Thursday, July 9, 2026
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भवानीपुर 75 पल्ली में खूंटी पूजा के साथ ही पूजा की तैयारियाँ आरम्भ

कोलकाता । दुर्गापूजा अब आने ही वाली है। भवानीपुर 75 पल्ली ने खूंटी पूजा के साथ ही दुर्गा पूजा की तैयारी आरम्भ कर दी है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कोलकाता के मेयर सह राज्य के परिवहन, शहरी विकास, निगम मामलों एवं आवास मंत्री फिरहाद हकीम, कृषि मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय, विधायक देवाशीष कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता कार्तिक बनर्जी, पार्षद पापिया सिंह, पार्षद संदीप रंजन बक्सी समेत अन्य लोग उपस्थित थे। यह पूजा कमेटी का 58वां वर्ष है। क्लब के सचिव सुबीर दास ने कहा कि इस साल यूनेस्को से दुर्गा पूजा को मिली मान्यता और स्वीकृति का उत्सव मनाया जाएगा। कोविड से जुड़ी सावधानियों को देखते हुए इस बार भी बहुत अधिक लोगों को मंडप में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। हर साल की तरह इस बार भी सामाजिक सेवा से जुड़े कार्य जैसे -रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण, कम्बल वितरण जैसे कार्य किये जाएंगे।

द्रौपदी मूर्मू को राष्ट्रपति पद बनने पर बधाई

कोलकाता । देश की 15वीं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बनने वाली द्रौपदी मूर्मु को हर ओर से शुभकामनाएं मिल रही हैं। मर्चेन्ट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ऋषभ सी. कोठारी ने भारत की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने पर बधाई दी है। चेम्बर ने कहा है कि आदिवासी समुदाय को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र के साथ सर्वोच्च पदों पर भी लाये जाने की जरूरत है। देश ने सपनों के लिए परिवेश तैयार किया है और राष्ट्रपति के रूप द्रौपदी मुर्मू का निर्वाचन परिवर्तन और गर्व का क्षण है।
वहीं एसोचेम ने कहा है कि यह निर्वाचन देश के आम आदमी को मजबूत करेगा। द्रौपदी मुर्मू ने अपनी साधारण जीवन शैली, राष्ट्रसेवा और सादगी से यह सफलता प्राप्त की है। यह करोड़ों भारतवासियों को विश्वास दिलाता है कि असम्भव कुछ भी नहीं। एसोचेम के अध्यक्ष सुमन्त सिन्हा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बधाई देते हुए कहा कि यह देश के लोकतंत्र के लिए गर्व का विषय है। बधाई सन्देश में एसोचेम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि द्रौपदी मुर्मू का निर्वाचन भारतीय लोकतंत्र की शक्ति को प्रदर्शित करता है। उन्होंने असंख्य भारतीयों को प्रेरित किया है। एसोचेम उनके मार्गदर्शन में कार्य करने के लिए तत्पर है।

द हेरिटेज स्कूल के विद्यार्थियों ने आईएससी परीक्षा में प्राप्त किए 99 प्रतिशत

कोलकाता । द हेरिटेज स्कूल, कोलकाता के विद्यार्थियों ने 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किया है। परिणाम गत 24 जुलाई को घोषित किए गए। लगभग 53 विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत और उससे अधिक अंक प्राप्त किए। अन्य 59 विद्यार्थियों ने 90 से 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किये। साइंस संकाय सो कृष सराफ एवं रूपकथा राय तथा ह्य़ूमैनिटीज की समृद्धि सरकार ने 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। कॉमर्स के समर्थ जायसवाल एवं राघव झुनझुनवाला ने 98.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ पी. के. अग्रवाल ने सभी सफल परीक्षार्थियों को बधाई दी। द हेरिटेज स्कूल की प्रिंसिपल सीमा सप्रू ने कहा कि विद्यार्थियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। मेरा विश्वास था कि वे हमें इस बार भी गर्वान्वित करेंगे।

बोर्ड परीक्षाओं में सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की छात्राओं का सराहनीय प्रदर्शन

