों का निर्देश – पीएमओ

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों से कहा है कि वे ‘‘मिशन मोड’’ में काम करते हुये अगले डेढ़ साल में दस लाख लोगों की भर्ती करें। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। पीएमओ ने कहा कि सभी सरकारी विभागों एवं मंत्रालयों में मानव संसाधन की स्थिति की समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री का यह निर्देश आया है। बेरोजगारी के मसले पर विपक्ष की ओर से सरकार की लगातार की जा रही आलोचना के बीच प्रधानमंत्री का यह फैसला आया है। विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में खाली पड़े पदों का मुद्दा भी पिछले कुछ समय से सुर्खियों में रहा है।
पीएमओ ने ट्वीट करके कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने सभी सरकारी विभागों एवं मंत्रालयों में मानव संसाधन की स्थिति की समीक्षा की और मिशन मोड में अगले डेढ़ साल में दस लाख लोगों की भर्ती करने का निर्देश दिया।’’ वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग द्वारा वेतन व भत्तों पर जारी ताजा वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार के कुल नियमित सिविल कर्मचारियों (केंद्र शासित प्रदेशों सहित) की संख्या एक मार्च 2020 की अवधि तक 31.91 लाख थी जबकि स्वीकृत पदों की कुल संख्या 40.78 लाख थी। इस हिसाब से करीब 21.75 प्रतिशत पद रिक्त थे।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल श्रम शक्ति का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा पांच प्रमुख मंत्रालयों या विभागों के अंतर्गत आता है, इनमें रेलवे, रक्षा (सिविल), गृह कार्य, डाक और राजस्व शामिल हैं। कुल 31.33 लाख पदों की निधार्रित संख्या (संघ शासित प्रदेशों को छोड़कर) में रेलवे की हिस्सेदारी 40.55 प्रतिशत, गृह मामलों की 30.5 प्रतिशत, रक्षा (सिविल) की 12.31 प्रतिशत, डाक की 5.66 प्रतिशत, राजस्व की 3.26 प्रतिशत और अन्य मंत्रालयों व विभागों की 7.72 प्रतिशत है।
संघ शासित प्रदेशों और दूतावासों सहित केंद्र सरकार के नियमित सिविल कर्मचारियों के वेतन व भत्तों पर कुल खर्च (प्रोडक्टिविटी-लिंक्ड बोनस या तदर्थ बोनस, मानदेय, अर्जित छुट्टियों का नकदीकरण और यात्रा भत्ता को छोड़कर) वर्ष 2019-20 में 2,25,744.7 करोड़ रुपये था जबकि मार्च 2018-19 में यह आंकड़ा 2,08,960.17 करोड़ रुपये था। इस रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय सुरक्षा बलों में कुल स्वीकृत पदों 10.16 लाख के मुकाबले मार्च 2020 में 9.05 लाख कर्मचारी थे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक विभिन्न विभागों और मंत्रालयों से रिक्त पदों की विस्तृत जानकारी मांगी गयी थी, और इसकी पूरी समीक्षा करने के बाद प्रधानमंत्री ने 10 लाख लोगों की भर्ती के निर्देश दिए।
पिछले विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों ने बेरोजगारी के मुद्दे को जोरशोर से उठाया था लेकिन भाजपा ने कल्याणकारी योजनाओं और विकास के साथ हिन्दुत्व के मुद्दों को आगे रखते हुए विपक्षी आक्रमण की धार कुंद कर दी थी और सफलता हासिल की थी।
बेरोजगारी के मुद्दे पर भाजपा विपक्ष के आरोपों को लगातार यह कहकर भी खारिज करती रही है कि सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों से देश में उद्यमिता और रोजगार निर्माण को बढ़ावा मिला है।

फैशन का शिक्षाशास्त्र

निशा सिंह (फैशन डिजाइनर एवं उद्यमी)

फैशन में आप दुनिया को देखने और अचंभित करने के लिए कुछ बना रहे हैं। आपको अपनी रचनात्मकता को बाहर लाना होगा और जादू बनाने के लिए इसे दुनिया के विकास के साथ जोड़ना होगा यह उपभोक्ताओं, प्रवृत्तियों, रंग, वस्त्र, व्यवसाय, विज्ञापन और यहां तक ​​कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समझने से आता है।

फैशन कल को समझने, आज जीने और आने वाले कल के लिए बनाने के बारे में है। दूध, मक्का, प्लास्टिक और क्रिस्टल से नए रेशे और वस्त्र बनाने की कल्पना करें। ब्लॉगऔर पॉडकास्ट बनाना जो लोगों के सोचने के तरीके को बदल देगा। लोग क्या खरीदने जा रहे हैं, इसका अनुमान लगाने के लिए किसी परिधान या एआई के आवरण में प्रौद्योगिकी को एम्बेड करने के लिए कोडिंग का उपयोग करना।
फैशन उद्योग में फैशन ब्लॉगर, ब्लॉग, सामग्री निर्माता, क्यूरेटर, अनुभव प्रबंधक, फैशन स्टाइलिस्ट, रचनात्मक निर्देशक, फोटोग्राफर, संपादकीय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रबंधक, होम स्टाइलिस्ट, और बहुत कुछ शामिल हो गए हैं, इसलिए विकास की बहुत बड़ी संभावना है। फैशन और स्टाइल संचार के शक्तिशाली तरीके हैं।

आज, एक डिजाइनर या स्टाइलिस्ट के पास बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने की शक्ति है। डिजाइनरों द्वारा स्थिरता, उपभोग, लिंग, आजीविका और सामाजिक मानदंडों जैसे मुद्दों को तेजी से उठाया जा रहा है और वे जागरूकता और परिवर्तन पैदा करने के लिए अपने पेशे का उपयोग करते हैं। तो परिवर्तन बनो!