कोलकाता । सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने सराहनीय प्रदर्शन किया। सीबीएसई की बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में स्कूल का परिणाम 87.60 प्रतिशत रहा। स्कूल में कॉमर्स की वनीशा खेमका ने 98.80 प्रतिशत अंक पाकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान पर संयुक्त रूप से 98.60 प्रतिशत अंक पाकर कॉमर्स की मंजरी बागड़ी, भूमि कुमारी और तेजल चांडक रहीं। तीसरे स्थान पर ह्यूमैनिटीज की आंकाक्षा केडिया रही जिसे 98.40 प्रतिशत अंक मिले।
साइंस में गरिमा सेकसरिया (97.8 प्रतिशत) प्रथम, शारन्या बसाक (97.2 प्रतिशत) द्वितीय, स्वाति अग्रवाल (96.8 प्रतिशत) तृतीय रहीं।
कॉमर्स में स्कूल टॉपर वनीशा खेमका 98.8 प्रतिशत अंक पाकर सबसे आगे रही। द्वितीय स्थान पर 98.6 प्रतिशत अंक पाकर मंजरी बागड़ी, भूमि कुमारी और तेजल चांडक रहीं। तीसरे स्थान पर राजवी अग्रवाल, ऋषिका कायन, स्तुति सराफ संयुक्त रूप से रहीं और इनको 98.2 प्रतिशत अंक मिले।
ह्यूमैनिटीज में 98.4 प्रतिशत अंक पाकर आकांक्षा केडिया अव्वल रही। दूसरे स्थान पर तस्मिता भौमिक (96.8 प्रतिशत) और तीसरे स्थान पर प्राची जोशी (96.2 प्रतिशत) रहीं।
परीक्षा में बिजनेस स्टडीज में 14, अकाउंटेंसी में 5, ऑन्ट्रोप्रेनियरशिप में 5, साइकोलॉजी में 4, इकोनॉमिक्स में 3, मैथेमेटिक्स में 2, पॉलिटिकल साइंस में 1 और इन्फॉरमेटिक्स प्रैक्टिसेज में 1 छात्रा को शत – प्रतिशत अंक मिले।

सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में बीएचएस के शानदार नतीजे

कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल ने बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया है। दसवीं और बारहवीं, दोनों ही बोर्ड परीक्षाओं में स्कूल के शत – प्रतिशत परीक्षार्थी सफल रहे। दसवीं में 185 और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में 221 परीक्षार्थी बैठे थे।
दसवीं की बोर्ड परीक्षा में इस शिक्षण संस्थान से 185 विद्यार्थी बैठे और सभी फर्स्ट डिविजन से उत्तीर्ण रहे। 103 परीक्षार्थियों को 90 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। 163 परीक्षार्थियों को 80 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। 183 परीक्षार्थियों को 70 प्रतिशत और उससे अधिक अंक मिले। स्कूल का परीक्षाफल 88.85 प्रतिशत रहा। दो विद्यार्थियों. अक्षत जैन और श्रृंजय सेन ने 98.4 प्रतिशत यानी 492 अंक पाकर संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर राम दफ्तरी (98 प्रतिशत) और तीसरे स्थान रक देवेश कोन्नुर (97.8 प्रतिशत) रहे। 13 परीक्षार्थियों को अंग्रेजी में, 7 परीक्षार्थियों को गणित में, 10 परीक्षार्थियों को सोशल साइंस में एवं 6 परीक्षार्थियों को साइंस में शत -प्रतिशत अंक मिले। 36 परीक्षार्थियों को परफेक्ट स्कोर मिला।
दूसरी तरफ बारहवीं की परीक्षा में गणित में 5. फिजिक्स में 1. केमेस्ट्री में 3, बायोलॉजी में 2, अकाउंटेंसी में 4, इकोनॉमिक्स में 3, बिजनेस स्टडीज में 7, आन्ट्रोप्रेनियरशिप में 3, पॉलिटिकल साइंस में 1, साइकोलॉजी में 1, कम्प्यूटर साइंस में 3 यानी कुल 33 परीक्षार्थियों को शत – प्रतिशत अंक मिले।
अंगद रायत (साइंस) ने 493 (98.6 प्रतिशत) अंक पाकर स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर कॉमर्स का अमन बागड़िया रहा जिसे 492 (98.4 प्रतिशत) अंक मिले। संयुक्त रूप से 490 (98 प्रतिशत) अंक पाकर सूर्यम गोयनका (कॉमर्स) और अर्कप्रभ पात्र (साइंस) तीसरे स्थान पर रहे।
कॉमर्स में अमन बागड़िया (98.4 प्रतिशत) प्रथम, सूर्यम गोयनका (98 प्रतिशत) द्वितीय और हीत सिंघी (97.8) तीसरे स्थान पर रहे।
साइंस में 98.6 अंक पाकर अंगद रायत प्रथम, 98 प्रतिशत अंक पाकर अर्कप्रभ पात्र द्वितीय, 97.6 प्रतिशत अंक पाकर नक्षत पांडेय तीसरे स्थान पर रहे।
ह्यूमैनिटीज में 96.2 प्रतिशत अंक पाने वाला शौर्य सौरभ प्रथम रहा। द्वितीय स्थान पर संयुक्त रूप से 95.4 प्रतिशत अंक पाकर मेघ मुखर्जी एवं अनुभव दास ने जगह बनायी। 93.8 प्रतिशत अंक पाकर ऋत्विक भौमिक तीसरे स्थान पर रहा।

माँ की मौत के बाद पिता ने छोड़ा, नानी के यहां रहकर पढ़ी श्रीजा बनी राज्य टॉपर

पटना । प्रतिभा कभी सुविधाओं की मोहताज नहीं होती है। इस कहावत को एक बार फिर सही साबित किया है, बिहार की बेटी श्रीजा ने। वैसे तो बिहार हमेशा अपनी असाधारण सफलता की कहानियों के लिए जाना जाता है। गत शुक्रवार, 22 जुलाई को सीबीएसई परिणाम 2022 की घोषणा के साथ, बिहार के इतिहास के पन्नों में एक और कहानी जुड़ गई है।

10वीं के परिणाम में 99.4 प्रतिशत अंक किए हासिल

कक्षा 10वीं की छात्रा श्रीजा, जिसे पाच साल की उम्र में मां की मृत्यु के बाद पिता ने छोड़ दिया और उसे छोटी बहन के साथ ननिहाल जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। आज वही श्रीजा, सीबीएसई कक्षा 10वीं के परिणाम में 99.4% अंक हासिल करने के बाद बिहार की स्टेट टॉपर बनकर इतिहास रच चुकी है। टॉपर बनने के बाद से ही श्रीजा सुर्खियों में है। भाजपा सांसद वरूण गांधी ने भी सोशल मीडिया पर श्रीजा को बधई देते हुए लिखा, त्याग और समर्पण की अद्भुत दास्तां! मां का साया हटने पर पिता ने जिस बेटी का साथ छोड़ दिया उसने नाना-नानी के घर परिश्रम की पराकाष्ठा कर इतिहास रच दिया। गांधी ने लिखा कि बिटिया का 10वीं में 99.4 फीसदी अंक लाना बताता है कि प्रतिभा अवसरों की मोहताज नहीं है। उन्होंने लिखा कि मैं आपके किसी भी काम आ सकूं, मेरा सौभाग्य होगा।

पिता ने कर ली थी दूसरी शादी कर ली

जब से उसकी मां की मृत्यु हुई, उसके नाना-नानी और मामा ने उसकी देखभाल की। जबकि पिता ने दूसरी शादी कर ली और कभी उनसे संपर्क करने की भी कोशिश नहीं की। अब इस उपलब्धि के साथ, बिहार स्टेट टॉपर की पूरे भारत में सराहना हो रही है। उसकी सफलता इतनी बड़ी है कि पिता अपनी बेटियों से बात करने के लिए मजबूर और लालायित हो रहा है।
आईआईटी, मद्रास से पढ़ने की चाहत

मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में श्रीजा की नानी ने कहा, आज हम बहुत खुश हैं, क्योंकि मेरी पोती मशहूर हो गई है। अपना नाम रोशन कर लिया है। अब जब श्रीजा के पिता ने यह खबर सुनी होगी तो उसको लगा होगा कि उसने बच्चों को छोड़कर कितना गलत किया था। श्रीजा होनहार है और आगे चलकर आईआईटी, मद्रास से पढ़ाई करना चाहती है। हम उसकी यह इच्छा भी पूरी करवाएंगे।

सीबीएसई की 12वीं के नतीजे 98.83 प्रतिशत, तान्या रही अव्वल

 नयी दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के लिए सीबीएसई परिणाम 2022 जारी कर दिया है।  परीक्षार्थियों ने  छात्र अपने खातों में लॉग इन करके डिजिलॉकर पर सीबीएसई परिणाम ऑनलाइन भी देखा।  नवोदय विद्यालय के 98.93 फीसदी परीक्षार्थी सफल रहे।

लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारी है। इस साल कुल पास प्रतिशत 92.71 फीसदी रहा है। केंद्रीय विद्यालय के छात्रों का परिणाम 97.04 फीसदी रहा है। 92.71 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं, सीबीएसई के परिणाम में बुलंदशहर के दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) की तान्या सिंह ने परचम फहराया है। तान्या ने 500 में से 500 अंक हासिल किए हैं। परीक्षा परिणाम जारी होते ही विद्यार्थी खुशी से झूम उठे।

500 में से बिना एक भी अंक गंवाए पूरे अंक हासिल करके उन्होंने अपने दोस्तों व परिजनों सहित सबको अपनी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए हैरान कर दिया लेकिन इस बीच कुछ ऐसा भी है जो तान्या सिंह के इस शानदार परिणाम से बढ़कर है और वह है-उनका पक्का इरादा।

टॉपर तान्या के दृढ़ निश्चय की गूंज सोशल मीडिया खूब सुनने को मिल रही है और इंटरनेट पर वायरल एक फोटो सबको हैरान कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार कागज पर दिख रही लिखावट खुद तान्या की है जो उन्होंंने साल 2020 में ही एक सफेद कोरे कागज पर दर्ज की थी। दरअसल पक्के इरादे वाली इस लड़की ने दो साल पहले ही लिख दिया था कि वह साल 2022 में 12वीं की सीबीएसई टॉपर बनेंगी।

‘2027 में यूपीएससी परीक्षा टॉप करूंगी’
इतना ही नहीं इस कागज पर तान्या के भविष्य के इरादे की झलक भी साफ तौर पर देखने को मिल रही है, जिसमें लिखा है वह साल 2027 में आईएएस जैसी सिविल सेवा भर्ती के लिए होने वाली यूपीएससी परीक्षा को भी टॉप करने का इरादा रखती हैं। कक्षा 12वीं के रिजल्ट में तान्या की सफलता को देखकर लोग उन्हें साल 2027 में यूपीएसई रिजल्ट को लेकर भी शुभकामनाएं देते हुए हौसला बढ़ा रहे हैं।

मैं उस भारत से आता हूँ

-पीयूष

मैं उस भारत से आता हूं, जिसके गुण मै गाता हूं,
ऋषियों की यज्ञ स्थली है जो, वीरों की पुण्य स्थली है जो,
शबरी के बेर खाकर जो, जात – पात भूलता है;
मैं उस भारत से आता हूं।

महाराणा जैसे वीरों का यश , जहां गया जाता है,
और हवाओं के द्वारा जहां मौसम पहचाना जाता है,
मैं उस भारत से आता हूं, जिसके गुण मै गाता हूं।

पूरी धरा पर सबसे ज्यादा जो सदाचार निभाता है,
समर भूमि में शत्रु को भी अपनी विनय दिखता है,
मैं उस भारत से आता हूं, जिसके गुण मै गाता हूं।

अपनों की क्या बात करें,जो गैरो को भी अपनाता है,
आदर्शों में सबसे उत्तम, वसुधैव कटुंबकम् हमें सिखाता है,
मैं उस भारत से आता हूं, जिसके गुण मै गाता हूं।

स्त्रियों के सम्मान में जो,सदा शीश झुकाता है,
पांडवो की पत्नी को भी, देवी कहकर बुलाता है,
मैं उस भारत से आता हूं, जिसके गुण मै गाता हूं।

शक्ति इसकी अथाह गगन, किन्तु धैर्य का पाठ पढ़ता है,
और जहां देवों से बढ़कर, गुरु को माना जाता है,
मै उस भारत से आता हूं, जिसके गुण मै गाता हूं।

विपदा कितनी भी आईं हो, जो अडिग खड़ा रह जाता है,
शरणागति मै आए हुए,रिपु को भी अपनाता है,
मै उस भारत से आता हूं, जिसके गुण मै गाता हूं।

माता – पिता की सेवा करना, जहां परम धर्म कहलाता है,
तीनो लोकों का होकर स्वामी,जो पिता का वचन निभाता है,
मैं उस भारत से आता हूं ,जिसके गुण मै गाता हूं।

जिसके गुण सनातन कल से, गाए जाते है,
बच्चे – बच्चे को सारे आदर्श, जहां सिखाए जाते है,
मैं उस भारत से आता हूं, जिसके गुण मै गाता हूं।

 


 

शहीद- ए – आजम

 

इंकलाब की शान थे,
संग्राम – ए – स्वंत्रता की जान थे,
अन्याय के लिए तूफान थे,
ऐसे हमारे भगत वीर जवान थे;

देश के लिए हंसते – हंसते,
जिसने प्राण गवाए थे,
अन्याय के लिए बनकर शूल,
अंगारे जिन्होंने जलाए थे;

अंग्रेज़ हुकमत के सामने,
जिसने क्रांति का शास्त्र उठाया था,
तब जाकर ‘ शहीद – ए – आजम ‘,
का नाम उन्होंने पाया था;

एक समान दृष्टि से सबको,
देखना जिन्हें प्यारा है,
भारत मां के ऐसे लाल के चरणों में;
शत् – शत् नमन हमारा है।

 

युवा मन की चाह

-नेहा जायसवाल

है ज़िद
है ज़िद, है ज़िद
कुछ करने की, कुछ बनने की।
है ज़िद, है ज़िद
उन उम्मीदों पर खरा उतरने की।।
है ज़िद, है ज़िद
आसमान को छूने की ।
है ज़िद, है ज़िद
उसकी असीमता को पहचानने की।।
है ज़िद, है ज़िद
जल बनने की, स्थल बनने की ।
है ज़िद,है ज़िद
जल के समान रंगहीन बनने की
स्थल के समान सुपथ प्रदर्शक बनने की ।।
है ज़िद,है ज़िद
समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने की।
है ज़िद,है ज़िद
उन इच्छाओं को सीमित रखने की ।।

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रोज़गार की चाहत

खाली कंधों पर थोड़ा सा भार चाहिए, बेरोजगार हूं साहब रोजगार चाहिए।

जेब में पैसे नहीं है डिग्री लिए फिरती हूं,
दिनोदिन अपनी ही नजरों में गिरती हूं।
कामयाबी के घर में खुले किवाड़ चाहिए, बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।

प्रतिभा की कमी नहीं है भारत की सड़कों पर ,
दुनिया बदल देंगे भरोसा करो इन युवतियों पर।
लिखते-लिखते मेरी कलम तक घिस गई,
नौकरी कैसे मिले जब नौकरी ही बिक गई।
नौकरी की प्रक्रिया में अब सुधार चाहिए,
बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।

दिन रात करके मेहनत बहुत करती हूं,
सूखी रोटी खाकर ही चैन से पेट भरती हूं।
भ्रष्टाचार से लोग खूब नौकरी पा रहे हैं,
रिश्वत की कमाई खूब मजे में खा रहे हैं।
नौकरी पाने के लिए यहां जुगाड़ चाहिए,
बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए।।

साहित्यिकी में लेखिका रेणु गौरिसरिया और प्रमिला धूपिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर की चर्चा

कोलकाता ।  साहित्यिकी संस्था द्वारा वर्चुअल गोष्ठी में संस्था की वरिष्ठ लेखिका रेणु गौरीसरिया और प्रमिला धूपिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर परिचर्चा का आयोजन किया गया ।दोनों का ही जन्म 1941 का है और दोनों ही बालिका शिक्षा सदन विद्यालय की छात्रा रही हैं। प्रमुख वक्ताओं में गीता दूबे और कुसुम जैन ने क्रमशः रेणु गौरिसरिया और प्रमिला धूपिया की साहित्यिक यात्रा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार व्यक्त किए ।
कथाकार और साहित्यकार रेणु गौरीसरिया के जीवन यात्रा पर गीता दूबे ने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि रेणु जी बालिका शिक्षा सदन में प्रसिद्ध कथाकार मन्नू भंडारी की शिष्या और साहित्य मर्मज्ञ रहीं। साथ में एक लोकप्रिय शिक्षिका भी रहीं। उनके जीवन के संघर्षों और दुखों को कभी भी हाईलाइट न करते हुए सकारात्मक ऊर्जा सोच से अपने अस्सी वर्ष में आज भी ऊर्जा से भरी हुई हैं। बताया कि रेणु जी की हिंदी आत्मकथा ‘जकारिया स्ट्रीट से मेफेयर तक’ का अब द्वितीय संस्करण आ रहा है और बांग्ला में भी अनुवाद हो रहा है। रेणु जी के आलेख ‘समस्या’ को साहित्यिकी की वरिष्ठ सदस्या मीना चतुर्वेदी ने पढ़ा।
रेणु गौरीसरिया ने अपने वक्तव्य में संस्था को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें जीवन के हर मोड़ पर प्रेम मिला। पुस्तकें पढ़ना, फिल्म, नाटक आदि देखना रुचि रही है और हंँसते रहना ही जीवन का मूलमंत्र माना है, रोना कोई नहीं सुनता। लेखिका प्रकृति से सौम्य हैं और जीवंतता इनके जीवन के महत्वपूर्ण अंग है। उनकी अनुभूतियों को उनकी रचनाओं में पढ़ा जा सकता है। बीस जुलाई 2022 को हुई इस गोष्ठी में मीना चतुर्वेदी ने रेणु के आलेख ‘समस्या’ का पाठ बहुत ही भावपूर्ण होकर किया जो बहुत ही सहज और प्रभावी रचना है। रेणु गौरीसरिया ने अपने वक्तव्य में अपने जीवन के अनुभवों को साझा किया।स्कॉटिश चर्च कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष और साहित्यकार गीता दूबे ने रेणु गौरीसरिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि वे एक शिक्षिका होने के साथ-साथ एक सफल लेखिका हैं। इस अवसर पर उषा श्राफ और पूनम पाठक ने प्रश्न भी किए जो रेणु जी के जीवन के दुखों और अच्छी शिक्षिका कैसे बनें से संबंधित रहे।
साहित्यिकी की दूसरी वरिष्ठ सदस्या प्रमिला धूपिया रानी जीजी के रूप में लोकप्रिय हैं। जिनकी कविता ‘स्वागत है स्वर्ग में तुम्हारा ‘का पाठ बबीता माँधणा ने किया। माँधणा ने स्वरचित दोहे के साथ दोनों लेखिकाओं के गुणों और विशेषताओं का वर्णन किया। प्रमिला जी ने बताया कि संस्था की निदेशक कुसुम जैन की प्रेरणा से उन्होंने लिखना शुरू किया। विशारद प्रमिला जी भी बालिका शिक्षा सदन में मन्नू भंडारी जी की शिष्या रहीं और वहीं से पढ़ने-लिखने लिखने की रुचि विकसित हुई।
कुसुम जैन ने प्रमिला धूपिया के साथ अपने पचास वर्षों की यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि संयुक्त परिवार की परंपरा और पुरुष प्रधान संस्कृति में एक सशक्त महिला के रूप में अपने को प्रतिष्ठित करते हुए प्रमिला यानी रानी जीजी को एक सशक्त व्यक्तित्व की मलिका बताया। समझौता और प्रतिरोध दोनों ही उनके व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण पहलू हैं। उनके प्रगतिशील विचारों से भरे लेखन पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रमिला धूपिया ने कहा कि मेरे लेखन पर इस तरह की चर्चा करने के लिए संस्था को धन्यवाद देती हूँ अपने जीवन में आए अच्छे शिक्षकों मन्नू भंडारी और रमेश सर के संस्कार और पढ़ने की रुचि को महत्वपूर्ण बताया।
अध्यक्षता करते हुए भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज की हिंदी व्याख्याता डॉ वसुंधरा मिश्र ने वरिष्ठ लेखिकाओं की रचनाधर्मिता पर अपने महत्वपूर्ण विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान संदर्भ में रेणु गौरीसरिया और प्रमिला धूपिया के व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों ही प्रेरित करने वाले हैं। दोनों ही अपने – अपने जीवन में
एक संपूर्ण महिला हैं । अस्सी की उम्र में रेणु जी का लेखन अभी भी अपनी ऊंँचाइयों को छू रहा है और प्रमिला धूपिया की जीवन शैली, अनुशासन, संकल्प और आदर्शों को लेकर परिवार, समाज और संस्कृति की विरासत के रूप में सभी को प्रेरित करता है। अनुभूति जब लेखन में उतरती है तो वह सृजन बन समष्टि से जुड़ जाती है।
कार्यक्रम का संयोजन व संचालन वरिष्ठ सदस्या डॉ सुषमा हंस ने किया। संस्था की सचिव डॉ मंजु रानी गुप्ता ने कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी का स्वागत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। अंत में, डॉ वसुंधरा मिश्र ने सभी सदस्याओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम लेखन को बढ़ावा देते हैं और साहित्यिकी कई महत्वपूर्ण लेखिकाओं से समय-समय पर रूबरू कराती रहती है जिससे दूसरे लेखकों को प्रेरणा मिलती है। इस प्रकार की साहित्यिक परिचर्चा से विचारों का आदान-प्रदान होने के साथ-साथ लेखन और पाठक समृद्ध होता है। तकनीकी सहयोग दिया नुपूर अशोक ने। कार्यक्रम में साहित्यिकी संस्था की सदस्याओं की अच्छी-खासी उपस्थिति रही।